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बुधवार, 4 जुलाई 2018

Rajasthan-147 साहसी कलाकारों के खुले विचार व सुझाव

साहसी कलाकारों के खुले विचार व सुझाव
सुधि पाठकों की प्रतिक्रिया व समीक्षा संबंधी आलेख के दूसरे भाग में उन कलाकारों के विचार उनके नाम सहित प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी हस्ती खुद बनाई है और उनका मानना है कि वे अकादमी की वैशाखियों के सहारे चलने के पक्षधर नहीं हैं। इसलिए किसी गुडबुक या बैडबुक की चिंता किए बिना उनके विचार के साथ उनका नाम बेखटके दिया जा सकता है। प्रस्तुत हैं कुछ प्रमुख प्रधिनिधि विचार व सुझावं...

प्रदेश के बाहर कार्यरत जाने-माने और व्यस्त कलाकार मोहन जांगीड़ ने समय निकाल कर मूमल को अपने दर्द से अवगत कराया। उन्होंने लिखा कि राजस्थान ललित कला अकादमी के युवा पदाधिकारियों को देखकर लगा था कि अब प्रदेश के कलाकारों का भला जरूर होगा। हालांकि मैं राजस्थान के बाहर काम कर रहा हूं और खुश हूं, लेकिन राजस्थान में पला-बढ़ा हूं, इसलिए वहां के आर्टवर्ड में इतनी अव्यवस्था के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। अकादमी का यह एक अच्छा कदम था, लेकिन चुनाव करते वक्त यह जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए था कि जिस तरह भारत की बात करने पर हुसैन, सूजा या रजा का नाम सबसे पहले सामने आता है वैसे ही राजस्थान की बात करने पर कुछ नाम बिना किसी विवाद के सामने आते है। दुख की बात है कि वह नाम व उनके काम नजर नहीं आए। आपके मूमल न्यूज से जन्मभूमि की खबर मिलती रहती है, इसलिए अपना यह दर्द आपसे शेयर कर रहा हूं।

राजनीति की दलदल से ऊपर बेबाक बोलने वाले वरिष्ठ डॉ. रघुनाथ शर्मा ने कहा कि, अकादमियों में मनमानी की दो ठोस वजह नजर आती हैं । पहले अध्यक्ष, सचिव आदि की नियुक्ति मनमाने ढंग से होना, लंबा समय बीत जाने पर नियुक्ति करना। हुक्मरान ने अपना एक शासकीय अंदाज़ बना रखा है। वो अपने इस अंदाज से अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संदेश दे देते हैं कि कला - वला हमारी प्राथमिकता में दूर दूर तक नहीं है। इन्हीं के द्वारा तय होने वाले बड़े लोग कुछ तो उस अंदाज को आगे बढाएंगे ही दूसरा, कलाकार स्वयं, जो गुटबाजी के साथ मनमानी करने में भी अब माहिर हो गए हैं, जिस तरह से क्रिएटिविटी में आजादी के पक्षधर है उसी तरह जजिंग करने में, अकादमी की कई अन्य गतिविधियां करवाने में अपने आप को आजाद मानते हैं । न कोई नीति नियम, न वरिष्ठता का खयाल, न किसी की क्रियाशीलता का लिहाज......जैसे डंके की चोट पर कह रहे हो कि क्या कर लोगे हमारा? कुछ वरिष्ठ व पारंगत कलाकारों को चयन करके, भर लो अपने मनचाहे  लोग ।.....आप कुछ कहो तो सैकड़ों तर्क-कुतर्क व बहाने इनकी जुबान पर रहते हैं ।....और  वैसे हर जगह पर स्वयं को संवेदनशील कहलाना पसंद करते हैं ।

कला जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके कलाकार नवल सिंह चौहान ने सभी चयनित कलाकारों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा है कि कलाकार होने के नाते कुछ बातें जहन में आ ही जाती हैं। जहाँगीर कला दीर्घा में चयनित कलाकारों की सूची थोड़ी और बड़ी हो सकती थी। सूची देखने पर लगा कि कुछ युवा व वरिष्ठ कलाकारों की अनदेखी की गई है। पक्षपात करना ठीक नही है।

पहली बात... चयन का कोई आधार होना चाहिए, नाम के बजाय काम देखकर चयन होना चाहिए। आवाज उठाना हमारा काम है क्योंकि सरकारी संस्थाओं में इस तरह नही चलेगा। कितने कलाकार आज नियमित रेखांकन करते हैं, जो कि सबसे ज्यादा जरूरी है। एक कलाकार को व्यंग्य चित्रण, व्यक्तिचित्रण, रियलस्टिक आर्ट, मॉडर्न आर्ट, सृजनात्मक होना ही चाहिए। चयनित कलाकार स्वयं को परखे, एक ही घिसी-पिटी शैली में बरसों से रंगों का अपमान किए जा रहे हैं।

दूसरी बात... अधिकांश चयनित वे हैं जिन्हें प्रदेश के ज्वलंत कला मुद्दों की पूरी जानकारी तक नहीं है। आपने राजस्थान में नन्हे कला विद्यार्थियों के लिए चल रहे कला आंदोलन को कितना समर्थन व सहयोग दिया? चयनित कलाकारों में से कुछ कलाकार ही इन बातों पर खरे उतर पाएँगे...

अकादमी सरकारी संस्था है। ऐसी मनमानी नहीं चल सकती, सरकार से शिकायत की जा सकती है। ललित कला अकादमी को इस तरह के चयन में पारदर्शिता रखनी होगी। कलाकारों के काम के चयन में उनकी सक्रियता के साथ ही काम का लेवल भी देखा जाना आवश्यक है। दु:ख तब होता है जब वर्षों कला क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों को अनदेखा कर दिया जाता हैं। उम्मीद है भविष्य में सब अच्छा होगा?

जाने-माने शिल्पी हंसराज कुमावत का कहना है कि अकादमी में चाहे कितना ही दूध का धुला इंसान बैठा हो, वो उसी को शामिल करेगा जो उसके खास शिष्य- शिष्याएं और मित्र, रिश्तेदार हो। यह तो बड़े शर्म की बात है कि सेलेक्शन कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने ने अपना नाम सबसे पहले चुनते हुए उन कलाकारों को दरकिनार रखा जो एक सच्चे साधु की भाँति अपनी कला साधना में लीन हैं। और तो और 100 कलाकारों के सेलेक्शन के बाद 47 ऐसे नाम कहा से प्रकट हो गये जिनका इंडियन कंटेम्परेरी आर्ट में ना कोई खास रेकॉर्ड है और ना ही प्रदेश के कला जगत में उनका कोई योगदान रहा।

ऐसे में यह भी ज्ञात होना चाहिए कि कई ऐसे कलाकार भी हैं जिनको प्रदर्शनी के लिए न्यौता देकर वर्क मंगवाने के बाद भी अकादमी ने उन्हें वापस लौटा दिया। ऐसी शर्मनाक परिस्थितियों के चलते कुछ अनुभवी कलाकारों ने तो अकादमी द्वारा काम मांगे जाने पर साफ  इंकार ही कर दिया, कई कलाकार ऐसे जंजाल से दूर ही अपनी कला साधना में व्यस्त है। राजस्थान ललित कला अकादमी में सटीक रणनीति, पारदर्शिता और एक्सपीरिएंस का अभाव साफ नजर आ रहा है। कलामेल से अब तक घूम फिर के एक ही चहेते चेहरे और कुछ एक ही नाम नजर आ रहे है।

राजस्थान ललित कला अकादमी ने कुछ नया करने के नाम पर कई क्राफ्टमैन और हॉबी कलाकारों को जगह दी। यह अकादमी कलाकारों की है, किसी की बपौती नहीं है। अगर अब भी कलाकारों के प्रति पारदर्शिता नहीं रहीं तो आर टी आई लगाकर जानकारियां लेनी होंगी। शुक्रिया मूमल आपके अखबार में कलाजगत की गतिविधियोंं का सटीक निचोड़ पढऩे को मिलता है, इसमें हमेशा से ही कलाकारों के हित में आवाज उठाई है। जिससे आर्ट पॉलिटिशिएंस और अकादमी सिस्टम कंट्रोल में रहता है।

युवा कलाकार मयंक शर्मा का कहना है कि इस प्रदशनी के लिए कलाकारों को चुनने का कोई आधार नही था। जहाँ एक ओर कलाविद जैसे कलाकार हैं वही ऐसे भी कलाकार चुने गए है जिनको शौकिया कलाकार कह सकते हे जिनको कभी स्टूडेंट अवार्ड भी नही मिला। कलाकारों का चयन ऐसी कमीटी ने किया जिनको कला के बारे में कुछ नही पता पर वो अधिकारी होने के नाते ये हक़ रखते है।

आप कलाकारों की सूचि देखेंगे तो शायद आपको भी आश्चर्य होगा। उदयपुर के एक वरिष्ठ कलाकार का नाम तो दूसरे कलाकारों को बताना पड़ा की ये तो वरिष्ठ कलाकारों में से हे तब उनका चयन किया गया।

जिस प्रकार प्रदर्शनी के कलाकारों की सूचि जारी नही की, उसे आखरी क्षण तक छपाए रखा वैसे ही अकादमी कई कैंप का आयोजन भी करवाती है पर किसी को कानोकान खबर नही होती। जिससे इनके द्वारा चयनित कलाकार जो लगभग सभी कैंप में सामान होते है उनका पता दुसरो को न चले और न कोई विरोध हो। निष्कर्ष यह निकलता है कि, अकादमी अपना काम निर्विरोध कर रही है क्योंकि Óयादातर काम वो गुप्त रूप से करती है।

हितेन्द्र सिंह भाटी ने मूमल को लिखा कि राजस्थान ललित कला अकादमी हम जैसे कलाकारों के साथ हमेशा सौतेला  व्यवहार करती हैं... बारह सोलो शो, जिनमें जहाँगीर आर्ट गैलरी में दो सोलो शामिल हैं... पिछले बीस साल से कला जगत में 'निरंतर कार्यरत हूँ...आइफेक्स  और कैमलिन जैसे अवॉड्र्स पाएं है... देश के नामी कला संग्रहको के पास मेरी पेंटिंग्स है... माना कि ये सब कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, लेकिन जहाँगीर आर्ट गैलरी मे अकादमी की तरफ  से प्रदर्शित होने वाले इन 147 कलाकारों की लिस्ट में मुझे लगता है मेरा नाम भी होना चाहिए था। आखिर क्यों नहीं है?, जब इस लिस्ट में 20 शौकिया कलाकार हैं और 10 ऐसे, जिनका ब्रश बरसों से सूखा पड़ा है...

माना कि आर्टिस्ट को खुद अपने लिए ऐसे नहीं कहना चाहिए... लेकिन क्यों नहीं कहें... मैं सिर्फ  अपनी बात नहीं कर रहा, राजस्थान से ऐसे कई आर्टिस्ट है, जो इन 147 मे शामिल अनेक कलाकारों से कहीं अधिक बेहतर और निरंतर काम कर रहे हैं। जब अकादमी पूरे राजस्थान की कला को रिप्रजेंट करने जा रही हो तो जिम्मेदारी और बड़ी हो जाती है... सेलेक्शन संवेदनशील होना चाहिए... फेयर होना चाहिए... पारदर्शी होना चाहिए...। यह कोई आत्मश्लाघा नहीं है... ना ही कोई क्षोभ है... सिफऱ्  एक कलाकार की विडंबना है... पीड़ा है...। उल्लेखनीय भाटी ने बाद में अपनी यही बात खुले पत्र के रूप में कला जगत के समक्ष भी रखी।

वीरेन्द्र दायमा ने तेल और तेल की धार देखते के बावजूद साहसपूर्वक कहा कि जो बोलेगा उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जावेगा, इसी कारण से कोई बोलता नही है। जिसका चयन हुआ वो बोलेगा नही जिसका नहीं हुआ वो इन उम्मीद में नहीं बोलेगा की कहीं ब्लैक लिस्ट नहीं हो जांउ। पेंटिग के पीछे नाम देखकर,सगे संबंधी और अपने गुट के कलाकार का चयन करने की परम्परा बनाये रखने में हम ही जिम्मेदार है । कुछ कु-कलाकार अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर उच्च पद पर विराजित है और अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त कलाकार उनके पीछे-पीछे चल रहे हैं। कुछ सम्मानित कलाकारों को छोड़कर सभी चयनित कलाकार और चयन करने वाले समय के साथ पाला बदलने वाले और चाटुकारिता की हदें को पार करने वाले है। कई वर्षों से कला क्षेत्र में यही चलता आ रहा है और शायद यही चलेगा।

रेणु बरिवाल ने लिखा, मैने राजस्थान ललित कला अकादमी से किसी भी तरह की आशा छोड़ दी है। मैं अपना काम कर रही हूं क्योंकि यह मेरे लिए जुनून है। मुझे अकादमियों से कुछ भी उम्मीद नहीं है, क्योंकि एक संगठन एक समय में सभी को संतुष्ट नहीं कर सकता है। मुझे पता है कि राजनीति ऐसे संगठनों का हिस्सा है, लेकिन हां यह भी सच है कि वे एक बदलाव ला सकते हैं ... लेकिन कौन परवाह करता है। यही कारण है कि आज भी न केवल राजस्थान बल्कि राष्ट्रीय अकादमी कलाकारों के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। तो दोस्तों ... कोई उम्मीद मत करो ...।

निर्मल यादव के अनुसार सब का साथ .....और आपका माध्य्म, हमें साहसी बनाता है और अब भी साहस नहीं करेंगे तो कब करेंगे? आने वाले युवा कलाकर इसी लकीर के फ़क़ीर होते चले जाएंगे। यह कला में भृष्टाचार ही तो है। कहाँ तो यह आनंद देने वाला, भाव विभोर करने वाला अपनी कल्पनाओं को आकर देने वाला माध्यम कला अब बाजारू, और अकादमी अब बंदरबांट का अड्डा हो गयी है। यह देखने वाली बात है, राजस्थान राज्य जो अपनी पौराणिक शैली (मिनीचर आर्ट) के लिए विश्व विख्यात है उसे इतना ज्यादा महत्व नहीं दिया गया उदयपुर से राजाराम जी की की कृति को को ही लगाया गया। एक ही नाम होने से थोड़ी मिस्टेक हो गई। कुल मिला के उदयपुर में कोई भी मिनिचर आर्टिस्ट भी नहीं दिखा अकादमी को। सभी कलाकारों को बहुत बहुत बधाई।

गीतांजलि वर्मा ने राजस्थान 147 का कैटलॉग शेयर करने के लिए मूमल को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरा कैटलॉग देखने पर बउ़ी खुशी हुई कि, कुछ कलाकारों के काम राजस्थान को बहुत अच्छे से रिप्रेजेंट कर रहे हैं। जिनके नाम सलेक्ट किए जाने पर किसी को कोई संशय नहीं होगा। क्योंकि यह राजस्थान के प्रथम श्रेणी के कलाकार रहे हैं। किन्तु कुछ कलाकार जिन्हें अब तक कला की पहचान भी नहीं हुई है। जिन्होंने एकेडमिक वर्क की परिभाषा ही बदल दी। जो दूसरे कलाकारों के वर्क की कॉपी करके ही तारीफ  पाते रहे हैं, उनको भी राजस्थान के प्रमुख कलाकारों में शामिल कर लिया गया। इस बात से बड़ा अफसोस हुआ। ...और इससे भी दुखद बात यह है कि राजस्थान के वो कलाकार जो कलाविद् हैं, और जो कलाकार वाकई कला के मर्म को समझते हैं, उनके काम को ऐसे कलाकारों के काम के साथ प्रदर्शित किया।

क्या ललित कला अकादमी इसके लिए जिम्मेदार नहीं कि जब राजस्थान को रिप्रजेंट करना था तो क्यों नहीं ईमानदारी से श्रेष्ठ कलाकारों को चयनित किया गया? क्या इस कला प्रदर्शनी का उद्देश्य मात्र भीड़ इक्कठी करना था या कि राजस्थान का नाम बढ़ाना? क्या चयन समिति इतनी अनजान और गैरजिम्मेदार थी कि उन्हें यह भी ज्ञात नहीं रहा कि यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की क्या छवि बनाएगी? जिन कलाकारों का इस एग्जीबिशन के लिए चयन नहीं हुआ, उनके काम की समीक्षा तो वो करते हैं, किन्तु क्या कभी राजस्थान ललित कला अकादमी अपने कार्यों की समीक्षा करके संतुष्ट हो पाती है, या उसकी कोई जवाबदेही भी बनती है?

कुलदीप भार्गव कहते हैं, राज्य के कई एक से बढ़कर एक कलाकार वंचित रह गए। यही तो इस देश की खूबी है हर जगह भाई भतीजावाद चल रहा है। प्रतिभाओं की कोई कद्र नहीं है। भले ही काम के नाम पर कुछ भी न हो, फिर भी भाईबंदों का चयन पक्का होता है। एक बात कहना चाहूँगा, जब गुरु ही द्रोणाचार्य हों तो अर्जुन ही आगे बढ़ेगा एकलव्य तो गुमनामियों में ही खोकर रहना है।

दिलीप कुमार डामोर का मानना है कि अकादमी को चयन का क्राइट एरिया भी रखना चाहिए था। उसी से कई अयोग्य लोग लिस्ट से बाहर हो जाते। वैसे राजनीति ने कला, संस्कृति, कलाकार, राजस्थान, समृद्ध भारत व विश्व को खोखला करने मे कोई कसर नहीं छोड़ रखी हैं और सदियों से भी यही किया है... अकादमी में भी दमदार व लायक कलाकारों  नजरअंदाज कर दिया है...। अब भी समय रहते सुधारने की जरूरत है...।

दुर्गेश अटल कहते हैं, अब ललित कला अकादमी से कभी कोई उम्मीद नहीं रही। बाकी किस आधार पर सलेक्शन हुआ है सबको पता है ? कलाकार की मेहनत और उसकी कला ही उसको पहचान दिलाती है । ललित कला अकादमी के अधिकारी कितना भी करें वह ऐसे किसी को कलाकार नहीं बना सकते।

हर्षित वैष्णव ने लिखा, मुझे तो समझ नहीं आया किस आधार पर कलाकारों का चयन किया गया है? उनकी कृति के आधार पर या उन की उपलब्धियों के आधार पर। दोनों स्थिति में कई गलतियां हुई हैं। कई कलाकार थे, जिनका नाम होना चाहिए, जिनके उत्कृष्ट कार्य भी हैं और उपलब्धियां भी। जबकि, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं फिर भी वे इस प्रदर्शनी का हिस्सा बने।

कमल बक्क्षी कहते हैं वर्षों से कला के लिए समर्पित वरिष्ठ कलाकारों की अनदेखी की गई है। जिन लोगों का कला से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहा उनका चयन किस आधार पर किया गया? यह शर्मनाक है।

कब्बू राठौड़ का विचार है कि जब संगीत क्षेत्र के लोग ही ललित कला के बॉस बन गए तो उम्मीद क्या करें? इसका मुझे व अन्य वरिष्ठ चित्रकारों को खेद है। ललित कला अकादमी को अपनी छवि सुधारनी होगी।

मनोज कुमार यादव के मुताबिक यदि आपका गॉड फ़ादर नहीं है तो आप न तो पारम्परिक न आधुनिक... आप अव्वल कलाकार हो ही नहीं। किसी कोने में बैठकर कूँची चलाते रहिये कोई नहीं पूछेगा ।

डॉ. रीता प्रताप का कहना है कि, अकादमी में आज भी मनमानी चल रही है। ....पेंटिंग इंटरनेशनल, नेशनल, स्टेट सभी में सलेक्शन हुआ है। पर एक्जीबिशन में इंवायट नहीं किया गया।

त्रिलोक श्रीमाली का मानना है कि अकादमी स्तर का प्रदर्शन नहीं हो पाया एवं चयन प्रक्रिया में भी वही पुरानी लिस्ट। कुछ हटकर चयन एवं प्रदर्शन की आवश्यकता है।

रवि माइकल ने कला मेला पुरस्कार विवाद के बाद अकादमी के आयोजन को ले कर एक और विवाद पर अपनी चिंता व्यक्त की।

परमेश्वर आर्टिस्ट ने कहा, हर जगह कला के नाम पर खेल खेला जा रहा है।

अक्षय मुदगल ने कहा, न्यू टैलेंट को ज्यादा से ज्यादा मौका देना चाहिए। एक बार से ज्यादा किसी का वर्क सलेक्ट नहीं होना चाहिए। और चयनित काम का कैटलॉग सोशल साइट पर अपलोड होना चाहिए।

लाखन सिंह जाट का मानना है कि भाई भतीजावाद और यारी दोस्ती के आधार पर चयन हुआ है।

देवराज बैरवा का मानना है कि वैसे तो पब्लिक सब जानती है..... पर मैं नहीं जानता कि पेंटिंग सिलेक्ट करवाने के लिए किसके पास जाएं...... ओह आर्ट पॉलिटिक्स।

डीके आजाद ने बस इतना ही कहा कि राजनीतिक रूप से प्रेरित ऐसी कला प्रदर्शनी भाड़ में जाए।

रविवार, 1 जुलाई 2018

कुछ दर्शक मिले पर बायर कोई नहीं

कुछ दर्शक मिले पर बायर कोई नहीं
कीमत 50 हजार से 16 लाख तक रखी 
मूमल नेटवर्क, मुंबई। शनिवार व रवीवार को जहांगीर आर्ट गैलरी में सजी राजस्थान के कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनी को कुछ दर्शक जरूर मिले, लेकिन बाजार ठंडा होने के कारण कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। कलाकारों ने काम की कीमत इतनी अधिक लगा रखी है कि भूले-भटके आए दर्शक सामान्य से सामान्य काम की भी असामान्य कीमत देख कर कंधे उचकाता हुआ आगे बढ़ जाता है।
आपको यह जानकर ताज्जुब हो सकता है कि प्रदर्शनी में शामिल कृतियों के मूल्य कम से कम 50 हजार रुपए और अधिकतम 16 लाख रुपए रखे गए हैं। अधिकतम मूल्य उदयपुर के आकाश चोयल की कृति के हैं, जबकि सबसे कम मूल्य 50 हजार रुपए की बात करते हुए कोई नाम लेना उचित नहीं होगा।
राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित इस शो राजस्थान 147 के संयोजक डॉ. लोकेश जैन ने ऑफ सीजन की बात स्वीकार करते हुए मूमल को जानकारी दी कि, सजी हुई कृतियों की खरीद के लिए पूछताछ तो की जा रही है लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई कृति बिक नहीं पाई है। इस स्थिति के बारे में डॉ. लोकेश ने मूमल को बताया कि, मार्केट ठण्डा है। इन्वेस्टर्स के पास पहले से ही पेंटिंग्स का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए वो नया माल खरीदने की जोखिम अभी नहीं उठाना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि, खरीददारों में अब वो लोग बचते हैं जिन्हें अपना घर सजाने के लिए कृतियों की आवश्यक्ता पड़ती है, लेकिन उनकी क्रय शक्ति 15-20 हजार से अधिक की नहीं होती।
इस शो में सजी कृतियों की कीमत के बारे में डॉ. लोकेश ने मूमल को जानकारी दी कि, पेंटिंग्स 50,000 रुपए की कीमत से शुरू होकर 16 लाख रुपए तक की हैं, जबकि मूर्तिशिल्प 40 हजार रुपए से 1.75 लाख रुपए कीमत के हैं। सबसे महंगी पेंटिंग उदयपुर के आटिस्ट आकाश चोयल की व सबसे महंगा मूर्तिशिल्प जयपुर की सुमन गौड़ का है।
डॉ. लोकेश जैन ने मूमल को जानकारी दी कि, जिन प्रमुख कलाकारों की कृतियों को खरीदने के बारे में पूछताछ हो रही है उनमें से पेंटिंग के लिए भीमसिंह हाड़ा, जी.एस. खेतांची, महावीर स्वामी, चरण शर्मा, सुरेन्द्र पाल जोशी, लोकेश जैन, महेश स्वामी, आकाश चोयल, कुष्णा महावर, प्रदीप कुमावत, आर.बी. गौतम, लक्ष्मीकांत शर्मा, संजीव शर्मा व सौरभ भ्ट्ट के नाम शामिल हैं वहीं मूर्तिशिल्प में पंकज गहलोत, सुनील चेजारा व ज्योति प्रकाश गौतम की कृतियों को गिना जा रहा है।
डॉ. लोकेश ने मूमल से बातचीत के दौरान कहा कि, यदि कोई कृति बिकती है तो शो को माइलेज मिल जाएगा। वैसे यह शो कृतियों के बेचने को केन्द्र में रखकर नहीं वरन् ऐसे प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को एक्सपोज करने के लिए रचा गया है जिनके लिए जहांगीर में शो करना एक स्वपन की तरह है। इस शो में जो सीनियर आर्टिस्ट शामिल हैं वो इसलिए कि, जूनियर्स को सीनियर्स के साथ एक ही शो में प्रदर्शित होने का अवसर मिल सके।
राजस्थान 147 को लम्बे इंतजार के बाद कुछ दर्शकों के दर्शन हो पाए हैं। बरसात के दिनों को मुंबई के कला बाजार में ऑफ  सीजन माना जाता है। ऐसे में प्रदर्शनी में दो दिन के लिए ही सही दर्शकों का आना अच्छा संकेत है।

शुक्रवार, 29 जून 2018

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)

मूमल मीमांसा-1 (प्रसंगवश: राजस्थान 147)
वैसे तो कलाकारों को एकाएक गुस्सा नहीं आता, लेकिन जब आता है तो बहुत आता है। जंहागीर के शो की खबरों को लेकर शुरूआती सन्नाटे के बाद अब अनेक कलकारों में साहस का संचार हुआ है और वे खुलकर अकादमी पदाधिकारियों की मनमानी के खिलाफ अपनी बात कह रहे हैं। कला जगत के सोशल मीडिया पर भी राजस्थान 147 के नाम पर हुई धांधलियों को लेकर कलाकार अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।
हालांकि अनेक सयाने कलाकार स्वयं के नफे-नुक्सान का हिसाब लगाते हुए आयोजन के सकारात्मक पहलू की बात पर खुद को तटस्थ दर्शाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ नया करने के नाम पर अपनों को रेवडिय़ां बांटे जाने की कलई खुलने के बाद क्रोधित कलाकारों का पारा सातवें आसमान पर है।
अपने बूते पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवलसिंह चौहान सबसे पहले सबसे दमदार तरीके से सामने आए उसके बाद प्रतिष्ठित कलाकार हितेन्द्र सिंह भाटी ने आवाज बुलंद की, फिर डा. रीता प्रताप और रघुनाथ जी जैसे गंभीर कलाकारों ने अपनी बात खुलकर कही। मयंक शर्मा, मोहन जांगीड़, हंसराज कुमावत और ऐसे अनेकानेक कलाकारों ने अपने गंभीर विचार सामने रखे। इसके बाद उन मजबूत कलाकारों ने चौंकाया जो 147 के लिए होने के बावजूद असंतुष्ट  कलाकारों के समर्थन में खड़े हो गए। सभी ने बहुत अहम बातें सामने रखी, इनकी बातों को यहां चलते रास्ते लिख देना पाठकों के प्रति अन्याय होगा। इसलिए अगले लेख में  शीघ्र  ही आप इन जैसे बहुत से बिंदास कलाकारों के विचारों से रूबरू होंगे।
कला जगत में मूमल की निर्भीक रिपोर्टिंग के चलते सबसे पहले यह बात सामने आई कि चयन सूची बहुत गोपनीय तरीके सें तैयार हो रही है। उसमें चल रही जोड़-तोड़ के चलते उसे अंतिम रूप दिए जाने में देर हो रही है। रेवडिय़ां बाटने में जुटे अकादमी के कर्ताधर्ताओं को इस बात का पूरा अंदेशा था कि सूची अगर जयपुर में ही आउट हो गई तो कला जगत के असंतोष को संभालना कठिन हो जाएगा। ऐसे में पूर्व नियोजित देरी को कारण बताते हुए यहां होने वाले शो के प्रिव्यू को रद्द कर दिया गया।
अधिकारियों के मुंबई रवाना होने से पूर्व कैटलॉग छपकर आ गए, लेकिन उसे यह कहकर दबाए रखा गया कि शो से पहले कैटलॉग जारी नहीं किए जा सकते। हालांकि अकादमी अधिकारियों की ओर से संभावित हरी झंड़ी दिखाए जाने के बाद चयनित कलाकार हरकत में आ गए थे। यह कलाकार स्थानीय अखबारों में स्वयं के चयनित होने की खबरें प्रकाशित कराने लगे थे। इन कलाकारों और अन्य सूत्रों से जानकारियां एकत्र करने का कठिन कार्य पूरा करके मूमल ने अपने न्यूज पोर्टल पर सबसे पहले सूची प्रकाशित कर दी। समय की कमी के चलते मूमल ने सूची की समीक्षा का काम अपने सुधि पाठकों के सुपुर्द कर दिया।
कुछ ही समय बाद कलाकारों में असंतोष उभरने लगा और राजस्थान 147 के आयोजन की स्क्रिप्ट लिखने वाले डिजायनर कलाकारों के हाथ-पांव फूलने लगे। यह बताने की कोशिश होने लगी कि सब कुछ ठीक-ठाक है। लेकिन, ऐसा था नहीं। अकादमी के अधिकारियों ने कहा कि 147 में सभी का सिलेक्शन तो संभव है नहीं। चयन का आधार पूछे जाने पर बताया गया कि यह सब चयन समिति के अधिकार क्षेत्र की बात है। सवाल बहुत से थे, लेकिन सभी के जवाब गोलमोल थे।
हालात को देखते हुए आयोजन के स्क्रिप्ट रायटर और दरबारी कलाकारों ने कर्ता-धर्ताओं को सुझाव दिया कि जयपुर के स्थानीय अखबारों के अपने पत्रकारों से अपने अनुरूप खबरे छपवा लो। फाइलों में तो केवल उन्हें ही लगाना है। इसका परिणाम जल्द ही सामने आने लगा। मजे की बात यह रही कि खबरों में दिए जाने वाले कलाकारों के चुनिंदा नाम भी वह थे जो मठाधीशों के सबसे करीब हैं। इनमें वे भी शामिल हैं जिनकी प्रभावशाली कला के चलते यह करीबियां पिछले कला मेले के बाद से ही देखी जा रही हैं।
अनेक कलाकारों ने अकादमी अधिकारियों की निरंकुशता और मनमानी को लेकर संबंधित उच्चाधिकारियों, संस्कृति मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक जानकारी पहुंचाने का विचार व्यक्त किया है। हो सकता है कि आपको यह पता नहीं हो कि सरकार केवल स्थानीय अखबारों के समाचारों को सहेज कर ही संतुष्ट नहीं हो जाती। अपनी विश्वस्तनीयता के चलते मूमल अपने न्यूज पोर्टल के जरिए प्रदेश के अनेक उच्चाधिकारियों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के कार्यालय व आवास तक पहुंचता है और संबंधित लोगों द्वारा ध्यान से देखा और पढ़ा जाता है। मूमल के पुराने पाठक इसके प्रभाव से परिचित भी हैं। पर यहां सवाल शिकायत का नहीं व्यवस्था को सुधारने का है। प्रथम चरण में उसी पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

बुधवार, 27 जून 2018

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा

सामने आने लगा चयन सूची में नामों के जोड़-तोड़ का नतीजा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। अंतत: वही हुआ जिसकी आशंका थी, राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी के ग्रुप शो के लिए किए कलाकारों के चयन को लेकर प्रदेश के कला जगत में असंतोष मुखर होने लगा है।
चयन की प्रकिया में हो रही अनावश्यक देरी और असामान्य गोपनियता के चलते जानकारों को लिस्ट में जबरदस्त जोड़-तोड़ की आशंका होने लगी थी। नतीजतन अब सामने आया है कि जिन कलाकारों को अकादमी की ओर से  फोन करके उनका काम मंगवाया गया था, पहले उनको सूची में स्थान मिला, लेकिन जोड़-तोड़ के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अंतिम सूची में उनका नाम नदारद था।
जयपुर के युवा कलाकार सुनील कुमार कुमावत के अनुसार 21 या 22 तारीख को प्रदर्शनी के संयोजक लोकेश जैन ने फोन करके उसका काम मंगवाया था। सुनील ने तत्काल अपना काम अकादमी पहुंचा दिया था। सूची में उसका नाम शामिल हुआ भी था, लेकिन कैटलॉग में उसका नाम नदारद था। उल्लेखनीय है कि लगभग अंतिम दौर की जिस सूची में सुनील कुमावत का नाम था, उसमें महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल नहीं था, लेकिन कैटलॉग में महावीर भारती मूर्तिकार का नाम शामिल है।
कोटा से मिली जानकारी के अनुसार वहां के तीन वरिष्ठ कलाकारों ने तो अकादमी के मांगे जाने पर स्वयं अपना काम जयपुर जाकर अकादमी तक पहुंचाया था। अकादमी द्वारा दिए गए भरोसे के आधार पर कोटा की स्थानीय मीडिया को अपना काम जहांगीर कला दीर्घा में प्रदर्शित होने की जानकारी भी दी। सभी प्रमुख अखबारों ने इन सीनियर कलाकारों के समाचार भी प्रकाशित किए। अब कैटलॉग में नाम व काम नहीं पाकर उनकी स्थिति बयान करने लायक नहीं रही। इनमें शुभूसिंह चौबदार, डी.पी. छाबड़ा व डा. धांसू अन्नूसिंह धाकड़  शामिल हैं। शुभूसिंह चौबदार ने तो फोन ही स्विचऑफ कर दिया।
ऐसे मामलों के संबंध में अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी का कहना है कि इस आयोजन के लिए कलाकारों के चयन का काम अकादमी द्वारा गठित अनुभवी व जिम्मेदार कलाकारों की एक समिति ने किया है। इसमें अधिकारियों की भूमिका नहीं थी।

सोमवार, 25 जून 2018

जहांगीर ग्रुप शो के कलाकारों की लिस्ट, Artis List.

जहांगीर ग्रुप शो के कलाकारों की लिस्ट
देखिए आयोजन में आपके लिए क्या है?
मुमल नेटवर्क, जयपुर। जहांगीर आर्ट गैलेरी में हो रहे ग्रुप शो के लिए अकादमी की अनुभवी व जानकार चयन समिति द्वारा पूरे राजस्थान से चुने गए कुल 147 कलाकारों की लिस्ट प्रस्तुत है। सभी चयनित कलाकारों को शुभकामनाएं...। 
वे योग्य वरिष्ठजन जो चयनित होनें के लिए आमंत्रण के बावजूद शो में शामिल होने को तैयार नहीं हुए, वे जो आमंत्रित किए जाने के बाद भी चयन से वंचित रहे और वे जो चुने ही नहीं गए वे फिलहाल अपनी स्थिति और कृतित्व की स्वयं समीक्षा करें। प्रखर व बिंदास लोग हमसे भी साझा करें, मूमल आपके विचार प्रकट करने के अधिकार की पूरी रक्षा और सम्मान करेगा।
चयनित  कलाकारों की लिस्ट
1. अब्बास बाटलीवाला
2. अदिति अग्रवाल
3. अजय दर्शन सिंह राजावत
4. अजय मिश्रा
5. अजय सिंह पीलवा
6. आकाश चोयल
7. अमित हरित
8. अमित राजवंशी
9. अंकित पटेल
10. अन्नपूर्णा शुक्ला
11. अनुपम भटनागर
12. अनुपमा जैन
13. अर्चना
14. पद्मश्री अर्जुन प्रजापति
15. अरविन्द मिश्रा
16. आशीष कुमार श्रृंगी
17. अशोक गौड़
18. अशोक हाजरा
19. बी.सी.गहलोत
20. बसन्त कश्यप
21. भवानी शंकर शर्मा
22. भीम सिंह हाड़ा
23. भुवनेश जैमिनी
24. चन्द्र मोहन शर्मा
25. चन्द्र प्रकाश जैन
26. चन्द्र शेखर सैन
27. चरण शर्मा
28. चिमनराम डांगी
29. चिन्मय मेहता
30. दीपक खण्डेलवाल
31. धर्मवीर वशिष्ठ
32. दिलीप सिंह चौहान
33. दिलीप शर्मा 
34. दिनेश उपाध्याय
35. दीपिका हाजरा
36. एकेश्वर प्रसाद हटवाल
37. इरा टाक
38. गौरी शंकर जांगिड़
39. गिरीश चौरसिया
40. गोपाल आचार्य
41. गोपाल शर्मा
42. गोपाल स्वामी खेतांची
43. एच. आर. कुम्भावत
44. हरीश वर्मा
45. हेमन्त द्विवेदी
46. हेमन्त जोशी
47. जगदीश नन्दवाना
48. जगमोहन माथोडिय़ा
49. ज्योति प्रकाश गौतम
50. कैलाश चन्द शर्मा
51. कमल जोशी
52. कपिल शर्मा
53. केशव शर्मा
54. खुश नारायण जांगिड़
55. किरण मूर्दिया
56. किरन सोनी गुप्ता
57. किशन मीणा
58. कृष्णा महावर
59. लाखन सिंह जाट
60. लाल चन्द मारोठिया
61. लक्ष्मीकांत शर्मा
62. लक्ष्यपाल सिंह राठौड़
63. लोकेश जैन
64. लोकेश कुमावत
65. मदन मीणा
66. मदन सिंह राठौड़
67. महावीर स्वामी
68. महेश सिंह
69. महेश स्वामी
70. मनन चतुर्वेदी
71. मणि भारतीय
72. मनीष वाजपेयी
73. मनोज टेलर
74. मीना बया
75. मीनाक्षी कासलीवाल भारती
76. मोहम्मद सलीम
77. मुकुल मिश्रा
78. नरेन्द्र सिंह 'चिंटूÓ
79. नीरज शर्मा
80. नेमा राम जांगिड़
81. पंकज गहलोत
82. पवन कुमार शर्मा
83. पूनम माथुर
84. प्रदीप शर्मा
85. प्रदीप वर्मा
86. प्रमोद कुमार सिंह
87. प्रतीक कुमावत
88. पुष्पकांत त्रिवेदी
89. आर.बी. गौतम
90. राहुल उषाहरा
91. राजाराम वयास
92. राजेन्द्र गौड़
93. राजेन्द्र मिश्री
94. राकेश सिंह
95. राम जायसवाल
96. राम प्रतिहार
97. राम सोनी
98. रणजीत सिंह चूड़ावाला
99. रवि कुमार योगी
100. रेखा अग्रवाल
101. रेखा भटनागर
102. ऋतु जौहरी
103. रोकेश कुमार सिंह
104. रूद्र भारद्वाज
105. सचिन्दानन्द सांखलकर
106. संजीव शर्मा
107. सन्त कुमार
108. सौरभ भट्ट
109. शाहिद परवेज
110. शैल चोयल
111. पद्मश्री शाकिर अली
112. शालिनी भारती
113. शरद भारद्वाज
114. शीतल चितलांगिया
115. शेख मोहम्मद लुकमान
116. शिव कुमार शर्मा
117. शिव शंकर शर्मा
118. श्वेत गोयल
119. स्नेहलता शर्मा
120. सोहन जाखड़
121. सुब्रतो मण्डल
122. सुधीर शर्मा
123. सुधीर वर्मा
124. सुमन गौड़
125. सुनीत घिल्डियाल
126. सुनील चेजड़ा
127. सुनील जांगिड़
128. सुनील कुमार कुम्भावत
129. सुरभि सोनी
130. सुरेन्द्र सिंह
131. सुरेन्द्र पाल जोशी
132. सुरेश जोशी
133. सुरेश पाराशर
134. सुरजीत कौर चोयल
135. सुशहल निम्बार्क
136. सैयद मेहर अली अब्बासी
137. ताराचन्द शर्मा
138. तसलीम जमाल
139. पद्मश्री तिलक गीताई
140. तिलक राज
141. वीरबाला भवसर
142. विजय कुमावत
143. विनोद भारद्वाज
144. वीरेन्द्र बन्नू
145. योगेन्द्र कुमार पुरोहित
146. योगेन्द्र सिंह नरूका
147. युगल किशोर शर्मा

जहांगीर ग्रुप शो:

जहांगीर ग्रुप शो:
अधिकारियों का दल विमान से रवाना
कैटलॉग भी विमान में लेकर जाना पड़ा
एक दर्जन से अधिक लोग काम में जुटे
तीन दीर्घाओं में करीब सौ कृतियां सजेंगी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा प्रदेश के चुनिंदा कलाकारों के लिए मुंबई की जहांगीर कला दीर्घा में कल 26 जून से आरंभ होने वाले ग्रुप शो के लिए अकादमी के अधिकारियों और उनके सहायकों का दल आज मुंबई पहुंच गया। यह दल जयपुर से आज सुबह विमान से रवाना हुआ। इनमें अध्यक्ष अश्विन दलवी, सचिव सुरेंन्द्र सोनी, प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा, शो के संयोजक लोकेश जैन, सह संयोजक आशीष श्रंगी, अध्यक्ष के निजी सचिव व शो के संयोजक की सहायिका के रूप में एक महिला शामिल हैं। इससे पहले अकादमी के प्रदर्शनी वाहन में कलाकृतियों के साथ लगभग आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी 23 जून को मुंबई के लिए रवाना हुए थे।
कैटलॉग भी विमान में?
पूर्व में कलाकारों के चयन में हुए विलंब के कारण हुई देरी के चलते शो के कैटलॉग छपने के बाद एन वक्त पर अकादमी में पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे में अधिकारियों का दल अपने लगेज में शामिल कर बहुत सीमित मात्रा में कुछ कैटलॉग लेकर जा रहे हैं। अकादमी सचिव सुरेन्द्र सोनी के अनुसार कैटलॉग प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद ही जारी किया जाएगा।
शेष कैटलॉग का स्टॉक जयपुर अकादमी कार्यालय मेें कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। अधिकारियों ने इनमें से एक भी कैटलॉग किसी को नहीं दिए जाने के कड़े निर्देश कर्मचारियों को दिए हैं। बताया जा रहा है कि वे मुंबई से लौटने के बाद इसका वितरण अपने अनुरूप करेंगें।
करीब सौ कलाकृतियां सजेंगी
उधर मूमल के मुंबई सूत्रों के अनुसार राजस्थान अकादमी के लिए बुक तीन दीर्घाओं के लिए 26 जून से 2 जुलाई तक के लिए शुल्क व अन्य खर्च के रूप में लगभग डेढ़ लाख रुपए से अधिक का भुगतान होगा। यह दीर्घाएं अकादमी को 26 जून को सुबह सौप दी जाएंगी। इन तीन दीर्घाओं में लगभग 100 कलाकृतियां लगाने के लिए स्थान है। कलाकृतियां लगाए जाने के बाद शाम को शो का औपचारिक उद्घाटन होगा।
( 147 चयनित कलाकारों की सूचि व अन्य जानकारियां देखें अगली खबर में )

गुरुवार, 14 जून 2018

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग
प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार रणजीत सिंह चूड़ावाला की कृति राजस्थानन ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी में लगाए जाने वाले ग्रुप शो में प्रमुखता से प्रदर्शित होगी। यह कृति चूड़ावाला के कला सफर का अन्तिम पड़ाव है। अकादमी की मांग पर चूड़ावाला ने मृत्यु से पूर्व अपनी यह कृति बनाकर अकादमी को भिजवाई थी।
राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में 26 जून से 2 जुलाई तक एक ग्रुप शो होने जा रहा है। इस शो में प्रदेश के लगीाग 100 वरिष्ठ व युवा कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कला को समर्पित चूड़ावाला जी ने अपनी खराब तबियत की परवाह किये बिना इस शो के लिए कृति चित्रित की। चूड़ावाला जी का जून को निधन हो गया और यह कृति उनके कला सफर का अन्तिम पड़ाव बन गई।
जीवन परिचय

10 मई 1934 को जोधपुर में जन्में रणजीत सिंह चूड़ावाला ने भारत के प्रसिद्ध कला संस्थान जे.जे. स्कृल ऑफ आर्ट से पेंटिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। उनके परिजन बताते हैं कि, अक्षरज्ञाान से पहले ही उन्हें ईश्वरीय तोहफे के रूप में रेखाओं का ज्ञान था। जीवनयापन के लिये भारतीय रेलवे को अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने कला जगत को अपनी कलाकृतियों के रूप में अनमोल धरोहर सौंपी।
कला को समर्पित चूड़ावाला के स्वभाव में प्रकृति की सौम्यता समाहित थी और मानस में कला की तलीनता। प्रकृति को अपनी कूंचि के जरिये कैनवास पर उतारने का उन्हें महारथ हासिल था। अपनी धुन के पक्के और प्रचार-प्रसार से अलग हटकर चलने वाले चूड़ावाला रेखांकन के मामले में दक्ष थे। प्रकृति और समाज के विभिन्न रूपों को अपने चित्रों में जीवन देने वाले इस कलाकार ने लघुशैली चित्रण में भी खासा काम किया। इनकी कृतियों में कन्टेम्पररी, रियलिस्टिक व मिनिएचर का अद्भुत समावेश था। जलरंग व तैलरंग के साथ काली स्याही से उकेरे गए उनके चित्र भावाभिव्यक्ति को सजीव करते हुए देखने वालों को मोहपाश में बांध देते थे। उनके द्वारा चित्रित रघुवंश, ऋतुसंहार व शकुंतला आधारित चित्र रंग संयोजन व रेखांकन के लिए कला विद्यार्थियों की प्रेरणा बनते रहे हैं। कला मेलों में मशीनी गति से हाथोंहाथ रेखाचित्र बनाकर सौंपना उनकी रुचि में शामिल था। कुछ अर्सा पहले मूमल से हुई एक मुलाकात में उन्होंने कला जगत के बदलते परिदृश्य, कलाकारों द्वारा जल्दी से जल्दी सफलता हासिल करने की प्रवृति और संस्थाओं द्वारा बीते जमाने के शिखर चित्रकारों को नजरअंदाज करने की बात को लेकर चिन्ता जताई थी। लेकिन अगले ही पल अपनी कला साधना के सुख को जीवन की प्रधानता स्वीकार करते हुए मुस्करा दिये थे।
जयपुर के राजभवन, जवाहर कला केन्द्र व राजस्थान ललित कला अकादमी के साथ अन्य संग्राहकों के पास संग्रहित उनकी कृतियां राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। कला को समर्पित चूड़ावाला जी के सम्मान में राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा उन्हें  फैलोशिप तथा कलाविद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त करने के साथ दो बार स्टेट अवार्ड भी जीते। अभी इसी वर्ष जनवरी में सम्पन्न कला मेले में उन्हें लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।
कला को अपना जीवन मानने वाले चूड़ावाला जी बढ़ती हुई आयु व अस्वस्थता की परवाह किये बिना मृत्यु परन्त अपनी कृतियों में रंग भरकर हमेशा के लिए अमर हो गए।                 -राहुल सेन

मंगलवार, 20 मार्च 2018

स्वपन के लिये प्रतीक्षा नहीं

स्वपन के लिये प्रतीक्षा नहीं
मूमल नेटवर्क, मुूबई।  जयपुर के युवा चित्रकार अमित हारित के चित्रों की आठवीं एकल कला प्रदर्शनी कॉन्ट वेट फॉर ड्रीम्स कल से जंहागीर आर्ट गैलेरी में सज गई है। प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ चित्रकार व लेखक अखिलेश ने किया ।
अमित के चित्रों के बारे में अखिलेश ने कहा कि अमित हारित एक ऐसे संजीदा चित्रकार हैं जिनकी रचनात्मकता का उभार उनके चित्रों में स्वप्नों के सफल होने की पूरी संभावना के साथ अभिव्यक्त होता है। वह एक सधे हुये कलाकार की तरह अपने स्वप्निल-संसार को मनचाहे आकारों और रंगों में चित्रित करने के प्रति सचेत दिखते हैं।
कहा जाता है कि स्वप्न प्राय: गहन निद्रा में दिखाई देते हैं जब व्यक्ति अपनी देह से बाहर की आत्म-यात्रा करते हुये भी वास्तविकता की प्रतीति करता है । अमित अपने इन चित्रों में उस अदृश्य को दृश्यमान तथा अनुपस्थित को उपस्थित करने में समर्थ लगते हैं जो उनके स्वप्न-संसार में दिखाई देता है।
अखिलेश ने कहा कि, अनेक लोग उस अवचेतन-अचेतन के अदृश्य और अनुपस्थित का आभ्यांतरीकरण करने हेतु प्रयत्नशील रहे हैं किन्तु वान गॉग की तरह बहुत कम लोग उसे अभिव्यक्त करने में सफल हो पाये हैं और मैं कहना चाहता हूँ कि वान गॉग और अमित के बीच इसके अतिरिक्त कोई स्पष्ट सम्बन्ध नहीं है कि वे दोनों ही चित्रकार हैं किन्तु वान गॉग जहाँ अपने स्वप्नों को चित्रित करते हैं वहीं अमित हारित अपना स्वप्न-संसार स्वयं रचते हैं।
यह प्रदर्शनी 25 मार्च तक चलेगी।