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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

अवध आर्ट फस्टिवल 2020 में जयपुर आर्ट समिट के रंग

अवध आर्ट फस्टिवल 2020 में जयपुर आर्ट समिट के रंग
सृजन पर चर्चा में जयपुर आर्ट समिट के निदेशक एस.के. भट्ट
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के रीजनल सेन्टर पर आज से अवध आर्ट फेस्टिवल 2020 का आगाज़ हो रहा है। फेस्टिवल में  40 कलाकारों की 150 से अधिक कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें कला की विभिन्न विधाओं के साथ  दिल्ली, बंगाल, आसाम, बंैगलोर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा व राजस्थान सहित देशभर के कलाकारों की भागीदारी रहेगी।
फेस्टिवल में सृजन पर चर्चा के कार्यक्रम के तहत कला जगत के जाने माने हस्ताक्षर अपने विचार व्यक्त  करेंगे। चर्चा का विषय है: रचनात्मकता एक देशी जुबान है। इस चर्चा में जयपुर आर्ट समिट के संस्थापक निदेशक, कला समीक्षक व ब्लॉगर श्री शैलेन्द्र भट्ट, नाद रंग के संपादक व कवि श्री आलोक पराडकर, फैडेरेशन ऑफ इंडियन फोटोग्राफी के अध्यक्ष व प्रसिद्ध छाया चित्रकार श्री अनिल रिसाल सिंह तथा बंगाल आर्ट फाउण्डेशन के निदेशक व कलाकार श्री अशोक राय अपनी उपस्थिति देंगे।
शहर में यह अफोर्डेबल आर्ट फेयर का दूसरा संस्करण है जिसका संयोजन आर्टिस्ट कीर्ति साहू कर रहे हैं। फेस्टिवल का समापन 3 मार्च को होगा।

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

कन्यादह फिर चर्चा में


कन्यादह फिर चर्चा में
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में आयोजित समानांतर साहित्य उत्सव में वरिष्ठ पत्रकार राहुल सेन लिखित उपन्यास कन्यादह पर चर्चा हुई। कला पर अपने कोटेशन्स के कारण प्रसिद्धि में आई इस पुस्तक ने एक बार फिर कला जगत को चर्चा स्थल पर एकत्रित किया। प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित इस उत्सव के मंच किताब गुवाड़ी में 'कन्यादह' पर खुली चर्चा करने के लिए लेखक के साथ कला इतिहासकार व सिटी पैलेस म्यूजियम की डायरेक्टर डॉ. रीमा हूजा व जाने-माने कलाकार श्री रामकिशन अडिग उपस्थित थे। 
चर्चा के दौरान लेखक से पूछे गए बेबाक सवालों और जवाबों ने उपस्थित जन को रोमांचित व प्रभावित किया। खुली चर्चा के बीच अंतत: कन्यादह के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। विशेषकर कला जगत की स्थिति व उसमें व्यापत दड़ेबंदी और राजनीति का बेबाकी से उल्लेख हुआ।
कन्यादह की चर्चा को सुनने के लिए कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे जिनमें जयपुर आर्ट समिट के डायरेक्टर श्री एस. के. भट्ट, वरिष्ठ कलाकार श्री आर.बी गौतम व समिट की प्रशासनिक टीम, राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट की पूर्व प्रिंसिपल डॉ. प्रतिभा यादव, वरिष्ठ चित्रकार डॉ. जगमोहन माथोडिय़ा, डॉ. रीता पाण्डे, श्रीमती पूर्णिमा कौल, डॉ. विवेकानन्द गोस्वामी, मै. एम्पोरिया डी.आर के डायरेक्टर श्री दीपक सांकित, इनरव्हील क्लब की पूर्व गवर्नर श्रीमती रश्मि मिश्रा व अन्य सम्माननीय अतिथि शामिल थे। उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक का विमोचन जयपुर आर्ट फेस्टिवल में किया गया था।

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2018

दीपक सांकित नवाजे जाएंगे राजा भगवंत दास अवार्ड से


दीपक सांकित नवाजे जाएंगे राजा भगवंत दास अवार्ड से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। युवा शिल्पकार दीपक सांकित कल शाम राजा भगवंत दास अवार्ड से नवाजे जाएंगे। दीपक को यह सम्मान मीनाकारी में चांदी पर कंटेम्पररी प्रयोग की उत्कृष्ट शिल्पकारी के लिए दिया जा रहा है। 
महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा प्रदान किए जाने वाले इस सम्मान के लिए दीपक द्वारा बनाए गए कफलिंग्स व बटन की कंटेम्पररी शैली  की मीनाकारी को चुना गया। जिस पर दीपक ने मुगल शैली के मोटिफ को प्रस्तुत किया है। कल 31 अक्टूबर की शाम सिटी पैलेस में होने वाले भव्य समारोह में दीपक को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। सम्मान स्वरूप उन्हें 31,000 रूपये नकद, शॉल, सिटी पैलेस के सर्वतोभद्र चौक में रखी रजत कलश की प्रतिकृति, प्रशस्ति पत्र और श्रीफल दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि, यह समारोह ब्रिगेडियर स्वर्गीय एच.एच. महाराजा सवाई भवानी सिंह स्मरण में आयोजित किया जा रहा है जिसमें दीपक सांकित सहित 24 पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों में दिये जायेंगे।

एक लम्बे अर्से से दीपक सांकित मीनाकारी में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य मीनाकारी जैसी महंगी व अभिजात्य वर्ग तक सीमित रहने वाली कारीगरी को आम लोगों तक की पहुंच व पसन्द तक लाना रहा है। अभी हाल ही में मीनाकारी से बनाए गए फोटोफ्रेम पर उन्हें वल्र्ड क्राफट काउंसिल के एक्सीलेंसी अवार्ड के लिए भी चुना गया है। दीपक की कला का जलवा कुछ दिन पहले ही जयपुर में आयोजित राजस्थान हैरीटेज फैशन वीक तथा राजस्थान फैशन वीकएण्ड के मंच से देश-विदेश के कला पारखी देख चुके हैं।
दीपक को मीनाकारी की विरासत अपने पिता राजकुमार सांकित व दादा दीनदयाल मीनाकार से मिली है। दीपक के दादा व पिता को बेहतरीन मीनाकारी के लिए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सममानित किया जा चुका है। इसी कड़ी में दीपक सांकित को भी भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने नेशनल सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है।

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

जयपुर के यवा मीनाकार दीपक सांकित को वर्ल्ड क्राफ्ट काउंसिल का अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस



जयपुर के यवा मीनाकार दीपक सांकित को

वर्ल्ड क्राफ्ट काउंसिल का अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस

मूमल नेटवर्क, जयपुर। युवा आर्टिस्ट दीपक सांकित को वर्ल्ड क्राफ्ट काउंसिल के अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस 2018 के लिए चुना गया है। आने वाले दिनों में उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। दीपक को यह अवार्ड अपने काम के प्रति समर्पणता व मीनाकारी में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए दिया जा रहा है।

रविवार, 21 अक्टूबर 2018

कला प्रदर्शनी संकलन- ए कलेक्शन की हुई शुरुआत

कला प्रदर्शनी संकलन- ए कलेक्शन की हुई शुरुआत
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। सी.ऐस.ओ.आई. आर्ट गैलरी व  ललित कला अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कला प्रदर्शनी संकलन- ए कलेक्शन का कल 20 अक्टूबर को उद्घाटन हुआ। प्रदर्शनी का उद्घाटन संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुण गोयल व फॉरमर कैबिनेट सचिव अजीत सेठ ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर ललित कला अकादमी अध्यक्ष उत्तम पछारन, प्रख्यात मूर्तिकार अद्वैता गाडनायक एवं जानी-पहचानी कलाकार अर्पणा कौर उपस्थित थे।
इस प्रदर्शनी में राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी, बिहार, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों के 30 कलाकारों की लगभग 150 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। कलाकारों में राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के कलाकार सौरभ भट्ट के साथ गणपत भड़के, रघु नेवारा, अर्पिता रेड्डी, किरण सोनी गुप्ता सहित कई कलाकारों के काम प्रदर्शित किए गए हैं।
ललित कला अकादमी की दीर्घा में आयोजित इस प्रदर्शनी के समापन के साथ यही प्रदर्शनी दिल्ली की आए. टी. आर. आर्ट गैलरी में भी आयोजित होगी।

शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

जयपुर आर्ट समिट, मेट्रो संस्करण 2018


जयपुर आर्ट समिट, मेट्रो संस्करण 2018

सफल रहा जयपुर के बाहर समिट का मेट्रो संस्करण

-राहुल सेन
मूमल नेटवर्क, जयपुर/नई दिल्ली। जयपुर में लगातार पांच वर्ष तक अपना परचम लहराने के बाद जयपुर आर्ट समिट ने अपने आयोजन को विस्तार देकर राजस्थान के बाहर कामयाब कदम बढ़ाए हैं। जयपुर आर्ट समिट का पहला मेट्रो संस्करण दिल्ली में सफलता पूर्वक आयोजित हुआ। यह संस्करण 'क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्टÓ विषय पर आधारित था। जिसमें दृश्य कला के तहत सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रमुखता देते हुए भारत एवं अन्य देशों के मध्य कला कार्यक्रमों को तय करना था। आयोजन का उद्देश्य कला प्रदर्शनियों, कला वार्ता, कला प्रतियोगिताओं और कला कार्यशालाओं के जरिये देश के युवा कलाकारों की रचनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना था।
अपने छठे संस्करण के रूप में जयपुर के बाहर आयोजन कर समिट ने अपनी ऊंची उड़ान की  झलक दिखा दी है। युवाओं को केन्द्र में रखकर बुने गए आयोजन में इस बार जयपुर व राजस्थान से बाहर के युवा कलाकारों को समिट ने देश की राजधानी में मंच प्रदान किया। अपने इस मेट्रो संस्करण में स्थापित विदेशी और भारतीय कलाकारों के साथ दस युवा कलाकारों की कुछ बेहतरीन कलाकृतियों की युगलबंदी प्रस्तुत कर समिट ने आने वाले समय के बेहतरीन कलाकारों की एक बानगी प्रस्तुत की है।
एक सप्ताह तक कला प्रेमियों को लुभाने वाले इस त्रिआयामी कार्यक्रम में भारत के साथ दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, बेल्जियम और बांग्लादेश के बाईस कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर मेट्रो संस्करण के इस कला उत्सव में रंग भरे। स्थापित कलाकारों के साथ कॉलेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भागीदारी अनुकरणीय रही। प्रति वर्ष कुछ हटकर और नया करने का समिट आयोजकों का प्रयास निश्चित रूप से भारत के कला जगत को नई कला सौगात देने के लिए पहचाना जाएगा।

शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

शिखर से समंदर तक में दिखी जर्नलिस्ट की दृष्टि


शिखर से समंदर तक में दिखी जर्नलिस्ट की दृष्टि
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र की चतुर्दिक आर्ट गैलरी में जयपुर फोटो जर्नलिस्ट एसोसिशन की दूसरी नेशनल फोटो एग्जीबिशन सजी हुई है। 12 सितम्बर से आरम्भ हुई इस सात दिवसीय एग्जीबिशन शिखर से समंदर तक में 9 राज्यों के 49 फोटोजर्नलिस्ट की 150 तस्वीरों को सजाया गया है।
इस एग्जीबिशन में भारतीय जनजीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं से जुड़ी छवियां हैं और साथ में हैं देश के हिस्टोरिकल मोन्यूमेंट्स, विभिन्न प्रदेशों में पाए जाने वाले पशु-पक्षी और प्रकृति के नजारे। शहर की आईसीए गैलेरी की पहल से आयोजित की गई इस एग्जीबिशन का उद्घाटन आर्ट एंड कल्चर डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिव डॉ. कुलदीप रांका और राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम. दलवी ने किया।

दिवंगत फोटोग्राफर्स को दी श्रृद्धांजलि
इस अवसर पर दैनिक भास्कर सीकर के मनोज राठौड़, नोएडा नेशनल दुनिया के ओमपाल शर्मा, इंडियन एक्सप्रेस दिल्ली के रवि कनौजिया को उद्घाटन से पूर्व कुछ क्षणों का मौन रखकर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। उल्लेखनीय है कि इन तीनों फोटो जर्नलिस्ट द्वारा लिए गए फोटोग्राफ्स को भी एग्जीबिशन में प्रदर्शित किया गया है। इस एग्जीबिशन का समापन 18 सितम्बर को होगा।

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

जनजातीय व लोक कलाएं हों सार्वजनिक-राजीव सेठी

जनजातीय व लोक कलाएं हों सार्वजनिक-राजीव सेठी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। विलुप्त होती जा रही लोक एवं जनजातीय कलाओं को प्रदर्शनी और कला दीर्घाओं से बाहर निकालकर सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित किए जाने से ही उनका संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सकता है। एयरपोर्ट, रेल्वे स्टेशन और बस स्टैण्ड आदि सार्वजनिक स्थान ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में आमजन का आवागमन होता है। ऐसे में इन कलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किए जाने से लोगों में उनके प्रति जागरूकता बढ़ेगी। यह कहना था एशियन हैरिटेज फाउण्डेशन, नई दिल्ली के संस्थापक एवं अध्यक्ष राजीव सेठी का। सेठी ने यह वक्तव्य राजस्थान ललित कला अकादमी एवं भारतीय शिल्प संस्थान जयपुर के संयुक्त तत्वावधान आयोजित संगोष्ठी में अपने प्रजेन्टेशन ‘‘मैं आदिवासी हूं’’ में दिया।
तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी एवं कला प्रदर्शनी का उद्घाटन राजस्थान सरकार के पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख शासन सचिव कुलदीप रांका ने 29 अगस्त को दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर एशियन हैरिटेज फाउण्डेशन, नई दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष राजीव सेठी, राजस्थान ललित कला अकादमी अध्यक्ष अश्विन एम. दलवी, सचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार सोनी, भारतीय शिल्प संस्थान की निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता, वरिष्ठ कलाविद् सी.एस. मेहता, मिन्हाज़ मजूमदार, चित्रकार पद्मश्री शाकिर अली, अकादमी प्रदर्शनी अधिकारी विनय शर्मा सहित कला जगत के कई गणमान्य उपस्थित थे।

उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता एशियन हैरिटेज फाउण्डेशन, नई दिल्ली के संस्थापक एवं अध्यक्ष राजीव सेठी थे। सेठी ने अपने प्रजेन्टेशन में भारत के विभिन्न राज्यों के लोक एवं जनजातीय जीवन की छवि प्रस्तुत की, जिनमें उन्होंने आदिवासियों का रहन-सहन, खान-पान, लोक कलाओं और संस्कृति पर विस्तार से जानकारी साझा की। इसके साथ उन्होंने लोक जनजीवन के रीति-रिवाजों की प्राचीनता के साथ आधुनिकता का समावेश दर्शाया। संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सेठी ने कहा कि आधुनिक समय में एनीमेशन का कलात्मक प्रयोग बहुत हो रहा है, लेकिन एनीमेशन स्टोरीज भारतीय कथाओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जा रही हैं।
राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष अश्विन एम. दलवी ने कहा कि अकादमी का प्रयास है कि हम अन्य संस्थानों के साथ मिलकर फोक एण्ड ट्राइबल आर्ट को आमजन तक पहुंचाएं। इसी कड़ी में इस तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है ताकि कला से जुड़े शोधार्थियों, कलाविदें एवं हर वर्ग तक इनके संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा सके। भारतीय शिल्प संस्थान की निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता ने कहा कि संगोष्ठी में संस्थान के क्राफ्ट और डिजाइन फैकल्टीज के अलावा देश के विभिन्न स्थानों से आए कलाविदों के ज्ञान का लाभ स्थानीय कलाकारों और कला के विद्यार्थियों को मिलेगा।
राजस्थान ललित कला अकादमी के सचिव डॉ. सुरेन्द्र कुमार सोनी ने बताया कि संगोष्ठी के अन्य सत्र ‘‘ट्रेडिशनल ऑर्ट फॉम्र्स अ क्रॉस द वल्र्ड: एक्सपोजर, लर्निंग एण्ड फ्यूचर स्कोप’’ को नई दिल्ली से आई कलाविद् मिन्हाज मजूमदार, सिटी पैलेस के प्रो. यूनूस खिमानी एवं आदित्य ज्ञा ने सम्बोधित किया, वहीं सत्र ‘‘फोक एण्ड ट्राइबल आर्ट टेऊडिशन्स: रिवाइवल मॉडल्स फॉर लर्निंग’’ में नई दिल्ली से आए कलाविद् चन्द्रशेखर भेड़ा, प्रो. चिन्मय मेहता और भारतीय शिल्प संस्थान की प्रो. पाम्पा पंवार ने परिचर्चा की।
संगोष्ठी के दूसरे दिन 30 अगस्त के पहले सत्र मेें ‘‘कन्टेम्पराइजिंग इंजीनियस क्राफ्ट्स थ्रू स्टाइल एण्ड लग्जरी इन्टरप्रिटेशन्स’’ को फ्रांस से आईं आर्ट क्यूरेटर वेण्डी गेयर, बड़ौदा से प्रो. जयराम पौडवाल, सारिका नारायण तथा निवेदिता नारायण ने सम्बोधित कियो। दूसरे सत्र ‘‘एक्सपीरियन्स ऑफ आर्चीविंग शोकेसिंग फोक एण्ड ट्राइबल आर्ट’’ में जयपुर के बृज भसीन, भूपेश तिवारी, सुमन पाण्डे एवं रेखा भटनागर के बीच परिचर्चा हुई। इसके साथ ही तीसरा सत्र ‘ट्रेडीशनल आर्ट फार्मस अक्रोस द वल्र्ड-एक्सपोजर, लर्निंग एण्ड फ्यूचर स्कोप‘’ सम्पन्न हुआ।
इस आयोजन में फोक व ट,ाईबल आर्ट प्रदर्शनी भी लगाई गई है। प्रदर्शनी को मिहाज मजूमदार ने क्यूरेट किया है। आयोजन का समापन कल 31 अगस्त को होगा।

रविवार, 19 अगस्त 2018

राजस्थान के युवा थिएटर निर्देशकों से आवेदन आमंत्रित

राजस्थान के युवा थिएटर निर्देशकों से आवेदन आमंत्रित
तीन युवा डायरेक्टर्स को दिए जाएंगे एक-एक लाख रूपए
जेकेके द्वारा युवा थिएटर डायरेक्टर्स को दी जायेगी वित्तीय सहायता
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान के युवा थिएटर डायरेक्टर्स को प्रोत्साहित करने और थिएटर में नवीन विचार लाने के उद्देश्य से जवाहर कला केंद्र  युवा थिएटर निर्देशकों को सहयोग रूप में वित्तीय अनुदान देगा। इसके तहत जेकेके द्वारा गठित थिएटर जूरी युवा निर्देशकों के तीन नाटकों का चयन करेगी। इन निर्देशकों को नाटक के विकास एवं निर्माण के लिए एक-एक लाख रूपए का वित्तीय अनुदान दिया जाएगा। प्रत्येक चयनित निर्देशक को एक वरिष्ठ थिएटर निर्देशक द्वारा मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।
इस अनुदान के लिए प्रस्ताव भेजने वाले निर्देशक की उम्र 18 वर्ष से 35 वर्ष होनी चाहिए। उन्हें थिएटर निर्देशन में न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए। आवेदन करने वाले निर्देशक द्वारा प्रस्तावित नाटक का पूर्व में मंचन नहीं होना चाहिए। आवेदन 25 अगस्त तक भेजे ज सकते हंै।

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

स्टेट अवार्ड व छात्र कला प्रदर्शनी की नई तारीखें

स्टेट अवार्ड व छात्र कला प्रदर्शनी की नई तारीखें 
छात्रों की पुरस्कार राशि अब 10 हजार
मूमल नेटवर्क, जयपुर। (संशोधित) राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार 60वें स्टेट अवार्ड के आवेदन की अन्तिम तिथि 10 सितम्बर और 39वीं छात्र कला प्रदर्शनी के आवेदन की अन्तिम तिथि 18 सितम्बर है। इसी के साथ छात्र कला प्रदर्शनी में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए दी जाने वाले पुरस्कार राशि को पांच हजार रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया गया है। इस वर्ष दस श्रेष्ठ कृतियों के छात्र कलाकारों को 10-10 हजार रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

एक ब्रश राष्ट्र के नाम का अगला पड़ाव टोंक में

एक ब्रश राष्ट्र के नाम का अगला पड़ाव टोंक में
मूमल नेटवर्क, कोटा। मात्र 8 से 60 वर्ष की आयु के कलाकारों की राष्ट्र को समर्पित कला यात्रा 'एक ब्रश देश के नाम' का अगला पड़ाव 15 और 16 जुलाई को टोंक में होगा।
सन् 1857 से 1947 के बीच घटित ऐतिहासिक गाथाओं को कला के माध्यम से जीवित कर राष्ट्र भर में प्रदर्शित करने का एक अनूठा प्रयास कोटा के कलाकारों की टीम द्वारा किया जा रहा है। टीम की मेंबर व आयोजन की संयोजक डॉ मुक्ति पाराशर ने बताया कि, 'एक ब्रश देश के नाम' थीम का यह आयोजन पूरे देश भर में चलाया जाएगा। आयोजन की शुरुआत इसी वर्ष जनवरी में कोटा की आर्ट गैलेरी से की गई। इसके बाद मार्च में आयोजन की अगली कड़ी के रूप में भोपाल के स्वराज भवन में स्वतन्त्रता सैनानियों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई गई।
डॉ मुक्ति ने बताया कि, आयोजन का अगला पड़ाव टोंक में 15 व 16 जुलाई को होगा। इसमें डॉ. मुक्ति पाराशर के साथ मुख्य रूप से  अनुपम पंवार, ज्योत्सना, राकेश शर्मा, अब्दुल राशिद, अतुल शर्मा, सीमा शर्मा, विजयेन्द्र, भव्या, कविता परिहार, मल्लिका शाह इत्यिादि 30 कलाकारों की 60 पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया जाएगा।
टोंक के बाद अगस्त में जयपुर में प्रदर्शनी लगेगी। डॉ मुक्ति ने कहा कि, अगस्त में ही महरात्मा गांधी की 150वीं जयन्ति के अवसर पर दिल्ली राजघाट पर भी प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।अपर आधा
इस प्रकार के आयोजन का विचार कैसे आया? यह पूछने पर डॉ मुक्ति ने कहा कि, एक बार टीम मेम्बर्स ने जब छोटे बच्चों से सुखदेव व भगतसिंह के लिए पूछा तो वो कोई जवाब नहीं दे पाए। इसलिए नई जनेरेशन को संदेश देने के लिए 'एक ब्रश राष्ट्र के नाम, कुछ रंग राष्ट्रवाद के नामÓ से सिलसिलेवार प्रदर्शनियों के आयोजन का निर्णय लिया गया।
(फाइल फोटो)

आर्ट टीचर्स की पहली आर्ट एग्जिबीशन शुरू

आर्ट टीचर्स की पहली आर्ट एग्जिबीशन शुरू 
मूमल नेटवर्क, चंडीगढ़। चण्डीगझ़ ललित कला अकादमी आयोजित पहली आर्ट टीचर एग्जिबीशन कल से शुरु हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन चीफ गेस्ट के रूप में आमन्त्रित होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता और गेस्ट ऑफ ऑनर टूरिज्म डायरेक्टर जितेंद्र यादव  ने किया। बेहतरीन कलाकृतियों के रूप में में तीन टीचर्स के कार्य को 25000 रुपये से एवं मेरिट सर्टिफिकेट के साथ पांच आर्ट टीचर्स को 5-5 हजार की राशि से सम्मानित किया गया।
पहली बार आयोजित हो रही आट्र टीचर्स एग्जीबिशन में 64 कृतियों को प्रदर्शित किया गया है। बेहतरीन कृतियों के लिए तीन आर्ट टीचर्स संजीव कुमार, भारती शर्मा और तुलसी राम प्रजापति को 25-25 हजार रुपए की राशि से सम्मानित किया गया। इन के साथ पांच मेरिट सर्टिफिकेट्स के साथ 5-5 हजार रुपए की राशि के साथ  रीना भटनागर, ममता मार्शल, मनीषा वर्मा ,  बिबेकानंद कापरी, साधना कुमार एवं हरनीत कौर को सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी के लिए उत्साहित 133 टीचर्स ने अपने आर्ट वर्क भेजे थे। उसमें से 64 आर्ट वर्क को सिलेक्ट किया गया।
यह है खास आर्ट वर्क की कहानियां
भवन विद्यालय-15 पंचकूला में आर्ट टीचर संजीव कुमार की तस्वीर एक ट्रेन की है, जिसमें से लोग बाहर झांक रहे हैं। इसमें खास है एक बच्चा जिसके चेहरे के खास एक्सप्रेशन को संजीव ने अपने कैमरा में कैद किया। संजीव ने कहा कि वह चंडीगढ़ से दिल्ली एक अवार्ड फंक्शन में जा रहे थे, कैमरा साथ था। चंडीगढ़ स्टेशन पर जाते ही, उन्हें ये दृश्य देखने को मिला जहां एक गाड़ी आकर रुकी, तो मैंने भी इस गाड़ी डिब्बे की फोटो ली, जिसमें से लोग बाहर झांक रहे थे। बाद में इसे ब्लैक एंड व्हाइट टैक्चर दिया। इस प्रदर्शनी के लिए भेजा तो पता लगा कि इसमें भी मुझे अंवॉर्ड मिल गया। सूखे पेड़ों पर तराश रहा था कला, प्रदर्शनी के लिए लकड़ी पर तराशी
गवर्नमेट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कैंबाला में आर्ट टीचर के रूप में कार्यरत तुलसी राम प्रजापति का स्कल्प्चर सोच और सपनों में बंधे इंसान को दिखाता है। इसमें एक इंसान के स्कल्प्चर को बनाया गया है, फिर इसे एक तार से जकड़ा हुआ बनाया गया। तुलसी ने कहा कि उन्हें लकड़ी पर आर्ट वर्क तैयार करना पसंद है। इससे पहले चंडीगढ़ में स्थित सूखे पेड़ों पर उन्होंने अपने आर्ट वर्क तैयार किए। प्रदर्शनी के लिए खास तौर पर इस स्कल्प्चर को उन्होंने तैयार किया। दो पीढिय़ों के रिश्ते और दूरी को दिखाया है पेंटिंग में
गवर्नमेट मॉडल मिडिल स्कूल, मनीमाजरा में आर्ट टीचर भारती शर्मा ने पेंटिंग कैटेगरी में प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी पेंटिंग दो पीढिय़ों के फर्क और रिश्ते को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि पेंटिंग दरअसल उनकी मां और उनकी ही है, जिसमें वह दो पीढिय़ो को दिखा रही है, साथ ही दोनों के बीच समय के साथ आए बदलाव और बदलते रिश्ते को दिखाया है। पेंटिंग काफी बड़ी है, जिसे बनाने में करीबन एक महीने का समय लगा।
कार्यक्रम में उपस्थित चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के अध्यक्ष भीम मल्होत्रा ने कहा कि 1978 में पढ़ाई के दौरान उनके आर्ट टीचर खुद उनके घर में आए उनके पिता से बोले कि इसे आर्ट में ही आगे बढ़ाना। उनके आग्रह पर ही पिता ने मुझे आर्ट में आगे पढ़ाई करने की इजाजत दी, इसी वजह से आज मैं बना हूं, ऐसे में कला से जुड़े शिक्षकों का ऐसा सम्मान करना जरूरी था। प्रदर्शनी 14 जुलाई तक चलेगी।

शुक्रवार, 29 जून 2018

चण्डीगढ़ में आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन

चण्डीगढ़ में आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन
अब आर्ट टीचर्स के बीच होगा कॉम्पीटीशन
कृतियों का चयन किया दिल्ली व जम्मू के कलाकारों ने
10 जुलाई से लगेगी प्रदर्शनी
मूमल नेटवर्क, चंडीगढ़। चंडीगढ़ ललित कला अकादमी ने पहली आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन करवाने की पहल की है। यह पहल कला की शिक्षा देने वाले टीचर्स काी सराहना के तौर पर की जा रही है। इस एग्जिबीशन में ट्राईसिटी के केवल आर्ट टीचर्स ही हिस्सा लेंगे। पहली बार आयोजित हो रही आर्ट टीचर्स एग्जिबीशन का उद्घाटन 10 जुलाई को गवर्नमेट आर्ट म्यूजियम एंड गैलरी में होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता द्वारा किया जाएगा। प्रदर्शनी 14 जुलाई तक चलेगी।
आयोजन को साकार करने के लिए अकादमी द्वारा प्रदर्शनी के लिए सभी आर्ट टीचर्स से उनके आर्ट वर्क मंगवाए गए। इसमें 57 स्कूली टीचर्स के 133 आर्ट वर्क अकादमी तक पहुंचे। प्रदर्शन योग्य चयन के लिए दिल्ली के कलाकार वीरेन तंवर और जम्मू के कलाकार हर्षवर्धन की कमेटी बनाई गई। चयन कमेटी ने 64 आर्ट वर्क को प्रदर्शनी के लिए सलेक्ट किया। चयनकत्र्ताओं को आर्ट वर्क इतने पसंद आए कि उन्होंने प्रमुख् तीन पुरस्कारों के साथ दिए जाने वाले मेरिट सर्टिफिकेट के लिए तीन की जगह छह टीचर्स को चुना।
तीन बेस्ट आर्ट टीचर्स होंगें 25-25 हजार रुपए से सम्मानित
चयनकत्र्ताओं ने प्रदर्शनी के लिए पहुंचे आर्ट वर्क से तीन बेस्ट आर्ट वर्क चुने गए हैं । अन तीनों आर्ट वर्क के आर्ट टीचर्स को 25-25 हजार रुपए की राशि से सम्मानित किया जाएगा। चुने गए कलाकारों मेंं तुलसी राम प्रजापति के स्कल्प्चर इम्यूरिमेट, भारती शर्मा की अनटाइटल्ड पेंटिंग और संजीव कुमार की फोटोग्राफी जर्नी ऑफ लाइफ  को सम्मानित किया जाएगा।
इसके साथ ही रीना भटनागर को पेंटिंग, ममता मार्शल को प्रिंटमेकिंग, मनीषा वर्मा को प्रिंटमेकिंग, बिबेकानंद कापरी को स्कल्प्चर, साधना कुमार को स्कल्प्चर और हरनीत कौर को स्कल्प्चर में मेरिट सर्टिफिकेट के साथ 5,000 रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया जाएगा।

बुधवार, 27 जून 2018

अब महाराष्ट्र में भी खुलेगा ललित कला अकादमी का क्षेत्रीय केंद्र


अब महाराष्ट्र में भी खुलेगा ललित कला अकादमी का क्षेत्रीय केंद्र 
मूमल नेटवर्क, दिल्ली/मुबई। महाराष्ट्र को ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में जल्दी ही नई सौगात मिलने जा रही है। मूमल को यह जानकारी इस सिलसिले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से हुई सफल मुलाकात के बाद अकादमी अध्यक्ष उत्तम पचारणे ने दी। इससे पूर्व अकादमी द्वारा इंदौर में भी अकादमी का क्षेत्रीय केन्द्र खेले जाने की घोषणा की गई है।
पचारणे ने 23 जून को बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारी रघुनाथ कुलकर्णी के साथ मुंबई में फड़णवीस से राज्य में नए क्षेत्रीय केंद्र के बारे में बैठक की थी। बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का रवैया खूब सकारात्मक रहा। महाराष्ट्र में ललित कला अकादमी का केंद्र खोलने हेतु लम्बे समय से महाराष्ट्र,
गुजरात और गोवा के कलाकार मांग कर रहे थे।
पाचरणे ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा, तीनों ही राज्यों ने देश को अनेक प्रतिभाशाली चित्रकार एवं मूर्ति शिल्पकार दिए हैं। इस लिए देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मोदी सरकार नए क्षेत्रीय केंद्र का तोहफा देने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह मांग बहुत पुरानी है और इस
सम्बन्ध में मुख्यमंत्री फड़णवीस से भेंट की तो उन्होंने जल्द ही मुंबई में इसके लिए जगह उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया।
पचारणे ने उम्मीद जताई कि मुंबई में आकदमी के नए केंद्र खुलने से इन क्षेत्रों की सामाजिक—सांस्कृतिक विविधता चित्रकारों, शिल्पकारों और लोक कलाकारों के माध्यम से अधिक विकसित होगी । इसके साथ ही पूरे देश और दुनिया का बाजार भी उनके लिए खुलेगा। महाराष्ट्र में बहुत से कला संस्थान हैं। इस प्रगतिशील राज्य में बहुत से कलाकार संघर्ष कर रहे हैं। पचारणे ने उम्मीद जताई कि नया केंद्र उन सभी कलाकारों को बड़ा मंच और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मददगार होगा। उत्तम पचारणे ने कहा कि ललित कला अकादमी आदिवासी और जनजातीय कलाओं को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही कुछ बड़े कदम उठाने वाली है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में अल्पना तथा मध्यप्रदेश में मांडना जैसी लोक चित्रकला शैलियां खूब लोकप्रिय हैं। इन राज्यों में आदिवासियों के बीच भी चित्रकला की विशिष्ट शैलियां प्रचलित हैं जिन्हें ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र खुलने से बढ़ावा मिलेगा और नए एवं युवा कलाकारों को आगे बढऩे का प्रोत्साहन मिलेगा। 

मंगलवार, 12 जून 2018

बेरोजगार कला शिक्षकों का एक बार फिर कलात्मक प्रदर्शन

बेरोजगार कला शिक्षकों का एक बार फिर कलात्मक प्रदर्शन
मुख्यमंत्री तक पहुंचाई अपनी मांगे
मूमल नेटवर्क, जयपुर। गत पांच वर्षों से बेरोजगार कला शिक्षक सरकार से कला शिक्षक के पद सृजित करने की मांग करते हुए आन्दोलन कर रहे हैं। इसी आन्दोलन की कड़ी में कल 12 जून को विधान सभा के सामने ज्योती नगर टी पोईंन्ट धरना स्थल पर कलात्मक प्रदर्शन करते हुए सरकारी रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शित किया गया। इस कलात्मक प्रर्दशन में प्रदेश के कलाकारों के समर्थन में अन्य राज्यों के कलाकारों द्वारा भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई गई। इस अवसर पर संगठन अधिकारियों ने अपनी पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के सचिव के.के. पाठक को सौंपा।
सरकार तानाशाही और भेदभाव भरे रवैये से परेशान बेरोजगार कला शिक्षक (चित्रकला, संगीत, मूर्तिकला, नाटक, नृत्य)के अभ्यर्थियों ने  पेन्टिग व मूतिकला के प्रदर्शन के साथ गीत, संगीत, नृत्य व नाटक के माध्यम से कलात्मक प्रर्दशन कर रोष जताया। संगठन ने यह भी ऐलान किया कि,  अगर राजस्थान  सरकार व शिक्षा विभाग हमारी वाजिब मांगों पर ध्यान नही देती है तो हर जिले में कला टीमे (जत्थे) तैयार किये जायेंगे जो हर जिले में कला शिक्षा के फर्जीवाड़े को उजागर कर अभिभावकों को जागरूक करेगे। उन्होनें कहा कि जरूरत पड़ी तो मुख्यमन्त्री निवास के बाहर भी कलात्मक प्रदर्शन करेंगे।
संगठन के प्रभारी सतवीर भास्कर ने कहा की कला शिक्षा कक्षा 1-10 अनिवार्य होते हुए भी राजस्थान सरकार कला शिक्षको के द्वितिय श्रेणी के पद सृजित नही कर रही है। अन्य विषयों में हजारों पद निकाले गए  लेकिन 5 वर्षो मे एक भी कला शिक्षक का पद सृजित नहीं हो सका।
संगठन के जयपुर प्रभारी विरेन्द्रप्रताप सिंह मोडियाला ने कहा कि विगत 25 वर्षो से हर वर्ष राजकीय विद्यालयों मे कक्षा 1 से 10 में नामांकित होने वाले बच्चों को कला शिक्षा नहीं दी जा रही। विधालयो मे ना तो कला शिक्षक हैं और ना ही बच्चो के पास कला शिक्षा की किताबें हंै। कला शिक्षा की किताबों की छपाई तो हुई लेकिन बच्चों को वितरित नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि,  कला शिक्षा की पढ़ाई के बिना ही सैद्वातिक व प्रायोगक परीक्षा के फर्जी मूल्यांकन लिस्ट बनाई जाती है और फर्जी अंक ग्रेडिंग बच्चों की अंक तालिका मे भर दी जाती है जो बच्चो की शिक्षा के साथ खिलवाड़ है।
संगठन के प्रदेश सचिव महेश गुर्जर ने कहा कि वर्तमान राजस्थान सरकार के आगे 5 वर्षो मे सैकडो़ बार शान्तिपूर्ण अहिसा के माध्यम से अपनी विभिन्न कलाओ के प्रर्दशन व धरने देकर मांगे रखी लेकिन एक बार भी सरकार ने हमारी मांगो पर ध्यान नही दिया। सरकार हमारी मांगो के प्रति सवेदनशील नही है जिसका उदाहरण यह है की कला शिक्षा मामले मे कभी भी मिटिंग नही बुलाई गई ना ही कोई  वार्ता की गई। जबकि हिंसात्मक आन्दोलन करने वाले संगठनों की मांगे सरकार तुरन्त मान लेती है। सरकार की नजऱ मे अहिंसा वालो की कोई जगह नही है। केन्द्र सरकार द्वारा भी कला शिक्षा देने और कला  शिक्षको के पद सृजन को लेकर सैकड़ो पत्र व टिपप्णीयां राजस्थान सरकार को प्रेषित किये गए हैं। संगठन के प्रमेन्द्र कुमार मीणा ने बताया की सन् 1992 से कला शिक्षा मे हर वर्ष हजारो विधार्थी डिग्री डिप्लोमा हासिल कर रहे हैँ। इस बार भी हमने शान्तिपूर्ण कलात्मक प्रर्दशन किया और आगे भी करेंगे।
ज्ञापन में दर्ज प्रमुख मांगे
1.शिक्षा विभाग के निर्धारित मापदण्डो के तहत् राजस्थान के राजकीय विद्यालयों मे कक्षा 1-10 तक हर वर्ष नामांकित होने वाले बच्चों को कला की शिक्षा (चित्रकला,संगीत)का अध्ययन करवाया जाये।
2.शिक्षा विभाग के मानदण्डो,योग्यता प्रावाधानो व नि:शुल्क अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के मापदण्डो के तहत् कला शिक्षको (चित्रकला,संगीत)के द्वितिय,तृतीय श्रेणी के पद सृजित कर भर्ती कि जाये।
3.विगत 2 वर्षो से गोदामो मे पड़ी कक्षा 1-10 तक अनिवार्य कला शिक्षा विषय की पुस्तके बच्चो को वितरण कि जाये।
4.राजकीय विद्यालयो में कक्षा 1 से 10 तक अनिवार्य कला शिक्षा विषय मे हर वर्ष हो रहे फर्जी मूल्यांकन बन्द किया जाये ।
5.प्रधानमन्त्री कार्यालय,माननव संसाधन विकास मन्त्रालय नई दिल्ली द्वारा कला शिक्षा के सन्दर्भ मे प्रेषित किये गये  टिपप्णीयो,पत्रो के निर्देश के अनुसार कला शिक्षको पद सृजित कर भर्ती कि जाये ।

अमित कल्ला के रंग और शब्दों की जुगलबंदी

देहगाम अर्टिस्ट रेजीडेंसी 2018 में होगी
अमित कल्ला के रंग और शब्दों की जुगलबंदी
मूमल नेटवर्क, देहगाम (गांधीनगर)। जयपुर के युवा चित्रकार अमित कल्ला पंद्रह  जून से शुरू होने वाली गुजरात के इंटरनेशनल क्रिएटिव ऑर्ट सेंटर की देहगाम आर्ट रेसिडेंसी प्रोग्राम में भाग लेंगे, जहाँ वे पेंटिंग बनाने के साथ कला चर्चा सत्र के दौरान प्राकृतिक रंगों के अनूठे संसार, उनकी प्रयोगिकता, प्रासंगिकता, उन्हें बनाने की तकनीक के साथ 'दृश्यकला के काव्यात्मक सौन्दर्य' विषय पर अपने विचार साझा करेंगें।
इस आर्ट रेजीडेंसी में देश भर से कुल दस कलाकारों का चयन किया गया हैं,  जो एक साथ रहकर अलग-अलग साइज़ के कैनवासों पर  कुल तीस पेंटिंग्स बनाएंगे जिन्हें आई ऐ आई सी के निर्देशक रविन्द्र मार्डीया द्वारा अहमदाबाद की गुफा आर्ट गैलेरी और मुम्बई की आर्ट हब कला दीर्घा में विधिवत प्रदर्शित किया जायेगा।
अमित ने बताया कि, इस आर्ट रेसीडेंसी के दौरान वह ध्रवपद संगीत की अविरल रवायत और उसकी बंदिशों के साथ राग भैरव, यमन और वृंदावनी सारंग पर रेखांकन के साथ बिंदु, बिम्ब और प्रतीकों की संगत का चित्र संसार रचेंगे।

रविवार, 22 अप्रैल 2018

शहर में एक नई आर्ट गैलरी की शुरुआत


शहर में एक नई आर्ट गैलरी की शुरुआत
आई आई एस विश्वविद्यालय की पहल
मूमल नेटवर्क, जयपुर। दि आई आई एस डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय एवं विज़ुअल आट्र्स विभाग के प्रयासों से विश्वविद्यालय परिसर में आदित्य आर्ट गैलरी स्थापित की गई जिसका उद्घाटन कल शनिवार 21 अप्रेल को चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सेक्रेटरी जनरल अजय काला ने किया। उद्घाटन के अवसर पर विश्वविद्यालय फैकल्टीज़ द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई।
विज़ुअल आट्र्स विभाग के व्याख्याता श्वेत गोयल ने गैलेरी की स्थापना के बारे में कहा कि इस आर्ट गैलरी की शुरूआत हमनें अपने काम को प्रदर्शित करने के साथ की है क्योंकि फैकल्टी होने के साथ-साथ हम भी एक कलाकार है और हम चाहेंगे कि बच्चे हमारे काम को देखकर उनसे प्रेरणा लें।
उन्होने कहा कि इस आर्ट गैलरी को स्थापित करने का मकसद आने वाले समय में सीनियर आर्टिस्ट्स को आर्ट एक्जि़बीशन लगाने के लिए आमंत्रित करना है ताकि वो विभाग के स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन कर सकें।
प्रदर्शनी में फैकल्टीज़ ने विभिन्न रंगों व स्ट्रोक्स के ज़रिए अपनी भावनाएं व्यक्त करने के साथ अपनी विशेषज्ञता को प्रदर्शित करने की कोशिश की है। प्रदर्शनी में लगभग 62 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। कलाकारों के लिए यह प्रदर्शनी 27 अप्रैल तक खुली रहेगी।

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

फड़ शैली के लीजेंड आर्टिस्ट श्रीलाल जोशी नहीं रहे

फड़ शैली के लीजेंड आर्टिस्ट श्रीलाल जोशी नहीं रहे
अन्तिम यात्रा कल सुबह 9 बजे
मूमल नेटवर्क, भीलवाड़ा। राजस्थान की लौक चित्रशैली फड़ की पहचान बन चुके श्रीलाल जोशी का आज शाम साढे पांच बजे देहान्त हो गया। पद़मश्री श्रीलाल जोशी की अन्तिम यात्रा उनके निवास स्थान से कल सुबह 9 बजे पंचमुखी मोक्षधाम के लिए रवाना होगी। कला के प्रति अन्तिम समय तक समर्पित रहे श्रीलाल जी अपनी पीछे दो पुत्रों कल्याण जोशी व गोपाल जोशी को कला की विरासत सौंप कर ब्रह्मलीन हुए।
पिछले एक सप्ताह से अस्वथ चल रहे जोशी जी का आज शाम साढे पांच बजे देहान्त हो गया। निमोनिया की शिकायत पर उन्हें एक सप्ताह पहले प्राइवेट हास्प्ीटल में एडमिट करवाया गया था। बाद में उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत आने लगी। उनके छोटे पुत्र गोपाल जोशी ने बताया कि भारतीय तिथि के अनुूसार आज उनका जन्म दिन भी है। अपने पीछे दो पुत्रों के साथ जीवन संगिनी को तन्हां छोड़ अनन्त की यात्रा के लिए चलने वाले जोशी जी की कल विवाह वर्षगाांठ भी हैं।
5 मार्च 1931 को भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा के एक जोशी परिवार में इनका जन्म हुआ। उनके पिता रामचंद्र जोशी ने 13 साल की उम्र में ही उन्हें इस पारंपरिक पारिवारिक कला की जिम्मेदारी सौंपी। इन्होंने फड़ की अपनी शैली विकसित की। कई राष्ट्रीय व अन्र्तराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित जोशी जी को भारत सरकार ने सन् 2006 में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया। सन् 2007 में इन्हें शिल्पगुरु की उपाधि प्रदान की गई। अब तक बीस से अधिक देशों में इनकी कलाकृतियां प्रदर्शित हो चुकी हैं।
अपने जीवन काल में अनेक सम्मानो व पुरस्कारों से नवाजे जाने वाले जोशी जी को पिछले दिनों जयपुर में सम्पन्न हुए आर्ट फिएस्टा के दौरान लाईफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था। उस मौके पर उन्होंने मूमल से अपने जीवन व कला यात्रा से सम्बन्धित लम्बी बातचीत की थी।

शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

कल होगा आर्ट ओएसिस प्रदर्शनी का समापन

कल होगा आर्ट ओएसिस प्रदर्शनी का समापन
मूमल नेटवर्क, जयपुर।
राजस्थान ललित कला अकादमी की दीर्घा में श्री राणीसती जी मन्दिर, झुंझनू की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का कल अन्तिम दिन है। प्रदर्शनी में 15 कलाकारों ने अपनी कृतियों के माध्यम से शेखावटी की कला को जीवन्त किया है।
प्रदर्शित कृतियां श्री राणीसती जी मन्दिर, झुंझनू के सहयोग से एवं बृज स्मृति प्रन्यास के प्रोत्साहन से आर्ट टुडे द्वारा गत 28 से 30 दिसम्बर तक आयोजित कला शिाविर में तैयार की गई थीं। जिसमें राज्य से बाहर के 15 कलाकारो ने भाग लिया था। शिविर का उद्देश्य लुप्त होती जा रही शेखावटी की कला को पुन-जीवन देना था। शिविर में  तैयार कृतियों के क्रमवार प्रदर्शन के तहत पहली प्रदर्शनी अकादमी दीर्घा में लगाई गई है। 

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

डॉ. नरूका को मूक-बधिर कला शिक्षा हेतु सम्मान

डॉ. नरूका को मूक-बधिर कला शिक्षा हेतु सम्मान
मूमल नेटवर्क, जयपुर/नई दिल्ली। मूक बधिर बच्चों को कला सिखाने और कला के माध्यम से ही आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों के लिए जयपुर के कला शिक्षक योगेन्द्र सिंहं नरूका को बेस्ट टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया है।।
यह सम्मान उन्हें 28 जनवरी को सेन्टर फॉर एजूकेशनल डवलपमेंट, नई दिल्ली की ओर से आयोजित कार्यक्रम इन्टरनेशनल एजू समिट एण्ड एजू अवार्डस में प्रदान किया गया। जयपुर के सेठ आनन्दी लाल पोद्दार मूक-बधिर एच्च माध्यमिक विद्यालय में चित्रकला व्याख्याता पद पर काय्ररत नरूका अपने विद्यार्थियों को लेकर काफी सकारात्मक विचार रखते हैं। शहर में आयोजित कई बड़े प्रोग्राम्स में वो अपने विद्यार्थियों की कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।
डॉ. नरूका पिछले पांच वर्षों से डेफ आर्ट मूवमेंट पर कार्य कर रहे हैं। इस मूवमेंट के पांच वर्ष पूर्ण होने की उपलब्धि के रूप में वो फरवरी में जेकेके में डेफ आर्टिस्ट द्वारा तैयार कलाकृतियों का प्रदर्शन करेंगे।