शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

प्रकृति करती है आर्किटेक्चर को प्रभावित- प्रो. राठौड़



प्रकृति करती है आर्किटेक्चर को प्रभावित- प्रो. राठौड़
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में चल रहे पांच दिवसीय जयपुर कला महोत्सव के तीसरे दिन हुई कला चर्चा में प्रो. एन.एस. राठौड़ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रकृति ही आर्किटेक्चर को प्रभावित करती है। रिफलेक्शन ऑफ नेचर ड्राइंग इन आर्ट एण्ड डिजाइन विषय पर हुई चर्चा में प्रो. राठौड़ के साथ पम्पा पंवार और प्रो. शिखा सिंह ने भी अपना-अपना मत रखा। आज की कला चर्चा में कुमारस्वामी के प्रसिद्ध कथन नेशन्स आर क्रिएटेड बाय पोएट्स एण्ड आर्टिस्ट्स, नॉट बाय मर्चेन्ट्स एण्ड पोलिटीशियन्स पर चर्चा का दौर चलेगा।

समारोह में आर्ट टयून कोलकता के सौजन्य से अनिन्दा अधिकारी के संयोजन में चल रही दो दिवसीय फोटोग्राफी वर्कशॉप का समापन होगा। इसके साथ पेंटिंग वर्कशॉप में कला विद्यार्थी अपनी कृतियों को फाइनल टच दे रहे हैं। कल शाम जयपुर कला महोत्सव का समापन होगा।

रूपंकर एवं ललित कला पुरस्कारों के लिये कृतियां आमन्त्रित

रूपंकर एवं ललित कला पुरस्कारों के लिये कृतियां आमन्त्रित
कलाकृति भेजने की अन्तिम तिथि 2 फरवरी
मूमल नेटवर्क, भोपाल। उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी द्वारा प्रदेश के ख्यातिलब्ध कलाकारों के नाम से स्थापित रूपंकर एवं ललित कलाओं के 10 पुरस्कारों के लिये कलाकृति आमंत्रित की गई हैं। प्रत्येक पुरस्कार की राशि रुपये 51 हजार होगी।
संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव ने यह जानकारी मूमल को  देते हुए बताया कि यह पुरस्कार खजुराहो समारोह में दिए जाएंगे। खजुराहो नृत्य समारोह 20 से 26 फरवरी तक खजुराहो में आयोजित होगा जिसमें राज्य रूपंकर कला पुरस्कार प्रदर्शनी-2008 में पुरस्कृत 10 कलाकृतियों के साथ प्रविष्टि में प्राप्त श्रेष्ठ कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
कलाकार अपनी कलाकृति 2 फरवरी तक अकादमी के कार्यालय उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत एवं कला अकादमी में भेज सकते हैं। 

नहीं रहे मलकीत सिंह

नहीं रहे मलकीत सिंह 
मूमल नेटवर्क चण्डीगढ़। मित्रों के प्रिय व मिलनसार चित्रकार मलकीत सिंह का कल शुक्रवार की सुबह देहांत हो गया। वह पिछले एक महीने से अस्वस्थ थे और फोर्टिस में उनका इलाज चल रहा था। वह दिल के मरीज थे और हाल ही में उनकी बाईपास सर्जरी भी हुई थी। लेकिन, दवाइयों के सेवन से उनकी किडनी फेल हो चुकी थी। उनकी मृत्यु की खबर आते ही कला जगत में दुख की लहर छा गई।
मलकीत सिंह ने 1966 में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट से डिप्लोमा किया था। इसके बाद उन्होंने पीयू के फाइन आर्ट डिपार्टमेट से 1976 में एमए की। 1978 और 1984 में इन्हें इनकी पेंटिंग के लिए पंजाब ललित कला अकादमी सम्मान मिला। 2006 से मलकीत सिंह पंजाब ललित कला अकादमी के वाइस प्रेसिडेट रहे। इन्होंने पीजीआइ-12 में एक आर्टिस्ट के तौर पर नौकरी की, जहां से वह 2003 में रिटायर हुए थे।

जयपुर कला महोत्सव की पेंटिंग कॉम्पीटीशन में विशेष बच्चे बने प्रतिभागी

जयपुर कला महोत्सव की पेंटिंग कॉम्पीटीशन में 
विशेष बच्चे बने प्रतिभागी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में चल रहे जयपुर कला महोत्सव में आयोजित पेंटिंग कॉम्पीटीशन में जहां हर उम्र के कलाकार ने भाग लिया वहीं विशेष बच्चों ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई।
शहर में एक के बाद एक चल रहे कला आयोजनों के चलते महोत्सव दर्शकों की भीड़ नहीं जुटा पा रहा है लेकिन प्रदेश के कलाकारों को देश भर के कलाकारों से मिलने का अवसर जरूर मिल रहा है।
आर्ट टयून कोलकता के सौजन्य से अनिन्दा अधिकारी के संयोजन में आज फोटोग्राफी वर्कशॉप का आयोजन हुआ। कला चर्चा के सेशन में कल जहां कला शिक्षा पर चर्चा की गई वहीं आज शाम साढे चार बजे रिफलेक्शन ऑफ नेचर ड्राइंग इन आर्ट एण्ड डिजाइन विषय पर बातचीत की जाएगी।
शाम की सुर संध्या में सुरों की स्वर लहरियां इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट एण्ड उिजाईन के सहयोग से बिखरेंगी।
पांच दिवसीय कला मेले का समापन परसों 21 जनवरी को होगा।




10 फरवरी तक चलेगी 59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी

10 फरवरी तक चलेगी 59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी
संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी आयोजित 59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का उद्घाटन संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कल अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी, सचिव विशालाक्षी निगम की मोजूदगी में किया। इस अवसर पर एनजीएमए के महानिदेशक अद्वैत गणनायक, विजय कुमारए, कैथरीन कुमार, प्रवेश खन्ना,  मुकुल पंवार, गोगी सरोजपाल, आनंदमॉय बनर्जी जैसे गणमान्य व्यक्तियों और पुरस्कृत कलाकारों के साथ भारी संख्या में कलाकार, कला आलोचक, कला संग्राहक व कलाप्रेमी उपस्थित थे।

डॉ. महेश शर्मा ने 59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के कैटलॉग का भी विमोचन किया।
इस अवसर पर डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि, इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी के माध्यम से इतनी अधिक संख्या में कलाकार अकादमी से जुड़ते है। प्रदर्शनी में इतनी अधिक संख्या में प्राप्त प्रविष्टियों में से श्रेष्ठ का चयन करना ज्यूूरी के लिए वाकई कठिन काम था परन्तु उन्होंने कुशलतापूर्वक श्रेष्ठ कृतियों का चयन किया। यह प्रदर्शनी युवा और उभरते कलाकारों को एक मंच प्रदान करती है जहां विभिन्न कला माध्यमों के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं।

डॉ. शर्मा ने कहा कि एक व्यक्ति जो हाथ से कार्य करता है मजदूर है, दिमाग से कार्य करता है तो इंजिनियर है परन्तु दिल से काम करने वाला कलाकार होता है। आईए हम साथ मिलकर इन कलाकारों की कला और सृजनात्मकता को अवसर दे।

डॉ. शर्मा ने अकादमी की सराहना करते हुए कहा कि, अकादमी अपने कार्यक्रमों के माध्यम से कला व संस्कृति को आगे बढ़ाने का सृजनात्मक कार्य कर रही है और इस तरह राष्ट्रनिर्माण में भी योगदान दे रही है। अन्त में उन्होंने अकादमीके सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कलाकारों से इसी प्रकार जुड़े रहने का संदेश दिया।
अपने उद्बोधन में अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, समकालीन कला की पहुंच व्यापक रूप से पूरी दुनिया में है जो निरन्तर विकसित हो रही है। अपने चारों ओर के वातावरण से प्रेरित होकर कलाकार नए माध्यमों पर प्रयोग कर रहे हैं। कलाकृति हर कलाकार की विशिष्ट शैली है जो भारतीय कला पर वर्तमान सांस्कृतिक और भौगोलिक प्रभावों का चित्रण है जिस कारण से आज कला में लोगों की रुचि बढ़ रही है। यह प्रदर्शनी उसी की बानगी है।
10 फरवरी तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में 172 कलाकारों की 172 कृतियों के रूप में चित्रकला, मूर्तिशिल्प, ग्राफिक, फोटोग्राफी, ड्राईंग, इंस्टॉलेशन और कई कला माध्यमों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
उल्लेखनीय है कि, राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कलाकारों को मान्यता प्रदान करने और विलक्षण कलाकृतियों को प्रदर्शित करने हेतु ललित कला अकादमी प्रतिवर्ष राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी आयोजित करती है।

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

कला नीलामी का बाजार ट्रेक पर आ रहा है

कुछ अर्से तक कला बाजार की मंदी ने कला बाजार के तत्वों के साथ कलाकारों को भी मायूसी दे दी थी। बीते वर्ष की कला नीलामी के बिक्री आंकड़ों ने इस मायूसी को हटाकर बाजार में नई जान फूंकी है। वैश्विक कला बाजार के अध्ययन से प्रस्तुत है यह रिर्पोट। (सं.)

कला नीलामी का बाजार ट्रेक पर आ रहा है
विश्व कला बाजार में 2014 और 2016 के बीच की गिरावट के बाद 2017 के नीलामी बिक्री आंकड़ों ने बाजार के फिर से ऊपर उठने के संकेत दिए हैं। लगने लगा है कि 2018 में कला नीलामी का बाजार ट्रेक पर आ जाएगा। इस बाजार में भारत की भी विशेष भूमिका रही है।
आर्ट टैक्टिक से प्राप्त एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, दो साल की गिरावट के बाद वैश्विक कला नीलामी की बिक्री में फिर से उछाल आया है। लंदन स्थित कला बाजार विश्लेषकों द्वारा क्रिस्टी, सोथबी और फिलिप्स से 2017 बिक्री डेटा (ऑनलाइन नीलामियों को छोड़कर) के सर्वेक्षण से स्पष्ट हुआ है कि 2017 में यह बढ़ोतरी 25 प्रतिशत तक हुई है।
निष्कर्षों के अनुसार, कला बाजार में पोस्ट वार व कंटेम्पररी आर्ट के योगदान के साथ इम्प्रेशनिस्ट व मॉडर्न मार्केट की वापसी, एशियाई कला बाजारों के दखल और रिकॉर्ड कायम करने वाले ओल्ड मास्टर्स की कृतियों की बिक्री से यह मजबूती आयी है।
उपरोक्त नीलामी घरों ने पिछले साल 11.21 बिलियन डॉलर की कुल कीमत कृतियों की बिक्री से प्राप्त की। इसमें पोस्ट वार व कंटेम्पररी आर्ट की बिक्री के 29.3 प्रतिशत व प्रभाववादी और आधुनिक कला बाजार के 21.5 प्रतिशत के रूप में योगदान रहा। चीनी और एशियाई नीलामियों ने 1.74 अरब डॉलर की बिक्री के साथ तीसरे बड़े हिस्से पर अपना नाम अंकित किया।
तीनों ही नीलामी घरों में बिक्री की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि क्रिस्टी ने लियोनार्डो दा विंची के सैल्वेटोर मुंडी की 450 मिलियन डॉलर की बिक्री के साथ बाज़ार में अपना प्रभुत्व बना लिया है। इस अकेली बिक्री से क्रिस्टी को 34 प्रतिशत वृद्धि की मदद मिली है। क्रिस्टी द्वारा की गई कुल $बिक्री 5.89 बिलियन डॉलर थी जिसमें विंची की सेल्वाटेर मुंडी की बिक्री से प्राप्त 2.81 बिलियन डॉलर की रकम शामिल है।
सोथबी का बिक्री आंकड़ा 4.69 बिलियन डॉलर का रहा। फिलिप्स ने 624 मिलियन डॉलर की कला बिक्री के साथ कला बाजार की बढ़ोतरी में अपना योगदान दिया।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो न्यूयॉर्क शहर में 48.7 प्रतिशत लेनदेन के साथ प्रथम एवं लंदन ने 24.2 प्रतिशत बिक्री के साथ कला बाजार में दूसरे स्थान पर अपनी पकड़ बनाए रखी। एशिया में हांगकांग ने कला के महत्वपूर्ण बाजार के रूप में अपनी स्थिति को कायम रखा है।     -गाायत्री

बुधवार, 17 जनवरी 2018

कला महोत्सव में दिखे भारत के रंग

कला महोत्सव में दिखे भारत के रंग
जयपुर कला महोत्सव की हुई शुरुआत

मूमल नेटवर्क, जयपुर। कल शाम जयपुर कला महोत्सव के उद्घाटन के साथ ही भारत के कला रंगों की छटा बिखर पड़ी। उद्घाटन विशिष्ट अतिथि मूर्तिकार हिम्मतशाह के साथ कला संयोजक राजेन्द्र सिंह नरुका व उपस्थित मेहमानों ने किया। महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित केबिनेट मंत्री किरण महेश्वरी उपस्थित नहीं हो सकीं।महोत्सव में कला के विभिन्न रंगों के रूप में टैक्सटाइल, फोटोग्राफी, पेपरमेशी, ज्यूलरी, मैटल क्राफ्ट, आर्किटेक्चर, वुड क्राफ्ट व इंस्टालेशन कलाप्रेमियों को लुभाने के लिए तैयार हैं।
लगभग एक सौ स्टॉल्स में जयपुर व प्रदेश के साथ देश भर के आर्टिस्ट्स की कृतियां सजी हुई हैं। महोत्सव के दूसरे दिन आज दिन में एक बजे पेंटिंग वर्कशॉप की शुरुआत की जाएगी। चार बजे कला चर्चा के दौर में रिफलेक्शन ऑफ नेचर ड्राइंग इन आर्ट एण्ड डिजाइन विषय पर बातचीत की जाएगी। आज का समापन शाम सवा छ: बजे पं. भार्गव मिस्त्री के सरोद वादन से होगा।