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बुधवार, 11 मार्च 2020

वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए कलाकार

वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए कलाकार
राजस्थान के हरिराम कुम्भावत और केशरी नंदन प्रसाद हुए सम्मानित
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 15 मेधावी कलाकारों को 61 वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर ललित कला अकादमी की दीर्घाओं में वार्षिक कला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जो 22 मार्च तक चलेगी।
राष्ट्रीय प्रदर्शनी में विशेष आमन्त्रित श्रेणी के अन्र्तगत अंजलि इला मेनन, परमजीत सिंह, अर्पिता सिंह, गोगी सरोजपाल, स्वर्गीय जॉन फर्नाडेज़ एवं वासुदेव कामत जैसे जानेमाने कलाकारों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गयी हैं।
सम्मानित कलाकार:
अनूप मनजुखी गोपी (त्रिसुर, केरल) डेविड मालाकर (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), देवेंद्र कुमार खरे (वडोदरा, गुजरात), दिनेश पंड्या (मुंबई, महाराष्ट्र),फारूक अहमद हालदर (24 परगना, कोलकाता,पश्चिम बंगाल), हरि राम कुंभावत (जयपुर, राजस्थान), केशरी नंदन प्रसाद (जयपुर, राजस्थान), मोहन कुमार टी (बेंगलुरू, कर्नाटक), रतन कृष्ण साहा (मुंबई, महाराष्ट्र) सागर वसंत काम्बले (मुंबई, महाराष्ट्र), सतविंदर कौर (नई दिल्ली), सुनील तिरूवयुर (अर्नाकुलम, केरल), तेजस्वी नारायण सोनावणे (शोलापुर, महाराष्ट्र), यशपाल सिंह(दिल्ली) और यशवंत सिंह (दिल्ली)।
अकादमी पुरस्कार के लिए कलाकारों का चयन देश के बेहतरीन कलाकारों एवं समीक्षकों की नामित चयन समिति अर्थात ज्यूरी द्वारा किया गया है। ज्यूरी ने प्राथमिक चयन समिति द्वारा छांटी गई कुल 283 कलाकृतियों का गुणवत्ता के आधार पर निरपेक्ष मूल्यांकन करके उक्त 15 कलाकारों का चयन किया।



मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

अकादमी में युवा चित्रकार शिविर

अकादमी में युवा चित्रकार शिविर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर के सहयोग ये युवा चित्रकार शिविर का कल 2 अक्टूबर को उद््घाटन हुआ। इस सात दिवसीय युवा चित्रकार शिविर में महात्मा गांधी पर आधारित चित्रों का अंकन किया जाएगा। शिविर का समापन आठ अक्टूबर को होगा।

मंगलवार, 11 सितंबर 2018

स्टेट अवार्ड आवेदन की तिथि बढ़ी

स्टेट अवार्ड आवेदन की तिथि बढ़ी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी ने स्टेट अवार्ड के लिए आवेदन व कृतियां स्वीकार करने की अन्तिम तिथि बढ़ा दी है।   अब कलाकार अपनी कृतियों को 10 सितम्बर के स्थान पर 25 सितम्बर तक अकादमी कार्यालय में जमा करवा सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि प्राप्त कृतियों में से श्रेष्ठ 10 कृतियों को 25-25 हजार रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

युवा कृतिकारों के ग्रुप शो का उद्घाटन आज

युवा कृतिकारों के ग्रुप शो का उद्घाटन आज
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी  6 युवा कलाकारों की कृतियों से सजी प्रर्दशनी का आयोजन अकादमी की दीर्घा में ककर रही है। इस प्रदर्शनी का उद्धघाटन आज शाम 4 बजे  अकादमी अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम दलवी  व सचिव सुरेन्द्र सोनी करेंगे । आमजन इन कृतियों को कल 12 सितम्बर से 15 सितम्बर तक देख सकते हैं।
प्रदर्शनी में शामिल कलाकार हिम्मत गायरी ने अपने जीवन के कुछ पलों की एकेरी गई ड्रॉइंग, हर्षित वैष्णव ने ग्राफिक्स के माध्यम से अघोरी जीवन क्रियाओं, मनीष सैनी ने चित्रित टायर द्वारा चलते रहने का सन्देश, अर्जुन सिंह ने अमूर्त कला द्वारा प्रकृति व जीवन, मुबश्शेरा बानो ने अपने घर के दैनिक जीवन के चित्रण तथा चित्रा नेहरा ने महिला पावर को प्रदर्शित किया है।

सोमवार, 3 सितंबर 2018

इरा की रोनडेवू विद कलर्स कल से

इरा की रोनडेवू विद कलर्स कल से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आर्टिस्ट इरा टाक की 9वीं एकल चित्र प्रदर्शनी रोनडेवू विद कलर्स का उद्घाटन कल शाम 4 बजे राजस्थान ललित कला अकादमी की दीर्घा में होगा। अकादमी के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथी के रूप में अकादमी अध्यक्ष डॉ. अश्विन दलवी करेंगे। इस अवसर पर सीएम के सचिव डॉ. के.के. पाठक, पद्मश्री आर्टिस्ट शाकिर अली, वी केयर की चेयरपर्सन अपर्णा कुच्छल व दिल्ली की पत्रकार गीताश्री विशेष आमन्त्रित अतिथियों के रूप में उपस्थित होंगे।
प्रदर्शनी में इरा की हाल ही में बनाई गई लगभग 50 पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी 9 सितम्बर तक चलेगी।

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

स्टेट अवार्ड व छात्र कला प्रदर्शनी की नई तारीखें

स्टेट अवार्ड व छात्र कला प्रदर्शनी की नई तारीखें 
छात्रों की पुरस्कार राशि अब 10 हजार
मूमल नेटवर्क, जयपुर। (संशोधित) राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार 60वें स्टेट अवार्ड के आवेदन की अन्तिम तिथि 10 सितम्बर और 39वीं छात्र कला प्रदर्शनी के आवेदन की अन्तिम तिथि 18 सितम्बर है। इसी के साथ छात्र कला प्रदर्शनी में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए दी जाने वाले पुरस्कार राशि को पांच हजार रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया गया है। इस वर्ष दस श्रेष्ठ कृतियों के छात्र कलाकारों को 10-10 हजार रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

सोमवार, 30 जुलाई 2018

राज. ललित कला अकादमी आयोजित 60वां स्टेट अवार्ड व 39वीं छात्र कला प्रदर्शनी

राज. ललित कला अकादमी आयोजित 
60वां स्टेट अवार्ड व 39वीं छात्र कला प्रदर्शनी 
आवेदन की तिथियां घोषित
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी ने राज्य के कलाकारों  व कला विद्यार्थियों को आमन्त्रित करते हुए स्टेट अवार्ड व डात्र कला प्रदर्शनी के आवेदन की तिथियां घोषित कर दी हैं।
अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी ने मूमल को जानकारी दी कि 60वें स्टेट अवार्ड के आवेदन की अन्तिम तिथि 18 सितम्बर है। उन्होंने बताया कि, 39वीं छात्र कला प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए आवेदन की अन्तिम तिथि 10 सितम्बर तय की गई है।
उल्लेखनीय है कि स्टेट अवार्ड के लिए चुनी गई श्रेष्ठ 10 कृतियों को 25-25 हजार रुपए की नकद राशि से सम्मानित किया जाता है। छात्र कला प्रदर्शनी के लिए श्रेष्ठ 10 कृतियों को 5-5 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाती है।

सोमवार, 23 जुलाई 2018

कनेडियन कलाकार ने प्रदर्शित की जयपुर से सीखी कला


कनेडियन कलाकार ने प्रदर्शित की जयपुर से सीखी कला
प्रकृति और कला के सम्बन्ध पर की चर्चा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कनाडा के कलाकार, शिक्षक व क्यूरेटर कोल स्वान्स ने आज राजस्ािान ललित कला अकादमी के सभागार में जयपुर में सीखी कला तकनीक का प्रदर्शन किया।
कोल ने स्लाइडस के जरिये आरईश तकनीक, लघुचित्र, खनिज रंगों को बनाना दिखाया और अपने चित्रों में प्रकृति और कला के सम्बन्ध पर चर्चा की। इसके साथ ही म्यूरल में लगभग &00 छोटे-बड़े अलग-अलग साईज के आकार बनाए और उनको खनिज रंगों से वसली पर चित्रित किया।
कोल स्वान्स कनाडा के टोरंटो निवासी हैं। इन्होंने स्टूडियों कला में गुएल्फ  विश्वविद्यालय से स्नातक और कला इतिहास में टोरेंटो विश्वविद्यालय से एम. ए. किया है। अभी हम्बर कॉलोड में कला शिक्षा देने के साथ प्रोग्राम कॉडिनेर करते हैं। कोल इन्सटालेशन, चित्रकला व मूर्तिकला के समावेश की कला में माहिर हैं।
नई से नई तकनीक सीखना इन्हें पसन्द हैं। जयपुर में भी नाथूलाल वर्मा से फ्रेस्को और लघुचित्र शैली सीखी है। कई माध्यमों में काम करने वाले कोल की भारत के साथ अमरीका, इटली, चीन, ताइवान व ब्राजील में कई सोलो एग्जीबिशन्स लगी हैं।  कोल ने चुंग ली विश्वविद्यालय, ताइवान, टोरेंटो विश्वविद्यालय, गुएल्फ विश्वविद्यालय ओकविल के शैरीडन महाविद्यालय में शिक्षक के रूप में काम किया है । इनको ओन्टेरियों आर्टस काउन्सिल, इन्डोशास्त्री कनेडियन इन्स्टीटूयूट आदि से फैलोशिप भी मिली है ।

रविवार, 1 जुलाई 2018

कुछ दर्शक मिले पर बायर कोई नहीं

कुछ दर्शक मिले पर बायर कोई नहीं
कीमत 50 हजार से 16 लाख तक रखी 
मूमल नेटवर्क, मुंबई। शनिवार व रवीवार को जहांगीर आर्ट गैलरी में सजी राजस्थान के कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनी को कुछ दर्शक जरूर मिले, लेकिन बाजार ठंडा होने के कारण कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। कलाकारों ने काम की कीमत इतनी अधिक लगा रखी है कि भूले-भटके आए दर्शक सामान्य से सामान्य काम की भी असामान्य कीमत देख कर कंधे उचकाता हुआ आगे बढ़ जाता है।
आपको यह जानकर ताज्जुब हो सकता है कि प्रदर्शनी में शामिल कृतियों के मूल्य कम से कम 50 हजार रुपए और अधिकतम 16 लाख रुपए रखे गए हैं। अधिकतम मूल्य उदयपुर के आकाश चोयल की कृति के हैं, जबकि सबसे कम मूल्य 50 हजार रुपए की बात करते हुए कोई नाम लेना उचित नहीं होगा।
राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित इस शो राजस्थान 147 के संयोजक डॉ. लोकेश जैन ने ऑफ सीजन की बात स्वीकार करते हुए मूमल को जानकारी दी कि, सजी हुई कृतियों की खरीद के लिए पूछताछ तो की जा रही है लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई कृति बिक नहीं पाई है। इस स्थिति के बारे में डॉ. लोकेश ने मूमल को बताया कि, मार्केट ठण्डा है। इन्वेस्टर्स के पास पहले से ही पेंटिंग्स का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए वो नया माल खरीदने की जोखिम अभी नहीं उठाना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि, खरीददारों में अब वो लोग बचते हैं जिन्हें अपना घर सजाने के लिए कृतियों की आवश्यक्ता पड़ती है, लेकिन उनकी क्रय शक्ति 15-20 हजार से अधिक की नहीं होती।
इस शो में सजी कृतियों की कीमत के बारे में डॉ. लोकेश ने मूमल को जानकारी दी कि, पेंटिंग्स 50,000 रुपए की कीमत से शुरू होकर 16 लाख रुपए तक की हैं, जबकि मूर्तिशिल्प 40 हजार रुपए से 1.75 लाख रुपए कीमत के हैं। सबसे महंगी पेंटिंग उदयपुर के आटिस्ट आकाश चोयल की व सबसे महंगा मूर्तिशिल्प जयपुर की सुमन गौड़ का है।
डॉ. लोकेश जैन ने मूमल को जानकारी दी कि, जिन प्रमुख कलाकारों की कृतियों को खरीदने के बारे में पूछताछ हो रही है उनमें से पेंटिंग के लिए भीमसिंह हाड़ा, जी.एस. खेतांची, महावीर स्वामी, चरण शर्मा, सुरेन्द्र पाल जोशी, लोकेश जैन, महेश स्वामी, आकाश चोयल, कुष्णा महावर, प्रदीप कुमावत, आर.बी. गौतम, लक्ष्मीकांत शर्मा, संजीव शर्मा व सौरभ भ्ट्ट के नाम शामिल हैं वहीं मूर्तिशिल्प में पंकज गहलोत, सुनील चेजारा व ज्योति प्रकाश गौतम की कृतियों को गिना जा रहा है।
डॉ. लोकेश ने मूमल से बातचीत के दौरान कहा कि, यदि कोई कृति बिकती है तो शो को माइलेज मिल जाएगा। वैसे यह शो कृतियों के बेचने को केन्द्र में रखकर नहीं वरन् ऐसे प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को एक्सपोज करने के लिए रचा गया है जिनके लिए जहांगीर में शो करना एक स्वपन की तरह है। इस शो में जो सीनियर आर्टिस्ट शामिल हैं वो इसलिए कि, जूनियर्स को सीनियर्स के साथ एक ही शो में प्रदर्शित होने का अवसर मिल सके।
राजस्थान 147 को लम्बे इंतजार के बाद कुछ दर्शकों के दर्शन हो पाए हैं। बरसात के दिनों को मुंबई के कला बाजार में ऑफ  सीजन माना जाता है। ऐसे में प्रदर्शनी में दो दिन के लिए ही सही दर्शकों का आना अच्छा संकेत है।

शुक्रवार, 29 जून 2018

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)
वैसे तो कलाकारों को एकाएक गुस्सा नहीं आता, लेकिन जब आता है तो बहुत आता है। जंहागीर के शो की खबरों को लेकर शुरूआती सन्नाटे के बाद अब अनेक कलकारों में साहस का संचार हुआ है और वे खुलकर अकादमी पदाधिकारियों की मनमानी के खिलाफ अपनी बात कह रहे हैं। कला जगत के सोशल मीडिया पर भी राजस्थान 147 के नाम पर हुई धांधलियों को लेकर कलाकार अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि अनेक सयाने कलाकार स्वयं के नफे-नुक्सान का हिसाब लगाते हुए आयोजन के सकारात्मक पहलू की बात पर खुद को तटस्थ दर्शाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ नया करने के नाम पर अपनों को रेवडिय़ां बांटे जाने की कलई खुलने के बाद क्रोधित कलाकारों का पारा सातवें आसमान पर है।
अपने बूते पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवलसिंह चौहान सबसे पहले सबसे दमदार तरीके से सामने आए उसके बाद प्रतिष्ठित कलाकार हितेन्द्र सिंह भाटी ने आवाज बुलंद की, फिर डा. रीता प्रताप और रघुनाथ जी जैसे गंभीर कलाकारों ने अपनी बात खुलकर कही। मयंक शर्मा, मोहन जांगीड़, हंसराज कुमावत और ऐसे अनेकानेक कलाकारों ने अपने गंभीर विचार सामने रखे। इसके बाद उन मजबूत कलाकारों ने चौंकाया जो 147 के लिए होने के बावजूद असंतुष्ट  कलाकारों के समर्थन में खड़े हो गए। सभी ने बहुत अहम बातें सामने रखी, इनकी बातों को यहां चलते रास्ते लिख देना पाठकों के प्रति अन्याय होगा। इसलिए अगले लेख में  शीघ्र  ही आप इन जैसे बहुत से बिंदास कलाकारों के विचारों से रूबरू होंगे।
कला जगत में मूमल की निर्भीक रिपोर्टिंग के चलते सबसे पहले यह बात सामने आई कि चयन सूची बहुत गोपनीय तरीके सें तैयार हो रही है। उसमें चल रही जोड़-तोड़ के चलते उसे अंतिम रूप दिए जाने में देर हो रही है। रेवडिय़ां बाटने में जुटे अकादमी के कर्ताधर्ताओं को इस बात का पूरा अंदेशा था कि सूची अगर जयपुर में ही आउट हो गई तो कला जगत के असंतोष को संभालना कठिन हो जाएगा। ऐसे में पूर्व नियोजित देरी को कारण बताते हुए यहां होने वाले शो के प्रिव्यू को रद्द कर दिया गया।
अधिकारियों के मुंबई रवाना होने से पूर्व कैटलॉग छपकर आ गए, लेकिन उसे यह कहकर दबाए रखा गया कि शो से पहले कैटलॉग जारी नहीं किए जा सकते। हालांकि अकादमी अधिकारियों की ओर से संभावित हरी झंड़ी दिखाए जाने के बाद चयनित कलाकार हरकत में आ गए थे। यह कलाकार स्थानीय अखबारों में स्वयं के चयनित होने की खबरें प्रकाशित कराने लगे थे। इन कलाकारों और अन्य सूत्रों से जानकारियां एकत्र करने का कठिन कार्य पूरा करके मूमल ने अपने न्यूज पोर्टल पर सबसे पहले सूची प्रकाशित कर दी। समय की कमी के चलते मूमल ने सूची की समीक्षा का काम अपने सुधि पाठकों के सुपुर्द कर दिया।
कुछ ही समय बाद कलाकारों में असंतोष उभरने लगा और राजस्थान 147 के आयोजन की स्क्रिप्ट लिखने वाले डिजायनर कलाकारों के हाथ-पांव फूलने लगे। यह बताने की कोशिश होने लगी कि सब कुछ ठीक-ठाक है। लेकिन, ऐसा था नहीं। अकादमी के अधिकारियों ने कहा कि 147 में सभी का सिलेक्शन तो संभव है नहीं। चयन का आधार पूछे जाने पर बताया गया कि यह सब चयन समिति के अधिकार क्षेत्र की बात है। सवाल बहुत से थे, लेकिन सभी के जवाब गोलमोल थे।
हालात को देखते हुए आयोजन के स्क्रिप्ट रायटर और दरबारी कलाकारों ने कर्ता-धर्ताओं को सुझाव दिया कि जयपुर के स्थानीय अखबारों के अपने पत्रकारों से अपने अनुरूप खबरे छपवा लो। फाइलों में तो केवल उन्हें ही लगाना है। इसका परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। मजे की बात यह रही कि खबरों में दिए जाने वाले कलाकारों के चुनिंदा नाम भी वह थे जो मठाधीशों के सबसे करीब हैं। इनमें वे भी शामिल हैं जिनकी प्रभावशाली कला के चलते यह करीबियां पिछले कला मेले के बाद से ही देखी जा रही हैं।
अनेक कलाकारों ने अकादमी अधिकारियों की निरंकुशता और मनमानी को लेकर संबंधित उच्चाधिकारियों, संस्कृति मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक जानकारी पहुंचाने का विचार व्यक्त किया है। हो सकता है कि आपको यह पता नहीं हो कि सरकार केवल स्थानीय अखबारों के समाचारों को सहेज कर ही संतुष्ट नहीं हो जाती। अपनी विश्वस्तनीयता के चलते मूमल अपने न्यूज पोर्टल के जरिए प्रदेश के अनेक उच्चाधिकारियों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कार्यालय व आवास तक पहुंचता है और संबंधित लोगों द्वारा ध्यान से देखा और पढ़ा जाता है। मूमल के पुराने पाठक इसके प्रभाव से परिचित भी हैं। पर यहां सवाल शिकायत का नहीं व्यवस्था को सुधारने का है। प्रथम चरण में उसी पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

बुधवार, 27 जून 2018

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। अंतत: वही हुआ जिसकी आशंका थी, राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी के ग्रुप शो के लिए किए कलाकारों के चयन को लेकर प्रदेश के कला जगत में असंतोष मुखर होने लगा है।
चयन की प्रकिया में हो रही अनावश्यक देरी और असामान्य गोपनियता के चलते जानकारों को लिस्ट में जबरदस्त जोड़-तोड़ की आशंका होने लगी थी। नतीजतन अब सामने आया है कि जिन कलाकारों को अकादमी की ओर से  फोन करके उनका काम मंगवाया गया था, पहले उनको सूची में स्थान मिला, लेकिन जोड़-तोड़ के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अंतिम सूची में उनका नाम नदारद था।
जयपुर के युवा कलाकार सुनील कुमार कुमावत के अनुसार 21 या 22 तारीख को प्रदर्शनी के संयोजक लोकेश जैन ने फोन करके उसका काम मंगवाया था। सुनील ने तत्काल अपना काम अकादमी पहुंचा दिया था। सूची में उसका नाम शामिल हुआ भी था, लेकिन कैटलॉग में उसका नाम नदारद था। उल्लेखनीय है कि लगभग अंतिम दौर की जिस सूची में सुनील कुमावत का नाम था, उसमें महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल नहीं था, लेकिन कैटलॉग में महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल है।
कोटा से मिली जानकारी के अनुसार वहां के तीन वरिष्ठ कलाकारों ने तो अकादमी के मांगे जाने पर स्वयं अपना काम जयपुर जाकर अकादमी तक पहुंचाया था। अकादमी द्वारा दिए गए भरोसे के आधार पर कोटा की स्थानीय मीडिया को अपना काम जहांगीर कला दीर्घा में प्रदर्शित होने की जानकारी भी दी। सभी प्रमुख अखबारों ने इन सीनियर कलाकारों के समाचार भी प्रकाशित किए। अब कैटलॉग में नाम व काम नहीं पाकर उनकी स्थिति बयान करने लायक नहीं रही। इनमें शुभूसिंह चौबदार, डी.पी. छाबड़ा व डा. धांसू अन्नूसिंह धाकड़  शामिल हैं। शुभूसिंह चौबदार ने तो फोन ही स्विचऑफ कर दिया।
ऐसे मामलों के संबंध में अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी का कहना है कि इस आयोजन के लिए कलाकारों के चयन का काम अकादमी द्वारा गठित अनुभवी व जिम्मेदार कलाकारों की एक समिति ने किया है। इसमें अधिकारियों की भूमिका नहीं थी।

सोमवार, 25 जून 2018

जहांगीर ग्रुप शो:

जहांगीर ग्रुप शो:
अधिकारियों का दल विमान से रवाना
कैटलॉग भी विमान में लेकर जाना पड़ा
एक दर्जन से अधिक लोग काम में जुटे
तीन दीर्घाओं में करीब सौ कृतियां सजेंगी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा प्रदेश के चुनिंदा कलाकारों के लिए मुंबई की जहांगीर कला दीर्घा में कल 26 जून से आरंभ होने वाले ग्रुप शो के लिए अकादमी के अधिकारियों और उनके सहायकों का दल आज मुंबई पहुंच गया। यह दल जयपुर से आज सुबह विमान से रवाना हुआ। इनमें अध्यक्ष अश्विन दलवी, सचिव सुरेंन्द्र सोनी, प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा, शो के संयोजक लोकेश जैन, सह संयोजक आशीष श्रंगी, अध्यक्ष के निजी सचिव व शो के संयोजक की सहायिका के रूप में एक महिला शामिल हैं। इससे पहले अकादमी के प्रदर्शनी वाहन में कलाकृतियों के साथ लगभग आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी 23 जून को मुंबई के लिए रवाना हुए थे।
कैटलॉग भी विमान में?
पूर्व में कलाकारों के चयन में हुए विलंब के कारण हुई देरी के चलते शो के कैटलॉग छपने के बाद एन वक्त पर अकादमी में पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे में अधिकारियों का दल अपने लगेज में शामिल कर बहुत सीमित मात्रा में कुछ कैटलॉग लेकर जा रहे हैं। अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी के अनुसार कैटलॉग प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद ही जारी किया जाएगा।
शेष कैटलॉग का स्टॉक जयपुर अकादमी कार्यालय मेें कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। अधिकारियों ने इनमें से एक भी कैटलॉग किसी को नहीं दिए जाने के कड़े निर्देश कर्मचारियों को दिए हैं। बताया जा रहा है कि वे मुंबई से लौटने के बाद इसका वितरण अपने अनुरूप करेंगें।
करीब सौ कलाकृतियां सजेंगी
उधर मूमल के मुंबई सूत्रों के अनुसार राजस्थान अकादमी के लिए बुक तीन दीर्घाओं के लिए 26 जून से 2 जुलाई तक के लिए शुल्क व अन्य खर्च के रूप में लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक का भुगतान होगा। यह दीर्घाएं अकादमी को 26 जून को सुबह सौप दी जाएंगी। इन तीन दीर्घाओं में लगभग 100 कलाकृतियां लगाने के लिए स्थान है। कलाकृतियां लगाए जाने के बाद शाम को शो का औपचारिक उद्घाटन होगा।
( 147 चयनित कलाकारों की सूचि व अन्य जानकारियां देखें अगली खबर में )

शुक्रवार, 15 जून 2018

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए राजस्थान ललित कला अकादमी और कलाचर्चा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सृजनात्मक कला अभिरुचि कार्यशाला का समापन हुआ। समापन अवसर पर तैयार कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें वंचित बच्चे नजर नहीं आए।
अकादमी द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार आज 15 जून को इस कार्यशाला का समापन व प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । इस कार्यक्रम में  वरिष्ठ शिक्षाविद व प्रतिष्टित कलाकार डॉ. जय कृष्ण अग्रवाल और राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं ललित कला संकाय राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एस. मेहता मुख्य अतिथि थे। उन्होनेें  कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रतिभागियों के कलाकर्म की भूरी भूरी सराहना की। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए। पूर्व में यह शिविर कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए आयोजित किये जाने की बात कही गई थी लेकिन पहले ही दिन से शिविर से कच्ची बस्ती के बच्चेेे वंचित रहे। हालांकि कत्र्ता-धर्ताओं द्वारा शिविर में उन्हें शामिल करने के प्रयास किए जाने की बात कही गई लेकिन वे बच्चे नहीं जुट सके।
प्रदर्शनी सोमवार 18 जून को भी दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।

गुरुवार, 14 जून 2018

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग
प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार रणजीत सिंह चूड़ावाला की कृति राजस्थानन ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी में लगाए जाने वाले ग्रुप शो में प्रमुखता से प्रदर्शित होगी। यह कृति चूड़ावाला के कला सफर का अन्तिम पड़ाव है। अकादमी की मांग पर चूड़ावाला ने मृत्यु से पूर्व अपनी यह कृति बनाकर अकादमी को भिजवाई थी।
राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में 26 जून से 2 जुलाई तक एक ग्रुप शो होने जा रहा है। इस शो में प्रदेश के लगीाग 100 वरिष्ठ व युवा कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कला को समर्पित चूड़ावाला जी ने अपनी खराब तबियत की परवाह किये बिना इस शो के लिए कृति चित्रित की। चूड़ावाला जी का जून को निधन हो गया और यह कृति उनके कला सफर का अन्तिम पड़ाव बन गई।
जीवन परिचय

10 मई 1934 को जोधपुर में जन्में रणजीत सिंह चूड़ावाला ने भारत के प्रसिद्ध कला संस्थान जे.जे. स्कृल ऑफ आर्ट से पेंटिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। उनके परिजन बताते हैं कि, अक्षरज्ञाान से पहले ही उन्हें ईश्वरीय तोहफे के रूप में रेखाओं का ज्ञान था। जीवनयापन के लिये भारतीय रेलवे को अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने कला जगत को अपनी कलाकृतियों के रूप में अनमोल धरोहर सौंपी।
कला को समर्पित चूड़ावाला के स्वभाव में प्रकृति की सौम्यता समाहित थी और मानस में कला की तलीनता। प्रकृति को अपनी कूंचि के जरिये कैनवास पर उतारने का उन्हें महारथ हासिल था। अपनी धुन के पक्के और प्रचार-प्रसार से अलग हटकर चलने वाले चूड़ावाला रेखांकन के मामले में दक्ष थे। प्रकृति और समाज के विभिन्न रूपों को अपने चित्रों में जीवन देने वाले इस कलाकार ने लघुशैली चित्रण में भी खासा काम किया। इनकी कृतियों में कन्टेम्पररी, रियलिस्टिक व मिनिएचर का अद्भुत समावेश था। जलरंग व तैलरंग के साथ काली स्याही से उकेरे गए उनके चित्र भावाभिव्यक्ति को सजीव करते हुए देखने वालों को मोहपाश में बांध देते थे। उनके द्वारा चित्रित रघुवंश, ऋतुसंहार व शकुंतला आधारित चित्र रंग संयोजन व रेखांकन के लिए कला विद्यार्थियों की प्रेरणा बनते रहे हैं। कला मेलों में मशीनी गति से हाथोंहाथ रेखाचित्र बनाकर सौंपना उनकी रुचि में शामिल था। कुछ अर्सा पहले मूमल से हुई एक मुलाकात में उन्होंने कला जगत के बदलते परिदृश्य, कलाकारों द्वारा जल्दी से जल्दी सफलता हासिल करने की प्रवृति और संस्थाओं द्वारा बीते जमाने के शिखर चित्रकारों को नजरअंदाज करने की बात को लेकर चिन्ता जताई थी। लेकिन अगले ही पल अपनी कला साधना के सुख को जीवन की प्रधानता स्वीकार करते हुए मुस्करा दिये थे।
जयपुर के राजभवन, जवाहर कला केन्द्र व राजस्थान ललित कला अकादमी के साथ अन्य संग्राहकों के पास संग्रहित उनकी कृतियां राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। कला को समर्पित चूड़ावाला जी के सम्मान में राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा उन्हें  फैलोशिप तथा कलाविद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त करने के साथ दो बार स्टेट अवार्ड भी जीते। अभी इसी वर्ष जनवरी में सम्पन्न कला मेले में उन्हें लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।
कला को अपना जीवन मानने वाले चूड़ावाला जी बढ़ती हुई आयु व अस्वस्थता की परवाह किये बिना मृत्यु परन्त अपनी कृतियों में रंग भरकर हमेशा के लिए अमर हो गए।                 -राहुल सेन

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

Rajasthan Lalit Kala Akadami KalaMela

आखिर पूरी तरह टल गया कला मेला
12 लाख रुपए लेप्स
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में आयोजित होने वाला कला आयोजित नहीं किया जा सका और इस आयोजन के लिए मिले 12 लाख रुपए लेप्स हो गए। अकादमी के अधिकारी कला मेला आयोजित नहीं कर पाने का कोई ठोस कारण बता पाने कि स्थिति में भी नहीं हैं।
राजस्थान ललित कला अकादमी की सचिव सोविला माथुर ने 'मूमल' को बताया कि इस वर्ष जनवरी में कला मेला प्रस्तावित था, लेकिन गणतंत्र दिवस के लिए झांकी के कार्य की व्यवस्तता के चलते संभव नहीं हो पाया। फरवरी- मार्च में जेकेके में स्थान उपलब्ध नहीं हो पाया। बाहर किसी निजी स्वामित्व वाले स्थान पर आयोजन करने लायक फंड नहीं था। मार्च के बाद मई में जेकेके में स्थान उपलब्ध हुआ, लेकिन वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाने के कारण राशि खर्च करने की अनुमति नहीं दी जिससे 2015-16 में होने वाले कला मेले की राशि लगभग 12 लाख रुपए लेप्स हो गई। इस वर्ष 2016-17 का कलामेला सितम्बर-अक्टूबर में करने की योजना है।
 
ये रही पूरी दास्तान 
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों से फरवरी-मार्च में आयोजित होने वाले कला मेले के 19वें एडीशन को अकादमी द्वारा नवंबर में करने का प्रस्ताव पारीत किया गया था तो पूरे कला जगत में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी। इस प्रस्ताव के बाद कोई ना कोई कारण बताते हुए अकादमी इसका आयोजन टालती रही और आयोजन के लिए निर्धारित फरवरी-मार्च भी बीत गया। अकादमी द्वारा मार्च में छात्र कला प्रदर्शनी के आयोजन की मजबूरी बताई गई तो अपे्रल में जवाहर कला केन्द्र में स्थान उपलब्ध ना हो पाने का कारण। प्रदेश में प्रतिवर्ष मई में होने वाली गर्मी की तपन सेे अनजान अकादमी के अधिकारियों द्वारा जवाहर कला केन्द्र से स्थान उपलब्ध करवाने के लिए पत्र-व्यवहार की खानापूर्ति जारी रही। जवाहर कला केन्द्र की ओर से मई में अकादमी की पसंद व सुविधा का कोई भी समय उपलब्ध करवाने की स्वीकृति दी गई। अब मई की गर्मी को कारण बताते हुए कलामेला नहीं कर पाने को कारण बताया गया। 
युवा कलाकारों के साथ कला प्रेमियों को पूरे राजस्थान कीे कला के बहुत बड़े प्रदर्शन से वंचित होना पड़ा। कला मेले का हिस्सा बनने के लिए प्रदेश भर के कलाकार कई महीनों पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। कला खरीददार भी उचित मूल्य पर युवा कूचिंयों की नवीनता को क्रय करने के लिए बेसब्री से कला मेले की प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन अकादमी द्वारा बीते वर्ष 2015 के नवंबर माह में प्रस्तावित कला मेला आगामी महीनों के लिए टलते-टलते आखिरकार अधिकारियों की कोताही का शिकार हो गया।
एक ओर कला आयोजनों के लिए हमेशा पर्याप्त कोष नहीं होने के शोक पर कृत्रिम विलाप, दूसरी ओर कला मेले के कोष को लेप्स करा के सरकार को वापिस लौटाने की कार्रवाई। यह अकादमी कला और कलाकारों के प्रति प्रतिबद्धता का एक और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रदेश का कला जगत कई वर्षों तक कला मेला रद्द किए जाने का दंश झेल चुका है। वर्ष 2004 में आयोजित बारहवें कला मेले के बाद पूरे 6 वर्षों तक अकादमी ने कला मेले का आयोजन नहीं किया था। वर्ष 2010 में 13वें कला मेले के आयोजन के साथ फिर इसकी शुरुआत हुई और पांच साल लगातार आयोजित होने के बाद अब इस बार कला मेले नहीं हो सका। कला मेले को रद्द कर प्रदेश के कलाकारों को निराश करने का कारण अकादमी के पास पहले भी नहीं था और अब भी नहीं है।
अब नए उत्साह के साथ नए-नए कोर्स
गर्मी की को एक कारण बताते हुर्सए वार्षिक कला मेले आयोजित नहीं कर पाई राजस्थान ललित कला अकादमी अब नए उत्साह के साथ इसी गर्मी में अन्य आयोजन करने में जुटी है। मई में ही कला विशेष की जानकारी देने के लिए स्पेशल कोर्स आरम्भ किए जा रहे है। अब यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि मई की गर्मी के बदलते हुए नए अर्थ कम से कम अपनों के हित में तो ठंडी बयार बहा सकेंगे।

मंगलवार, 10 मार्च 2015

कला मेले में चार भाषायी अकादमियां


भाषायी अकादमियों द्वारा प्रस्तुत कलाकार
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 18वें कला मेले में प्रदेश की चार भाषायी अकादमियां सक्रीय रूप से भाग ले रही हैं। इन अकादमियों की ओर से वेद विज्ञान, सिंधु संस्कृति, लोक गायन, कवि सम्मेलन व मुशायरे के साथ चित्रकला और केलीग्राफी के कैंप भी आयोजित कराए जाएंगे। इनके द्वारा प्रायोजित कैंप में शामिल होने वाले कलाकारों की सूची निम्र है।
राजस्थान संस्कृत अकादमी
वेद विज्ञान चित्रवीथिका कार्यशाला
डा. अन्नपूर्णा शुक्ला
अमित कल्ला
ऋषिकेश गोस्वामी
कनुप्रिया राठौड़
जयन्त गुप्ता
निधि पालीवाल
प्रमोद कुमार सिंह
बिलसेन्दु शील
योगेन्द्र पुरोहित
लक्ष्पण प्रसाद
विष्णु सैनी
शुभंकर बिस्वास
सचिन सांकलकर
स्वपना बिस्वास
कृघ्णा महावर
राजस्थान सिन्धी अकादमी
सिन्धु संस्कृति चित्र कार्यशाला
प्रिया परयाणी, अहमदाबाद
घन्श्याम सागर, अहमदाबाद
श्याम सुंदर राजानी, भीलवाड़ा
जगदीश सावलानी, जयपुर
राजस्थान ऊर्दू अकादमी
कैलीग्राफी आर्ट कैंप
खुशीर्द आलम
जफर रजा
मुरलीधर
अतिउल्लाह
मो. अब्दुल गफ्फार
अताउल्लाह अख्तर
अबुवक्त काजी
हरिशंकर बालामोतिया
अब्दुल गनी
मिर्जा हबीब बेग पारस

शनिवार, 7 मार्च 2015

कला मेला कैम्स के कलाकारों के नाम

18वें कला मेला कैम्स के लिए 28 कलाकारों के नाम
राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से जयपुर में आयोजित 18वें कला मेला में लगने वाले विभिन्न आर्ट कैम्स के लिए देशभर से कलाकारों का चयन किया जा रहा है। मूमल को मिली जानकारी के अनुसार कलाकारों के नामों पर अंतिम दौर का विचार चल रहा है। यहां दिए जा रहे 28 नाम उन कलाकारों के हैं जिनके भाग लेने की लगभग पूरी संभावना हैं। यह वे हैं जो राजस्थान ललित कला अकादमी, ललित कला अकादमी नई दिल्ली व पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर द्वारा आयोजित कैम्स के लिए हैं। इनके अलावा अभी राजस्थान की संस्कृत, उर्दू तथा सिंधी अकादमियों की ओर से आयोजित होने वाले आर्ट कैम्स के लिए कलाकारों के नामों पर अंतिम मोहर लगना शेष है। कलाकारों के पास प्रस्ताव भेजे गए हैं। उनकी स्वीकृति मिलने या नहीं मिलने पर अंतिम समय तक नामों पर विचार संभव है।
राजस्थान ललित कला अकादमी
सुश्री कविता नायर, नोयडा
सुश्री शोभा ब्रूटा, दिल्ली
श्री अवधेश मिश्र, लखनउ
श्री जयन्ती राबडिया, बड़ोदरा
श्री जयकृष्ण शर्मा लखनऊ
गोपी गजवानी  दिल्ली
श्री सोमनाथ मेती, कलकता
श्री शैल चौयल, उदयपुर
श्री कालीचरण गुप्ता, नई दिल्ली
श्री राम विरंजन, हरियाणा
ललित कला अकादमी नई दिल्ली
मयंक श्याम गोड़ पेन्टिग
हेमा देवी मधुबनी
दिलीप कुमार वर्लि पेन्ंिटंग
अनवर चित्रकार पटवा पेन्टिंग
प्रणव नारायण चित्रकार
सत्यनारायण सुथार, कावड़कला
कल्याणजोशी पडचित्रण भीलवाड़ा
श्याम लाल कुम्हार, मोलेला कला
कदम कलाकार, मांडणा
मोहन वर्मा, सांजी पेन्टिंग, मथुरा
पश्चिम क्षेत्र सास्कृतिक केंन्द्र
अब्बास बाटलीवाला उदयपुर
श्री विघासागर उपाध्याय जयपुर
श्री राम जैसवाल अजमेर
श्री भवानी शंकर शर्मा जयपुर
श्री गगन बिहारी दाधीच नाथद्वारा
श्री रामू रामदेव जयपुर
श्री महेश सिंह जयपुर
श्री गौरी शंकर सोनी जयपुर