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शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

कनॉट प्लेस के जनपथ सबवे में सजी है कला प्रदर्शनी

कनॉट प्लेस के जनपथ सबवे में सजी है कला प्रदर्शनी
'विजय की उत्कृष्ट कृतियां हमारा राष्ट्रीय गौरव ' प्रदर्शनी में 
42 समकालीन कलाकारों की कृतियां
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। एनडीएमसी ने अपने क्षेत्र में कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वतंत्रता दिवस की 72वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देश के 42 समकालीन कलाकारों की एक सामूहिक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया है। कनॉट प्लेस के बाहरी सर्कल स्थित जनपथ भूमिगत पारपथ (सबवे) में यह प्रदर्शनी लगाई गई है। दो भागों में आयोजित इस प्रदर्शनी के पहले प्रदर्शन का उद्घाटन 30 जुलाई को हुआ। यह प्रदर्शनी आठ अगस्त तक चलेगी। प्रदर्शनी का दूसरा भाग 10 से 27 अगस्त तक प्रदर्शित होगा।
एनडीएमसी के अध्यक्ष नरेश कुमार ने इस कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस कला प्रदर्शनी को विजय की उत्कृष्ट कृतियां हमारा राष्ट्रीय गौरव शीर्षक दिया गया है। इस अवसर पर कलाकारों को संबोधित करते हुए नरेश कुमार ने कहा कि महानगर की दौड़-भाग वाली दिनचर्या के तनाव से यहॉं के नागरिकों को राहत दिलाने और उनकी जिदंगी में खुशहाली लाने के उद्देश्य से पालिका परिषद् द्वारा ऐसे कलाऔर संस्कृति के आयोजन किया जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य कला एवं संस्कृति को कलादीर्घाओं, संग्रहालयों और सभागारों से बाहर निकाल कर सार्वजनिक स्थानों पर जन-साधारण को सुलभ कराना है, जिससे वें इनमें भाग लेने के साथ-साथ इनका आनंद भी उठा सकें।
नरेश कुमार ने कहा कि, इसी श्रृंखला में पालिका परिषद् सामूहिक कला प्रर्दशनी के माध्यम से चित्रकारी, मूर्तिकला, गॅ्राफिक्स इत्यादि विषयों को जन-साधारण के सम्मुख लाने का प्रयास पिछले तीन वर्षों से इस सबवे में कर रहा है।
इस प्रदर्शनी में सुविख्यात कलाकारों के साथ-साथ, नवोदित कलाकारों को भी मौका दिया गया है, जिससे कि वें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। पालिका परिषद् के अध्यक्ष ने बताया कि यह कला प्रदर्शनी भारत के उन वरिष्ठ और मध्यवय के कलाकारों की उत्कृष्ट कृतियों की झांकी है, जो अपनी विशिष्ट कला शैली में निरन्तर कार्यरत है और भारतीय कला परिदृश्य में अपनी कला के लिए पहले से महत्वपूर्ण योगदान के लिए जानेमाने चेहरे हंै, इस प्रदर्शनी को किशोर लाबर के सहयोग से लगाया गया है।
पालिका अध्यक्ष ने कहा कि यहॉं उन समकालीन कलाकारों की महत्वपूर्ण विशिष्ट कलाकृतियों की एक झलक भर है, जिन्होंने अपनी वर्ष-दर-वर्ष की गई कड़ी 'कला-साधनाÓ से अनेक प्रभावी विधाओं, वस्तुओं और तकनीकों को खोजा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन कलाकारों ने अपने कलाकर्म की निरन्तर यात्रा में नित्य नये प्रयोगों से निकली अद्भूत कृतियों को चित्रकला, मूर्तिकला, रेखांकन और स्थापत्यता के रूपों में समय पर प्रस्तुत तथा प्रदर्शित किया है।

शनिवार, 5 मई 2018

कला चर्चा समूह आयोजित प्रदर्शनी 7 मई से

कला चर्चा समूह आयोजित प्रदर्शनी 7 मई से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कला चर्चा समूह  अपने सदस्य कलाकारों की कृतियों को 7 मई से जेकेके में प्रदर्शित करेगा। इन्फयूजन नाम की इस प्रदर्शनी का उद्घाटन सात मई को शाम पांच बजे राजस्थान ललित कला अकादमी अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम.दलवी करेंगे। राष्ट्रीय स्तर की इस कला प्रदर्शनी में समूह के 34 कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। प्रदर्शनी का समापन 10 मई को होगा।

मंगलवार, 20 मार्च 2018

स्वपन के लिये प्रतीक्षा नहीं

स्वपन के लिये प्रतीक्षा नहीं
मूमल नेटवर्क, मुूबई।  जयपुर के युवा चित्रकार अमित हारित के चित्रों की आठवीं एकल कला प्रदर्शनी कॉन्ट वेट फॉर ड्रीम्स कल से जंहागीर आर्ट गैलेरी में सज गई है। प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार व लेखक अखिलेश ने किया ।
अमित के चित्रों के बारे में अखिलेश ने कहा कि अमित हारित एक ऐसे संजीदा चित्रकार हैं जिनकी रचनात्मकता का उभार उनके चित्रों में स्वप्नों के सफल होने की पूरी संभावना के साथ अभिव्यक्त होता है। वह एक सधे हुये कलाकार की तरह अपने स्वप्निल-संसार को मनचाहे आकारों और रंगों में चित्रित करने के प्रति सचेत दिखते हैं।
कहा जाता है कि स्वप्न प्राय: गहन निद्रा में दिखाई देते हैं जब व्यक्ति अपनी देह से बाहर की आत्म-यात्रा करते हुये भी वास्तविकता की प्रतीति करता है । अमित अपने इन चित्रों में उस अदृश्य को दृश्यमान तथा अनुपस्थित को उपस्थित करने में समर्थ लगते हैं जो उनके स्वप्न-संसार में दिखाई देता है।
अखिलेश ने कहा कि, अनेक लोग उस अवचेतन-अचेतन के अदृश्य और अनुपस्थित का आभ्यांतरीकरण करने हेतु प्रयत्नशील रहे हैं किन्तु वान गॉग की तरह बहुत कम लोग उसे अभिव्यक्त करने में सफल हो पाये हैं और मैं कहना चाहता हूँ कि वान गॉग और अमित के बीच इसके अतिरिक्त कोई स्पष्ट सम्बन्ध नहीं है कि वे दोनों ही चित्रकार हैं किन्तु वान गॉग जहाँ अपने स्वप्नों को चित्रित करते हैं वहीं अमित हारित अपना स्वप्न-संसार स्वयं रचते हैं।
यह प्रदर्शनी 25 मार्च तक चलेगी।

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

कलाकृतियों में दिखे युवा कलाकारों के प्रयोग

कलाकृतियों में दिखे युवा कलाकारों के प्रयोग
सात प्रदेशों के कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित
मूमल नेटवर्क, इलाहबाद।
आज कलाकार केवल कारीगर की तरह कार्य नही करना चाहता। वह निरंतर अपनी कृतियों में नए प्रयोग करता है। अपने विचारों को नित नए व आधुनिक माध्यमो के द्वारा नवीन रूप प्रदान कर रहा है। एक दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक की भांति कार्य करने का विचार करता है। अपने जीवन दर्शन को निर्धारित करता है। वह केवल परंपरा का सहारा नही लेना चाहता अपितु अपने बुद्धि, विवेक के और अनुसंधान के बल पर कार्य करना चाहता है। इसी लिए आधुनिक कला के नए-नए रूप सामने आ रहे हैं।
निश्चित रूप से यह विचार उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र के महात्मा गांधी कला वीथिका में चल रही प्रर्दशनी को देखकर दर्शकों के मानस में आ रहे होंगे। सात प्रदेशों के कलाकारों की कृतियों से सजी तीन दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन कल इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक सुनील गुप्ता ने किया। प्रदर्शनी में 48 कलाकारों की 55 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
प्रदर्शनी में शामिल प्रदेश
इस प्रदर्शनी में सात प्रदेशों दिल्ली, कोलकाता, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और असम।
यह हैं कलाकार
अदिति सक्सेना, अच्युतानंद मिश्र, अजित कुमार, अक्षय सिंह, अम्बरीष मिश्र, अनिल कुर्मी, अंकित सिंह, बैशालिक धारा, भानु श्रीवास्तव, बृज मोहन आर्या, भूपेंद्र कुमार अस्थाना, धर्मेन्द्र कुमार, दिलीप कुमार पटेल, धीरज यादव, फरहान अली, गिरजा शंकर नेतम, जगजीत रॉय, जलज यादव, जिज्ञाषा मिंज, कौस्तुभ पांडेय, मनीष तामारकर, मोनिका भारती, डॉ नीता श्रीवास्तव, पूनम नागू, प्रदीप कुमार, प्रशांत पॉल, प्रीति सिंह, प्रियंका शाह, प्रमोद बरुआ, राहुल उषाहरा, राजेश सिंह, रंजन सिंह, रंजीता मौर्य, रश्मि सिंह, रवि अग्रहरि, रवि सोनी, रोहित सिंह, साक्षी केसरवानी, शनी केसरी, शुभम वर्मा, सिमरन नुरूला, सुनील काली, सुशील पाल, त्रिभुवन कुमार, वंछा दीक्षित, विवेक जायसवाल तथा युगल किशोर मंडावी।
प्रदर्शनी का समापन कल 19 फरवरी को होगा।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

अकादमी दीर्घा में प्रदर्शित संदीप कुमार मेघवाल की मिस्टिक कला

अकादमी दीर्घा में प्रदर्शित संदीप कुमार मेघवाल की मिस्टिक कला 
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। उदयपुर, राजस्थान के युवा आर्टिस्ट संदीप कुमार मेघवाल के 25 चित्रों की मिस्टिक कला प्रदर्शनी ललित कला अकादमी दीर्घा न. 1 में सजी हुई है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 13 फरवरी को  अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट़टी ने किया।
संदीप ने प्रदर्शनी में कैनवास पेंटिग, ग्राफिक्स, चारकोल व ड्राइंग विधाओं में उिकेरे गए चित्रों को प्रदर्शित किया है। अपने चित्रों के बारे में संदीप कहते हैं कि, मेरे चित्रों में अमूर्तन के साथ ग्रामीण लोक आदिवासी तत्वों की खुशबु आती हैं। मैं अपने मौलिक तकनीक एवं प्रयोग से नव रूपाकारो के प्रतिमान स्थापित करता हूं। मेरी कला नवीन प्रयोग के साथ बहती है जो लोक आदिवासी तत्वों के समाहार पर आधारित हैं। क्यूंकि मेनें आदिवासी जीवन को बहुत करीब से देखा हैं, इसलिए मेरे चित्रों में उसी की झलक है।
उल्लेखनीय है कि, कला क्षेत्र में सृजन करते हुए संदीप कई पुरस्कारों के साथ अन्तराष्ट्रीय, राष्ट्रिय, राज्य स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। देश.विदेश में आयोजित कई प्रदर्शनियों में वह अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

दिवंगत कलाकारों की कृतियों से आबाद होगी अकादमी दीर्घा

दिवंगत कलाकारों की कृतियों से आबाद होगी अकादमी दीर्घा
प्रति माह अलग-अलग कलाकारों की कृतियां होगी प्रदर्शित
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी में अब प्रति माह सप्ताह भर की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में हर महीने अलग-अलग दिवंगत कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित होंगी।
अकादमी अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम. दलवी से हुई बातचीत में उन्होने मूमल को अकादमी द्वारा आयोजित किये जाने वाले नये कार्यक्रमों के बारे में बताते हुए कहा कि, अकादमी में नियमित कला सेमीनार आयोजित होगे। दिवंगत कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन प्रति माह एक सप्ताह के लिए किया जाएगा। प्रदेश के दिवंगत कलाकारों को श्रृंदाजलि देते हुए वर्तमान में दिल्ली में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले में भी उनकी कृतियों को प्रदर्शित किया गया है।
अपनी योजनाओं को साकार करने के लिए अकादमी द्वारा तैयारियां की जा रही हैं। इन प्रदर्शनियों से जहां एक ओर अकादमी की दीर्घाएं आबाद होंगी वहीं अकादमी का संग्रह नियमित रूप से कला प्रेमी देख पाएंगे।

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

'ख्वाब अभी जिन्दा हैं...में दिखे अध्यात्म के रंग उड़ान में नजर आई सपनों की हकीकत


'ख्वाब अभी जिन्दा हैं...में दिखे अध्यात्म के रंग
उड़ान में नजर आई सपनों की हकीकत
आज शुरु हुई तस्लीमा व राजवंशी की सोलो प्रदर्शनी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आज दोपहर को अमित राजवंशी की सोलो प्रदर्शनी 'ख्वाब अभी जिन्दा हैं... तथा तस्लीम जमाल की 'उड़ान का उद्घाटन हुआ। दोनों प्रदर्शनियों के मुख्य अतिथि के रूप में महाराजा मानसिंह द्वितीय संग्राहलय के निदेशक यूनुस खीमानी ने उद्घाटन किया। जवाहर कला केन्द्र की परिजात 2 गैलेरी में प्रदर्शित राजवंशी की प्रदर्शनी 'ख्वाब अभी जिन्दा हैं...' में लगभग 30 चित्र प्रदर्शित किये गए हैं। इनमें विष्णु व कृष्ण के अध्यात्म से जुड़े चित्रों के साथ समकालीन विषय पर बने चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में अमित के काम का नया अन्दाज देखने को मिला। इस प्रदर्शनी को राजवंशी ने अपने पिता तेजभान राजवंशी को समर्पित किया है।

राजवंशी के साथ ही बांसवाड़ा की तसलीम जमाल की परिजात 1 में प्रदर्शित प्रदर्शनी 'उड़ान' में तस्लीम के सपनों में ईमानदारी के रंग नजर आये। लगभग 50 चित्र प्रदर्शित किये गए हैं। जिसमें से 30 चित्रों की ब्लेक एण्ड व्हाइट श्रृंखला के ड्रीमलैण्ड है जबकि 20 चित्र माई विलेज श्रृंखला से हैं। अपने सपनों को कैनवास पर चित्रित करते हुए कलाकार ने अर्धचेतन मस्तिष्क में आने वाले विचारों की सजीवता का पूरा ध्यान रखा है।
पहले दिन ही वरिष्ठ कलाकारों के साथ कई सममनित जनों ने प्रदर्शनियों का अवलोकन कर कृतियों की सराहना की। वरिष्ठ आर्टिस्ट विद्वासागर उपाध्याय व मीनू श्रीवास्तव ने मुक्त कण्ठ से दोनों कलाकारों की कृतियों की प्रशंसा की और उन्हें कलाकर्म के महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए। दोनों प्रदर्शनियां 23 नवम्बर तक चलेगी।

बुधवार, 23 अगस्त 2017

'अननोन्स-2'

 'अननोन्स-2' में युवा कृतिकारों के प्रदर्शन का 
आज अन्तिम दिवस
मूमल नेटवर्क, अमृतसर। इण्डियन अकेडमी ऑफ फाईन आर्टस की कला दीर्घा में भारत के 13 युवा कलाकारों की कृतियों से सजी प्रदर्शनी 'अननोन्स-2' में सजी कलाकृतियां दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। आज प्रदर्शनी का समापन है।
इस प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न हिस्सों में बसे 13 युवा कलाकारों की कल्पना व सोच को साकार करती कृतियां प्रदर्शित हैं। प्रदर्शनी में राजस्थान के चन्द्रप्रकाश जैन की गुहा चित्रशैली पर आधारित कृतियों में इंसानो की जानवरों के प्रति क्रूरता तथा पशुवत आचरण के प्रति बढ़ते इंसानों का बाखूबी चित्रण किया गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय से कला शिक्षा की प्राप्ति के बाद विश्व प्रसिद्ध शांति निकेतन से इन्होने ग्राफिक आर्ट में मास्टर डिग्री प्राप्त की है।

प्रिंट वर्क, वुड प्रिंट तथा एचिंग में बेहतर चित्रण के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखण्ड निवासी अत्रि चेतन शांति निकेतन में एमएफए की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इनके चित्रों में मानव व उसकी आधुनिकता की जड़ों में अभिव्यक्त होती परम्पराओं की छवि सोचने को मजबूर करती है।

दिल्ली के आयुष बंसल के ज्यामितिक आकारों से सजे चित्रों में मानवीय मूल्यों का दर्शन होता है। आयुष उड़ीसा के बालासोर कॉलेज ऑफ आर्ट से बीवीए कर रहे हैं साथ ही सुभारती विश्वविद्यालय मेंरठ से कला परास्नातक की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

उड़ीसा के पट पेंटिंग की प्रयोगवादी शैली को स्पष्ट करते हैं उत्तर प्रदेश निवासीे मयंक सैनी के चित्र। इनके चित्रों में धार्मिक भाव के साथ रंगों की गहराई भी है।

उड़ीसा की अजमीरा खातून के चित्रों में स्त्री की छटपटाहट और उडऩे की ललक दोनों का बाखूबी चित्रण किया गया है।

उड़ीसा की भाग्यश्री बेहरा के चित्रों में कोमल रंगों की आभा उनके व्यक्तित्व की सौम्यता को दर्शाती हैं। स्त्री भावों का चित्रण इनका प्रिय विषय है।

सीतू के नाम से पहचाने जाने वाले उड़ीसा के समरेन्द्र बेहरा यूनिवर्सिटी ऑफ कल्चर भुवनेश्वर में एमवीए के छात्र हैं। इस प्रदर्शनी में उनकी कृतियां बाल मजदूरी से पीडि़त बच्चों की व्यथा का मार्मिक चित्रण कर रही हैं।

कॉलेज ऑफ आर्ट कलकोत्ता में एमएफए के विद्यार्थी तथा उड़ीसा निवासी संजय राऊल की वेस्ट लोहे से बना शिल्प 'गैंग' उनकी कल्पना शक्ति को दर्शाता है।

उड़ीसा की कला शिक्षिका श्रावन्ती मिश्रा के चित्रों में अति यथार्थवाद के साथ स्वपन संसार का सजीलापन सजा है।

उड़ीसा के बालासोर कॉलेज ऑफ आर्ट में एमएफए की छात्रा श्राबनी मोहन्ती के चित्रण का विषय कुछ हटकर है। इन्हें बुर्जुर्गों के अनुभव से भरे झुर्रियों भरे चेहरों को चित्रित करना पसन्द है।

आसनसोल पश्चिम बंगाल के संदीप देव के पेंसिल से बनाए चित्रों में जहां बारीकी नजर आती है वहीं उनका धेर्य भी लुभाता है।

 पश्चिम बंगाल के हरितिमा से लदे गांव पानी पारुल निवासी देबब्रत मण्डल के चित्रों में जीवन की उथल-पुथल के साथ सहजता सहज ही आकर्षित करती है। एक्रलिक रंगों के माध्यम से बनी कुम्हार के चाक पर बनती मिट्टी की कृति और उसके साथ का घर्षण जीवन के झंझावतों को स्पष्ट करती है।

पश्चिम बंगाल के सीमान्त पाउल का वॉटर कलर में खासा दखल है। वाटर कलर से बनाए उनके लैण्ड स्केप में बिखरी रंगों की छटा सहज ही आकर्षित करती है।

रविवार, 20 अगस्त 2017

'अननोन्स-2' प्रदर्शनी का उद्घाटन आज शाम 5 बजे

'अननोन्स-2' प्रदर्शनी का उद्घाटन आज शाम 5 बजे

                   
                   जयपुर के चन्द्रशेखर जैन का काम सम्मिलित
मूमल नेटवर्क, अमृतसर। भारत के 13 युवा कलाकारों की कृतियों से सजी प्रदर्शनी 'अननोन्स-2' का उद्घाटन आज शाम 5 बजे इण्डियन अकेडमी ऑफ फाईन आर्टस की कला दीर्घा में किया जाएगा। उद्घाटन अकेडमी अध्यक्ष राजिन्द्र्र्र मोहन सिंह चिन्ना करेंगे।

इस प्रदर्शनी में भारत के विभिन्न हिस्सों में बसे 13 युवा कलाकारों की कल्पना व सोच उनकी कृतियों में देखी जा सकेगी। प्रदर्शनी में राजस्थान के चन्द्रप्रकाश जैन सहित उत्तराखण्ड से अत्रि चेतन, दिल्ली से आयुष बंसल, उत्तर प्रदेश से मयंक सैनी, उड़ीसा से अजमीरा खातून, भाग्यश्री बेहरा, समरेन्द्र बेहरा, संजय राऊल, श्राबनी मोहन्ती व श्रावन्ती मिश्रा तथा पश्चिम बंगाल से संदीप देव, देबू मण्डल व सीमान्त पाउल अपनी कृतियों के साथ हिस्सा ले रहे हैं।
यह प्रदर्शनी 24 अगस्त तक चलेगी।

सोमवार, 31 जुलाई 2017

जयपुर के आर्ट फेस्टिवल 14 बड़े नामों के साथ 40 नवांकुर भी

जयपुर के आर्ट फेस्टिवल 14 बड़े नामों के साथ 40 नवांकुर भी

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी परिसर में चल रहे तीन दिवसीय जयपुर विजुअल आर्ट फेस्टिवल का समापन चित्र प्रदर्शनी के साथ हुआ। फेस्टिवल के दौरान वर्कशॉप में बनाई गई कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन कल शाम 5 बजे जवाहर कला केन्द्र की चतुर्दिक कला दीर्घा  में  किया गया। सीडलिंग अंतर्राष्ट्रीय अकादमी की  प्राचार्य ज्योति मेल्होत्रा एवं उप प्राचार्या विनीता वोहरा के साथ फेस्टिवल के निर्देशक प्रोफेसर  चिन्मय मेहता ने द्धीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्सव का हिस्सा बने देश के विभिन्न प्रांतो से आये 8 समसामयिक तथा 6 पारम्परिक चित्रकारो को सम्मानित किया गया।वरिष्ठ चित्रकारों की कृतियों के साथ उत्सव में भाग लेने वाले 40  स्कूली  छात्रों के चित्रों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया।
प्रदर्शित चित्रों में से जहां एक ओर गोंड चित्रकार छोटी बाई तथा महाराष्ट्र के वरली चित्र शैली के अनिल वांगडने के साथ अन्य लोक शैली के चित्रों ने लुभाया वहीं समसामयिक चित्रकारी में नागपुर के विजय बिस्वाल, मुंबई के जॉन डोग्लॉस ,जबलपुर के ब्रिज मोहन आर्य, मेहसाणा की सुनीता डिंडा एवं शार्दुल कदम के चित्रों  ने दर्शको को खासा आकर्षित किया। उल्लेखनीय है कि इस उत्सव का आयोजन जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी एवं सीडलिंग अकादमी के संयुक्त तत्वाधान में रचा गया था।