शनिवार, 23 जून 2018

सम्पन्न हुई योग चित्रकला प्रतियोगिता

सम्पन्न हुई योग चित्रकला प्रतियोगिता
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पोस्टर एवं चित्रकला की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से 12 तक के 85 विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आर्ट फॉर हेल्थ नाम की इस प्रतियोगिता को तीन वर्गों में विभाजित किया गया था। पहले वर्ग में कक्षा 1 से 4 तक के बच्चे, दूसरे वर्ग में कक्षा 5 से 8 तक के बच्चे प्रतिभागी बनें तो तीसरे वर्ग में कक्षा 9 से 12 तक के बच्चें ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
यह रहा परिणाम
कक्षा 1 से 4 वर्ग 
प्रथम स्थान- श्रीजी, लारेटो कान्वेट कालेज
द्वितीय स्थान- काव्या मिश्रा, सेंट एग्नेस लारेटो डे स्कूल
तृतीय स्थान- मो. इब्राहिम, सीएमएस लखनऊ
कक्षा 5 से 8 वर्ग 
प्रथम स्थान- अदित सिंह, रेड रोज सीनियर सेकेण्डरी स्क्ूल
द्वितीय स्थान- अर्जुन वीर सिंह, काल्विन तालुकेदार्स
तृतीय स्थान- भव्या नंदिनी, माउंट कारमल कालेज
कक्षा 9 से 12 
प्रथम स्थान- सुहानी चतुर्वेदी, लखनऊ पब्लिक स्कूल सहारा स्टेट
द्वितीय स्थान- ओजस सिंघल, निर्मला कान्वेट इंटर कालेज
तृतीय स्थान- सफीना खान, करामत हुसैन मुस्लिम गल्र्स इंटर कालेज लखनऊ ।
पोस्टर एवं चित्रकला की प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ कलाकार शिव बालक एवं भीम सेन सिंह ने पुरस्कार निश्चित किये।
सभी प्रतिभागियों प्रमाण पत्र प्रदान किये गए। 

शुक्रवार, 22 जून 2018

शुरु हुई भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन

शुरु हुई भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन 
आज होगी मयंक मानसिंह कौल के साथ क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू
मूमल नेटवर्क, जयपुर। भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन 'न्यू ट्रेडिशंस: इन्फ्लुएंसेस एंड इंस्पीरेशंस इन इंडियन टेक्सटाइल्स, 1947-2017' की कल से जवाहर कला केंद्र में शुरूआत हुई। यह प्रदर्शनी मयंक मानसिंह कौल द्वारा क्यूरेट की गई है और रेहा सोढ़ी द्वारा डिजाइन की गई है। जेकेके द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 31 जुलाई तक चलेगी और सार्वजनिक अवकाशों को छोड़कर प्रात: 11 बजे से सायं 7 बजे तक देखी जा सकेगी।
इस अवसर पर कौल ने कहा कि जब पारम्परिक वस्त्रों की बात आती है, तो अधिकांश लोग मानते है कि वस्त्र उद्योग में अधिक बदलाव नहीं आया है। हालांकि, गत 50 से 60 वर्षों में इस क्षेत्र में अत्यधिक गतिशीलता एवं नवीनता देखने को मिली है, जिसे दर्शाना इस एग्जीबिशन का लक्ष्य है। यहां प्रदर्शित कलाकृतियों को सम्बंधित वस्त्रों के ऐतिहासिक परिदृश्य को वर्तमान समय से जोडऩे का प्रयास किया गया है।
एग्जीबिशन में उन 50 से अधिक कलाकारों एवं डिजाइनरों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनका कार्य सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक परिस्थितियों से अत्यधिक प्रभावित रहा है। प्रत्येक गैलरी में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र एवं समयावधि को प्रतिबिंबित किया गया है। बोतलों के ढक्कनों एवं सिलिकॉन से बनी साडिय़ां; कांजीवरम एवं बनारसी साडिय़ां; खादी डेनिम; जरदोजी का नवीनीकरण; एम्ब्रॉयडरी एवं चिकनकारी और पारम्परिक बांधनी, आदि के साथ यह एग्जीबिशन डिजाइनर की जीवन यात्रा का ऐतिहासिक प्रतिबिंब है।
अत्याधुनिक एवं प्रयोगात्मक फैशन पर फोकस किया जाना इस एग्जीबिशन का एक विशेष आकर्षण है। ब्रांज, सिल्वर एवं गोल्ड जरी जैसे वर्क; क्लॉक डॉयल के रूप में मुकेश वर्क; रिसाइकल्ड मैटेरियल से बने वस्त्र तथा थ्री डी एम्ब्रॉयडरी जैसे विभिन्न वस्त्र दुनियाभर के देशों में पारस्परिक भारतीयकरण के प्रभावों का प्रतिक हैं।
उल्लेखनीय है कि आम लोगों के लिए आज दोपहर बाद 4 बजे मयंक मानसिंह कौल के साथ क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू आयोजित की जाएगी।

'योग फॉर आर्ट'

'योग फॉर आर्ट' 
ललित कला अकादमी ने बताया योग और कला का समभाव
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। योग, एक बहुआयामी विचार,जीवन जीने का एक तरीका, कला, दशर्न, तकनीक, अच्छी सेहत का लाईसेंस, विज्ञान, चेतनता का एक साधन और आयािमक उपलिध का केन्द्र है। हम एक कलाकार की कृति अथवा शिल्प की तुलना योग से करें तो यह स्वयं में एक यौगिक अनुभव है। यह सभी युगों व संस्कृति के कलाकारों को अनवरत जोड़ता रहता है। योग मूर्तिशिल्प, चित्र, साहित्य, नृत्य, संगीत और मार्शल आर्ट में निपूणता प्राप्त करने में मदद करता है।
कुछ इन्हीं भावनाओं और विचारों के साथ ललित कला अकादमी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 'योग फॉर आर्ट' कार्यक्रम का आयोजन किया । योग शिक्षक राजेन्द्र सिंह द्वारा प्रदर्शित योग मुद्राओं से कार्यक्रम का आरम्भ हुआ। इस अवसर पर अध्यत्रा उत्तम पचारणे सहित अकादमी स्टॉफ ने यागेगाभ्यास किया।
'चित्रशिल्पयोग'
इस अवसर पर  'चित्रशिल्पयोग' कला प्रदर्शनी आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रख्यात शिल्पकार पद्मभूषण राम वी. सुतार द्वारा अध्यक्ष उत्तम पाचारणे और उत्तरी दिल्ली के महापौर आदेश गुप्ता की उपस्थिति में किया गया।
'चित्रशिल्पयोग'  प्रदर्शनी में ललित कला अकादमी के स्थायी संग्रह से ली गई कलाकृतियां शामिल हैं, जिनमें के.वी. हरिदासन, एन. राघवन, रंगास्वामी सांरगन, जी.आर.सन्तोष, वी.एस.गायतोंडे, बीरेन डे, स.एल.साहनी, एस.नंदगोपाल, प्रदोष दासगुप्ता, लक्ष्मण पाई, ओम प्रकाश, पी.टी.रेड्डी, मोहम्मद यासीन, सनत कार आदि जाने-माने कलाकारों की कृतियां हैं।
इस अवसर पर राम वी. सुतार ने कहा 'कला भी एक प्रकार का योग है। कलाकार भी अपनी कला के माध्यम से एक तरह का योग करते हैं। मैं ललित कला अकादमी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में कला और योग के इस समायोजन के लिए बधाई देता हूं।'
ललित कली के अध्यक्ष उत्तम पाचारणे ने कहा कि,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के योगऋषियों के प्रयास से योग को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई है, आज पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा कि, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को 'चित्रशिल्पयोग' के माध्यम से मनाया जाना एक विलक्षण विचार है। उन्होंने योग और सृजनात्मकता के मध्य समानता पर भी बात की। ''किसी चित्र अथवा भित्तिचित्र का सृजन स्वयं में यौगिक गतिविधि है, क्योंकि ऐसा करते हुए कलाकार बाहरी जगत को भूलकर अपने सभी भावों, कल्पना और उर्जा को अपने भीतरी जगत में इ कर लेता है।
विशिष्ट अतिथि आदेश गुप्ता ने कहा कि, योग ऋषि परम्परा की प्राचीन धरोहर है और इसे बनाये रखने के लिए ऋषियों-मुनियों ने इसे आगे बढ़ाया है। उसी क्रम में स्वामी रामदेव, श्री श्री रविशंकर जी ने इसे उच्च पटल पर स्थापित किया है। कला योग का एक अभिन्न अंग है। योग सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि आत्मिक व मानसिक सुख के साथ मानसिक बल भी देता है।
और हुआ आर्ट डिमांसट्रेशन
चार प्रसिद्ध कलाकारों विजय राउत (कार्टूनिस्ट एंव एनिमेटर), रविन्द्र साल्वे (पेन्टर), स्वप्निल कदम (शिल्पकार) और सिद्धार्थ शिंगाड़े (पेन्टर) ने आर्ट डिमांसट्रेशन में भाग लिया और अपनी कला का जीवन्त प्रदर्शन किया। 

गुरुवार, 21 जून 2018

जहांगीर के ग्रुप शो का जयपुर में प्रिव्यु नहीं

जहांगीर के ग्रुप शो का जयपुर में प्रिव्यु नहीं

केटलॉग भी मुंबई में ही जारी होगा 

अंतत: 147 को चुना गया



मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा प्रदेश के कलाकारों मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में किए जाने वाले ग्रुप शो का जयपुर में होने वाला प्रिव्यू नहीं होगा। प्रिव्यू के मौके पर जारी होने वाला शो का केटलॉग भी मुख्य शो के समय 26 जून को सीधे जहांगीर में ही जग-जाहिर किया जाएगा।
पूर्व में मिली जानकारी के अनुसार इस शो में 100 चुनिंदा कलाकारों को शामिल किए जाने की बात थी।  जो बाद में 140 कलाकारों तक जा पहुंची। अब अंतिम रूप से शो के लिए 147 कलाकारों की कृतियां चुनी गई हैं। चुने हुई कलाकृतियों का प्रदर्शन जून के तीसरे सप्ताह में जयपुर में अकादमी की कला दीर्घा में किए जाने की बात तय की गई थी। अब हालात को देखते हुए यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। ऐसे में स्थानीय लोगों को चुनिंदा कलाकृतियों को देखने-समझने का अवसर नहीं मिल पाएगा। कलाजगत को अकादमी द्वारा पहली बार जहांगीर आर्ट गैलेरी में आयोजित प्रदर्शनी का प्रिव्यू व केटलॉग देखने का बेसब्री से इंतजार था। 
प्रिव्यू के लिए वक्त नहीं बचा
अकादमी सचिव डा. सुरेन्द्र सोनी ने प्रिव्यू नहीं होने का कारण समय का अभाव होना बताया है। चयनित कलाकृतियों के केटलॉग के बारे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि देरी के कारण उसके प्रकाशन में भी विलंब हुआ है। ऐसे मेें वह भी अभी यहां नहीं देखा जा सकेगा। उसे सीधे मुख्य शो के समय मुंबई में ही जारी किया जाएगा। उल्लेखनीय है यह शो 26 जून की शाम से 2 जुलाई तक चलेगा।
कृतियां प्रदर्शनी वाहन में जाएंगी।
जानकारी के अनुसार चुनी हुई 147 कृतियां अकादमी के प्रदर्शनी वाहन में 23 जून की सुबह मुंबई के लिए रवाना होंगी। जहां तक संभव होगा केटलॉग कलाकृतियों के साथ ही भेजने का प्रयास होगा, लेकिन यह नहीं हो पाया तो उन्हें ट्रेन से 24 या 25 जून को जंहागीर के लिए रवाना किया जा सकेगा। फिलहाल केटलॉग का प्रकाशन प्रगति पर है। शो के लिए अकादमी के अधिकारी व संबंधित संयोजक 25 जून की सुबह मुबई के लिए रवाना होंगे।
26 की शाम को उद्घाटन 
हालांकि 21 जून की रात को समाचार लिखे जाने तक अकादमी की ओर से इस शो के लिए राजस्थान के कला जगत को डाक या ईमेल से कोई निमन्त्रण भेजे जाने की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन, मूमल को प्राप्त जानकारी के अनुसार इस शो का उद्घाटन 26 जून की शाम पांच बजे जहांगीर की एक, दो व तीन नम्बर की आर्ट गैलेरी में किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र के कला, संस्कृति मंत्री विनोद श्रीधर तावड़े को आमन्त्रित किया गया है। जबकि गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में केन्द्रीय ललित कला अकादमी दिल्ली के चैयरमेन उत्तम पचारणे आमंत्रित हैं।

कनाडा के लेथब्रिज विश्वविद्यालय की कला दीर्घा एक कला शिक्षिका के नाम

कनाडा के लेथब्रिज विश्वविद्यालय की कला दीर्घा 
एक कला शिक्षिका के नाम
कला शिक्षिका डॉ. पर्किन्स हेस ने मृत्युपूर्व विश्वविद्यालय को दान किया था कला संग्रह
5 मिलियन डॉलर की 1,140 कलाकृतियां हैंं संग्रह में शामिल
मूमल डेस्कवर्क। लेथब्रिज विश्वविद्यालय ने कला शिक्षक व संग्राहक डॉ.मार्गरेट (मार्मी) पर्किन्स हेस को सम्मानित करते हुए अपनी कला दीर्घा का नाम हेस के नाम पर रख दिया है। इस दीर्घा में पर्किन्स हेस के संग्रह से 112 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
अपना पूरा जीवन कला शिक्षक के रूप में बिताने वाली डॉ. मार्गरेट (मार्मी) पर्किन्स हेस  ने अपनी मृत्यु से पहले अपना पूरा कला संग्रह विश्वविद्यालय को दान कर दिया था। उनके कला संग्रह में 5 मिलियन उॉलर की 1140 कलाकृतियां शामिल हैं। इन कृतियों में कनाडा के प्रसिद्ध कलाकारों की कृतियों के साथ विश्व प्रसिद्ध कलाकारों की कृतियां भी शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष माइक महोन ने कहा कि उनकी मृत्यु से आठ साल पहले मैंने हेस की उदारता को जान लिया था। उन्होंने कहा कि हेस ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक मास्टर-स्तरीय छात्रवृत्ति भी अपने धन से आरम्भ करवाई।
कला दीर्घा के सहायक क्यूरेटर डेविड स्मिथ ने कहा कि कला को जीवन के जुनून के रूप में जीने वाले हेस का यह कार्य वास्तव में प्रेरणाप्रद और अद्भुत है। उन्होंने कहा कि, लेथब्रिज विश्वविद्यालय की गैलरी, जिसका नाम अब उसके सम्मान में रखा गया है में इसी वर्ष सितंबर में उनके दान की गई  1,140 कृतियों में से 112 का प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में हेनरी मैटिस का बनाया एक मूल स्केच, पाब्लो पिकासो का एक प्रिंट और एलेक्स जेनवियर, बिल रीड, टोनी हंट, जेसी ओनार्क और हेलेन कालवक समेत प्रमुख स्वदेशी कलाकारों की कला को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि, आने वाले दिनों में उनके शेष संग्रह को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
 डॉ.मार्गरेट (मार्मी) पर्किन्स हेस का परिचय
पर्किन्स हेस का जनम अल्ब्रटा में 3 मई 1916 में हुआ। वह अविवाहित थीं। हेस ने लिथेब्रिज विद्ववविद्यालय से ललित कला में डाक्टरेट प्राप्त किया था। उन्होंने अल्बर्टा विश्वविद्यालय से मानदंड डॉक्टर ऑफ  लॉज डिग्री भी प्राप्त की। उन्हें 1 9 8 9 में रोटरी इंटरनेशनल की पॉल हैरिस फैलोशिप मिली और वह रॉयल कनाडाई भौगोलिक सोसाइटी का मानद फेलो रहीं। 2000 में, उन्हें वाईडब्ल्यूसीए महिला भेदभाव लाइफटाइम स्वयंसेवी उपलब्धि पुरस्कार मिला और 2004 में कैलगरी शहर से ग्रांट मैकवान लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्राप्त हुआ।वह विख्वविद्यालय सीनेट की सदस्य थीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन कला की शिक्षा व कला व्याख्यान देने और कला को संग्रहित करने में बिताया। रिटायमेंट के बाद पेंशन ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन थी। सन् 2016 में लगभग 100 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हुई।

राज्यस्तरीय सिन्धी आइडल गायन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित


राज्यस्तरीय सिन्धी आइडल गायन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित
मूमल नेटवर्क, उदयपुर।  राजस्थान सिन्धी अकादमी द्वारा पूज्य सिन्धी साहिती पंचायत के सहयोग से आयोजित राज्य स्तरीय सिन्धी आइडल गायन प्रतियोगिता 2018 के परिणाम घोषित कर दिये गए हैं। फाइनल राउण्ड में राज्य भर से चयनित 28 प्रतियोगियों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
अकादमी अध्यक्ष हरीश राजानी ने जानकारी दी कि, पहली बार आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी थी कि हमनें पूर्व घोषित तीन पुरस्कारों के स्थान पर सात पुरस्कार विजेता प्रतिभागियों को प्रदान किये हैं।
यह रहा परिणाम
प्रतियोगिता का 31 हजार रू. का प्रथम पुरस्कार खैरथल अलवर के गौरव चंदानी ने हासिल किया। रुपये 21 हजार की राशि का द्वितीय पुरस्कार भी अलवर के ही दीपक लखवानी को प्राप्त हुआ। तीसरा पुरस्कार 11 हजार की राशि के रूप में अजमेर की मुस्कान कोटवानी को प्रदान किया गया।
अकादमी सचिव ईश्वर लाल मोरवानी ने कहा कि प्रतियोगियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करते हुए चार अन्य पुरस्कार 5000 रुपये व तीन हजार रुपये राशि के प्रदान किये गए हैं। इसमें 5 हजार रुपए की राशि का चतुर्थ पुरस्कार कोटा के कुरसवानी को एवं 3 हजार रुपये का पंचम
पुरस्कार उदयपुर दीप छाबडिय़ा को दिया गया।
 3 -3 हजार रुपये के दो सांत्वना पुरस्कार भीलवाड़ा के मनन पुरसवानी एवं बंूदी के चन्द्र मोहन ने हासिल किया। राज्य की राजधानी जयपुर पुरस्कार प्राप्त करने से वंचित रही।
इस अवसर पर शिकारपुर पूज्य सिन्धी पंचायत उदयपुर द्वारा भी विजेताओं को अपनी तरप्ु से नकद पुरस्कार प्रदान किये गये।
निर्णायक मण्डल
अनिता शिवनानी, मोहन सागर एवं दुर्गेश चांदवानी ।

मंगलवार, 19 जून 2018

जेकेके में टेक्सटाईल एक्जीबिशन 22 जून से


जेकेके में टेक्सटाईल एक्जीबिशन 22 जून से 
प्रदर्शित होगा आजाद भारत के वस्त्रों का इतिहास
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र में 1947 के बाद के भारत में वस्त्रों के इतिहास पर आधारित एक प्रदर्शनी 22 जून से शुरु होने जा रही है। इस टेक्सटाईल एक्जीबिशन के माध्यम से 1947 के बाद भारत के हस्तनिर्मित वस्त्रों में हुये विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। जेकेके द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 'न्यू ट्रेडिशंस: इन्फ्लुएंसेस एंड इंस्पीरेशंस इन इंडियन टेक्सटाइल्स, 1947-2017' 31 जुलाई तक चलेगी।
1947 में भारत की आजादी के बाद की थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी विभिन्न विषयों पर आधारित होगी। इन थीम में राष्ट्रीय आंदोलन; खादी एवं 20वीं शताब्दी के आरम्भ से मध्य में यूरोपीयन-औपनिवेशिक संघर्षो से हुए प्रभावों तथा 1950 से वर्तमान समय की अंतर्राष्ट्रीय आधुनिकता के साथ हुए जुड़ाव शामिल होंगे। इसी प्रकार इसमें 1970 के दशक से ग्राम आधारित शिल्प एवं वस्त्रों में आरम्भ होने वाले बदलाव भी यहां प्रदर्शित किये जाऐंगे, जिसके जरिए टेक्सटाईल को मूर्तिकला के साधनों एवं रूपकों के अतिरिक्त शहरी वस्त्रों की वर्तमान डिजाइन और भारतीय सादगी दर्शायी जाएगी।
कला, डिजाइन, फैशन एवं शिल्प को प्रस्तुत करते हुए इस प्रदर्शनी में कपड़ों पर पेंटिंग्स, टेपिस्ट्रीज, मूर्तियां, कालीन एवं गलीचे, साड़ी, वस्त्र एवं कपड़ों पर रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न स्वरूप प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही यहां सामग्री एवं तकनीक की वे विकास यात्राएं प्रदर्शित की जाएंगी, जिसने रचनात्मक निर्माताओं, मास्टर कारीगरों, शिल्पकारों, कलाकारों, डिजाइनरों के साथ-साथ प्रयोगात्मक, आला दर्जे के डिजाइन स्टूडियोज, लोकप्रिय एवं प्रसिद्ध ब्रांड्स को दिशा प्रदान दी है।
प्रदर्शनी के दौरान 2 जुलाई को एक्जीबिशन में एक विशेष प्रदर्शन भी होगा जिसमें मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद की सदस्य, कला एवं संस्कृति, राजस्थान सरकार, मालवीका सिंह गेस्ट ऑफ ऑनर होंगी। यह प्रदर्शनी मयंक मानसिंह कौल द्वारा क्यूरेट की गई है और रेहा सोढ़ी द्वारा डिजाइन की गई है।
प्रदर्शनी के प्रतिभागी कलाकार व डिजाइनर
अमित अग्रवाल, बशोबी तिवाड़ी, बेरेनाईस इलिना, चारू वाधवा, घिओरा अहारोनी, मनीषा अरोड़ा, रितेन मजूमदार, रितु कुमार, संजय गर्ग एवं तूफान रफाई। इनके अतिरिक्त इसमें 11:11, अब्राहम एंड ठाकुर, अनोखी, बंधेज, खमीर, लेसेज, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, द रजिस्ट्री ऑफ सारीज् और द वीवर्स सर्विस सेंटर्स जैसे स्टूडियोज, ब्रांड्स एवं संगठनों का प्रतिनिधित्व रहेगा।
इस प्रदर्शनी में द देवी आर्ट फाउंडेशन, नई दिल्ली;  लेखा एंड अनुपम पोद्दार, नई दिल्ली; प्रिया पॉल, नई दिल्ली; द म्यूजियम ऑफ आर्ट एंड फोटोग्राफी, बैंगलुरू और डॉ. मोनिशा अहमद, मुम्बई द्वारा प्रासंगिक आर्ट एवं टेक्सटाईल कलेक्शनंस को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में नेचर मॉर्ट एंड आर्ट मोटिफ, नई दिल्ली और झावेरी कंटम्प्रेरी, मुम्बई का भी योगदान रहेगा।