बुधवार, 17 जुलाई 2019

ललित कला अकादमी में उप सचिव और अन्य पदों के लिए भर्ती

ललित कला अकादमी में उप सचिव और अन्य पदों के लिए भर्ती
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली।
ललित कला अकादमी ने उप सचिव और अन्य पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र उम्मीदवार 13 अगस्त 2019 को या उससे पहले ऑफलाइन आवेदन के माध्यम से पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। पात्र उम्मीदवार 12 अगस्त 2019 को या उससे पहले डॉ। उत्तम पचारने, ललित कला अकादमी के अध्यक्ष को निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन भेज सकते हैं।
रिक्ति का विवरण
उप सचिव (प्रशासन और लेखा): 01 पद
उप सचिव (कार्यक्रम / प्रलेखन और प्रकाशन): 01 पद
क्षेत्रीय सचिव: 02 पद
उत्पादन सहायक: 01 पद
नौकरी करने का स्थान
ललित कला अकादमी, नई दिल्ली

सोमवार, 24 जून 2019

राजस्थानी मांडना नवीन कला विधाओं संग

राजस्थानी मांडना नवीन कला विधाओं  संग
मूमल नेटवर्क, अजमेर। राजस्थानी मांडना नवीन कला विधाओं  संग कार्यशाला का एक दिवसीय आयोजन लोक कला संस्थान द्वारा किया गया।
कार्यशाला में शामिल कला शिक्षक लक्ष्य पाल सिंह राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि, लोक कलाएं हमारे जीवन का अभिन्न अंग रही है, वर्तमान में यह कलाएं विलुप्त होने के कगार पर है इन्हें संरक्षित करने व आमजन की इनमें रुचि जागृत करने के लिए इन्हें नवीन कला विधाओं के साथ चित्रित किया जाए तो यह अधिक आकर्षक एवं मनभावन होगी।
कार्यशाला संयोजक लोक कला संस्थान के संजय सेठी ने बताया कि कार्यशाला में कला प्रेमियों को परंपरागत मांडना को नवीनता के साथ चित्रित करने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होने कहा कि,  कार्यशाला में भाग लेने वाले कलाकार अपनी नवीन पेंटिंगो के साथ शीघ्र अजमेर में भव्य कला प्रदर्शनी का आयोजन करेंगे। आयोजन में अलका शर्मा, मीनाक्षी मंगल, किरण खत्री व छवि सैनी का विशेष सहयोग रहा।

मंगलवार, 18 जून 2019

टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को खूबसूरत तस्वीर में बदल देगा यह टूल

टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को खूबसूरत तस्वीर में बदल देगा यह टूल
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। अब केवल आर्टिस्ट नहीं, आम आदमी भी खूबसमरत पेंटिंग बना पाएगा। यह संभव होगा अभी हाल ही ईजाद हुई नई टेक्नॉलजी से। यह टेक्नॉलजी रफ फॉर्म में बनाई गई टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को खूबसूरत तस्वीर में बदल देगी।
माइक्रोचिप बनाने वाली कंपनी एनविडिया ने यह सिस्टम मार्च में लॉन्च किया था, जिसे अब सभी के लिए जारी कर दिया गया है। आप इसका फ्र्री ऑनलाइन वर्जन ट्राइ भी कर सकते हैं। इस टूल का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको इसके पेज पर नजर आ रहे टर्म ऐंड कंडीशन्स के बॉक्स पर टिक करना होगा।
इसके बाद आपको पेड़, पानी, पहाड़ जैसे लेबल चुनकर एक रफ पेंटिंग करनी होगी। इसमें एक साइड आपको पेंटब्रश टूल से अपने मनमुताबिक लाइनें ड्रा करनी होंगी। इसके बाद पेंट बकेट सिंबल के रूप में नजर आ रहे फिल्टर टूल से आप कलर भर सकेंगे। ऐसा करने के बाद आपको अपनी पेटिंग के राइट पर एक शानदार तस्वीर नजर आएगी, जिसका डमी आपने बाएं साइड तैयार किया है।
यह ऑनलाइन टूल अभी बीटा वर्जन में हैं, इसलिए इसकी पेंटिंग अभी पूरी तरह से पर्फेक्ट नहीं है। कंपनी का कहना है कि यह टेक्नॉलजी उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी जिनके लिए आर्टिफिशल वल्र्ड तैयार करना, उनके काम का हिस्सा है। आर्किटेक्चर, अर्बन प्लानर, लैंडस्केप डिजाइनर और विडियो गेम डिवलपर्स के लिए यह टूल उनके काम को काफी आसान कर देगा।
कैसे काम करता है यह टूल
यह टूल जेनेरेटिव ऐडवर्सियल नेटवर्क (जीएएन) सिस्टम के जरिए काम करता है, जिसमें एक ऐल्गोरिदम लैंडस्केप को तैयार करता है और दूसरा, इसे इसकी वास्तविककता के आधार पर रेट करता है।
साभार नवभारत टाईम्स

शनिवार, 15 जून 2019

केरल में मंदिर कलाकृति पर बनेगा संग्रहालय

केरल में मंदिर कलाकृति पर बनेगा संग्रहालय
मूमल नेटवर्क, कोच्चि। केरल सरकार एक ऐसे संग्रहालय का निर्माण कर रही है जिसमें राज्य की मंदिर कलाकृति और त्रिशूर जिले के एक प्राचीन शहर से संबद्ध रीति रिवाजों पर प्रकाश डाला जाएगा। इससे मन्दिर मूर्ति शिल्प पर किए जाने वाले शोध कार्यों को बढ़ावा व सहयोग मिल पाएगा। 3.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला प्रस्तावित संग्रहालय दक्षिण भारत में अपने तरह का पहला संग्रहालय होगा जो कोडुंगल्लूर शहर में बनाया जाएगा। कोडुंगल्लूर शहर को इसके दो सहस्राब्दी पुराने मंदिर के लिए जाना जाता है। सूत्रों ने बताया कि, श्री कुरुम्बा भगवती मंदिर के नाम से प्रसिद्ध चेरा काल के धार्मिक परिसर को मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट (एमएचपी) के तहत संरक्षण और नया रूप दिया जा रहा है। इसी परिसर में संग्रहालय का निमार्ण प्रस्तावित है। यह भारत के सर्वाधिक प्राचीन मन्दिरों में से एक है। इसमें भद्रकाली की आठ भुजाओं वाली मूर्ति है जिन्हें 'कोडुंगलुर अम्माÓ के नाम से अधिक जाना जाता है।

कलाकृतियां सिखाएंगी सूर्य नमस्कार

कलाकृतियां सिखाएंगी सूर्य नमस्कार
एनसीजेडसीसी में कमल की पंखुडिय़ों पर अब सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राएं नजर आएंगी। इसे अंतिम रूप देने में पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार लगे हैं। राज्यपाल करेंगे 17 जून को लोकार्पण।
मूमल नेटवर्क, प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में सूर्य नमस्कार  को प्रदर्शित करती कमल के फूल पर आसीन कृतियों को लगाया जाएगा। यहां प्रतिमाएं यह बताएंगी कि आप किस तरह सूर्य नमस्कार करें। सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राओं पर आधारित कलाकृतियां देश को जल्द ही समर्पित की जाएंगी। योग विधा में यह अनोखी पहल हो सकती है। फाइबर वाली इन कलाकृतियों को पश्चिम बंगाल से आए मूर्तिकार गढ़ रहे हैं। कुंभ के सफल आयोजन से दुनिया भर में अपनी चमक बिखेरने वाले प्रयागराज में सूर्य नमस्कार के तरीके को कला के माध्यम से अनूठे अन्दाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
ऐसी है कृतियां
एनसीजेडसीसी ने सूर्य नमस्कार के निमित्त तैयार की जा रही प्रतिमाओं को अभी तक कोई नाम नहीं दिया है। इसे बनाने का उद्देश्य है कि योग प्रेमियों को सूर्य नमस्कार की सभी मुद्राओं की जानकारी सहज तरीके से हो। मूर्तिकार इसे कमल के फूल पर गढ़ रहे हैं।  एक-एक पंखुड़ी पर सूर्य नमस्कार की अलग-अलग मुद्राओं को दर्शाते हुए प्रतिमाएं गढ़ी जा रही हैं। बीच में एक योगी की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में होगी।
सभी मुद्राओं के सामने उनके नाम भी रहेंगे। इस कलाकृति का निर्माण सात मई से शुरू हुआ था। इस पर 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च आने की बात संस्थान के जिम्मेदार कह रहे हैं। कुल कितनी राशि खर्च होगी, यह बता पाने की स्थिति में वह अभी नहीं हैं। कलाकारों का भी यही कहना है कि यह प्रतिमाएं शिल्प व निर्माण कला के लिए अप्रतिम उपहार होगा।
बोले एनसीजेडसीसी के निदेशक
एनसीजेडसीसी के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर बताते हैं कि दिल्ली में तैनाती के दौरान वह इसे वहीं बनवाना चाहते थे लेकिन, शायद यह कलाकृति प्रयागराज की किस्मत में लिखी थी। महात्मा गांधी कला वीथिका के सामने पार्क में इसका निर्माण कराया जा रहा है। पास में योग की कक्षाएं चलती हैं। इस कला वीथिका में अक्सर प्रदर्शनी भी लगती है। इसलिए वहां कला पे्रमियों का आना जाना अधिक होता है।
राज्यपाल करेंगे लोकार्पण
इस कलाकृति का लोकार्पण राज्यपाल रामनाईक के हाथ से कराने का कार्यक्रम तय किया गया है। अभी तक 17 जून को लोकार्पण की तैयारी है लेकिन इसमें बदलाव किया जा सकता है।
साभार दैनिक जागरण

सोमवार, 10 जून 2019

कला से संवरता पर्यावरण


कला से संवरता पर्यावरण
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आज पर्यावरण संरक्षण एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है और प्रदूषित भविष्य मुंह फैलाए हमारा इंतजार कर रहा है. प्रदूषण आज हर तरफ है और जीवन में उपयोग आने वाली लगभग हर वस्तु के साथ प्रदूषण जुड़ गया है, चाहे वह यातायात के साधन हों, खाने-पीने की चीजें हों, उत्पादन के साधन हों यह हमारा काम आसान बनाने वाले कंप्यूटर और मोबाइल, सब प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं और यह प्रदूषण रोजाना कई लोगों की जान ले रहा है. आज इसी प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ रही है और पूरे विश्व में तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। आने वाले वक्त में यह समस्या और ज्यादा बढऩे वाली है अगर अभी से कुछ मजबूत कदम नहीं उठाये गए और लोगों में जागरूकता नहीं फैलाई गई. इस समस्या को भांपते हुए और विश्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कलाकार भी लोगों में इसके प्रति जागरूकता लाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं और अपनी कला के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दे रहे हैं। ऐसे ही एक युवा कलाकार हैं जयपुर के मुकेश ज्वाला जिन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू किया है और वे अपनी कलाकृतियों के जरिये यह सन्देश फैलाने के प्रयास में लगे हैं. स्कूलों और कॉलेज में छात्रों कोपर्यावरण के विषय में जागरूक करने और पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व समझाने के साथ-साथ ही मुकेश ज्वाला ने अब अपना रुख कॉर्पोरेट जगत की ओर किया है। हाल ही मुकेश ज्वाला ने साथी कलाकार सुनील कुमावत के साथ मिलकर भारतीय स्टेट बैंक के लिए इलेक्ट्रोनिक कचरे से एक आकर्षक प्रतिमा का निर्माण किया है और प्रतिमा के जरिए पर्यावरण संरक्षण के सन्देश और महत्व को बहुत अच्छे तरीके से समझाया है।

यह है प्रतिमा
प्रतिमा अपने बाएं हाथ में पृथ्वी को सीने से लगाए नजाकत से इस प्रकार संभाले हुए है जिस तरह से एक माँ अपने बच्चों को संभालती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है। इस प्रतिमा के जरिये जहाँ एक ओर बढ़ते इलेक्ट्रोनिक कचरे का कलात्मक प्रबंधन दिखाया गया है वहीँ दूसरी तरफ स्टेट बैंक के लिए भी एक इतिहास रचा गया है. मुकेश ने साथी कलाकार सुनील के साथ मिलकर पहली बार स्टेट बैंक को एक मानव रूप में अवतरित किया है और बैंक को एक प्रगतिशील महिला का रूप दिया है।
इस 15 फीट ऊंची कलाकृति को भारतीय स्टेट बैंक के जयपुर स्थित स्टेट बैंक लर्निंग एंड डेवलपमेंट सेण्टर में लगाया गया है। इस कलाकृति को आधिकारिक तौर पर 'पुनर्नवा' (रिन्यूड) नाम दिया गया है।  40 दिन में बनने वाली प्रतिमा में कंप्यूटर के लगभग 8000 पाट्र्स लगाए गए हैं। इसमें 20 सीआरटी मॉनिटर, 70 सीपीयू , 110 कीबोर्ड  और  कम्प्युटर  का  अन्य समान जैसे माउस, मॉड़म, सॉकेट, हार्डडिस्क, डीवीडीप्लेयर, फ्लॉपि ड्राइव, रैम, एसएमपीएस और  सीपीयू  की बॉडी का इस्तेमाल किया गया है। कलाकृति का ढांचा बनाने में लोहे का इस्तेमाल किया गया और उसके ऊपर इलेक्ट्रोनिक वेस्टका इस्तेमाल किया गया है। इलेक्ट्रोनिक कचरे से बनी यह प्रतिमा आकर्षक है। प्रतिमा के हाथ में प्रदर्शित आधे ग्लोब की समतल जगह पर बिल्डिंगे बनाई है जो पृथ्वी पर हो रही गतिविधियों को दर्शाती है । कलाकारों ने इसे मदर एसबीआई नाम देते हुये स्टेट बैंक को एक माँ के रूप में प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। कलाकारों ने पहली बार स्टेट बैंक का मानवीकरण करने का प्रयास करते हुए बैंक के कर्मचारियों, शाखाओं और उत्पादों आदि को एक साथसमेटकर एक इकाई में मानव शरीर के रूप में प्रदर्शित किया ताकि स्टेट बैंक का नाम आते ही एक छवि जेहन में उभर सके। यह प्रतिम स्टेट बैंक के जयपुर मंडल के तत्कालीनमुख्य महाप्रबंधक विजय रंजन की पहल पर तैयार हुई है। 

राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में 17 जून से समर क्लासेज


राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में 17 जून से समर क्लासेज
कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन का दिया जाएगा प्रशिक्षण
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में 17 जून से समर क्लासेज का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 27 जून तक चलने वाली क्लासेज का रजिस्ट्रेशन कार्यशाला उद्घाटन से पूर्व संगीत विभाग में सुबह 8 बजे से होगा।
फाईन आर्ट की डीन व संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने जानकारी दी कि, समर क्लासेज का आयोजन विद्यार्थियों के कौशल विकास हेतु किया जा रहा है उन्हों ने कहा कि समर क्लासेज का आरम्भ पहली बार 2017 से किया गया था। पूर्व के दो वर्षों में गायन एवं सितार वादन का प्रशिक्षण दिया गया। अब दो वर्षों की क्लासेज में कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कक्षाओं का समय सुबह 9 बजे से साढे 10 बजे तक रहेगा।

इन कक्षाओं की उपयोगिता के बारे में डॉ. तैलंग ने कहा कि, विद्यालय स्तर पर कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन के विषय नहीं होने के कारण इन विपषयों में कॅरियर चुनने वालों के लिए यह कक्षाएं लाभदायी सिद्ध होंगी। सुपरिचित तबला वादक डॉ. अंकित पारीक एवं नृत्यांगना तरूणा
जांगिड़ पारीक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। कार्यशाला के समापन पर विद्यार्थियों का प्रदर्शन होगा एवं उन्हें प्रमाणपत्र द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

कार्यशाला का समापन, चित्रकार हुए सम्मानित

कार्यशाला का समापन, चित्रकार हुए सम्मानित
प्रदर्शनी की शोभा बढ़ाएंगी कलाकृतियां
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द द्वारा आयोजित राज भवन चित्रकार  शिविर का कल 10 जून को समापन हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागी कलाकारों को राज्यपाल महामहिम राम नाईक ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। शिविर में तैयार कलाकृतियों का प्रदर्शन अकादमी दीर्घा में अभी कुछ देर बाद 11 बजे से किया जाएगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री योगेन्द्र बाबा करेंगे।
कल शाम 5 बजे एक समारोह के साथ राज भवन चित्रकार  शिविर  का समापन हुआ। इस अवसर पर संस्कार भारती  के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेन्द्र एवं शिविर संयोजक गिरीश चन्द्र भी उपस्थित थे। महामहिम राम नाईक ने प्रतिभागी कलाकारो द्वारा सृजित कलाककृतियों का अवलोकन किया। राज्यपाल ने भेंटस्वरूप प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं पुस्तकें प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इसके साथ ही  पद्मश्री बाबा योगेन्द्र तथा शिविर संयोजक गिरीश चन्द्र ने भी कलाकारों को भेंटस्परूप अंगवस्त्र एवं मिष्ठान प्रदान किए।
शिविर में तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी अकादमी दीर्घा में लगाई गई है, जिसका उद्घाटन आज सुबह 11 बजे पद्मश्री बाबा योगेन्द्र करेंगे। यह प्रदर्शनी 20 जून तक चलेगी।
इन कलाकारों ने लिया शिविर में भाग
 सांगली महाराष्ट्र से मंगेश आंनद राव पाटिल, येओले महाराष्ट्र से नानासाहेब भाउसाहेब, पुणे महाराष्ट्र से मंजिरी महेन्द्र मोरे, पुणे से ही उत्तम रामचन्द्र साठ व सुरभि ग्वालेकर, लखनऊ उत्तर प्रदेश से अमित कुमार व कमलेश्वर शर्मा ने शिविर में भाग लिया। इनके साथ महाराष्ट्र  के मनोजकुमार एम साकल व सत्याजीत वारेकरे, दिल्ली के भारत भूषण शर्मा एवं संयोजक गिरीश चन्द शिविर प्रतिभागी रहे।

रविवार, 9 जून 2019

भारत की महिला प्रिंटमेकर्स का प्रदर्शन 12 जून से पोलैंड में

भारत की महिला प्रिंटमेकर्स का प्रदर्शन 12 जून से पोलैंड में
जयपुर की पुष्पा दुल्लर की कृति करेगी प्रदेश का प्रतिनिधित्व
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत की 51 महिला प्रिंटमेकर्स की कला का प्रदर्शन 12 जून से पोलैंड में होगा। 'स्त्री-विजनÓ नाम से आयोजित हो रही इस प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी द्वारा यूजीनियस गेप्पर्ट अकादमी ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन, रॉक्लो, पॉलेंड के साथ मिलकर किया जा रहा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन रॉक्लॉ के राष्ट्रपति जेसेक सतरिक 12 जून को बेतोनेवी गैलेरी में करेंगे।
अकादमी अध्यक्ष उत्तम पचारणे ने जानकारी दी कि वर्ष 2012 में ललित कला अकादमी ने पोलैण्ड की छापा प्रदर्शनी की मेजबानी की थी। स्त्री विजन प्रदर्शनी उसी क्रम में आयोजित की जा रही है।
डॉ. उत्तम पाचारणे ने ललित कला अकादेमी यूजीनियस गेप्पर्ट अकादमी ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन, रॉक्लो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, हम आभारी है कि उन्होंने अपने विश्वविद्यालय में 51 भारतीय महिला छापाकारों की प्रदर्शनी 'स्त्री-विजऩÓ के आयोजन का अवसर प्रदान किया। यह केवल एक आयोजन ही नहीं है बल्कि दोनों देशों के मध्य साहचर्य का द्वार है। भारत और पौलेंड के मध्य मजबूत और गहरे संबंध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक सहयोग के पहले समझौते पर वर्ष 1957 में हस्ताक्षर किए गए थे और अब यह मित्रता 61वें वर्ष में प्रवेश कर रही है तो इससे अधिक उपयुक्त और कोई आयोजन नहीं हो सकता। अकादमी के अपने संग्रह में भी कई पॉलिश कलाकारों की कलाकृतियां है। यह प्रदर्शनी भारत और पौलेंड की मित्रता और कला जगत के लिए ऐतिहासिक है। इस प्रदर्शनी के लिए कृतियों को विशेष तौर से चुना गया है।
इन महिला प्रिंटर्स की कलाकृतियां होंगी प्रदर्शित
अनीता दास चक्रवर्ती, अनु गुप्ता, अनुपम सूद, अस्मा मेनन, अवनी बंसल, डिम्पल बी. शाह, डिम्पल चंदत, दिव्या चतुर्वेदी, दुर्गा कैन्थोला, गौरी वेमुला, हेम ज्योतिका, हेमावती गुहा, जिन सुक शिन्दे, ज्योति देवघरे, कंचन चंदर, काईका शाह, किन्नारी तोन्दलेकर, क्षितीज वाजपेयी, लज्जा शाह, लीना घोष, मेघा सतपालकर, नैना दलाल, नंदिनी पन्तवानी, नेहा जायसवाल, पौलॉ सेन गुप्ता, पियाली पॉल, प्रेया भगत, प्रियंका बतरा, पुष्पा दुल्लर, रजनी साहनी, रीनी धूमल, सतविंदर कौर, सीमा गोन्दानी, सीमा कोहली, शालिनी, श्रद्धा तिवारी, सोघरा खुसरानी, सोनल वाष्र्णेय, स्तुति सोनकर, सुचेता घाटगे, सुषमा यादव, तंद्र भद्रा, तनूजा राणे, तेजस्विनी सोनावानी, उर्मिला वी.जी, विशाखा आप्टे की कृतियां प्रदर्शनी में शामिल हैं।

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

सिन्धी मातृ भाषा दिवस पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न

सिन्धी मातृ भाषा दिवस पर आयोजित
चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न
मूमल नेटवर्क, अजमेर। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् की राजस्थान इकाई द्वारा मातृ भाषा दिवस के अवसर पर कल 21 फरवरी को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सूचना केन्द्र की चित्रकला दीर्घा में आयोजित प्रतियोगिता का शुभारम्भ वरिष्ठ चित्रकार डा.राम जैसवाल की अध्यक्षता एवं प्रो. सुरेन्द्र भटनागर के विशिष्ठ आतिथ्य में हुआ। प्रतियोगिता में 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती तथा इष्ट देव झूलेलाल के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ । प्रतियोगिता में एच.के.एच. सीनियर पब्लिक स्कूल, सावित्री बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, आदर्श मोईनिया इस्लाममिया स्कूल, आदर्श विद्या निकेतन, पुष्कर रोड, स्वामी विवेकानन्द आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय, सैन्ट मैरीज स्कूल, डी.बी.एन., राजकीय सावित्री कन्या महाविद्यालय, डी.ए.वी. कालेज, के लगभग 150 से अधिक छात्र एवं छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगित तीन वर्गों में आयोजित की गई । इस अवसर पर अजमेर के वरिष्ठ चित्रकारों अजयपाल गहलोत, बनवारी लाल ओझा, अलका शर्मा व संजय सेठी ने भी मातृभाषा को समर्पित चित्र बनाए।
प्रतियोगिता के समापन सत्र में मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए विशिष्ठ आमंत्रित सदस्य व विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि यदि हम अपनी मातृभाषा से जुड़े रहते हैं तो हम अपने संस्कारों एवं संस्कृति से जुड़े रहते हैं। हमें घर में आवश्यक रूप से मातृभाषा में व्यवहार करना चाहिए। हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी के साथ साथ हमें अपनी मातृभाषा का पूरा ज्ञान होना चाहिए। इस अवसर पर राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् के सदस्य एवं कार्यक्रम के प्रमुख संयोजक डॉ. सुरेश बबलानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समापन सत्र में प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थीयों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

इन्हें मिला पुरस्कार
तीन वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता के प्रथम वर्ग कक्षा 6 से 8 तक का प्रथम पुरकार सैन्ट मैरीज स्कूल की अक्षरा माहेश्वरी को, द्वितीय पुरस्कार स्वामी विवेकानन्द आदर्श विद्यालय के निखिल नंगवारा को तथा तृतीय पुरस्कार स्वामी विवेकानन्द आदर्श विद्यालय के ही वैभव शमा को प्राप्त हुआ। सैन्ट मैरीज की प्रियांशी सक्सैना वएच.के.एच.विद्यालय की कोमल सोलंकी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
द्वितीय वर्ग कक्षा 9 से 12 में एच.के.एच.स्कूल की रोशिता वर्मा को प्रथम, डी.बी.एन. स्कूल की आयिशा वर्मा को द्वितीय तथा डी.बी.एन. स्कूल की ही काव्या को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। एम.पी.एस. की विभांशी जैन एवं आदर्श विद्या निकेतन के पियूष कुमार को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
कालेज एवं खुला वर्ग में राजकीय सावत्री बालिका महाविद्यालय की नेहा राठौड़ को प्रथम, भारती कंवर को द्वितीय तथा गृहणी सपना रावनानी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इस वर्ग में मोनिका सिंह एवं श्रेया सोलंकी को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। अतिथियों का स्वागत श्री सुन्दर मटाई एवं महेन्द्रसिंह चौहान ने किया। कार्यक्रम संयोजक संजय सेठी ने सभी का आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन पूनम पांडे ने किया। 

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

जवाहर कला केन्द्र] नेतृत्व के इन्तजर में

जवाहर कला केन्द्र
नेतृत्व के इन्तजार में

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र इन दिनों शीर्ष नेतृत्व का इन्तजार कर रहा है। यह इन्तजार महानिदेशक
पूजा सूद के स्तीफे के साथ ही शुरू हो गया है। देखना यह है कि, सरकार कलाकारों की मांग के अनुसार महानिदेशक के पोस्ट पर किसी आईएएस की नियुक्ति करेगी या पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों की पुनरावृति। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि जेकेके स्थापना के साथ चल रही नीति के अनुसार विभिन्न विभागों को फिर से सक्रिय किया जाएगा या विभाग प्रमुखों की समाप्ती के स्थान पर बने एडीजे तकनीक के पद को ही जारी रखा जाएगा।
एडीजी तकनीक अनुराधा सिंह के कार्यकाल समप्त होने के साथ ही कलाकार संगठनों के विरोध ने तेजी पकड़ ली। विरोध को देखते हुए अपने कार्यकाल की समाप्ती के दो माह पहले ही महानिदेशक पूजा सूद ने राज्य सरकार को स्तीफा सौंप दिया। और अब जेकेके के कामकाज की कमान का भार वहां कार्यरत स्थायी कर्मचारियों पर आ गया है। जब तक कोई्र नया महानिदेशक सरकार द्वारा नियुक्त नहीं किया जाता तब तक जेकेके कर्मी केवल पूर्व घोषित कार्यक्रमों को ही अंजाम दे सकते हैं, कोई नया फैंसला नहीं ले सकते।
पहले थे चार रिर्सास पर्सन और अब एडीजे
जेकेके के कार्यों को प्रशासन और वित्त के अतिरिक्त चार विभागों में बांटा गया था डाक्यूमेंटेशन, ड्रामा, म्यूजिक एण्ड डांस तथा विजुअल आर्टस। इन विभागों में से डाक्यमेंटेशन डायरेक्टर व बाकी के तीनों विभागों के रिर्सोस पर्सन्स के पदों को समाप्त कर पूर्ववर्ती सरकार ने एडीजे तकनीक के नए पद का सृजन किया था। महानिदेशक और अतिरिक्त महानिदेशक तकनीक के पदों पर कॅान्टरेक्ट बेस व्यक्तियों की नियुक्ति की गई। और विभाग व उनमें कार्यरत कर्मियों को एडीजे तकनीक के अधीन कर दिया गया। 
कई प्रोग्राम बन्द
जेकेके द्वारा संचालित कई कार्यक्रमों को नए अधिकारियों द्वारा समाप्त कर दिया गया जिसमें प्रमुख रूप से केन्द्र द्वारा लगाया जाने वाला वार्षिक हस्त्शिल्प मेला व राजस्थान के विजुअल आर्टिस्टों के आर्ट कैम्प शामिल हैं। इसके साथ ही प्रकाशन व शोध कार्यों को भी पूरी तरहा से समाप्त कर दिया गया। अलंकार म्यूजियम का अस्तित्व समाप्त कर उसमें प्रदर्शित की जा रही धरोहरों को खुर्द-ब-खुर्द कर दिया गया। 
कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार
स्थाई रूप से नियुक्त कर्मचारियों पर अतिरिक्त भार के चलते कुछ ने अपने मूल नियुक्ति वाले विभाग में लौटना श्रेयस्कर समझा। कुछ अतिरिक्त कार्यभार के साथ समझौता कर अपने पद व कार्य का तनावपूर्ण स्थिति में निर्वाह करते रहे। इसके चलते कुछ अर्सा पहले ही केन्द्र के ड्रामा विभाग को देख रहे संदीप मदान की ह्रदय गति रुकने से मृत्यु हो गई। संग्राहालय अध्यक्ष व डायरेक्टर डाक्यूमेंटेशन का अतिरिक्त कार्य देख रहे अधिकारी अब्दुल लतीफ उस्ता को लायबे्ररी के पदभार तक सीमित कर दिया गया, साथ ही कई अन्य कार्यों के उत्तर दायित्व के लिए बाध्य किया गया।
संस्कृति केन्द्र बना प्लाजा
जयपुर की सांस्कृतिक धड़कन के रूप में रवीन्द्र मंच के साथ अपना स्थान बना चुके जेकेके को एक तौर पर प्लाजा का रूप दे दिया गया। कई निजी संस्थाओं को स्थान व लाभ में भागीदारी दी गई।
क्या कहते हैं जानकार
जेकेके की स्थापना के समय से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों और जानकारों का कहना है कि, एडीजे तकनीक के पद को समाप्त किया जाए ताकि सभी विभाग एक ही पद तक निहित ना रहें। पहले की तरहा डाक्यूमेंटेशन, ड्रामा, म्यूजिक एण्ड डांस तथा विजुअल आर्टस जैसे विभाग स्वतन्त्र रूप से अस्तित्व में लाए जाएं। सभी विभागों पर विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति हो। इसके साथ ही प्रकाशन व शोध कार्य को फिर से सक्रिय किया जाए। राज्य के कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए साथ ही जो नए व अच्छे कार्यक्रम चलाए गए हैं उन्हें भी जारी रखा जाए।

बुधवार, 23 जनवरी 2019

कलाएं एवं सौंदर्यबोध पर व्याख्यान सम्पन्न


कलाएं एवं सौंदर्यबोध पर व्याख्यान सम्पन्न
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द में कल 22 जनवरी को जयपुर के डॉ राजेश कुमार व्यास  ने- कलाएँ एवं सौंदर्यबौध विषय पर सोदाहरण व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान में डॉ व्यास ने कलाओं के सौंदर्यबौध पर विस्तृत चर्चा की उनके अनुसार सौंदर्यबौध का अनुसंधान ही कला है। कलाकृति को देखने वाले कि दृष्टि में एक उसका अपना निजी सौंदर्यबौध होता है जिसके माध्यम से वह कला का आस्वादन करता है डॉ व्यास के अनुसार कलाकृति को देखने से मन में जो भाव घटित होता है वही उसका सौंदर्यबौध है और यही सौंदर्यबौध देखने वाले के मन पर ऐसा प्रभाव डालता है कि बार बार उस कलाकृति को देखने का भाव मन में आता है। सौंदर्यबौध ही किसी कलाकृति का प्राण तत्व होता है । डॉ व्यास ने अपने व्याख्यान में रबीन्द्रनाथ टेगोर, जे स्वामीनाथन जैसे दिग्गज कलाकारों कि कृतियों का समावेश किया । इस अवसर पर वरिष्ठ कलाकार प्रो. जय कृष्ण अग्रवाल,  प्रभारी क्षेत्रीय सचिव राजेश कुमार शर्मा, अनेक कलाकार- ममता राभा, हबीब मुसावी , नीलम, प्रेम शंकर, शांतनु शास्त्री एवं स्कालर्स - सारिका, अंकित पंाडेय , पियाली पॉल , जगजीत रॉय आदि उपस्थित थे।

सोमवार, 21 जनवरी 2019

ओपनिंग रशिया-19 में दिखी रशिया की रचनात्मकता

ओपनिंग रशिया-19 में दिखी रशिया की रचनात्मकता
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कल 20 जनवरी से सिटी पैलेस म्यूजियम में रशिया के कलाकारों की रचपात्मकता को प्रदर्शित करती एग्जीबिशन ओपनिंग रशिया-19 की शुरुआत हुई। 5, जनवरी तक चलने वाली इस एग्जीबिशन में 40 कलाकारों की पेंटिग सजाई गयी है। प्रदर्शनी के समन्वयक हंसराज कुमावत ने बताया कि, प्रदर्शनी में रूस के स्टारिसता, पोक्रोव, रोस्तोव और व्लादिमिर सहित कई देशों की संस्कृति को दिखाया गया है। यह प्रदर्शनी भारत में रूस के अफानसीनिकितिन की पहली यात्रा के 550वीं वर्षगांठ को समर्पित है।
रशिया और भारत में कला संस्कृति के विभिन्न पक्षों को बढ़ावा देने के मकसद से इस प्रदर्शनी को श्रृंखलाबद्ध रूप से भारत के कई शहरों में प्रदर्शित किया जा रहा है। जयपुर से पहले यह दिल्ली और बीकानेर में प्रदर्शित हो चुकी है। और जयपुर के बाद कोटा, अजमेर और कोलकत्ता में प्रदर्शित की जाएगी।
रूस-भारत रचनात्मक यात्रा यहां भी
रूस व भारत के रचनात्मक यात्रा को दर्शाते हुए आगामी 2फरवरी से 9 फरवरी तक होटल आईटीसी राजपूताना में एक प्रदर्शनी का आयोजन होगा। यह देश-दुनिया के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण संदेश पर आधारित होगी। अप्रेल में इंडो रशियन रेजीडेंसी कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें भारत व रशिया के कलाकार लाईव पेंटिंग करेंगे।

शनिवार, 5 जनवरी 2019

सिन्धी अकादमी पुरस्कारों हेतु प्रविशिष्टयां आमंत्रित

सिन्धी अकादमी पुरस्कारों हेतु प्रविशिष्टयां आमंत्रित
मूमल नेटवर्क,जयपुर। राजस्थान सिन्धी अकादमी द्वारा सिन्धी भाषा, साहित्य, कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संर्वद्धन हेतु विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत सिन्धी विभूतियों/सिन्धी संस्थाओं को अकादमी पुरस्कारों के लिए आमन्त्रित करती है। अकादमी आयोजित वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह में चयनित व्यक्तियों व संस्थाओं को सम्मानित किया जायेगा।
अकादमी सचिव ईश्वर मोरवानी ने बताया कि अकादमी द्वारा निम्न राज्य स्तरीय पुरस्कार/सम्मान हेतु सिन्धी संस्थाओं/व्यक्तियों से विभिन्न क्षेत्रों में अर्जित विशिष्ट उपलब्धियों के लिये 31 दिसम्बर तक प्रस्ताव/आवेदन आमंत्रित किये गये थे, जिसकी अन्तिम तिथि 31 जनवरी तक बढ़ाई गई है।
इन सम्मानों के लिए करें आवेदन
सामी सम्मान-साहित्यकारों को उनके जीवन काल में सिन्धी साहित्य के क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों हेतु।
साधु टी.एल. वासवाणी सम्मान-सिन्धी संस्था/व्यक्ति द्वारा सिन्धी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु। भगत कंवरराम सम्मान-सिन्धी संस्था/व्यक्ति को सिन्धी संगीत, नृत्य, नाटक एवं भगत विधा में उल्लेखनीय योगदान हेतु।
सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन सम्मान-सिन्धी संस्था/व्यक्ति को सिन्धु संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान हेतु।
हेमूं कालाणी सम्मान-25 वर्ष तक के सिन्धी युवा को वीरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु।
उक्त पुरस्कार/सम्मान हेतु सिन्धी संस्थाओं/व्यक्तियों को आवेदन के साथ किये गये कार्यों/उपलब्धियों की प्रमाणिकता के लिये आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर आवेदन करना होगा। निर्धारित तिथि के पश्चात् प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

गुरुवार, 3 जनवरी 2019

मुकेश की मीनाकारी को मिला सम्मान

मुकेश की मीनाकारी को मिला सम्मान
मूमल नेटवर्क, जयपुर। बीते दिनों जयपुर में आयोजित जेजेएस में मीनाकारी में दक्षता के लिए जयपुर के युवा मुकेश मीनाकार को सम्मानित किया गया। आर्टिजन्स अवार्ड के रूप उन्हें 50 हजार रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया गया। मुकेश को यह सम्मान कुन्दन मीनाकारी में प्रवीणता के चलते प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि मुकेश मीनाकार को मीनाकारी की कला अपने पिता से प्राप्त हुई है। आभूषणों के साथ मुकेश का रुझान मीनाकारी के आर्टिक्लस बनाने में भी है। मुकेश द्वारा बनाए गए कुन्दन मीनाकारी के आर्टिकल्स व आभूषणों में उनकी युवा सोच स्पष्ट नजर आती है। बेहतरीन मीनाकारी के लिए मुकेश को पूर्व में भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा राष्ट्रपति सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।