शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

नए 100 रुपये के नोट पर होगी धरोहर की तस्वीर


नए 100 रुपये के नोट पर होगी धरोहर की तस्वीर
मूमल डेस्कवर्क। भारतीय रिजर्व बैंक जल्दी ही 100 रुपये का एक नया नोट जारी करने वाला है। इस नोट पर विश्व विरासत घोषित भारतीय धरोहर की तस्वीर होगी।  केंद्रीय बैंक की ओर से जारी बयान के अनुसार इस नोट का रंग हल्के बैंगनी रंग का होगा। इस नोट का आकार 66 मिलीमीटर & 142 मिलीमीटर होगा। बैंक ने इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है जिसे ट्वीट भी किया गया है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक के जारी किए पहले के सभी 100 रुपये के नोट मान्य बने रहेंगे.
इस नए नोट पर पहले की ही तरह महात्मा गांधी की तस्वीर है, अशोक स्तंभ, प्रॉमिस क्लॉज़ और अन्य फ़ीचर्स के साथ मौजूदा गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे, लेकिन नोट के पिछले हिस्से पर एक तस्वीर होगी जिस पर लिखा है "रानी की वाव."
क्या है रानी की वाव
"रानी की वाव" गुजरात के पाटन जि़ले में स्थित एक प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) है जिसे यूनेस्को ने चार साल पहले 2014 में विश्व विरासत में शामिल किया था. भारतीय इतिहास और यूनेस्को की वेबसाइट में लिखा है कि रानी की वाव सरस्वती नदी से जुड़ी है। इसे ग्यारहवीं सदी के एक राजा की याद में बनवाया गया था।
रानी की वाव भूमिगत जल संसाधन और जल संग्रह प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो भारतीय महाद्वीप में बहुत लोकप्रिय रही है। इस तरह के सीढ़ीदार कुएं का ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से निर्माण किया जाता रहा है।
सात मंजि़ला इस वाव में मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली का सुन्दर उपयोग किया गया है जो जल संग्रह की तकनीक, बारीकियों और अनुपातों की अत्यंत सुंदर कला क्षमता की जटिलता को दर्शाता है। जल की पवित्रता और इसके महत्व को समझाने के लिए इसे औंधे मंदिर के रूप में डिजाइन किया गया था।

वाव की दीवारों और स्तंभों पर सैकड़ों नक्काशियां की गई हैं। सात तलों में विभाजित इस सीढ़ीदार कुएं में नक्काशी की गई 500 से अधिक बड़ी मूर्तियां है और एक हज़ार से अधिक छोटी मूर्तियां हैं जिनमें धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष चित्रों को उकेरा गया है जो साहित्यिक संदर्भ भी प्रदान करती हैं।
इनमें अधिकांश नक्काशियां, राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि आदि जैसे अवतारों के विभिन्न रूपों में भगवान विष्णु को समर्पित हैं। इसका चौथा तल सबसे गहरा है जो एक 9.5 मीटर से 9.4 मीटर के आयताकार टैंक तक जाता है और जो 23 मीटर गहरा है। यह कुआं इस परिसर के एकदम पश्चिमी छोर पर स्थित है जिसमें 10 मीटर व्यास और 30 मीटर गहराई का शाफ़्ट शामिल है।
पहले भी छपती रही हैं विरासतें
यह पहली बार नहीं है जब भारत में किसी ऐतिहासिक धरोहर को नोट पर छापा गया है। भारतीय विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों को छापने का प्रचलन पहले भी रहा है।
2016 में नोटबंदी के बाद आए 500 रुपये के नोट पर लाल किले की तस्वीर, 200 रुपये के नोट पर सांची का स्तूप, 50 रुपये के नोट पर हम्पी के रथ की तस्वीर छापी गई और 10 रुपये के नोट पर कोणार्क के सूर्य मंदिर के रथ का पहिया छापा गया। इसके साथ ही  50 रुपये के नोट पर भारतीय संसद, 20 रुपये के नोट पर कोणार्क के सूर्य मंदिर के रथ का पहिया इत्यादि छापे जाते रहे हैं। 

गुरुवार, 19 जुलाई 2018

अब ट्रेनें सजेंगी मिथिला पेंटिंग से

अब ट्रेनें सजेंगी मिथिला पेंटिंग से 
मूमल नेटवर्क, दरभंगा। मिथिला पेंटिंग को लेकर सरकार काफी उत्साहित है। दरभंगा जंक्शन पर वेटिंग हॉल और अन्य जगहों को मिथिला पेंटिंग से सजाया जा रहा है वहीं, मिथिला पेंटिंग को लेकर रेलवे ने एक और कदम उठाया है। रेलवे ने अब दरभंगा से खुलने वाली ट्रेनों में भी मिथिला पेंटिंग अंकित करने का प्लान बनाया है। इसके लिए ट्रायल की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
ट्रायल के तौर पर दरभंगा जंक्शन के यार्ड में एक बोगी को मिथिला पेंटिंग से सजाया गया है, जो देखने में बेहद आकर्षक लग रही है।  रेलवे ने निर्णय लिया है कि, दरभंगा से नई दिल्ली जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट पहली ट्रेन होगी, जिसका प्रत्येक कोच को मिथिला पेंटिंग से चित्रित किया जाएगा।  मिथिला पेंटिंग के पांच से सात कलाकार इस पर काम कर रहे हैं। जीएम की हरी झंडी मिलने के बाद इसमें और भी कलाकारों को जोड़ा जाएगा।
रेलवे के इस पहल को स्थानीय लोग काफी सराह रहे हैं। उनकी मानें तो इस योजना के बाद युवाओं के बीच मिथिला पेंटिंग के बारे में जानने की जिज्ञासा बढ़ेगी। साथ ही इस पेंटिंग से जुड़े लोगों की माली स्थिति भी बेहतर होगी।

सोहन कादरी फैलोशिप आवेदन की अन्तिम तिथि 14 अगस्त

सोहन कादरी फैलोशिप आवेदन की अन्तिम तिथि 14 अगस्त 
मूमल नेटवर्क, चण्डीगढ़। चंडीगढ़ ललित कला अकादमी ने साल 2018-19 के लिए सोहन कादरी फैलोशिप के लिए कलाकारों से आवेदन आमन्त्रित किए हैं।  इस फैलोशिप के लिए केवल चण्डीगढ़ के प्रोफेशनल, बंडिंग व एमेच्योर आर्टिस्ट आवेदन कर सकते हैं। स्वीकृत आवेदन को एक वर्ष के लिए एक लाख रुपये की स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी। आवेदन स्वीकार करने की अन्तिम तिथि 14 अगस्त है। सितम्बर में फैलोशिप के रिजल्ट घोषित कर दिए जाएंगे।
अकादमी चेयरमैन भीम मल्होत्रा ने बताया कि, आवेदन करने वाले आर्टिस्ट आर्ट की विभिन्न विधाओं से जुड़े हो सकते हैं। जिसमेें ड्रॉइंग, ग्राफिक्स, प्रिंट मेकिंग, इंस्टॉलेशन, मल्टी मीडिया, पेंटिंग, फोटोग्राफी और स्कल्प्चर शामिल हैं। आवेदकों की आयु 25 से 45 वर्ष तक की होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि, इस फैलोशिप का उद्देश्य आर्टिस्ट को ऐसा प्लेटफॉर्म देना है जिससे वह अपना टैलेंट निखार कर सबके सामने ला सके। एल्लेखनीय है कि गत 8 वर्षों से अकादमी आर्टिस्ट सोहन कादरी के नाम पर यह फैलोशिप देा रही है। फैलोशिप कें लिए आर्टिस्ट कादरी की बेटी पूर्वी कादरी पूरा सहयोग करती हैं।
ऐसे करें आवेदन
फैलोशिप के फॉर्म ललित कला अकादमी चंडीगढ़ की वेबसाइट से www.lalitkalachandigarh.com  से डाउनलोड किए जा सकते हैं या फिर सेक्टर-34 की स्टेट लाइब्रेरी में अकादमी के ऑफिस से फॉर्म लिए जा सकते हैं और यहीं जमा भी करवा सकते हैं। आर्टिस्ट 14 अगस्त तक  सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आवेदन कर सकते हैं।। इसके लिए आर्ट वर्क को एंट्री के रूप में भेजना होगा। इसके बाद बेस्ट आर्ट वर्क को शॉर्ट लिस्ट किया जाएगा। जूरी एक बेस्ट वर्क को चुनेगी। यानि एक आर्टिस्ट को फैलोशिप के रूप में एक लाख रुपए की राशि एक साल के लिए दी जाएगी।

महिला कलाकारों की कूंचि से महिला सरोकार के रंग

भारत का स्ट्रीट आर्ट 
महिला कलाकारों की कूंचि से महिला सरोकार के रंग
6 महिला स्ट्रीट कलाकारों के रंगों की कहानी
मूमल डेस्कवर्क। इन दिनों स्ट्रीट आर्ट का जादू ना केवल भारत वरन् विदेश के कई हिस्सों में छाया हुआ है। हम यहां भारत की बेहतरीन 6 ऐसी महिला स्ट्रीट कलाकारों की बात करेंगे जिनकी कला ना केवल लुभाती है अल्कि बहुत कुछ सोचने पर भी मजबूर कर देती है।
झील घोरडिया

झील घोरडिया मुंबई निवासी स्अ्रीट आर्टिस्ट हैं। इनकी कला में बोल्डनेस है, विचारों की बोल्डनेस। इनकी कृतियों में हिंदी सिनेमा में महिलाओं की स्थिति, लिंग भेद और अन्याय, बालीवुड की रूडि़वादिता प्रमुख है। डिजीटल मीडिया से बनाई गई अपनी कला के माध्यम से झील लोगों को भारतीय महिलाओं द्वारा भोगे जाने वाले अन्यायों के बारे में विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं। झील ने अपने प्रोजेक्ट का नाम  'ब्रेकिंग द साइलेंस' रखा है। बलात्कार, वेश्यावृत्ति, एलजीबीटी अधिकार जैसे विषय इसमें शामिल हैं।
जस चरंजीवा

जस का जन्म यूके में हुआ और भारत इनकी कर्मस्थली बना। भारत में महिलाओं की व्यथा इनकी कला का विषय बना। जस ने 2012 के निर्भया काण्ड के मामले के बाद 'डॉट नॉट मेस विथ मी' नामक एक चित्र बनाया जिसे आम तौर पर 'द पिंक लेडी' के नाम से भी जाना जाता है। यह चित्र महिलाओं के लिए अपनी पीड़ा व्यक्त करने का प्रतीक बन गया।
वर्तमान में जस और उसके पति दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ भारतीय ग्राफिक कलाकारों के लिए एक किल्चर शॉप चलाते हैं।
लीना केजरीवाल

लीना केजरीवाल भारत की एक और कलाकार हैं, जिन्होंने अपने काम के लिए सामाजिक संदेशों को चुना है। इस कलाकार ने 'मिसिंग' परियोजना के तहत महिला तस्करी के मुद्दे पर प्रकाश डाला है।  लीना अपनी परियोजना के तहत  सड़कों और प्रमुख स्थलों पर 'लापता' लड़कियों को काले रंग के चित्रित करती हैं।
पिछले कई सालों से, लीना मानव जालसाजी और युवा लड़कियों की वेश्यावृत्ति के मुद्दों पर कई गैर सरकारी संगठनों के साथ काम कर रही है। 'लापता' के माध्यम से, वह अपनी चिंताओं को जनता के लिए एक दिलचस्प और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करती है।
लीना फ्रांस की निवासी है, और कोलकाता, दिल्ली, तेहरान, बर्लिन और वीमर जैसे शहर अपने बड़े पैमाने पर फोटोग्राफिक इंस्टालेशन लगाती हैं।
काजल सिंह

काजल सिंह को लोग 'डिज़ीÓ नाम से अधिक पहचानते हैं। काजल नेे पूरे भारत में अपनी हिप-हॉप प्रेरित कला की छाप छोड़ी है। बचपन से कला प्रतियोगिताओं को जीतना सिंह के जीवन का हिस्सा रहा है। हिप-हॉप और कला के लिए उनका प्यार एक यूनिक आर्ट के रूप में लोगों के ामने आया। स्ट्रीट आर्ट में विभिन्न रंगों के प्रयोग से काजल की अपनी शैली उनकी एक विशेष पहचान को कायम किया है।
किसी भी शहर में काम शुरू करने से पहले काजल हमेशा उचित अनुमति लेती हैं। लेकिन उन्होंने महसूस किया है कि ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी दीवारों को भित्तिचित्रण के लिए हमेशा प्रदान करते हैं। काजल की कला पुराने स्कूल की भित्तिचित्र सी है, जिसमें चमकदार रंगों में चंकी अक्षरों के साथ छोटे किरदार निकलकर सामने आते हैं। काजल एक हिप-हॉप नर्तकी,  उग्र चित्रकार और एक फिटनेस ब्लॉगर भी है।
रश

रश मणिपुर की मूल निवासी हैं। यह 2010 से सक्रिय रूप से चित्रकारी कर रहीं हैं। रश ने दिल्ली के चार महत्वपूर्ण स्थान आईआईटी, हौज खास, आईएसबीटी फ्लाईओवर और चाणक्यपुरी में अपने काम की छाप छोड़ी है। उनके प्रवेश से, कला उसे एक भीड़ देता है, और इसलिए उसने अपना नाम चुना। चित्रण के लिए गुलरबी रंग को विशेष रूप से पसन्द करने वाली रश को शब्दों के साथ खेलना पसंद है।
अंपू वर्की

अंपू वर्की एक कुशल चित्रकार हैं। दिल्ली, पूणे, ऋषिकेश व चैन्नई की दीवारों पर चित्रित बिल्ली के चित्रों ने इंपु को विशेष रूप से पहचान दिलाई।

भारत में सबसे महत्वपूर्ण कलाकृतियों में से एक दिल्ली पुलिस मुख्यालय टावर पर विशाल महात्मा गांधी की मूर्ति भी अंपूं की ही कृति है। बेंगलुरू की मूल निवासी अंपू ने हलासुरु मेट्रो स्टेशन के पास एक घर की दीवार पर एक विशाल चंद्रमा चित्रित किया। अंपू ने 2017 बेंगलुरु छोड़ा और पेंटिंग का अध्ययन करने के लिए बड़ौदा के एमएस विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और फिर लंदन में बाम शॉ स्कूल ऑफ आर्ट में।
अंपू का मानना है कि दुनिया तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका एक दीवार को पेंट करना है जो हर किसी को आमन्त्रित करता है। 

बुधवार, 18 जुलाई 2018

चेन्नई में नेचुरल कलर और एस्थेटिक्स कार्यशाला 20 जुलाई से

चेन्नई में नेचुरल कलर और एस्थेटिक्स कार्यशाला 20 जुलाई से
जयपुर के अमित कल्ला करेंगे संचालन
मुमल नेटवर्क, चैन्नई/जयपुर। कवि और चित्रकार अमित कल्ला बीस जुलाई से तमिल नाडू की राजधानी चेन्नई में प्राकृतिक रंगों और भारतीय दर्शन की सौन्दर्य मीमांसा विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का संचालन करेंगे जिसे आर्ट प्रोमो ग्लोबल और माय स्टूडियो के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जायेगा, इस दौरान वे फूल-पत्तियों और धरती में पाए जाने वाले विभिन्न मिनरल्स और मेटल्स से नेचुरल कलर बनाने की तकनीक साझा करेंगे।
अमित वहां फूलों में केसुला, अमलतास, हरसिंगार, बोगनबेलिया, चंपा, कुसुम  जैसे फूलों के अलावा  हल्दी, आंवला, चूना, पेवड़ी, सिन्दूर, तून, कत्था, कॉफ़ी, हरितिका, अनार छिलका, बडहल, जामुन, गरण,  चिरायता, कायफल,सोनामुखी और प्राकृतिक नील से बबूल के गौंद का इस्तमाल करके  विभिन्न प्रकार के रंग बनाना सिखायेंगे।
अमित के अनुसार प्राकृतिक रंगों की अपनी एक अलग तासीर होती है जो किसी भी सर्फेस पर चित्र का रूप लेकर हमेशा से एक आयाम रचती नजऱ आती है। सदियों से इसका सामाजिक, ऐतिहासिक और प्रायोगिक महत्व रहा है। इस प्राचीन विधियों की कला के विद्यार्थियों और कलाकारों दोनों को यथासंभव जानकारी होना वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है ।
कार्यशाला में रंग तकनीक के साथ ही इंडियन एस्थेटिक्स के मूल कहे जाने वाले कुछ प्रमुख ग्रन्थ मनसोलास, संग्रामणसूत्रधार, विष्णुधर्मोत्तरपुराण, दृगदृष्य विवेचिका के अलावा रस-ध्वनि के सिद्धांत, कला का देश-काल, नाद-बिंदु, पुरुष-प्रकृति, रूप-अरूप, भाव-अलंकर और विभिन्न दृश्यात्मक अनुभवों से जुड़े तमाम पहलुओं को बेहद सरलतम अंदाज़ में बतलाया जायेगा।

सोमवार, 16 जुलाई 2018

राजस्थान में रंग मल्हार का 9वां चरण


राजस्थान में रंग मल्हार का 9वां चरण


13 शहरों में लालटेन पर बिखरे रंग

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान के बारह शहरों में रंग मल्हार मना कर चितेरों ने वर्षा को आमन्त्रित किया। इस वर्ष रंगों का मल्हार लालटेन के साथ मनाया गया।
वर्ष 2010 में जयपुर की व्योम आर्ट गैलेरी से आरम्भ होकर नवें एडीशन तक आते-आते रंग मल्हार ने अपने पंख राज्य के 13 शहरों तक पसार लिए हैं। अच्छे मानसून की कामना लिए रंग मल्हार में इस वर्ष लालटेन को अपना माध्यम बनाया गया। लालटेन पर की गई आकर्षक चित्रकारी ने ना केवल आम लोगों वरन् इंद्रदेव को भी प्रसन्न कर दिया। जयपुर में कल 15 जुलाई को आयोजन के शुरु होते ही बादलों से गिरती फुहारों ने रंगों के मल्हार के साथ मिल रिमझिम के गीत गाए। उल्लेखनीय है कि कमोबेश सभी शहरों में आयोजन के लिए सरकारी व निजी स्तर पर प्रायोजकों का सराहनीय समर्थन प्राप्त हुआ।
इन शहरों में मना रंग मल्हार
जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, टोंक, गंगानगर, .नाथद्वार, परतापुर, बीकानेर, बून्दी, 
सीकर,  भीलवाड़ा व जालोर।

रोड सेफ्टी के लिए रंग आन्दोलन

रोड सेफ्टी के लिए रंग आन्दोलन
महावालकथन 2018
ड्राइंग, चित्रकारी, फोटोग्राफी व वीडियो प्रतियोगिता
मूमल नेटवर्क, मुंबई। वाहन ड्राईवरों को उनकी जिम्मेदारी के प्रति प्रेरित करने व सड़कों को दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक कला का माध्यम अपनाते हुए एक अनोखी पहल की है। लोगों को जीवन से जुड़े मुद्दों से जोडऩे के लिए ड्राइंग, चित्रकारी, फोटोग्राफी व वीडियो प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता में हिस्स लेने के लिए हर उम्र के सभी नागरिक आमन्त्रित हैं।श्रेष्ठ कृतियों को नकद राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार के लोक निर्माण विभाग, एमएमवीडी (परिवहन), सीएसआर डायरी और सीएएसआई ग्लोबल ने संयुक्त रूप से महाआयोजन को साकार करने की जिम्मेदारी उठायी है। प्रतियोगिता में किसी भी आयुवर्ग का कोई भी नागरिक चाहे वो कलाकार हो या नहीं भाग ले सकता है। इसके लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। ड्राइंग, चित्रकारी, फोटोग्राफी व वीडियो प्रतियोगिता में से किसी एक या अधिक के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। प्रतियोगिता थीम सड़क सुरक्षा, नॉनकॉन्किंग व जिम्मेदार ड्राइविंग है। चित्रकारी के लिए क्रेयॉन, पेंसिल रंग, पानी का रंग या किसी भी प्रकार के रंग का उपयोग करने की अनुमति है। फोटोग्राफी के लिएमोबाइल कैमरा सहित किसी भी कैमरा का इस्तेमाल किया जा सकता है। वीडियो भी किसी भी कैमरा या मोबाइल से बनाया जा सकता है।
प्रविष्टियां भेजने की अन्तिम तारीख 15 नवम्बर है। अपने पूरे विवरण के साथ प्रविष्टियां यहां  facebook.com/mahawalkathon भेजी जा सकती हैं। श्रेष्ठ कृतियों के परिणाम की घोषणा 18 नवम्बर को कर दी जाएगी। पुरस्कारों के लिए प्रतियोगियों को दो भागों में विभाजित किया गया है, छात्र श्रेणी तथा ओपन श्रेणी। दोनों श्रेणियों में पुरस्कार की राशि समान रखी गई है। पुरस्कार के रूप में प्रथम पुरस्कार 5000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 3000 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 2,000 रुपए दिए जाएंगे। इन पुरस्कारों के साथ हर महीने एक भाग्यशाली विजेता को एक सरप्राइज गिफ्ट भी दिया जाएगा।