मंगलवार, 6 नवंबर 2012

उदयपुर के 6 चितेरे जहांगीर आर्ट गैलेरी में

मूमल नेटवर्क। उदयपुर के चितेरों की एक कला प्रदर्शनी मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में इन दिनों कला प्रेमियों को लुभा रही है।
'लुकिंग इज नॉट सीइंग' नामक इस प्रदर्शनी में उदयपुर के 6 कलाकारों ने अपनी पेंटिंग्स और स्कल्पचर के जरिए अपनी सोच जाहिर की है। इनमें राकेश कुमार सिंह, सचिन दाधीच, हार्दिक उपाध्याय, जसवंत सिंह राजपुरोहित, भारत लाल पाटीदार व ललित गर्ग की कृतियां शामिल हैं। 12 नवम्बर को शुरू हुई यह प्रदर्शनी 18 नवम्बर तक चलेगी।
यह प्रदर्शनी उदयपुर की संस्था 'टखमण-28' द्वारा युवा कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए आयोजित कराई गई है। उल्लेखनीय है कि बिना किसी सरकारी सहायता के वर्ष में दो-तीन बार युवा कलाकारों को प्रदर्शनी के लिए ऐसे महत्वपूर्ण प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है।
उदयपुर से मोहन लाल जाट की खबर

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

शिल्प और कला जगत की गतिविधियों से लबरेज इस अंक में जानिए...
केंकड़ों की कलाकारी.. पेज-1
भारतीय कला बाजार के सुनहरे दिन..  पेज-2
प्रदेश में सक्रीय कला प्रदर्शनों के दलाल.. पेज-3
जेकेके में सम्पन्न दो व्यावसायिक शो.. पेज-5
जेब की साइज में कलानेरी की कोशिश.. पेज-5
बंगभूमि की विभिन्न चित्रांकन शैलियां.. पेज-9
दर्शक संस्था की दर्शना में दस्तक.. बैक कवर

...और भी बहुत कुछ जिसकी मूमल से उम्मीद की जा सकती है।
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गुरुवार, 1 नवंबर 2012

प्रदेश में सक्रीय कला प्रदर्शिनियों के मध्यस्त

मारीशस में प्रदर्शन के नाम पर लगाया कई कलाकारों को चूना
किसी ने पांच हजार लिए तो किसी ने ढाई हजार रु. वसूले
मूमल नेटवर्क, जयपुर। पिछले दिनों मारीशस में लगे एक ट्रेड फेयर में भारत से ले जाई गई कलाकृतियों के प्रदर्शन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रभावित कलाकारों को कहना है कि पैसे लेकर भी प्रदर्शनी में उनका काम प्रदर्शित नहीं किया गया जबकि प्रदर्शन का बीड़ा उठाने वाले कहते है कि हमने इस काम में काफी घाटा उठाया।
मूमल को दिल्ली सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन दिनों राजधानी में कला प्रदर्शिनियों के दलालों की सक्रियता यकायक बढ़ गई है। खासकर विदेशों मे शो कराने के नाम पर कलाकारों से काफी पैसा वसूल किया जा रहा है।  पिछले दिनों दिल्ली में सक्रीय दो मध्यस्थों ने मारिशस में आयोजित हुए एक ट्रेड फेयर में प्रदर्शित करने के लिए राजस्थान सहित देशभर के कलाकारों से काफी धन बटोरा। इनमें से एक ने 15 और एक अन्य ने 25 कलाकारों की कृतियां प्रदर्शन के लिए बुक की।
यूं हुआ घोटाला
मारीशस के एक ट्रेड फेयर में दिल्ली के दो मध्यस्थों, सामान्य बोलचाल की भाषा में कहे तो  दलालों ने दस बाई दस की दो अलग-अलग स्टाल्स बुक कराई। उसके बाद उन्होंने कलाकारों से उनकी कलाकृतियां प्रदर्शित करने के लिए 5 हजार रुपए प्रति पेंर्टिग्स की दर से पेसा वसूला किसी भी कलाकार ने दो से अधिक काम नहीं दिए। पांच हजार रुपए वसूलने वाले दलाल को करीब 15 कलाकारों के 20 काम मिले और फिर काम ढीला पड़ गया। उधर दूसरे दलाल ने 5 हजार रुपए में दो पेंटिंग्स प्रदर्शित करने के नाम पर 25 कलाकारों के 50 काम ले लिए। निर्धारित तिथि पर दोनों ट्रेड फेयर में पहुंचे, कुछ पेंटिंग्स भी साथ ले गए। जब बुक की हुई स्टाल का पैसा चुकाने का समय आया तो कोई भी पूरी स्टॉल का किराया देने की स्थिति में नहीं था। एक ने अपने साथ चावल के दाने पर नाम लिखनेे वाले एक अन्य कलाकार को पार्टनर बनाया तो दूसरे ने किन्ही श्रीमती नियाजी के नाम से बुक स्टाल में आधी जगह पाने के लिए मोटी रकम चुकाई।
अब दोनों के पास ही अलग-अलग जगह आधी-आधी स्टॉल थी। ऐसे में दोनों ही किसी का कोई काम प्रदर्शित करने की स्थिति में नहीं थे, सेल की तो बात ही दूर रही। एक ने  अपनी थोड़ी सी जगह में आगंतुकों के प्रोटेट बनाने शुरू किए और पैसा बनाया। जबकि दूसरा यह भी नहीं कर पाया क्यों कि वह कलाकार भी नहीं था।
यूं खुला मामला
ट्रेड फेयर के बाद जब कलाकारों को यह बताया गया कि उनकी कोई पेंटिंग नहीं बिकी, लेकिन काम लोगों ने पसंद किया है। भविष्य में उम्मीद है।
स्वभाव से सीधे कलाकारों ने उनकी बात सही मान कर संतोष कर लिया। उधर एक दूसरे के धंधे में टांग फंसाने से नाराज दलालों ने बदला लेने और आगामी आयोजनों से एक दूसरे का पत्ता काटने के विचार से कलाकारों के सम्मुख एक दूसरे की पोल खोलनी शुरू की। बस यहीं से कलाकार जागृत हुए और मूमल को दोनों ओर से जानकारियां मिलने लगी।

दलालों की सलाह पर प्रदर्शनी के प्रमाण में कलाकारों ने प्रदर्शनी में लगे उनके काम के फोटोग्राफ चाहे। ट्रेड फेयर में बुक स्टॉल के लिए किए गए भुगतान की रसीद दिखाने को कहा। अब दलाल बगले झांकने लगे। एक दूसरे के लिए खोदी खाई में गिरे दलालों में से एक ने बताया कि उसने तो अपनी स्टॉल के पैसे चुकाए और उसके पास रसीद भी है। उसने प्रतिदिन कुछ-कुछ कलाकारों का काम प्रदर्शित किया और फोटो भी खींचे। उसके बाद कैमरा खराब जाने के कारण वह फोटोग्राफ किसी को दिखा नहीं पाया। उसने दूसरे दलाल के लिए बताया कि उसे तो आयोजकों ने जैसे-तैसे एक  मिसेज नियाजी के स्टॉल में आधी जगह दिलाई। उसने वहां एक दिन नियाजी मैडम के आने से पहले पूरे स्टॉल में अपने साथ लाई कुछ पेंटिंग्स को बारी-बारी से लगा कर फोटोग्राफी शुरू की, लेकिन इस बीच मैडम नियाजी आ गई तो झगड़ा भी हुआ। बाद में तो उसके पास पेंटिंग्स रखने का ठिकाना भी नहीं था और उसके लाई पेंटिंग्स मेरे स्टॉल में टेबिल के नीचे रख्री जाती थी।

इसकी पुष्टि किए जाने पर दूसरे दलाल ने सभी बातें बेबुनियाद और गलत बताते हुए पहले के लिए कहा कि उसने अपने स्टॉल में चावल पर नाम लिखने वाले को आधी जगह दे दी। आधी जगह में कितनी पेंङ्क्षटग्स लगने की गुजाइश थी? यह तो कोई भी जान सकता है। अब ऐसे में कैमरा खराब नहीं होता तो क्या होता?

कुल मिलाकर कलाकारों से उनकी कृतियों के प्रदर्शन और सेल के नाम पर पैसे लेने वाले दोनों दलालों ने एक दूसरे की पोल जमकर खोली। दोनों ने बताया कि उनके पास प्रदर्शित की जाने वाली कृतियों के लिए तैयार किया हुआ कैटेलॉग है। स्टॉल के भुगतान किए धन की रसीद और प्रदर्शनी के कुछ फोटोग्राफ हैं। मूमल से हुई बातचीत में दोनों ने ही इनकी प्रतिलिपियां ई-मेल पर भेजने की बात कही, लेकिन बार-बार याद दिलाए जाने के बावजूद समाचार लिखें जाने तक दोनों की ओर से कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए गए।
अन्तत:
विदेशों में प्रदर्शन को लेकर उत्सुक और महत्वाकांक्षी कलाकार ही इस ठगी के शिकार हुए हैं। गांठ से रकम गंवाने के बाद भी ना तो उनकी कोई कृति बिकी और न ही प्रदर्शित ही हो पाई। और तो और अपनी प्रदर्शन उपलिब्धयों में जोडऩे के लिए एक कैटलाग या फोटोग्राफी तक नहीं जुट पाई। इन ठगे-ठगे से कलाकारों में दिल्ल्ी के वरिष्ठ कलाकारों के साथ यू.पी. और राजस्थान के कलाकार भी शामिल हैं।

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

आखिरकार साखलकर को प्रतिष्ठित 'प्रज्ञा' पुरस्कार की घोषणा

मूमल का फरवरी दिव्तीय अंक
जयपुर, मूमल नेटवर्क। आखिरकार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अजमेर के वयोवृद्घ (94 वर्षीय) चित्रकार, लेखक व साहित्यकार रत्नाकर विनायक साखलकर को प्रतिष्ठित लेखक के रूप में 'प्रज्ञा' पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह सम्मान हिन्दी ग्रंथ अकादमी की ओर से दिया जाता है। इन दिनों अत्यधिक आयु, शारीरिक दुर्बलता और कम सुनने के कारण साखलकर दादा शैया पर है। 
आज (14 अक्टूबर 2012) को सुबह वे सर्दी व कफ से परेशान थे, डाक्टर ने उन्हें दवा का इन्जेक्शन दिया। उसके बाद से वे अधोर अचेत से सो रहे हैं। उन्हें इस बात का कोई ज्ञान नहीं है कि उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। 94 वर्षीय साखलकर को शनिवार प्रात: उनके आदर्शनगर स्थिति निवास स्थान पर उनकी पुत्री श्रुति व पुत्र सचिन साखलकर के माध्यम से इस पुरस्कार के बारे में बताने का प्रयास किया गया। मूमल को मिली जानकारी के अनुसार पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्हें सूचना देने गए जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनकी स्थिति की जानकारी अकादमी और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी है। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें कल 15 अक्टूबर को उनकी शैया तक जाकर सम्मानित करने का कार्यक्रम निधारित किया गया।
सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तक
मुख्यमंत्री ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी की ओर से प्रकाशित साखलकर की लोकप्रिय पुस्तक 'आधुनिक चित्रकला का इतिहास' के लिए अकादमी की ओर से यह पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुरस्कार के रूप में साखलकर को 51 हजार रुपये की नकद राशि तथा स्मृति चिन्ह प्रदान किया जायेगा।
मुख्यमंत्री निवास से वयोवृद्घ लेखक को पुरस्कृत करने की जानकारी जिला कलक्टर वैभव गालरिया को 13 अक्टूबर 2012 को दी गई। इसके बाद अतिरिक्त कलक्टर शहर जे.के.पुरोहित व सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहायक निदेशक प्यारे मोहन त्रिपाठी ने साखलकर के आदर्शनगर स्थित निवास स्थान पर पहुंच कर परिवारजनों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उन्हें सम्मानित करने की घोषणा के बारे में जानकारी दी।
सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार
राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष आर.डी.सैनी ने बताया कि 'प्रज्ञा' पुरस्कार अकादमी का सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार है, जो प्रतिष्ठित लेखक को उनकी पुस्तिक के 15 संस्करण प्रकाशित हो जाने पर प्रदान किया जाता है। रत्नाकर विनायक साखलकर ऐसे ही सर्वाधिक प्रतिष्ठित लेखक हैं, जिनकी पुस्तक ''आधुनिक चित्रकला का इतिहास'' के 15 संस्करण अकादमी द्वारा प्रकाशित किये गये हंै।
सैनी ने बताया कि साखलकर एक मात्र ऐसे लेखक हैं, जिन्होंने चित्रकला विषय पर शुद्घ हिन्दी में रोचक तरीके से पुस्तकें लिखीं और उनकी पुस्तक ''आधुनिक चित्रकला का इतिहास'' अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक है। साखलकर की चित्रकला पर लिखी गई पुस्तकों के प्रकाशन के बाद ही ललित कला के क्षेत्र में पुस्तकें पढ़ी जाने लगी है। अकादमी द्वारा साखलकर की चार पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है।
रत्नाकर विनायक साखलकर 1954 में अजमेर आये तथा डी.ए.वी. कॉलेज में चित्रकला के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। चित्रकला के एम.ए. के पाठ्यक्रम के निर्धारण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने पूना के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आटर््स से स्नातक तथा स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।
मूमल इंम्पेक्ट
मूमल ने इसी साल फरवरी द्वितीय अंक को साखलकर दादा को समर्पित करते हुए उनके बारे में विस्तार से जानकारी प्रकाशित की थी। उसी में प्रमुखता से यह उल्लेख भी किया था कि पिछले साल इनकी पुस्तक की सर्वाधिक लोकप्रियता को देखते हुए राजस्थान ग्रन्थ अकादमी के नियमानुसार साखलकर जी को सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव बना था। पुरस्कार और सम्मानों से दूर रहने के अपने स्वभाव के अनुसार पहले साखलकर दादा यह सम्मान भी लेने को तैयार नहीं थे। बाद में अकादमी के अधिकारियों ने इनके परिजनों से सम्पर्क कर बात बनाई तो दादा ने अपने स्वभाव के विपरीत इसके लिए स्वीकृति दे दी।
लेकिन, इसके बाद वह हुआ जिससे वयोवृद्ध कलाविद और उनके परिजन दोनों बुरी तरह आहत हुए। सम्मान का कार्यक्रम कहीं फाइलों में ऐसा अटका कि सन् 2011 में पहले जुलाई फिर अगस्त और उसके बाद हर महीने अगले महिने पर बात टलती रही। आखिर साखलकर दादा के परिजनों ने आस छोड़ दी। आखिर फरवरी के अंक में मूमल ने इस मुद्दे को फिर उठाया और यह आशंका भी व्यक्त की कि सरकार अगर समय रहते सम्मान नहीं कर सकी तो हो सकता है बाद में काफी देर हो जाए। इसके बावजूद अकादमी के अधिकारियों को सम्मान किए जाने के कार्यक्रम को क्रियांवित करने में आठ महीने का वक्त और लग गया।

रविवार, 7 अक्टूबर 2012

यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे...

तोबे एकला चोलो रे ........

कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर, एक व्यक्ति का नहीं एक युग और एक संस्था का नाम है। कविगुरु का ये गीत केवल एक गीत ही नहीं बल्कि जीवन दर्शन है। गाँधी जी इसी दर्शन के सहारे साम्प्रदायिकता के खिलाफ अकेले खड़े हो गए थे। इस गीत में सार्थक आत्मविश्वास से भरे जीवन का दर्शन होता है। ...और इस जीवन दर्शन से प्रेरणा प्राप्त होती है...। एकला चलो रे ...अंतत: कामयाबी और मानसिक संतुष्टि का दूसरा नाम है।
इसका अनुपालन हमें हर स्थिति में करना चाहिए। हमें हमेशा सबकेसाथ की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। हम न तो सभी को प्रसन्न रख पाएंगे और न ही सभी को अपने साथ चलने के लिए प्रेरित कर पाएंगे। इस आस में हम आगे बढऩे के बजाए रुके रहें तो यह जीवन की सार्थकता की आहुति देने के समान होगा। यह हमारी मानसिक निर्बलता का परिचायक ही होगा।
इस गीत का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि हम सबका विरोध करें। न ही यह हमें प्रेरित करता है कि हम सबके विपरीत चलें। इसका अर्थ तो सिफऱ्  यह है कि हम अपनी अंतरात्मा की आवाज़ का अनुपालन करें - चाहे इसमें हमारा कोई साथ दे या ना दे। मैंने अक्सर महसूस किया है कि लोग हालात में सुधार तो चाहते हैं पर इसके लिए कोई साथ नहीं देता। तो क्या हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना उचित है? इससे तो अच्छा है कि हम अपने निर्धारित मार्ग पर अकेले चलते रहें। इतिहास गवाह है कि ऐसे लोग ही मानवता के पथ-प्रदर्शक होते हैं जो एकला चलने में विश्वास रखते हैं।
आज एक लक्ष्य को लेकर अकेले चलते व्यक्ति को भले ही कई गुटों का साथ न मिले, भले ही उसका अनादर हो, भले ही भ्रटाचार में लिप्त लोग उसे महत्वहीन बता कर अपना बचाव करने में सफल होते हों, भले ही उसके विचारों और लेखन को गढ़ी हुई कहानियां बता कर बचने का प्रयत्न हो, भले ही अकेले चलते व्यक्ति को हंसी-मजाक का पात्र बनाकर लोग अपने चरित्र पर पर्दा डालने का जतन करते रहें, लेकिन क्या ऐसा लम्बे समय तक चल पाएगा? एक दिन समय भी बदलेगा और समाज भी.... एक दिन कोई अकेली युवा कूंची सब पुराने और कृत्रिम रंग मिटा कर कला जगत के नए कैनवास पर सच्चे रंग बिखेर देगी...और तब चल पड़ेंगे कोटि पग उसी ओर...।

एकला चलो रे...    (मूल बांग्ला गीत)
- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

यदि तोर डाक शुने केऊ न आसे
तबे एकला चलो रे।
तबे एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे!

यदि केऊ कथा ना कोय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि सबाई थाके मुख फिराय, सबाई करे भय-
तबे परान खुले
ओ, तुई मुख फुटे तोर मनेर कथा एकला बोलो रे!

यदि सबाई फिरे जाय, ओरे, ओरे, ओ अभागा,
यदि गहन पथे जाबार काले केऊ फिरे न पाय-
तबे पथेर काँटा
ओ, तुई रक्तमाला चरन तले एकला दोलो रे!

यदि आलो ना घरे, ओरे, ओरे, ओ अभागा-
यदि झोड़ बादले आधार राते दुयार देय धरे-
तबे वज्रानले
आपुन बुकेर पांजर जालिये निये एकला जलो रे!

 एकला चलो रे.....(हिंदी अनुवाद)
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला रे
   
यदि कोई भी ना बोले ओरे ओ रे ओ अभागे
यदि सभी मुख मोड़ रहे... सब डरा करें
तब प्राण प्रण से
मन की बात बोल अकेला रे

तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो ओ रे ओ अभागे
गहन पथ पर चलते हुए सब लौटते जाएं
तब पथ के कांटे
लहू लोहित पद दलित कर चल अकेला रे

यदि दिया ना जले ओरे ओ रे ओ अभागे
यदि बदरी आंधी रात में सब द्वार बंद करें
तब शिखा वज्र से
ओ तू हृदय पंजर जला और जल अकेला रे
तेरी आवाज़ पे कोई ना आये तो फिर चल अकेला रे
फिर चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला रे...

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2012

राजस्थान ललित कला अकादमी अध्यक्ष का एक वर्ष

'मूमल' सर्वेक्षण (06/12)
राजस्थान ललित कला अकादमी
अध्यक्ष प्रो. भवानी शंकर शर्मा के कार्यकाल का एक वर्ष
राजस्थान ललित कला अकादमी का अध्यक्ष पद संभालने के बाद प्रो. भवानी शंकर शर्मा को अगले महीने एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। इस अवसर पर मूमल अकादमी के काम-काज की एक रिपोर्ट प्रकाशित करने जा रहा है। रिपोर्ट निष्पक्ष हो, इसके लिए हमें आपका सहयोग चाहिए। कृपया निम्न तथ्यों को पढ़ कर अपनी राय दें।
अध्यक्ष पद ग्रहण करने के बाद प्रो. भवानी शंकर शर्मा ने जो कुछ कहा था उसके अनुसार... अकादमी द्वारा संपादित किए जाने वाले नियमित कार्यों का और बेहतर संचालन होना था। अकादमी की बंद पड़ी गतिविधियों को चालू कराना था तथा अनेक नए कार्य शुरू होने थे।
ये खास बातें कही गई थीं...
- अकादमी का फंड कम है, उसे बढ़ाने का उपाय करेंगे।
- अकादमी में स्टाफ की बेहद कमी है। हालात सुधारेंगे।
- अकादमी का काम-काज सुस्त है, उसे गति दी जाएगी।
- अकादमी की गतिविधियां नियमित व समयबद्ध करेंगे।
- छात्रों के कार्य का प्रदर्शन कायदे से कराएंगे।
- अन्य अकादमियों व संस्थाओं से तालमेल बढ़ाएंगे।
- जरूरतमंद कलाकारों की मदद के प्रयास बढ़ाएंगे।
- जयपुर से बाहर भी कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
- अकादमी के दफतरी काम-काज में जरूरी बदलाव लाएंगे।
- युवा वर्ग की गलतफहमियां दूर करेंगे।
- कला क्षेत्र में वरिष्ठ और कनिष्ठ के बीच की दूरी कम करेंगे।
- राज्य से बाहर प्रदर्शन के लिए कलाकारों की सहायता राशि को बढ़ाएगें। 
- युवा वर्ग को जोडऩे के लिए अकादमी कॉलेजों में जाएगी।
- अकादमी का डिजीटल विकास करेंगे।
- वेबसाइट से नए-पुराने सभी कलाकारों को जोड़ेगे।
- आर्ट फिल्में बनाएंगे।
- डाक्युमेंटेशन करेंगे।
- कलाकारों का विवरण एक स्थान पर उपलब्ध हो ऐसी व्यवस्था करेंगे।
- नई मोबाइल वैन की व्यवस्था की जाएगी।
- 'आकृतिÓ पत्रिका को अब और बेहतर तरीके से प्रकाशित करेंगे।
अब आप मूल्यांकन करें और बताएं कि किस क्षेत्र में कितने अंक दिए जाने चाहिए?         

  प्रत्येक प्रश्र का  पूर्णांक: 10

प्रश्र- 1 क्या अकादमी अध्यक्ष द्वारा किए गए वादे पूरे हुए?        प्राप्तांक.......

प्रश्र- 2 क्या अकादमी के कार्यों का संचालन और बेहतर हुआ?        प्राप्तांक.......

प्रश्र- 3 क्या अकादमी की बंद पड़ी गतिविधियां चालू हुईं?        प्राप्तांक.......

प्रश्र- 4 क्या अकादमी में कोई नया कार्य शुरू हुआ?            प्राप्तांक.......

प्रश्र- 5 कुल मिलाकर अध्यक्ष अब तक कितने सफल हैं?        प्राप्तांक.......

अपनी राय के लिए आप केवल प्रश्र संख्या और उसके लिए आपके द्वारा दिए गए नम्बर (marks) लिख कर भी  हमें भेज सकते हैं।
इसके लिए आप मूमल के ई-मेल का उपयोग कर सकते हैं।  moomalnews.gmail.com
फेसबुक पर आकर अपनी राय आसानी से बता सकते हैं।
 http://facebook.com/moomalnews
मूमल के फोन पर एसएमएस कर सकते हैं।
 99284 87677
यहीं मूमल के इस ब्लाग पर खुली टिप्पणी लिख सकते हैं।
राज. ललित कला अकादमी के बारे में आप चाहें तो अपनी राय विस्तार से भी व्यक्त कर सकते हैं... बस लिख डालिए और डाल दीजिए हमारी ई-मेल पर।
धन्यवाद
आपकी
मूमल  
    




शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

जयपुर में आर्ट व पेंटिंग शो

19 से 21 अक्टूबर तक

 जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में भीलवाड़ा (राजस्थान ) की आर्टो फिल आर्ट गैलेरी द्वारा आर्ट व पेंटिंग शो का आयोजन किया जा रहा है। 19 से 21 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय शो में पारम्परिक व आधुनिक कलाकृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
संस्था की डायरेक्टर व चित्रकार वंदना दरक ने बताया कि इस शो में भीलवाड़ा के साथ उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, भोपाल, अहमदाबाद व रायपुर के कई जाने-माने आर्टिस्ट भाग लेंगे। जयपुर के बाद यह शो दिल्ली और फिर अहमदाबाद में भी आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार अभी शो की प्रविष्ठियां जारी हैं, कोई आर्टिस्ट इसमें भाग लेना चाहे तो उसे संस्था के फोन नम्बर: 9414011175 पर सम्पर्क करना चाहिए।