गुरुवार, 14 जून 2018

वाराणसी में ब्रज की 'सांझी' की अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप 16 जून से

वाराणसी में ब्रज की 'सांझी' की अंतरराष्ट्रीय वर्कशाप 16 जून से
मूमल नेटवर्क, वाराणसी। ब्रज की विश्व प्रसिद्ध सांझी कला की तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 16 से 18 जून तक होगा। इस कार्यशाला में पांच हजार साल पुरानी और विलुप्त हो रही इस कला परंपरा को देश-विदेश के कलाकार एक साथ मिलकर नया स्वरूप देने का प्रयास करेंगे। यह कार्यशाला ब्रज के सांझी कलाकार सुमित गोस्वामी के निर्देशन और क्रिएटिव फोरम के राजकुमार सिंह के संयुक्त प्रयासों से आयोजित की जा रही है।
इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागी सांझी कला की बारीकियों और इतिहास से रूबरू हो सकेंगेे। क्रिएटिव फोरम के कलाकार राजकुमार सिंह ने कहा कि सांझी देखने में भले ही रंगोली जैसी लगती है, लेकिन इसका महत्व कहीं ज्यादा है। श्रीकृष्ण के प्रति श्री राधा के प्रेम का प्रतिबिंब है सांझी।
उन्होंने कहा कि, शाम के वक्त श्रीकृष्ण जब राधा से मिलने आया करते थे तो राधा उन्हें रिझाने के लिए फूलों से तरह-तरह की कलाकृतियां बनाया करती थीं। जब श्रीकृष्ण गोकुल छोड़कर चले गए, तब भी श्रीराधा उनके साथ बिताए गए पलों की याद में इस तरह की कलाकृतियां बनाया करती थीं जो सांझी कला के नाम से विख्यात हुई। यह कला अब लुप्त हो रही है और इसको बढ़ावा देने के लिए ही कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि, पहले तो यह कला मंदिरों तक सिमटी और अब आलम यह है कि ब्रज में भी श्री राधा रमण मंदिर ही ऐसा है, जहां पर सांझी बनाई जाती है। इस मंदिर के पुजारी वैष्णवाचार्य सुमित गोस्वामी एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जो इस कला को बनाते हैं और इसे बचाने के लिए अपने स्तर पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं। सुमित गोस्वामी कहते हैं कि सप्त देवालयों में से एक श्रीराधा रमण मंदिर में पिछले 300 सालों से लगातार यह कला बनाई जा रही है। गोस्वामी का कहना है कि मंदिरों में अब यह कला देखने को नहीं मिल रही। वह अपने स्तर पर भरपूर कोशिश कर रहे हैं कि यह पुरातन कला आने वाली पीढिय़ों तक बनी रहे।
ब्रज की इस प्राचीनतम लोककला को बनाए रखने के लिए हम नई पीढ़ी को ट्रेनिंग दे रहे हैं। पानी के ऊपर और तल पर सांझी बनाने के अलावा ऑइल पेंटिंग, लीफ पेंटिंग, मिनिएचर पेंटिंग से लेकर दूसरी पेंटिंग की विधाओं में भी काम कर रहे हैं, ताकि लोगों का ध्यान मूल सांझी कला की तरफ खींच सकें।
क्या है सांझी कला
सांझी का मतलब है सज्जा, शृंगार या सजावट। मिथकों के अनुसार इस कला की शुरुआत स्वयं श्रीराधा जी ने की थी। मान्यता यह भी है कि सांझी शब्द दरअसल सांझ से बना है, जिसका अर्थ है शाम।
ब्रज में सांझी भी शाम को बनाई जाती है। इस कला का ब्रज से बड़ा गहरा नाता है। साल में एक खास मौके पर ही सांझी बनाई जाती है। माना जाता है कि शुरू-शुरू में तो श्रीराधा अपनी सखियों के साथ दीवारों पर रंगों, रंगीन पत्थरों और धातु के टुकड़ों के साथ सांझी बनाया करती थीं।
सांझी के प्रकार
1. फूलों की सांझी
2. गोबर सांझी
3. सूखे रंगों की सांझी
4. पानी के नीचे सांझी
5. पानी के ऊपर सांझी

मंगलवार, 12 जून 2018

यादों में जीवित सुरेन्द्र पाल जोशी

यादों में जीवित सुरेन्द्र पाल जोशी
कला जगत में कभी भी ना भर सकने वाले अपने स्थान को रीता छोड़ कर देश के प्रख्यात चित्रकार जोशी ने इस दुनिया से विदा ली। सुरेन्द्र पाल जोशी के जाने का दुख जितना उनके परिवार जनों को रहेगा उतना ही उनके करीबी मित्रों व पूरे कला जगत को भी। अपनी कला के साथ, ठसक व स्वाभिमान के लिए पहचाने जाने वाले जोशी ने विदा होने से पहले कला जगत के लिए अमूल्य विरासत छोड़ी है।
कुछ लेने नहीं बल्कि बहुत कुछ देने की ईश्वरीय सौगात लिए इस कलाकार का जन्म 1955 में देहरादून के मनियारवाला (गुनियालगांव) गांव में हुआ। कला के अंकुर स्कूली जीवन में ही नजर आने लगे थे। ऋषिकेश से बीए करने के बाद 1980 में लखनऊ के आट्र्स एंड क्राफ्ट्स कॉलेज में दाखिला ले लिया। और...फिर यहां से कला का जो सफर शुरू हुआ, वह कला जगत में नए कीर्तिमान स्थापित करता चला गया।
जोशी की साधना के शुरुआती साल बेहद गर्दिशभरे रहे लेकिन उनकी जीवटता ने जीत हासिल की। ...और उतरांचल के इस कलाकार ने राजस्थान को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुनते हुए 1988 में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट, जयपुर की फाइन आर्ट फैकल्टी के सहायक प्राध्यापक पद को ज्वाइन किया।
मूमल से जोशी जी का पहला परिचय राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट में सन् 2006 में हुआ जो 2013 के जयपर आर्ट समिट के पहले एडीशन के साथ गहरा हुआ। बहुत ही धीमें से अपनी बात रखना उनके स्वभाव में शामिल था। अपनी कला यात्रा के बारे में मूमल से उनकी अक्सर बात हुआ करती थी। उन्होंने बताया था कि, म्यूरल बनाने का मुझे शौक था और उस श्रप में पहचान भी मिली। आइओसी दिल्ली, यूनी लिवर मुबंई, शिपिंग कॉर्पोरेशन विशाखापत्तनम आदि स्थानों पर म्यूरल बनाए। वर्ष 1997 में ब्रिटेन से फैलोशिप मिलने के बाद वहां भी म्यूरल पर कार्य किया। लेकिन, वर्ष 2000 के बाद मैंने सिर्फ पेंटिंग पर ध्यान देना शुरू कर दिया। पेंटिंग में कई नए-नए प्रयोग किए और कई देशों में इसके लिए सम्मान भी मिला।
कलाकार के मन की उड़ान उन्हें बंधनों से आजाद होने की प्रेरणा देती रही और 2008 में राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट से सेवा निवृति लेकर पूरी तरहा से कला साधना में जुट गए। शिक्षक रहते हुए ही नव कलाकारों के लिए उनके मन में कई खयाल आते- जाते रहते थे। परिणाम के रूप में कुछ साल पहले अपना श्रम और धन लगाकर उतराखण्ड सरकार के सहयोग से अपनी जन्मभूमि देहरादून में पहले राजकीय कला संग्रहालय की स्थापना की। मूमल को अपने अपने की बात साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि, यह संग्राहलय और गैलेरी प्रदेश के कला साधकों के लिए एक बेहतर मंच साबित होगा। इस संग्राहलय के बनने के साथ ही जोशी देश के ऐसे पहले कलाकार बन गए जिनके जीवित रहते उनकी कला को स्थायी रूप से प्रदर्शित करता हुआ राजकीय संग्राहलय देश को समर्पित हुआ।
जोशी की कला यात्रा केवल म्यूरल्स व पेंटिंग तक ही सिमटी नहीं रही। उन्होंनें एक लाख सेफ्टीपिन से बना हैलीकॉप्टर, 70 हजार सेफ्टीपिन से बना हैलमेट, फिल्म स्ट्रिप से बना आर्कीटेक्चर स्ट्रेक्चर बनाकर कला प्रेमियों का मन मोह लिया। समाज व देश के प्रति संवेदा के चलते उन्होंनें फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। इस वर्ष की शुरुआत यानि जनवरी के प्रथम सप्ताह में जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उनके द्वारा निर्मित वृतचित्र पहाडग़ाथा की स्क्रिनिंग की गई। इस वृत चित्र में केदार घाटी में आई भीषण बाढ़, उससे जूझते लोग एवं बचाव व राहत कार्य को बहुत ही कलात्मक तरीके से फिल्माया गया था। इतनी सारी विधाओं पर एक साथ कार्य करने के तालमेल पर हुई एक वार्ता के दौरान जोशी जी ने मूमल से कहा था कि, विधा में बदलाव जोखिमपूर्ण जरूर है, किन्तु यदि इसे चुनौती मानते हुए पूरा अभ्यास किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
अपनी कला के दम पर उन्होंने एशियन कल्चरल सेंटर फॉर यूनेस्को, (जापान), ऑल इंडिया अवार्ड, राजस्थान ललित कला ऐकेडमी, फैलोशिप फॉर म्यूरल डिजाइन बाई द ब्रिटिश ऑट्र्स काउंसिल, नेशनल अवार्ड, ललित कला ऐकेडमी (नई दिल्ली), राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड (नई दिल्ली), गोल्ड मेडल यूनेस्को आदि जैसे कई पुरस्कार व सम्मान हासिल किए।
सम्मान, सफलता व जोखिम को अपना साथी मानने वाला यह कलाकार आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी कलाकृतियों के साथ उनकी यादों का सिलसिला हमेशा हमारे बीच उनकी मौजूदगी के एहसास को बनाए रखेगा।          -राहुल सेन



बेरोजगार कला शिक्षकों का एक बार फिर कलात्मक प्रदर्शन

बेरोजगार कला शिक्षकों का एक बार फिर कलात्मक प्रदर्शन
मुख्यमंत्री तक पहुंचाई अपनी मांगे
मूमल नेटवर्क, जयपुर। गत पांच वर्षों से बेरोजगार कला शिक्षक सरकार से कला शिक्षक के पद सृजित करने की मांग करते हुए आन्दोलन कर रहे हैं। इसी आन्दोलन की कड़ी में कल 12 जून को विधान सभा के सामने ज्योती नगर टी पोईंन्ट धरना स्थल पर कलात्मक प्रदर्शन करते हुए सरकारी रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शित किया गया। इस कलात्मक प्रर्दशन में प्रदेश के कलाकारों के समर्थन में अन्य राज्यों के कलाकारों द्वारा भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई गई। इस अवसर पर संगठन अधिकारियों ने अपनी पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री के सचिव के.के. पाठक को सौंपा।
सरकार तानाशाही और भेदभाव भरे रवैये से परेशान बेरोजगार कला शिक्षक (चित्रकला, संगीत, मूर्तिकला, नाटक, नृत्य)के अभ्यर्थियों ने  पेन्टिग व मूतिकला के प्रदर्शन के साथ गीत, संगीत, नृत्य व नाटक के माध्यम से कलात्मक प्रर्दशन कर रोष जताया। संगठन ने यह भी ऐलान किया कि,  अगर राजस्थान  सरकार व शिक्षा विभाग हमारी वाजिब मांगों पर ध्यान नही देती है तो हर जिले में कला टीमे (जत्थे) तैयार किये जायेंगे जो हर जिले में कला शिक्षा के फर्जीवाड़े को उजागर कर अभिभावकों को जागरूक करेगे। उन्होनें कहा कि जरूरत पड़ी तो मुख्यमन्त्री निवास के बाहर भी कलात्मक प्रदर्शन करेंगे।
संगठन के प्रभारी सतवीर भास्कर ने कहा की कला शिक्षा कक्षा 1-10 अनिवार्य होते हुए भी राजस्थान सरकार कला शिक्षको के द्वितिय श्रेणी के पद सृजित नही कर रही है। अन्य विषयों में हजारों पद निकाले गए  लेकिन 5 वर्षो मे एक भी कला शिक्षक का पद सृजित नहीं हो सका।
संगठन के जयपुर प्रभारी विरेन्द्रप्रताप सिंह मोडियाला ने कहा कि विगत 25 वर्षो से हर वर्ष राजकीय विद्यालयों मे कक्षा 1 से 10 में नामांकित होने वाले बच्चों को कला शिक्षा नहीं दी जा रही। विधालयो मे ना तो कला शिक्षक हैं और ना ही बच्चो के पास कला शिक्षा की किताबें हंै। कला शिक्षा की किताबों की छपाई तो हुई लेकिन बच्चों को वितरित नहीं की गईं। उन्होंने कहा कि,  कला शिक्षा की पढ़ाई के बिना ही सैद्वातिक व प्रायोगक परीक्षा के फर्जी मूल्यांकन लिस्ट बनाई जाती है और फर्जी अंक ग्रेडिंग बच्चों की अंक तालिका मे भर दी जाती है जो बच्चो की शिक्षा के साथ खिलवाड़ है।
संगठन के प्रदेश सचिव महेश गुर्जर ने कहा कि वर्तमान राजस्थान सरकार के आगे 5 वर्षो मे सैकडो़ बार शान्तिपूर्ण अहिसा के माध्यम से अपनी विभिन्न कलाओ के प्रर्दशन व धरने देकर मांगे रखी लेकिन एक बार भी सरकार ने हमारी मांगो पर ध्यान नही दिया। सरकार हमारी मांगो के प्रति सवेदनशील नही है जिसका उदाहरण यह है की कला शिक्षा मामले मे कभी भी मिटिंग नही बुलाई गई ना ही कोई  वार्ता की गई। जबकि हिंसात्मक आन्दोलन करने वाले संगठनों की मांगे सरकार तुरन्त मान लेती है। सरकार की नजऱ मे अहिंसा वालो की कोई जगह नही है। केन्द्र सरकार द्वारा भी कला शिक्षा देने और कला  शिक्षको के पद सृजन को लेकर सैकड़ो पत्र व टिपप्णीयां राजस्थान सरकार को प्रेषित किये गए हैं। संगठन के प्रमेन्द्र कुमार मीणा ने बताया की सन् 1992 से कला शिक्षा मे हर वर्ष हजारो विधार्थी डिग्री डिप्लोमा हासिल कर रहे हैँ। इस बार भी हमने शान्तिपूर्ण कलात्मक प्रर्दशन किया और आगे भी करेंगे।
ज्ञापन में दर्ज प्रमुख मांगे
1.शिक्षा विभाग के निर्धारित मापदण्डो के तहत् राजस्थान के राजकीय विद्यालयों मे कक्षा 1-10 तक हर वर्ष नामांकित होने वाले बच्चों को कला की शिक्षा (चित्रकला,संगीत)का अध्ययन करवाया जाये।
2.शिक्षा विभाग के मानदण्डो,योग्यता प्रावाधानो व नि:शुल्क अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के मापदण्डो के तहत् कला शिक्षको (चित्रकला,संगीत)के द्वितिय,तृतीय श्रेणी के पद सृजित कर भर्ती कि जाये।
3.विगत 2 वर्षो से गोदामो मे पड़ी कक्षा 1-10 तक अनिवार्य कला शिक्षा विषय की पुस्तके बच्चो को वितरण कि जाये।
4.राजकीय विद्यालयो में कक्षा 1 से 10 तक अनिवार्य कला शिक्षा विषय मे हर वर्ष हो रहे फर्जी मूल्यांकन बन्द किया जाये ।
5.प्रधानमन्त्री कार्यालय,माननव संसाधन विकास मन्त्रालय नई दिल्ली द्वारा कला शिक्षा के सन्दर्भ मे प्रेषित किये गये  टिपप्णीयो,पत्रो के निर्देश के अनुसार कला शिक्षको पद सृजित कर भर्ती कि जाये ।

अमित कल्ला के रंग और शब्दों की जुगलबंदी

देहगाम अर्टिस्ट रेजीडेंसी 2018 में होगी
अमित कल्ला के रंग और शब्दों की जुगलबंदी
मूमल नेटवर्क, देहगाम (गांधीनगर)। जयपुर के युवा चित्रकार अमित कल्ला पंद्रह  जून से शुरू होने वाली गुजरात के इंटरनेशनल क्रिएटिव ऑर्ट सेंटर की देहगाम आर्ट रेसिडेंसी प्रोग्राम में भाग लेंगे, जहाँ वे पेंटिंग बनाने के साथ कला चर्चा सत्र के दौरान प्राकृतिक रंगों के अनूठे संसार, उनकी प्रयोगिकता, प्रासंगिकता, उन्हें बनाने की तकनीक के साथ 'दृश्यकला के काव्यात्मक सौन्दर्य' विषय पर अपने विचार साझा करेंगें।
इस आर्ट रेजीडेंसी में देश भर से कुल दस कलाकारों का चयन किया गया हैं,  जो एक साथ रहकर अलग-अलग साइज़ के कैनवासों पर  कुल तीस पेंटिंग्स बनाएंगे जिन्हें आई ऐ आई सी के निर्देशक रविन्द्र मार्डीया द्वारा अहमदाबाद की गुफा आर्ट गैलेरी और मुम्बई की आर्ट हब कला दीर्घा में विधिवत प्रदर्शित किया जायेगा।
अमित ने बताया कि, इस आर्ट रेसीडेंसी के दौरान वह ध्रवपद संगीत की अविरल रवायत और उसकी बंदिशों के साथ राग भैरव, यमन और वृंदावनी सारंग पर रेखांकन के साथ बिंदु, बिम्ब और प्रतीकों की संगत का चित्र संसार रचेंगे।

रविवार, 10 जून 2018

आगामी प्रयाग कुंभ 2019 में दिखेंगे कला व संस्कृति के रंग

आगामी प्रयाग कुंभ 2019 में दिखेंगे कला व संस्कृति के रंग
कलाकारों को मिलेगा कलाकृतियां बनाने का अवसर
कई देशों के कलाकारों द्वारा मंचित होंगी राम लीलाएं
मूमल नेटवर्क, इलाहबाद। उत्तर प्रदेश सरकार आगामी प्रयाग कुम्भ को विशेष बनाने के लिए कला के रंग से रंगने जा रही है। सरकार की कोशिश है कि मेले में आने वाले देसी-विदेसी पर्यटक भारत की कला व संस्कृति को करीब से महसूस करें और उसका हिस्सा बनें। 'पेंट माय सिटी' नाम की इस योजना के तहत मेले में कलाकारों को खासी वरीयता मिलने वाली है। इसलिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के साथ प्राइवेट कंपनियों की भी मदद ली जा रही है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिहाज से भव्य होने जा रहे इस मेले में श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, थाइलैंड जैसे देशों की रामलीलाओं तथा मलेशिया की कृष्ण लीला का मंचन करने की तैयारी भी चल रही है।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा बनायी गई योजना के तहत तैयार कृतियों के होर्डिंग्स को शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर मेला क्षेत्र तक लगाया जाएगा। केन्द्र कलाकारों को कुम्भ आयोजन में जुडऩे के लिए विशेष रूप से आमन्त्रित कर रहा है। योजना के तहत सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से दस-दस कलाकारों की टीम तैयार की जाएगी। इसमें एक वरिष्ठ कलाकार के साथ नौ नए कलाकारों को शामिल किया जाएगा। कलाकृतियों मेेंं कुंभ मेला के विहंगम दृश्यों के अलावा धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर पर केन्द्रित चित्र उकेरे जाएंगे। मेले के तहत शहर के प्रमुख चौराहों, बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन से लेकर मेला क्षेत्र के आसपास एरिया में वाल पेंटिंग के जरिए कलाकृतियों की बड़ी-बड़ी होर्डिग्स लगाए जाएंगे। इसके तहत शहर के सभी प्रवेश द्वारों से लेकर चौराहों और सभी महत्वपूर्ण स्थलों की दीवारों पर पेंटिंग्स बनाई जाएंगी। यही नहीं, नावों और शहर व मेला क्षेत्र में गुब्बारों पर इन पेंटिंग्स को देखा जा सकेगा। जुलाई में पेंटिंग्स बनाने का काम शुरू होगा और अक्टूबर तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। पेंटिंग के विषय में कुंभ से जुड़े कथानकों के साथ ही शहर की पहचान रह चुकी हस्तियों और उनकी कृतियों को भी भित्ति चित्रों के जरिए लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
वेस्ट मटेरियल की कृतियां
केन्द्र प्रशासन जिन कलाकारों को अवसर देगा उनसे वेस्ट मैटेरियल के जरिए कलाकृतियां बनवाई जाएंगी। इसमे लोहा, लकड़ी व अनुपयोगी प्लास्टिक का इस्तेमाल कराया जाएगा। यही नहीं जिन चौराहों पर कलाकृतियों को लगाया जाएगा उसके बगल में एक सेल्फी प्वाइंट भी बनाया जाएगा, जहां से कोई भी पर्यटक कलाकृति के साथ खुद की तस्वीर ले सकेगा।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक ने कहा है कि इस योजना के लिए अनुभवी कलाकारों के साथ युवा व नए कलाकारों को भी अवसर प्रदान किया जाएगा।
दीवारों पर चित्रकारी 
इलाहाबाद को कुम्भ से पहले देश और दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनाकर उसे सजाने की तैयारी की जा रही है। हैदराबाद और जयपुर की तरह इलाहाबाद में प्रवेश के सभी प्रमुख मार्गों और शहर के अंदर स्थित दर्शनीय स्थलों के साथ रेलवे स्टेशन और पहली बार में नजर आने वाली दीवारों पर इलाहाबाद के धार्मिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक गौरव को चित्रों में उकेर कर पर्यटकों को लुभाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इसकी जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों को दी जाएगी। योजना के पहले चरण के लिए तीन करोड़ का बजट भी स्वीकृत हो चुका है।
ताजा होंगी इनसे जुड़ी यादें 
पेंट माय सिटी की मुख्य थीम देवासुर संग्राम होगा। हालांकि इसके साथ ही कुम्भ और इलाहाबाद से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कथानक और लोग भी इसमें शामिल होंगे। कुम्भ का दिल कहे जाने वाले साधु-संन्यासी और कल्पवासी भी पेंटिंग्स का हिस्सा होंगे। इसके साथ ही देश-प्रदेश और जिले के ऐसी हस्तियों को भी इनमें स्थान मिलेगा जो 'आइकनÓ के रूप में जाने जाते हैं। जिन हस्तियों के चित्र और कृतियों को दीवारों पर स्थान दिए जाने की योजना है इनमें हर्षवर्धन, हरिवंशराय ब'चन, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, फिराक गोरखपुरी, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा, चंद्रशेखर आजाद, मदन मोहन मालवीय, शहीद लाल पद्मधर भी शामिल हैं।
प्रोफेशनल की ली जाएगी मदद 
कुम्भ मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने बताया कि, पेंटिंग्स के लिए प्रोफेशनल चित्रकारों की मदद ली जाएगी। कई प्राइवेट कंपनियों से बात चल रही है। प्री-बिड कॉन्फ्रेंस के बाद बिडिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। इस योजना में न केवल पेंटिग बल्कि म्यूरल को भी डिजाइन का आधार बनाया जाएगा। पेंटिंग्स और म्यूरल शहर के अलावा रेलवे के स्ट्रक्चर्स (पुल व स्टेशन) पर भी बनाए जाएंगे इसके लिए रेलवे ने अपनी सहमति दे दी है। इसके साथ ही नावों और गुब्बारों पर भी इन पेंटिंग्स को बनाया जाएगा, जिससे कुम्भ सिटी में आने वाले श्रद्धालुओं को खुद के यहां होने की अनुभूति हो सके।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि &1 मई को लखनऊ में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उ'च स्तरीय बैठक में कुंभ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा को लेकर प्रस्ताव पेश किए गए।  उन्होंने बताया कि इस बैठक में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) को यह प्रस्ताव दिया गया कि वह कुंभ मेले में श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, थाइलैंड, रूस, त्रिनिडाड, कंबोडिया और सूरीनाम की रामलीला और मलेशिया की कृष्ण लीला की प्रस्तुतियों के संबंध में बात करे। बैठक में आईसीसीआर महानिदेशक से अनुरोध किया गया कि विदेश से कलाकारों को भारत लाने का जिम्मा आईसीसीआर उठाए और नई दिल्ली से इलाहाबाद लाने और यहां मंचन और आतिथ्य का जिम्मा स्थानीय आयोजक द्वारा उठाया जाएगा।
इलाहाबाद स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर ने बताया, आगामी कुंभ मेले में पूरे भारत के साथ ही विदेश में भारतीय संस्कृति के रूपों की झलक देखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में अपने अपने क्षेत्र के दिग्गज कलाकारों को बुलाने की तैयारी है। इनमें पांडवानी के लिए प्रख्यात तीजनबाई, भरतनाट्म की सरोजा वैद्यनाथन, कुचीपुड़ी की स्वपन सुंदरी, बांसुरी वादक हरि प्रसाद चौरसिया, कथक के पंडित बिरजू महराज, छऊ के संतोष नायर, कजरी गायिका मालिनी अवस्थी आदि शामिल हैं। 

शुक्रवार, 8 जून 2018

जेकेके में रविवार की सुबह होगी आर्ट परफॉमेंस के नाम

जेकेके में रविवार की सुबह होगी आर्ट परफॉमेंस के नाम
डॉ. कृष्णा महावर की कल्पना 'इन बिटविन द एलीमेंट्स ऑफ पेंटिंग्स, द बॉडी एंड द स्पेस' होगी साकार
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र में रवीवार  10 जून की सुबह आर्ट परफॉमेंस की प्रस्तुति होगी। यह आर्ट परफॉमेंस डॉ. कृष्णा महावर की परिकल्पना पर आधारित पेंटिंग के मूल सिद्धांतों से प्रेरित है जो केन्द्र के  फ्रंट लॉन में प्रात: 8 बजे आयोजित होगा। लगभग डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति को 'इन बिटविन द एलीमेंट्स ऑफ पेंटिंग्स, द बॉडी एंड द स्पेस' नाम दिया गया है। प्रस्तुति अधिकांशत: पेंटिंग्स में निहित उन सामान्य मौलिक सिद्धांतों पर केंद्रित है, जो कभी-कभी पेंटिंग्स में स्पष्ट दिखाई देते हैं अथवा अदृश्य रहते हैं।
यह आत्म-विश्लेषणात्मक परफॉर्मेंस बिना किसी पैन, पेंसिल, रंग या कैनवास के उपयोग के मात्र शरीर एवं खाली भूमि का उपयोग करते हुए प्रस्तुत किया जाएगा। यह एक नॉन-लीनियर और अमूर्त रचना है जिसमें पेंटिंग के छ: तत्वों के मूल अवधारणा शामिल हैं। इस प्रस्तुति में बताया जाएगा कि शरीर के माध्यम से किसी स्थान पर लाईन को किस प्रकार से अभिव्यक्त किया जा सकता है और किसी रिक्त स्थान पर स्वरूप को किस प्रकार से आकार दिया जा सकता है। इस परफॉर्मेंस का उद्देश्य मोमेंट्स, साउंडस् एवं बॉडी स्ट्रक्चर का उपयोग करते हुए अवधारणा में सुधार करना है।

बुधवार, 6 जून 2018

पोस्टर प्रतियोगिता की ओपन श्रेणी में अक्षय मुदगल अव्वल


पोस्टर प्रतियोगिता की ओपन श्रेणी में अक्षय मुदगल अव्वल
 मूमल नेटवर्क, जयपुर। पर्यावरण दिवस के अवसर पर कल 5 जून को मैसेज ऑर्गनाइजेशन और कलाचर्चा के सहयोग से  राजस्थान ललित कला अकादमी में पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पूर्व में यह प्रतियोगिता तीन श्रेणियों स्कूल विद्यार्थी, कॉलेज विद्यार्थी एवं ओपन श्रेणी में होने वाली थी। एन वक्त पर हुए बदलाव के बाद प्रतियोगिता दो श्रेणियों विद्यार्थी श्रेणी तथा ओपन श्रेणी में हुई।
ओपन श्रेणी में प्रथम स्थान अक्षय मुदगल ने हासिल किया। दूसरे स्थान पर डॉ. अमिता सिंह व मेघा शर्मा रहीं जबकि तीसरा स्थान सुनीता कुमावत को प्राप्त हुआ।
विद्यार्थी श्रेणी में प्रथम स्थान पर इशिता झांब, द्वितीय स्थान पर मास्टर आदित्य सक्सेना तथा तृतीय स्थान पर रक्षन्दा राजावत विजेता घोषित की गईं। इस दौरान टॉक शो का भी आयोजन किया गया।