शुक्रवार, 29 जून 2018

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)
वैसे तो कलाकारों को एकाएक गुस्सा नहीं आता, लेकिन जब आता है तो बहुत आता है। जंहागीर के शो की खबरों को लेकर शुरूआती सन्नाटे के बाद अब अनेक कलकारों में साहस का संचार हुआ है और वे खुलकर अकादमी पदाधिकारियों की मनमानी के खिलाफ अपनी बात कह रहे हैं। कला जगत के सोशल मीडिया पर भी राजस्थान 147 के नाम पर हुई धांधलियों को लेकर कलाकार अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि अनेक सयाने कलाकार स्वयं के नफे-नुक्सान का हिसाब लगाते हुए आयोजन के सकारात्मक पहलू की बात पर खुद को तटस्थ दर्शाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ नया करने के नाम पर अपनों को रेवडिय़ां बांटे जाने की कलई खुलने के बाद क्रोधित कलाकारों का पारा सातवें आसमान पर है।
अपने बूते पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवलसिंह चौहान सबसे पहले सबसे दमदार तरीके से सामने आए उसके बाद प्रतिष्ठित कलाकार हितेन्द्र सिंह भाटी ने आवाज बुलंद की, फिर डा. रीता प्रताप और रघुनाथ जी जैसे गंभीर कलाकारों ने अपनी बात खुलकर कही। मयंक शर्मा, मोहन जांगीड़, हंसराज कुमावत और ऐसे अनेकानेक कलाकारों ने अपने गंभीर विचार सामने रखे। इसके बाद उन मजबूत कलाकारों ने चौंकाया जो 147 के लिए होने के बावजूद असंतुष्ट  कलाकारों के समर्थन में खड़े हो गए। सभी ने बहुत अहम बातें सामने रखी, इनकी बातों को यहां चलते रास्ते लिख देना पाठकों के प्रति अन्याय होगा। इसलिए अगले लेख में  शीघ्र  ही आप इन जैसे बहुत से बिंदास कलाकारों के विचारों से रूबरू होंगे।
कला जगत में मूमल की निर्भीक रिपोर्टिंग के चलते सबसे पहले यह बात सामने आई कि चयन सूची बहुत गोपनीय तरीके सें तैयार हो रही है। उसमें चल रही जोड़-तोड़ के चलते उसे अंतिम रूप दिए जाने में देर हो रही है। रेवडिय़ां बाटने में जुटे अकादमी के कर्ताधर्ताओं को इस बात का पूरा अंदेशा था कि सूची अगर जयपुर में ही आउट हो गई तो कला जगत के असंतोष को संभालना कठिन हो जाएगा। ऐसे में पूर्व नियोजित देरी को कारण बताते हुए यहां होने वाले शो के प्रिव्यू को रद्द कर दिया गया।
अधिकारियों के मुंबई रवाना होने से पूर्व कैटलॉग छपकर आ गए, लेकिन उसे यह कहकर दबाए रखा गया कि शो से पहले कैटलॉग जारी नहीं किए जा सकते। हालांकि अकादमी अधिकारियों की ओर से संभावित हरी झंड़ी दिखाए जाने के बाद चयनित कलाकार हरकत में आ गए थे। यह कलाकार स्थानीय अखबारों में स्वयं के चयनित होने की खबरें प्रकाशित कराने लगे थे। इन कलाकारों और अन्य सूत्रों से जानकारियां एकत्र करने का कठिन कार्य पूरा करके मूमल ने अपने न्यूज पोर्टल पर सबसे पहले सूची प्रकाशित कर दी। समय की कमी के चलते मूमल ने सूची की समीक्षा का काम अपने सुधि पाठकों के सुपुर्द कर दिया।
कुछ ही समय बाद कलाकारों में असंतोष उभरने लगा और राजस्थान 147 के आयोजन की स्क्रिप्ट लिखने वाले डिजायनर कलाकारों के हाथ-पांव फूलने लगे। यह बताने की कोशिश होने लगी कि सब कुछ ठीक-ठाक है। लेकिन, ऐसा था नहीं। अकादमी के अधिकारियों ने कहा कि 147 में सभी का सिलेक्शन तो संभव है नहीं। चयन का आधार पूछे जाने पर बताया गया कि यह सब चयन समिति के अधिकार क्षेत्र की बात है। सवाल बहुत से थे, लेकिन सभी के जवाब गोलमोल थे।
हालात को देखते हुए आयोजन के स्क्रिप्ट रायटर और दरबारी कलाकारों ने कर्ता-धर्ताओं को सुझाव दिया कि जयपुर के स्थानीय अखबारों के अपने पत्रकारों से अपने अनुरूप खबरे छपवा लो। फाइलों में तो केवल उन्हें ही लगाना है। इसका परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। मजे की बात यह रही कि खबरों में दिए जाने वाले कलाकारों के चुनिंदा नाम भी वह थे जो मठाधीशों के सबसे करीब हैं। इनमें वे भी शामिल हैं जिनकी प्रभावशाली कला के चलते यह करीबियां पिछले कला मेले के बाद से ही देखी जा रही हैं।
अनेक कलाकारों ने अकादमी अधिकारियों की निरंकुशता और मनमानी को लेकर संबंधित उच्चाधिकारियों, संस्कृति मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक जानकारी पहुंचाने का विचार व्यक्त किया है। हो सकता है कि आपको यह पता नहीं हो कि सरकार केवल स्थानीय अखबारों के समाचारों को सहेज कर ही संतुष्ट नहीं हो जाती। अपनी विश्वस्तनीयता के चलते मूमल अपने न्यूज पोर्टल के जरिए प्रदेश के अनेक उच्चाधिकारियों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कार्यालय व आवास तक पहुंचता है और संबंधित लोगों द्वारा ध्यान से देखा और पढ़ा जाता है। मूमल के पुराने पाठक इसके प्रभाव से परिचित भी हैं। पर यहां सवाल शिकायत का नहीं व्यवस्था को सुधारने का है। प्रथम चरण में उसी पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

चण्डीगढ़ में आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन

चण्डीगढ़ में आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन
अब आर्ट टीचर्स के बीच होगा कॉम्पीटीशन
कृतियों का चयन किया दिल्ली व जम्मू के कलाकारों ने
10 जुलाई से लगेगी प्रदर्शनी
मूमल नेटवर्क, चंडीगढ़। चंडीगढ़ ललित कला अकादमी ने पहली आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन करवाने की पहल की है। यह पहल कला की शिक्षा देने वाले टीचर्स काी सराहना के तौर पर की जा रही है। इस एग्जिबीशन में ट्राईसिटी के केवल आर्ट टीचर्स ही हिस्सा लेंगे। पहली बार आयोजित हो रही आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन का उद्घाटन 10 जुलाई को गवर्नमेट आर्ट म्यूजियम एंड गैलरी में होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता द्वारा किया जाएगा। प्रदर्शनी 14 जुलाई तक चलेगी।
आयोजन को साकार करने के लिए अकादमी द्वारा प्रदर्शनी के लिए सभी आर्ट टीचर्स से उनके आर्ट वर्क मंगवाए गए। इसमें 57 स्कूली टीचर्स के 133 आर्ट वर्क अकादमी तक पहुंचे। प्रदर्शन योग्य चयन के लिए दिल्ली के कलाकार वीरेन तंवर और जम्मू के कलाकार हर्षवर्धन की कमेटी बनाई गई। चयन कमेटी ने 64 आर्ट वर्क को प्रदर्शनी के लिए सलेक्ट किया। चयनकत्र्ताओं को आर्ट वर्क इतने पसंद आए कि उन्होंने प्रमुख् तीन पुरस्कारों के साथ दिए जाने वाले मेरिट सर्टिफिकेट के लिए तीन की जगह छह टीचर्स को चुना।
तीन बेस्ट आर्ट टीचर्स होंगें 25-25 हजार रुपए से सम्मानित
चयनकत्र्ताओं ने प्रदर्शनी के लिए पहुंचे आर्ट वर्क से तीन बेस्ट आर्ट वर्क चुने गए हैं । अन तीनों आर्ट वर्क के आर्ट टीचर्स को 25-25 हजार रुपए की राशि से सम्मानित किया जाएगा। चुने गए कलाकारों मेंं तुलसी राम प्रजापति के स्कल्प्चर इम्यूरिमेट, भारती शर्मा की अनटाइटल्ड पेंटिंग और संजीव कुमार की फोटोग्राफी जर्नी ऑफ लाइफ  को सम्मानित किया जाएगा।
इसके साथ ही रीना भटनागर को पेंटिंग, ममता मार्शल को प्रिंटमेकिंग, मनीषा वर्मा को प्रिंटमेकिंग, बिबेकानंद कापरी को स्कल्प्चर, साधना कुमार को स्कल्प्चर और हरनीत कौर को स्कल्प्चर में मेरिट सर्टिफिकेट के साथ 5,000 रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया जाएगा।

बुधवार, 27 जून 2018

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। अंतत: वही हुआ जिसकी आशंका थी, राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी के ग्रुप शो के लिए किए कलाकारों के चयन को लेकर प्रदेश के कला जगत में असंतोष मुखर होने लगा है।
चयन की प्रकिया में हो रही अनावश्यक देरी और असामान्य गोपनियता के चलते जानकारों को लिस्ट में जबरदस्त जोड़-तोड़ की आशंका होने लगी थी। नतीजतन अब सामने आया है कि जिन कलाकारों को अकादमी की ओर से  फोन करके उनका काम मंगवाया गया था, पहले उनको सूची में स्थान मिला, लेकिन जोड़-तोड़ के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अंतिम सूची में उनका नाम नदारद था।
जयपुर के युवा कलाकार सुनील कुमार कुमावत के अनुसार 21 या 22 तारीख को प्रदर्शनी के संयोजक लोकेश जैन ने फोन करके उसका काम मंगवाया था। सुनील ने तत्काल अपना काम अकादमी पहुंचा दिया था। सूची में उसका नाम शामिल हुआ भी था, लेकिन कैटलॉग में उसका नाम नदारद था। उल्लेखनीय है कि लगभग अंतिम दौर की जिस सूची में सुनील कुमावत का नाम था, उसमें महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल नहीं था, लेकिन कैटलॉग में महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल है।
कोटा से मिली जानकारी के अनुसार वहां के तीन वरिष्ठ कलाकारों ने तो अकादमी के मांगे जाने पर स्वयं अपना काम जयपुर जाकर अकादमी तक पहुंचाया था। अकादमी द्वारा दिए गए भरोसे के आधार पर कोटा की स्थानीय मीडिया को अपना काम जहांगीर कला दीर्घा में प्रदर्शित होने की जानकारी भी दी। सभी प्रमुख अखबारों ने इन सीनियर कलाकारों के समाचार भी प्रकाशित किए। अब कैटलॉग में नाम व काम नहीं पाकर उनकी स्थिति बयान करने लायक नहीं रही। इनमें शुभूसिंह चौबदार, डी.पी. छाबड़ा व डा. धांसू अन्नूसिंह धाकड़  शामिल हैं। शुभूसिंह चौबदार ने तो फोन ही स्विचऑफ कर दिया।
ऐसे मामलों के संबंध में अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी का कहना है कि इस आयोजन के लिए कलाकारों के चयन का काम अकादमी द्वारा गठित अनुभवी व जिम्मेदार कलाकारों की एक समिति ने किया है। इसमें अधिकारियों की भूमिका नहीं थी।

शुरू हुई इनवायरमेंटल आर्टिस्ट रेसिडेंसी

शुरू हुई इनवायरमेंटल आर्टिस्ट रेसिडेंसी 
मूमल नेटवर्क, चित्तौडग़ढ़ ।
वन्य जीवों के संरक्षण व उनकी गतिविधियों को चित्रित करने तथा कला के माध्यम से वन्य जीवों की सुरक्षा जागरूकता लाने के उद्देश्य से चित्तौडग़ढ़ आर्ट सोसायटी ने इनवायरमेंटल आर्टिस्ट रेसिडेंसी  की शुरुआत की है। सीतामाता आरामपुरा के वन्यजीव  अभयारण्य में कल इसका उद़घाटन हुआ। आयोजन में सीतामाता अभ्यारण्य उपवन संरक्षक वन्य जीव और बिरला सीमेंट सहयोगी हैं।
पांच दिवसीय  इनवायरमेंटल आर्टिस्ट रेजिडेंसी के उद्घाटन समारोह  की मुख्य अतिथि डीएफओ सविता दहिया, विशिष्ठ अतिथि धरियावद एसडीएम वीर सिंह , तहसीलदार लक्ष्मण , महेश शर्मा ,कोमल,  ऐसिफ रेंजर सुनील कुमार और चित्तौडगढ़ आर्ट सोसायटी के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण वर्मा  की उपस्थिति में हुआ।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए  चित्तौडगढ़ आर्ट सोसायटी के सचिव मुकेश शर्मा ने बताया कार्यक्रम में देश -विदेश के एक दर्जन से ज्यादा कलाकार भाग ले रहे है कार्यक्रम में भाग ले रहे सभी कलाकार पांच दिन तक सीतामाता अभयारण्य में रह कर विभिन्न माध्यमो में कला कृतियां तैयार करेंगे।
इस शिविर में वन्यजीव संरक्षण ,प्लास्टिक मुक्त अभयारण्य व जागरूकता मुद्दों को उठाया जाएगा। कलाकारों द्वारा विभिन्न माध्यमों के जरिए जैसे आर्ट परफॉर्मेन्स,असेम्बलेज आर्ट ,वीडियो आर्ट,  पब्लिक आर्ट, लैंड आर्ट, इंस्टॉलेशन व मूर्तिकला से लोगों में वन्य जीवों व प्रकृति की सुरक्षा के प्रति जागरुकता लाने के प्रयास किये जाएंगे।  रेजीडेंसी का समापन 30 जून को होगा। 

अब महाराष्ट्र में भी खुलेगा ललित कला अकादमी का क्षेत्रीय केंद्र


अब महाराष्ट्र में भी खुलेगा ललित कला अकादमी का क्षेत्रीय केंद्र 
मूमल नेटवर्क, दिल्ली/मुबई। महाराष्ट्र को ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में जल्दी ही नई सौगात मिलने जा रही है। मूमल को यह जानकारी इस सिलसिले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से हुई सफल मुलाकात के बाद अकादमी अध्यक्ष उत्तम पचारणे ने दी। इससे पूर्व अकादमी द्वारा इंदौर में भी अकादमी का क्षेत्रीय केन्द्र खेले जाने की घोषणा की गई है।
पचारणे ने 23 जून को बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारी रघुनाथ कुलकर्णी के साथ मुंबई में फड़णवीस से राज्य में नए क्षेत्रीय केंद्र के बारे में बैठक की थी। बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का रवैया खूब सकारात्मक रहा। महाराष्ट्र में ललित कला अकादमी का केंद्र खोलने हेतु लम्बे समय से महाराष्ट्र,
गुजरात और गोवा के कलाकार मांग कर रहे थे।
पाचरणे ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा, तीनों ही राज्यों ने देश को अनेक प्रतिभाशाली चित्रकार एवं मूर्ति शिल्पकार दिए हैं। इस लिए देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मोदी सरकार नए क्षेत्रीय केंद्र का तोहफा देने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह मांग बहुत पुरानी है और इस
सम्बन्ध में मुख्यमंत्री फड़णवीस से भेंट की तो उन्होंने जल्द ही मुंबई में इसके लिए जगह उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया।
पचारणे ने उम्मीद जताई कि मुंबई में आकदमी के नए केंद्र खुलने से इन क्षेत्रों की सामाजिक—सांस्कृतिक विविधता चित्रकारों, शिल्पकारों और लोक कलाकारों के माध्यम से अधिक विकसित होगी । इसके साथ ही पूरे देश और दुनिया का बाजार भी उनके लिए खुलेगा। महाराष्ट्र में बहुत से कला संस्थान हैं। इस प्रगतिशील राज्य में बहुत से कलाकार संघर्ष कर रहे हैं। पचारणे ने उम्मीद जताई कि नया केंद्र उन सभी कलाकारों को बड़ा मंच और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मददगार होगा। उत्तम पचारणे ने कहा कि ललित कला अकादमी आदिवासी और जनजातीय कलाओं को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही कुछ बड़े कदम उठाने वाली है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में अल्पना तथा मध्यप्रदेश में मांडना जैसी लोक चित्रकला शैलियां खूब लोकप्रिय हैं। इन राज्यों में आदिवासियों के बीच भी चित्रकला की विशिष्ट शैलियां प्रचलित हैं जिन्हें ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र खुलने से बढ़ावा मिलेगा और नए एवं युवा कलाकारों को आगे बढऩे का प्रोत्साहन मिलेगा। 

सोमवार, 25 जून 2018

जहांगीर ग्रुप शो के कलाकारों की लिस्ट, Artis List.

जहांगीर ग्रुप शो के कलाकारों की लिस्ट
देखिए आयोजन में आपके लिए क्या है?
मुमल नेटवर्क, जयपुर। जहांगीर आर्ट गैलेरी में हो रहे ग्रुप शो के लिए अकादमी की अनुभवी व जानकार चयन समिति द्वारा पूरे राजस्थान से चुने गए कुल 147 कलाकारों की लिस्ट प्रस्तुत है। सभी चयनित कलाकारों को शुभकामनाएं...। 
वे योग्य वरिष्ठजन जो चयनित होनें के लिए आमंत्रण के बावजूद शो में शामिल होने को तैयार नहीं हुए, वे जो आमंत्रित किए जाने के बाद भी चयन से वंचित रहे और वे जो चुने ही नहीं गए वे फिलहाल अपनी स्थिति और कृतित्व की स्वयं समीक्षा करें। प्रखर व बिंदास लोग हमसे भी साझा करें, मूमल आपके विचार प्रकट करने के अधिकार की पूरी रक्षा और सम्मान करेगा।
चयनित  कलाकारों की लिस्ट
1. अब्बास बाटलीवाला
2. अदिति अग्रवाल
3. अजय दर्शन सिंह राजावत
4. अजय मिश्रा
5. अजय सिंह पीलवा
6. आकाश चोयल
7. अमित हरित
8. अमित राजवंशी
9. अंकित पटेल
10. अन्नपूर्णा शुक्ला
11. अनुपम भटनागर
12. अनुपमा जैन
13. अर्चना
14. पद्मश्री अर्जुन प्रजापति
15. अरविन्द मिश्रा
16. आशीष कुमार श्रृंगी
17. अशोक गौड़
18. अशोक हाजरा
19. बी.सी.गहलोत
20. बसन्त कश्यप
21. भवानी शंकर शर्मा
22. भीम सिंह हाड़ा
23. भुवनेश जैमिनी
24. चन्द्र मोहन शर्मा
25. चन्द्र प्रकाश जैन
26. चन्द्र शेखर सैन
27. चरण शर्मा
28. चिमनराम डांगी
29. चिन्मय मेहता
30. दीपक खण्डेलवाल
31. धर्मवीर वशिष्ठ
32. दिलीप सिंह चौहान
33. दिलीप शर्मा 
34. दिनेश उपाध्याय
35. दीपिका हाजरा
36. एकेश्वर प्रसाद हटवाल
37. इरा टाक
38. गौरी शंकर जांगिड़
39. गिरीश चौरसिया
40. गोपाल आचार्य
41. गोपाल शर्मा
42. गोपाल स्वामी खेतांची
43. एच. आर. कुम्भावत
44. हरीश वर्मा
45. हेमन्त द्विवेदी
46. हेमन्त जोशी
47. जगदीश नन्दवाना
48. जगमोहन माथोडिय़ा
49. ज्योति प्रकाश गौतम
50. कैलाश चन्द शर्मा
51. कमल जोशी
52. कपिल शर्मा
53. केशव शर्मा
54. खुश नारायण जांगिड़
55. किरण मूर्दिया
56. किरन सोनी गुप्ता
57. किशन मीणा
58. कृष्णा महावर
59. लाखन सिंह जाट
60. लाल चन्द मारोठिया
61. लक्ष्मीकांत शर्मा
62. लक्ष्यपाल सिंह राठौड़
63. लोकेश जैन
64. लोकेश कुमावत
65. मदन मीणा
66. मदन सिंह राठौड़
67. महावीर स्वामी
68. महेश सिंह
69. महेश स्वामी
70. मनन चतुर्वेदी
71. मणि भारतीय
72. मनीष वाजपेयी
73. मनोज टेलर
74. मीना बया
75. मीनाक्षी कासलीवाल भारती
76. मोहम्मद सलीम
77. मुकुल मिश्रा
78. नरेन्द्र सिंह 'चिंटूÓ
79. नीरज शर्मा
80. नेमा राम जांगिड़
81. पंकज गहलोत
82. पवन कुमार शर्मा
83. पूनम माथुर
84. प्रदीप शर्मा
85. प्रदीप वर्मा
86. प्रमोद कुमार सिंह
87. प्रतीक कुमावत
88. पुष्पकांत त्रिवेदी
89. आर.बी. गौतम
90. राहुल उषाहरा
91. राजाराम वयास
92. राजेन्द्र गौड़
93. राजेन्द्र मिश्री
94. राकेश सिंह
95. राम जायसवाल
96. राम प्रतिहार
97. राम सोनी
98. रणजीत सिंह चूड़ावाला
99. रवि कुमार योगी
100. रेखा अग्रवाल
101. रेखा भटनागर
102. ऋतु जौहरी
103. रोकेश कुमार सिंह
104. रूद्र भारद्वाज
105. सचिन्दानन्द सांखलकर
106. संजीव शर्मा
107. सन्त कुमार
108. सौरभ भट्ट
109. शाहिद परवेज
110. शैल चोयल
111. पद्मश्री शाकिर अली
112. शालिनी भारती
113. शरद भारद्वाज
114. शीतल चितलांगिया
115. शेख मोहम्मद लुकमान
116. शिव कुमार शर्मा
117. शिव शंकर शर्मा
118. श्वेत गोयल
119. स्नेहलता शर्मा
120. सोहन जाखड़
121. सुब्रतो मण्डल
122. सुधीर शर्मा
123. सुधीर वर्मा
124. सुमन गौड़
125. सुनीत घिल्डियाल
126. सुनील चेजड़ा
127. सुनील जांगिड़
128. सुनील कुमार कुम्भावत
129. सुरभि सोनी
130. सुरेन्द्र सिंह
131. सुरेन्द्र पाल जोशी
132. सुरेश जोशी
133. सुरेश पाराशर
134. सुरजीत कौर चोयल
135. सुशहल निम्बार्क
136. सैयद मेहर अली अब्बासी
137. ताराचन्द शर्मा
138. तसलीम जमाल
139. पद्मश्री तिलक गीताई
140. तिलक राज
141. वीरबाला भवसर
142. विजय कुमावत
143. विनोद भारद्वाज
144. वीरेन्द्र बन्नू
145. योगेन्द्र कुमार पुरोहित
146. योगेन्द्र सिंह नरूका
147. युगल किशोर शर्मा

जहांगीर ग्रुप शो:

जहांगीर ग्रुप शो:
अधिकारियों का दल विमान से रवाना
कैटलॉग भी विमान में लेकर जाना पड़ा
एक दर्जन से अधिक लोग काम में जुटे
तीन दीर्घाओं में करीब सौ कृतियां सजेंगी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा प्रदेश के चुनिंदा कलाकारों के लिए मुंबई की जहांगीर कला दीर्घा में कल 26 जून से आरंभ होने वाले ग्रुप शो के लिए अकादमी के अधिकारियों और उनके सहायकों का दल आज मुंबई पहुंच गया। यह दल जयपुर से आज सुबह विमान से रवाना हुआ। इनमें अध्यक्ष अश्विन दलवी, सचिव सुरेंन्द्र सोनी, प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा, शो के संयोजक लोकेश जैन, सह संयोजक आशीष श्रंगी, अध्यक्ष के निजी सचिव व शो के संयोजक की सहायिका के रूप में एक महिला शामिल हैं। इससे पहले अकादमी के प्रदर्शनी वाहन में कलाकृतियों के साथ लगभग आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी 23 जून को मुंबई के लिए रवाना हुए थे।
कैटलॉग भी विमान में?
पूर्व में कलाकारों के चयन में हुए विलंब के कारण हुई देरी के चलते शो के कैटलॉग छपने के बाद एन वक्त पर अकादमी में पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे में अधिकारियों का दल अपने लगेज में शामिल कर बहुत सीमित मात्रा में कुछ कैटलॉग लेकर जा रहे हैं। अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी के अनुसार कैटलॉग प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद ही जारी किया जाएगा।
शेष कैटलॉग का स्टॉक जयपुर अकादमी कार्यालय मेें कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। अधिकारियों ने इनमें से एक भी कैटलॉग किसी को नहीं दिए जाने के कड़े निर्देश कर्मचारियों को दिए हैं। बताया जा रहा है कि वे मुंबई से लौटने के बाद इसका वितरण अपने अनुरूप करेंगें।
करीब सौ कलाकृतियां सजेंगी
उधर मूमल के मुंबई सूत्रों के अनुसार राजस्थान अकादमी के लिए बुक तीन दीर्घाओं के लिए 26 जून से 2 जुलाई तक के लिए शुल्क व अन्य खर्च के रूप में लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक का भुगतान होगा। यह दीर्घाएं अकादमी को 26 जून को सुबह सौप दी जाएंगी। इन तीन दीर्घाओं में लगभग 100 कलाकृतियां लगाने के लिए स्थान है। कलाकृतियां लगाए जाने के बाद शाम को शो का औपचारिक उद्घाटन होगा।
( 147 चयनित कलाकारों की सूचि व अन्य जानकारियां देखें अगली खबर में )

रविवार, 24 जून 2018

मुख्यमंत्री ने किया सरदार राजकीय संग्रहालय का अवलोकन

मुख्यमंत्री ने किया सरदार राजकीय संग्रहालय का अवलोकन
मूमल नेटवर्क, जोधपुर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जोधपुर के उम्मेद उद्यान स्थित सरदार राजकीय संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने लगभग डेढ़ घण्टा संग्राहलय में बिताया। मुख्यमंत्री ने नवीनीकरण तथा विस्तार कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह एक वल्र्ड क्लास संग्रहालय है। पर्यटकों के लिए कड़ी मेहनत से तैयार इस म्यूजियम का डिस्प्ले आकर्षक और आधुनिक है। राजकीय संग्रहालयों में यह विशेष रूप से आकर्षक रहेगा, जिसमें सोलर एनर्जी का उपयोग करके ऑडियो विजुअल, टचस्क्रीन तथा उनके एप्स बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने म्यूजियम की लघु चित्र दीर्घा, राजाओं के चित्रों की दीर्घा, शस्त्र एवं शस्त्रागार दीर्घा, शिकार एवं प्रकृति दीर्घा, सजावटी कला दीर्घा, वनस्पति दीर्घा, मूर्तिकला दीर्घा, जैन कला दीर्घा, मानचित्र एवं साम्राज्य दीर्घा में कलात्मक धरोहरों को रूचि से देखा और सराहना की। दीघार्ओं के डिजाइनर सिद्धार्थ दास ने मुख्यमंत्री को दीर्घाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री पीपी चौधरी, केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर तथा महापौर घनश्याम ओझा भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की 2015-16 की बजट घोषणा के तहत सरदार राजकीय संग्रहालय का नवीनीकरण एवं विस्तार किया गया है।

शनिवार, 23 जून 2018

सम्पन्न हुई योग चित्रकला प्रतियोगिता

सम्पन्न हुई योग चित्रकला प्रतियोगिता
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पोस्टर एवं चित्रकला की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से 12 तक के 85 विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आर्ट फॉर हेल्थ नाम की इस प्रतियोगिता को तीन वर्गों में विभाजित किया गया था। पहले वर्ग में कक्षा 1 से 4 तक के बच्चे, दूसरे वर्ग में कक्षा 5 से 8 तक के बच्चे प्रतिभागी बनें तो तीसरे वर्ग में कक्षा 9 से 12 तक के बच्चें ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
यह रहा परिणाम
कक्षा 1 से 4 वर्ग 
प्रथम स्थान- श्रीजी, लारेटो कान्वेट कालेज
द्वितीय स्थान- काव्या मिश्रा, सेंट एग्नेस लारेटो डे स्कूल
तृतीय स्थान- मो. इब्राहिम, सीएमएस लखनऊ
कक्षा 5 से 8 वर्ग 
प्रथम स्थान- अदित सिंह, रेड रोज सीनियर सेकेण्डरी स्क्ूल
द्वितीय स्थान- अर्जुन वीर सिंह, काल्विन तालुकेदार्स
तृतीय स्थान- भव्या नंदिनी, माउंट कारमल कालेज
कक्षा 9 से 12 
प्रथम स्थान- सुहानी चतुर्वेदी, लखनऊ पब्लिक स्कूल सहारा स्टेट
द्वितीय स्थान- ओजस सिंघल, निर्मला कान्वेट इंटर कालेज
तृतीय स्थान- सफीना खान, करामत हुसैन मुस्लिम गल्र्स इंटर कालेज लखनऊ ।
पोस्टर एवं चित्रकला की प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ कलाकार शिव बालक एवं भीम सेन सिंह ने पुरस्कार निश्चित किये।
सभी प्रतिभागियों प्रमाण पत्र प्रदान किये गए। 

शुक्रवार, 22 जून 2018

शुरु हुई भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन

शुरु हुई भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन 
आज होगी मयंक मानसिंह कौल के साथ क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू
मूमल नेटवर्क, जयपुर। भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन 'न्यू ट्रेडिशंस: इन्फ्लुएंसेस एंड इंस्पीरेशंस इन इंडियन टेक्सटाइल्स, 1947-2017' की कल से जवाहर कला केंद्र में शुरूआत हुई। यह प्रदर्शनी मयंक मानसिंह कौल द्वारा क्यूरेट की गई है और रेहा सोढ़ी द्वारा डिजाइन की गई है। जेकेके द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 31 जुलाई तक चलेगी और सार्वजनिक अवकाशों को छोड़कर प्रात: 11 बजे से सायं 7 बजे तक देखी जा सकेगी।
इस अवसर पर कौल ने कहा कि जब पारम्परिक वस्त्रों की बात आती है, तो अधिकांश लोग मानते है कि वस्त्र उद्योग में अधिक बदलाव नहीं आया है। हालांकि, गत 50 से 60 वर्षों में इस क्षेत्र में अत्यधिक गतिशीलता एवं नवीनता देखने को मिली है, जिसे दर्शाना इस एग्जीबिशन का लक्ष्य है। यहां प्रदर्शित कलाकृतियों को सम्बंधित वस्त्रों के ऐतिहासिक परिदृश्य को वर्तमान समय से जोडऩे का प्रयास किया गया है।
एग्जीबिशन में उन 50 से अधिक कलाकारों एवं डिजाइनरों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनका कार्य सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक परिस्थितियों से अत्यधिक प्रभावित रहा है। प्रत्येक गैलरी में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र एवं समयावधि को प्रतिबिंबित किया गया है। बोतलों के ढक्कनों एवं सिलिकॉन से बनी साडिय़ां; कांजीवरम एवं बनारसी साडिय़ां; खादी डेनिम; जरदोजी का नवीनीकरण; एम्ब्रॉयडरी एवं चिकनकारी और पारम्परिक बांधनी, आदि के साथ यह एग्जीबिशन डिजाइनर की जीवन यात्रा का ऐतिहासिक प्रतिबिंब है।
अत्याधुनिक एवं प्रयोगात्मक फैशन पर फोकस किया जाना इस एग्जीबिशन का एक विशेष आकर्षण है। ब्रांज, सिल्वर एवं गोल्ड जरी जैसे वर्क; क्लॉक डॉयल के रूप में मुकेश वर्क; रिसाइकल्ड मैटेरियल से बने वस्त्र तथा थ्री डी एम्ब्रॉयडरी जैसे विभिन्न वस्त्र दुनियाभर के देशों में पारस्परिक भारतीयकरण के प्रभावों का प्रतिक हैं।
उल्लेखनीय है कि आम लोगों के लिए आज दोपहर बाद 4 बजे मयंक मानसिंह कौल के साथ क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू आयोजित की जाएगी।

'योग फॉर आर्ट'

'योग फॉर आर्ट' 
ललित कला अकादमी ने बताया योग और कला का समभाव
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। योग, एक बहुआयामी विचार,जीवन जीने का एक तरीका, कला, दशर्न, तकनीक, अच्छी सेहत का लाईसेंस, विज्ञान, चेतनता का एक साधन और आयािमक उपलिध का केन्द्र है। हम एक कलाकार की कृति अथवा शिल्प की तुलना योग से करें तो यह स्वयं में एक यौगिक अनुभव है। यह सभी युगों व संस्कृति के कलाकारों को अनवरत जोड़ता रहता है। योग मूर्तिशिल्प, चित्र, साहित्य, नृत्य, संगीत और मार्शल आर्ट में निपूणता प्राप्त करने में मदद करता है।
कुछ इन्हीं भावनाओं और विचारों के साथ ललित कला अकादमी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 'योग फॉर आर्ट' कार्यक्रम का आयोजन किया । योग शिक्षक राजेन्द्र सिंह द्वारा प्रदर्शित योग मुद्राओं से कार्यक्रम का आरम्भ हुआ। इस अवसर पर अध्यत्रा उत्तम पचारणे सहित अकादमी स्टॉफ ने यागेगाभ्यास किया।
'चित्रशिल्पयोग'
इस अवसर पर  'चित्रशिल्पयोग' कला प्रदर्शनी आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रख्यात शिल्पकार पद्मभूषण राम वी. सुतार द्वारा अध्यक्ष उत्तम पाचारणे और उत्तरी दिल्ली के महापौर आदेश गुप्ता की उपस्थिति में किया गया।
'चित्रशिल्पयोग'  प्रदर्शनी में ललित कला अकादमी के स्थायी संग्रह से ली गई कलाकृतियां शामिल हैं, जिनमें के.वी. हरिदासन, एन. राघवन, रंगास्वामी सांरगन, जी.आर.सन्तोष, वी.एस.गायतोंडे, बीरेन डे, स.एल.साहनी, एस.नंदगोपाल, प्रदोष दासगुप्ता, लक्ष्मण पाई, ओम प्रकाश, पी.टी.रेड्डी, मोहम्मद यासीन, सनत कार आदि जाने-माने कलाकारों की कृतियां हैं।
इस अवसर पर राम वी. सुतार ने कहा 'कला भी एक प्रकार का योग है। कलाकार भी अपनी कला के माध्यम से एक तरह का योग करते हैं। मैं ललित कला अकादमी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में कला और योग के इस समायोजन के लिए बधाई देता हूं।'
ललित कली के अध्यक्ष उत्तम पाचारणे ने कहा कि,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के योगऋषियों के प्रयास से योग को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई है, आज पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को 'चित्रशिल्पयोग' के माध्यम से मनाया जाना एक विलक्षण विचार है। उन्होंने योग और सृजनात्मकता के मध्य समानता पर भी बात की। ''किसी चित्र अथवा भित्तिचित्र का सृजन स्वयं में यौगिक गतिविधि है, क्योंकि ऐसा करते हुए कलाकार बाहरी जगत को भूलकर अपने सभी भावों, कल्पना और उर्जा को अपने भीतरी जगत में इ कर लेता है।
विशिष्ट अतिथि आदेश गुप्ता ने कहा कि, योग ऋषि परम्परा की प्राचीन धरोहर है और इसे बनाये रखने के लिए ऋषियों-मुनियों ने इसे आगे बढ़ाया है। उसी क्रम में स्वामी रामदेव, श्री श्री रविशंकर जी ने इसे उच्च पटल पर स्थापित किया है। कला योग का एक अभिन्न अंग है। योग सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि आत्मिक व मानसिक सुख के साथ मानसिक बल भी देता है।
और हुआ आर्ट डिमांसट्रेशन
चार प्रसिद्ध कलाकारों विजय राउत (कार्टूनिस्ट एंव एनिमेटर), रविन्द्र साल्वे (पेन्टर), स्वप्निल कदम (शिल्पकार) और सिद्धार्थ शिंगाड़े (पेन्टर) ने आर्ट डिमांसट्रेशन में भाग लिया और अपनी कला का जीवन्त प्रदर्शन किया। 

गुरुवार, 21 जून 2018

जहांगीर के ग्रुप शो का जयपुर में प्रिव्यु नहीं

जहांगीर के ग्रुप शो का जयपुर में प्रिव्यु नहीं

केटलॉग भी मुंबई में ही जारी होगा 

अंतत: 147 को चुना गया



मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा प्रदेश के कलाकारों मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में किए जाने वाले ग्रुप शो का जयपुर में होने वाला प्रिव्यू नहीं होगा। प्रिव्यू के मौके पर जारी होने वाला शो का केटलॉग भी मुख्य शो के समय 26 जून को सीधे जहांगीर में ही जग-जाहिर किया जाएगा।
पूर्व में मिली जानकारी के अनुसार इस शो में 100 चुनिंदा कलाकारों को शामिल किए जाने की बात थी।  जो बाद में 140 कलाकारों तक जा पहुंची। अब अंतिम रूप से शो के लिए 147 कलाकारों की कृतियां चुनी गई हैं। चुने हुई कलाकृतियों का प्रदर्शन जून के तीसरे सप्ताह में जयपुर में अकादमी की कला दीर्घा में किए जाने की बात तय की गई थी। अब हालात को देखते हुए यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। ऐसे में स्थानीय लोगों को चुनिंदा कलाकृतियों को देखने-समझने का अवसर नहीं मिल पाएगा। कलाजगत को अकादमी द्वारा पहली बार जहांगीर आर्ट गैलेरी में आयोजित प्रदर्शनी का प्रिव्यू व केटलॉग देखने का बेसब्री से इंतजार था। 
प्रिव्यू के लिए वक्त नहीं बचा
अकादमी सचिव डा. सुरेन्द्र सोनी ने प्रिव्यू नहीं होने का कारण समय का अभाव होना बताया है। चयनित कलाकृतियों के केटलॉग के बारे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि देरी के कारण उसके प्रकाशन में भी विलंब हुआ है। ऐसे मेें वह भी अभी यहां नहीं देखा जा सकेगा। उसे सीधे मुख्य शो के समय मुंबई में ही जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है यह शो 26 जून की शाम से 2 जुलाई तक चलेगा।
कृतियां प्रदर्शनी वाहन में जाएंगी।
जानकारी के अनुसार चुनी हुई 147 कृतियां अकादमी के प्रदर्शनी वाहन में 23 जून की सुबह मुंबई के लिए रवाना होंगी। जहां तक संभव होगा केटलॉग कलाकृतियों के साथ ही भेजने का प्रयास होगा, लेकिन यह नहीं हो पाया तो उन्हें ट्रेन से 24 या 25 जून को जंहागीर के लिए रवाना किया जा सकेगा। फिलहाल केटलॉग का प्रकाशन प्रगति पर है। शो के लिए अकादमी के अधिकारी व संबंधित संयोजक 25 जून की सुबह मुबई के लिए रवाना होंगे।
26 की शाम को उद्घाटन 
हालांकि 21 जून की रात को समाचार लिखे जाने तक अकादमी की ओर से इस शो के लिए राजस्थान के कला जगत को डाक या ईमेल से कोई निमन्त्रण भेजे जाने की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन, मूमल को प्राप्त जानकारी के अनुसार इस शो का उद्घाटन 26 जून की शाम पांच बजे जहांगीर की एक, दो व तीन नम्बर की आर्ट गैलेरी में किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र के कला, संस्कृति मंत्री विनोद श्रीधर तावड़े को आमन्त्रित किया गया है। जबकि गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में केन्द्रीय ललित कला अकादमी दिल्ली के चैयरमेन उत्तम पचारणे आमंत्रित हैं।

कनाडा के लेथब्रिज विश्वविद्यालय की कला दीर्घा एक कला शिक्षिका के नाम

कनाडा के लेथब्रिज विश्वविद्यालय की कला दीर्घा 
एक कला शिक्षिका के नाम
कला शिक्षिका डॉ. पर्किन्स हेस ने मृत्युपूर्व विश्वविद्यालय को दान किया था कला संग्रह
5 मिलियन डॉलर की 1,140 कलाकृतियां हैंं संग्रह में शामिल
मूमल डेस्कवर्क। लेथब्रिज विश्वविद्यालय ने कला शिक्षक व संग्राहक डॉ.मार्गरेट (मार्मी) पर्किन्स हेस को सम्मानित करते हुए अपनी कला दीर्घा का नाम हेस के नाम पर रख दिया है। इस दीर्घा में पर्किन्स हेस के संग्रह से 112 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
अपना पूरा जीवन कला शिक्षक के रूप में बिताने वाली डॉ. मार्गरेट (मार्मी) पर्किन्स हेस  ने अपनी मृत्यु से पहले अपना पूरा कला संग्रह विश्वविद्यालय को दान कर दिया था। उनके कला संग्रह में 5 मिलियन उॉलर की 1140 कलाकृतियां शामिल हैं। इन कृतियों में कनाडा के प्रसिद्ध कलाकारों की कृतियों के साथ विश्व प्रसिद्ध कलाकारों की कृतियां भी शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष माइक महोन ने कहा कि उनकी मृत्यु से आठ साल पहले मैंने हेस की उदारता को जान लिया था। उन्होंने कहा कि हेस ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक मास्टर-स्तरीय छात्रवृत्ति भी अपने धन से आरम्भ करवाई।
कला दीर्घा के सहायक क्यूरेटर डेविड स्मिथ ने कहा कि कला को जीवन के जुनून के रूप में जीने वाले हेस का यह कार्य वास्तव में प्रेरणाप्रद और अद्भुत है। उन्होंने कहा कि, लेथब्रिज विश्वविद्यालय की गैलरी, जिसका नाम अब उसके सम्मान में रखा गया है में इसी वर्ष सितंबर में उनके दान की गई  1,140 कृतियों में से 112 का प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में हेनरी मैटिस का बनाया एक मूल स्केच, पाब्लो पिकासो का एक प्रिंट और एलेक्स जेनवियर, बिल रीड, टोनी हंट, जेसी ओनार्क और हेलेन कालवक समेत प्रमुख स्वदेशी कलाकारों की कला को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि, आने वाले दिनों में उनके शेष संग्रह को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
 डॉ.मार्गरेट (मार्मी) पर्किन्स हेस का परिचय
पर्किन्स हेस का जनम अल्ब्रटा में 3 मई 1916 में हुआ। वह अविवाहित थीं। हेस ने लिथेब्रिज विद्ववविद्यालय से ललित कला में डाक्टरेट प्राप्त किया था। उन्होंने अल्बर्टा विश्वविद्यालय से मानदंड डॉक्टर ऑफ  लॉज डिग्री भी प्राप्त की। उन्हें 1 9 8 9 में रोटरी इंटरनेशनल की पॉल हैरिस फैलोशिप मिली और वह रॉयल कनाडाई भौगोलिक सोसाइटी का मानद फेलो रहीं। 2000 में, उन्हें वाईडब्ल्यूसीए महिला भेदभाव लाइफटाइम स्वयंसेवी उपलब्धि पुरस्कार मिला और 2004 में कैलगरी शहर से ग्रांट मैकवान लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्राप्त हुआ।वह विख्वविद्यालय सीनेट की सदस्य थीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन कला की शिक्षा व कला व्याख्यान देने और कला को संग्रहित करने में बिताया। रिटायमेंट के बाद पेंशन ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन थी। सन् 2016 में लगभग 100 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हुई।

राज्यस्तरीय सिन्धी आइडल गायन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित


राज्यस्तरीय सिन्धी आइडल गायन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित
मूमल नेटवर्क, उदयपुर।  राजस्थान सिन्धी अकादमी द्वारा पूज्य सिन्धी साहिती पंचायत के सहयोग से आयोजित राज्य स्तरीय सिन्धी आइडल गायन प्रतियोगिता 2018 के परिणाम घोषित कर दिये गए हैं। फाइनल राउण्ड में राज्य भर से चयनित 28 प्रतियोगियों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
अकादमी अध्यक्ष हरीश राजानी ने जानकारी दी कि, पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी थी कि हमनें पूर्व घोषित तीन पुरस्कारों के स्थान पर सात पुरस्कार विजेता प्रतिभागियों को प्रदान किये हैं।
यह रहा परिणाम
प्रतियोगिता का 31 हजार रू. का प्रथम पुरस्कार खैरथल अलवर के गौरव चंदानी ने हासिल किया। रुपये 21 हजार की राशि का द्वितीय पुरस्कार भी अलवर के ही दीपक लखवानी को प्राप्त हुआ। तीसरा पुरस्कार 11 हजार की राशि के रूप में अजमेर की मुस्कान कोटवानी को प्रदान किया गया।
अकादमी सचिव ईश्वर लाल मोरवानी ने कहा कि प्रतियोगियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करते हुए चार अन्य पुरस्कार 5000 रुपये व तीन हजार रुपये राशि के प्रदान किये गए हैं। इसमें 5 हजार रुपए की राशि का चतुर्थ पुरस्कार कोटा के कुरसवानी को एवं 3 हजार रुपये का पंचम
पुरस्कार उदयपुर दीप छाबडिय़ा को दिया गया।
 3 -3 हजार रुपये के दो सांत्वना पुरस्कार भीलवाड़ा के मनन पुरसवानी एवं बंूदी के चन्द्र मोहन ने हासिल किया। राज्य की राजधानी जयपुर पुरस्कार प्राप्त करने से वंचित रही।
इस अवसर पर शिकारपुर पूज्य सिन्धी पंचायत उदयपुर द्वारा भी विजेताओं को अपनी तरप्ु से नकद पुरस्कार प्रदान किये गये।
निर्णायक मण्डल
अनिता शिवनानी, मोहन सागर एवं दुर्गेश चांदवानी ।

मंगलवार, 19 जून 2018

जेकेके में टेक्सटाईल एक्जीबिशन 22 जून से


जेकेके में टेक्सटाईल एक्जीबिशन 22 जून से 
प्रदर्शित होगा आजाद भारत के वस्त्रों का इतिहास
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र में 1947 के बाद के भारत में वस्त्रों के इतिहास पर आधारित एक प्रदर्शनी 22 जून से शुरु होने जा रही है। इस टेक्सटाईल एक्जीबिशन के माध्यम से 1947 के बाद भारत के हस्तनिर्मित वस्त्रों में हुये विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। जेकेके द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 'न्यू ट्रेडिशंस: इन्फ्लुएंसेस एंड इंस्पीरेशंस इन इंडियन टेक्सटाइल्स, 1947-2017' 31 जुलाई तक चलेगी।
1947 में भारत की आजादी के बाद की थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी विभिन्न विषयों पर आधारित होगी। इन थीम में राष्ट्रीय आंदोलन; खादी एवं 20वीं शताब्दी के आरम्भ से मध्य में यूरोपीयन-औपनिवेशिक संघर्षो से हुए प्रभावों तथा 1950 से वर्तमान समय की अंतर्राष्ट्रीय आधुनिकता के साथ हुए जुड़ाव शामिल होंगे। इसी प्रकार इसमें 1970 के दशक से ग्राम आधारित शिल्प एवं वस्त्रों में आरम्भ होने वाले बदलाव भी यहां प्रदर्शित किये जाऐंगे, जिसके जरिए टेक्सटाईल को मूर्तिकला के साधनों एवं रूपकों के अतिरिक्त शहरी वस्त्रों की वर्तमान डिजाइन और भारतीय सादगी दर्शायी जाएगी।
कला, डिजाइन, फैशन एवं शिल्प को प्रस्तुत करते हुए इस प्रदर्शनी में कपड़ों पर पेंटिंग्स, टेपिस्ट्रीज, मूर्तियां, कालीन एवं गलीचे, साड़ी, वस्त्र एवं कपड़ों पर रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न स्वरूप प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही यहां सामग्री एवं तकनीक की वे विकास यात्राएं प्रदर्शित की जाएंगी, जिसने रचनात्मक निर्माताओं, मास्टर कारीगरों, शिल्पकारों, कलाकारों, डिजाइनरों के साथ-साथ प्रयोगात्मक, आला दर्जे के डिजाइन स्टूडियोज, लोकप्रिय एवं प्रसिद्ध ब्रांड्स को दिशा प्रदान दी है।
प्रदर्शनी के दौरान 2 जुलाई को एक्जीबिशन में एक विशेष प्रदर्शन भी होगा जिसमें मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद की सदस्य, कला एवं संस्कृति, राजस्थान सरकार, मालवीका सिंह गेस्ट ऑफ ऑनर होंगी। यह प्रदर्शनी मयंक मानसिंह कौल द्वारा क्यूरेट की गई है और रेहा सोढ़ी द्वारा डिजाइन की गई है।
प्रदर्शनी के प्रतिभागी कलाकार व डिजाइनर
अमित अग्रवाल, बशोबी तिवाड़ी, बेरेनाईस इलिना, चारू वाधवा, घिओरा अहारोनी, मनीषा अरोड़ा, रितेन मजूमदार, रितु कुमार, संजय गर्ग एवं तूफान रफाई। इनके अतिरिक्त इसमें 11:11, अब्राहम एंड ठाकुर, अनोखी, बंधेज, खमीर, लेसेज, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, द रजिस्ट्री ऑफ सारीज् और द वीवर्स सर्विस सेंटर्स जैसे स्टूडियोज, ब्रांड्स एवं संगठनों का प्रतिनिधित्व रहेगा।
इस प्रदर्शनी में द देवी आर्ट फाउंडेशन, नई दिल्ली;  लेखा एंड अनुपम पोद्दार, नई दिल्ली; प्रिया पॉल, नई दिल्ली; द म्यूजियम ऑफ आर्ट एंड फोटोग्राफी, बैंगलुरू और डॉ. मोनिशा अहमद, मुम्बई द्वारा प्रासंगिक आर्ट एवं टेक्सटाईल कलेक्शनंस को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में नेचर मॉर्ट एंड आर्ट मोटिफ, नई दिल्ली और झावेरी कंटम्प्रेरी, मुम्बई का भी योगदान रहेगा। 

सोमवार, 18 जून 2018

जहांगीर में राजस्थान के 140 कलाकारों का ग्रुप-शो 26 से

जहांगीर में राजस्थान के 140 कलाकारों का ग्रुप-शो
राज. ललित कला अकादमी की सराहनीय पहल

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से प्रदेश के कलाकारों के लिए जहांगीर आर्ट गैलेरी में लगाए जाने वाले ग्रुप शो की तैयारियां इनदिनों जोरों पर हैं। इसमें समसामयिक पेंटिंग के साथ पारम्परिक व लघु शैली के चित्र, ग्राफिक व मूर्तिशिल्प शामिल हैं। जंहागीर कला दीर्घा से प्राप्त अधिकारिक जानकारी के अनुसार गैलेरी नम्बर एक, दो व तीन इस शो के लिए बुक की गई है।
हालांकि तय कार्यक्रम के अनुसार तैयारियों का काम पिछड़ा हुआ है, लेकिन उम्मीद की जा रही कि सब कुछ समय पर हो जाएगा। आयोजन का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि ब्यूरोकेसी से परे अकादमी में मनोनीत कलाजगत के लोगों द्वारा किए जा रहे नवाचारों में यह कदम एक और सुखद कड़ी है। नकारात्मक पहलू यह है कि आयोजन में पारदर्शिता का नितांत अभाव है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 26 जून से 2 जुलाई तक जंहागीर कला दीर्घा में होने वाले शो के लिए जून के तीसरे सप्ताह में अकादमी की कलादीर्घा में शो का प्रियू होना था, लेकिन तीसरा सप्ताह आधा बीत जाने तक शो के लिए चुने गए कलाकारों के नाम तक उजागर नहीं किए जा सके हैं। जानकारों के मुताबिक कारण स्पष्ट है कि चयन सूची में नामों के जुडऩे और कटने का क्रम अभी तक जारी है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसमें चयनकर्ताओं की कोई दुर्भावना है।
चयन प्रक्रिया
दरअसल आरंभ से ही चयन प्रक्रिया परिपक्व और पारदर्शी नहीं रही। चयन समिति के लिए पद्मश्री शाकिर अली, वरिष्ठ मूर्तिकार अशोक गौड़ व राजस्थान विश्वविद्यालय के कला व्याख्याता डॉ. लोकेश जैन जैसे अनुभवी व जानकार सदस्यों को चुना गया। लेकिन, इन्हें चयन के लिए फ्रीहेंड दिए जाने के बजाय प्रदेश के हजारों कलाकारों में से अकादमी द्वारा चुने हुए करीब ढाई सौ से अधिक कलाकारों के नाम व काम उपलब्ध कराए गए। इन कलाकारों में युवा कलाकारों के साथ अनुभवी कलाकार, नेशनल व स्टेट अवार्ड प्राप्त कलाकारों की सूचि शामिल थी।
बताया गया कि समिति को इनमें से करीब डेढ़ सौ के नाम व काम चुनने हैं। समिति ने विभिन्न सूचियों और केटेलॉग आदि दस्तावेजों के आधार पर 140 नाम अकादमी के समक्ष प्रस्तुत कर दिए। इसके बाद अकादमी की ओर से इन चुनिंदा कलाकारों को पत्र लिखकर और टेलीफोन के जरिए आयोजन की जानकारी देते हुए ग्रुप शो के लिए उनका काम मांगा गया। निर्धारित आयोजन के अनुसार इनमें से अधिकांश की स्वीकृति प्राप्त हो गई।
समस्या
समस्या तब आन पड़ी जब अनेक कलाकारों ने किसी न किसी कारण  से अकादमी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। कुछ बड़े कलाकारों के लिए जहांगीर के ग्रुप शो में शामिल होना महत्वपूर्ण नहीं था तो कुछ के पास वह कृति नहीं अब उपलब्ध नहीं थी, जिसे केटेलॉग में देखकर उनसेेेे वह काम मांगा गया था। किसी ने इसलिए इस आयोजन में शामिल होना उचित नहीं माना क्योंकि इसमें फलां कलाकार को शामिल नहीं किया गया। कुल मिलाकर अकादमी के पास निर्धारित समय सीमा तक पर्याप्त कलाकारों की सहमति नहीं पहुंच सकी। ऐसे में गुरूजनों के प्रभावी सुझावों पर नामों का जुडऩे और कटने का क्रम अभी तक जारी है।
सचिव का कहना है
अकादमी सचिव डा. सुरेन्द्र सोनी ने बताया कि इस शो में चुने गए कलाकारों में से 50 प्रतिशत कलाकार ऐसे युवा हैं जिन्हें पहली बार जंहागीर जैसी प्रतिष्ठित कला दीर्घा में कला प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। इस शो में 50 प्रतिशत कलाकार जयपुर व राजस्थान के जाने-पहचाने वरिष्ठ कलाकार हैं। पारम्परिक व लघुशैली के चित्रकारों की बात करने पर सचिव ने कहा कि, हालांकि अकादमी के पास ऐसे कलाकारों के पूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन फिर भी, इन विधाओं के कुछ कलाकारों को शो में शामिल किया गया है। भविष्य में इन विघाओं के कलाकारों को अकादमी से जोडऩे के प्रयासों में तेजी लाई जाएगी।
अकादमी के इस शो में शामिल होने वाले कलाकारों की सूचि उपलब्ध नहीं होने का कारण बताते हुए सचिव ने कहा कि, लगभग पन्द्रह कलाकारों  ने शो में शामिल होने की तय तिथि 10 जून तक स्वीकृति नहीं भेजी। इन कलाकारों के स्थान पर शामिल किए जाने के लिए अन्य कलाकारों के चुनाव के साथ उनकी स्वीकृति प्राप्त की जा रही है। जंहागीर में प्रदर्शनी से पहले इस शो का प्रिव्यु अकादमी दीर्घा में होगा। शो के कैटलॉग प्रकाशन का कार्य चल रहा है।
जंहागीर तक सुरक्षित रूप से कृतियां पहुंचाने के लिए अकादमी के प्रदर्शनी वाहन का उपयोग किया जाएगा। इस प्रदर्शनी वाहन में भी कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। सचिव ने जानकारी दी कि, शो के दौरान यह वाहन बारी-बारी से जंहागीर कला दीर्घा व जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट परिसर में खड़ा रहेगा। प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा ने बताया कि इस शो का संयोजन डॉ. लोकेश जैन तथा सह संयोजन आशीष श्रृंगी करेंगे।
ये तो शामिल हैं।
मूमल को यत्र-तत्र से उपलब्ध जानकारी के अनुसार जहांगीर के लिए ग्रुप-शो में शामिल होने वाले कलाकारों में दिवंगत रणजीत सिंह चूड़ावाला व सुरेन्द्र पाल जोशी सहित  पद्मश्री शाकिर अली, डॉ. लोकेश जैन, अशोक गौड़, सुमन गौड़, डॉ. नात्थूलाल वर्मा, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, सोहन जाखड़, लाखन सिंह जाट, प्रो. चिन्मय मेहता, वीरेन्द्र बन्नू, जयशंकर शर्मा, महावीर स्वामी,डॉ. अनुपम भटनागर, तिलकराज, श्वेत गोयल, शीतल चिलांगिया, आर.बी. गौतम, शरद भारद्वाज,  भीमसिंह हाड़ा, मनोज टेलर, , जगमोहन माथोडिय़ा, मणि भारतीय, पंकज गहलोत, विनोद भारद्वाज, किरण सोनी गुप्ता, खुशनारायण जांगिड़, किरण मूरडिया, कृष्णा महावर, लक्ष्यपाल सिंह, अमित राजवंशी, दीपिका हाजरा,  अजय मिश्रा, अन्नपूर्णा शुक्ला, सुधीर शर्मा, सौरभ भट्ट व आशीष श्रृंगी शामिल हैं।
इससे इंकार नहीं किया जा सकता 
बरसों से प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनहीन सीमित कार्रवाई के चलते अकादमी के जो कार्यक्रम कला मेले, छात्र प्रदर्शनी व स्टेट अवार्ड प्रदर्शनी तक सिमटे हुए थे, अकादमी के लिए कलाजगत से चुने गए मनोनीत अध्यक्ष और सचिव के आने के बाद ना केवल गतिविधियां बढ़ी हैं वरन् उनमें विविधता भी नजर आने लगी है। नई बयार से तरोताजा हुए कलाकारों का मानना है कि अब इसमें पारदर्शिता भी नजर आने लगे तो कार्यप्रणाली की विश्वस्तनीयता और बढ़ेगी।

रविवार, 17 जून 2018

आगामी कोची-मुजिरिस बैनाले में शामिल होने वाले कलाकारों के नाम सामने आए

आगामी कोची-मुजिरिस बैनाले में 
शामिल होने वाले कलाकारों के नाम सामने आए
12 दिसम्बर से आरम्भ होगा बैनाले
-राहुल सेन
आगामी कोच्चि-मुजि़रिस बैनाले भाग लेने वाले कलाकारों के नाम सामने आ चुके हैं। आयोजकों ने 12 दिसंबर, 2018 से आरम्भ होकर  29 मार्च, 2019 तक चलने वाले बैनाले के प्रतिभागी कलाकारों के नाम घोषित कर दिये हैं। इसमें 12 भारतीयों सहित 23 बिदेशी कलाकार अपनी कला के जौहर दिखाएंगे। कलाकार अनीता दुबे इस शो को क्यूरेट करेंगी।
यह कलाकार होंगे शामिल
रीना बनर्जी (भारत)
तानिया ब्रुगुएरा (क्यूबा)
विवियन काकुरी (ब्राजील)
विपिन धनुधरन (भारत)
गीत दांग (चीन)
हेरी डोनो (इंडोनेशिया)
इन्स डोजक और जॉन बार्कर (ऑस्ट्रिया + यूके)
मार्लीन डुमास (नीदरलैंड्स)
वैली निर्यात (ऑस्ट्रिया)
गुरिल्ला गल्र्स (यूएसए)
शिल्पा गुप्ता (भारत)
सुनील गुप्ता और चरण सिंह (भारत)
राणा हमदेह (लेबनान)
थॉमस हिर्शोर्न (स्विट्जऱलैंड)
ईबी इटो (डेनमार्क)
जितीश कल्लाट (भारत)
विलियम केंट्रिज (दक्षिण अफ्रीका)
गोस्का मैकगा (पोलैंड)
अन्नू पलकुनाथु मैथ्यू (भारत / यूएस)
एर्नआउट मिक (नीदरलैंड्स)
संतु मोफोकेंग (दक्षिण अफ्रीका)
शिरीन नेशात (ईरान)
जून गुयेन-हत्सुशिबा (वियतनाम)
प्रभाकर पचपूट (भारत)
माधवी पारेख (भारत)
वालिद राड (लेबनान)
शुबिगी राव (भारत)
आर्य रासजारमरीरनसूक (थाईलैंड)
पी आर सतीश (भारत)
नीलिमा शेख (भारत)
पंग्रोक सुलाप (मलेशिया)
बी.वी. सुरेश (भारत)
बार्थलेमी टोगुओ (कैमरून)
सुए विलियमसन (दक्षिण अफ्रीका)
अकरम जतारी (लेबनान)

राख हुआ ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट


राख हुआ ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट
मूमल डेस्कवर्क। स्कॉटलैंड का प्रसिद्ध व एक सौ साल से अधिक पुराना ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट जलकर राख हो गया है। इसकी इमारत में शुक्रवार रात करीब 11.15 बजे आग लगी थी। आग की भीषणता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे बुझाने में दमकल विभाग के 120 कर्मचारी व 20 गाडिय़ां रात भर जुटी रहीं।
स्कॉटलैंड के राहत और बचावकर्मियों के मुताबिक ग्लासगो शहर के बीचोबीच स्थित आर्ट स्कूल के अग्निकांड में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। स्कूल की आग आसपास की दूसरी इमारतों तक फैल गई। इसके चलते पास में स्थित नाइट क्लब और एबीसी म्यूजिक की इमारतों को भी काफी नुकसान पहुंचा। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

हालांकि आग पर शनिवार सुबह तक काबू पा लिया गया है लेकिन मलबे से धुआं अभी भी उठ रहा है। इस विश्व प्रसिद्ध इमारत का डिजाइन मशहूर आर्किटेक्ट चाल्र्स रेनी मैकिंटोश ने बनाया था। उन्हीं के नाम पर आर्ट स्कूल में एक इमारत का नाम मैकिंटोश रखा गया था।
वास्तु कला की दृष्टि से उत्कृष्ट मैकिंटोश इमारत भी आग में नष्ट हो गई है। इसे 1897 से 1909 के बीच बनाया गया था जिसे 2019 में दोबारा खोला जाना था। मई 2014 में भी इसमें आग लग गई थी। इसी के चलते इसका जीर्णोद्धार जारी था। जीर्णोद्धार पर दो से साढ़े तीन करोड़ पौंड (करीब 1&6 करोड़ रुपये से- 2&9 करोड़ रुपये) खर्च किये जाने थे ताकि इसे इसके गौरवशाली भव्यता में लौटाया जा सके।
स्कॉटलैंड की मंत्री निकोला स्टर्जन ने भी इस घटना पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा,Óयह बेहद ही गंभीर स्थिति है। मेरा पहला विचार लोगों की सुरक्षा को लेकर है, लेकिन इसकी ऐसी हालत पर मेरा दिल भी दुखी है।'

शनिवार, 16 जून 2018

सिन्धु महाकुम्भ कल सुबह साढे नौ बजे से

सिन्धु महाकुम्भ कल सुबह साढे नौ बजे से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। भारतीय सिन्धु सभा एवं सिन्धी समाज के सामाजिक, धार्मिक संगठनों की ओर से राज्य स्तरीय सिन्धी महाकुम्भ का आयोजन कल 17 जून को प्रात: 9.30 बजे से स्थानीय सीतापुर टोंक रोड़ स्थित जयपुर एक्जीबिशन एण्ड कन्वेक्शन सेन्टर के वातानुकूलित हॉल में किया जा रहा है।
कार्यक्रम संयोजक हरगुण आसनदास नेभनानी ने कहा कि सिन्धी समाज संगठित होकर अपने अधिकारों की मांग कर रहा है। सिन्धी महाकुम्भ में प्रदेश भर की पूज्य पंचायतें सांस्कृतिक,सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के सदस्य भाग ले रहे हैं। अमरापुरा के संत मण्डली और प्रदेश के अन्य संत ओर साधु समाज समिलित होंगे।
सह संयोजक मुकेश लख्याणी ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खेल मंत्री एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़ होगे। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास मंत्री चन्द्र कृपलानी शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ, उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, पूर्व प्रदश भाजपाा भाजपा अशोक परनामी, विधायक राज. सिन्धी अकादमी चेयरमैन हरीश राजानी, ज्ञानदेव आहूजा, तरूण रायश भाजपा -शहर अध्यक्ष संजय जैन, महापौर अशोक लाहोटी, ओंकार सिंह लखावत सहित कई विशिष्ट व्यक्ति समारोह में सम्मिलित होंगे।
सह संयोजक मोहन नानकानी ने कहा कि सिन्धु महाकुम्भ के माध्यम से सिन्धी समाज की 5 प्रमुख मांगे केन्द्र सरकार के समक्ष रखी जाएंगी जिसमें केन्द्रीय सिन्धी विश्वविद्यालय की स्थापना, दूरदर्शन पर पृथक सिन्धी चैनल, गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर सिन्धु संस्कृति की झांकी, सिन्धु सभ्यता और संस्कृति का राष्ट्रीय स्मारक तथा चेटीचण्ड पर राष्ट्रीय अवकाश जैसे बिन्दु सम्मिलित हैं।
प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल वाधवाणी ने कहा कि सिन्धुमहाकुम्भ का विशेष आकर्षण गुलाबचन्द मीरचन्दानी केद्वारा हरिसेवा सनातन मन्दिर के सहयोग से तैयार विशाल सिन्धु घाटी सभ्यता व संस्कृति पर आधारित विशाल प्रदर्शनी होगी।
प्रदेश महासचिव महेन्द्र कुमार तीर्थाणाी ने कहा कि बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। अजमेर की घनश्याम भगत एण्ड पार्टी सिन्धी संगीत प्रस्तुत करेगी।
जयपुर संभाग प्रभारी हीरालाल तोलानी ने कहा कि इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक दुर्गादास जी सह प्रान्त प्रचारक निम्बाराम, भारतीय सिन्धु सभा के मार्गदर्शक कैलाश चन्द एवं सोमकान्त जी भी उपस्थित रहेंगे। जयपुर के साथ प्रदेश से हजारों की संख्या में  सिन्धुजन सम्मेलन में भाग लैगे।

सैफरॉन की ऑन लाइन नीलामी में मेहता की काली को मिले 26.4 करोड़ रुपये

सैफरॉन की ऑन लाइन नीलामी में मेहता की काली को मिले 26.4 करोड़  रुपये

 गुरुवार 14 जून को हुई सैफरॉन आर्ट की ऑन लाइन नीलामी माइलस्टोन 200 ऑक्षन में तैयब मेहता की पेंटिंग काली को रिकार्ड कीमत 26.4 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। इस बिक्री से तैयब मेहता के नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
सैफरॉन आर्ट के को फाउण्डर और सीइओ दिनेश वजीरानी ने कहा कि, आधुनिकतावादी तैयब मेहता ने आज सैफरॉन आर्ट के समर ऑनलाइन नीलामी में 26.4 करोड़ रुपये में काली (1989) की बिक्री के साथ एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह पेंटिंग मानवीय मन की दुविधा,अच्छाई और बुराई की लड़ाई, सृजन और विनाश को लेकर अंतद्र्वद को दर्शाती है।
वजीरानी ने कहा कि, काली के खरीददार का नाम जाहिर नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा करना कम्पनी के नियम के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि, मेहता की काली ने आधुनिक भारतीय कला बिक्री में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है और भारतीय कला के लिए ऑनलाइन नीलामी के आगे का रास्ता खोला है।
जीवन का अधिकांश समय मुंबई में बिताने वाले मेहता का दो जुलाई 2009 को दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। साल 2007 में वह पद्म भूषण से नवाजे गए थे।
नीलामी में अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां
नीलामी में 85 प्रतिशत लॉट की बिक्री के साथ  75 करोड़ रुपये की राशि हासिल की गई। नीलामी में पांच अन्य कलाकारों - एन एस बेंद्रे, एम वी धुंधंधर, संको चौधरी, शीला मखीजानी और धनंजय सिंह के विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित हुए।
बेंद्रे की 1974 में बनी एक शीर्षकहीन कृति को 1.32 करोड़ रुपये मिले। जबकि इसका शुरुआती अनुमान 40-60 लाख रुपये लगाया गया था। धुरंधर जल रंग चित्रकला- ताराबाई फाउण्डर ऑफ कोल्हापुर कॉन्फीडरसी  जिसे चित्रकार ने 19 27 में चित्रित किया था को 60.98 लाख रुपये की बिक्री राशि प्राप्त हुई जबकि इसका शुरुआती अनुमान 9.9-13.2 लाख रुपये लगाया गया था।
संको चौधरी के कांस्य मूर्तिशिल्प का शुरुआती अनुमान 15-20 लाख रुपये लगाया थ जिसे बिक्री से  39.9 लाख रुपये प्राप्त हुए। और माखीजानी के चित्र व्हाट वेयर यू थिंकिंग (2007) को 14 लाख रुपये में बेचा गया जबकि इसका बिक्री अनुमाने 10-15 लाख रुपये लगाया गया था। धनंजय सिंह की 2013 में निर्मित कृति कृति द लास्ट ट्री  को 25.35 लाख रुपये, के बिक्री अनुमान की तुलना में 37.3 लाख रुपये की प्रप्ति हुई।
इनके साथ ही बिक्री के लॉट में वी एस गायतोंडे, राजा रवि वर्मा, एस एच रजा, मनजीत बावा, अकबर पदमसी और सुबोध गुप्ता जैसे नाम भी शामिल थे।    -गायत्री

शुक्रवार, 15 जून 2018

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए राजस्थान ललित कला अकादमी और कलाचर्चा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सृजनात्मक कला अभिरुचि कार्यशाला का समापन हुआ। समापन अवसर पर तैयार कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें वंचित बच्चे नजर नहीं आए।
अकादमी द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार आज 15 जून को इस कार्यशाला का समापन व प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । इस कार्यक्रम में  वरिष्ठ शिक्षाविद व प्रतिष्टित कलाकार डॉ. जय कृष्ण अग्रवाल और राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं ललित कला संकाय राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एस. मेहता मुख्य अतिथि थे। उन्होनेें  कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रतिभागियों के कलाकर्म की भूरी भूरी सराहना की। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए। पूर्व में यह शिविर कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए आयोजित किये जाने की बात कही गई थी लेकिन पहले ही दिन से शिविर से कच्ची बस्ती के बच्चेेे वंचित रहे। हालांकि कत्र्ता-धर्ताओं द्वारा शिविर में उन्हें शामिल करने के प्रयास किए जाने की बात कही गई लेकिन वे बच्चे नहीं जुट सके।
प्रदर्शनी सोमवार 18 जून को भी दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।

गुरुवार, 14 जून 2018

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग
प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार रणजीत सिंह चूड़ावाला की कृति राजस्थानन ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी में लगाए जाने वाले ग्रुप शो में प्रमुखता से प्रदर्शित होगी। यह कृति चूड़ावाला के कला सफर का अन्तिम पड़ाव है। अकादमी की मांग पर चूड़ावाला ने मृत्यु से पूर्व अपनी यह कृति बनाकर अकादमी को भिजवाई थी।
राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में 26 जून से 2 जुलाई तक एक ग्रुप शो होने जा रहा है। इस शो में प्रदेश के लगीाग 100 वरिष्ठ व युवा कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कला को समर्पित चूड़ावाला जी ने अपनी खराब तबियत की परवाह किये बिना इस शो के लिए कृति चित्रित की। चूड़ावाला जी का जून को निधन हो गया और यह कृति उनके कला सफर का अन्तिम पड़ाव बन गई।
जीवन परिचय

10 मई 1934 को जोधपुर में जन्में रणजीत सिंह चूड़ावाला ने भारत के प्रसिद्ध कला संस्थान जे.जे. स्कृल ऑफ आर्ट से पेंटिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। उनके परिजन बताते हैं कि, अक्षरज्ञाान से पहले ही उन्हें ईश्वरीय तोहफे के रूप में रेखाओं का ज्ञान था। जीवनयापन के लिये भारतीय रेलवे को अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने कला जगत को अपनी कलाकृतियों के रूप में अनमोल धरोहर सौंपी।
कला को समर्पित चूड़ावाला के स्वभाव में प्रकृति की सौम्यता समाहित थी और मानस में कला की तलीनता। प्रकृति को अपनी कूंचि के जरिये कैनवास पर उतारने का उन्हें महारथ हासिल था। अपनी धुन के पक्के और प्रचार-प्रसार से अलग हटकर चलने वाले चूड़ावाला रेखांकन के मामले में दक्ष थे। प्रकृति और समाज के विभिन्न रूपों को अपने चित्रों में जीवन देने वाले इस कलाकार ने लघुशैली चित्रण में भी खासा काम किया। इनकी कृतियों में कन्टेम्पररी, रियलिस्टिक व मिनिएचर का अद्भुत समावेश था। जलरंग व तैलरंग के साथ काली स्याही से उकेरे गए उनके चित्र भावाभिव्यक्ति को सजीव करते हुए देखने वालों को मोहपाश में बांध देते थे। उनके द्वारा चित्रित रघुवंश, ऋतुसंहार व शकुंतला आधारित चित्र रंग संयोजन व रेखांकन के लिए कला विद्यार्थियों की प्रेरणा बनते रहे हैं। कला मेलों में मशीनी गति से हाथोंहाथ रेखाचित्र बनाकर सौंपना उनकी रुचि में शामिल था। कुछ अर्सा पहले मूमल से हुई एक मुलाकात में उन्होंने कला जगत के बदलते परिदृश्य, कलाकारों द्वारा जल्दी से जल्दी सफलता हासिल करने की प्रवृति और संस्थाओं द्वारा बीते जमाने के शिखर चित्रकारों को नजरअंदाज करने की बात को लेकर चिन्ता जताई थी। लेकिन अगले ही पल अपनी कला साधना के सुख को जीवन की प्रधानता स्वीकार करते हुए मुस्करा दिये थे।
जयपुर के राजभवन, जवाहर कला केन्द्र व राजस्थान ललित कला अकादमी के साथ अन्य संग्राहकों के पास संग्रहित उनकी कृतियां राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। कला को समर्पित चूड़ावाला जी के सम्मान में राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा उन्हें  फैलोशिप तथा कलाविद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त करने के साथ दो बार स्टेट अवार्ड भी जीते। अभी इसी वर्ष जनवरी में सम्पन्न कला मेले में उन्हें लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।
कला को अपना जीवन मानने वाले चूड़ावाला जी बढ़ती हुई आयु व अस्वस्थता की परवाह किये बिना मृत्यु परन्त अपनी कृतियों में रंग भरकर हमेशा के लिए अमर हो गए।                 -राहुल सेन

कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए लगे कला शिविर का समापन

कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए लगे कला शिविर का समापन
कल 15 जून को कार्यशाला में तैयार कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन
राजस्थान ललित कला अकादमी व कला चर्चा समूह का प्रयास
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी व कलाचर्चा समूह द्वारा कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए अकादमी परिसर में चल रही दस दिवसीय कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। स कला अभिरूचि प्रशिक्षण के दौरान पाँच रचनात्मक विधाओं की जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी गई थी। शिविर का समापन समारोह एवं इस दौरान बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी कल 15 जून को आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन अकादमी परिसर में प्रात: 11 बजे वरिष्ठ कलाकार एवं शिक्षाविद् प्रो. सी. एस. मेहता करेंगे।
प्रदर्शनी कल तथा सोमवार 18 जून को दर्शकों के अवलोकनार्थ प्रात: 11 बजे से सांयकाल 6 बजे तक खुली रहेगी ।

अब कलाकारों को मिलेगी आर्थिक मदद

अब कलाकारों को मिलेगी आर्थिक मदद
बीमारी व शोध कार्यो में कलाकार कल्याण कोष से दी जाएगी सहायता
मूमल नेटवर्क, पटना।  बीमारी से ग्रस्त या पैसों के अभाव में आगे बढऩे में असमर्थ कलाकारों को अब बिहार सरकार आर्थिक मदद करेगी। मदद कलाकार कल्याण कोष से की जाएगी। इस सम्बन्ध में कला संस्कृति विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है।
इन परिस्थितियों में मिलेगी सहायता
बीमारी में
प्रस्ताव में सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता को तीन भागों में विभाजित किया गया है। बीमारी, प्रदर्शन कला और चाक्षुष कला। बीमारी को स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि प्रदेश का कोई कलाकार यदि किसी भी तरह की गंभीर बीमारी से ग्रसित है या किसी दुर्घटना में घायल हो गया है और उस कलाकार का ऑपरेशन करना पड़ा है वैसे कलाकार को अस्पताल के बिल अथवा प्रमाणपत्र के आधार पर सहायता अनुदान दिया जाएगा। यदि प्राकृतिक आपदा में कोई कलाकार घायल होता है तो वैसी स्थिति में संबंधित पंचायत के मुखिया और शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षद का प्रमाणपत्र देने पर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता दी जा सकेगी।
प्रदर्शनी के लिए 
प्रदर्शन कला के क्षेत्र में वैसे कलाकारों को सहायता दी जाएगी जो अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर के किसी कार्यक्रम में निश्शुल्क आमंत्रण पर प्रदर्शनी को जा रहे होगे। संबंधित कलाकार को आर्थिक मदद प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ आमंत्रण पत्र संलग्न करना होगा। ठीक इसी प्रकार चाक्षुस कला के क्षेत्र में यदि कोई कलाकार राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में आमंत्रित किए जाते हैं  तो उनके द्वारा दी जाने वाली फीस व प्रदर्शनी की तैयारी पर होने वाले खर्च के लिए सरकारी मदद के प्रावधान किए गए हैं।
शोध कार्य  के लिए
यदि कोई कलाकार मास्टर्स डिग्री, शोध कार्य के लिए एक मुश्त सहायता प्राप्त करना चाहते हैं तो उस कलाकार को शोध एवं अध्ययन से संबंधित कॉलेज के प्रमुख का प्रमाणपत्र और व्यय होने वाली राशि का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं यदि राज्य के किसी कलाकार को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे राष्ट्रीय नाट्य अकादमी, कथक केंद्र, कला केंद्र आदि में नामांकित होने का मौका मिलता है तो संबंधित कलाकार को आर्थिक मदद के लिए संस्थान में नामांकन का प्रमाण देना होगा जिसके आधार पर उसे आर्थिक मदद दी जाएगी।

कला पुरस्कारों के लिए आवेदन 31 जुलाई तक

कला पुरस्कारों  के लिए आवेदन 31 जुलाई तक
मूमल नेटवर्क,पटना। बिहार सरकार एक बार फिर राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर के कलाकारों को कला सम्मान देने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के कलाकार, कला समीक्षक, इतिहासकार और विद्वान पुरस्कारों के लिए उत्कृष्ट कला मर्मज्ञों के नाम की अनुशंसा कर सकते हैं। कलाकार स्वयं भी अपना नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। कला संस्कृति एवं युवा विभाग में नाम प्रस्तावित करने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई है।
कला संस्कृति एवं युवा विभाग ने पुरस्कारों के लिए तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। विभाग विगत कुछ वर्षों से बिहार कला पुरस्कार सह सम्मान योजना के तहत चाक्षुस, प्रदर्श कला के क्षेत्र में देश और प्रदेश के कलाकारों को सम्मानित करता है। विभाग ने चाक्षुस कला को चार और प्रदर्शन कला को छह भागों में बांटा है। कला पुरस्कार सह सम्मान 2018-19 योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के कलाकार, कला समीक्षक, इतिहासकार और विद्वान पुरस्कारों के लिए बेहतरीन कला ज्ञाताओं के नाम की अनुशंसा कर सकते हैं। कलाकार स्वयं भी अपने नाम का दावा पुरस्कार के लिए कर सकेंगे।
आयु सीमा
नवोदित कलाकारों के लिए विभाग ने 15 से 40 वर्ष की आयु निर्धारित की है जबकि स्थापित वरिष्ठ कलाकार के लिए उम्र सीमा 40 वर्ष से ऊपर निर्धारित की गई है।
पुरस्कार राशि व श्रेणी
कला पुरस्कारों के तहत चयनित कलाकार को पचास हजार से दो लाख रुपये तक की सम्मान राशि और प्रशस्ति पत्र दिए जाते हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक चाक्षुस कला के क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों को आर्ट फोटोग्राफी के लिए राधा मोहन पुरस्कार, समकालीन कला के क्षेत्र में महिला कलाकारों को कुमुद शर्मा पुरस्कार, लोक कला के क्षेत्र में सीता देवी पुरस्कार, लेखन के क्षेत्र में दिनकर पुरस्कार दिया जाएगा।
प्रदर्शर्न कला के क्षेत्र में शास्त्रीय गायन के लिए पं. रामचतुर मलिक पुरस्कार, रंगमंच के लिए भिखारी ठाकुर पुरस्कार, लोक गायन के लिए विंध्यवासिनी देवी पुरस्कार, कला लेखन में रामेश्वर सिंह काश्यप पुरस्कार, वाद्य वादन के लिए बिस्मिल्लाह खां और शास्त्रीय, लोकनृत्य के लिए अम्बपाली पुरस्कार दिए जाते हैं।
इन पुरस्कारों के साथ ही राज्य के दो वरिष्ठ कलाकारों को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी दिया जाता है।

वाराणसी में ब्रज की 'सांझी' की अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप 16 जून से

वाराणसी में ब्रज की 'सांझी' की अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप 16 जून से
मूमल नेटवर्क, वाराणसी। ब्रज की विश्व प्रसिद्ध सांझी कला की तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 16 से 18 जून तक होगा। इस कार्यशाला में पांच हजार साल पुरानी और विलुप्त हो रही इस कला परंपरा को देश-विदेश के कलाकार एक साथ मिलकर नया स्वरूप देने का प्रयास करेंगे। यह कार्यशाला ब्रज के सांझी कलाकार सुमित गोस्वामी के निर्देशन और क्रिएटिव फोरम के राजकुमार सिंह के संयुक्त प्रयासों से आयोजित की जा रही है।
इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागी सांझी कला की बारीकियों और इतिहास से रूबरू हो सकेंगेे। क्रिएटिव फोरम के कलाकार राजकुमार सिंह ने कहा कि सांझी देखने में भले ही रंगोली जैसी लगती है, लेकिन इसका महत्व कहीं ज्यादा है। श्रीकृष्ण के प्रति श्री राधा के प्रेम का प्रतिबिंब है सांझी।
उन्होंने कहा कि, शाम के वक्त श्रीकृष्ण जब राधा से मिलने आया करते थे तो राधा उन्हें रिझाने के लिए फूलों से तरह-तरह की कलाकृतियां बनाया करती थीं। जब श्रीकृष्ण गोकुल छोड़कर चले गए, तब भी श्रीराधा उनके साथ बिताए गए पलों की याद में इस तरह की कलाकृतियां बनाया करती थीं जो सांझी कला के नाम से विख्यात हुई। यह कला अब लुप्त हो रही है और इसको बढ़ावा देने के लिए ही कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि, पहले तो यह कला मंदिरों तक सिमटी और अब आलम यह है कि ब्रज में भी श्री राधा रमण मंदिर ही ऐसा है, जहां पर सांझी बनाई जाती है। इस मंदिर के पुजारी वैष्णवाचार्य सुमित गोस्वामी एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जो इस कला को बनाते हैं और इसे बचाने के लिए अपने स्तर पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सुमित गोस्वामी कहते हैं कि सप्त देवालयों में से एक श्रीराधा रमण मंदिर में पिछले 300 सालों से लगातार यह कला बनाई जा रही है। गोस्वामी का कहना है कि मंदिरों में अब यह कला देखने को नहीं मिल रही। वह अपने स्तर पर भरपूर कोशिश कर रहे हैं कि यह पुरातन कला आने वाली पीढिय़ों तक बनी रहे।
ब्रज की इस प्राचीनतम लोककला को बनाए रखने के लिए हम नई पीढ़ी को ट्रेनिंग दे रहे हैं। पानी के ऊपर और तल पर सांझी बनाने के अलावा ऑइल पेंटिंग, लीफ पेंटिंग, मिनिएचर पेंटिंग से लेकर दूसरी पेंटिंग की विधाओं में भी काम कर रहे हैं, ताकि लोगों का ध्यान मूल सांझी कला की तरफ खींच सकें।
क्या है सांझी कला
सांझी का मतलब है सज्जा, शृंगार या सजावट। मिथकों के अनुसार इस कला की शुरुआत स्वयं श्रीराधा जी ने की थी। मान्यता यह भी है कि सांझी शब्द दरअसल सांझ से बना है, जिसका अर्थ है शाम।
ब्रज में सांझी भी शाम को बनाई जाती है। इस कला का ब्रज से बड़ा गहरा नाता है। साल में एक खास मौके पर ही सांझी बनाई जाती है। माना जाता है कि शुरू-शुरू में तो श्रीराधा अपनी सखियों के साथ दीवारों पर रंगों, रंगीन पत्थरों और धातु के टुकड़ों के साथ सांझी बनाया करती थीं।
सांझी के प्रकार
1. फूलों की सांझी
2. गोबर सांझी
3. सूखे रंगों की सांझी
4. पानी के नीचे सांझी
5. पानी के ऊपर सांझी

मंगलवार, 12 जून 2018

यादों में जीवित सुरेन्द्र पाल जोशी

यादों में जीवित सुरेन्द्र पाल जोशी
कला जगत में कभी भी ना भर सकने वाले अपने स्थान को रीता छोड़ कर देश के प्रख्यात चित्रकार जोशी ने इस दुनिया से विदा ली। सुरेन्द्र पाल जोशी के जाने का दुख जितना उनके परिवार जनों को रहेगा उतना ही उनके करीबी मित्रों व पूरे कला जगत को भी। अपनी कला के साथ, ठसक व स्वाभिमान के लिए पहचाने जाने वाले जोशी ने विदा होने से पहले कला जगत के लिए अमूल्य विरासत छोड़ी है।
कुछ लेने नहीं बल्कि बहुत कुछ देने की ईश्वरीय सौगात लिए इस कलाकार का जन्म 1955 में देहरादून के मनियारवाला (गुनियालगांव) गांव में हुआ। कला के अंकुर स्कूली जीवन में ही नजर आने लगे थे। ऋषिकेश से बीए करने के बाद 1980 में लखनऊ के आट्र्स एंड क्राफ्ट्स कॉलेज में दाखिला ले लिया। और...फिर यहां से कला का जो सफर शुरू हुआ, वह कला जगत में नए कीर्तिमान स्थापित करता चला गया।
जोशी की साधना के शुरुआती साल बेहद गर्दिशभरे रहे लेकिन उनकी जीवटता ने जीत हासिल की। ...और उतरांचल के इस कलाकार ने राजस्थान को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुनते हुए 1988 में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट, जयपुर की फाइन आर्ट फैकल्टी के सहायक प्राध्यापक पद को ज्वाइन किया।
मूमल से जोशी जी का पहला परिचय राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट में सन् 2006 में हुआ जो 2013 के जयपर आर्ट समिट के पहले एडीशन के साथ गहरा हुआ। बहुत ही धीमें से अपनी बात रखना उनके स्वभाव में शामिल था। अपनी कला यात्रा के बारे में मूमल से उनकी अक्सर बात हुआ करती थी। उन्होंने बताया था कि, म्यूरल बनाने का मुझे शौक था और उस श्रप में पहचान भी मिली। आइओसी दिल्ली, यूनी लिवर मुबंई, शिपिंग कॉर्पोरेशन विशाखापत्तनम आदि स्थानों पर म्यूरल बनाए। वर्ष 1997 में ब्रिटेन से फैलोशिप मिलने के बाद वहां भी म्यूरल पर कार्य किया। लेकिन, वर्ष 2000 के बाद मैंने सिर्फ पेंटिंग पर ध्यान देना शुरू कर दिया। पेंटिंग में कई नए-नए प्रयोग किए और कई देशों में इसके लिए सम्मान भी मिला।
कलाकार के मन की उड़ान उन्हें बंधनों से आजाद होने की प्रेरणा देती रही और 2008 में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट से सेवा निवृति लेकर पूरी तरहा से कला साधना में जुट गए। शिक्षक रहते हुए ही नव कलाकारों के लिए उनके मन में कई खयाल आते- जाते रहते थे। परिणाम के रूप में कुछ साल पहले अपना श्रम और धन लगाकर उतराखण्ड सरकार के सहयोग से अपनी जन्मभूमि देहरादून में पहले राजकीय कला संग्रहालय की स्थापना की। मूमल को अपने अपने की बात साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि, यह संग्राहलय और गैलेरी प्रदेश के कला साधकों के लिए एक बेहतर मंच साबित होगा। इस संग्राहलय के बनने के साथ ही जोशी देश के ऐसे पहले कलाकार बन गए जिनके जीवित रहते उनकी कला को स्थायी रूप से प्रदर्शित करता हुआ राजकीय संग्राहलय देश को समर्पित हुआ।
जोशी की कला यात्रा केवल म्यूरल्स व पेंटिंग तक ही सिमटी नहीं रही। उन्होंनें एक लाख सेफ्टीपिन से बना हैलीकॉप्टर, 70 हजार सेफ्टीपिन से बना हैलमेट, फिल्म स्ट्रिप से बना आर्कीटेक्चर स्ट्रेक्चर बनाकर कला प्रेमियों का मन मोह लिया। समाज व देश के प्रति संवेदा के चलते उन्होंनें फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। इस वर्ष की शुरुआत यानि जनवरी के प्रथम सप्ताह में जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उनके द्वारा निर्मित वृतचित्र पहाडग़ाथा की स्क्रिनिंग की गई। इस वृत चित्र में केदार घाटी में आई भीषण बाढ़, उससे जूझते लोग एवं बचाव व राहत कार्य को बहुत ही कलात्मक तरीके से फिल्माया गया था। इतनी सारी विधाओं पर एक साथ कार्य करने के तालमेल पर हुई एक वार्ता के दौरान जोशी जी ने मूमल से कहा था कि, विधा में बदलाव जोखिमपूर्ण जरूर है, किन्तु यदि इसे चुनौती मानते हुए पूरा अभ्यास किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
अपनी कला के दम पर उन्होंने एशियन कल्चरल सेंटर फॉर यूनेस्को, (जापान), ऑल इंडिया अवार्ड, राजस्थान ललित कला ऐकेडमी, फैलोशिप फॉर म्यूरल डिजाइन बाई द ब्रिटिश ऑट्र्स काउंसिल, नेशनल अवार्ड, ललित कला ऐकेडमी (नई दिल्ली), राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड (नई दिल्ली), गोल्ड मेडल यूनेस्को आदि जैसे कई पुरस्कार व सम्मान हासिल किए।
सम्मान, सफलता व जोखिम को अपना साथी मानने वाला यह कलाकार आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी कलाकृतियों के साथ उनकी यादों का सिलसिला हमेशा हमारे बीच उनकी मौजूदगी के एहसास को बनाए रखेगा।          -राहुल सेन