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रविवार, 9 जुलाई 2017

जयपुर सहित अनेक शहरों में रंग-मल्हार
भीलवाड़ा में स्थगित
उदयपुर में चित्रकार शरद भारद्वाज द्वारा प्रकृति के प्रति नीले रंग में व्यक्त की गई भावनाओं ने रंग मल्हार को नए अर्थ प्रदान किये। 


मूमल नेटवर्क। अपने बढ़े हुए दायरे और नए दमखम के साथ 'रंग मल्हारÓ का आठवां संस्करण जयपुर सहित आठ शहरों मेेंं एक साथ आयोजित हुआ। भीलवाड़ा में अपरिहार्य कारणों से आयोजन स्थगित हुआ, लेकिन बीकानेर, अजमेर, टोंक व उदयपुर सहित अन्य शहरों में आयोजन का सफल क्रियान्वयन हुआ।
सभी स्थानों पर अच्छे मानसून की कामना के साथ कलाकारों द्वारा साइकिलों पर रंग-बिरंगा सृजन किया गया। आयोजन के बाद कलाकृति हो गई साइकिलों का नगर के प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शन किया गया।
जयपुर: वरिष्ठ कलाकार विद्यासागर उपाध्याय की इस परिकल्पना को गुलाबी नगर में चित्रकार विनय शर्मा सहित उपाध्याय से जुड़े उनके सहयोगियों ने साकार किया। पूर्व में यह आयोजन अलबर्ट हॉल के सम्मुख किया जाना था। बाद में स्थान परिवर्तित कर इसे रवीन्द्र मंच परिसर में किया गया। यहां कलाकारों की उपस्थिति बेहतर रही, लेकिन हमेशा के तरह आम कलाप्रेमी यहां भी कम थे। चित्रकार लाखन सिंह जाट की कृति स्वयं उनकी थीम और लोकप्रिय सिरीज से जुड़े होने के कारण उल्लेखनीय रही।
अजमेर: अजमेर में पृथ्वीराज फाउंडेशन और नगर निगम के तत्वावधान में रंग मल्हार का आयोजन सूचना केंद्र में किया गया। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ चित्रकार अमित राजवंशी के निदेशन में हुआ।  पृथ्वीराज फाउंडेशन के दीपक शर्मा व संजय सेठी सहित नगर के प्रमुख कलाकारों ने आयोजन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। बाद में श्रेष्ठ कृतियों को स्टालेशन के रूप मे प्रदर्शित करने के लिये निगम व जिला प्रशासन से चर्चा करने की योजना है।
बीकानेर: यहां अनुभवी चित्रकार मालचंद पारीक व महावीर स्वामी के संयोजन में बड़े स्तर पर आयोजन हुआ। लोकायन संस्थान के सौजन्य से भोज कला प्रन्यास ने इस आयोजन को प्रायोजित किया। रामपुरिया हवेली के सामने सृजन किए जाने के बाद कृतियों को शहर के प्रमुख स्थानों से ले जाते हुए जूनागढ़ के सामने प्रदर्शित किया गया।
उदयपुर: उदयपुर में शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में चित्रकार नरेन्द्र सिंह चिंटू और हेमन्त जोशी के संयोजन में हुए आयोजन में ललित शर्मा जैसे वरिष्ठ चित्रकारों का सहयोग रहा। यहां शरद भारद्वाज द्वारा प्रकृति के प्रति नीले रंग में व्यक्त की गई भावनाओं ने रंग मल्हार को नए अर्थ प्रदान किये।
टोंक: टोंक में यह आयोजन बनास कलाकार समूह के सहयोग से हुआ। चित्रकार जसवंत सिंह नरूका और अजय मिश्रा के संयोजन मेें कलाकारों ने साइकिलों पर अपनी भावनाएं उकेरी।
श्री गंगानगर: यहां प्रो. ओम सुथार और विवेक काकड़ा के संयोजन में रंग-मल्हार का आयोजन सूचना केन्द्र परिसर मेें हुआ। करीब तीस सीनियर व जूनियर कलाकारों की उपथिति में हुए कार्यक्रम के बाद साइकिल रैली का आयोजन हुआ, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए सुखडिय़ा सर्किल पर पहुंच कर सम्पन्न हुई।
बांसवाड़ा: बांसवाड़ा के परतापुर में देवेश्वर लोक विकास संस्थान के तत्वावधान में रंग मल्हार का आयोजन संस्था परिसर में किया गया। कार्यक्रम का संयोजन चित्रकार यतिन उपाध्याय के निदेशन में हुआ।  इसमें सुशील सोमपुरा व तस्लीम जमाल सहित लगभग 20 कलाकारों ने साइकिलों पर अपनी कला अभिव्यक्त की। इसके बाद रंगी गई साईकिलों की रैली निकाली गई जो गणेश मन्दिर, चार खम्भा, बोरावाड़ी होती हुई संस्था परिसर में आकर पूर्ण हुई। कार्यक्रम में जाने-माने पर्यावरणवादी भागवत्त कुन्दन ने साईकिल पर लिखे 72 दोहों की प्रस्तुति देकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।  

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

आखिरकार साखलकर को प्रतिष्ठित 'प्रज्ञा' पुरस्कार की घोषणा

मूमल का फरवरी दिव्तीय अंक
जयपुर, मूमल नेटवर्क। आखिरकार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अजमेर के वयोवृद्घ (94 वर्षीय) चित्रकार, लेखक व साहित्यकार रत्नाकर विनायक साखलकर को प्रतिष्ठित लेखक के रूप में 'प्रज्ञा' पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह सम्मान हिन्दी ग्रंथ अकादमी की ओर से दिया जाता है। इन दिनों अत्यधिक आयु, शारीरिक दुर्बलता और कम सुनने के कारण साखलकर दादा शैया पर है। 
आज (14 अक्टूबर 2012) को सुबह वे सर्दी व कफ से परेशान थे, डाक्टर ने उन्हें दवा का इन्जेक्शन दिया। उसके बाद से वे अधोर अचेत से सो रहे हैं। उन्हें इस बात का कोई ज्ञान नहीं है कि उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। 94 वर्षीय साखलकर को शनिवार प्रात: उनके आदर्शनगर स्थिति निवास स्थान पर उनकी पुत्री श्रुति व पुत्र सचिन साखलकर के माध्यम से इस पुरस्कार के बारे में बताने का प्रयास किया गया। मूमल को मिली जानकारी के अनुसार पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्हें सूचना देने गए जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनकी स्थिति की जानकारी अकादमी और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी है। इसके बाद आनन-फानन में उन्हें कल 15 अक्टूबर को उनकी शैया तक जाकर सम्मानित करने का कार्यक्रम निधारित किया गया।
सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तक
मुख्यमंत्री ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी की ओर से प्रकाशित साखलकर की लोकप्रिय पुस्तक 'आधुनिक चित्रकला का इतिहास' के लिए अकादमी की ओर से यह पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुरस्कार के रूप में साखलकर को 51 हजार रुपये की नकद राशि तथा स्मृति चिन्ह प्रदान किया जायेगा।
मुख्यमंत्री निवास से वयोवृद्घ लेखक को पुरस्कृत करने की जानकारी जिला कलक्टर वैभव गालरिया को 13 अक्टूबर 2012 को दी गई। इसके बाद अतिरिक्त कलक्टर शहर जे.के.पुरोहित व सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहायक निदेशक प्यारे मोहन त्रिपाठी ने साखलकर के आदर्शनगर स्थित निवास स्थान पर पहुंच कर परिवारजनों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा उन्हें सम्मानित करने की घोषणा के बारे में जानकारी दी।
सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार
राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष आर.डी.सैनी ने बताया कि 'प्रज्ञा' पुरस्कार अकादमी का सर्वाधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार है, जो प्रतिष्ठित लेखक को उनकी पुस्तिक के 15 संस्करण प्रकाशित हो जाने पर प्रदान किया जाता है। रत्नाकर विनायक साखलकर ऐसे ही सर्वाधिक प्रतिष्ठित लेखक हैं, जिनकी पुस्तक ''आधुनिक चित्रकला का इतिहास'' के 15 संस्करण अकादमी द्वारा प्रकाशित किये गये हंै।
सैनी ने बताया कि साखलकर एक मात्र ऐसे लेखक हैं, जिन्होंने चित्रकला विषय पर शुद्घ हिन्दी में रोचक तरीके से पुस्तकें लिखीं और उनकी पुस्तक ''आधुनिक चित्रकला का इतिहास'' अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक है। साखलकर की चित्रकला पर लिखी गई पुस्तकों के प्रकाशन के बाद ही ललित कला के क्षेत्र में पुस्तकें पढ़ी जाने लगी है। अकादमी द्वारा साखलकर की चार पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है।
रत्नाकर विनायक साखलकर 1954 में अजमेर आये तथा डी.ए.वी. कॉलेज में चित्रकला के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला। चित्रकला के एम.ए. के पाठ्यक्रम के निर्धारण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने पूना के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आटर््स से स्नातक तथा स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।
मूमल इंम्पेक्ट
मूमल ने इसी साल फरवरी द्वितीय अंक को साखलकर दादा को समर्पित करते हुए उनके बारे में विस्तार से जानकारी प्रकाशित की थी। उसी में प्रमुखता से यह उल्लेख भी किया था कि पिछले साल इनकी पुस्तक की सर्वाधिक लोकप्रियता को देखते हुए राजस्थान ग्रन्थ अकादमी के नियमानुसार साखलकर जी को सम्मानित किए जाने का प्रस्ताव बना था। पुरस्कार और सम्मानों से दूर रहने के अपने स्वभाव के अनुसार पहले साखलकर दादा यह सम्मान भी लेने को तैयार नहीं थे। बाद में अकादमी के अधिकारियों ने इनके परिजनों से सम्पर्क कर बात बनाई तो दादा ने अपने स्वभाव के विपरीत इसके लिए स्वीकृति दे दी।
लेकिन, इसके बाद वह हुआ जिससे वयोवृद्ध कलाविद और उनके परिजन दोनों बुरी तरह आहत हुए। सम्मान का कार्यक्रम कहीं फाइलों में ऐसा अटका कि सन् 2011 में पहले जुलाई फिर अगस्त और उसके बाद हर महीने अगले महिने पर बात टलती रही। आखिर साखलकर दादा के परिजनों ने आस छोड़ दी। आखिर फरवरी के अंक में मूमल ने इस मुद्दे को फिर उठाया और यह आशंका भी व्यक्त की कि सरकार अगर समय रहते सम्मान नहीं कर सकी तो हो सकता है बाद में काफी देर हो जाए। इसके बावजूद अकादमी के अधिकारियों को सम्मान किए जाने के कार्यक्रम को क्रियांवित करने में आठ महीने का वक्त और लग गया।

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

अल इखलास में इंडो इस्लामिक आर्ट फेस्टिवल

मूमल नेटवर्क, अजमेर। अजमेर शहर की पहली निजी कला दीर्घा के रूप में सामने आई 'अल इखलास गैलेरी' में पिछले दिनों इंडो इस्लामिक आर्ट फेस्टिवल सम्पन्न हुआ। इस समारोह में मुख्य रूप से कला के सूफी रूप और मुगल मिनिएचर पेटिग्स के साथ सके्रड आर्ट के पीस प्रदर्शित किए गए। फॅाय सागर रोड पर स्थित इस गैलेरी का यह पहला आयोजन था। चार दिन चले इस आयोजन को शहर के कला प्रेमियों के साथ विभिन्न स्कूल और कॉलेजों के कला विद्यार्थियों ने भी देखा।


गैलेरी में अजमेर के कलाकार मदन सिंह राठौर के मिक्स मीडियम में किए गए फ्यूजन वर्क व विजय सिंह चौहान की मिनिएचर पेंटिग्स प्रदर्शित की गई। इन्हीं के साथ डिजिटल आर्ट के कुछ काम भी प्रदर्शित किए गए जो एम. टेम्पलिन के हैं। इसी के साथ 'सके्रड आर्ट' के रूप में गैलेरी की ऑनर गुलशा बेगम की कलाकृतियां भी देखने को मिलीं। गुलशा बेगम कला और मानवता के प्रति समर्पित एक फैशन डिजाइनर उद्यमी हैं। वे आध्यात्मिक संगठन 'डिवाइन एबोड' की संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं जो सभी धर्मावलंबियों को एकजुट करके शांति और सद्भाव का सच्चा संदेश देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। वे बताती हैं कि यह संगठन महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी करता है।
क्या है सक्रेड आर्ट? :सके्रड आर्ट को कला की रहस्यवादी दुनियां का एक अतिरिक्त हिस्सा है। जब कलाकार का मन भाव के उच्चतम स्तर पर होता है तो रंगों के उत्सव में उसकी तुलिका या कला सृजन के माध्यम पवित्र नृत्य करने लगते है। इसी जादू के बाद जो कुछ साकार होता है वही सके्रड आर्ट है। यह एक प्रकार से कला समाधि की स्थिति में उपजे आकारों और रंगों का परिणाम है। यह एक पवित्र रूहानी अहसास सा है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है, इसे एक्सप्लेन करना आसान नहीं है।




एक साथ...सोलह कैनवास!: गुलशा बेगम जब सके्रड आर्ट को कैनवास पर उतारने लगती हैं तो उनके कलाकार मन से उभरने वाले भाव इतने तीव्र होते हैं कि एक-दो या पांच-सात कैनवास उन्हें समेट नहीं पाते। ऐसे में वे कैनवासों की संख्या बढ़ाती जाती हैं। पिछली बार उन्होंने अपनी भावनाएं समेटने के लिए स्टूडियों में एक वक्त पर सोलह कैनवास लगाने पड़े थे।




''हम यहाँ कला को सभी प्रकार के प्रोत्साहन देने के लिए हैं। हम मानते हैं कि कला से जुड़ा हर पक्ष दिव्य है। हम यहाँ किसी एक धर्म या समुदाय आधारित कला को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं कर रहे हैं। गैलरी में विभिन्न धर्मों से जुड़े कई कलाकारों के काम प्रदर्शित हैं। मेरे लिए आध्यात्मिकता सार्वभौमिक है। इसे कोई विशेष नाम नहीं दिया जा सकता। हम कला की दुनियां में सभी प्रकार के कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अल इखलास गैलरी किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं है, यह हमारे डिवाइन एबोड नामक संगठन का एक हिस्सा है जो पूरी तरह से एक आध्यात्मिक संगठन है । यह आध्यात्मिकता का सार्वभौमिक रूप है, जो सभी धर्मों में विश्वास करता हैं।" -गुलशा बेगम, संस्थापक अध्यक्ष, डिवाइन एबोड