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शनिवार, 27 अक्टूबर 2018

जेकेके में बच्चों ने सीखा 3डी फेस स्ट्रक्चर बनाना

जेकेके में बच्चों ने सीखा 3डी फेस स्ट्रक्चर बनाना
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र में आयोजित इंडियन सिरेमिक्स ट्राइऐनियल के तहत स्कल्चर पर आधारित दो दिवसीय वर्कशॉप 'फेसेज' आयोजित की गई। इस वर्कशॉप का संचालन सिरेमिक आर्टिस्ट, राशि जैन द्वारा किया गया।
राशि जैन ने बताया कि इस कार्यशाला में भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम स्कूल के कक्षा 4 से 12 तक के 100 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। वर्कशॉप के दौरान  विद्यार्थिया् ने क्ले के स्वभाव एवं इतिहास के बारे में जाना और टेराकोटा फेस बनाये। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी बच्चों को 3डी फेस स्ट्रक्चर बनाने के लिये स्वयं के चेहेरे को आब्ज़र्व करने, फीचर्स महसूस करने और महत्वपूर्ण पॉईंट्स पर ध्यान केंद्रित करने के लिये कहा गया। आमतौर पर स्कूलों में किसी भी ऑब्जेक्ट को देखकर 2-डी फेस की ड्राईंग करना बताया जाता है। यह एक अनूठी कार्यशाला थी जिसमें बच्चों को मौलिकता और आत्म-अन्वेषण के लिये प्रोत्साहन किया गया। यह वर्कशॉप मुख्यत: स्कल्प्चर आर्ट का बेसिक इन्ट्रोडक्शन था।
उल्लेखनीय है कि इस वर्कशॉप के साथ ही ट्राइऐनियल के तहत बच्चों के लिये आयोजित वर्कशॉप्स की सीरीज का भी समापन हुआ। इस सीरीज के तहत कुल 6 कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इन कार्यशालाओं के आयोजन में अक्षरा फाउंडेशन ऑफ आट्र्स एंड लर्निंग द्वारा सहयोग किया गया। इस सीरीज के तहत पूर्व में रूबी झुनझुनवाला द्वारा मूवमेंट विद क्ले, केट मालोन द्वारा 'प्ले विद क्ले, अदिति सराओगी द्वारा कोइलिंग, स्लैबिंग एंड स्टैम्पिंग, कावेरी भारथ द्वारा स्केल्टिंग विथ फाईब्रस पेपर क्ले और रियाज बदरूद्दीन द्वारा मोजेक  वर्कशॉप्स आयोजित की गई।

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

द साइलेंट म्यूटेशन एग्जीबिशन 5 अक्टूबर से

द साइलेंट म्यूटेशन एग्जीबिशन 5 अक्टूबर से
मूमल नेटवर्क, जयपुर जेकेके की परिजात कला दीर्घा में 5 अक्टूबर से द साइलेंट म्यूटेशन एग्जीबिशन की शुरुआत होगी। आशु चावला और रिचा परसरामपुरिया द्वारा लगाई जा रही इस पेंटिंग एग्जीबिशन में जिंदगी के सरप्राइज की कहानी को अंकित किया है। प्रदर्शनी 7 अक्टूबर तक चलेगी।

रविवार, 19 अगस्त 2018

राजस्थान के युवा थिएटर निर्देशकों से आवेदन आमंत्रित

राजस्थान के युवा थिएटर निर्देशकों से आवेदन आमंत्रित
तीन युवा डायरेक्टर्स को दिए जाएंगे एक-एक लाख रूपए
जेकेके द्वारा युवा थिएटर डायरेक्टर्स को दी जायेगी वित्तीय सहायता
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान के युवा थिएटर डायरेक्टर्स को प्रोत्साहित करने और थिएटर में नवीन विचार लाने के उद्देश्य से जवाहर कला केंद्र  युवा थिएटर निर्देशकों को सहयोग रूप में वित्तीय अनुदान देगा। इसके तहत जेकेके द्वारा गठित थिएटर जूरी युवा निर्देशकों के तीन नाटकों का चयन करेगी। इन निर्देशकों को नाटक के विकास एवं निर्माण के लिए एक-एक लाख रूपए का वित्तीय अनुदान दिया जाएगा। प्रत्येक चयनित निर्देशक को एक वरिष्ठ थिएटर निर्देशक द्वारा मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।
इस अनुदान के लिए प्रस्ताव भेजने वाले निर्देशक की उम्र 18 वर्ष से 35 वर्ष होनी चाहिए। उन्हें थिएटर निर्देशन में न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए। आवेदन करने वाले निर्देशक द्वारा प्रस्तावित नाटक का पूर्व में मंचन नहीं होना चाहिए। आवेदन 25 अगस्त तक भेजे ज सकते हंै।

शुक्रवार, 22 जून 2018

शुरु हुई भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन

शुरु हुई भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन 
आज होगी मयंक मानसिंह कौल के साथ क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू
मूमल नेटवर्क, जयपुर। भारतीय वस्त्रों के इतिहास को दर्शाती टेक्सटाइल एग्जीबिशन 'न्यू ट्रेडिशंस: इन्फ्लुएंसेस एंड इंस्पीरेशंस इन इंडियन टेक्सटाइल्स, 1947-2017' की कल से जवाहर कला केंद्र में शुरूआत हुई। यह प्रदर्शनी मयंक मानसिंह कौल द्वारा क्यूरेट की गई है और रेहा सोढ़ी द्वारा डिजाइन की गई है। जेकेके द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी 31 जुलाई तक चलेगी और सार्वजनिक अवकाशों को छोड़कर प्रात: 11 बजे से सायं 7 बजे तक देखी जा सकेगी।
इस अवसर पर कौल ने कहा कि जब पारम्परिक वस्त्रों की बात आती है, तो अधिकांश लोग मानते है कि वस्त्र उद्योग में अधिक बदलाव नहीं आया है। हालांकि, गत 50 से 60 वर्षों में इस क्षेत्र में अत्यधिक गतिशीलता एवं नवीनता देखने को मिली है, जिसे दर्शाना इस एग्जीबिशन का लक्ष्य है। यहां प्रदर्शित कलाकृतियों को सम्बंधित वस्त्रों के ऐतिहासिक परिदृश्य को वर्तमान समय से जोडऩे का प्रयास किया गया है।
एग्जीबिशन में उन 50 से अधिक कलाकारों एवं डिजाइनरों की कलाकृतियां प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनका कार्य सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं वैज्ञानिक परिस्थितियों से अत्यधिक प्रभावित रहा है। प्रत्येक गैलरी में अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र एवं समयावधि को प्रतिबिंबित किया गया है। बोतलों के ढक्कनों एवं सिलिकॉन से बनी साडिय़ां; कांजीवरम एवं बनारसी साडिय़ां; खादी डेनिम; जरदोजी का नवीनीकरण; एम्ब्रॉयडरी एवं चिकनकारी और पारम्परिक बांधनी, आदि के साथ यह एग्जीबिशन डिजाइनर की जीवन यात्रा का ऐतिहासिक प्रतिबिंब है।
अत्याधुनिक एवं प्रयोगात्मक फैशन पर फोकस किया जाना इस एग्जीबिशन का एक विशेष आकर्षण है। ब्रांज, सिल्वर एवं गोल्ड जरी जैसे वर्क; क्लॉक डॉयल के रूप में मुकेश वर्क; रिसाइकल्ड मैटेरियल से बने वस्त्र तथा थ्री डी एम्ब्रॉयडरी जैसे विभिन्न वस्त्र दुनियाभर के देशों में पारस्परिक भारतीयकरण के प्रभावों का प्रतिक हैं।
उल्लेखनीय है कि आम लोगों के लिए आज दोपहर बाद 4 बजे मयंक मानसिंह कौल के साथ क्यूरेटोरियल वॉकथ्रू आयोजित की जाएगी।

शुक्रवार, 8 जून 2018

जेकेके में रविवार की सुबह होगी आर्ट परफॉमेंस के नाम

जेकेके में रविवार की सुबह होगी आर्ट परफॉमेंस के नाम
डॉ. कृष्णा महावर की कल्पना 'इन बिटविन द एलीमेंट्स ऑफ पेंटिंग्स, द बॉडी एंड द स्पेस' होगी साकार
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र में रवीवार  10 जून की सुबह आर्ट परफॉमेंस की प्रस्तुति होगी। यह आर्ट परफॉमेंस डॉ. कृष्णा महावर की परिकल्पना पर आधारित पेंटिंग के मूल सिद्धांतों से प्रेरित है जो केन्द्र के  फ्रंट लॉन में प्रात: 8 बजे आयोजित होगा। लगभग डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति को 'इन बिटविन द एलीमेंट्स ऑफ पेंटिंग्स, द बॉडी एंड द स्पेस' नाम दिया गया है। प्रस्तुति अधिकांशत: पेंटिंग्स में निहित उन सामान्य मौलिक सिद्धांतों पर केंद्रित है, जो कभी-कभी पेंटिंग्स में स्पष्ट दिखाई देते हैं अथवा अदृश्य रहते हैं।
यह आत्म-विश्लेषणात्मक परफॉर्मेंस बिना किसी पैन, पेंसिल, रंग या कैनवास के उपयोग के मात्र शरीर एवं खाली भूमि का उपयोग करते हुए प्रस्तुत किया जाएगा। यह एक नॉन-लीनियर और अमूर्त रचना है जिसमें पेंटिंग के छ: तत्वों के मूल अवधारणा शामिल हैं। इस प्रस्तुति में बताया जाएगा कि शरीर के माध्यम से किसी स्थान पर लाईन को किस प्रकार से अभिव्यक्त किया जा सकता है और किसी रिक्त स्थान पर स्वरूप को किस प्रकार से आकार दिया जा सकता है। इस परफॉर्मेंस का उद्देश्य मोमेंट्स, साउंडस् एवं बॉडी स्ट्रक्चर का उपयोग करते हुए अवधारणा में सुधार करना है।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

साइनोटाइप वर्कशॉप का हुआ समापन

साइनोटाइप वर्कशॉप का हुआ समापन
प्रतिभागियों ने सीखा एसिड-फ्री 'साइनोटाइप' प्रिंटमेकिंग आर्ट
मूमल नेटवर्क, जयपुर। साइनोटाइप प्रिंटमेकिंग की नॉन-टॉक्सिक तकनीकें सिखाने के लिए जवाहर कला केंद्र द्वारा आयोजित वर्कशॉप का कल समापन हुआ। रीफर्बिश ग्राफिक आट्र्स स्टूडियो में चल रही वर्कशॉप में छाप फाउण्डेशन की कविता शाह ने प्रतिभागियों को प्रिंटिंग की वैकल्पिक विधि ईको-फ्रेंडली प्रोसेस सिखाया।
कविता शाह ने बताया कि प्रिंट मेकिंग की वैकल्पिक प्रोसेस का उपयोग करके हम ना सिर्फ पर्यावरण बल्कि प्रिंट मेकर्स की रक्षा भी कर रहे हैं जो प्रिटिंग के दौरान विभिन्न विषैले रसायनों को श्वसन प्रक्रिया के दौरान ग्रहण करते हैं। नई पीढ़ी को इन तकनीकों को सिखाना इसलिए आवश्यक है ताकि वे जहरीले रसायनों का उपयोग नहीं करें। नई पीढ़ी इन वैकल्पिक तकनीकों को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है और दूसरों को इसके बारे में जानकारी भी दे सकती है।
इस वर्कशॉप में 10 प्रतिभागियों ने ब्लू प्रिंट मेकिंग के आसान तरीके सीखे। उल्लेखनीय है कि 'साइनोटाइप' वर्कशॉप जेकेके में फरवरी एवं मार्च माह में आयोजित की जा रही चार वर्कशॉप श्रृंखला की दूसरी कार्यशाला है। इन सभी वकशॉप्स का मुख्य फोकस पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गैर-विषैली सामग्री का उपयोग करना है। 

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

ब्लैकबोर्ड पर खिलखिलाया बचपन

ब्लैकबोर्ड पर खिलखिलाया बचपन
जेकेके में जर्मन आर्टिस्ट ने सजायी बच्चों की दुनिया
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कल जेकेके में छोटे बच्चों के मनोंरंजन का रंगबिरंगा दिन था। जर्मन कम्पनी थालिअस कॉम्पागनोंस की आर से पेश किये गए जेट ब्लैक एण्ड व्हाईट लिली कार्यक्रम में कलाकार ने ब्लैकबोर्ड पर व्हाईट चॉक से कहानियों के रंग भरे। बोर्छ पर बनती मछलिया, गढ़ते घर व बहता पानी ने च्चों को कल्पनाओं के संसार की सैर करायी। सुबह के समय जहां स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया वहीं 4 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चे शाम को अपने अभिभावकों के साथ नजर आए।

मंगलवार, 21 नवंबर 2017

'ख्वाब अभी जिन्दा हैं...में दिखे अध्यात्म के रंग उड़ान में नजर आई सपनों की हकीकत


'ख्वाब अभी जिन्दा हैं...में दिखे अध्यात्म के रंग
उड़ान में नजर आई सपनों की हकीकत
आज शुरु हुई तस्लीमा व राजवंशी की सोलो प्रदर्शनी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आज दोपहर को अमित राजवंशी की सोलो प्रदर्शनी 'ख्वाब अभी जिन्दा हैं... तथा तस्लीम जमाल की 'उड़ान का उद्घाटन हुआ। दोनों प्रदर्शनियों के मुख्य अतिथि के रूप में महाराजा मानसिंह द्वितीय संग्राहलय के निदेशक यूनुस खीमानी ने उद्घाटन किया। जवाहर कला केन्द्र की परिजात 2 गैलेरी में प्रदर्शित राजवंशी की प्रदर्शनी 'ख्वाब अभी जिन्दा हैं...' में लगभग 30 चित्र प्रदर्शित किये गए हैं। इनमें विष्णु व कृष्ण के अध्यात्म से जुड़े चित्रों के साथ समकालीन विषय पर बने चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में अमित के काम का नया अन्दाज देखने को मिला। इस प्रदर्शनी को राजवंशी ने अपने पिता तेजभान राजवंशी को समर्पित किया है।

राजवंशी के साथ ही बांसवाड़ा की तसलीम जमाल की परिजात 1 में प्रदर्शित प्रदर्शनी 'उड़ान' में तस्लीम के सपनों में ईमानदारी के रंग नजर आये। लगभग 50 चित्र प्रदर्शित किये गए हैं। जिसमें से 30 चित्रों की ब्लेक एण्ड व्हाइट श्रृंखला के ड्रीमलैण्ड है जबकि 20 चित्र माई विलेज श्रृंखला से हैं। अपने सपनों को कैनवास पर चित्रित करते हुए कलाकार ने अर्धचेतन मस्तिष्क में आने वाले विचारों की सजीवता का पूरा ध्यान रखा है।
पहले दिन ही वरिष्ठ कलाकारों के साथ कई सममनित जनों ने प्रदर्शनियों का अवलोकन कर कृतियों की सराहना की। वरिष्ठ आर्टिस्ट विद्वासागर उपाध्याय व मीनू श्रीवास्तव ने मुक्त कण्ठ से दोनों कलाकारों की कृतियों की प्रशंसा की और उन्हें कलाकर्म के महत्वपूर्ण टिप्स भी दिए। दोनों प्रदर्शनियां 23 नवम्बर तक चलेगी।

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

मोनो आर्ट ग्राफिक आर्ट वर्कशॉप 24 से

मोनो आर्ट ग्राफिक आर्ट वर्कशॉप 24 से
प्रिंटेड पिक्चर पर सेमीनार 23 को
मूमल नेटवर्क, जवाहर कला केन्द्र के ब्राफिक आर्ट स्टूडियो में मोनो आर्ट ग्राफिक आर्ट वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। 24 से 26 सितम्बर तक आयोजित होने वाली इस वर्कशॉप में कविता शाह द्वारा प्रतिभागियों को मोनो आर्ट ग्राफिक की बारीकियां सिखाई जाएंगी। वर्कशॉप में भाग लेने के लिए रुपये 2000 की फीस रखी गई है।
कल 23 सितम्बर को केन्द्र के रंगायन में प्रिंटेड पिक्चर पर सेमीनार का आयोजन किया गया है। यह सेमीनार तीन सेशन में होगी।

मंगलवार, 5 सितंबर 2017

जेकेके थियेटर की पहचान संदीप मदान नहीं रहे

जेकेके थियेटर की पहचान संदीप मदान नहीं रहे
मूमल नेटवर्क, जयपुर। वरिष्ठ रंगकर्मी व जवाहर कला केन्द्र के कार्यक्रम अधिकारी थियेटर संदीप मदान का कल रात ह्रदयगति रुक जाने से  निधन हो गया। जेकेके में एक कार्यक्रम की समाप्ति के बाद अपने पुत्र के साथ घर लौटते समय रास्ते में उन्हें दिल का दौरा पड़ा। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर्स द्वारा उन्हें मृत घोषित किया गया। अपने पीछे वो वृद्ध माता-पिता के साथ दो पुत्रों व पत्नी को छोड़कर गए हैं। उनकी पत्नी बबिता मदान भी रंगकर्मी हैं।
संदीप मदान की गणना प्रदेश के गंभीर रंगकर्मियों में की जाती थी। 49 वर्षीय संदीप पिछले 22 वर्षों से जेकेके के थियेटर विंग के कार्यक्रम अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपने कार्य के प्रति गम्भीर मदान ने चिल्ड्रन थियेटर के लिए भी अच्छा काम किया था। इनकी शवयात्रा आज शाम 4 बजे उनके निवास स्थान 3 ज 32 जवाहर नगर से आदर्शनगर मोक्षधाम जाएगी। मूमल के प्रति हमेशा से स्नेहिल रहे संदीप मदान को मूमल परिवार की ओर से अश्रुपूर्ण श्रृद्धांजलि।

बुधवार, 23 अगस्त 2017

जेकेके ने वित्तीय सहायता देने के लिए चुनी तीन महिला निर्देशक

जेकेके ने  वित्तीय सहायता देने के लिए 
 चुनी तीन महिला निर्देशक
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जेकेके में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली के सहयोग से जून में आयोजित की गई राष्ट्रीय स्तर की थियेटर वर्कशॉप की प्रतिभागियों में से तीन महिला निर्देशकों का ज्यूरी द्वारा वित्तीय सहायता के लिए चयन किया गया है। इन तीनों महिला निर्देशकों को एक-एक लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जायेगी। चुनी गई महिला लिर्देशक हैं, राजस्थान की मूमल तंवर व वाग्मी राघव तथा चंडीगढ़ की अम्बिका कमल। वित्तीय सहायता के साथ इन्हें नाटकों को तैयार करने में नेशनल स्कूल ऑफ  ड्रामा की फैकल्टी का मार्गदर्शन भी मिलेगा।
महिला निर्देशकों को चुनने के लिए गठित ज्यूरी मेम्बर थीं त्रिपुरारी शर्मा, कीर्ति जैन एवं नीलम मानसिंह।

जेकेके की थियेटर कलाकारों को वित्तीय सहायता देने की योजना

  
   जेकेके की थियेटर कलाकारों को 
वित्तीय सहायता देने की योजना
एक से छ: लाख रुपए तक की होगी वित्तीय सहायता
प्रस्ताव आमन्त्रित
अन्तिम तिथी 20 व 29 सितम्बर

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र द्वारा थियेटर कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तिय सहायता देने कका निर्णय लिया गया है। दी जाने वाली वित्तीय सहायता में युवाओं और महिलाओं को प्रमुखता दी जाएगी। वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए जेकेके ने राजस्थान के कलाकारों से प्रस्ताव आमन्त्रित किए हैं। केन्द्र द्वारा यह सहायता युवा निर्देशकों को प्रोत्साहित करने तथा  थिएटर जगत में महिला निर्देशकों की संख्या बढ़ाने के साथ थिएटर में नवाचारों को शामिल करने के उद्देश्य से दी जा रही है।
यह रहेगी प्रक्रिया
युवा निर्देशकों के लिए

प्राप्त प्रस्तावों में से जेकेके द्वारा गठित थिएटर विशेषज्ञों की राष्ट्रीय स्तर की ज्यूरी द्वारा युवा निर्देशकों के तीन नाटकों का चयन किया जाएगा। इन नाटकों के निर्देशकों को नाटक के निर्माण एवं तैयारी के लिए एक-एक लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्रदान किया की जायेगी।
युवा थियेटर निर्देशकों की श्रेणी में वित्तीय सहायता के प्रस्ताव भेजने के लिए निर्देशक की उम्र 18 से 35 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। साथ ही उन्हें थिएटर निर्देशन का कम से कम 3 वर्ष का अनुभव मांगा गया है। प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 20 सितम्बर, 2017 है।
चयनित नाटकों का जेकेके में दो बार मंचन किया जाएगा।
वरिष्ठ निर्देशक या थिएटर संस्था के लिए
एक वरिष्ठ निर्देशक या थिएटर संस्था को छह लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जायेगी। इसके लिए चुने गए थिएटर आर्टिस्ट या संस्था के नाटक का जेकेके में तीन बार मंचन किया जाएगा, जो एक बार 'नवरस' में भी शामिल होगा। इसमें आवेदन करने हेतु निर्देशक को कम से कम 5 वर्ष का निर्देशन अनुभव मांगा गया है। प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 29 सितम्बर 2017 है।

सोमवार, 14 अगस्त 2017

'आभास' में निशक्त की शक्ति

'आभास'  में निशक्त की शक्ति

मूमल नेटवर्क, जयपुर। इन दिनों जेकेके में प्रिन्ट आर्ट पर आधारित तीन प्रदर्शनियां लगी हुई हैं। पिछले दिनों प्रदर्शनी के दौरान टेक्टाईल आर्ट एक्सपीरियंस वर्कशॉप का आयोलन किया गया जिसमें करीब 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विशेश बच्चों के लिए आयोजित इस वर्कशॉप में उमंग स्कूल, आरएनकेएस ब्लाइंड स्कूल तथा सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर संस्थान के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
इसके प्रतिभागियों को ब्रेल टेक्टाईल पेंटिंग्स, लार्ज स्क्रिप्ट फॉन्ट्स एवं साइन इंटरप्रेटर्स के बारे में सिखाया गया। इस वर्कषॉप का उद्देश्य आर्ट एग्जीबिशंस को एक्सेसबल तथा डिसेबल फ्र्रेंडली बनाना था। वर्कशॉप का एक उद्देश्य सभी के लिए समान भाव सेकला को सुलभ बनाना भी था।

प्रदर्शनी को डिसेबल फे्रंडली बनाने के लिए विषेष योग्यजनों को आर्ट गैलरीज में प्रिंट्स छूने की स्वतन्त्रता दी गई।। प्रतिभागियों को प्रिंट मेकिंग की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी गई और भारत में पिं्रट मेकिंग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में भी बताया गया। सभी संस्थाओं से आए हुए बच्चों ने प्रिंट तकनीक की सरलतम जानकार प्राप्त करने का आनन्द लिया। यह वर्कशॉप हेरिटेज आर्किटेक्ट तथा एक्सेस फॉर ऑल के सिद्धांत शाह के सहयोग से डीएजी मॉडर्न द्वारा आयोजित की गई थी।

सोमवार, 7 अगस्त 2017

प्रिन्ट आर्ट की यात्रा को दर्शाती प्रदर्शनियां

प्रिन्ट आर्ट की यात्रा को दर्शाती प्रदर्शनियां

राजस्थान भी शामिल

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जेकेके की म्यूजियम आर्ट गैलेरीज में इन दिनों प्रिन्ट आर्ट पर आधारित तीन प्रदर्शनियां दर्शकों को खासा आकर्षित कर रही हैं। इनमें 'प्रिन्टआर्ट फ्रॉम राजस्थान' प्रदर्शनी में प्रदेश के 17 कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी 'खेल' में गंजीफा व सांप सीढ़ी जैसे खेलों को दर्शाया गया है जबकि 'द प्रिन्टेड पिक्चर प्रदर्शनी' में इस विधा की चार शताब्दियों की यात्रा को दर्शाया गया है। 5 अगस्त को आरम्भ हुई्र इन प्रदर्शनियों का समापन लगभग 2 माह पश्चात 8 अक्टूबर को होगा।
इस प्रदर्शनी में राजस्थान, भारत और विदेश में प्रिन्ट मेकिंग के इतिहास और इसे तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।
'द प्रिन्टेड पिक्चर'
इसमें गत चार शताब्दियों में भारतीय प्रिन्ट मेकिंग की स्थापना से लेकर अब तक की महत्वपूर्ण यात्रा प्रदर्शित की गई है। प्रिन्ट मेकिंग के कोलोनियल एंटरप्राइज से लेकर 18वीं शताब्दी में प्रिन्टिंग उद्योग के विकास को देखने-समझने का अनुभव सुखद है। यह भी बताया गया है कि भारतीय प्रिंट में शिल्पकारों से लेकर आर्ट स्कूल से प्रशिक्षित कलाकारों का कैसा योगदान रहा। इस प्रदर्शनी को कलाविद एवं शोधार्थी डॉ. पाउला सेनगुप्ता द्वारा क्यूरेट किया गया है।
'खेल'
इस प्रदर्शनी में 14 विभिन्न देशों के कलाकारों द्वारा भारत और मध्यपूर्व में ईजाद किये गये तीन प्राचीन खेलों जैसे कि गंजीफा, सांप-सीढ़ी और शतरंज को बुद्धिमतापूर्ण एवं बेहतरीन तरीके से दर्शाया गया है। जीवन के अनेक विरोधाभासों को प्रदर्शित करने वाले इन खेलों को कलाकारों ने सामाजिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण के अनुरूप प्रदर्शित किया है। इस प्रदर्शनी को बड़ोदा निवासी प्रख्यात प्रिन्ट मेकर कविता शाह द्वारा क्यूरेट किया गया है।

'प्रिन्ट्स फ्रॉम राजस्थान'
इस प्रदर्शनी में राजस्थान के प्रमुख कलाकारों की कला को प्रदर्शित किया गया है। बताया गया है कि गत पांच दशकों में भारत में इस शैली को सिखाने-बढ़ाने में इनका क्या योगदान रहा। प्रदर्शनी में जयपुर, उदयपुर व वनस्थली के साथ प्रदेश से बाहर दिल्ली मुबई में बसे 17 कलाकारों के काम को प्रदर्शित किया गया है। एक लम्बे अर्से के बाद राजस्थान के कई वरिष्ठ व अनुभवी प्रिन्ट मेकर्स की कृतियों को देखना सुखद है। प्रदर्शनी में वरिठ कलाकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय तथा प्रो. सुरेश शर्मा के साथ शैल चोयल, शाहिद परवेज, मनोज टेलर, भवानी शंकर शर्मा, विनय शर्मा, मुकेश शर्मा, दिलीप शर्मा, योगेन्द्र नरूका, गौरी शंकर सोनी, मीना बया, ज्योतिका राठौड़, डिम्पल चाण्डत, महेश सिंह, सुनील निमावत तथा रामगोपाल कुमावत का काम एकसाथ देखा जा सकता है। इस प्रदर्शनी को भी कविता शाह द्वारा क्यूरेट किया गया है।
सोमवार को छोड़कर शेष सभी दिन प्रदर्शनियां देखी जा सकती हैँ।