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रविवार, 1 जुलाई 2018

कुछ दर्शक मिले पर बायर कोई नहीं

कुछ दर्शक मिले पर बायर कोई नहीं
कीमत 50 हजार से 16 लाख तक रखी 
मूमल नेटवर्क, मुंबई। शनिवार व रवीवार को जहांगीर आर्ट गैलरी में सजी राजस्थान के कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनी को कुछ दर्शक जरूर मिले, लेकिन बाजार ठंडा होने के कारण कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। कलाकारों ने काम की कीमत इतनी अधिक लगा रखी है कि भूले-भटके आए दर्शक सामान्य से सामान्य काम की भी असामान्य कीमत देख कर कंधे उचकाता हुआ आगे बढ़ जाता है।
आपको यह जानकर ताज्जुब हो सकता है कि प्रदर्शनी में शामिल कृतियों के मूल्य कम से कम 50 हजार रुपए और अधिकतम 16 लाख रुपए रखे गए हैं। अधिकतम मूल्य उदयपुर के आकाश चोयल की कृति के हैं, जबकि सबसे कम मूल्य 50 हजार रुपए की बात करते हुए कोई नाम लेना उचित नहीं होगा।
राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित इस शो राजस्थान 147 के संयोजक डॉ. लोकेश जैन ने ऑफ सीजन की बात स्वीकार करते हुए मूमल को जानकारी दी कि, सजी हुई कृतियों की खरीद के लिए पूछताछ तो की जा रही है लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई कृति बिक नहीं पाई है। इस स्थिति के बारे में डॉ. लोकेश ने मूमल को बताया कि, मार्केट ठण्डा है। इन्वेस्टर्स के पास पहले से ही पेंटिंग्स का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए वो नया माल खरीदने की जोखिम अभी नहीं उठाना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि, खरीददारों में अब वो लोग बचते हैं जिन्हें अपना घर सजाने के लिए कृतियों की आवश्यक्ता पड़ती है, लेकिन उनकी क्रय शक्ति 15-20 हजार से अधिक की नहीं होती।
इस शो में सजी कृतियों की कीमत के बारे में डॉ. लोकेश ने मूमल को जानकारी दी कि, पेंटिंग्स 50,000 रुपए की कीमत से शुरू होकर 16 लाख रुपए तक की हैं, जबकि मूर्तिशिल्प 40 हजार रुपए से 1.75 लाख रुपए कीमत के हैं। सबसे महंगी पेंटिंग उदयपुर के आटिस्ट आकाश चोयल की व सबसे महंगा मूर्तिशिल्प जयपुर की सुमन गौड़ का है।
डॉ. लोकेश जैन ने मूमल को जानकारी दी कि, जिन प्रमुख कलाकारों की कृतियों को खरीदने के बारे में पूछताछ हो रही है उनमें से पेंटिंग के लिए भीमसिंह हाड़ा, जी.एस. खेतांची, महावीर स्वामी, चरण शर्मा, सुरेन्द्र पाल जोशी, लोकेश जैन, महेश स्वामी, आकाश चोयल, कुष्णा महावर, प्रदीप कुमावत, आर.बी. गौतम, लक्ष्मीकांत शर्मा, संजीव शर्मा व सौरभ भ्ट्ट के नाम शामिल हैं वहीं मूर्तिशिल्प में पंकज गहलोत, सुनील चेजारा व ज्योति प्रकाश गौतम की कृतियों को गिना जा रहा है।
डॉ. लोकेश ने मूमल से बातचीत के दौरान कहा कि, यदि कोई कृति बिकती है तो शो को माइलेज मिल जाएगा। वैसे यह शो कृतियों के बेचने को केन्द्र में रखकर नहीं वरन् ऐसे प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को एक्सपोज करने के लिए रचा गया है जिनके लिए जहांगीर में शो करना एक स्वपन की तरह है। इस शो में जो सीनियर आर्टिस्ट शामिल हैं वो इसलिए कि, जूनियर्स को सीनियर्स के साथ एक ही शो में प्रदर्शित होने का अवसर मिल सके।
राजस्थान 147 को लम्बे इंतजार के बाद कुछ दर्शकों के दर्शन हो पाए हैं। बरसात के दिनों को मुंबई के कला बाजार में ऑफ  सीजन माना जाता है। ऐसे में प्रदर्शनी में दो दिन के लिए ही सही दर्शकों का आना अच्छा संकेत है।

शुक्रवार, 29 जून 2018

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)
वैसे तो कलाकारों को एकाएक गुस्सा नहीं आता, लेकिन जब आता है तो बहुत आता है। जंहागीर के शो की खबरों को लेकर शुरूआती सन्नाटे के बाद अब अनेक कलकारों में साहस का संचार हुआ है और वे खुलकर अकादमी पदाधिकारियों की मनमानी के खिलाफ अपनी बात कह रहे हैं। कला जगत के सोशल मीडिया पर भी राजस्थान 147 के नाम पर हुई धांधलियों को लेकर कलाकार अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि अनेक सयाने कलाकार स्वयं के नफे-नुक्सान का हिसाब लगाते हुए आयोजन के सकारात्मक पहलू की बात पर खुद को तटस्थ दर्शाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ नया करने के नाम पर अपनों को रेवडिय़ां बांटे जाने की कलई खुलने के बाद क्रोधित कलाकारों का पारा सातवें आसमान पर है।
अपने बूते पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवलसिंह चौहान सबसे पहले सबसे दमदार तरीके से सामने आए उसके बाद प्रतिष्ठित कलाकार हितेन्द्र सिंह भाटी ने आवाज बुलंद की, फिर डा. रीता प्रताप और रघुनाथ जी जैसे गंभीर कलाकारों ने अपनी बात खुलकर कही। मयंक शर्मा, मोहन जांगीड़, हंसराज कुमावत और ऐसे अनेकानेक कलाकारों ने अपने गंभीर विचार सामने रखे। इसके बाद उन मजबूत कलाकारों ने चौंकाया जो 147 के लिए होने के बावजूद असंतुष्ट  कलाकारों के समर्थन में खड़े हो गए। सभी ने बहुत अहम बातें सामने रखी, इनकी बातों को यहां चलते रास्ते लिख देना पाठकों के प्रति अन्याय होगा। इसलिए अगले लेख में  शीघ्र  ही आप इन जैसे बहुत से बिंदास कलाकारों के विचारों से रूबरू होंगे।
कला जगत में मूमल की निर्भीक रिपोर्टिंग के चलते सबसे पहले यह बात सामने आई कि चयन सूची बहुत गोपनीय तरीके सें तैयार हो रही है। उसमें चल रही जोड़-तोड़ के चलते उसे अंतिम रूप दिए जाने में देर हो रही है। रेवडिय़ां बाटने में जुटे अकादमी के कर्ताधर्ताओं को इस बात का पूरा अंदेशा था कि सूची अगर जयपुर में ही आउट हो गई तो कला जगत के असंतोष को संभालना कठिन हो जाएगा। ऐसे में पूर्व नियोजित देरी को कारण बताते हुए यहां होने वाले शो के प्रिव्यू को रद्द कर दिया गया।
अधिकारियों के मुंबई रवाना होने से पूर्व कैटलॉग छपकर आ गए, लेकिन उसे यह कहकर दबाए रखा गया कि शो से पहले कैटलॉग जारी नहीं किए जा सकते। हालांकि अकादमी अधिकारियों की ओर से संभावित हरी झंड़ी दिखाए जाने के बाद चयनित कलाकार हरकत में आ गए थे। यह कलाकार स्थानीय अखबारों में स्वयं के चयनित होने की खबरें प्रकाशित कराने लगे थे। इन कलाकारों और अन्य सूत्रों से जानकारियां एकत्र करने का कठिन कार्य पूरा करके मूमल ने अपने न्यूज पोर्टल पर सबसे पहले सूची प्रकाशित कर दी। समय की कमी के चलते मूमल ने सूची की समीक्षा का काम अपने सुधि पाठकों के सुपुर्द कर दिया।
कुछ ही समय बाद कलाकारों में असंतोष उभरने लगा और राजस्थान 147 के आयोजन की स्क्रिप्ट लिखने वाले डिजायनर कलाकारों के हाथ-पांव फूलने लगे। यह बताने की कोशिश होने लगी कि सब कुछ ठीक-ठाक है। लेकिन, ऐसा था नहीं। अकादमी के अधिकारियों ने कहा कि 147 में सभी का सिलेक्शन तो संभव है नहीं। चयन का आधार पूछे जाने पर बताया गया कि यह सब चयन समिति के अधिकार क्षेत्र की बात है। सवाल बहुत से थे, लेकिन सभी के जवाब गोलमोल थे।
हालात को देखते हुए आयोजन के स्क्रिप्ट रायटर और दरबारी कलाकारों ने कर्ता-धर्ताओं को सुझाव दिया कि जयपुर के स्थानीय अखबारों के अपने पत्रकारों से अपने अनुरूप खबरे छपवा लो। फाइलों में तो केवल उन्हें ही लगाना है। इसका परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। मजे की बात यह रही कि खबरों में दिए जाने वाले कलाकारों के चुनिंदा नाम भी वह थे जो मठाधीशों के सबसे करीब हैं। इनमें वे भी शामिल हैं जिनकी प्रभावशाली कला के चलते यह करीबियां पिछले कला मेले के बाद से ही देखी जा रही हैं।
अनेक कलाकारों ने अकादमी अधिकारियों की निरंकुशता और मनमानी को लेकर संबंधित उच्चाधिकारियों, संस्कृति मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक जानकारी पहुंचाने का विचार व्यक्त किया है। हो सकता है कि आपको यह पता नहीं हो कि सरकार केवल स्थानीय अखबारों के समाचारों को सहेज कर ही संतुष्ट नहीं हो जाती। अपनी विश्वस्तनीयता के चलते मूमल अपने न्यूज पोर्टल के जरिए प्रदेश के अनेक उच्चाधिकारियों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कार्यालय व आवास तक पहुंचता है और संबंधित लोगों द्वारा ध्यान से देखा और पढ़ा जाता है। मूमल के पुराने पाठक इसके प्रभाव से परिचित भी हैं। पर यहां सवाल शिकायत का नहीं व्यवस्था को सुधारने का है। प्रथम चरण में उसी पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

बुधवार, 27 जून 2018

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। अंतत: वही हुआ जिसकी आशंका थी, राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी के ग्रुप शो के लिए किए कलाकारों के चयन को लेकर प्रदेश के कला जगत में असंतोष मुखर होने लगा है।
चयन की प्रकिया में हो रही अनावश्यक देरी और असामान्य गोपनियता के चलते जानकारों को लिस्ट में जबरदस्त जोड़-तोड़ की आशंका होने लगी थी। नतीजतन अब सामने आया है कि जिन कलाकारों को अकादमी की ओर से  फोन करके उनका काम मंगवाया गया था, पहले उनको सूची में स्थान मिला, लेकिन जोड़-तोड़ के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अंतिम सूची में उनका नाम नदारद था।
जयपुर के युवा कलाकार सुनील कुमार कुमावत के अनुसार 21 या 22 तारीख को प्रदर्शनी के संयोजक लोकेश जैन ने फोन करके उसका काम मंगवाया था। सुनील ने तत्काल अपना काम अकादमी पहुंचा दिया था। सूची में उसका नाम शामिल हुआ भी था, लेकिन कैटलॉग में उसका नाम नदारद था। उल्लेखनीय है कि लगभग अंतिम दौर की जिस सूची में सुनील कुमावत का नाम था, उसमें महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल नहीं था, लेकिन कैटलॉग में महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल है।
कोटा से मिली जानकारी के अनुसार वहां के तीन वरिष्ठ कलाकारों ने तो अकादमी के मांगे जाने पर स्वयं अपना काम जयपुर जाकर अकादमी तक पहुंचाया था। अकादमी द्वारा दिए गए भरोसे के आधार पर कोटा की स्थानीय मीडिया को अपना काम जहांगीर कला दीर्घा में प्रदर्शित होने की जानकारी भी दी। सभी प्रमुख अखबारों ने इन सीनियर कलाकारों के समाचार भी प्रकाशित किए। अब कैटलॉग में नाम व काम नहीं पाकर उनकी स्थिति बयान करने लायक नहीं रही। इनमें शुभूसिंह चौबदार, डी.पी. छाबड़ा व डा. धांसू अन्नूसिंह धाकड़  शामिल हैं। शुभूसिंह चौबदार ने तो फोन ही स्विचऑफ कर दिया।
ऐसे मामलों के संबंध में अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी का कहना है कि इस आयोजन के लिए कलाकारों के चयन का काम अकादमी द्वारा गठित अनुभवी व जिम्मेदार कलाकारों की एक समिति ने किया है। इसमें अधिकारियों की भूमिका नहीं थी।

सोमवार, 25 जून 2018

जहांगीर ग्रुप शो:

जहांगीर ग्रुप शो:
अधिकारियों का दल विमान से रवाना
कैटलॉग भी विमान में लेकर जाना पड़ा
एक दर्जन से अधिक लोग काम में जुटे
तीन दीर्घाओं में करीब सौ कृतियां सजेंगी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा प्रदेश के चुनिंदा कलाकारों के लिए मुंबई की जहांगीर कला दीर्घा में कल 26 जून से आरंभ होने वाले ग्रुप शो के लिए अकादमी के अधिकारियों और उनके सहायकों का दल आज मुंबई पहुंच गया। यह दल जयपुर से आज सुबह विमान से रवाना हुआ। इनमें अध्यक्ष अश्विन दलवी, सचिव सुरेंन्द्र सोनी, प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा, शो के संयोजक लोकेश जैन, सह संयोजक आशीष श्रंगी, अध्यक्ष के निजी सचिव व शो के संयोजक की सहायिका के रूप में एक महिला शामिल हैं। इससे पहले अकादमी के प्रदर्शनी वाहन में कलाकृतियों के साथ लगभग आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी 23 जून को मुंबई के लिए रवाना हुए थे।
कैटलॉग भी विमान में?
पूर्व में कलाकारों के चयन में हुए विलंब के कारण हुई देरी के चलते शो के कैटलॉग छपने के बाद एन वक्त पर अकादमी में पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे में अधिकारियों का दल अपने लगेज में शामिल कर बहुत सीमित मात्रा में कुछ कैटलॉग लेकर जा रहे हैं। अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी के अनुसार कैटलॉग प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद ही जारी किया जाएगा।
शेष कैटलॉग का स्टॉक जयपुर अकादमी कार्यालय मेें कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। अधिकारियों ने इनमें से एक भी कैटलॉग किसी को नहीं दिए जाने के कड़े निर्देश कर्मचारियों को दिए हैं। बताया जा रहा है कि वे मुंबई से लौटने के बाद इसका वितरण अपने अनुरूप करेंगें।
करीब सौ कलाकृतियां सजेंगी
उधर मूमल के मुंबई सूत्रों के अनुसार राजस्थान अकादमी के लिए बुक तीन दीर्घाओं के लिए 26 जून से 2 जुलाई तक के लिए शुल्क व अन्य खर्च के रूप में लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक का भुगतान होगा। यह दीर्घाएं अकादमी को 26 जून को सुबह सौप दी जाएंगी। इन तीन दीर्घाओं में लगभग 100 कलाकृतियां लगाने के लिए स्थान है। कलाकृतियां लगाए जाने के बाद शाम को शो का औपचारिक उद्घाटन होगा।
( 147 चयनित कलाकारों की सूचि व अन्य जानकारियां देखें अगली खबर में )