मंगलवार, 19 जून 2018

जेकेके में टेक्सटाईल एक्जीबिशन 22 जून से


जेकेके में टेक्सटाईल एक्जीबिशन 22 जून से 
प्रदर्शित होगा आजाद भारत के वस्त्रों का इतिहास
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र में 1947 के बाद के भारत में वस्त्रों के इतिहास पर आधारित एक प्रदर्शनी 22 जून से शुरु होने जा रही है। इस टेक्सटाईल एक्जीबिशन के माध्यम से 1947 के बाद भारत के हस्तनिर्मित वस्त्रों में हुये विकास को प्रदर्शित किया जाएगा। जेकेके द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 'न्यू ट्रेडिशंस: इन्फ्लुएंसेस एंड इंस्पीरेशंस इन इंडियन टेक्सटाइल्स, 1947-2017' 31 जुलाई तक चलेगी।
1947 में भारत की आजादी के बाद की थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी विभिन्न विषयों पर आधारित होगी। इन थीम में राष्ट्रीय आंदोलन; खादी एवं 20वीं शताब्दी के आरम्भ से मध्य में यूरोपीयन-औपनिवेशिक संघर्षो से हुए प्रभावों तथा 1950 से वर्तमान समय की अंतर्राष्ट्रीय आधुनिकता के साथ हुए जुड़ाव शामिल होंगे। इसी प्रकार इसमें 1970 के दशक से ग्राम आधारित शिल्प एवं वस्त्रों में आरम्भ होने वाले बदलाव भी यहां प्रदर्शित किये जाऐंगे, जिसके जरिए टेक्सटाईल को मूर्तिकला के साधनों एवं रूपकों के अतिरिक्त शहरी वस्त्रों की वर्तमान डिजाइन और भारतीय सादगी दर्शायी जाएगी।
कला, डिजाइन, फैशन एवं शिल्प को प्रस्तुत करते हुए इस प्रदर्शनी में कपड़ों पर पेंटिंग्स, टेपिस्ट्रीज, मूर्तियां, कालीन एवं गलीचे, साड़ी, वस्त्र एवं कपड़ों पर रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न स्वरूप प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही यहां सामग्री एवं तकनीक की वे विकास यात्राएं प्रदर्शित की जाएंगी, जिसने रचनात्मक निर्माताओं, मास्टर कारीगरों, शिल्पकारों, कलाकारों, डिजाइनरों के साथ-साथ प्रयोगात्मक, आला दर्जे के डिजाइन स्टूडियोज, लोकप्रिय एवं प्रसिद्ध ब्रांड्स को दिशा प्रदान दी है।
प्रदर्शनी के दौरान 2 जुलाई को एक्जीबिशन में एक विशेष प्रदर्शन भी होगा जिसमें मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद की सदस्य, कला एवं संस्कृति, राजस्थान सरकार, मालवीका सिंह गेस्ट ऑफ ऑनर होंगी। यह प्रदर्शनी मयंक मानसिंह कौल द्वारा क्यूरेट की गई है और रेहा सोढ़ी द्वारा डिजाइन की गई है।
प्रदर्शनी के प्रतिभागी कलाकार व डिजाइनर
अमित अग्रवाल, बशोबी तिवाड़ी, बेरेनाईस इलिना, चारू वाधवा, घिओरा अहारोनी, मनीषा अरोड़ा, रितेन मजूमदार, रितु कुमार, संजय गर्ग एवं तूफान रफाई। इनके अतिरिक्त इसमें 11:11, अब्राहम एंड ठाकुर, अनोखी, बंधेज, खमीर, लेसेज, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, द रजिस्ट्री ऑफ सारीज् और द वीवर्स सर्विस सेंटर्स जैसे स्टूडियोज, ब्रांड्स एवं संगठनों का प्रतिनिधित्व रहेगा।
इस प्रदर्शनी में द देवी आर्ट फाउंडेशन, नई दिल्ली;  लेखा एंड अनुपम पोद्दार, नई दिल्ली; प्रिया पॉल, नई दिल्ली; द म्यूजियम ऑफ आर्ट एंड फोटोग्राफी, बैंगलुरू और डॉ. मोनिशा अहमद, मुम्बई द्वारा प्रासंगिक आर्ट एवं टेक्सटाईल कलेक्शनंस को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी में नेचर मॉर्ट एंड आर्ट मोटिफ, नई दिल्ली और झावेरी कंटम्प्रेरी, मुम्बई का भी योगदान रहेगा। 

सोमवार, 18 जून 2018

जहांगीर में राजस्थान के 140 कलाकारों का ग्रुप-शो 26 से

जहांगीर में राजस्थान के 140 कलाकारों का ग्रुप-शो
राज. ललित कला अकादमी की सराहनीय पहल

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से प्रदेश के कलाकारों के लिए जहांगीर आर्ट गैलेरी में लगाए जाने वाले ग्रुप शो की तैयारियां इनदिनों जोरों पर हैं। इसमें समसामयिक पेंटिंग के साथ पारम्परिक व लघु शैली के चित्र, ग्राफिक व मूर्तिशिल्प शामिल हैं। जंहागीर कला दीर्घा से प्राप्त अधिकारिक जानकारी के अनुसार गैलेरी नम्बर एक, दो व तीन इस शो के लिए बुक की गई है।
हालांकि तय कार्यक्रम के अनुसार तैयारियों का काम पिछड़ा हुआ है, लेकिन उम्मीद की जा रही कि सब कुछ समय पर हो जाएगा। आयोजन का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि ब्यूरोकेसी से परे अकादमी में मनोनीत कलाजगत के लोगों द्वारा किए जा रहे नवाचारों में यह कदम एक और सुखद कड़ी है। नकारात्मक पहलू यह है कि आयोजन में पारदर्शिता का नितांत अभाव है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 26 जून से 2 जुलाई तक जंहागीर कला दीर्घा में होने वाले शो के लिए जून के तीसरे सप्ताह में अकादमी की कलादीर्घा में शो का प्रियू होना था, लेकिन तीसरा सप्ताह आधा बीत जाने तक शो के लिए चुने गए कलाकारों के नाम तक उजागर नहीं किए जा सके हैं। जानकारों के मुताबिक कारण स्पष्ट है कि चयन सूची में नामों के जुडऩे और कटने का क्रम अभी तक जारी है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि इसमें चयनकर्ताओं की कोई दुर्भावना है।
चयन प्रक्रिया
दरअसल आरंभ से ही चयन प्रक्रिया परिपक्व और पारदर्शी नहीं रही। चयन समिति के लिए पद्मश्री शाकिर अली, वरिष्ठ मूर्तिकार अशोक गौड़ व राजस्थान विश्वविद्यालय के कला व्याख्याता डॉ. लोकेश जैन जैसे अनुभवी व जानकार सदस्यों को चुना गया। लेकिन, इन्हें चयन के लिए फ्रीहेंड दिए जाने के बजाय प्रदेश के हजारों कलाकारों में से अकादमी द्वारा चुने हुए करीब ढाई सौ से अधिक कलाकारों के नाम व काम उपलब्ध कराए गए। इन कलाकारों में युवा कलाकारों के साथ अनुभवी कलाकार, नेशनल व स्टेट अवार्ड प्राप्त कलाकारों की सूचि शामिल थी।
बताया गया कि समिति को इनमें से करीब डेढ़ सौ के नाम व काम चुनने हैं। समिति ने विभिन्न सूचियों और केटेलॉग आदि दस्तावेजों के आधार पर 140 नाम अकादमी के समक्ष प्रस्तुत कर दिए। इसके बाद अकादमी की ओर से इन चुनिंदा कलाकारों को पत्र लिखकर और टेलीफोन के जरिए आयोजन की जानकारी देते हुए ग्रुप शो के लिए उनका काम मांगा गया। निर्धारित आयोजन के अनुसार इनमें से अधिकांश की स्वीकृति प्राप्त हो गई।
समस्या
समस्या तब आन पड़ी जब अनेक कलाकारों ने किसी न किसी कारण  से अकादमी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। कुछ बड़े कलाकारों के लिए जहांगीर के ग्रुप शो में शामिल होना महत्वपूर्ण नहीं था तो कुछ के पास वह कृति नहीं अब उपलब्ध नहीं थी, जिसे केटेलॉग में देखकर उनसेेेे वह काम मांगा गया था। किसी ने इसलिए इस आयोजन में शामिल होना उचित नहीं माना क्योंकि इसमें फलां कलाकार को शामिल नहीं किया गया। कुल मिलाकर अकादमी के पास निर्धारित समय सीमा तक पर्याप्त कलाकारों की सहमति नहीं पहुंच सकी। ऐसे में गुरूजनों के प्रभावी सुझावों पर नामों का जुडऩे और कटने का क्रम अभी तक जारी है।
सचिव का कहना है
अकादमी सचिव डा. सुरेन्द्र सोनी ने बताया कि इस शो में चुने गए कलाकारों में से 50 प्रतिशत कलाकार ऐसे युवा हैं जिन्हें पहली बार जंहागीर जैसी प्रतिष्ठित कला दीर्घा में कला प्रदर्शन का अवसर मिलेगा। इस शो में 50 प्रतिशत कलाकार जयपुर व राजस्थान के जाने-पहचाने वरिष्ठ कलाकार हैं। पारम्परिक व लघुशैली के चित्रकारों की बात करने पर सचिव ने कहा कि, हालांकि अकादमी के पास ऐसे कलाकारों के पूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन फिर भी, इन विधाओं के कुछ कलाकारों को शो में शामिल किया गया है। भविष्य में इन विघाओं के कलाकारों को अकादमी से जोडऩे के प्रयासों में तेजी लाई जाएगी।
अकादमी के इस शो में शामिल होने वाले कलाकारों की सूचि उपलब्ध नहीं होने का कारण बताते हुए सचिव ने कहा कि, लगभग पन्द्रह कलाकारों  ने शो में शामिल होने की तय तिथि 10 जून तक स्वीकृति नहीं भेजी। इन कलाकारों के स्थान पर शामिल किए जाने के लिए अन्य कलाकारों के चुनाव के साथ उनकी स्वीकृति प्राप्त की जा रही है। जंहागीर में प्रदर्शनी से पहले इस शो का प्रिव्यु अकादमी दीर्घा में होगा। शो के कैटलॉग प्रकाशन का कार्य चल रहा है।
जंहागीर तक सुरक्षित रूप से कृतियां पहुंचाने के लिए अकादमी के प्रदर्शनी वाहन का उपयोग किया जाएगा। इस प्रदर्शनी वाहन में भी कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। सचिव ने जानकारी दी कि, शो के दौरान यह वाहन बारी-बारी से जंहागीर कला दीर्घा व जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट परिसर में खड़ा रहेगा। प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा ने बताया कि इस शो का संयोजन डॉ. लोकेश जैन तथा सह संयोजन आशीष श्रृंगी करेंगे।
ये तो शामिल हैं।
मूमल को यत्र-तत्र से उपलब्ध जानकारी के अनुसार जहांगीर के लिए ग्रुप-शो में शामिल होने वाले कलाकारों में दिवंगत रणजीत सिंह चूड़ावाला व सुरेन्द्र पाल जोशी सहित  पद्मश्री शाकिर अली, डॉ. लोकेश जैन, अशोक गौड़, सुमन गौड़, डॉ. नात्थूलाल वर्मा, डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, सोहन जाखड़, लाखन सिंह जाट, प्रो. चिन्मय मेहता, वीरेन्द्र बन्नू, जयशंकर शर्मा, महावीर स्वामी,डॉ. अनुपम भटनागर, तिलकराज, श्वेत गोयल, शीतल चिलांगिया, आर.बी. गौतम, शरद भारद्वाज,  भीमसिंह हाड़ा, मनोज टेलर, , जगमोहन माथोडिय़ा, मणि भारतीय, पंकज गहलोत, विनोद भारद्वाज, किरण सोनी गुप्ता, खुशनारायण जांगिड़, किरण मूरडिया, कृष्णा महावर, लक्ष्यपाल सिंह, अमित राजवंशी, दीपिका हाजरा,  अजय मिश्रा, अन्नपूर्णा शुक्ला, सुधीर शर्मा, सौरभ भट्ट व आशीष श्रृंगी शामिल हैं।
इससे इंकार नहीं किया जा सकता 
बरसों से प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनहीन सीमित कार्रवाई के चलते अकादमी के जो कार्यक्रम कला मेले, छात्र प्रदर्शनी व स्टेट अवार्ड प्रदर्शनी तक सिमटे हुए थे, अकादमी के लिए कलाजगत से चुने गए मनोनीत अध्यक्ष और सचिव के आने के बाद ना केवल गतिविधियां बढ़ी हैं वरन् उनमें विविधता भी नजर आने लगी है। नई बयार से तरोताजा हुए कलाकारों का मानना है कि अब इसमें पारदर्शिता भी नजर आने लगे तो कार्यप्रणाली की विश्वस्तनीयता और बढ़ेगी।

रविवार, 17 जून 2018

आगामी कोची-मुजिरिस बैनाले में शामिल होने वाले कलाकारों के नाम सामने आए

आगामी कोची-मुजिरिस बैनाले में 
शामिल होने वाले कलाकारों के नाम सामने आए
12 दिसम्बर से आरम्भ होगा बैनाले
-राहुल सेन
आगामी कोच्चि-मुजि़रिस बैनाले भाग लेने वाले कलाकारों के नाम सामने आ चुके हैं। आयोजकों ने 12 दिसंबर, 2018 से आरम्भ होकर  29 मार्च, 2019 तक चलने वाले बैनाले के प्रतिभागी कलाकारों के नाम घोषित कर दिये हैं। इसमें 12 भारतीयों सहित 23 बिदेशी कलाकार अपनी कला के जौहर दिखाएंगे। कलाकार अनीता दुबे इस शो को क्यूरेट करेंगी।
यह कलाकार होंगे शामिल
रीना बनर्जी (भारत)
तानिया ब्रुगुएरा (क्यूबा)
विवियन काकुरी (ब्राजील)
विपिन धनुधरन (भारत)
गीत दांग (चीन)
हेरी डोनो (इंडोनेशिया)
इन्स डोजक और जॉन बार्कर (ऑस्ट्रिया + यूके)
मार्लीन डुमास (नीदरलैंड्स)
वैली निर्यात (ऑस्ट्रिया)
गुरिल्ला गल्र्स (यूएसए)
शिल्पा गुप्ता (भारत)
सुनील गुप्ता और चरण सिंह (भारत)
राणा हमदेह (लेबनान)
थॉमस हिर्शोर्न (स्विट्जऱलैंड)
ईबी इटो (डेनमार्क)
जितीश कल्लाट (भारत)
विलियम केंट्रिज (दक्षिण अफ्रीका)
गोस्का मैकगा (पोलैंड)
अन्नू पलकुनाथु मैथ्यू (भारत / यूएस)
एर्नआउट मिक (नीदरलैंड्स)
संतु मोफोकेंग (दक्षिण अफ्रीका)
शिरीन नेशात (ईरान)
जून गुयेन-हत्सुशिबा (वियतनाम)
प्रभाकर पचपूट (भारत)
माधवी पारेख (भारत)
वालिद राड (लेबनान)
शुबिगी राव (भारत)
आर्य रासजारमरीरनसूक (थाईलैंड)
पी आर सतीश (भारत)
नीलिमा शेख (भारत)
पंग्रोक सुलाप (मलेशिया)
बी.वी. सुरेश (भारत)
बार्थलेमी टोगुओ (कैमरून)
सुए विलियमसन (दक्षिण अफ्रीका)
अकरम जतारी (लेबनान)

राख हुआ ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट


राख हुआ ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट
मूमल डेस्कवर्क। स्कॉटलैंड का प्रसिद्ध व एक सौ साल से अधिक पुराना ग्लासगो स्कूल ऑफ आर्ट जलकर राख हो गया है। इसकी इमारत में शुक्रवार रात करीब 11.15 बजे आग लगी थी। आग की भीषणता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे बुझाने में दमकल विभाग के 120 कर्मचारी व 20 गाडिय़ां रात भर जुटी रहीं।
स्कॉटलैंड के राहत और बचावकर्मियों के मुताबिक ग्लासगो शहर के बीचोबीच स्थित आर्ट स्कूल के अग्निकांड में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। स्कूल की आग आसपास की दूसरी इमारतों तक फैल गई। इसके चलते पास में स्थित नाइट क्लब और एबीसी म्यूजिक की इमारतों को भी काफी नुकसान पहुंचा। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

हालांकि आग पर शनिवार सुबह तक काबू पा लिया गया है लेकिन मलबे से धुआं अभी भी उठ रहा है। इस विश्व प्रसिद्ध इमारत का डिजाइन मशहूर आर्किटेक्ट चाल्र्स रेनी मैकिंटोश ने बनाया था। उन्हीं के नाम पर आर्ट स्कूल में एक इमारत का नाम मैकिंटोश रखा गया था।
वास्तु कला की दृष्टि से उत्कृष्ट मैकिंटोश इमारत भी आग में नष्ट हो गई है। इसे 1897 से 1909 के बीच बनाया गया था जिसे 2019 में दोबारा खोला जाना था। मई 2014 में भी इसमें आग लग गई थी। इसी के चलते इसका जीर्णोद्धार जारी था। जीर्णोद्धार पर दो से साढ़े तीन करोड़ पौंड (करीब 1&6 करोड़ रुपये से- 2&9 करोड़ रुपये) खर्च किये जाने थे ताकि इसे इसके गौरवशाली भव्यता में लौटाया जा सके।
स्कॉटलैंड की मंत्री निकोला स्टर्जन ने भी इस घटना पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट में लिखा,Óयह बेहद ही गंभीर स्थिति है। मेरा पहला विचार लोगों की सुरक्षा को लेकर है, लेकिन इसकी ऐसी हालत पर मेरा दिल भी दुखी है।'

शनिवार, 16 जून 2018

सिन्धु महाकुम्भ कल सुबह साढे नौ बजे से

सिन्धु महाकुम्भ कल सुबह साढे नौ बजे से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। भारतीय सिन्धु सभा एवं सिन्धी समाज के सामाजिक, धार्मिक संगठनों की ओर से राज्य स्तरीय सिन्धी महाकुम्भ का आयोजन कल 17 जून को प्रात: 9.30 बजे से स्थानीय सीतापुर टोंक रोड़ स्थित जयपुर एक्जीबिशन एण्ड कन्वेक्शन सेन्टर के वातानुकूलित हॉल में किया जा रहा है।
कार्यक्रम संयोजक हरगुण आसनदास नेभनानी ने कहा कि सिन्धी समाज संगठित होकर अपने अधिकारों की मांग कर रहा है। सिन्धी महाकुम्भ में प्रदेश भर की पूज्य पंचायतें सांस्कृतिक,सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के सदस्य भाग ले रहे हैं। अमरापुरा के संत मण्डली और प्रदेश के अन्य संत ओर साधु समाज समिलित होंगे।
सह संयोजक मुकेश लख्याणी ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खेल मंत्री एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़ होगे। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास मंत्री चन्द्र कृपलानी शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ, उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, पूर्व प्रदश भाजपाा भाजपा अशोक परनामी, विधायक राज. सिन्धी अकादमी चेयरमैन हरीश राजानी, ज्ञानदेव आहूजा, तरूण रायश भाजपा -शहर अध्यक्ष संजय जैन, महापौर अशोक लाहोटी, ओंकार सिंह लखावत सहित कई विशिष्ट व्यक्ति समारोह में सम्मिलित होंगे।
सह संयोजक मोहन नानकानी ने कहा कि सिन्धु महाकुम्भ के माध्यम से सिन्धी समाज की 5 प्रमुख मांगे केन्द्र सरकार के समक्ष रखी जाएंगी जिसमें केन्द्रीय सिन्धी विश्वविद्यालय की स्थापना, दूरदर्शन पर पृथक सिन्धी चैनल, गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर सिन्धु संस्कृति की झांकी, सिन्धु सभ्यता और संस्कृति का राष्ट्रीय स्मारक तथा चेटीचण्ड पर राष्ट्रीय अवकाश जैसे बिन्दु सम्मिलित हैं।
प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल वाधवाणी ने कहा कि सिन्धुमहाकुम्भ का विशेष आकर्षण गुलाबचन्द मीरचन्दानी केद्वारा हरिसेवा सनातन मन्दिर के सहयोग से तैयार विशाल सिन्धु घाटी सभ्यता व संस्कृति पर आधारित विशाल प्रदर्शनी होगी।
प्रदेश महासचिव महेन्द्र कुमार तीर्थाणाी ने कहा कि बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। अजमेर की घनश्याम भगत एण्ड पार्टी सिन्धी संगीत प्रस्तुत करेगी।
जयपुर संभाग प्रभारी हीरालाल तोलानी ने कहा कि इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक दुर्गादास जी सह प्रान्त प्रचारक निम्बाराम, भारतीय सिन्धु सभा के मार्गदर्शक कैलाश चन्द एवं सोमकान्त जी भी उपस्थित रहेंगे। जयपुर के साथ प्रदेश से हजारों की संख्या में  सिन्धुजन सम्मेलन में भाग लैगे।

सैफरॉन की ऑन लाइन नीलामी में मेहता की काली को मिले 26.4 करोड़ रुपये

सैफरॉन की ऑन लाइन नीलामी में मेहता की काली को मिले 26.4 करोड़  रुपये

 गुरुवार 14 जून को हुई सैफरॉन आर्ट की ऑन लाइन नीलामी माइलस्टोन 200 ऑक्षन में तैयब मेहता की पेंटिंग काली को रिकार्ड कीमत 26.4 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। इस बिक्री से तैयब मेहता के नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
सैफरॉन आर्ट के को फाउण्डर और सीइओ दिनेश वजीरानी ने कहा कि, आधुनिकतावादी तैयब मेहता ने आज सैफरॉन आर्ट के समर ऑनलाइन नीलामी में 26.4 करोड़ रुपये में काली (1989) की बिक्री के साथ एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह पेंटिंग मानवीय मन की दुविधा,अच्छाई और बुराई की लड़ाई, सृजन और विनाश को लेकर अंतद्र्वद को दर्शाती है।
वजीरानी ने कहा कि, काली के खरीददार का नाम जाहिर नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा करना कम्पनी के नियम के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि, मेहता की काली ने आधुनिक भारतीय कला बिक्री में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है और भारतीय कला के लिए ऑनलाइन नीलामी के आगे का रास्ता खोला है।
जीवन का अधिकांश समय मुंबई में बिताने वाले मेहता का दो जुलाई 2009 को दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। साल 2007 में वह पद्म भूषण से नवाजे गए थे।
नीलामी में अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां
नीलामी में 85 प्रतिशत लॉट की बिक्री के साथ  75 करोड़ रुपये की राशि हासिल की गई। नीलामी में पांच अन्य कलाकारों - एन एस बेंद्रे, एम वी धुंधंधर, संको चौधरी, शीला मखीजानी और धनंजय सिंह के विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित हुए।
बेंद्रे की 1974 में बनी एक शीर्षकहीन कृति को 1.32 करोड़ रुपये मिले। जबकि इसका शुरुआती अनुमान 40-60 लाख रुपये लगाया गया था। धुरंधर जल रंग चित्रकला- ताराबाई फाउण्डर ऑफ कोल्हापुर कॉन्फीडरसी  जिसे चित्रकार ने 19 27 में चित्रित किया था को 60.98 लाख रुपये की बिक्री राशि प्राप्त हुई जबकि इसका शुरुआती अनुमान 9.9-13.2 लाख रुपये लगाया गया था।
संको चौधरी के कांस्य मूर्तिशिल्प का शुरुआती अनुमान 15-20 लाख रुपये लगाया थ जिसे बिक्री से  39.9 लाख रुपये प्राप्त हुए। और माखीजानी के चित्र व्हाट वेयर यू थिंकिंग (2007) को 14 लाख रुपये में बेचा गया जबकि इसका बिक्री अनुमाने 10-15 लाख रुपये लगाया गया था। धनंजय सिंह की 2013 में निर्मित कृति कृति द लास्ट ट्री  को 25.35 लाख रुपये, के बिक्री अनुमान की तुलना में 37.3 लाख रुपये की प्रप्ति हुई।
इनके साथ ही बिक्री के लॉट में वी एस गायतोंडे, राजा रवि वर्मा, एस एच रजा, मनजीत बावा, अकबर पदमसी और सुबोध गुप्ता जैसे नाम भी शामिल थे।    -गायत्री

शुक्रवार, 15 जून 2018

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए राजस्थान ललित कला अकादमी और कलाचर्चा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सृजनात्मक कला अभिरुचि कार्यशाला का समापन हुआ। समापन अवसर पर तैयार कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें वंचित बच्चे नजर नहीं आए।
अकादमी द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार आज 15 जून को इस कार्यशाला का समापन व प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । इस कार्यक्रम में  वरिष्ठ शिक्षाविद व प्रतिष्टित कलाकार डॉ. जय कृष्ण अग्रवाल और राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं ललित कला संकाय राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एस. मेहता मुख्य अतिथि थे। उन्होनेें  कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रतिभागियों के कलाकर्म की भूरी भूरी सराहना की। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए। पूर्व में यह शिविर कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए आयोजित किये जाने की बात कही गई थी लेकिन पहले ही दिन से शिविर से कच्ची बस्ती के बच्चेेे वंचित रहे। हालांकि कत्र्ता-धर्ताओं द्वारा शिविर में उन्हें शामिल करने के प्रयास किए जाने की बात कही गई लेकिन वे बच्चे नहीं जुट सके।
प्रदर्शनी सोमवार 18 जून को भी दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।