गुरुवार, 9 फ़रवरी 2017

शुरु हुआ आर्टिस्ट कैम्प आर्ट फेस्टिवल

मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के रीजनल सेन्टर में आज से मल्टी डिसिपिनरी आर्टिस्ट कैम्प आर्ट फेस्टिवल की शुरुआत हुई। कैम्प का समापन 18 फरवरी को होगा। समापन अवसर पर कैम्प में तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग के सेक्रेटरी डॉ. हरि ओम करेंगे।

मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

Rajasthan Lalit Kala Akademy 37वीं छात्रकला प्रदर्शनी 2016-17


37वीं छात्रकला प्रदर्शनी 2016-17
पुरस्कार
प्राप्त प्रविष्टियों में से निर्णायकों द्वारा चयनित 10 उत्कृष्ट कृतियों को अकादमी द्वारा पाँच-पाँच हजार रूपये के 10 पुरस्कार दिये जायेंगे।
अन्तिम तिथि
प्रवेश-पत्र तथा प्रविष्टियाँ भेजने की अन्तिम तिथि 18 जनवरी, 2017 होगी। वे उस दिन सांय 5.00 बजे तक स्वीकार की जायेंगी। इस अवधि के पश्चात् किसी भी कृति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रवेश पत्र शिक्षण संस्था के विभागाध्यक्ष/प्राचार्य द्वारा अग्रेषित होना चाहिए।
पात्रता
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र/छात्राओं की आयु 15 से 25 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।
उनका राजस्थान राज्य स्थित किसी शिक्षण संस्था का विद्यार्थी होना अनिवार्य है। छात्र कला प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी अकादमी की वार्षिक प्रदर्शनी में भाग नहीं ले सकेंगे।
प्रतियोगिता सम्बन्धी नियम
1. प्रत्येक प्रतियोगी अधिक से अधिक तीन कृतियाँ भेज सकेगा।
2. प्रत्येक कृति छात्र/छात्रा की स्वनिर्मित कृति होनी चाहिए।
3. कलाकृतियाँ पहले किसी प्रदर्शनी में प्रदर्शित नहीं होनी चाहिए।
4. अकादमी एक निर्णायक समिति का गठन करेगी। समिति के सदस्य सभी प्राप्तकलाकृतियों का अवलोकन करके प्रदर्शनी हेतु स्वीकृत तथा पुरस्कृत करने हेतु दस उत्कृष्ट एवं पाँच सान्त्वना पुरस्कारों हेतु कृतियों का चयन करेंगे।
5. निर्णायक समिति का निर्णय अन्तिम माना जाएगा।
6. अकादमी द्वारा कृतियों की वापसी के लिए निर्धारित तिथि के एक महीने के भीतर यदि छात्र/छात्रा अपनी कृतियाँ वापस नहीं ले जायेंगे तो उनकी सुरक्षा के सम्बन्ध में अकादमी का कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा और न ही किसी क्षति के लिए वह क्षतिपूर्ति देने के लिए बाध्य होगी।
7. प्रदर्शनी के लिए स्वीकृत प्रत्येक कृति के प्रकाशन व प्रदर्शन का अधिकार अकादमी के पास पूर्णतया सुरक्षित रहेगा।
8. प्रत्येक छात्र/छात्रा कलाकार को निमंत्रण-पत्र के अतिरिक्त सूची-पत्र की एक प्रति निःशुल्क दी जाएगी।
9. फ्रेम किये हुए चित्र ही स्वीकार किये जायेंगे।
10. प्रदर्शनी हेतु छात्रों को कलाकृतियाँ भेजने और वापस मंगाने का खर्च स्वयं वहन करना होगा।
प्रवेश-पत्र
37वीं छात्रकला प्रदर्शनी 2016-17
सचिव,
राजस्थान ललित कला अकादमी
जे-15, झालाना संस्थानिक क्षेत्र, झालाना डूंगरी, जयपुर-302004
महोदय,
मैं, स्वनिर्मित निम्न कलाकृतियाँ उपरोक्त प्रदर्शनी/प्रतियोगिता में सम्मिलित करना चाहता/ चाहती हूँ।
मैं राजस्थान स्थित.............................................................................................................................................................
शिक्षा संस्थान में...................................................................................................कला का/की विद्यार्थी हूँ।
क्र.सं.
कृति का शीर्षक
माध्यम
मूल्य
नाम........................................................................................................................................................................................
निवास स्थान.......................................................................................................................................................................
ई-मेल...................................................................................................................................................................................
दूरभाष/मोबाइल..............................................................................जन्म तिथि...............................................................
छात्र/छात्रा द्वारा दिये गये उपरोक्त तथ्य सही हैं तथा प्रतियोगिता नियमों के अनुकूल हैं।
ह. विभागाध्यक्ष/प्राचार्य
दिनांक................................ मोहर
...............................................................................................................................................................................................
मोनोग्राम राजस्थान ललित कला अकादमी
37वीं छात्र कला प्रदर्शनी, 2016-17
कलाकृति न. रसीद दिनांक .................................
कलाकृति का शीर्षक
1.....................................................................
2.....................................................................
3.....................................................................
नाम व पता
...................................................................................................................................................................................................................................................................................
कलाकृति के पीछे एक लेबिल चिपका होना चाहिए जिस पर निम्न विवरण दिये जाने चाहिए।
.............................................................................................................................................................................
37वीं छात्र कला प्रतियोगिता, 2016-17
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
कलाकार का नाम...............................................................................................................................................................
आयु.......................................................................................................................................................................................
शिक्षण संस्थान का नाम....................................................................................................................................................
कलाकृति का शीर्षक..........................................................................................................................................................
माध्यम...................................................................................................................................................................................
कलाकृति का मूल्य.............................................................................................................................................................
दिनांक हस्ताक्षर
...............................................................................................................................................................................................
37वीं छात्र कला प्रतियोगिता, 2016-17
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
कलाकार का नाम...............................................................................................................................................................
आयु.......................................................................................................................................................................................
शिक्षण संस्थान का नाम....................................................................................................................................................
कलाकृति का शीर्षक..........................................................................................................................................................
माध्यम...................................................................................................................................................................................
कलाकृति का मूल्य.............................................................................................................................................................
दिनांक हस्ताक्षर
...............................................................................................................................................................................................
37वीं छात्र कला प्रतियोगिता, 2016-17
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
कलाकार का नाम...............................................................................................................................................................
आयु.......................................................................................................................................................................................
शिक्षण संस्थान का नाम....................................................................................................................................................
कलाकृति का शीर्षक..........................................................................................................................................................
माध्यम...................................................................................................................................................................................
कलाकृति का मूल्य.............................................................................................................................................................
दिनांक हस्ताक्षर


शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी

 

राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा 2016-17 के स्टेट अवार्डस व वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए प्रविष्टियां आमन्त्रित की जा रही हैं। आवेदन करने की अन्तिम तिथि 23 जनवरी 2017 है।
58वीं
वार्षिक कला प्रदर्शनी
2016-17
नियमावली
राजस्थान ललित कला अकादमी
जे-15, झालाना सांस्थानिक क्षेत्र
झालाना डूंगरी, जयपुर-302004
दूरभाष न. 0141-2700784
अन्तिम तिथि
दिनांक 23 जनवरी, 2017 को सांय 5.00 बजे तक
58वीं
वार्षिक कला प्रदर्शनी
2016-17
पुरस्कार
1. (क) 58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में 25-25 हजार रूपये के दस पुरस्कार दिये जायेंगे। इनमें से दो पुरस्कार ग्राफिक ड्रांइग के लिए तथा दो मूर्तिकला के लिए सुरक्षित रखे जायेंगे, परन्तु निर्णायक यदि दोनों वर्गों में से किसी भी वर्ग या दोनों में ही किसी कलाकृति को पुरस्कार योग्य उपयुक्त न समझे तो इन वर्गों के पुरस्कार रोक दिये जायेंगे। किसी भी स्थिति में पुरस्कार विभाजित नहीं किये जायेंगे।
(ख) गत वर्ष प्रदर्शनी में पुरस्कृत कलाकारों की कृतियां इस वर्ष पुरस्कार हेतु सम्मिलित नहीं की जायेंगी।
(ग) अकादमी द्वारा प्रदत्त पुरस्कार राज्य कला पुरस्कार कहलायेंगे।
(घ) कलाविद् (फैलोशिप) से सम्मानित कलाकार वार्षिक प्रदर्शनी में ‘अतिथि कलाकार‘ के रूप में भाग ले सकेंगे।
(ड.) अकादमी द्वारा तीन अथवा तीन से अधिक बार पुरस्कृत कलाकार प्रतियोगिता में सम्मिलित नहीं हो सकेंगे।
(च) अकादमी द्वारा आयोजित अखिल भारतीय कला प्रदर्शनियों में पुरस्कृत कलाकार अपनी कृतियां प्रतियोगिता ‘‘प्रतियोगिता के लिए नहीं‘‘ श्रेणी के अन्तर्गत भेज सकते है। ‘घ‘ ‘ड.‘ एवं ‘च‘ श्रेणी के कलाकरों से प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा।
(छ) किसी भी शिक्षण संस्था में अध्ययनरत विद्यार्थी केवल छात्रकला प्रदर्शनी अथवा राज्य कला प्रदर्शनी में से किसी एक प्रतियोगिता में ही भाग ले सकेंगे।
2. (क) वे कलाकार जो राजस्थान में पिछले पाँच वर्ष से कम तथा राजस्थान से बाहर पिछले पाँच वर्ष से अधिक समय से रह रहे हैं, वार्षिक प्रदर्शनी में ‘‘प्रतियोगिता के लिए नहीं‘‘ श्रेणी के अन्तर्गत ही भाग ले सकते है।
(ख) इस नियमावली में उल्लिखित नियमों का पालन न होने पर कलाकृतियों को प्रदर्शनी में स्थान नहीं दिया जाएगा।
अन्तिम तिथि
3. प्रवेश पत्र, प्रवेश शुल्क 100/- रूपये (नगद अथवा मनीआर्डर) तथा कलाकृतियाँ अकादमी कार्यालय में दिनांक 23 जनवरी, 2017 को सांय 5.00 बजे तक ही स्वीकार की जायेंगी।
नियम व शर्तें
4. प्रदर्शनी में भेजी गई तथा निर्णायकों द्वारा स्वीकार की गई प्रत्येक कलाकृति स्वमेव पुरस्कार के लिए प्रतियोगिता में सम्मिलित समझी जायेगी जब तक की प्रवेश पत्र में ‘‘प्रतियोगिता के लिए नहीं‘‘ उल्लिखित न हो।
5. सभी पुरस्कार कलाकृति के अपने ही गुण पर प्रदान किये जायेंगे।
6. निर्णायकों की घोषणा प्रदर्शनी के सूची-पत्र में कर दी जाएगी।
7. प्रदर्शनी के लिए एक कलाकार चित्र/मूर्ति /ग्राफिक/ड्राइंग में से किसी एक विधा में ही भाग ले सकेगा एवं तीन कलाकृतियाँ भेजना अनिवार्य होगा। तीन से कम कृतियां देने पर उन्हे ‘‘प्रतियोगिता के लिए नहीं‘‘ श्रेणी में रखा जाएगा।
8. मूर्तियाँ मजबूत माध्यम से ही बनी हुई हों फिर भी चूंकि यह प्रदर्शनी राज्य में अन्य केन्द्रों तथा राज्य के बाहर भी आयोजित की जा सकती है इसलिए सुविधा की दृष्टि से 6 फुट से ज्यादा ऊँचाई की रचना एवं अत्यधिक भारी मूर्ति न हो जिससे उन्हें बाहर ले जाने वाली प्रदर्शनी में शामिल किया जा सके।
9. प्रदर्शनी हेतु चयनित कृति यदि सावधानी के बावजूद अकादमी में किन्हीं अपरिहार्य कारणों से क्षतिग्रस्त हो जाए तो अकादमी हर्जाने के रूप में 200/- रूपये तक देगी जो रचना प्रदर्शनी हेतु स्वीकार नहीं हुई हो तो उस पर यह नियम लागू नहीं होगा। कलाकृति को बीमा द्वारा प्रदर्शनार्थ भेजा जाए तो यह कलाकारों के हित में होगा।
10. प्रदर्शनी के लिए स्वीकार प्रत्येक कलाकृति के प्रकाशन का अधिकार अकादमी पूर्णतया सुरक्षित रखती है।
11. प्रत्येक कलाकार को उद्घाटन समारोह के निमंत्रण-पत्र के अतिरिक्त सूची-पत्र की एक प्रति निःशुल्क दी जाएगी।
12. प्रतियोगिता के लिए भेजी गई सभी कलाकृतियां निर्णायक समिति के सम्मुख प्रस्तुत की जायेंगी और प्रदर्शनार्थ स्वीकार या अस्वीकार करने का पूर्ण अधिकार उस समिति को ही होगा।
13. संदूकों पर कीलों की जगह स्क्रू लगे होने चाहिए। उन्हें कीलों द्वारा बन्द न किया जाए। संदूक के अन्दर कलाकृतियों से सम्बन्धित नाप, उनकी संख्या, सूक्ष्म विवरण, प्रेषक कलाकार का नाम और पता स्पष्ट लिख या टाइप किया हुआ होना चाहिए।
14. प्रदर्शनार्थ भेजी जाने वाली चित्रकृतियाँ भली प्रकार से मढ़ी अथवा माउंटेड होने पर ही स्वीकार की जायेंगी।
15. प्रत्येक कलाकृति पर दो लेबल होने चाहिए जिनमें से एक कलाकृति के पीछे चिपका हुआ हों एवं एक धागे से बंधा हुआ हो। दोनों स्पष्ट एवं पूर्ण लिखित या टाइप किये हुए हों।
16. अकादमी को दी गई सूचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने का कलाकार को अधिकार उल्लिखित सूचना के अनुरूप होनी चाहिए। ऐसा न होने पर प्रवेश पत्र में दी गई सूचना ही अन्तिम और मान्य समझी जायेगी और उसी के आधार पर कलाकार को अपने लेबलों में दी गई सूचना में सुधार करना होगा। भरा जाने वाला प्रवेश पत्र अकादमी के अधिकृत फार्म पर ही होना चाहिए।
17. कोई भी कलाकार, जिसकी कलाकृतियाँ प्रदशर््िात की गई हों, किसी भी परिस्थिति में मुख्य एवं चल प्रदर्शनी का कार्य समाप्त होने से पूर्व अपनी कृति वापस नहीं मांग सकेगा। केवल विशेष परिस्थिति में अकादमी के सचिव की अनुमति से ही चयनित कृति वापस मिल सकेगी।
18. निर्णायक समिति द्वारा घोषित परिणाम अन्तिम समझे जायेंगे तथा इनके विरूद्ध कोई भी प्रतिवेदन स्वीकृत नहीं होगा।
19. सभी समान कैरेज पेड करके भेजा जाना चाहिए। कैरेज पर ‘‘58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी‘‘ हेतु लिखा होना चाहिए। इस पर भी सचिव, राजस्थान ललित कला अकादमी, अकादमी संकुल जे-15 झालाना संस्थानिक क्षेत्र, झालाना डूंगरी, जयपुर-302004 का पता स्पष्ट होना चाहिए।
20. प्रदर्शनी के लिए कलाकृतियों का कलाकार द्वारा भेजे जाने का यह स्वतः अर्थ होगा कि वह उपरोक्त सभी नियम-उपनियम आदि स्वीकार करता है।
21. पुरस्कृत कलाकारों को पुरस्कार राशि वार्षिक कला प्रदर्शनी के प्रमुख समारोह के समय दी जायेगी।
22. यदि कोई कलाकार नियमों के पालन में असमर्थ व गलत साबित होता है तो उसको पुरस्कार की सम्पूर्ण राशि व प्रमाण-पत्र आदि वापस करने होंगे।
23. 58वीं वार्षिक प्रदर्शनी की कृतियां व अकादमी द्वारा विक्रय की जाने वाली प्रत्येक कलाकृति पर 10 प्रतिशत कमीशन ‘कलाकार सहायता कोष‘ हेतु काटा जाएगा।
24. अकादमी की पूर्व वार्षिक प्रदर्शनियों हेतु भेजीे गई कलाकृतियों एवं अन्य किसी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में चयनित कृतियाँ 58वीं वार्षिक प्रदर्शनी हेतु सम्मिलित नहीं की जायेगी व कृतियां नवीनतम निर्मित होनी चाहिए एवं वर्ष 2015 से पूर्व की बनी हुई नहीं होनी चाहिए।
25. इस प्रविष्टि के साथ 100/- रूपये नकद या मनीआर्डर सचिव, राजस्थान ललित कला अकादमी के नाम भेजने पर ही कृतियाँ प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता हेतु स्वीकार की जायेंगी।
26. कलाकार के लिए प्रवेश पत्र पर अपनी पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ लगाना व अपना सम्पूर्ण बॉयोडाटा भेजना अनिवार्य होगा।
27. कलाकार अकादमी द्वारा पूर्व में आयोजित प्रदर्शनियों में भेजी गई कृतियों की प्राप्ति के पश्चात् ही 58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी में भाग ले सकेगा।
28. सभी प्रकार का पत्र-व्यवहार, सचिव, राजस्थान ललित कला अकादमी, अकादमी संकुल, जे-15, झालाना संस्थानिक क्षेत्र, झालाना डूंगरी, जयपुर-302004 के पते पर होना चाहिए।
कलाकृतियों की वापसी
29. (क) प्रदर्शनियों के पश्चात् कृतियाँ वापस ले जाने हेतु अकादमी द्वारा पत्र लिखने के एक माह बाद कृतियों की सुरक्षा के सम्बन्ध में अकादमी का कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा।
(ख) जो कलाकार अकादमी कार्यालय में कृतियां देंगे उन्हें अकादमी द्वारा कृतियां वापस ले जाने हेतु पत्र मिलने पर, एक माह के भीतर स्वयं आकर कृतियाँ ले जाना अनिवार्य होगा।
58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी, 2016-17
कृतियां व प्रविष्टि प्राप्त करने की अन्तिम तिथि
23 जनवरी, 2017
प्रविष्टि कृतियों के साथ ही भेजें।
100/- रूपये नकद/मनीऑर्डर रसीन नं.................................
नोट: पार्सल-बीजक-रजिस्टर पोस्ट द्वारा ही भेजें।
सचिव,
राजस्थान ललित कला अकादमी,
जे-15, झालाना संस्थानिक क्षेत्र, झालाना डूंगरी, जयपुर - 302004
महोदय,
निवेदन है कि 58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी की नियमावली को भली-भाँति पढ लिया है व नियमावली में उल्लिखित नियमों को स्वीकार करते हुए अपनी निम्नलिखित कृतियां राजस्थान ललित कला अकादमी की उक्त वार्षिक प्रदर्शनी के लिए प्रेषित कर रहा हूँ/रही हूँ:
क्रमांक कलाकृति का शीर्षक माध्यम कृति किस वर्ष बनाई गई मूल्य
1.
2.
3.
नाम (कलाकार)....................................................................................................................................................................
पता: ...................................................................................................................................................................................................................................................................................................................................पिन कोड न..........................
ई-मेल पता. .........................................................................................दूरभाष/मोबाइल .............................................
जन्म दिनांक एवं स्थान ....................................................
मै घोषणा करता/करती हूँ कि उपयुर्क्त कलाकृतियां मेरी स्वयं की मूल कलाकृतियां है। जो वर्ष 2015 के पश्चात् सृजित है तथा मैं पिछले पाँच वर्षों से राजस्थान का/की मूल निवासी हूँ। ये कृतियां प्रतियोगिता के लिए हैं/नहीं हैं।
दिनांक............................. हस्ताक्षर ...............................
राजस्थान ललित कला अकादमी
58वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी, 2016-17
कलाकृति नं. रसीद दिनांक .................................
कलाकृति का शीर्षक
1............................................................................................
2...........................................................................................
3............................................................................................
नाम व पता
...................................................................................................................................................................................................................................................................................
रूपये 100/- नगद/म.आ. द्वारा प्राप्त किये।
हस्ताक्षर प्राप्तकर्ता
परिचय ;ठपवकंजंद्ध
(स्पष्ट रूप से 



बुधवार, 17 अगस्त 2016

The Art Institutes important links

कला संस्थानों के महत्वपूर्ण लिंक
राष्ट्रीय ललित कला अकादमी के समानान्तर अनेक राज्यों ने भी राज्य ललित कला अकादमियों की स्थापना की हैं जो राज्य स्तर पर अनेक कलाकारों के लिए अनेक प्रोत्साहन व सहायता कार्य करती हैं। कला विद्यार्थियों को वर्तमान में 12 राज्यों में 12 राज्य ललित कला अकादमी हैं जो केंद्रीय अकादमी की सहायक और सहकारी हैं। राष्ट्रीय ललित कला अकादमी (नेशनल अकादमी आफ आर्टस) के बजट में देशी और प्रांतीय अकादमी के कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं हैं। देश की प्रमुख ललित कला अकादमियों के वेबसाइट लिंक निम्र हैं।


Regional Centres of Lalit Kala Akadmi, New Dehli.

STATE LALIT KALA AKADMIES


शनिवार, 9 जुलाई 2016

पाकिस्तान के बिंदास न्यूड आर्टिस्ट


पाकिस्तान की गिनती अक्सर रूढ़िवादी देशों में की जाती है, जहां धर्म और नैतिकता आपकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच आ जाते हैं. लेकिन उसी पाकिस्तान में न्यूड तस्वीरों वाली आर्ट गैलरियां भी हैं.   
मोहम्मद अली पाकिस्तान में पेंटर हैं. अपनी एक न्यूड पेंटिंग दिखाते हुए वह कहते हैं कि पाकिस्तान में उनके काम को कभी भी सेंसर नहीं किया गया है. 27 साल के अली कराची की आर्ट गैलरी में ऐसे विषयों पर पेंटिंग बनाते हैं, जो आम तौर पर समाज में वर्जित हैं. राजनीति के अलावा सेक्स भी उनकी कला का एक विषय है. तो फिर उनकी पेंटिंग को ले कर कभी कोई हंगामा क्यों नहीं हुआ? वह बताते हैं, "यहां लोगों के पास पेट भरने के लिए खाना नहीं है और जो भूखा मर रहा है उसकी कला में कोई रुचि नहीं है."   
पाकिस्तान में ईशनिंदा और इज्जत के नाम पर खून-खराबा भी अनसुना नहीं है. ऐसे में अली जानते हैं कि उनका काम जोखिम भरा है, "मैंने कई बोल्ड और रिस्की चीजें बनाई हैं लेकिन में खुशकिस्मत हूं कि मुझे कभी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा." लेकिन अली अकेले कलाकार नहीं हैं. कराची कला के लिहाज से उभर रहा है. समीरा राजा कराची में कैनवस गैलरी चलाती हैं. यहां कई न्यूड पेंटिंग्स हैं और ऐसी भी जो समलैंगिकों को दर्शाती हैं. अपनी गैलरी के बारे में वह बताती हैं, "कला की दुनिया में ये चीजें वर्जित नहीं हैं. लेकिन मैं यह भी जानती हूं कि में इन्हें पब्लिक प्लैटफॉर्म पर नहीं डाल सकती क्योंकि इससे कलाकार की जिंदगी खतरे में पड़ जाएगी."  
 
समीरा राजा मानती हैं कि उनके शोरूम में और पाकिस्तान के रईसों के घरों में ये पेंटिंग्स सुरक्षित हैं. वह बताती हैं कि पाकिस्तान में कला का बाजार बढ़ता जा रहा है. कराची यूनिवर्सिटी में कला के प्रोफेसर मुनवर अली सैयद भी इस बात से इत्तिफाक रखते हैं. वह बताते हैं कि यूनिवर्सिटी में सेल्फ सेंसरशिप पर भी ध्यान दिया जाता है, "हम यहां इस बात का ध्यान रखते हैं कि इंसानी जननांगों को ना दिखाएं. कुछ सीमाएं हैं." पर साथ ही वह यह भी मानते हैं कि जब किसी चीज पर रोक लगाई जाती है, तो उससे स्टूडेंट्स को नई दिशा भी मिल जाती है, जब आपको इस बात का अहसास होता है कि यहां सीमाएं हैं जिन्हें आप पार नहीं कर सकते, तब आप और भी ज्यादा कलात्मक हो जाते हैं."   
पाकिस्तान में अस्सी के दशक में जिया उल हक की तानाशाही के दौरान इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा मिला. लेकिन जिया उल हक के कत्ल के बाद नब्बे के दशक से कराची जैसे शहरों में बदलाव देखने को मिला. कभी जो छिप छिप के लोगों ने पेंटिंग बनानी शुरू की, आज गैलरी में प्रदर्शनियां लगा रहे हैं.    

साभार: आईबी/वीके (एएफपी) ईशा भाटिया

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

Rajasthan Lalit Kala Akadami KalaMela

आखिर पूरी तरह टल गया कला मेला
12 लाख रुपए लेप्स
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में आयोजित होने वाला कला आयोजित नहीं किया जा सका और इस आयोजन के लिए मिले 12 लाख रुपए लेप्स हो गए। अकादमी के अधिकारी कला मेला आयोजित नहीं कर पाने का कोई ठोस कारण बता पाने कि स्थिति में भी नहीं हैं।
राजस्थान ललित कला अकादमी की सचिव सोविला माथुर ने 'मूमल' को बताया कि इस वर्ष जनवरी में कला मेला प्रस्तावित था, लेकिन गणतंत्र दिवस के लिए झांकी के कार्य की व्यवस्तता के चलते संभव नहीं हो पाया। फरवरी- मार्च में जेकेके में स्थान उपलब्ध नहीं हो पाया। बाहर किसी निजी स्वामित्व वाले स्थान पर आयोजन करने लायक फंड नहीं था। मार्च के बाद मई में जेकेके में स्थान उपलब्ध हुआ, लेकिन वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाने के कारण राशि खर्च करने की अनुमति नहीं दी जिससे 2015-16 में होने वाले कला मेले की राशि लगभग 12 लाख रुपए लेप्स हो गई। इस वर्ष 2016-17 का कलामेला सितम्बर-अक्टूबर में करने की योजना है।
 
ये रही पूरी दास्तान 
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों से फरवरी-मार्च में आयोजित होने वाले कला मेले के 19वें एडीशन को अकादमी द्वारा नवंबर में करने का प्रस्ताव पारीत किया गया था तो पूरे कला जगत में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी। इस प्रस्ताव के बाद कोई ना कोई कारण बताते हुए अकादमी इसका आयोजन टालती रही और आयोजन के लिए निर्धारित फरवरी-मार्च भी बीत गया। अकादमी द्वारा मार्च में छात्र कला प्रदर्शनी के आयोजन की मजबूरी बताई गई तो अपे्रल में जवाहर कला केन्द्र में स्थान उपलब्ध ना हो पाने का कारण। प्रदेश में प्रतिवर्ष मई में होने वाली गर्मी की तपन सेे अनजान अकादमी के अधिकारियों द्वारा जवाहर कला केन्द्र से स्थान उपलब्ध करवाने के लिए पत्र-व्यवहार की खानापूर्ति जारी रही। जवाहर कला केन्द्र की ओर से मई में अकादमी की पसंद व सुविधा का कोई भी समय उपलब्ध करवाने की स्वीकृति दी गई। अब मई की गर्मी को कारण बताते हुए कलामेला नहीं कर पाने को कारण बताया गया। 
युवा कलाकारों के साथ कला प्रेमियों को पूरे राजस्थान कीे कला के बहुत बड़े प्रदर्शन से वंचित होना पड़ा। कला मेले का हिस्सा बनने के लिए प्रदेश भर के कलाकार कई महीनों पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। कला खरीददार भी उचित मूल्य पर युवा कूचिंयों की नवीनता को क्रय करने के लिए बेसब्री से कला मेले की प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन अकादमी द्वारा बीते वर्ष 2015 के नवंबर माह में प्रस्तावित कला मेला आगामी महीनों के लिए टलते-टलते आखिरकार अधिकारियों की कोताही का शिकार हो गया।
एक ओर कला आयोजनों के लिए हमेशा पर्याप्त कोष नहीं होने के शोक पर कृत्रिम विलाप, दूसरी ओर कला मेले के कोष को लेप्स करा के सरकार को वापिस लौटाने की कार्रवाई। यह अकादमी कला और कलाकारों के प्रति प्रतिबद्धता का एक और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रदेश का कला जगत कई वर्षों तक कला मेला रद्द किए जाने का दंश झेल चुका है। वर्ष 2004 में आयोजित बारहवें कला मेले के बाद पूरे 6 वर्षों तक अकादमी ने कला मेले का आयोजन नहीं किया था। वर्ष 2010 में 13वें कला मेले के आयोजन के साथ फिर इसकी शुरुआत हुई और पांच साल लगातार आयोजित होने के बाद अब इस बार कला मेले नहीं हो सका। कला मेले को रद्द कर प्रदेश के कलाकारों को निराश करने का कारण अकादमी के पास पहले भी नहीं था और अब भी नहीं है।
अब नए उत्साह के साथ नए-नए कोर्स
गर्मी की को एक कारण बताते हुर्सए वार्षिक कला मेले आयोजित नहीं कर पाई राजस्थान ललित कला अकादमी अब नए उत्साह के साथ इसी गर्मी में अन्य आयोजन करने में जुटी है। मई में ही कला विशेष की जानकारी देने के लिए स्पेशल कोर्स आरम्भ किए जा रहे है। अब यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि मई की गर्मी के बदलते हुए नए अर्थ कम से कम अपनों के हित में तो ठंडी बयार बहा सकेंगे।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

IAS उमरावमल सालोदिया का धर्म परिवर्तन

जाते हुए साल के आखिरी दिन में अचानक 
उमरावमल सालोदिया खबर बन गए।

दलित IAS ने कबूला इस्लाम, कहा- हिंदू होने के कारण हुआ भेदभाव

मूमल नेटवर्क, जयपुर।   
...और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उमराव सालोदिया एकाएक उमराव खान हो गए। उन्होंनेे धर्म परिवर्तन कर लिया। इसके साथ ही स्वैच्छिक सेवा निवृति के लिए सरकार को पत्र सौंप दिया। क्या था यह सब कुछ सरकार के प्रति नाराजगी की हद, एक कलाकार के दुख की अति या फिर एक आम आदमी का अवसाद।
चीफ सैकेट्री पद के प्रबल दावेदार, लेकिन सरकार की गुड बुक में नहीं होने के कारण वो इस पद की पहुंच से दूर...रिटायरमेंट से मात्र 6 महीने दूर...अभी क्या फर्क पड़ता है, रिटायर तो इसी स्केल से होना है फिर जाते-जाते धमाका क्यों नहीं? 
एक प्रशासनिक अधिकारी सरकार के समक्ष भले ही बेबस हो पर एक आम आदमी को मुखर होने से रोकना किसी के वश की बात नहीं... यह कैसा धमाका कि आज तक आमजन को सालोदिया जी की जाति का पता नही था, आज हर जुबान पर जाति चर्चा बन गई। कलाकार के रूप में या एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में आमजन से उन्हें पर्याप्त सम्मान मिला। हां साथी अधिकारियों ने कुछ दूरियां बनाई हो यह अलग बात है। परिणामस्वरूप बरसों से दबे आक्रोश ने धर्म परिवर्तन करवा दिया। क्या अपने अवसाद के चलते कई जगहों सेे बढ़ते हुए दोस्ती के हाथों को नकार अपने आप में सिमटना सालोदिया जी का खुद का निर्णय नहीं था? फिर दोषी कौन?
बात यदि पद स्थापन की करें तो कला संस्कृति विभाग हर उस अधिकारी को सरकार द्वारा दिए गए बेहतर सबक बन जाता है जो सरकार की नजर की किरकिरी बनता है। कलाकार वर्ग जिसे अपने हितों को साधने से ही फुर्सत नहीं, वो भला किसी के आने से खुश और किसी के जाने से दुख क्योंकर मनाए। लेकिन, पद कला-संस्कृति विभाग का हो और अधिकारी कलाकार हो तो यह पद उसका बड़ा पनाहगार बन जाता है। स्थिति तब बिगड़ती है जब सरकारी रवैया उससे उनकी यह पनाह भी छीन लेता है। और यही हुआ उमरावमल सालोदिया अब खान के साथ। हालांकि भारतीय संविधान के अनुसार धर्म परिवर्तन उनकी व्यक्तिगत सोच और अधिकार है। भारत में सभी धर्मों, समुदायों का सम्मान होता है, लेकिन धर्म परिवर्तन...क्या पलायन की निशानी नहीं? क्या अपने नए धर्म के साथ वो सहज जीवन जी पाऐंगे  ...क्या वो स्वयं को समझा पाऐंगे जब गुब्बार गुजर चुका होगा और स्थितियां सामान्य हो चुकी होंगी।
यह तो थी भावनात्मक बात और बात करें बौद्धिक स्तर की तो इस पूरे बखेड़े के पीछे कुछ राज छुपे नजर आते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान कुछ आपराधिक काण्डों में फंसे सालोदिया की गिरफ्तारी होते-होते बची है यह सबको विदित है। सरकार से जंग जीती नहीं जा सकती, रैगर समाज से इस मामले में पर्याप्त साथ मिलना नहीं, लेकिन मुस्लिम समाज इस नए सदस्य का साथ दे सकता है अगर इस समाज के कुछ दबंग इन्हें दोयम दर्जे की हैसियत से ना देखें। 
जानकार तो यह भी कहते हैं कि क्या उमराव जी को किसी राजनैतिक पार्टी की तरफ से राजनैतिक पद का प्रलोभन तो नहीं मिल गया है? तो जाति को प्रमाणित करने की और स्वयं को निरीह सिद्ध कर आम की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए प्रेस कान्फे्रंस ही कर डाली।  इससे ज्यादा प्रभावी तरीका कोई हो ही नहीं सकता। इन सब से उपजी सहानुभूति समय रहते काम आ सकती है। धर्म का क्या है आज अवसाद के चलते खान बन गए कल ह्रदय परिवर्तन हो जाएगा तो फिर सालोदिया हो जाएंगे। क्या बिगड़ेगा? कुछ भी तो नहीं भारतीय समाज को जिसमें सभी वर्ग जाति व समुदाय शामिल हैं भूलने की अच्छी आदत जो है। खैर समय बताएगा कि साल की इस अन्तिम खबर की वास्तविकता क्या है?

 राजस्थान के सीनियर आईएएस उमराव सालोदिया ने इस्लाम कबूल करते हुए नाम बदलकर उमराव खान रख लिया है। सालोदिया ने सर्विस पूरी होने से 6 महीने पहले ही रिटायरमेंट भी ले लिया है। उन्होंने सीएम वसुंधरा राजे को लेटर लिखा है। इसमें चीफ सेक्रेटरी नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है।
सालोदिया ने क्यों बदला मजहब? क्या बताई इसकी वजह...
- गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सालोदिया ने कहा, "मेरे साथ हिंदू धर्म में भेदभाव हुआ है। मुझे चीफ सेक्रेटरी नहीं बनाया 
गया।"
- "दलित होने की वजह से मेरे साथ अत्याचार किए गए। इस्लाम में ऐसा नहीं होता है।"
सालोदिया ने धर्म बदलने को लेकर चिट्ठी में क्या लिखा है...
- "भारत के संविधान में आर्टिकल 25 (1) में नागरिकों को यह आजादी दी गई है कि वे किसी भी धर्म में अपनी आस्था 
जाहिर कर सकते है।"
- "मैं इसी हक के तहत आज 31 दिसंबर, 2015 को हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना रहा हूं।"
सीएम वसुंधरा राजे को लिखी चिट्ठी में सालोदिया ने क्या कहा?
- "मैं एससी/एसटी कोटा से आईएएस हूं, जिसे सीनियरिटी की बुनियाद पर चीफ सेक्रेटरी बनाया जाना चाहिए था।"
- "लेकिन मौजूदा चीफ सेक्रेटरी सी.एस. राजन को 31 मार्च, 2016 तक 3 महीने का एक्सटेंशन दिया गया है।"
- "राजन को दिए गए एक्सटेंशन के कारण मुझे सीएस बनने का मौका नहीं मिला।"
- "अगर एक्सटेंशन नहीं दिया जाता तो सीनियरिटी के हिसाब से मुझे ही सीएस बनाया जाता।"
- "यह सब राज्य सरकार के कहने पर हुआ है। इन सब बातों के चलते मैं वीआरएस के लिए सरकार से गुजारिश करता हूं।"
आरोपों पर सरकार का क्या है रिएक्शन?
- राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा, "चीफ सेक्रेटरी राजन को तीन महीने का एक्सटेंशन रूल्स के तहत 
दिया गया है।"
- "राजन सीनियर आईएएस हैं। कई पोस्ट पर रहते हुए उन्होंने अपनी काबिलियत दिखाई है।"
- "सालोदिया की सर्विस केवल 6 महीने बाकी थी। अगर वे 31 मार्च तक इंतजार करते तो शायद उनके लिए रास्ते खुले होते।"
- "इतने सीनियर होते हुए भी सालोदिया ने इस तरह के आरोप लगाए हैं, यह बेहद शर्मनाक है।"
- "धर्म बदलना उनका निजी मामला हो सकता है, लेकिन मैं ऐसे आरोपों की निंदा करता हूं।"
'सालोदिया को यह शोभा नहीं देता'
- कटारिया के मुताबिक, सालोदिया जैसे पढ़े-लिखे आदमी को यह शोभा नहीं देता है। ड‌्यूटी में 6 महीने ही बचे हैं, ऐसे में यह फैसला ठीक नहीं है।
सालोदिया पर चल रहा है करप्शन का केस
- सूत्रों के मुताबिक उमराव सालोदिया 2013 में रेवेन्यू बोर्ड के चेयरमैन बने। उस दौरान ही उनके खिलाफ एसीबी में आईएएस (अब रिटायर) नानगराम शर्मा ने मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि उमराव सालोदिया ने बटुउद्दीन नाम के शख्स को जमीन के एक मामले में फेवर किया था।
।"
- बताया जा रहा है कि इस मामले के और आगे बढ़ने के दौरान सालोदिया ने खुद को इससे बचाने का मन बना लिया। सालोदिया ने जयपुर के गांधी नगर थाने में नानगराम के खिलाफ 24 मई, 2014 को एफआईआर दर्ज करा दी।
- इसमें आरोप लगाया कि नानगराम चूंकि उस समय के चीफ सेक्रेटरी सलाउद्दीन अहमद का खास है, इसलिए वह उन्हें परेशान कर रहा है।




- एफआईआर के मुताबिक सलाउद्दीन अहमद पर आरोप है कि उन्होंने पोस्ट का गलत इस्तेमाल करते हुए नानगराम को 




सुपरटाइम स्केल की लिस्ट में शामिल करा दिया। इसका उमराव ने विरोध भी किया था, लेकिन कथित तौर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई।
- आरोप लगाया कि नानगराम इसके बाद से ही लगातार उमराव को दलित होने को लेकर प्रताड़ित करता रहा।

रिटायर होने से 6 महीने पहले ही ऐसा क्यों किया ?
- सालोदिया के नजदीक रहे अफसरों के मुताबिक सालोदिया को डर था कि कहीं रिटायर होने से पहले छह महीनों में ही एसीबी वाला मामला आगे बढ़ गया तो उनका रिटायरमेंट फंस सकता है।

- नजदीकियों के मुताबिक सालोदिया ने सोचा कि कोई बड़ा मामला बने, इससे पहले ही कोई ऐसा मुद्दा बना दिया जाए, ताकि मामला हाई प्रोफाइल ड्रामा बन जाए और सरकार दबाव में आ जाए।
- सालोदिया मान कर चल रहे थे कि यदि वे मीडिया में हाइलाइट कर दें तो सरकार उनके रिटायरमेंट पर किसी तरह का रोड़ा नहीं अटका सकेगी। अगर कोई बात हुई भी तो वे मीडिया में जाकर कह सकेंगे कि उन्होंने आरोप लगाए तो सरकार ऐसा कर रही है।
मुस्लिम धर्म ही क्यों अपनाया?
- नजदीकी अफसरों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में सरकार भाजपा की है। केंद्र में भी और राज्य में भी।
- ऐसे में यदि मुस्लिम पर कोई दिक्कत आएगी तो कहा जा सकेगा कि हिंदूवादी सरकार है, इसलिए मुस्लिम के खिलाफ जबरन मामला बना रही है। 
क्यों नहीं बनाया सीएस?
- सूत्रों के मुताबिक, सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। सालोदिया के खिलाफ एसीबी में केस चल रहा है।
- अगर उन्हें सीएस बनाया जाता तो यह बात उछल सकती थी कि जिसके खिलाफ मामला चल रहा हो, उसे सीएस बना दिया।
- सरकार आरोपों के घेरे में आ सकती थी। इसके साथ ही अगर एसीबी सालोदिया के सीएस रहते मामले को खोल देती और आरोप साबित होने के साथ उन्हें गिरफ्तार कर लेती तो इसमें सरकार की जबरदस्त किरकिरी हो सकती थी।
आलोक खण्डेलवाल (भास्कर ) से साभार 
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कौन हैं उमराव सालोदिया?
- 1978 बैच के आईएएस सालोदिया जयपुर के ही रहने वाले हैं।
- वे राजस्थान रोडवेज के चेयरमैन हैं। 






- इससे पहले वे जवाहर कला केंद्र के डायरेक्टर के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट में भी एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रहे हैं।