Artist लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Artist लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 3 जून 2018

तीजन बाई एशियाई संस्कृति पुरस्कार से होंगी सम्मानित

तीजन बाई एशियाई संस्कृति पुरस्कार से होंगी सम्मानित
चीन के फिल्म कलाकार च्या चांग-ख भी होंगे सम्मानित
मूमल डेस्कवर्क। जापान की फुकुओका एशियाई संस्कृति पुरस्कार कमेटी ने मशहूर पंडवाणी गायिका तीजन बाई का कला-संस्कृति के लिए समर्पित वर्ष 2018 एशियाई ग्रैन्ड पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चयन किया है। चीन के फिल्म कलाकार च्या चांग-ख को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। कमेटी ने दोनों कलाकारों को पुरस्कार से सममानित करने की घोषणा 30 मई को की।
तीजन के चनाव के पीछे फुकुओका की संस्कृति पुरस्कार कमेटी का कहना है कि 61 वर्षीया भारतीय गायन कलाकार तीजन बाई को महाकाव्य महाभारत गाने में उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त है। उन्हें कई बार भारतीय राष्ट्रपति और सरकार के द्वारा पुरस्कार दिया गया है। उनकी आवाज़ ने समाज की निम्न स्तरीय महिलाओं को प्रेरित किया है और इसीलिए उन्हें महिलाओं की आत्मा बताया जाता है।
कमेटी के अनुसार च्या चांग-ख 21वीं शताब्दी में चीन का सबसे श्रेष्ठ फिल्म कलाकारों में से एक है। उन्होंने अपने कलात्मक प्रदर्शन से चीन में आम आदमियों के जीवन का परिचय दिया। च्या के प्रदर्शन की चीन और विश्व के दूसरे देशों में व्यापक प्रशंसा की जा रही है।

गुरुवार, 31 मई 2018

संजय कुमार सेठी का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज

संजय कुमार सेठी का नाम इंडिया बुक ऑफ  रिकॉर्ड में दर्ज
मूमल नेटवर्क, अजमेर। लोक कला संस्थान के निदेशक व विगत 20 वर्षों से लोक कला संवर्धन के लिए समर्पित कलाकार संजय सेठी  को मांडना चित्रकारी के संरक्षण के लिए इंडिया बुक ऑफ  वल्र्ड रिकॉड्र्स में स्थान मिला है। सेठी ने लुप्त होती जा रही मांडना चित्रकारी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया और भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी होने वाले प्रथम दिवस आवरण लिफाफे को कैनवास के रूप में चुना।
संजय अभी तक ढाई हजार से अधिक  लिफाफे पर मांडना चित्रकारी से अंकित कर चुके हैं। संजय का लक्ष्य बारह हजार लिफाफों में मांडना चित्रकारी करने का है। संजय के इस लक्ष्य के पूर्ण होते ही यह भारत ही नहीं विश्व रिकार्ड बन जाएगा।
प्रथम दिवस के लिफाफे प्राप्त करने के लिए डाक विभाग की लम्बी और थका देने वाली प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है। इसके साथ ही संग्रहकर्ताओं के साथ जद्दोजहद भी करनी पड़ती है। यह थका देने वाले कार्य भी संजय के जुनून को कम नहीं कर पाया। इस जुनून के चलते ही संजय सेठी ने अपने नाम के साथ अपनी संस्था और शहर के नाम को भी इंडिया बुक ऑफ  वल्र्ड रिकॉड्र्स में दर्ज करवा दिया। उल्लेखनीय है कि इंडिया बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड से पहले जिनियस बुक आफ रिकार्ड ने भी संजय सेठी को इस अद्भुत और अनूठी पहल के लिए सम्मानित किया है।
लिफाफों के विषय
लिफाफे जिन विषयों पर आधारित है उनमें से बाल दिवस, स्व'छ भारत, योग दिवस, दादाभाई नौरोजी, संत रविदास, अठारह सौ सत्तावन का संग्राम, विश्व विख्यात असमिया गायक भूपेन हजारिका , श्रीमद राजचंद्र जी, विक्टोरिया टर्मिनस मुम्बई के सौ वर्ष, झलकारी बाई स्मारक, अकबरी किला, अजमेर का मुख्य डाकघर, सोनी जी की नसियां, मेयो कॉलेज, बारहदरी आदि उल्लेखनीय है । इन लिफाफों पर चौक, चौपड़, स्वस्तिक, मोर, पडल्या, पशु पक्षी, श्रवण कुमार, विविध आध्यात्मिक, धार्मिक प्रतीकों को मांडना चित्रकारी से सजाया गया है।

तार-तार हुआ खुद्दार कलाकार का सम्मान

तार-तार हुआ खुद्दार कलाकार का सम्मान
सुरेन्द्र पाल जोशी, कला जगत में अपनी खुद्दारी के लिए जाना-पहचाना नाम, एक ऐसा समर्पित कलाकार जिसने कला व कलाजगत के लिए अपनी  जमा-पूंजी का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी प्रचार के खर्च कर डाला। आज वह स्वाभिमानी कलाकार ललित कला अकादमी द्वारा उनकी बीमारी के चलते एक लाख रुपए का अनुदान दिए जाने के प्रचार के कारण चर्चा में है।
सुरेन्द्र पाल जोशी पिछले कुछ बरसों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन अपनी खुद्दारी के चलते कुछ निकट सम्बन्धियों के अलावा किसी को इसकी जानकारी नहीं होने दी। अपने संचित धन से इलाज कराते रहे। संचय भी इतना कि इलाज के दौरान ही उत्तराखंड में एक गैलेरी की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान करते रहे। इसी दौरान अपनी पुत्री का अच्छे स्तर पर विवाह सम्पन्न किया। पिछले कुछ महीनों में बीमारी ने जब अपना विकराल रूप दिखाया तो बड़े नामी अस्पतालों के कई-कई लाख रुपए के बिल भी चुकाए। पिछले कुछ दिनों से वे जयपुर के एक नामी अस्पताल में भर्ती हैं। जाहिर है, ऐसे हालात में तो धन्ना सेठों के खजाने भी खाली हो जाते हैं, फिर एक कलाकार तो.....
ऐसे में राजस्थान ललित कला अकादमी ने एक संवेदनशील कदम उठाते हुए सुरेन्द्र पाल जोशी की सहायता के लिए एक लाख रुपए की सहायता राशि जारी की। अकादमी के अध्यक्ष और नवनियुक्त सचिव ने जोशी के परिजनों को सहायता राशि का चैक सौंपा। यहां तक सब कुछ सामान्य और सहज था, लेकिन उसके बाद जो हुआ... वह जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे इस खुद्दार कलाकार के लिए बिलकुल असहज रहा।
कला जगत के कुछ अतिउत्साही कलाकारों ने अकादमी की इस सहायता का सामान्य से कहीं अधिक प्रचार किया। अखबारों में बड़े आकार का समाचार प्रकाशित कराया गया। उसके बाद उसे और प्रचारित करने का बीड़ा सोशल मीडिया के खिलाडिय़ों ने उठा लिया। कला जगत के जानकार कहते हैं कि अकादमी की ओर से इससे पूर्व भी अनेक अवसरों पर जरूरतमंद कलाकारों की सहायता की गई है, लेकिन इतना प्रचार पहले कभी नहीं देखा। वह तो शुक्र है कि सुरेन्द्र पाल जोशी पूरी तरह होश में नहीं हैं और सहायता के इस प्रचार से अनभिज्ञ हैं। यदि उन्हें इसका ज्ञान होता तो उनके लिए यह कष्ट कितना पीड़ादायक होता इसका अनुमान कोई भी संवेदनशील इंसान लगा सकता है।
राजस्थान के कला जगत की नयी पौध को संभवत इस स्वाभिमानी कलाकार के बारे में ज्यादा जानकारी ना हो, लेकिन इनके संगी साथी रहे मूर्धन्य कलाकार अपने साथी के स्वभाव से भली भांति परीचित हैं। असामान्य यह है कि उनके नाम भी समाचारों व तस्वीरों में शामिल हैं। अकादमी के कोष से सहायता राशि प्रदान करने वालों को श्रेय देने की होड़ में कुछ लोग क्या कर रहे हैं, वे स्वयं नहीं जानते... ईश्वर उन्हें क्षमा करे।

एक परिचय
उत्तराखण्ड में जन्में जोशी ने राजस्थान को अपनी कर्मभूमि बनाया। कला शिक्षक के रूप में कई विद्यार्थियों को अपने जीवन लक्ष्य तक पहु्रचाया। वक्त आया तो पूरी निष्ठा और समर्पणता के साथ जन्म भूमि का ऋण भी चुकाया। जोशी ने अपना कीमती समय, श्रम व धन देकर राज्य सरकार के सहयोग से देहरादून में प्रदेश की पहली आर्ट गैलेरी की स्थापना की। म्यूरलव फ्रेस्कों आर्टिस्ट के रूप में ख्यात जोशी ने इंस्टालेशन की दुनिया में भी खूब रंग जमाया।
जोशी की खास कृतियों में एक लाख सेफ्टीपिन से बना हैलीकॉप्टर, 70 हजार सेफ्टीपिन से बना हैलमेट, फिल्म स्ट्रिप से बना आर्कीटेक्चर स्ट्रेक्चर खासे चर्चित रहे हैं। अभी कुछ अर्सा पहले महंगी व भव्य काफी टेबिल बुक लांच की। जीवन भर आत्म सम्मान और ठसक जिनके चारित्रिक गुण रहे। कला जगत में जितना यश कमाया उतना ही धन भी। किसी से कभी कुछ मांगा नहीं अलबत्ता दिया जरूर।
दिसम्बर 2017 से सुरेन्द्र पाल जोशी के स्वास्थ्य की हालत नाजुक है। इसकी जानकारी उत्तराखण्ड के कलाकारों को भी है और मीडिया को भी। प्रचार से दूर वहां केवल जोशी जी के शीघ्र स्वस्थ होने की चुपचाम प्रार्थनाएं की जा रही हैं। 

रविवार, 13 मई 2018

लाखों में बिकने वाले चित्रकार की उम्र केवल चार साल

लाखों में बिकने वाले चित्रकार की उम्र केवल चार साल 
मूमल डेस्कवर्क। कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के एक चार साल के बच्चे ने अपने हुनर से सबको हैरत में डाल दिया है। अद्वैत कोलार्कर नाम के इस बच्चे ने कला की दुनिया बड़े-बड़े कलाकारों को पीछे छोड़ दिया है।  चार साल के बच्चे की पेंटिंग की बोली लाखों में लगी है। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि अद्वैत कोलार्कर इतनी खूबसूरत और कीमती पेंटिंग बना सकता है।
पुणे के रहने वाले अद्वैत का परिवार 2016 से कनाडा चला गया था। दावा है कि यह कनाडा के इतिहास में सबसे कम उम्र का चित्रकार है। अद्वैत की मां श्रुति कोलार्कर का कहना है कि अद्वैत को पेंटिंग बनाने के लिए किसी की मदद की जरूरत नहीं पड़ती है।
गैलेक्सी, डायनासोर और ड्रैगन की पेंटिंग बनाना उसे सबसे ज्यादा पसंद है। हाल में कनाडा के सेंट आर्ट सेंटर में उसकी पेंटिंग की प्रदर्शनी हुई थी। इसमें उसकी कलाकृतियां एक लाख रुपये तक में बिकीं।
पिछले महीने उसकी पेंटिंग न्यूयार्क के आर्ट एक्सपो में भी दिखाई गई थी। वहां भी उसकी एक पेंटिंग एक लाख तीस हजार रुपये में बिकी। श्रुति का कहना है कि जब अद्वैत एक साल का था, तभी से उसने हाथ में ब्रश पकड़ लिया था।
वह ब्रश और रंगों के जरिए कुछ न कुछ बनाया करता था। धीरे-धीरे उसने इसमें महारत हासिल कर ली। पेंटिंग बनाने के दौरान वह केवल सिर्फ रंगों से खेलता ही नहीं था बल्कि, उसमें रंगों को सही तरीके से भरने की भी समझ थी।उल्लेखनीय है कि, श्रुति भी एक व्यावसायिक चित्रकार हैं।

रविवार, 8 अप्रैल 2018

दुनिया के सबसे महंगे कलाकार पिकासो



पुण्यतिथि विशेष
दुनिया के सबसे महंगे कलाकार पिकासो
पिकासो की कई पेंटिंग्स की कीमत आज की तारीख में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है
पिकासो यानि कला जगत के आदि पुरुष जिसके चित्रण के प्रभाव से सूजा व हुसैन जैसे महान कलाकार भी अपनी कूचि को सुरक्षित नहीं रख पाए। बीसवीं शताब्दी के सबसे अधिक चर्चित, विवादास्पद और समृद्ध कलाकार थे। उन्होंने तीक्ष्ण रेखाओं का प्रयोग करके घनवाद को जन्म दिया। पिकासो की कलाकृतियां मानव वेदना का जीवित दस्तावेज हैं। आज इसी महान कलाकार की 45वीं पुण्यतिथि है।

पिकासो उन पेंटर्स में से है जिनका दस्तखत किया हुआ एक कैनवास भी किसी को करोड़पति बना सकता है। ज्यादातर लोगों को आश्चर्य होता है कि आखिर क्यों पिकासो के बनाए 'कुछ भी' की कीमत करोड़ों में होती है।
पिकासो के काम की सबसे ज्यादा कीमत उनके पेंटिंग को दिए गए नए आयाम के चलते है। पिकासो ने कम से कम रेखाओं में स्ट्रक्चर बनाना सीखा। दो तीन लाइनों में बने उनके चित्रांकन से ही समझ आ जाता था कि किसकी बात की गई है। उनकी इस शैली को उनके बाद से लगभग दुनिया भर के पेंटर फालो कर रहे हैं। जिनमें भारत के महान चित्रकार भी शामिल हैं। सूजा और हुसैन जैसे भारतीय कलाकारों के कुछ चित्रों में भी पिकासों के बनाए चित्रों की छवि स्पष्ट नजर आती है। कला की दुनिया में किसी की महानता उसके रूपक से तय होती है। पिकासो महानता की उसी स्थिति तक जा पहुंचे थे।
एक बार की बात है मशहूर पेंटर पाब्लो पिकासो कहीं गए। एक महिला ने उनसे कोई पेंटिंग बनाने की गुजारिश की। पिकासो ने वहां मौजूद चीजों से कुछ बनाया और नीचे अपने दस्तखत कर दिए। महिला कुछ 'शानदार पेंटिंग'  की उम्मीद कर रही थी। जबकि पिकासो ने तीखी लकीरों से कुछ बना दिया था। बहरहाल बाद में महिला ने वो पेंटिंग किसी विशेषज्ञ को दिखाई तो वो कलेक्टर उसे इसकी भारी कीमत देने को तैयार हो गया।
अपने चित्रों में नीले रंग का खूब इस्तेमाल करने वाले पिकासो ने घनवाद (क्यूबिज्म) की शुरुआत की। सात साल की उम्र से पेंटिंग की ट्रेनिंग लेने वाले पिकासो को मॉर्डन आर्ट पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालने वाले तीन पेंटरों (पाब्लो पिकासो, हेनरी मेटीस और मार्शल डशहैंप) में प्रमुख माना जाता है।
पिकासो एक साथ कई चित्रों पर काम करते थे। उम्र के हर दशक में उनके प्रेम संबंधों की चर्चाएं आम रहती थीं। इन्याय को सहना उनकी आदत में शामिल नहीं था। 1937 में नाजी बमवर्षकों की खिलाफत करने के एवज में उन्होंने स्वेच्छा से देश निकाला स्वीकार किया था। मनमौजी ऐसे कि उन्होंने अमीरों से अपने चित्रों के लिए अथाह पैसा वसूल किया। वहीं कला के कद्रदानों, संग्राहलयों और आर्ट को समझने वालों को अपने चित्र मुफ्त में दिए। कहते हैं कि दुनिया में पिकासो ने जितना पैसा कला से कमाया, उतना कोई और आज तक कला या साहित्य की रॉयल्टी से नहीं कमा सका है। इस महान कलाकार का निधन 8 अप्रेल 1973 में हुआ।

शनिवार, 17 मार्च 2018

आज जयपुर की आर्टिस्ट सविता शर्मा होंगी दिल्ली में सम्मानित

आज जयपुर की आर्टिस्ट सविता शर्मा होंगी दिल्ली में सम्मानित
मूमल नेटवर्क, जयपुर। स्थापना कला (इंस्टालेशन) के विशिष्ट सृजन के लिए आर्टिस्ट सविता शर्मा को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, दिल्ली में हो रहे सातवें एशियाड लिटरेचर फेस्टिवल 2018 में वीमेन इंटरप्रेन्योर अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। आज शाम सात बजे इण्डिया इण्टरनेशनल सेन्टर में चार अन्य महिला इंटरप्रेन्योस्र के साथ अवार्ड दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि, जयपुर आर्ट समिट 2017 में सविता शर्मा ने फाइबर माध्यम में पिंड से ब्रह्माण्ड तक रूप लेती सर्जना की थी। उन्होंने उस यात्रा के अनेक पहलुओं को एक 30 फीट ऊँचे विशाल अण्डवृत्त के भीतर खड़े अर्धनारीश्वर के ऊपर खिलते हुए कमल की पंखुडिय़ों पर पंचतत्वों की फोटो की पेंटिंग्स बनाकर अपनी कलाकृति में दिखायाथा। इसके साथ ही स्त्री मन की उन तमाम सामाजिक बुनावटो की सलवटों के विभिन्न पक्षों को बड़े ही करीने से उसमें वास करते अमूर्त भाव को मूर्त रूप दिया था।
सविता ने जयपुर ज्वेलरी शो 2017 के दौरान कमल को एक बार फिर सुंदरता और मानवीय गुणों का प्रतीक बनाया। उन्होंने कमल की आठ पंखुडिय़ां से मानव जीवन के आठ गुण यानि दया, शांति, पवित्रता, मंगल, निस्पृहता, सरलता, ईष्र्या का अभाव और उदारता का समायोजन अपने इंस्टालेशन में करते हुए समाज के लिए शांति और सुंदरता का सन्देश दिया।
अभी हाल ही में संपन्न हुए सांभर फेस्टिवल 2018 में सविता ने अपने इंस्टालेशन में कमल के फूल को योग और अध्यात्म में एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके इंस्टालेशन में योगिक शब्दावली की तरह बोध व अवबोधन के अलग-अलग पहलुओं को कमल के तरह-तरह के फृलों से तुलना की गई है एवं शरीर के सात मूल चक्रों के लिए कमल के सात तरह के फूलों को प्रतीक चिह्न बनाकर मानवीय जीवन में स्वच्छता और सुंदरता के प्रति सन्देश दिया।

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग में कलाकार अब स्वयं कर सकते हैं अपना पंजीकरण

कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग में 
कलाकार अब स्वयं कर सकते हैं अपना पंजीकरण
मूमल नेटवर्क, चंडीगढ़। हरियाणा के कलाकार कला व संस्कृति विभाग में अब अपना पंजीकरण स्वयं ऑनलाईन कर सकते हैं। कलाकारों को सम्मान के साथ पहचान देने व राज्य की कला एवं संस्कृति के पुनरूत्थान के उद्देश्य से सरकार यह योजना लाई है। गायन, वादन, नृत्य, चित्रकला, मूर्तिकला, रंगमंच, फाोटोग्राफी, कार्टून कल्प, रेखाचित्र इत्यादि से सम्बन्धित सभी विधाओं में निपुण कलाकार, चाहें वह एकल हो या समूह में अपना पंजीकरण स्वयं कर सकता है। इन कलाकारों के साथ लोक कलाकारों को भी हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग पंजीकरण करवाने के लिए कहा है। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, धीरा खण्डेलवाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी तथा प्रफोर्मा प्राप्त करने के लिए ई-मेलartandculturalaffairshry@gmail.com पर या दूरभाष 0172-5059158, 5059156, 5059155 अथवा सीधे कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा एस.सी.ओ. 29, द्वितीय तल, सेक्टर-7 सी, मध्यमार्ग चण्डीगढ़ में सम्पर्क कर सकते है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 मार्च, 2018 है। 

शनिवार, 2 दिसंबर 2017

अमित राजवंशी-नारी चित्रण से फंतासी तक

अमित राजवंशी-नारी चित्रण से फंतासी तक
इंदौर में जन्में अमित राजवंशी की शिक्षा व कर्मस्थली बनी राजस्थान की मरुभूमि। चित्रकार के रूप में अमित ने अपने चित्रण का केन्द्रबिंदु नारी को बनाया और नारी चित्रण के लिए ही आज उनकी विशेष पहचान है। अमित के चित्रों की नारियां एक लयात्मक गति के साथ सामने आती हैं। संभवत लयात्मकता के चलते ही चित्रों में अमित ने नारी के सहभागी के रूप में पहले मछली, मोर और फिर घोड़े को उसका संगी बनाया।
 
वस्त्रहीन नारी चित्रण के चलते कई विरोध झेल चुके अमित का कहना है कि मेरा चित्रण अश्लील नहीं अपितु नारी की सामाजिक व मानसिक स्थिति का प्रतिबिंब है। सबसे पहले उन्हें 'साइको' सीरीज ने मशहुर किया जिसमें उन्होने नारी की विक्षिप्त अवस्था की दयनीयता और ऐसी अवस्था में भी समाज की उस देह के प्रति लोलुपता को दर्शाया।  इसके बाद अमित की नारी में कहीं सबलता दिखी तो कहीं बेचारगी, कहीं कमसिनता दिखी तो कहीं कामुकता। परन्तु चित्रण का भाव व रेखाएं लयात्मक रहीं।
कहतें हैं समय और स्थितियां मन के भाव को बदलने में सक्षम होती हैं। कुछ ऐसा ही अमित के मनोभावों के साथ हुआ। बदलते समय ने उन्हें यह एहसास करवाया कि कहीं ना कहीं चित्रण को लेकर वो एक ही घेरे में बंध रहे हैं या टाईप्ड हो रहे हैं। 
मन में बदलाव की लहर ने पूरी सजगता के साथ तब अंगड़ाई ली जब उनका चयन महिला महाविद्यालय में व्याख्याता के रूप में हुआ। अपनी छात्राओं के बीच अपने अन्दर के चित्रकार को सुलझाते हुए और सामाजिक सरोकारों के अनुसार प्रस्तुत करने की प्रबलता ने उनकी चित्रण शैली को बिल्कुल ही बदल डाला। रेखाओं की लयात्मकता कोणात्मक हो गई। विषय का चयन जो केवल नारी पर केन्द्रित था बहुआयामी हो गया। सबसे खास बात रही चित्रण की सरलता और रोचकता। अभी हाल ही में जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में लगी अमित की सोलो एग्जीबीशन के कोणात्मक चित्र खासे पसन्द किये गए। भविष्य में अमित की योजना कैनवास चित्रण के साथ स्कलपचर्स की बुनावट और इंस्टॉलेशन के विशेष गठन के प्रति झुकाव लिये नजर आ रही है। अमित का कला सफर कला प्रेमियों को इस कलाकार के मनोभावों के कई अन्य रोचक पहलुओं से रू-ब-रू करवाने वाला है, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
आगामी 5 व 6 दिसम्बर को राजस्थान के अजमेर नगर में मूमल व शुभदा संस्था के संयुक्त तत्वावधान में अमित राजवंशी के चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। प्रतिष्ठित अजमेर क्लब के प्रांगण में होने वाली इस चित्र प्रदर्शनी के दौरान अमित राजवंशी नगर के गणमान्य लोगों की उपस्थिाति में अपनी कला का जीवन्त प्रदर्शन भी करेंगे।
                                                                                                 -गाायत्री

सोमवार, 25 सितंबर 2017

परिवार को ढालते हैं अपनी कृतियों में आर्टिस्ट दास

परिवार को ढालते हैं अपनी कृतियों में आर्टिस्ट दास
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आर्टिस्ट एच. आर. दास की पेंटिंग्स व स्कलपचर्स से सजी सोलो एग्जीबिशन कल आईसीए गैलेरी में शुरू हुई। एक माह तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथी सुधीर कासलीवाल ने किया।

आर्टिस्ट ने अपनी कृतियों के बारे में बताते हुए कहा हकि विवाह से पहले मैं अकेवल बैलों को चित्रित करता था। अब विवाह पश्चात मैनें अपनी कृतियों में गाय व बछड़े को शामिल करके परिवार की संज्ञा को पूर्ण किया है। दास की इस प्रदर्शनी में 25 पेंटिंग्स व कुछ स्कलपचर्स सजाए गए हैं। दास की बनाई कृतियों में रंगों का समायोजन उनके रूपाकारों को प्रभावशाली बनाता है।

शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

कला शिक्षक डॉ. नोगेन्द्र नरूका हुए सम्मानित

कला शिक्षक डॉ. नोगेन्द्र नरूका हुए सम्मानित
मूक-बधिर विद्यार्थियों को कला के प्रति प्रेरित करने के लिए मिला सम्मान
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजकीय सेठ आनन्दी लाल पोद्दार मूक बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के चित्रकला व्याख्याता व प्रभारी डॉ. योगेन्द्र सिंह नरूका को राष्टद्यीय स्तर के सम्मान से सम्मानित किया गया है।  यह सम्मान उन्हें  मूक-बधिर विद्यार्थियों को कला के प्रति प्रेरित व प्रोत्साहित करने के लिए मिला है।  ऐसोसिएशन ऑफ  स्पेशल एजूकेटर्स एण्ड अलाईड प्रोफेशनल्स, ऐसोसिएशन ऑफ  डिसेबल्ड पीपुल एवं पैरा स्पोटर्स फाउन्डेशन द्वारा फर्स्ट इंटरनेशनल एक्सीलेन्सी अवॉर्डस 2017 के रूप में डॉ नरूका को सम्मान मिला है। 23 अगस्त को इण्डिया इंटरनेशनल सेन्टर, नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में केन्द्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावर चन्द गहलोत व ऐसोसिएशन ऑफ  स्पेशल एजूकेटर्स एण्ड अलाईड प्रोफेशनल्स के सचिव हेक्टर रविन्द्र दक्ष ने उन्हें सम्मानित किया।  डॉ. नरूका द्वारा यह सम्मान प्राप्त करने पर राजकीय सेठ आनन्दी लाल पोद्दार मूक बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य मह ेश वाधवानी, अभिभावक संघ के सचिव  योगेन्द्र जोशी, उपाध्यक्ष निमिता देवजानी, कोषाध्यक्ष मीना अरोड़ा ने इनका अभिनन्दन किया।


बुधवार, 23 अगस्त 2017

'अननोन्स-2'

 'अननोन्स-2' में युवा कृतिकारों के प्रदर्शन का 
आज अन्तिम दिवस
मूमल नेटवर्क, अमृतसर। इण्डियन अकेडमी ऑफ फाईन आर्टस की कला दीर्घा में भारत के 13 युवा कलाकारों की कृतियों से सजी प्रदर्शनी 'अननोन्स-2' में सजी कलाकृतियां दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। आज प्रदर्शनी का समापन है।
इस प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न हिस्सों में बसे 13 युवा कलाकारों की कल्पना व सोच को साकार करती कृतियां प्रदर्शित हैं। प्रदर्शनी में राजस्थान के चन्द्रप्रकाश जैन की गुहा चित्रशैली पर आधारित कृतियों में इंसानो की जानवरों के प्रति क्रूरता तथा पशुवत आचरण के प्रति बढ़ते इंसानों का बाखूबी चित्रण किया गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय से कला शिक्षा की प्राप्ति के बाद विश्व प्रसिद्ध शांति निकेतन से इन्होने ग्राफिक आर्ट में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।

प्रिंट वर्क, वुड प्रिंट तथा एचिंग में बेहतर चित्रण के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखण्ड निवासी अत्रि चेतन शांति निकेतन में एमएफए की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इनके चित्रों में मानव व उसकी आधुनिकता की जड़ों में अभिव्यक्त होती परम्पराओं की छवि सोचने को मजबूर करती है।

दिल्ली के आयुष बंसल के ज्यामितिक आकारों से सजे चित्रों में मानवीय मूल्यों का दर्शन होता है। आयुष उड़ीसा के बालासोर कॉलेज ऑफ आर्ट से बीवीए कर रहे हैं साथ ही सुभारती विश्वविद्यालय मेंरठ से कला परास्नातक की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

उड़ीसा के पट पेंटिंग की प्रयोगवादी शैली को स्पष्ट करते हैं उत्तर प्रदेश निवासीे मयंक सैनी के चित्र। इनके चित्रों में धार्मिक भाव के साथ रंगों की गहराई भी है।

उड़ीसा की अजमीरा खातून के चित्रों में स्त्री की छटपटाहट और उडऩे की ललक दोनों का बाखूबी चित्रण किया गया है।

उड़ीसा की भाग्यश्री बेहरा के चित्रों में कोमल रंगों की आभा उनके व्यक्तित्व की सौम्यता को दर्शाती हैं। स्त्री भावों का चित्रण इनका प्रिय विषय है।

सीतू के नाम से पहचाने जाने वाले उड़ीसा के समरेन्द्र बेहरा यूनिवर्सिटी ऑफ कल्चर भुवनेश्वर में एमवीए के छात्र हैं। इस प्रदर्शनी में उनकी कृतियां बाल मजदूरी से पीडि़त बच्चों की व्यथा का मार्मिक चित्रण कर रही हैं।

कॉलेज ऑफ आर्ट कलकोत्ता में एमएफए के विद्यार्थी तथा उड़ीसा निवासी संजय राऊल की वेस्ट लोहे से बना शिल्प 'गैंग' उनकी कल्पना शक्ति को दर्शाता है।

उड़ीसा की कला शिक्षिका श्रावन्ती मिश्रा के चित्रों में अति यथार्थवाद के साथ स्वपन संसार का सजीलापन सजा है।

उड़ीसा के बालासोर कॉलेज ऑफ आर्ट में एमएफए की छात्रा श्राबनी मोहन्ती के चित्रण का विषय कुछ हटकर है। इन्हें बुर्जुर्गों के अनुभव से भरे झुर्रियों भरे चेहरों को चित्रित करना पसन्द है।

आसनसोल पश्चिम बंगाल के संदीप देव के पेंसिल से बनाए चित्रों में जहां बारीकी नजर आती है वहीं उनका धेर्य भी लुभाता है।

 पश्चिम बंगाल के हरितिमा से लदे गांव पानी पारुल निवासी देबब्रत मण्डल के चित्रों में जीवन की उथल-पुथल के साथ सहजता सहज ही आकर्षित करती है। एक्रलिक रंगों के माध्यम से बनी कुम्हार के चाक पर बनती मिट्टी की कृति और उसके साथ का घर्षण जीवन के झंझावतों को स्पष्ट करती है।

पश्चिम बंगाल के सीमान्त पाउल का वॉटर कलर में खासा दखल है। वाटर कलर से बनाए उनके लैण्ड स्केप में बिखरी रंगों की छटा सहज ही आकर्षित करती है।

सोमवार, 31 जुलाई 2017

जयपुर के आर्ट फेस्टिवल 14 बड़े नामों के साथ 40 नवांकुर भी

जयपुर के आर्ट फेस्टिवल 14 बड़े नामों के साथ 40 नवांकुर भी

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी परिसर में चल रहे तीन दिवसीय जयपुर विजुअल आर्ट फेस्टिवल का समापन चित्र प्रदर्शनी के साथ हुआ। फेस्टिवल के दौरान वर्कशॉप में बनाई गई कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन कल शाम 5 बजे जवाहर कला केन्द्र की चतुर्दिक कला दीर्घा  में  किया गया। सीडलिंग अंतर्राष्ट्रीय अकादमी की  प्राचार्य ज्योति मेल्होत्रा एवं उप प्राचार्या विनीता वोहरा के साथ फेस्टिवल के निर्देशक प्रोफेसर  चिन्मय मेहता ने द्धीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्सव का हिस्सा बने देश के विभिन्न प्रांतो से आये 8 समसामयिक तथा 6 पारम्परिक चित्रकारो को सम्मानित किया गया।वरिष्ठ चित्रकारों की कृतियों के साथ उत्सव में भाग लेने वाले 40  स्कूली  छात्रों के चित्रों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया।
प्रदर्शित चित्रों में से जहां एक ओर गोंड चित्रकार छोटी बाई तथा महाराष्ट्र के वरली चित्र शैली के अनिल वांगडने के साथ अन्य लोक शैली के चित्रों ने लुभाया वहीं समसामयिक चित्रकारी में नागपुर के विजय बिस्वाल, मुंबई के जॉन डोग्लॉस ,जबलपुर के ब्रिज मोहन आर्य, मेहसाणा की सुनीता डिंडा एवं शार्दुल कदम के चित्रों  ने दर्शको को खासा आकर्षित किया। उल्लेखनीय है कि इस उत्सव का आयोजन जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी एवं सीडलिंग अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में रचा गया था।