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शनिवार, 30 दिसंबर 2017

अकादमी का लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड रणजीत सिंह चूड़ावाला को

अकादमी का लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड
 रणजीत सिंह चूड़ावाला को
मूमल नेटवर्क, जयपुर। प्रदेश के वरिष्ठ चित्रकार रणजीत सिंह चूड़ावाला को राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से इस वर्ष के लाईफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा जाएगा। चूड़ावाला को ये अवार्ड अकादमी की ओर से 4 से 8 जनवरी तक रवींद्र मंच परिसर में आयोजित किए जाने वाले बीसवें कला मेला के समापन समारोह में 8 जनवरी को दिया जाएगा। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. अष्विन एम.दलवी और संयोजक डॉ. नाथू लाल वर्मा ने बताया कि चूड़ावाला का चुनाव पद्मश्री तिलक गिताई की अध्यक्षता में हुई बैठक में किया गया। उन्हें सम्मान स्वरूप इक्यावन हजार रूपए की नकद राशि और सम्मान पत्र प्रदान किए जाएंगे। अब तक इस अवार्ड के लिए इकत्तीस हजार रूपए की नकद राषि दी जाती रही है, इस वर्ष से इसमें इजाफा किया गया है।
 85 वर्षीय चूड़ावाला 1988 में अकादमी के कलाविद् सम्मान से भी नवाजे जा चुके हैं। इन्हें कला जगत में कला में नवाचारों के लिए पहचाना जाता है। मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से आर्ड डिप्लोमा की उपाधि प्राप्त चूड़ावाला ने चित्रकला केे रेखांकन पक्ष पर विषेष दक्षता हासिल की है। पोट्रेट और लैंडस्केप इनके प्रिय विषय हैं।

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

20वें कला मेले की तैयारियां चरम पर

20वें कला मेले की तैयारियां चरम पर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 20वें कला मेले की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं।  4 से 8 जनवरी तक रवींद्र मंच परिसर में आयोजित होने वाले कला मेले को भव्य बनाने की कोशिश की जा रही है।
20वें कला मेले में कलाप्रेमी ना केवल कलाकृतियों का दीदार कर पाएंगे वरन् गीत, संगीत, नृत्य व नाटक की प्रस्तुतियों का लुत्फ भी उठा पाएंगे। इस वर्ष के मेले की शुरुआत इस बार पद्मश्री गुलाबो और उनके साथी कलाकारों की प्रस्तुति से होगी। अकादमी के अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम.दलवी और मेला संयोजक डॉ. नाथू लाल वर्मा ने बताया कि इस बार का कला मेला कई मायनों में व्यापक होगा। इसमें राज्य के विविध कलारूपों का तो संगम होगा ही, इसके अवावा कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार पहली बार शिरकत करेंगे। समारोह में होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियां राज्य की विभिन्न अकादमियों के सहयोग से आयोजित की जाएंगी।
हमेशा की तरहा आर्टिस्ट मेले में लगी स्टॉल्स पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इस वर्ष मेले में 120 स्टॉल्स बनाई गई हैं। हमेशा की तरहा पेंटिग कॉम्पीटीशन, लाईव डेमोस्ट्रेशन, इंस्टॉलेशन व आर्ट कैम्प का आयोजन किया जाएगा। आर्ट फिल्म शो में जहां फिल्मों का प्रदर्शन होगा वहीं कला चर्चाओं के दौर में विद्वान वक्तागण रोचक व गम्भीर विषयों पर चर्चा करेंगे। मेले में पहली बार फोटोग्राफी एग्जीबिशन भी लगाई जा रही है।
विभिन्न अकादमियों व कला संस्थानों के सहयोग से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। जिसमें आईसीसीआर के सहयोग से पद्मश्री कालबेलिया नृत्यांगना गुलाबो की नृत्य प्रस्तुति, संस्कृत अकादमी के सहयोग से नृत्य नाटिका रत्नावली का मंचन, संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से लंगा-मांगणियार कलाकारों के लोक गीतों की प्रस्तुति, ब्रज भाषा अकादमी के सहयोग से डीग के अशोक शर्मा के निर्देशन मेें महारास, मयूर नृत्य, ब्रज रसिया के अलावा फूलों की होली जैसी भव्य प्रस्तुतियो के साथ ंराजस्थान के भवाई और चरी नृत्य प्रस्तुत किये जाऐंगे। इस अवसर पर सौरभ श्रीवास्तव के निर्देशन में नाटक आत्मकथा का मंचन भी किया जाएगा।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

आज हुआ 38वीं छात्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन

आज हुआ 38वीं छात्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन

श्रेष्ठ कृतियों के विद्यार्थी कृतिकार हुए सम्मानित

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी की 38वीं छात्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन आज शाम अकादमी परिसर में किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रमुख शासन सचिव व परिवहन विभाग के आयुक्त शैलेन्द्र अग्रवाल थे। इस अवसर पर राजस्थान उर्दु अकादमी के अध्यक्ष अशरफ अली भी उपस्थित थे। इस प्रदर्शनी के लिए अकादमी को राज्य भर से 306 छात्र-छात्राओं की 646 कलाकृतियां प्राप्त हुई थीं। इनमें से 79 छात्रों की 103 कृतियों को प्रदर्शन के लिए चुना गया है। पुरस्कार के लिये 10 कृतियों का चयन किया गया जिन्हें आज 5-5 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से नवाजा गया।
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से सम्बोधित होते हुए कहा कि, अकादमी से में कई सालों से जुड़ा हूं। आज प्रदर्शित कृतियों को देखकर लग रहा है कि कार्य का स्तर बढ़ा है। नई तकनीकें सामने आ रही हैं। छात्रों की मेहनत के साथ इन परिणामों के लिए शिक्षक भी बधाई के पात्र हैं।
अकादमी के अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम. दलवी ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि, आप लोग कला साधक ही नहीं कला योगी भी हैं। क्योंकि योग के बिना जो बनता है वो क्राफ्ट होता है। आप लोगों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां समाज का दपर्ण हैं। उन्होनें कला विद्यार्थियों को आमन्त्रित करते हुए कहा कि नए विद्यार्थी अपने विचार अकादमी से शेयर करें।
इन कृतियों और कृतिकारों को मिला पुरस्कार
जयपुर से मुबशेरा बानों की माई होम, मो. समीर खान की पोट्रेट स्टडी-1, संस्कृति अग्रवा की टी स्टॉल, उदित अग्रिहोत्री की कतार-2, उदयपुर से जयेश सिकलंगर की 1.2. .3. .4. .5. .., दिव्या चूण्डावत की दी मोस्ट लव्ड मशीन-2, मुक्ता शर्मा की लाइफ ऑफ इनफिनिटी, वनस्थली से अदिति दाधीच की कलेक्टिव पॉवर एवं शालिनी पॉल की लायब्रेरी-1 तथा कुचामन सिटी से मुकेश कुमार की ब्याह-1

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

20वां कला मेला 4 जनवरी से

20वां कला मेला 4 जनवरी से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित 20वां कला मेला 4 जनवरी से आरम्भ होगा। रवीन्द्र मंच पर आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय मेले का समापन 8 जनवरी को होगा। मेले में स्टॉल आवंटन के लिए प्रार्थना पत्र अकादमी कार्यालय में जमा करवाने की अन्तिम तिथी 20 दिसम्बर है।
स्टॉल प्राप्ति के लिये निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन के साथ बायोडेटा व प्रदर्शित की जाने वाली कृतियों में से पांच कृतियों के रंगीन फोटोग्राफ संलग्र करने होंगे। अकादमी 26 दिसम्बर को चयनित आवेदकों को आवंटन की सूचना देगी जिन्हें स्टॉल का निर्धारित शुल्क अकादमी को चुकाना होगा।
आवंटन हेतु प्रार्थना पत्र व नियमावली अकादमी कार्यालय के साथ मूमल के पास उपलब्ध है।

शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

कला मेला जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में

कला मेला जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में
मेला कमेटी गठित
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी का वार्षिक आयोजन कला मेले का 20वां एडीशन नववर्ष की शुरुआत में करना तय किया गया है। यह मेला संभवत 3 से 8 जनवरी के मध्य रवीन्द्र मंच पर आयोजित होगा।
इस मेले के लिये कमेटी का गठन 12 अक्टूबर को किया गया। कमेटी में जयपुर के सात, बूंदी का एक व उदयपुर के तीन कलाकार शामिल किये गये हैं। कमेटी के प्रमुख नात्थूलाल वर्मा होंगे और अन्य सदस्यों में जयपुर से तिलक गीताई, लोकेश जैन, महावीर मूर्तिकार, भुवनेश जैमिन, श्वेत गोयल व सुरेन्द्र सोनी, बूंदी से डॉ. हेमलता कुमावत, उदयपुर से राधा कृष्ण वशिष्ठ, नरेन्द्र सिंह चिंटू तथा हेमन्त जोशी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि 19वां कला मेला उदयपुर में नवम्बर 2016 में आयोजित हुआ था जो कि बगैर मेला कमेटी के सफलता पूवर्क सम्पन्न हुआ। जबकि 18वां कला मेला मार्च 2015 में जयपुर के जेकेके स्थित शिल्पग्राम में आयोजित किया गया था जो मेला कमेटी की हठधर्मिता व अव्यवस्थाओं के चलते फ्लाप शो साबित हुआ था।

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

स्टेट अवार्ड प्रविष्टियां जमा करवाने की तारीख बढ़ी

स्टेट अवार्ड प्रविष्टियां जमा करवाने की तारीख बढ़ी
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी आयोजित स्टेट अवार्ड के लिए प्राप्त करने की अन्तिम तिथि बढ़ा दी गई है। पहले प्रविष्टियां जमा करवाने की अन्तिम तिथी 27 सितम्बर रखी गई थी जिसे सात दिन के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। अब कलाकार अपनी प्रविष्टियां 4 अक्टूबर तक अकादमी कार्यालय में जमा करवा सकेंगे।

शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

पोस्टर्स में साकार हुआ जन-मन-गण


पोस्टर्स में साकार हुआ जन-मन-गण
हिन्दी दिवस समारोह सम्पन्न
मूमल नेटवर्क, जयपुर। 14 व 15 सितम्बर को हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी एवं राजस्थान ललित कला अकादमी केे संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कला विद्यार्थियों ने पोस्टर्स के जरिए अपनी देश भक्ति का इजहार किया वहीं कला एवं संस्कृति में हिन्दी की भूमिका जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
14 सितम्बर का आयोजन ललित कला अकादमी परिसर में किया गया जहां पर लगभग 50 कला विद्याार्थियों ने रंगों से जन-गन-मण को साकार करते हुए पोस्टर्स बनाए। इसके साथ ही  डॉ. राजेश व्यास ने कला एवं संस्कृति में हिन्दी की भूमिका विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। 15 सितम्बर को राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी में संगोष्ठि का आयोजन किया गया।
अपने व्याख्यान में बोलते हुए  डॉ. राजेश व्यास ने कहा कि, कला के मर्म तक पहुंचने के लिए हमें हिन्दी भाषा व हमारी संस्कृति को अपनाना होगा, आत्मसात करना होगा। नृत्य की अक्षि, चित्रकला की दृष्टि तथा कला की आत्मा को समझने के लिए हमेेंं हमारी भाषा की महत्ता को स्वीकारना होगा। आज ऑक्सफॉर्ड  में नए शब्दों का संकलन हिन्दी से ही किया जा रहा है। हिन्दी इसलिए सम्पन्न है क्योकि समस्त प्रादेशिक भाषाओं ने उसे रक्त संचार दिया है। भाषा के मर्म में प्रवेश कर ही कला में प्रवेश किया जा सकता है।

इस अवसर पर बोलते हुए राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी की निदेशक डॉ. अनीता नायर ने कहा कि अंग्रेज यह अच्छी तरह जानते थे कि किसी को लम्बे समय तक दास बनाने के लिए हमेंं उसकी भाषा पर आधिपत्य जमाना होगा और उन्होंने भारत की शिक्षा को आंग्ल भाषा की
बैसाखी पकड़ा दी। इस लिए हम आज मानसिक रूप सेे पंगु हो चुके हैं। यही कारण है कि हम इस छोटी सी बात को भी नहीं समझ पा रहे हैं कि हमारा सर्वांगीण विकास निज भाषा हिन्दी के माध्यम से ही संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही सह-आचार्य डॉ. उर्वशी शर्मा ने अपनेे संबोधन में कहा कि, आज हिंदी दिवस नहीं हमारी भारतीय भाषाओं का दिवस है कलाओं के मर्म तक पहुंचने के लिए हमें अपनी भाषाओं से जुडऩा होगा।
अन्त में राजस्थान ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. अश्विन दलवी ने समस्त अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।

सोमवार, 11 सितंबर 2017

अकादमी में एकजुट हुए अनेक वरिष्ठ कलाकार

अकादमी में एकजुट हुए अनेक वरिष्ठ कलाकार
कला शिक्षा व शिक्षकों की समस्या पर हुआ चिंतन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी में अध्यक्ष की नियुक्ति के 31 दिन बाद अध्यक्ष डॉ. अश्विन दल्वी के निमंत्रण पर सोमवार 11 सितम्बर को अकादमी में नगर के वरिष्ठ कलाकार उनसे भेंट करने पहुंचे।
चौंकाने वाली बात यह थी कि इस एकजुटता में अकादमी में बिना अध्यक्ष के भी सक्रिय रहने वाले कलाकारों के अलावा वह वरिष्ठ कलाकार भी उपस्थित थे जो सामान्यत: अकादमी में सक्रिय नजर नहीं आते। शायद यही कारण रहा कि प्राय: व्यक्तिगत लाभ, प्रभाव व पदों के लिए चिंतित रहने वाले वरिष्ठों के बीच कला शिक्षा व कला शिक्षकों की समस्या पर चर्चा हुई। इस बात पर सभी ने सहमत हुए कि राज्य में ललित कलाओं के समुचित विकास के लिए स्कूली शिक्षा में कला शिक्षा को उतना ही महत्व दिया जाय जितना कि पश्चिमी स्कूली शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा बोड्र्स के माध्यम से दिया जाता है ।
डॉ. अश्विन दल्वी ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों के बीच अकादमी की राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय छवि बनाने को लेकर चर्चा हुई। इसी के साथ अकादमी की गरिमा को पुन:स्थापित करने को लेकर भी विमर्श किया गया। डॉ. दल्वी ने आशा व्यक्त की कि सभी का साथ लेकर अकादमी को उन्नत किया जा सकता है।
चर्चा में शामिल वरिष्ठ कलाकार प्रो. चिन्मय मेहता ने जानकारी दी कि विदेशों के स्कूलों में कलाओ का शिक्षण प्रशिशिक्षण इस लिए अनिवार्य नही है कि विद्यार्थी आगे चलकर महान चित्रकार बने बल्कि इसलिए भी अनिवार्य है कि वे उम्दा कला रसिक भी बने।
विडंवना यह है कि जंहां एक ओर राज्य में उच्च शिक्षा में कला शिक्षा में आये बदलाव के कारण प्रोफेशनल उपाधि प्राप्त कलाकार कला शिक्षक बनने के लिए तैयार बैठे है जो राज्य सरकार द्वारा कला शिक्षको की नियुक्ति में बंदी के काऱण संघर्षरत है।
प्रो. मेहता ने कहा कि देखा जाय तो स्कूलों में कला शिक्षा ही बच्चों को कलाओं को समझना और  उनका आनंद लेने का संस्कार देती है तथा उन्हें एक अच्छा नागरिक और मनुष्य बनाने में मदद करती है ।
इस बैठक में एकजुट हुए कलाकारों में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, भवानी शंकर शर्मा, आर.बी. गौतम, प्रो. चिन्मय मेहता, डॉ. एस.एच काजी, समन्दर सिंह खंगारोत, वीरबाला भावसार, पद़मश्री अर्जुन प्रजापति, पद़मश्री शाकिर अली, तिलक गीताई शामिल थे।

सोमवार, 21 अगस्त 2017

38वीं छात्र कला प्रदर्शनी

 
38वीं छात्र कला प्रदर्शनी
प्रविष्टियां जमा करवाने की अन्तिम तारीख 14 सितम्बर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा 38वीं छात्र कला प्रदर्शनी के लिए राजस्थान के कला विद्यार्थियोंं से कलाकृतियां आमन्त्रित की जा रही हैं। अकादमी में कलाकृतियां जमा करवाने की अन्तिम तिथि 14 सितम्बर है।
सर्वश्रेष्ठ 10 कृतियों को 5-5 हजार रुपए की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। प्रविष्टिी हेतु विद्यार्थी अधिकतम तीन कृतियां ही भेज सकते हैं। प्रदर्शनी के लिए प्रविष्टियां भेजने वाले विद्यार्थी की आयु 15 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

शनिवार, 12 अगस्त 2017

काफी कुछ नया करना है


काफी कुछ नया करना है

कला जगत स्चयं को समग्र माने तब ही हर पक्ष का मान बढ़ेगा

राजस्थान ललित कला अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. अश्विन एम. दलवी का कहना है कि अकादमी की वर्तमान गतिविधियों को सुचारु रखते हुए काफी कुछ नया करना है।
पद ग्रहण के बाद डॉ. दलवी ने 'मूमल' से हुई एक विशेष भेंट में अपने पद की जिम्मेदारियों के सकारात्मक स्वप्न का कैनवास बुनते हुए अपने विचार रखे। उनका कहना है कि कला जगत स्चयं को समग्र माने तब ही कला के हर पक्ष का मान बढ़ेगा और वो उन्नति की ओर अग्रसर होगा।
अध्यक्ष ने अपनी युवा व एनर्जिक सोच का परिचय देते हुए कहा कि तय कार्यक्रमों से अधिक एडीशनल क्रिएटिव कार्यक्रम हो इस पर जोर दिया जाएगा। कार्यक्रम सुचारु रूप से सम्पन्न हो सके इसके लिए सरकार से प्राप्त बजट के साथ फण्ड उपार्जन की दिशा में कार्य किया जाएगा। उनका मत है कि कार्यक्रमों में सब लोगों की समान रूप से भागीदारी होनी चाहिए। डॉ. दलवी का कहना है कि कन्टेम्पररी आर्ट को सम्मान देते हुए ट्रेडीशनल आर्ट को भी बराबरी की हिस्सेदारी मिल सके इस दिशा में प्रयत्न किया जाएगा। जो कलाएं या शैलियां लुप्त होने के कगार पर हैं या कम हो गई हैं वो प्रमुखता से उबर कर सामने आएं और रिकवर हों, यह मेरी प्रमुखता रहेगी।
संगीत दिखेगा व चित्र गाएंगे
जब डॉ दलवी से संगीत और दृश्य कला के समन्वय के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि मैंने संगीत को विजुअल से जोड़कर कार्यक्रम किए हैं और अकादमी में भी ऐसे कार्यक्रम प्लान किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में संगीत दिखेगा व चित्र गाएंगे।
सबको साथ लेकर चलने की विचारधारा वाले अकादमी अध्यक्ष जल्दी ही अनुभवी कलाकारों की मीटिंग बुलाकर उनसे सलाह मशवरा कर अकादमी कार्यक्रमों को नई दिशा देंगे।
अमुमन जब भी कोई नया अध्यक्ष पद भार ग्रहण करता है तो हाऊस बनने तक चल रहे कार्यक्रमों पर भी ग्रहण लग जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा डॉ. दलवी का मत है कि समिति गठन का कार्य किसी कार्यक्रम की बाधा नहीं बनेगा, गतिविधियां अपने पूर्व नियोजन के अनुरूप सुचारू रूप से चलती रहेंगी।
अकादमी को लेकर अपने सपनों के प्रति आशान्वित डॉ. दलवी का दावा है कि साल भर के भीतर अकादमी कार्यक्रमों का सकारात्मक लेखा-जोखा वो निश्चित रूप से देंगेे।
डॉ अश्विन महेश दलवी: एक परिचय
सन् 1977 में प्रदेश के जाने-माने तबला वादक स्व. महेश दलवी के घर इनका जन्म हुआ। ऑंख खुलते ही सात सुरों के बीच परवरिश हुई और शिक्षा दीक्षा भी संगीत में ही हुई। पिता की प्रेरणा से सितार इनका प्रिय वाद्य बना और सुर बहार में दक्षता प्राप्त की। संगीत में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद 'पं. निखिल बनर्जी का जीवन परिचय और संगीत जगत को उनकी अनुपम देन' विषय के साथ डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। कॅरियर संगीत शिक्षक के रूप में आरम्भ हुआ और देश के ख्यात विश्वविद्यालय वनस्थली विद्यापीठ से लेकर एम.एस. यूनीवर्सिटी बड़ौदा में शिक्षक रूप में कार्य किया। रुझाान संगीत व तमाम कलाओं के रिसर्च के प्रति इतना बढ़ा की बड़ौदा छोड़ अपने गृह नगर जयपुर आकर शोध में सक्रिय हुए और आज भी कई जिज्ञासुओं के मार्गदर्शक व मददगार हैं। संगीत के साथ-साथ इंस्टालेशन में भी इनका योगदान रहा है। डॉ दलवी ने बताया, इस वर्ष के अन्त में जयपुर आर्ट समिट के लिए युवा शिल्पी हंसराज कुमावत के साथ एक इंस्टालेशन तैयार करने की योजना है।

शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

59वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए कलाकृतियां आमन्त्रित

59वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए कलाकृतियां आमन्त्रित

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा 59वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए कलाकारों से कलाकृतियां आमन्त्रित की जा रही हैं। हमेशा कमी तरहा इस वर्ष भी प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए प्रवेश शुल्क 100 रुपए रखा गया है। अकादमी में कलाकृतियां जमा करवाने की अन्तिम तिथि 27 सितम्बर है।
सर्वश्रेष्ठ 10 कृतियों को 25-25 हजार रुपए की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया जाएगा। इन 10 पुरस्कारों में से 2 ग्राफिक ड्राईंग कृतियों को तथा 2 मूर्तिकला को दिए जाएंगे। नियम के अनुसार जो कलाकार पुरस्कार के लिए कृतियां नहीं दे सकते वे 'प्रतियोगिता के लिए नहीं' श्रेणी में प्रदर्शनी का हिस्सा बन सकते हैं। प्रत्येक कृतिकार को तीन कृतियां भेजना अनिवार्य है।

मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

Rajasthan Lalit Kala Akademy 37वीं छात्रकला प्रदर्शनी 2016-17


37वीं छात्रकला प्रदर्शनी 2016-17
पुरस्कार
प्राप्त प्रविष्टियों में से निर्णायकों द्वारा चयनित 10 उत्कृष्ट कृतियों को अकादमी द्वारा पाँच-पाँच हजार रूपये के 10 पुरस्कार दिये जायेंगे।
अन्तिम तिथि
प्रवेश-पत्र तथा प्रविष्टियाँ भेजने की अन्तिम तिथि 18 जनवरी, 2017 होगी। वे उस दिन सांय 5.00 बजे तक स्वीकार की जायेंगी। इस अवधि के पश्चात् किसी भी कृति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रवेश पत्र शिक्षण संस्था के विभागाध्यक्ष/प्राचार्य द्वारा अग्रेषित होना चाहिए।
पात्रता
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र/छात्राओं की आयु 15 से 25 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।
उनका राजस्थान राज्य स्थित किसी शिक्षण संस्था का विद्यार्थी होना अनिवार्य है। छात्र कला प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी अकादमी की वार्षिक प्रदर्शनी में भाग नहीं ले सकेंगे।
प्रतियोगिता सम्बन्धी नियम
1. प्रत्येक प्रतियोगी अधिक से अधिक तीन कृतियाँ भेज सकेगा।
2. प्रत्येक कृति छात्र/छात्रा की स्वनिर्मित कृति होनी चाहिए।
3. कलाकृतियाँ पहले किसी प्रदर्शनी में प्रदर्शित नहीं होनी चाहिए।
4. अकादमी एक निर्णायक समिति का गठन करेगी। समिति के सदस्य सभी प्राप्तकलाकृतियों का अवलोकन करके प्रदर्शनी हेतु स्वीकृत तथा पुरस्कृत करने हेतु दस उत्कृष्ट एवं पाँच सान्त्वना पुरस्कारों हेतु कृतियों का चयन करेंगे।
5. निर्णायक समिति का निर्णय अन्तिम माना जाएगा।
6. अकादमी द्वारा कृतियों की वापसी के लिए निर्धारित तिथि के एक महीने के भीतर यदि छात्र/छात्रा अपनी कृतियाँ वापस नहीं ले जायेंगे तो उनकी सुरक्षा के सम्बन्ध में अकादमी का कोई उत्तरदायित्व नहीं होगा और न ही किसी क्षति के लिए वह क्षतिपूर्ति देने के लिए बाध्य होगी।
7. प्रदर्शनी के लिए स्वीकृत प्रत्येक कृति के प्रकाशन व प्रदर्शन का अधिकार अकादमी के पास पूर्णतया सुरक्षित रहेगा।
8. प्रत्येक छात्र/छात्रा कलाकार को निमंत्रण-पत्र के अतिरिक्त सूची-पत्र की एक प्रति निःशुल्क दी जाएगी।
9. फ्रेम किये हुए चित्र ही स्वीकार किये जायेंगे।
10. प्रदर्शनी हेतु छात्रों को कलाकृतियाँ भेजने और वापस मंगाने का खर्च स्वयं वहन करना होगा।
प्रवेश-पत्र
37वीं छात्रकला प्रदर्शनी 2016-17
सचिव,
राजस्थान ललित कला अकादमी
जे-15, झालाना संस्थानिक क्षेत्र, झालाना डूंगरी, जयपुर-302004
महोदय,
मैं, स्वनिर्मित निम्न कलाकृतियाँ उपरोक्त प्रदर्शनी/प्रतियोगिता में सम्मिलित करना चाहता/ चाहती हूँ।
मैं राजस्थान स्थित.............................................................................................................................................................
शिक्षा संस्थान में...................................................................................................कला का/की विद्यार्थी हूँ।
क्र.सं.
कृति का शीर्षक
माध्यम
मूल्य
नाम........................................................................................................................................................................................
निवास स्थान.......................................................................................................................................................................
ई-मेल...................................................................................................................................................................................
दूरभाष/मोबाइल..............................................................................जन्म तिथि...............................................................
छात्र/छात्रा द्वारा दिये गये उपरोक्त तथ्य सही हैं तथा प्रतियोगिता नियमों के अनुकूल हैं।
ह. विभागाध्यक्ष/प्राचार्य
दिनांक................................ मोहर
...............................................................................................................................................................................................
मोनोग्राम राजस्थान ललित कला अकादमी
37वीं छात्र कला प्रदर्शनी, 2016-17
कलाकृति न. रसीद दिनांक .................................
कलाकृति का शीर्षक
1.....................................................................
2.....................................................................
3.....................................................................
नाम व पता
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कलाकृति के पीछे एक लेबिल चिपका होना चाहिए जिस पर निम्न विवरण दिये जाने चाहिए।
.............................................................................................................................................................................
37वीं छात्र कला प्रतियोगिता, 2016-17
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
कलाकार का नाम...............................................................................................................................................................
आयु.......................................................................................................................................................................................
शिक्षण संस्थान का नाम....................................................................................................................................................
कलाकृति का शीर्षक..........................................................................................................................................................
माध्यम...................................................................................................................................................................................
कलाकृति का मूल्य.............................................................................................................................................................
दिनांक हस्ताक्षर
...............................................................................................................................................................................................
37वीं छात्र कला प्रतियोगिता, 2016-17
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
कलाकार का नाम...............................................................................................................................................................
आयु.......................................................................................................................................................................................
शिक्षण संस्थान का नाम....................................................................................................................................................
कलाकृति का शीर्षक..........................................................................................................................................................
माध्यम...................................................................................................................................................................................
कलाकृति का मूल्य.............................................................................................................................................................
दिनांक हस्ताक्षर
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37वीं छात्र कला प्रतियोगिता, 2016-17
राजस्थान ललित कला अकादमी, जयपुर
कलाकार का नाम...............................................................................................................................................................
आयु.......................................................................................................................................................................................
शिक्षण संस्थान का नाम....................................................................................................................................................
कलाकृति का शीर्षक..........................................................................................................................................................
माध्यम...................................................................................................................................................................................
कलाकृति का मूल्य.............................................................................................................................................................
दिनांक हस्ताक्षर


बुधवार, 20 अप्रैल 2016

Rajasthan Lalit Kala Akadami KalaMela

आखिर पूरी तरह टल गया कला मेला
12 लाख रुपए लेप्स
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में आयोजित होने वाला कला आयोजित नहीं किया जा सका और इस आयोजन के लिए मिले 12 लाख रुपए लेप्स हो गए। अकादमी के अधिकारी कला मेला आयोजित नहीं कर पाने का कोई ठोस कारण बता पाने कि स्थिति में भी नहीं हैं।
राजस्थान ललित कला अकादमी की सचिव सोविला माथुर ने 'मूमल' को बताया कि इस वर्ष जनवरी में कला मेला प्रस्तावित था, लेकिन गणतंत्र दिवस के लिए झांकी के कार्य की व्यवस्तता के चलते संभव नहीं हो पाया। फरवरी- मार्च में जेकेके में स्थान उपलब्ध नहीं हो पाया। बाहर किसी निजी स्वामित्व वाले स्थान पर आयोजन करने लायक फंड नहीं था। मार्च के बाद मई में जेकेके में स्थान उपलब्ध हुआ, लेकिन वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाने के कारण राशि खर्च करने की अनुमति नहीं दी जिससे 2015-16 में होने वाले कला मेले की राशि लगभग 12 लाख रुपए लेप्स हो गई। इस वर्ष 2016-17 का कलामेला सितम्बर-अक्टूबर में करने की योजना है।
 
ये रही पूरी दास्तान 
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों से फरवरी-मार्च में आयोजित होने वाले कला मेले के 19वें एडीशन को अकादमी द्वारा नवंबर में करने का प्रस्ताव पारीत किया गया था तो पूरे कला जगत में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी। इस प्रस्ताव के बाद कोई ना कोई कारण बताते हुए अकादमी इसका आयोजन टालती रही और आयोजन के लिए निर्धारित फरवरी-मार्च भी बीत गया। अकादमी द्वारा मार्च में छात्र कला प्रदर्शनी के आयोजन की मजबूरी बताई गई तो अपे्रल में जवाहर कला केन्द्र में स्थान उपलब्ध ना हो पाने का कारण। प्रदेश में प्रतिवर्ष मई में होने वाली गर्मी की तपन सेे अनजान अकादमी के अधिकारियों द्वारा जवाहर कला केन्द्र से स्थान उपलब्ध करवाने के लिए पत्र-व्यवहार की खानापूर्ति जारी रही। जवाहर कला केन्द्र की ओर से मई में अकादमी की पसंद व सुविधा का कोई भी समय उपलब्ध करवाने की स्वीकृति दी गई। अब मई की गर्मी को कारण बताते हुए कलामेला नहीं कर पाने को कारण बताया गया। 
युवा कलाकारों के साथ कला प्रेमियों को पूरे राजस्थान कीे कला के बहुत बड़े प्रदर्शन से वंचित होना पड़ा। कला मेले का हिस्सा बनने के लिए प्रदेश भर के कलाकार कई महीनों पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। कला खरीददार भी उचित मूल्य पर युवा कूचिंयों की नवीनता को क्रय करने के लिए बेसब्री से कला मेले की प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन अकादमी द्वारा बीते वर्ष 2015 के नवंबर माह में प्रस्तावित कला मेला आगामी महीनों के लिए टलते-टलते आखिरकार अधिकारियों की कोताही का शिकार हो गया।
एक ओर कला आयोजनों के लिए हमेशा पर्याप्त कोष नहीं होने के शोक पर कृत्रिम विलाप, दूसरी ओर कला मेले के कोष को लेप्स करा के सरकार को वापिस लौटाने की कार्रवाई। यह अकादमी कला और कलाकारों के प्रति प्रतिबद्धता का एक और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रदेश का कला जगत कई वर्षों तक कला मेला रद्द किए जाने का दंश झेल चुका है। वर्ष 2004 में आयोजित बारहवें कला मेले के बाद पूरे 6 वर्षों तक अकादमी ने कला मेले का आयोजन नहीं किया था। वर्ष 2010 में 13वें कला मेले के आयोजन के साथ फिर इसकी शुरुआत हुई और पांच साल लगातार आयोजित होने के बाद अब इस बार कला मेले नहीं हो सका। कला मेले को रद्द कर प्रदेश के कलाकारों को निराश करने का कारण अकादमी के पास पहले भी नहीं था और अब भी नहीं है।
अब नए उत्साह के साथ नए-नए कोर्स
गर्मी की को एक कारण बताते हुर्सए वार्षिक कला मेले आयोजित नहीं कर पाई राजस्थान ललित कला अकादमी अब नए उत्साह के साथ इसी गर्मी में अन्य आयोजन करने में जुटी है। मई में ही कला विशेष की जानकारी देने के लिए स्पेशल कोर्स आरम्भ किए जा रहे है। अब यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि मई की गर्मी के बदलते हुए नए अर्थ कम से कम अपनों के हित में तो ठंडी बयार बहा सकेंगे।