शनिवार, 15 जून 2019

केरल में मंदिर कलाकृति पर बनेगा संग्रहालय

केरल में मंदिर कलाकृति पर बनेगा संग्रहालय
मूमल नेटवर्क, कोच्चि। केरल सरकार एक ऐसे संग्रहालय का निर्माण कर रही है जिसमें राज्य की मंदिर कलाकृति और त्रिशूर जिले के एक प्राचीन शहर से संबद्ध रीति रिवाजों पर प्रकाश डाला जाएगा। इससे मन्दिर मूर्ति शिल्प पर किए जाने वाले शोध कार्यों को बढ़ावा व सहयोग मिल पाएगा। 3.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला प्रस्तावित संग्रहालय दक्षिण भारत में अपने तरह का पहला संग्रहालय होगा जो कोडुंगल्लूर शहर में बनाया जाएगा। कोडुंगल्लूर शहर को इसके दो सहस्राब्दी पुराने मंदिर के लिए जाना जाता है। सूत्रों ने बताया कि, श्री कुरुम्बा भगवती मंदिर के नाम से प्रसिद्ध चेरा काल के धार्मिक परिसर को मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट (एमएचपी) के तहत संरक्षण और नया रूप दिया जा रहा है। इसी परिसर में संग्रहालय का निमार्ण प्रस्तावित है। यह भारत के सर्वाधिक प्राचीन मन्दिरों में से एक है। इसमें भद्रकाली की आठ भुजाओं वाली मूर्ति है जिन्हें 'कोडुंगलुर अम्माÓ के नाम से अधिक जाना जाता है।

कलाकृतियां सिखाएंगी सूर्य नमस्कार

कलाकृतियां सिखाएंगी सूर्य नमस्कार
एनसीजेडसीसी में कमल की पंखुडिय़ों पर अब सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राएं नजर आएंगी। इसे अंतिम रूप देने में पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार लगे हैं। राज्यपाल करेंगे 17 जून को लोकार्पण।
मूमल नेटवर्क, प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में सूर्य नमस्कार  को प्रदर्शित करती कमल के फूल पर आसीन कृतियों को लगाया जाएगा। यहां प्रतिमाएं यह बताएंगी कि आप किस तरह सूर्य नमस्कार करें। सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राओं पर आधारित कलाकृतियां देश को जल्द ही समर्पित की जाएंगी। योग विधा में यह अनोखी पहल हो सकती है। फाइबर वाली इन कलाकृतियों को पश्चिम बंगाल से आए मूर्तिकार गढ़ रहे हैं। कुंभ के सफल आयोजन से दुनिया भर में अपनी चमक बिखेरने वाले प्रयागराज में सूर्य नमस्कार के तरीके को कला के माध्यम से अनूठे अन्दाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
ऐसी है कृतियां
एनसीजेडसीसी ने सूर्य नमस्कार के निमित्त तैयार की जा रही प्रतिमाओं को अभी तक कोई नाम नहीं दिया है। इसे बनाने का उद्देश्य है कि योग प्रेमियों को सूर्य नमस्कार की सभी मुद्राओं की जानकारी सहज तरीके से हो। मूर्तिकार इसे कमल के फूल पर गढ़ रहे हैं।  एक-एक पंखुड़ी पर सूर्य नमस्कार की अलग-अलग मुद्राओं को दर्शाते हुए प्रतिमाएं गढ़ी जा रही हैं। बीच में एक योगी की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में होगी।
सभी मुद्राओं के सामने उनके नाम भी रहेंगे। इस कलाकृति का निर्माण सात मई से शुरू हुआ था। इस पर 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च आने की बात संस्थान के जिम्मेदार कह रहे हैं। कुल कितनी राशि खर्च होगी, यह बता पाने की स्थिति में वह अभी नहीं हैं। कलाकारों का भी यही कहना है कि यह प्रतिमाएं शिल्प व निर्माण कला के लिए अप्रतिम उपहार होगा।
बोले एनसीजेडसीसी के निदेशक
एनसीजेडसीसी के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर बताते हैं कि दिल्ली में तैनाती के दौरान वह इसे वहीं बनवाना चाहते थे लेकिन, शायद यह कलाकृति प्रयागराज की किस्मत में लिखी थी। महात्मा गांधी कला वीथिका के सामने पार्क में इसका निर्माण कराया जा रहा है। पास में योग की कक्षाएं चलती हैं। इस कला वीथिका में अक्सर प्रदर्शनी भी लगती है। इसलिए वहां कला पे्रमियों का आना जाना अधिक होता है।
राज्यपाल करेंगे लोकार्पण
इस कलाकृति का लोकार्पण राज्यपाल रामनाईक के हाथ से कराने का कार्यक्रम तय किया गया है। अभी तक 17 जून को लोकार्पण की तैयारी है लेकिन इसमें बदलाव किया जा सकता है।
साभार दैनिक जागरण

सोमवार, 10 जून 2019

कला से संवरता पर्यावरण


कला से संवरता पर्यावरण
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आज पर्यावरण संरक्षण एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है और प्रदूषित भविष्य मुंह फैलाए हमारा इंतजार कर रहा है. प्रदूषण आज हर तरफ है और जीवन में उपयोग आने वाली लगभग हर वस्तु के साथ प्रदूषण जुड़ गया है, चाहे वह यातायात के साधन हों, खाने-पीने की चीजें हों, उत्पादन के साधन हों यह हमारा काम आसान बनाने वाले कंप्यूटर और मोबाइल, सब प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं और यह प्रदूषण रोजाना कई लोगों की जान ले रहा है. आज इसी प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग भी बढ़ रही है और पूरे विश्व में तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। आने वाले वक्त में यह समस्या और ज्यादा बढऩे वाली है अगर अभी से कुछ मजबूत कदम नहीं उठाये गए और लोगों में जागरूकता नहीं फैलाई गई. इस समस्या को भांपते हुए और विश्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कलाकार भी लोगों में इसके प्रति जागरूकता लाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं और अपनी कला के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का सन्देश दे रहे हैं। ऐसे ही एक युवा कलाकार हैं जयपुर के मुकेश ज्वाला जिन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू किया है और वे अपनी कलाकृतियों के जरिये यह सन्देश फैलाने के प्रयास में लगे हैं. स्कूलों और कॉलेज में छात्रों कोपर्यावरण के विषय में जागरूक करने और पर्यावरण संरक्षण का महत्त्व समझाने के साथ-साथ ही मुकेश ज्वाला ने अब अपना रुख कॉर्पोरेट जगत की ओर किया है। हाल ही मुकेश ज्वाला ने साथी कलाकार सुनील कुमावत के साथ मिलकर भारतीय स्टेट बैंक के लिए इलेक्ट्रोनिक कचरे से एक आकर्षक प्रतिमा का निर्माण किया है और प्रतिमा के जरिए पर्यावरण संरक्षण के सन्देश और महत्व को बहुत अच्छे तरीके से समझाया है।

यह है प्रतिमा
प्रतिमा अपने बाएं हाथ में पृथ्वी को सीने से लगाए नजाकत से इस प्रकार संभाले हुए है जिस तरह से एक माँ अपने बच्चों को संभालती है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है। इस प्रतिमा के जरिये जहाँ एक ओर बढ़ते इलेक्ट्रोनिक कचरे का कलात्मक प्रबंधन दिखाया गया है वहीँ दूसरी तरफ स्टेट बैंक के लिए भी एक इतिहास रचा गया है. मुकेश ने साथी कलाकार सुनील के साथ मिलकर पहली बार स्टेट बैंक को एक मानव रूप में अवतरित किया है और बैंक को एक प्रगतिशील महिला का रूप दिया है।
इस 15 फीट ऊंची कलाकृति को भारतीय स्टेट बैंक के जयपुर स्थित स्टेट बैंक लर्निंग एंड डेवलपमेंट सेण्टर में लगाया गया है। इस कलाकृति को आधिकारिक तौर पर 'पुनर्नवा' (रिन्यूड) नाम दिया गया है।  40 दिन में बनने वाली प्रतिमा में कंप्यूटर के लगभग 8000 पाट्र्स लगाए गए हैं। इसमें 20 सीआरटी मॉनिटर, 70 सीपीयू , 110 कीबोर्ड  और  कम्प्युटर  का  अन्य समान जैसे माउस, मॉड़म, सॉकेट, हार्डडिस्क, डीवीडीप्लेयर, फ्लॉपि ड्राइव, रैम, एसएमपीएस और  सीपीयू  की बॉडी का इस्तेमाल किया गया है। कलाकृति का ढांचा बनाने में लोहे का इस्तेमाल किया गया और उसके ऊपर इलेक्ट्रोनिक वेस्टका इस्तेमाल किया गया है। इलेक्ट्रोनिक कचरे से बनी यह प्रतिमा आकर्षक है। प्रतिमा के हाथ में प्रदर्शित आधे ग्लोब की समतल जगह पर बिल्डिंगे बनाई है जो पृथ्वी पर हो रही गतिविधियों को दर्शाती है । कलाकारों ने इसे मदर एसबीआई नाम देते हुये स्टेट बैंक को एक माँ के रूप में प्रदर्शित करने का प्रयास किया है। कलाकारों ने पहली बार स्टेट बैंक का मानवीकरण करने का प्रयास करते हुए बैंक के कर्मचारियों, शाखाओं और उत्पादों आदि को एक साथसमेटकर एक इकाई में मानव शरीर के रूप में प्रदर्शित किया ताकि स्टेट बैंक का नाम आते ही एक छवि जेहन में उभर सके। यह प्रतिम स्टेट बैंक के जयपुर मंडल के तत्कालीनमुख्य महाप्रबंधक विजय रंजन की पहल पर तैयार हुई है। 

राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में 17 जून से समर क्लासेज


राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में 17 जून से समर क्लासेज
कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन का दिया जाएगा प्रशिक्षण
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में 17 जून से समर क्लासेज का आयोजन किया जा रहा है। इसमें कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। 27 जून तक चलने वाली क्लासेज का रजिस्ट्रेशन कार्यशाला उद्घाटन से पूर्व संगीत विभाग में सुबह 8 बजे से होगा।
फाईन आर्ट की डीन व संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने जानकारी दी कि, समर क्लासेज का आयोजन विद्यार्थियों के कौशल विकास हेतु किया जा रहा है उन्हों ने कहा कि समर क्लासेज का आरम्भ पहली बार 2017 से किया गया था। पूर्व के दो वर्षों में गायन एवं सितार वादन का प्रशिक्षण दिया गया। अब दो वर्षों की क्लासेज में कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कक्षाओं का समय सुबह 9 बजे से साढे 10 बजे तक रहेगा।

इन कक्षाओं की उपयोगिता के बारे में डॉ. तैलंग ने कहा कि, विद्यालय स्तर पर कत्थक नृत्य एवं तबला-वादन के विषय नहीं होने के कारण इन विपषयों में कॅरियर चुनने वालों के लिए यह कक्षाएं लाभदायी सिद्ध होंगी। सुपरिचित तबला वादक डॉ. अंकित पारीक एवं नृत्यांगना तरूणा
जांगिड़ पारीक विद्यार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। कार्यशाला के समापन पर विद्यार्थियों का प्रदर्शन होगा एवं उन्हें प्रमाणपत्र द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

कार्यशाला का समापन, चित्रकार हुए सम्मानित

कार्यशाला का समापन, चित्रकार हुए सम्मानित
प्रदर्शनी की शोभा बढ़ाएंगी कलाकृतियां
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द द्वारा आयोजित राज भवन चित्रकार  शिविर का कल 10 जून को समापन हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागी कलाकारों को राज्यपाल महामहिम राम नाईक ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। शिविर में तैयार कलाकृतियों का प्रदर्शन अकादमी दीर्घा में अभी कुछ देर बाद 11 बजे से किया जाएगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री योगेन्द्र बाबा करेंगे।
कल शाम 5 बजे एक समारोह के साथ राज भवन चित्रकार  शिविर  का समापन हुआ। इस अवसर पर संस्कार भारती  के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेन्द्र एवं शिविर संयोजक गिरीश चन्द्र भी उपस्थित थे। महामहिम राम नाईक ने प्रतिभागी कलाकारो द्वारा सृजित कलाककृतियों का अवलोकन किया। राज्यपाल ने भेंटस्वरूप प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं पुस्तकें प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इसके साथ ही  पद्मश्री बाबा योगेन्द्र तथा शिविर संयोजक गिरीश चन्द्र ने भी कलाकारों को भेंटस्परूप अंगवस्त्र एवं मिष्ठान प्रदान किए।
शिविर में तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी अकादमी दीर्घा में लगाई गई है, जिसका उद्घाटन आज सुबह 11 बजे पद्मश्री बाबा योगेन्द्र करेंगे। यह प्रदर्शनी 20 जून तक चलेगी।
इन कलाकारों ने लिया शिविर में भाग
 सांगली महाराष्ट्र से मंगेश आंनद राव पाटिल, येओले महाराष्ट्र से नानासाहेब भाउसाहेब, पुणे महाराष्ट्र से मंजिरी महेन्द्र मोरे, पुणे से ही उत्तम रामचन्द्र साठ व सुरभि ग्वालेकर, लखनऊ उत्तर प्रदेश से अमित कुमार व कमलेश्वर शर्मा ने शिविर में भाग लिया। इनके साथ महाराष्ट्र  के मनोजकुमार एम साकल व सत्याजीत वारेकरे, दिल्ली के भारत भूषण शर्मा एवं संयोजक गिरीश चन्द शिविर प्रतिभागी रहे।

रविवार, 9 जून 2019

भारत की महिला प्रिंटमेकर्स का प्रदर्शन 12 जून से पोलैंड में

भारत की महिला प्रिंटमेकर्स का प्रदर्शन 12 जून से पोलैंड में
जयपुर की पुष्पा दुल्लर की कृति करेगी प्रदेश का प्रतिनिधित्व
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। भारत की 51 महिला प्रिंटमेकर्स की कला का प्रदर्शन 12 जून से पोलैंड में होगा। 'स्त्री-विजनÓ नाम से आयोजित हो रही इस प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी द्वारा यूजीनियस गेप्पर्ट अकादमी ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन, रॉक्लो, पॉलेंड के साथ मिलकर किया जा रहा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन रॉक्लॉ के राष्ट्रपति जेसेक सतरिक 12 जून को बेतोनेवी गैलेरी में करेंगे।
अकादमी अध्यक्ष उत्तम पचारणे ने जानकारी दी कि वर्ष 2012 में ललित कला अकादमी ने पोलैण्ड की छापा प्रदर्शनी की मेजबानी की थी। स्त्री विजन प्रदर्शनी उसी क्रम में आयोजित की जा रही है।
डॉ. उत्तम पाचारणे ने ललित कला अकादेमी यूजीनियस गेप्पर्ट अकादमी ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन, रॉक्लो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, हम आभारी है कि उन्होंने अपने विश्वविद्यालय में 51 भारतीय महिला छापाकारों की प्रदर्शनी 'स्त्री-विजऩÓ के आयोजन का अवसर प्रदान किया। यह केवल एक आयोजन ही नहीं है बल्कि दोनों देशों के मध्य साहचर्य का द्वार है। भारत और पौलेंड के मध्य मजबूत और गहरे संबंध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के मध्य सांस्कृतिक सहयोग के पहले समझौते पर वर्ष 1957 में हस्ताक्षर किए गए थे और अब यह मित्रता 61वें वर्ष में प्रवेश कर रही है तो इससे अधिक उपयुक्त और कोई आयोजन नहीं हो सकता। अकादमी के अपने संग्रह में भी कई पॉलिश कलाकारों की कलाकृतियां है। यह प्रदर्शनी भारत और पौलेंड की मित्रता और कला जगत के लिए ऐतिहासिक है। इस प्रदर्शनी के लिए कृतियों को विशेष तौर से चुना गया है।
इन महिला प्रिंटर्स की कलाकृतियां होंगी प्रदर्शित
अनीता दास चक्रवर्ती, अनु गुप्ता, अनुपम सूद, अस्मा मेनन, अवनी बंसल, डिम्पल बी. शाह, डिम्पल चंदत, दिव्या चतुर्वेदी, दुर्गा कैन्थोला, गौरी वेमुला, हेम ज्योतिका, हेमावती गुहा, जिन सुक शिन्दे, ज्योति देवघरे, कंचन चंदर, काईका शाह, किन्नारी तोन्दलेकर, क्षितीज वाजपेयी, लज्जा शाह, लीना घोष, मेघा सतपालकर, नैना दलाल, नंदिनी पन्तवानी, नेहा जायसवाल, पौलॉ सेन गुप्ता, पियाली पॉल, प्रेया भगत, प्रियंका बतरा, पुष्पा दुल्लर, रजनी साहनी, रीनी धूमल, सतविंदर कौर, सीमा गोन्दानी, सीमा कोहली, शालिनी, श्रद्धा तिवारी, सोघरा खुसरानी, सोनल वाष्र्णेय, स्तुति सोनकर, सुचेता घाटगे, सुषमा यादव, तंद्र भद्रा, तनूजा राणे, तेजस्विनी सोनावानी, उर्मिला वी.जी, विशाखा आप्टे की कृतियां प्रदर्शनी में शामिल हैं।

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

सिन्धी मातृ भाषा दिवस पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न

सिन्धी मातृ भाषा दिवस पर आयोजित
चित्रकला प्रतियोगिता सम्पन्न
मूमल नेटवर्क, अजमेर। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् की राजस्थान इकाई द्वारा मातृ भाषा दिवस के अवसर पर कल 21 फरवरी को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सूचना केन्द्र की चित्रकला दीर्घा में आयोजित प्रतियोगिता का शुभारम्भ वरिष्ठ चित्रकार डा.राम जैसवाल की अध्यक्षता एवं प्रो. सुरेन्द्र भटनागर के विशिष्ठ आतिथ्य में हुआ। प्रतियोगिता में 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती तथा इष्ट देव झूलेलाल के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ । प्रतियोगिता में एच.के.एच. सीनियर पब्लिक स्कूल, सावित्री बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, आदर्श मोईनिया इस्लाममिया स्कूल, आदर्श विद्या निकेतन, पुष्कर रोड, स्वामी विवेकानन्द आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय, सैन्ट मैरीज स्कूल, डी.बी.एन., राजकीय सावित्री कन्या महाविद्यालय, डी.ए.वी. कालेज, के लगभग 150 से अधिक छात्र एवं छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगित तीन वर्गों में आयोजित की गई । इस अवसर पर अजमेर के वरिष्ठ चित्रकारों अजयपाल गहलोत, बनवारी लाल ओझा, अलका शर्मा व संजय सेठी ने भी मातृभाषा को समर्पित चित्र बनाए।
प्रतियोगिता के समापन सत्र में मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए विशिष्ठ आमंत्रित सदस्य व विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि यदि हम अपनी मातृभाषा से जुड़े रहते हैं तो हम अपने संस्कारों एवं संस्कृति से जुड़े रहते हैं। हमें घर में आवश्यक रूप से मातृभाषा में व्यवहार करना चाहिए। हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी के साथ साथ हमें अपनी मातृभाषा का पूरा ज्ञान होना चाहिए। इस अवसर पर राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् के सदस्य एवं कार्यक्रम के प्रमुख संयोजक डॉ. सुरेश बबलानी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समापन सत्र में प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थीयों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

इन्हें मिला पुरस्कार
तीन वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता के प्रथम वर्ग कक्षा 6 से 8 तक का प्रथम पुरकार सैन्ट मैरीज स्कूल की अक्षरा माहेश्वरी को, द्वितीय पुरस्कार स्वामी विवेकानन्द आदर्श विद्यालय के निखिल नंगवारा को तथा तृतीय पुरस्कार स्वामी विवेकानन्द आदर्श विद्यालय के ही वैभव शमा को प्राप्त हुआ। सैन्ट मैरीज की प्रियांशी सक्सैना वएच.के.एच.विद्यालय की कोमल सोलंकी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
द्वितीय वर्ग कक्षा 9 से 12 में एच.के.एच.स्कूल की रोशिता वर्मा को प्रथम, डी.बी.एन. स्कूल की आयिशा वर्मा को द्वितीय तथा डी.बी.एन. स्कूल की ही काव्या को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। एम.पी.एस. की विभांशी जैन एवं आदर्श विद्या निकेतन के पियूष कुमार को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
कालेज एवं खुला वर्ग में राजकीय सावत्री बालिका महाविद्यालय की नेहा राठौड़ को प्रथम, भारती कंवर को द्वितीय तथा गृहणी सपना रावनानी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इस वर्ग में मोनिका सिंह एवं श्रेया सोलंकी को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। अतिथियों का स्वागत श्री सुन्दर मटाई एवं महेन्द्रसिंह चौहान ने किया। कार्यक्रम संयोजक संजय सेठी ने सभी का आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन पूनम पांडे ने किया।