मंगलवार, 13 नवंबर 2018

इण्डिया आर्ट फेस्टिवल 22 नवम्बर से दिल्ली में

इण्डिया आर्ट फेस्टिवल 22 नवम्बर से दिल्ली में
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। इण्डिया आर्ट फेस्टिवल का चार दिवसीय दिल्ली एडीशन 22 से 25 नवम्बर तक त्यागराज स्टेडियम में आयोजित होगा।
फेस्टिवल में दिल्ली, मुबई, गुडग़ांव, नोएडा, फरीदाबाद, त्रिपुरा, बैंगलुरु व राजस्थान की 30 आर्ट गैलेरीज हिस्सा ले रही हैं। इनमें उदयपुर की पिछवाई बाय बियाण्ड स्क्वायी आर्ट गैलेरी शामिल है। इस फेस्टिवल में लगभग 450 कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि फेस्टिवल का मुंबई एडीशन 17 से 20 जनवरी 2019 तक नेरू सेन्टर मुबई में आयोजित होगा।

आर्ट एशिया 2018 में भाग लेगा जयपुर आर्ट समिट

आर्ट एशिया 2018 में भाग लेगा जयपुर आर्ट समिट
मूमल डेस्कवर्क, सियोल/जयपुर। कोरिया इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेन्टर में 22 से 25 नवम्बर तक आयोजित होने वाले आर्ट एशिया 2018 में जयपुर आर्ट समिट भाग ले रहा है। भारत के बाहर जयपुर आर्ट समिट का यह पहला प्रदर्शन होगा।
पिछले दिनों दिल्ली में क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट की थीम के साथ समिट ने राजस्थान के बाहर आयोजन किया था। इसी थीम को आधार में रखकर समिट दक्षिण कोरिया में आयोजित होने वाले आर्ट एशिया 2018 में 50 कलाकारों की कृतियों से सजी कला प्रदर्शनी, कैम्प, वर्कशॉप व कला चर्चा के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा। आर्ट एशिया 2018 के 'फेयर इन फेयर' कार्यक्रम के तहत भारत से जयपुर आर्ट समिट को चुना गया है।
समिट द्वारा कला प्रदर्शनी के तहत 36 भारतीय और 14 विदेशी कलाकारों की कला का प्रदर्शन किया जाएगा। क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट पर डायलॉग एवं परिचर्चा में कोरियाई कलाकारों के साथ शैलेन्द्र भट्ट एवं स्वरूप विस्वास अपने विचार रखेंगे। आर्टिस्ट कैम्प में 8 भारतीय कलाकारों द्वारा लाइव आर्ट की प्रस्तुति दी जाएगी।
कला वर्कशॉप के तहत कार्टूनिस्ट धीरज वर्मा कोरियन कार्टून कैरेक्टर को प्रदर्शित करेंगे, चारकोल कॉम्पेंडियम में लाइनों एवं बिंदुओं के तिलिस्म को आर्टिस्ट स्वरूप विस्वास बतायेंगे औऱ रंग थेरेपी के तहत आर्टिस्ट डॉक्टर भारती शर्मा जीवन को रंगों के साथ रंगमय करने के अवसरों पर प्रकाश डालेंगी। इस अवसर पर 'आर्टिस्ट्स ऑफ इंडिया - मॉडर्न एंड समकालीन कलाÓ पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।

सोमवार, 12 नवंबर 2018

ओपन हैण्ड आर्ट स्टूडियो स्कॉलरशिप के लिए आवेदन आमन्त्रित

ओपन हैण्ड आर्ट स्टूडियो स्कॉलरशिप के लिए आवेदन आमन्त्रित
देश-विदेश के युवा कलाकारों के लिए योजना
मूमल नेटवर्क, चण्डीगढ़। चण्डीगढ़ ललित कला अकादमी द्वारा ट्राई सिटी के युवा कलाकारों के साथ भारत व विदेश के युवा कलाकारों को ओपन हैण्ड आर्ट स्टूडियो स्कॉलरशिप के लिए आमन्त्रित किया गया है।
इस योजना के तहत चुने गए कलाकारों को 15, 30 व 60 दिन के लिए स्टूडियो आवंटित किया जाएगा। आवेदन के लिए तीन स्लॉट रखे गए हैं। पहले स्लॉट की अवधि 1 दिसम्बर 2018 से 31 जनवरी 2019 रखी गई है जिसके लिए आवेदन की अन्तिम तिथि 15 नवम्बर 2018 है। दूसरे स्लॉट की अवधि 1 फरवरी से 30 मार्च 2019 है। इसके लिए आवेदन की अन्तिम तिथि 15 जनवरी 2019 है।  तीसरे स्लॉट की अवधि 1 मार्च से 30 मई 2019 तय की गई है जिसके लिए आवेदन 15 फरवरी 2019 तक स्वीकार किए जाएंगे।
इस योजना में 20 वर्ष से 35 वर्ष आयु तक के फ्रीलांस, वर्किंग व छात्र कलाकार आवेदन कर सकते हैं। अािदमी ने उपलब्ध सीटों में से 70 प्रतिशत ट्राई सिटी के कलाकारों के लिए आरक्षित रखी है जबकि शेष 30 प्रतिशत शेष भारत व विदेशी कलाकारों के लिए उपलब्ध रहेंगी। आवेदन का प्रारूप अकादमी की वेबसाईट  www.lalitkalachandigarh.com/ पर उपलब्ध है।

शनिवार, 10 नवंबर 2018

आर्ट एशिया 2018, 22 से 25 नवम्बर तक

आर्ट एशिया 2018, 22 से 25 नवम्बर तक
एशियन कलाकारों के लिए कोरिया का अनूठा प्रयास
आयोजन में जयपुर आर्ट समिट भी भाग लेगा
मूमल डेस्कवर्क, सियोल (दक्षिण कोरिया)। नवम्बर की 22 से 25 तारीख तक कोरिया इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेन्टर में आर्ट एशिया 2018 का आयोजन किया जाएगा। एमबीसी, एशिया आर्ट नेट कमेटी द्वारा आयोजित इस आयोजन का उद्देश्य एशिया का प्रतिनिधित्व करने वाले कला मेलों को इक_ा कर एक मंच पर लाना और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उभरते युवा कलाकारों और दीर्घाओं के कला प्रदर्शन के साथ उन्हें कला बाजार उपलब्ध करवाना है। इस आयोजन में जयपुर आर्ट समिट भी भाग ले रहा है।
प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ कला को अपना केरियर बनाने का स्वपन देखने वाले कला विद्यार्थियों के लिए भी इस आयोजन में खास इंतजाम किए गए हैं। आर्ट एशिया 2018 में विजुअल आर्ट के प्रदर्शन के साथ संगीत प्रदर्शन को भी समान रूप से अवसर प्रदान किया जाएगा।
संस्कृति, खेल और पर्यटन मंत्रालय / कला परिषद कोरिया (एआरकेओ) / कोरिया कला प्रबंधन सेवा आयोजन समिति के सहयोग से पहली बार आयोजित होने वाले इस कला मेले में कोरिया व भारत के साथ चीन, जापान, ताइवान, रशिया, थाइलैण्ड व कनाडा भी भाग ले रहे हैं।
यह होगा खास...
सभी कला मेले एक मंच पर 
अपने देश का प्रतिनिधित्व करने वाले महत्वपूर्ण कला मेलों को स्वतन्त्र रूप से इस आयोजन की भागीदारी दी गई है। इसमें भारत से शामिल होने वाले कला आयोजनों में जयपुर आर्ट समिट भी अपने चुनिंदा कलाकारों के साथ भाग लेगा। उल्लेखनीय है कि, भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर में समिट की शुरुआत 2013 में हुई।
भारत से जयपुर आर्ट समिट के साथ कोरिया प्रिंट फोटोग्राफी प्रमोशन एसोसिएशन का आर्ट एडीशन, स्पून आर्ट शो व प्लस कंटेम्पररी आर्ट शो, कनाडा का आर्ट वेंकूवर तथा ताइवान की फोरमोसा आर्ट फेयर कं. लिमिटेड इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं।
आर्ट यूनिवर्सिटीज
इसके तहत विभिन्न एशियाई देशों की कला यूनिवर्सिटीज अपने विद्यार्थियों के साथ आर्ट एशिया 2018 में शामिल होंगे। इस प्रोग्राम में विद्यार्थी जहां एक और आपस में कला अभिव्यक्ति का आदान-प्रदान करेंगे वहीं उन्हें वर्तमान में चल रहे कला के नए ट्रेंड के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।  इस प्रोग्राम के तहत विद्यार्थियों की कला का प्रदर्शन किया जाएगा तथा बेहतरनी कला को आर्ट मार्केट में प्रवेश का अवसर भी मिलेगा। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाली यूनिवर्सिटीज यह हैं-
सेंट्रल एकेडमी ऑफ  फाइन आट्र्स, चीन
विश्वविद्यालय चंग-एंग विश्वविद्यालय, कोरिया
ईवा वुमन विश्वविद्यालय, कोरिया
हांगिक विश्वविद्यालय, कोरिया
कुकमिन विश्वविद्यालय, कोरिया
महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय बड़ौदा, वडोदरा, भारत
मुसाशिनो कला विश्वविद्यालय, जापान
नानजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट, चीन
सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी, रूस
सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी, कोरिया
सिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय, थाईलैंड
ताइपे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ  आट्र्स, ताइवान
स्पेशल एग्जीबिशन
इस कार्यक्रम को दो हिस्सों में बांटा गया है।
1. दी एक्सपेंयान ऑफ  बाउण्ड्रीज- 
परम्पराओं से परे अपने व्यक्तिगत अनुभवों को ब्रश या कैमरा के जरिए अलग अन्दाज में बयां करने वाले कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसमें भाग लेने वाले कलाकार हैं, जिन मेयरसोन, बे चान्हयो, ऑस्कर आइवा, वॉन देहुन तथा कोह सांगवो।
2. ब्लू इण्डिया-
पिछले दशक से भारत के आर्थिक विकास के साथ कला बाजार के विकास में भी तेजी आई है। भारत को युवा देश का दर्जा भी हासिल हुआ है। दुनिया की चार प्राचीन सभ्यताओं में से एक भारत के योगदान को आदर देते हुए इंसाग सोग द्वारा इस प्रदर्शनी को क्यूरेटेड किया जाएगा।
यह प्रदर्शनी युवा भारतीय कलाकारों के कार्यों के माध्यम से भारत की नवीनतम समकालीन कला का एक वर्ग प्रदर्शित करेगी। भारतीय कला में नवीनतम प्रवृत्ति के साथ भारतीय वास्तविकता और इसमें अंतर्निहित सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती हुई कृतियों को स्थान दिया गया है। वर्तमान में भारतीय कला बाजार में स्पॉटलाइट प्राप्त करने वाले युवा कलाकारों की इस प्रदर्शनी के माध्यम से आज और कल की जीवंत भारतीय कला को पूरा करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। इसमें भाग लेने वाले भारतीय कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन विभिन्न कला आयोजनों के माध्यम से पूर्व में भी कोरियवासी देख चुके हैं। इनमें सबसे अनुभवी कलाकार केरल के बिनॉय वर्गीस हैं। बड़ौदरा के शाइक अजगऱ अली मूर्तिकार हैं। उल्लेखनीय है कि, ब्लू इण्डिया नाम की इस स्पेशल प्रदर्शनी में राजस्थान के किसी भी कलाकार का नाम शामिल नहीं है।  इस प्रदर्शनी में शामिल होने वाले कलाकार हैं:
राज मोरे (मुंबई)
शाइक अजगऱ अली (बड़ौदरा)
सुनंदा खजुरिया (जम्मू)
आशुतोष भारद्वाज (बड़ौदरा)
बिनॉय वर्गीस (केरल)

शनिवार, 3 नवंबर 2018

छपरा में लगी भोजपुरी चित्रकला की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

छपरा में लगी भोजपुरी चित्रकला की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 
मूमल नेटवर्क, छपरा। भोजपुरी लोक कला को संरक्षण देने के उद्देश्य से शहर के आरएन इवनिंग कॉलेज में कल 2 नवंबर को भोजपुरी चित्रकला के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। भोजपुरी कला यात्रा के अधीन संस्था पंचमेल और आखर के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का उद्घाटन जगदम कॉलेज पूर्व प्राचार्य प्रो. के. के द्विवेदी , जौहर साफिया वादी एवं कॉलेज के प्राचार्य डॉ अरुण कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर प्रो. पृथ्वीराज सिंह में कहा की भोजपुरिया क्षेत्र की ग्रामीण लोक कला आज विलुप्ति की ओर है। कोहबर कला जो नव वर वधु के प्रथम गृह प्रवेश के समय मांगलिक गीतों के साथ दीवारों पर उकेरी जाती थी अब भूलती जा रही है । भोजपुरी भित्ति कला और भित्ति चित्र लेखन आधुनिकता के दौर में बहुत पीछे छूट रहा है। आज संस्कृति के इन रूपों को पहचान कर उजागर करने की जरूरत है। जहां एक ओर ग्रामीण मधुबनी चित्रकला समुचित प्रोत्साहन मिलने के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है वहीं भोजपुरी चित्रकला समाप्ति की ओर बढ़ चली है ।

मुख्य अतिथि प्रो. के के द्विवेदी ने कहा कि लोक कलाएं हमारे समाज की संस्कृति से परिचय कराती हैं । भोजपुरी क्षेत्र की लोक कलाओं का समृद्ध इतिहास रहा है। भारतवर्ष में भित्ति चित्रों की बहुत प्राचीन परंपरा रही है। अजंता और एलोरा की गुफाओं में बने भित्ति चित्र कला के क्षेत्र में आज भी विशेष स्थान रखते हैं। डॉ जौहर साफिया वादी ने कहा की कला मानव मन और संस्कृति की श्रेष्ठ अभिव्यक्ति है। वह सत्यम शिवम सुंदरम की तरह जीवन के हर पवित्रतम और श्रेष्ठतम अभिव्यक्ति में व्याप्त है। हर व्यक्ति को अपने जीवन में कला को अवश्य ही प्रश्न देना चाहिए। बर्मन शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भोजपुरी चित्रकला के विभिन्न रूपों को इंटरनेट पर भी लाने की जरूरत है।
कार्यशाला में स्कूल विद्यार्थियों को भोजपुरी कला चित्रण के विभिन्न रूपों का प्रशिक्षण आरा से आए कलाकार संजीव सिन्हा, कौशलेंद्र मिश्र एवं छपरा के महेंदी शॉ दे रहे हैं। 

कला को लोगों के घर तक पहुंचाने का माध्यम है- फेरी कला

कला को लोगों के घर तक पहुंचाने का माध्यम है- फेरी कला
भारत की कला संस्कृति को बचाये रखने के लिए कला वर्ग से जुड़े लोगों कार विशेष योगदान रहा है। इसी योगदान में एक और कड़ी फेरी कला के रूप में जुड़ गई है। लखनऊ में फेरी कला के प्रदर्शन का पहला प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य खास लोगों तक सिमटी कला को आम लोगों के बीच ले जाना है।
फेरी कला का औपचारिक उद्घाटन कल 2 नवंबर की  शाम ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र में इप्टा के वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश द्वारा किया गया। इस मौके पर स्थापित की गई कागज़ के रोल से बनी प्रतिमा के समक्ष उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और फेरी कला के वाहन का अनावरण किया ।
 इस मौके पर राकेश ने कला को आम लोगों के बीच ले जाये जाने और उसके सपनों-संघर्षों से जुडऩे के इतिहास को याद करते हुए ताज़ा दौर में इसकी जरुरत को सामने रखा। उन्होंने इस अनूठी पहल का स्वागत करते हुए इप्टा की ओर से पूरा समर्थन दिए जाने का ऐलान किया ।
फेरी कला के पहले चरण में वरिष्ठ मूर्तिकार धर्मेंद्र कुमार की 'लोग' शीर्षक की लगभग 200 से ज्यादा कलाकृतियां शामिल की गई हैं। मुर्तिकार धर्मेंद्र कुमार ने इस पहल को उस कुएं जैसा बताया जो आम लोगों के बीच जाए, उनकी प्यास जगाये और उसे बुझाये। उनके अनुसार यह आंखों को तरावट और जी को सुकून देने के लिए है। फेरी कला इस नन्हीं सी लेकिन अनूठी कोशिश का नाम है। उसकी डगर मेला-बाजारों से होते हुए गली-मोहल्लों तक जायेगी।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ चित्रकार अलोक कुशवाहा ने किया ।
क्या है फेरी कला
जैसा कि इसके नाम से साबित होता है, फेरी लगाकर वस्तुओं को गली-गली ले जाकर लोगों को सुलभ करवाने के लिए इसे तैयार किया गया है। फेरी कला कल्पनाओं की उड़ान और उंगलियों के कमाल की घुमंतू प्रदर्शनी है। जिसके माध्यम से कला को लखनऊ के कई स्थानों मेलों बाजारों, गली मोहल्लों तक एक चलित साधन के माध्यम से पहुचाया जाएगा। एक प्रकार से कलादीर्घा वाहन को गंवई अंदाज में लुभावना रूप देकर तैयार किया गया है जिस पर कलाकार की कृतियों को सजाया गया है।
                                                                                             -लखनऊ से भूपेन्द्र कुमार आस्थाना

मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

दीपक सांकित नवाजे जाएंगे राजा भगवंत दास अवार्ड से


दीपक सांकित नवाजे जाएंगे राजा भगवंत दास अवार्ड से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। युवा शिल्पकार दीपक सांकित कल शाम राजा भगवंत दास अवार्ड से नवाजे जाएंगे। दीपक को यह सम्मान मीनाकारी में चांदी पर कंटेम्पररी प्रयोग की उत्कृष्ट शिल्पकारी के लिए दिया जा रहा है। 
महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस सम्मान के लिए दीपक द्वारा बनाए गए कफलिंग्स व बटन की कंटेम्पररी शैली  की मीनाकारी को चुना गया। जिस पर दीपक ने मुगल शैली के मोटिफ को प्रस्तुत किया है। कल 31 अक्टूबर की शाम सिटी पैलेस में होने वाले भव्य समारोह में दीपक को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। सम्मान स्वरूप उन्हें 31,000 रूपये नकद, शॉल, सिटी पैलेस के सर्वतोभद्र चौक में रखी रजत कलश की प्रतिकृति, प्रशस्ति पत्र और श्रीफल दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि, यह समारोह ब्रिगेडियर स्वर्गीय एच.एच. महाराजा सवाई भवानी सिंह स्मरण में आयोजित किया जा रहा है जिसमें दीपक सांकित सहित 24 पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों में दिये जायेंगे।

एक लम्बे अर्से से दीपक सांकित मीनाकारी में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य मीनाकारी जैसी महंगी व अभिजात्य वर्ग तक सीमित रहने वाली कारीगरी को आम लोगों तक की पहुंच व पसन्द तक लाना रहा है। अभी हाल ही में मीनाकारी से बनाए गए फोटोफ्रेम पर उन्हें वल्र्ड क्राफट काउंसिल के एक्सीलेंसी अवार्ड के लिए भी चुना गया है। दीपक की कला का जलवा कुछ दिन पहले ही जयपुर में आयोजित राजस्थान हैरीटेज फैशन वीक तथा राजस्थान फैशन वीकएण्ड के मंच से देश-विदेश के कला पारखी देख चुके हैं।
दीपक को मीनाकारी की विरासत अपने पिता राजकुमार सांकित व दादा दीनदयाल मीनाकार से मिली है। दीपक के दादा व पिता को बेहतरीन मीनाकारी के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सममानित किया जा चुका है। इसी कड़ी में दीपक सांकित को भी भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने नेशनल सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है।