Lalit kala academy लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Lalit kala academy लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 4 अगस्त 2019

ललित कला अकादमी का 65वां स्थापना दिवस समारोह कल से

ललित कला अकादमी का 65वां स्थापना दिवस समारोह कल से
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। ललित कला अकादमी भव्य समारोह के साथ अपना 65वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है। अकादमी ने इस समारोह को विशेष बनाते हुए महिला कलाकारों और भारतीय सेना के शोर्य चित्रण को प्रमुखता दी है। स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन कल 5 अगस्त को सुबह साढे नौ बजे होगा। इसमें महिला कला शिविर, कला प्रदर्शनियां व पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम होंगे। यह समारोह 12 अगस्त तक चलेगा।े 65वें स्थापना दिवस के उपलक्ष में ललित कला अकादमी कई कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत 5 अगस्त से होगी। मुख्य अतिथी के रूप में पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर कलाकारों व अतिथियों के साथ संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेन्द्रनाथ, संस्कार भारती अध्यक्ष वासुदेव कामत, इंदिरा गांधी राघ्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानन्द जोशी व अकादमी अध्यक्ष डॉ. उत्तम पचारणे उपस्थित होंगे।
स्थापना समारोह में राष्ट्रीय स्तर का महिला कलाकार शिविर का आयोजन किया गया है। इसके साथ ही अकादमी संग्रह में उपलब्ध महिला कलाकारों की कृतियों की प्रदर्शनी का आयोजन होगा। पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना का अभिनन्दन करती जीवन्त चित्र प्रस्तुति की प्रदर्शनी भी इस समारोह का हिस्सा होगी। पुस्तक-मिथिला की लोक चित्रकला का लोकापर्ण भी इस अवसर पर किया जाएगा।
चित्र प्रदर्शनियां 12 अगस्त की शाम तक चलेंगी।

बुधवार, 17 जुलाई 2019

ललित कला अकादमी में उप सचिव और अन्य पदों के लिए भर्ती

ललित कला अकादमी में उप सचिव और अन्य पदों के लिए भर्ती
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली।
ललित कला अकादमी ने उप सचिव और अन्य पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र उम्मीदवार 13 अगस्त 2019 को या उससे पहले ऑफलाइन आवेदन के माध्यम से पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। पात्र उम्मीदवार 12 अगस्त 2019 को या उससे पहले डॉ। उत्तम पचारने, ललित कला अकादमी के अध्यक्ष को निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन भेज सकते हैं।
रिक्ति का विवरण
उप सचिव (प्रशासन और लेखा): 01 पद
उप सचिव (कार्यक्रम / प्रलेखन और प्रकाशन): 01 पद
क्षेत्रीय सचिव: 02 पद
उत्पादन सहायक: 01 पद
नौकरी करने का स्थान
ललित कला अकादमी, नई दिल्ली

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

नई सोच के साथ मनाया गया अकादमी स्थापना दिवस

नई सोच के साथ मनाया गया अकादमी स्थापना दिवस
64वें स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत हुई स्कूली बच्चों के साथ
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। कल 6 अगस्त को ललित कला अकादमी का 64वां स्थापना दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। इस समारोह की विशेष बात रही स्कूली बच्चों को कला के प्रति प्रेरित करने का प्रयास। इस अवसर पर एल के ए कलेक्शन्स प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्य समारोह व प्रदर्शनी का उद्घाटन केन्द्रीय संस्कृति राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने किया।
स्थापना दिवस की शुरुआत कल सुबह 10 बजे राष्ट्रपति एस्टेट स्थित डॉ राजेंद्र प्रसाद सर्वोदय विद्यालय में बच्चों के साथ मिलकर मिट्टी की कृतियां बनाकर की गई। अकादमी आयोजित 'आओ मिट्टी में खेलेंÓ कार्यक्रम में मूर्तिकार व अकादमी अध्यक्ष उत्तम पचारणे साथ मूर्ति शिल्पकार चंद्रजीत यादव एवं प्रशांत देसाई ने दिया। स्कूली बच्चों के साथ मिलकर क्ले से खेल-खेल में बनाई गई कृतियों ने अकादमी अध्यक्ष उत्तम पचारणे की कार्यशैली व उनकी सकारात्मक सोच के साथ नए आयाम स्थापित किये। अकादमी स्थापना दिवस की इस शानदार व बच्चों को साथ लेकरचलने की अध्यक्ष की भावना ने सबको प्रभावित किया।
मुख्य समारोह की शुरुआत शाम साढे चार बजे अकादमी में हुई। इस अवसर पर कला प्रदर्शनी एल के ए कलेक्शन्स लगाई गई। प्रदर्शनी व समारोह का उद्घाटन संस्कृति मंत्री डॉ महेश शर्मा ने किया। डॉ महेश शर्मा ने अकादमी को बधाई देते हुए भारतीय कला और संस्कृति में इसके अहम योगदान की सराहना की। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय के 'कल्चरल मैपिंगÓ यानी 'सांस्कृतिक सूचीकरणÓ अभियान की जानकारी दी। डॉ शर्मा ने सांस्कृतिक संगठन संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेंद्र और पद्मभूषण कलाकार राम वी सुतार को सम्मानित किया।
अकादमी अध्यक्ष उत्तम पाचारणे ने संस्थान के कार्यों के बारे में बताया और भविष्य में आयोजित की जाने वाली योजनाओं की जानकारी दी। अपने वक्तव्य में पचारणे ने कला गतिविधियों पर लिखने वाले मीडिया कर्मियों की सराहना की।
समारोह में अकादमी ने लगभग तीन दर्जन युवा कलाकारों को स्कालरशिप प्रदान की। इस अवसर पर दिसम्बर में आयोजित होने वाले त्रिनाले का लोगो भी हरलीज किया गया। समारोह की एक और उपलब्धि रही  'अ पेंटर ऑफ  एलोक्वेंट साइलेंस का लोकार्पण। प्रणव रंजन रे लिखित यह पुस्तक आर्टिस्ट गणेश पाइने की कला पर आधारित है।
समारोह का समापन चेतन जोशी के बांसुरी वादन से हुआ।

शनिवार, 28 जुलाई 2018

राज. ललित कला अकादमी के अनेक भावी आयोजन

राज. अकादमी के अनेक भावी आयोजन
अधिक बड़े और भव्य होने के संकेत
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी अगले तीन महीनों में एक के बाद एक अनेक कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। इनमें छात्र कला प्रदर्शनी, स्टेट एवार्ड और कला मेले जैसे नियमित आयोजनों के साथ एक महत्वपूर्ण सेमीनार भी शामिल हैं।
अधिक बड़े व भव्य स्तरीय आयोजन
उल्लेखनीय यह है कि यह सभी आयोजन पिछले वर्ष हुए आयोजनों की तुलना में अधिक अधिक बड़े और भव्य होंगे नियमित आयोजन के साथ सेमीनार  की योजना को भी शामिल किया गया है ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि अधिक बड़े व भव्य स्तरीय आयोजन के लिए अतिरिक्त कोष की व्यवस्था कैसे होगी? मूमल को मिली प्राथमिक जानकारियों के अनुसार इन आयोजनों के लिए अकादमी के बजट में सुरक्षित धन के अलावा अन्य श्रोतों से धन की व्यवस्था किए जाने के प्रयास हो रहे हैं। इनमें राज्य के कला संस्कृति विभाग व इसी के साथ पयर्टन के क्षेत्र से कोष जुटाने के जतन हो रहे हैं। इस बात की भी प्रबल संभावना है कि अतिरिक्त कोष की व्यवस्था हो जाएगी। अब यह तो आयोजन के वक्त ही सामने आएगा कि उपलब्ध कोष का उचित उपयोग होगा या इन आयोजनों में भी धांधली और बंदरबांट हावी रहेगी।
छात्र कला प्रदर्शनी व स्टेट एवार्ड की आयोजन तिथियां तय हो गई हैं, यदि सब कुछ ठीक रहता है तो सोमवार तक इसकी विज्ञप्ति जारी कर दी जाएगी। फिलहाल स्टेट अवार्ड के आवेदन प्राप्ति की अन्तिम तारीख सितम्बर तथा स्टूडेंट एग्जीबिशन के आवेदन की अप्तिम तिथि अगस्त के महीनों में तय की गई है।
सेमीनार की योजना
अभी इन दिनों अकादमी की सहभागिता में एक बड़े सेमीनार के आयोजन की योजना पर कार्य चल रहा है। फोक एंड ट्राइवल आर्ट पर प्रो. सी.एस. मेहता द्वारा प्रस्तावित यह सेमीनार अकादमी व आईआईसीडी के संयुक्त तत्वावधान में  होगा। इस सेमीनार में देशभर से लगभग 20 डेलीगेट्स  के आने की सभावनाएं हैं। अकादमी की तरफ  से इसके लिए लगभग 5 लाख रुपए का सहयोग किए जाने का अनुमान है। 

बुधवार, 4 जुलाई 2018

Rajasthan-147 साहसी कलाकारों के खुले विचार व सुझाव

साहसी कलाकारों के खुले विचार व सुझाव
सुधि पाठकों की प्रतिक्रिया व समीक्षा संबंधी आलेख के दूसरे भाग में उन कलाकारों के विचार उनके नाम सहित प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी हस्ती खुद बनाई है और उनका मानना है कि वे अकादमी की वैशाखियों के सहारे चलने के पक्षधर नहीं हैं। इसलिए किसी गुडबुक या बैडबुक की चिंता किए बिना उनके विचार के साथ उनका नाम बेखटके दिया जा सकता है। प्रस्तुत हैं कुछ प्रमुख प्रधिनिधि विचार व सुझावं...

प्रदेश के बाहर कार्यरत जाने-माने और व्यस्त कलाकार मोहन जांगीड़ ने समय निकाल कर मूमल को अपने दर्द से अवगत कराया। उन्होंने लिखा कि राजस्थान ललित कला अकादमी के युवा पदाधिकारियों को देखकर लगा था कि अब प्रदेश के कलाकारों का भला जरूर होगा। हालांकि मैं राजस्थान के बाहर काम कर रहा हूं और खुश हूं, लेकिन राजस्थान में पला-बढ़ा हूं, इसलिए वहां के आर्टवर्ड में इतनी अव्यवस्था के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। अकादमी का यह एक अच्छा कदम था, लेकिन चुनाव करते वक्त यह जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए था कि जिस तरह भारत की बात करने पर हुसैन, सूजा या रजा का नाम सबसे पहले सामने आता है वैसे ही राजस्थान की बात करने पर कुछ नाम बिना किसी विवाद के सामने आते है। दुख की बात है कि वह नाम व उनके काम नजर नहीं आए। आपके मूमल न्यूज से जन्मभूमि की खबर मिलती रहती है, इसलिए अपना यह दर्द आपसे शेयर कर रहा हूं।

राजनीति की दलदल से ऊपर बेबाक बोलने वाले वरिष्ठ डॉ. रघुनाथ शर्मा ने कहा कि, अकादमियों में मनमानी की दो ठोस वजह नजर आती हैं । पहले अध्यक्ष, सचिव आदि की नियुक्ति मनमाने ढंग से होना, लंबा समय बीत जाने पर नियुक्ति करना। हुक्मरान ने अपना एक शासकीय अंदाज़ बना रखा है। वो अपने इस अंदाज से अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संदेश दे देते हैं कि कला - वला हमारी प्राथमिकता में दूर दूर तक नहीं है। इन्हीं के द्वारा तय होने वाले बड़े लोग कुछ तो उस अंदाज को आगे बढाएंगे ही दूसरा, कलाकार स्वयं, जो गुटबाजी के साथ मनमानी करने में भी अब माहिर हो गए हैं, जिस तरह से क्रिएटिविटी में आजादी के पक्षधर है उसी तरह जजिंग करने में, अकादमी की कई अन्य गतिविधियां करवाने में अपने आप को आजाद मानते हैं । न कोई नीति नियम, न वरिष्ठता का खयाल, न किसी की क्रियाशीलता का लिहाज......जैसे डंके की चोट पर कह रहे हो कि क्या कर लोगे हमारा? कुछ वरिष्ठ व पारंगत कलाकारों को चयन करके, भर लो अपने मनचाहे  लोग ।.....आप कुछ कहो तो सैकड़ों तर्क-कुतर्क व बहाने इनकी जुबान पर रहते हैं ।....और  वैसे हर जगह पर स्वयं को संवेदनशील कहलाना पसंद करते हैं ।

कला जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके कलाकार नवल सिंह चौहान ने सभी चयनित कलाकारों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा है कि कलाकार होने के नाते कुछ बातें जहन में आ ही जाती हैं। जहाँगीर कला दीर्घा में चयनित कलाकारों की सूची थोड़ी और बड़ी हो सकती थी। सूची देखने पर लगा कि कुछ युवा व वरिष्ठ कलाकारों की अनदेखी की गई है। पक्षपात करना ठीक नही है।

पहली बात... चयन का कोई आधार होना चाहिए, नाम के बजाय काम देखकर चयन होना चाहिए। आवाज उठाना हमारा काम है क्योंकि सरकारी संस्थाओं में इस तरह नही चलेगा। कितने कलाकार आज नियमित रेखांकन करते हैं, जो कि सबसे ज्यादा जरूरी है। एक कलाकार को व्यंग्य चित्रण, व्यक्तिचित्रण, रियलस्टिक आर्ट, मॉडर्न आर्ट, सृजनात्मक होना ही चाहिए। चयनित कलाकार स्वयं को परखे, एक ही घिसी-पिटी शैली में बरसों से रंगों का अपमान किए जा रहे हैं।

दूसरी बात... अधिकांश चयनित वे हैं जिन्हें प्रदेश के ज्वलंत कला मुद्दों की पूरी जानकारी तक नहीं है। आपने राजस्थान में नन्हे कला विद्यार्थियों के लिए चल रहे कला आंदोलन को कितना समर्थन व सहयोग दिया? चयनित कलाकारों में से कुछ कलाकार ही इन बातों पर खरे उतर पाएँगे...

अकादमी सरकारी संस्था है। ऐसी मनमानी नहीं चल सकती, सरकार से शिकायत की जा सकती है। ललित कला अकादमी को इस तरह के चयन में पारदर्शिता रखनी होगी। कलाकारों के काम के चयन में उनकी सक्रियता के साथ ही काम का लेवल भी देखा जाना आवश्यक है। दु:ख तब होता है जब वर्षों कला क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों को अनदेखा कर दिया जाता हैं। उम्मीद है भविष्य में सब अच्छा होगा?

जाने-माने शिल्पी हंसराज कुमावत का कहना है कि अकादमी में चाहे कितना ही दूध का धुला इंसान बैठा हो, वो उसी को शामिल करेगा जो उसके खास शिष्य- शिष्याएं और मित्र, रिश्तेदार हो। यह तो बड़े शर्म की बात है कि सेलेक्शन कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने ने अपना नाम सबसे पहले चुनते हुए उन कलाकारों को दरकिनार रखा जो एक सच्चे साधु की भाँति अपनी कला साधना में लीन हैं। और तो और 100 कलाकारों के सेलेक्शन के बाद 47 ऐसे नाम कहा से प्रकट हो गये जिनका इंडियन कंटेम्परेरी आर्ट में ना कोई खास रेकॉर्ड है और ना ही प्रदेश के कला जगत में उनका कोई योगदान रहा।

ऐसे में यह भी ज्ञात होना चाहिए कि कई ऐसे कलाकार भी हैं जिनको प्रदर्शनी के लिए न्यौता देकर वर्क मंगवाने के बाद भी अकादमी ने उन्हें वापस लौटा दिया। ऐसी शर्मनाक परिस्थितियों के चलते कुछ अनुभवी कलाकारों ने तो अकादमी द्वारा काम मांगे जाने पर साफ  इंकार ही कर दिया, कई कलाकार ऐसे जंजाल से दूर ही अपनी कला साधना में व्यस्त है। राजस्थान ललित कला अकादमी में सटीक रणनीति, पारदर्शिता और एक्सपीरिएंस का अभाव साफ नजर आ रहा है। कलामेल से अब तक घूम फिर के एक ही चहेते चेहरे और कुछ एक ही नाम नजर आ रहे है।

राजस्थान ललित कला अकादमी ने कुछ नया करने के नाम पर कई क्राफ्टमैन और हॉबी कलाकारों को जगह दी। यह अकादमी कलाकारों की है, किसी की बपौती नहीं है। अगर अब भी कलाकारों के प्रति पारदर्शिता नहीं रहीं तो आर टी आई लगाकर जानकारियां लेनी होंगी। शुक्रिया मूमल आपके अखबार में कलाजगत की गतिविधियोंं का सटीक निचोड़ पढऩे को मिलता है, इसमें हमेशा से ही कलाकारों के हित में आवाज उठाई है। जिससे आर्ट पॉलिटिशिएंस और अकादमी सिस्टम कंट्रोल में रहता है।

युवा कलाकार मयंक शर्मा का कहना है कि इस प्रदशनी के लिए कलाकारों को चुनने का कोई आधार नही था। जहाँ एक ओर कलाविद जैसे कलाकार हैं वही ऐसे भी कलाकार चुने गए है जिनको शौकिया कलाकार कह सकते हे जिनको कभी स्टूडेंट अवार्ड भी नही मिला। कलाकारों का चयन ऐसी कमीटी ने किया जिनको कला के बारे में कुछ नही पता पर वो अधिकारी होने के नाते ये हक़ रखते है।

आप कलाकारों की सूचि देखेंगे तो शायद आपको भी आश्चर्य होगा। उदयपुर के एक वरिष्ठ कलाकार का नाम तो दूसरे कलाकारों को बताना पड़ा की ये तो वरिष्ठ कलाकारों में से हे तब उनका चयन किया गया।

जिस प्रकार प्रदर्शनी के कलाकारों की सूचि जारी नही की, उसे आखरी क्षण तक छपाए रखा वैसे ही अकादमी कई कैंप का आयोजन भी करवाती है पर किसी को कानोकान खबर नही होती। जिससे इनके द्वारा चयनित कलाकार जो लगभग सभी कैंप में सामान होते है उनका पता दुसरो को न चले और न कोई विरोध हो। निष्कर्ष यह निकलता है कि, अकादमी अपना काम निर्विरोध कर रही है क्योंकि Óयादातर काम वो गुप्त रूप से करती है।

हितेन्द्र सिंह भाटी ने मूमल को लिखा कि राजस्थान ललित कला अकादमी हम जैसे कलाकारों के साथ हमेशा सौतेला  व्यवहार करती हैं... बारह सोलो शो, जिनमें जहाँगीर आर्ट गैलरी में दो सोलो शामिल हैं... पिछले बीस साल से कला जगत में 'निरंतर कार्यरत हूँ...आइफेक्स  और कैमलिन जैसे अवॉड्र्स पाएं है... देश के नामी कला संग्रहको के पास मेरी पेंटिंग्स है... माना कि ये सब कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, लेकिन जहाँगीर आर्ट गैलरी मे अकादमी की तरफ  से प्रदर्शित होने वाले इन 147 कलाकारों की लिस्ट में मुझे लगता है मेरा नाम भी होना चाहिए था। आखिर क्यों नहीं है?, जब इस लिस्ट में 20 शौकिया कलाकार हैं और 10 ऐसे, जिनका ब्रश बरसों से सूखा पड़ा है...

माना कि आर्टिस्ट को खुद अपने लिए ऐसे नहीं कहना चाहिए... लेकिन क्यों नहीं कहें... मैं सिर्फ  अपनी बात नहीं कर रहा, राजस्थान से ऐसे कई आर्टिस्ट है, जो इन 147 मे शामिल अनेक कलाकारों से कहीं अधिक बेहतर और निरंतर काम कर रहे हैं। जब अकादमी पूरे राजस्थान की कला को रिप्रजेंट करने जा रही हो तो जिम्मेदारी और बड़ी हो जाती है... सेलेक्शन संवेदनशील होना चाहिए... फेयर होना चाहिए... पारदर्शी होना चाहिए...। यह कोई आत्मश्लाघा नहीं है... ना ही कोई क्षोभ है... सिफऱ्  एक कलाकार की विडंबना है... पीड़ा है...। उल्लेखनीय भाटी ने बाद में अपनी यही बात खुले पत्र के रूप में कला जगत के समक्ष भी रखी।

वीरेन्द्र दायमा ने तेल और तेल की धार देखते के बावजूद साहसपूर्वक कहा कि जो बोलेगा उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जावेगा, इसी कारण से कोई बोलता नही है। जिसका चयन हुआ वो बोलेगा नही जिसका नहीं हुआ वो इन उम्मीद में नहीं बोलेगा की कहीं ब्लैक लिस्ट नहीं हो जांउ। पेंटिग के पीछे नाम देखकर,सगे संबंधी और अपने गुट के कलाकार का चयन करने की परम्परा बनाये रखने में हम ही जिम्मेदार है । कुछ कु-कलाकार अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर उच्च पद पर विराजित है और अंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त कलाकार उनके पीछे-पीछे चल रहे हैं। कुछ सम्मानित कलाकारों को छोड़कर सभी चयनित कलाकार और चयन करने वाले समय के साथ पाला बदलने वाले और चाटुकारिता की हदें को पार करने वाले है। कई वर्षों से कला क्षेत्र में यही चलता आ रहा है और शायद यही चलेगा।

रेणु बरिवाल ने लिखा, मैने राजस्थान ललित कला अकादमी से किसी भी तरह की आशा छोड़ दी है। मैं अपना काम कर रही हूं क्योंकि यह मेरे लिए जुनून है। मुझे अकादमियों से कुछ भी उम्मीद नहीं है, क्योंकि एक संगठन एक समय में सभी को संतुष्ट नहीं कर सकता है। मुझे पता है कि राजनीति ऐसे संगठनों का हिस्सा है, लेकिन हां यह भी सच है कि वे एक बदलाव ला सकते हैं ... लेकिन कौन परवाह करता है। यही कारण है कि आज भी न केवल राजस्थान बल्कि राष्ट्रीय अकादमी कलाकारों के लिए कुछ भी नहीं कर रही है। तो दोस्तों ... कोई उम्मीद मत करो ...।

निर्मल यादव के अनुसार सब का साथ .....और आपका माध्य्म, हमें साहसी बनाता है और अब भी साहस नहीं करेंगे तो कब करेंगे? आने वाले युवा कलाकर इसी लकीर के फ़क़ीर होते चले जाएंगे। यह कला में भृष्टाचार ही तो है। कहाँ तो यह आनंद देने वाला, भाव विभोर करने वाला अपनी कल्पनाओं को आकर देने वाला माध्यम कला अब बाजारू, और अकादमी अब बंदरबांट का अड्डा हो गयी है। यह देखने वाली बात है, राजस्थान राज्य जो अपनी पौराणिक शैली (मिनीचर आर्ट) के लिए विश्व विख्यात है उसे इतना ज्यादा महत्व नहीं दिया गया उदयपुर से राजाराम जी की की कृति को को ही लगाया गया। एक ही नाम होने से थोड़ी मिस्टेक हो गई। कुल मिला के उदयपुर में कोई भी मिनिचर आर्टिस्ट भी नहीं दिखा अकादमी को। सभी कलाकारों को बहुत बहुत बधाई।

गीतांजलि वर्मा ने राजस्थान 147 का कैटलॉग शेयर करने के लिए मूमल को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरा कैटलॉग देखने पर बउ़ी खुशी हुई कि, कुछ कलाकारों के काम राजस्थान को बहुत अच्छे से रिप्रेजेंट कर रहे हैं। जिनके नाम सलेक्ट किए जाने पर किसी को कोई संशय नहीं होगा। क्योंकि यह राजस्थान के प्रथम श्रेणी के कलाकार रहे हैं। किन्तु कुछ कलाकार जिन्हें अब तक कला की पहचान भी नहीं हुई है। जिन्होंने एकेडमिक वर्क की परिभाषा ही बदल दी। जो दूसरे कलाकारों के वर्क की कॉपी करके ही तारीफ  पाते रहे हैं, उनको भी राजस्थान के प्रमुख कलाकारों में शामिल कर लिया गया। इस बात से बड़ा अफसोस हुआ। ...और इससे भी दुखद बात यह है कि राजस्थान के वो कलाकार जो कलाविद् हैं, और जो कलाकार वाकई कला के मर्म को समझते हैं, उनके काम को ऐसे कलाकारों के काम के साथ प्रदर्शित किया।

क्या ललित कला अकादमी इसके लिए जिम्मेदार नहीं कि जब राजस्थान को रिप्रजेंट करना था तो क्यों नहीं ईमानदारी से श्रेष्ठ कलाकारों को चयनित किया गया? क्या इस कला प्रदर्शनी का उद्देश्य मात्र भीड़ इक्कठी करना था या कि राजस्थान का नाम बढ़ाना? क्या चयन समिति इतनी अनजान और गैरजिम्मेदार थी कि उन्हें यह भी ज्ञात नहीं रहा कि यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की क्या छवि बनाएगी? जिन कलाकारों का इस एग्जीबिशन के लिए चयन नहीं हुआ, उनके काम की समीक्षा तो वो करते हैं, किन्तु क्या कभी राजस्थान ललित कला अकादमी अपने कार्यों की समीक्षा करके संतुष्ट हो पाती है, या उसकी कोई जवाबदेही भी बनती है?

कुलदीप भार्गव कहते हैं, राज्य के कई एक से बढ़कर एक कलाकार वंचित रह गए। यही तो इस देश की खूबी है हर जगह भाई भतीजावाद चल रहा है। प्रतिभाओं की कोई कद्र नहीं है। भले ही काम के नाम पर कुछ भी न हो, फिर भी भाईबंदों का चयन पक्का होता है। एक बात कहना चाहूँगा, जब गुरु ही द्रोणाचार्य हों तो अर्जुन ही आगे बढ़ेगा एकलव्य तो गुमनामियों में ही खोकर रहना है।

दिलीप कुमार डामोर का मानना है कि अकादमी को चयन का क्राइट एरिया भी रखना चाहिए था। उसी से कई अयोग्य लोग लिस्ट से बाहर हो जाते। वैसे राजनीति ने कला, संस्कृति, कलाकार, राजस्थान, समृद्ध भारत व विश्व को खोखला करने मे कोई कसर नहीं छोड़ रखी हैं और सदियों से भी यही किया है... अकादमी में भी दमदार व लायक कलाकारों  नजरअंदाज कर दिया है...। अब भी समय रहते सुधारने की जरूरत है...।

दुर्गेश अटल कहते हैं, अब ललित कला अकादमी से कभी कोई उम्मीद नहीं रही। बाकी किस आधार पर सलेक्शन हुआ है सबको पता है ? कलाकार की मेहनत और उसकी कला ही उसको पहचान दिलाती है । ललित कला अकादमी के अधिकारी कितना भी करें वह ऐसे किसी को कलाकार नहीं बना सकते।

हर्षित वैष्णव ने लिखा, मुझे तो समझ नहीं आया किस आधार पर कलाकारों का चयन किया गया है? उनकी कृति के आधार पर या उन की उपलब्धियों के आधार पर। दोनों स्थिति में कई गलतियां हुई हैं। कई कलाकार थे, जिनका नाम होना चाहिए, जिनके उत्कृष्ट कार्य भी हैं और उपलब्धियां भी। जबकि, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं फिर भी वे इस प्रदर्शनी का हिस्सा बने।

कमल बक्क्षी कहते हैं वर्षों से कला के लिए समर्पित वरिष्ठ कलाकारों की अनदेखी की गई है। जिन लोगों का कला से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रहा उनका चयन किस आधार पर किया गया? यह शर्मनाक है।

कब्बू राठौड़ का विचार है कि जब संगीत क्षेत्र के लोग ही ललित कला के बॉस बन गए तो उम्मीद क्या करें? इसका मुझे व अन्य वरिष्ठ चित्रकारों को खेद है। ललित कला अकादमी को अपनी छवि सुधारनी होगी।

मनोज कुमार यादव के मुताबिक यदि आपका गॉड फ़ादर नहीं है तो आप न तो पारम्परिक न आधुनिक... आप अव्वल कलाकार हो ही नहीं। किसी कोने में बैठकर कूँची चलाते रहिये कोई नहीं पूछेगा ।

डॉ. रीता प्रताप का कहना है कि, अकादमी में आज भी मनमानी चल रही है। ....पेंटिंग इंटरनेशनल, नेशनल, स्टेट सभी में सलेक्शन हुआ है। पर एक्जीबिशन में इंवायट नहीं किया गया।

त्रिलोक श्रीमाली का मानना है कि अकादमी स्तर का प्रदर्शन नहीं हो पाया एवं चयन प्रक्रिया में भी वही पुरानी लिस्ट। कुछ हटकर चयन एवं प्रदर्शन की आवश्यकता है।

रवि माइकल ने कला मेला पुरस्कार विवाद के बाद अकादमी के आयोजन को ले कर एक और विवाद पर अपनी चिंता व्यक्त की।

परमेश्वर आर्टिस्ट ने कहा, हर जगह कला के नाम पर खेल खेला जा रहा है।

अक्षय मुदगल ने कहा, न्यू टैलेंट को ज्यादा से ज्यादा मौका देना चाहिए। एक बार से ज्यादा किसी का वर्क सलेक्ट नहीं होना चाहिए। और चयनित काम का कैटलॉग सोशल साइट पर अपलोड होना चाहिए।

लाखन सिंह जाट का मानना है कि भाई भतीजावाद और यारी दोस्ती के आधार पर चयन हुआ है।

देवराज बैरवा का मानना है कि वैसे तो पब्लिक सब जानती है..... पर मैं नहीं जानता कि पेंटिंग सिलेक्ट करवाने के लिए किसके पास जाएं...... ओह आर्ट पॉलिटिक्स।

डीके आजाद ने बस इतना ही कहा कि राजनीतिक रूप से प्रेरित ऐसी कला प्रदर्शनी भाड़ में जाए।

गुरुवार, 26 अप्रैल 2018

जीवन के सरल व जटिल रचना चित्र

जीवन के सरल व जटिल रचना चित्र
(ललित कला अकादमी नई दिल्ली के कला वीथिका 5 में चित्रकार संजय शर्मा और छायाकार कुमार जिगीषु के चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है यह प्रदर्शनी 25 अप्रैल से आरम्भ हुई है और 1 मई 2018 तक रहेंगी।  प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्रों व चित्रकारों पर भूपेंद्र कुमार अस्थाना के विचार इस लेख द्वारा प्रस्तुत हैं।- सं.)
समय-समय पर कला की तमाम विधाओं पर निरंतर नए प्रयोग होते रहे है। जिसके कारण कला के विभिन्न रूप हमारे सामने आते रहे है। कलाकार समाज, जीवन, विचारधारा, सभ्यता और संस्कृति से प्रभावित हो कर ही कला के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करता है।
यहां मैं ऐसे ही दो कलाकारों की चर्चा कर रहा हूं जिनकी कला दृष्टि उनकी कृतियों को अर्थ प्रदान करती है।

चित्रकार संजय शर्मा ने अपनी कलायात्रा की शुरुआत औद्योगिक नगर से छोटे स्तर से की और समकालीन चित्रकला की दुनियां मे खुद को स्थापित किया। संजय की कलाकृतियां तत्काल परिवेश से जुड़ी हुई हैं। जिसकी प्रतिक्रिया इनके चित्रों में है। जिसे इन्होंने तैल और ऐक्रेलिक माध्यम में कैनवास पर उकेरा है। चित्रों में वर्तमान समाज, भौतिक भाषा,  परंपरा और आधुनिकता की परत है। इनके चित्रों में वर्तमान सामाज पर राजनीति का एक गहरा असर दिखलाई पड़ता है। कहीं कहीं सामाजिक बंटवारे का विरोध तथा वर्तमान परिस्थिति में परिवर्तन की मांग भी नजऱ आ रही है। अपने मनोभावों के चित्रण का माध्यम इन्होंने भोंपू को बनाया है।
संजय के लिए चित्रित सतह बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह न केवल समाज, ख़ुद और इतिहास की अभिव्यक्ति है बल्कि विभिन्न माध्यमों में उकेरे गए रूपों में और प्रयोगों की संभावनाएंं भी है। विशेष रूप से परतों और सतह निर्माण के संदर्भ में। चित्रों में एक प्रतिरोध भी है। शायद यह परंपरा और आधुनिकता की परतों को दर्शाता है। संजय ने अपने आस पास की दुनियां को अपने कला का माध्यम बनाया है। उन्हें एक अर्थ में पिरोने की कोशिश की है।
छायाकार कुमार जिगीषु ने कला का लम्बा सफर तय किया है। माध्यम कुछ भी हो सृजनशील व्यक्ति अपनी रचनाओँ से समाज मे अपना महत्वपूर्ण योगदान देता रहता है। ऐसे ही कुमार जिगीषू ने भी अपने विचारों और ग्राफिक माध्यम के साथ सुंदर प्रयोग किये हैं। अपने प्रयोगों के बारे में कुमार कहते है कि, मैं डिजिटल में कुछ बुनियादी तत्वों के साथ कार्य करता हूँ क्योंकि वह मुझे आकर्षित करते है और मुझपर गहरा प्रभाव डालते है। जिसमें मेरी खोज निरन्तर जारी रहती है। डिजिटल प्रयोग एक बहुत ही सरल तरीके से किया गया कार्य है जो जटिल काम का असर देता है।
कुमार इस सरल और जटिल प्रक्रिया को अपने जीवन यात्रा के साथ जोड़ते है। जो छोटे शहर से शुरू हो कर आधुनिकता से लेस बड़े बड़े महानगरों में जटिलताओं के बीच जीवन को सरल और सफल बनाने के तरीकों की खोज कर रहे हैं। इस खोज में जीवन के सभी महत्वपूर्ण तत्व साथ साथ चल रहे हैं और जो पीछे छूट गए थे उनकी तलाश भी जारी है। कुमार के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व अंतराल, संरचना और संतुलन है। कभी कभी स्थान परिवर्तन तथा वास्तविकता को समझने के, मन के तरंगों को दूर दूर भटकने के बाद वापस और एक निश्चित प्रकार की बेचैनी के बाद एक चेतना एक ऊर्जा उत्पन्न होती है। इनकीे कला का उद्देश्य जीवन मे गायब बिंदुओं को ढूंढना और उन्हें प्रतीकों के रूप में स्थापित करना है। जो इनके चित्रों में देखा जा सकता है। चित्रों में कहीं छितिज का गायब हो जाना। दीवारों के बीच क़ैद, बुनियादी जरूरतों के बीच उलझन के बाद भावनाओं का शून्यकाल में खो जाना।
इन्हें डिजिटल ग्राफिक्स इफ़ेक्ट्स के जरिये बनाया गया है। कुमार बताते है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है । यहाँ कुछ भी स्थिर नही है। कहीं आकर, कहीं रंग, रूप निरंतर परिवर्तन होते रहते है। कहीं को स्थान खाली होता फिर कभी भरा होता। कुछ समाप्त होता तो कहीं जन्म होता। यही प्रकृति है। जो ब्रह्मांड के बड़े सतह पर निरंतर परिवर्तन होते रहते उसी ब्रह्मांड में तलाश जारी है। जो मेरे चित्र बोल रहे हैं। कुमार ने अपने चित्रों को किसी शीर्षक में नही बांधते उन्हें स्वतंत्र रखते है। इनका मानना है कि शीर्षक के माध्यम से दर्शकों के विचारों को प्रतिबंधित नही करना चाहिए। 

शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

प्रथम अन्तरराष्ट्रीय कला मेले का उद्घाटन कल शाम 5 बजे

प्रथम अन्तरराष्ट्रीय कला मेले का उद्घाटन कल शाम 5 बजे
उपराष्ट्रपति करेगें मेले का उद्घाटन
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। ललित कला अकादमी द्वारा पहली बार आयोजित होने वाले अन्तरराष्ट्रीय कला मेले का उद्घाटन कल शाम 5 बजे होगा। उद्घाटन इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में उपराष्ट्रपति एम.वैकया नायडू करेंगे। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा,  अकादमी प्रशासक सी.एस.कृष्णा शेट्टी और इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी अन्य मेहमानों के साथ उपस्थित होंगे।
उद्घाटन समारोह में श्रीलंका के करुणादास ओलाबोडुवा नृत्य समूह द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य और भारत के पंडित हरीश गंगानी एवं साथियों द्वारा कथक नृत्य प्रस्तुति समारोह में रंग भरेगी।
यह होगा मेले में
कला मेले में विभिन्न कला गतिविधियों और कला वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा जिनमें दृश्यकला फिल्मोत्सव, पॉटरी, पटचित्र, पेपरमेशी वर्कशॉप, बेस्ट फ्रॉम वेस्ट वर्कशॉप, संगीतमय प्रस्तुतियाँ, डांस, ड्रामा, जेकियाए सीवेन्सी द्वारा वॉयलिन मेकिंग वर्कशॉप, आर्टिस्ट गपशप प्वाईंट, नुक्कड़ नाटक और कई प्रस्तुतियों का कला प्रेमी आनन्द लेंगे।
कला मेले में प्रस्तुत अन्तरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत पुर्तगाल के नूनो फ्लोरेस द्वारा वॉयलिन वादन,  साउथ एशियन अकादमी द्वारा डांस, यू.के. द्वारा प्रथम विश्व युद्ध में प्रेम और त्याग की कहानी श्द ट्राथ.उसने कहा था, जेरोस्लेव सिवेन्सी जेकिय द्वारा वॉयलिन वादन, यू.के. की देविका राव द्वारा यक्षगान, हंगरी के नोबर्ट केल द्वारा पियानो और देविका डांस थिएटर यू.के. द्वारा या देवी सहीत कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन होगा।
18 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में 800 से अधिक कलाकार भाग ले रहे है। इसे अन्तरराष्ट्रीय रूप से सफल बनाने के लिए कई दूतावास और सांस्कृतिक केन्द्र सहयोग दे रहे हैं। चीन, वेनेजुएला, पेरू, पुर्तगाल, श्रीलंका, पौलेंड, टयूनिशिया, मेक्सिको, बांग्लादेश, त्रिनिदाद, टोबेगो, फीजी, फ्रांस, पापुआ, न्यू गीनिया, चेकिया, यू.के., स्पेन और ब्राजील सहित कई देशों के कलाकार मेले में भाग ले रहें हैं। अन्तरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व सहित भारतीय कलाकारों और संस्थाओं के कला प्रदर्शन के लिए लगभग 325 स्टॉल बनाये गए हैं।
अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय कला मेला ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब कला के बाजार में भारतीय कला के लिए सार्वभौम मंच हेतु एक प्रत्यक्ष मांग है। कला मेला का प्रमुख उद्देश्य कलाकारों और कला विशेषज्ञों के मध्य प्रत्यक्ष संवाद को प्रोत्साहित करते हुए कला के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। यही ललित कला अकादमी का लक्ष्य भी है।

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

59वीं नेशनल आर्ट एग्जीबिशन 18 जनवरी से

59वीं नेशनल आर्ट एग्जीबिशन 18 जनवरी से
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। केन्द्रीय ललित कला अकादमी आयोजित 59वीं नेशनल आर्ट एग्जीबिशन का उद्घाटन 18 जनवरी को होगा। मुख्य अतिथि के रूप में आमन्त्रित भारत सरकार के संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। यह प्रदर्शनी रवीन्द्र भवन स्थित ललित कला दीर्घाओं में 10 फरवरी तक चलेगी।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष नेशनल अवार्ड के लिये चुने गए 15 आर्टिस्ट्स के साथ कुल 172 कलाकारों की 172 कृतियों का प्रदर्शन इस प्रदर्शनी में किया जाएगा।

सोमवार, 15 जनवरी 2018

10 फरवरी तक कर सकते हैं आवेदन

10 फरवरी तक कर सकते हैं आवेदन
केन्द्रीय ललित कला अकादमी स्कालरशिप के लिए
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए स्कालरशिप आवेदन आमन्त्रित किये जा रहे हैं। 35 वर्ष तक की आयु के भारतीय कलाकार, कला आलोचक व कला इतिहासकार स्कालरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। स्वीकृत आवेदकों को एक वर्ष के लिए अकादमी द्वारा प्रति माह 10,000 रुपये की स्कालरशिप राशि प्रदान की जाएगी। अकादमी कार्यालय में आवेदन भेजने की अन्तिम तिथि 10 फरवरी है।
मूमल के पास आवेदन पत्र व नियमावली उपलब्ध है।

शनिवार, 13 जनवरी 2018

59 वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवार्ड विजेताओं के नाम घोषित

59 वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवार्ड विजेताओं के नाम घोषित
राजस्थान के पंकज गहलोत को मिलेगा अवार्ड
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। आज दिन में एक पे्रस मीट के तहत ललित कला अकादमी के प्रशासक सी. एस. कृष्णा शेट्टी एवं सचिव विशालाक्षी निगम ने 59 वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के अवार्ड विजेताओं के नामों की घोषणा की। इस वर्ष 15 कलाकारों को यह प्रदान किया जा रहा है जिनमें राजस्थान के पंकज गहलोत शामिल हैं। विजेताओं को अकादमी एक-एक लाख रुपए के नकद पुरस्कार से सम्मानित करेगी।
विजेताओं का चयन प्रदर्शनी हेतु गठित द्विस्तरीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया जिसमें पूरे देश से कलाकार, कला आलोचक और कला पारखी शामिल थे। ललित कला अकादमी द्वारा गठित प्रथम स्तरीय पांच सदस्यीय निर्णायक मंडल में पटना बिहार से प्रो. श्याम शर्मा, गुवाहाटी असम से नोनी बोरपुजारी, मैसूर कर्नाटक से रामदास अद्यन्तया, खैरागढ़ छत्तीसगढ़ से वी. नागदास तथा नई दिल्ली से जॉनी एम.एल शामिल थे।
द्वितीय निर्णायक मंडल में नोएडा उत्तर प्रदेश से राम वी. सुतार, हैदराबाद मेलंगाना से सूर्य प्रकाश, वाराणसी उत्तर प्रदेश से मदन लाल, बेंगलुरु कर्नाटक से यू. भास्कर राव, एवं चेन्नई तामिलनाडू से प्रो. आर.बी.भास्करन शामिल थे।
विजेताओं के नाम घोषित करते हुए प्रशासक सी. एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि,  59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी केवल देशभर के कलाकारों की प्रतिभागिता ही नहीं अपितु उससे बढ़कर है। यह कलाप्रेमियों व कलाकारों के बीच संवाद का एक माध्यम होने के साथ साथ सर्जक और दर्शक के बीच एक रिश्ता भी कायम करती है।
30 से 50 वर्ष तक की आयु के 10 विजेता कलाकार
भुवनेश्वर ओडीशा के ज्योतिप्रकाश सेथी, दिल्ली के विवेक कुमार व चेरिंग नेगी, कोलकाता पश्चिम बंगाल के पप्पू बर्धन, वडोदरा गुजरात के देवाशीष दत्ता, रायपुर छत्तीसगढ़ के  इंदिरा पुरकायस्थ घोष, मुम्बई महाराष्ट्र के विक्रान्त विश्वास भिसे, मैसूर कर्नाटक के शिवकुमार केसरमदु, खैरागढ़ छत्तीसगढ़  के रवि नारायण गुप्ता तथा कोट्टायम केरल प्रदीप प्रताप।
50 वर्ष से अधिक आयु के 5 विजेता कलाकार
शिवगंज राजस्थान के पंकज गहलोत, अन्गामाली केरल के कुमारन के.आर, कोलकत्ता पश्चिम बंगाल के अतिन बासक तथा अमित चक्रवर्ती, दिल्ली के अमित दत्त।
विशिष्ट आमन्त्रित कलाकार
इस प्रदर्शनी में बोस कृष्णामचारी, मनु पारेख,  के.एस. राधाकृष्णन, अद्वैत गणनायक,  ज्योति भट्ट,  एल.एन. लूर और एन. पुष्पमाला जैसे प्रख्यात कलाकारों को अति प्रतिष्ठित आमंत्रित अनुभाग के तहत आमन्त्रित कर उनकी कृतियों को प्रदर्शनी में शामिल किया गया है।
उल्लेखनीय है कि 59वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के लिये अकादमी को देशभर से 1433 कलाकारों की 3644 कृतियां प्राप्त हुई थीं। निर्णायक मंडल ने राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए विभिन्न माध्यमों से 171 कलाकारों की 172 कृतियों का चयन किया। इन 172 कलाकृतियों में से 15 राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार विजेताओं का चयन किया गया।
इस वर्ष भारत की स्वतन्त्रता के 70 वर्ष मनाने के उपलक्ष में पुरस्कारों को दो श्रेणियों में विभकत किया गया। जिसमें कलाकारों को एवं 50 वर्ष से अधिक आयु के 5 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिये चुना गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कलाकरों को मान्यता प्रदान करने और प्रतिभाशाली कलाकृतियों को प्रदर्शित करने हेतु ललित कला अकादमी प्रतिवर्ष राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का आयोजन करती है। प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिशिल्प, ग्राफि क, फोटोग्राफी, एवं  विभिन्न कला माध्यमों की कलाकृतियां शामिल हैं।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

कल होगा जॉनी एमएल का व्याख्यान

कल होगा जॉनी एमएल का व्याख्यान
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। मूर्तिकार धनराज भगत का जन्म शताब्दी वर्ष आयोजन की प्रथम कड़ी के रूप में कल 20 दिसम्बर को शाम 5 बजे रवीन्द्र भवन स्थित कौस्तुभ ऑडिटोरियम में जॉनी एमएल का व्याख्यान होगा।

बुधवार, 29 नवंबर 2017

छापा कला का पहला बैनाले मार्च में

छापा कला का पहला बैनाले मार्च में

मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली।
देश में छापा कला को प्रोत्साहन करने के लिए ललित कला अकादमी देश में पहली बार छापा कला बैनाले का आयोजन कर रही है। इस आयोजन में देश-विदेश के कलाकार हिस्सा लेंगे। पांच चयनित कृतियों को 2-2 लाख रुपए के पुरस्कार दिये जाएंगे।
ललित कला अकादमी देश में पहली बार अंतरराष्ट्रीय प्रिंट द्विवार्षिकी (छापा कला बैनाले) आयोजित कर रही है। अकादमी के प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने जानकारी दी कि छापा कला (प्रिंट) को बढ़ावा देने के लिए यह बैनाले 25 मार्च को शुरु होगा और 10 अप्रेल तक चलेगा। बैनाले का आयोजन ललित कला अकादमी व राष्ट्रीय आधुनिक संग्रहालयों की दीर्घाओं में किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री करेंगे। बैनाले में हिस्सा लेने के लिए दुनिया भर से कलाकार अपनी कलाकृतियां भेज सकते हैं। अकादमी द्वारा निर्धारित प्रपत्र को भर कर 30 दिसम्बर तक आवेदन भेजे जा सकते हैं।
प्रदर्शनी के लिए चयनित कृतियों में से श्रेष्ठ पांच कृतियों को दो-दो लाख रुपए की नकद राशि के पुरस्कार से नवाजा जाएगा। कार्यक्रम में  पांच दिन की वर्कशॉप का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें कलाकार आधुनिक शैली से रूबरू होने के साथ ही परंपरागत शैली को और निखार सकेंगे। प्रसिद्ध कलाविद अनुपम सूद को इस प्रदर्शनी में आयुक्त का दायित्व सौंपा गया है। प्रिंट कलाकार आनंद रॉय बनर्जी ने बैनाले के बारे में कहा कि यह हम पर निर्भर है कि हम इस अवसर का लाभ उठाएं व समकालीन छापा कलाकारों (प्रिंटमेकर) के लिए एक नई छाप छोड़ते चलें। राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय के महानिदेशक अद्वैत गणनायक ने कहा कि संग्रहालय के पास अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं हैं जो कि अकादमी को उपलब्ध करवाई जाएंगी। ललित कला अकादमी का ये प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।
बैनाले में भाग लेने के इच्छुक कलाकार 30 दिसंबर तक आवेदन भेज सकते हैं। भारतीय कलाकारों के लिए आयोजन में हिस्सा लेने का शुल्क रुपये एक हजार रखा गया है।
मूमल के पास बैनाले में प्रवेश का आवेदन पत्र और नियमावली उपलब्ध है।

अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला 4 फरवरी से दिल्ली में

अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला 4 फरवरी से दिल्ली में
राष्ट्रीय ललित कला अकादमी का पहला अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला
स्टॉल बुकिंग आवेदन की अन्तिम तिथि 15 दिसम्बर
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय कला मेला आयोजित कर रहा है। 15 दिवसीय मेला 4 से 18 फरवरी 2018 को आयोजित होगा। अकादमी आयोजित इस मेले में आर्टिस्ट स्टॉल बुक करवाने के लिए 15 दिसम्बर तक आवेदन कर सकते हैं।
इस मेले में राज्यों की ललित कला अकादमियां एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र भी स्टॉल बुक करवा सकती हैं। इसके साथ कलाकार समूह, कला दीर्घाएं, संस्थाएं व महाविद्यालय भी मेले में भाग ले सकते हैं। अकादमी मेले में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का कैटलॉग भी प्रकाशित करेगी।
आवेदन पत्र व नियमावली मूमल के पास उपलब्ध है।

सोमवार, 11 सितंबर 2017

ललित कला अकादमी में लगी पेंटिंग्स की हाट

ललित कला अकादमी में लगी पेंटिंग्स की हाट
अकादमी की नई पहल
प्रत्येक रविवार को 30 आर्टिस्ट्स की 200 पेंटिंग्स की हाट लगेगी

मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। आर्टिस्ट की कला को बाजार देने के लिए ललित कला अकादमी ने एक नई पहल की है। दिल्ली हाट की तर्ज पर अकादमी ने कल 10 सितंबर से पेंटिंग हाट की शुरुआत की है। यह हाट प्रत्येक रवीवार को अकादमी के आर्टिस्ट स्टूडियो में लगाई जाएगी। अकादमी में पहली बार शुरु हुए हाट आयोजन में पेंटिंग्स बनाने के लिए भी स्पेस दिया गया है। ऐसे में अगर किसी को खास पेंटिंग ऑर्डर पर बनवानी हो तो आर्टिस्ट द्वारा कलाकार के सामने ही पेंटिंग बनाकर देने का अनोखा अवसर मिलेगा। खरीददार को भी बनती नई पेंटिंग बनते हुए देखने के साथ उसे खरीदने का अवसर मिलेगा।
इस साप्ताहिक हाट बाजार में एक आर्टिस्ट की 6 पेंटिंग्स प्रदर्शित की जाएंगी। हर रविवार 30 आर्टिस्ट बदल कर दूसरे नए 30 आर्टिस्ट्स की पेंटिंग हाट में लगाई जाएगी। पेंटिंग्स प्रदर्शित करने के लिए पूरे भारत से कोई आर्टिस्ट इस योजना में शामिल हो सकता है।

सोमवार, 31 जुलाई 2017

ललित कला अकादमी का फिल्मोत्सव 2 अगस्त से

ललित कला अकादमी का फिल्मोत्सव 2 अगस्त से

मूमल नेटवर्क, दिल्ली। दृश्य कला पर फिल्म निमार्ण की चुनौतियों को केन्द्र में रख कर ललित कला अकादमी ने 4 दिवसीय दृश्य कला फिल्मोत्सव का आयोजन किया है। 2 अगस्त से शुरु होने वाले इस उत्सव में डोरोथी मेकेंगिल के संग्रह से कुछ चुनींदा फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवसर पर 'दृश्य कला पर फिल्म निमार्ण में शामिल चुनौतियां' विषय पर भी चर्चा होगी। इस समारोह की अध्यक्षता अकादमी के प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी करेंगे। रवीन्द्र भवन के कौस्तुभ सभागार में चलने वाले इस फिल्मोत्सव का समापन 5 अगस्त को होगा।

शनिवार, 29 जुलाई 2017

आज अन्तिम दिन है विजुअल आर्ट राइटिंग पर नेशनल कॉन्क्लेव का

आज अन्तिम दिन है विजुअल आर्ट राइटिंग पर नेशनल कॉन्क्लेव का

मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। विजुअल आर्ट राइटिंग को बढ़ावा देने के लिए ललित कला एकेडमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव का आज दूसरा व अन्तिम दिन है। इसकी शुरुआत कल 29 जुलाई को मंडी हाउस स्थित रवींद्र भवन के ऑडिटोरियम में की गई। देशभर से आए हिंदी, बंगाली, असमिया, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ लैंग्वेज के 50 राइटर इसमें शामिल हुए। कॉन्क्लेव उद्घाटन समारोह के चीफ गेस्ट मशहूर आर्ट हिस्टोरियन प्रो. रतन पारिमू थेे। अध्यक्षता ललित कला एकेडमी के एडमिनिस्ट्रेटर सीएस कृष्णा शेट्टी ने की।
    कॉन्क्लेव के बारे में जानकारी देते हुए  एकेडमी के एडमिनिस्ट्रेटर कृष्णा शेट्टी ने बताया कि पहली बार अलग-अलग भाषाओं के विजुअल आर्ट राइटर एक मंच पर इक_े हुए हैें। विजुअल आर्ट का दायरा काफी बड़ा है, लेकिन ललित कला के ज़्यादातर स्टूडेंट सिर्फ केवल पेंटिंग और ग्राफि़क्स आर्ट की ही जानकारी रखते हैं और उसमें ही आगे बढऩा पसंद करते हैं। आज भी आर्ट राइटिंग का दायरा सीमित है। इसकी एक वजह आर्ट राइटर्स की कमी और इसे बढ़ावा नहीं मिल पाना भी है।

स्विस आर्टिस्ट अलबर्टो जिकोमेट्टी पर फिल्म का प्रदर्शन

स्विस आर्टिस्ट अलबर्टो जिकोमेट्टी पर फिल्म का प्रदर्शन

मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के अलीगंज स्थित क्षेत्रीय केन्द्र में आज शाम 4 बजे कला फिल्म दिखाई जाएगी। केन्द्र प्रभारी व क्षेत्रीय सचिव डॉ ज्योतिष जोषी ने जानकारी दी कि यह फिल्म अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के आर्टिस्ट अलबर्टो जिकोमेट्टी के कलाकर्म व जीवन पर फिल्मायी गई है।
कौन है अलबर्टो जिकोमेट्टी
इन स्विस कलाकार का जन्म 10 अक्टूबर 1901 के दिन स्विट्जरलैण्ड के बोरगोनोवो में हुआ। एक बेहतरीन मूर्तिकार, चित्रकार, ड्राफ्ट्समैन तथा प्रिंटमेकर के रूप में उन्होनें खास नाम कमाया। इनकी मृत्यु 11 जनवरी 1966 में हुई।