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मंगलवार, 18 जुलाई 2017

सोमवार, 17 जुलाई 2017

रविवार, 16 जुलाई 2017

शनिवार, 15 जुलाई 2017

बुधवार, 29 जुलाई 2015

जयपुर में रवीन्द्र मंच के नव निर्माण कार्य पर आपत्ति


रवीन्द्र मंच का मूल स्वरूप बिगाडऩे का आरोप
मंच प्रबंधक ने कहा मूल स्वरूप नहीं बिगाड़ा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। टैगोर कल्चरल कॉम्पलेक्स योजना के तहत केन्द्र सरकार की ओर से जयपुर में रवीन्द्र मंच के नव निर्माण कार्य पर आपत्ति उठा रहे वरिष्ठ नाट्यकर्मी रणवीर सिंह की मांग है कि वहां मंच के मूल स्वरूप को नष्ट किए जाने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए। इसी के साथ सही काम कराने के लिए कलाकारों की एक समिति बना कर एक वरिष्ठ कलाकार को उसका अध्यक्ष बनाया जाए।
यहां पै्रस क्लब में आयोजित एक कॉन्फे्रंस में रणवीर सिंह ने कहा कि नव निर्माण के लिए नियुक्त आर्किटेक्ट संगीता मेथली को नियमों के विरुद्ध काम दिया गया है। जबकि मंच के पुराने जानकार आर्किटेक्ट प्रमोद जैन को इसके मूल स्वरूप की बेहतर जानकारी है।
नव निर्माण के नाम पर जयपुर रवीन्द्र मंच के एतिहासिक रूप के साथ जिस तरह छेडख़ानी और तोड़-फोड़ की जा रही है वह सहन करने योग्य नहीं है। इस पर रोक के लिए 15 जुलाई को न्यायालय में याचिका दायर की गई। मामले की पहली सुनवाई 20 जुलाई को हुई, लेकिन तब हालात पर बहस नहीं हो पाई। उसके बाद 23 व 28 जुलाई को हुई बहस के दौरान रवीन्द्र मंच प्रशासन द्वारा यह कहा गया कि मंच के मूल स्वरूप से कोई छेडख़ानी नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
वरिष्ठ कलाकार और नाट्यकर्मियों की संस्था 'इप्टा' के अध्यक्ष रणवीरसिंह का कहना है कि रवीन्द्र मंच को केन्द्र की स्कीम से प्राप्त धनराशि से नव निर्माण के नाम पर व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है। इसके लिए नोडल एजेंसी नेशनल स्कूल आफ  ड्रामा को बनाया गया है। पूर्व प्रमुख सचिव सल्लाउद्दीन अहमद के समय आर्किटेक्ट प्रमोद जैन ने जो मूल नक्शा तैयार किया था, उसे रद्द कर दिया गया है। उस समय योजना के अन्र्तगत बनाए गए ग्रीन रूम्स तोड़े जा रहे हैं। ओपन एयर थिएटर और उसके स्टेज को पूरी तरह से तोड़ दिया गया है। जिस कमरे में टिकट काउंटर थे उसमें टायलेट बनाए जा रहे हैं। पहले जहां लॉबी और कैंटीन थी अब उसे आर्ट गैलेरी के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। ग्रीन रूम्स को स्टेज के ऊपर बनाए जाने का प्लान है। कलाकार स्टेज पर कैसे प्रवेश करेंगे और सेटिंग ले जाने की तो जगह ही नहीं छोड़ी गई है। परफोमिंग आर्ट के इस केंद्र में विज्युअल आर्ट की गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है।
आर्किटेक्ट की नियुक्ति नियम विरुद्ध
रणवीर सिंह का कहना है कि संगीता मेशेल नाम की आर्किटेक्ट को नियुक्त किया गया है जो नियम विरुद्ध है। सन् 1972 में जो आर्किटेक्ट एक्ट बना था उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि सरकारी टेण्डर वही आर्किटेक्ट भर सकता है जो आर्किटेक्ट काउंसिल का सदस्य हो जबकि संगीता मिशेल काउंसिल की मेम्बर ही नहीं है।
ब्लू प्रिंट की कॉपी के मांगे 4500 रुपए
हमारा विवाद आर्ट कल्चर डिर्पाटमेंट और आवास विकास विभाग से है। आरटीआई के जरिए मामले की जानकारी के लिए जब योजना की ब्लू प्रिंट की फोटोकॉपी मांगी थी तो तत्कालीन मंच मैनेजर अनिता मीणा ने 4500 रुपए की राशि जमा कराने का पत्र भेज दिया। हमने यह बात जब वर्तमान मैनेजर सोविला माथुर के आगे उठाई तो उन्होंने राशि को संशोधित करते हुए मात्र 200 रुपए जमा करवा के हमें ब्लू प्रिंट उपलब्ध करवा दिया।
कुछ भी गलत नहीं हो रहा -सोविला माथुर 
इस पर रवीन्द्र मंच की मैनेजर सोविला माथुर से की कई वार्ता में उन्होंने बताया कि रवीन्द्र मंच के मूल स्वरूप के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। आगे भी जो कुछ  निर्माण कार्य होगा तय योजना के अनुसार ही होगा। योजना के अनुसार ओपन एयर थिएटर की सिटिंग कैपेसिटी बढ़ानी है और उसके फ्लोर के नीचे से लाईट साऊण्ड वगैरह की अण्डर ग्राउण्ड वायरिंग की जानी है, इसलिए फ्लोर तो तुड़वाना ही पड़ेगा। जो वायरिंग के बाद पूर्ववत बनवा दिया जाएगा। पार्किंग व्यवस्था को भी सही किया जाएगा।
अन्दर जो टायलेट दुर्गन्ध फैलाते थे, उसे बाहर निकाला जाना है। कैफेटेरिया और लाबी में कलात्मक रचनाओं का प्रदर्शन किए जाने की भी योजना है। जिसमें कोई व्यावसायिक प्रदर्शन नहीं होगा केवल आर्ट व कल्चर से सम्बन्धित  प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इसमें विजुअल और परफोर्मिंग दोनों ही आर्ट के प्रदर्शन हो सकेंगे। इसका रूप लगभग वैसा ही होगा जैसा कि स्वर्ण जयंति समारोह के तहत इस जगह पर लगाई गई प्रदर्शनी का था। इसके साथ ही मार्डन आर्ट गैलेरी बनाई जाएगी। यह सब कुछ योजना के फस्र्ट फेज के तहत किया जा रहा है। इसका बजट 14 करोड़ रुपए स्वीकृत हुआ है। यह सब कुछ नेशनल स्कूल आफ  ड्रामा के निरीक्षण में हो रहा है, इसलिए यदि बनाई गई योजना से कुछ अलग होता है तो काम का पैसा ही नहीं मिल पाएगा।
आर्किटेक्ट की नियुक्ति आवास विकास विभाग द्वारा की गई की है इसमें रवीन्द्र मंच प्रशासन का कुछ लेना देना नहींं है।
अधिकारियों ने किया दौरा
रवीन्द्र मंच पर निर्माण को लेकर कोर्ट-कचहरी की चर्चाओं के चलते 29 जुलाई को कला एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल, राजस्थान आवास विकास संस्थान के एक्सईएन राम सहाय रावल व आर्किटेक्ट संगीता मिशेल ने करीब ढाई धंटे तक मंच के नव निर्माण का काम-काज देखा। रवीन्द्र मंच की प्रबंधक साविला माथुर भी साथ रहीं। अधिकारियों ने निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन कार्य की गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि काम की गति बढ़ाकर इसे अक्टूबर माह तक पूरा किया जाए। इसके लिए प्रबंधक को हर माह प्रगति का विवरण देने के निर्देश दिए।
(विशेष: रवीन्द्र मंच के नवनिर्माण के संबंध में मूमल में एक वर्ष पूर्व ही साइट प्लान सहित विस्तृत आलेख प्रकाशित किया जा चुका है। कृपया 1 अगस्त 2014 के अंक में पृष्ठ 4 व 5 देखें )

शुक्रवार, 5 जून 2015

पर्यावरण दिवस पर कलाजगत के रंग


विश्व पर्यावरण दिवस पर कलाजगत ने उकेरे विभिन्न रंग
मूमल नेटवर्क, जयपुर।
पर्यावरण दिवस पर जहां विभिन्न स्तरों पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए वहीं कला जगत ने भी अपने तरीके से पर्यावरण की उपयोगिता समझाने और आमजन में जागरुकता के लिए उपाय किए।
इस कलात्मक पहल के लिए कला व्यवसाय से जुड़ी 'कलानेरी' और सामाजिक सरोकार से जुड़ी संस्था 'मैसेज' द्वारा आमजन ओर खासकर नवांकुरों के लिए विभिन्न आयोजन किए गए। इस दौरान जाने-माने कलाकारों ने कैनवास पर रंगों के जरिए पर्यावरण संबंधी संदेशों को आकार दिया इनमें कलाविद डा. चिन्मय मेहता, पदमश्री एस. शाकिर अली, जगमोहन माथोडिय़ा, अशोक गौड़, व कलानेरी निदेशक सौम्या शर्मा प्रमुख थे। कार्टूनिस्ट सुधीर ने भी अपनी शैली से पर्यावरण को उकेरा। इस अवसर पर कलानेरी एकेडमी ऑफ आर्ट के बच्चों ने भी पर्यावरण के प्रति अपने प्यार के रंग भरे। माहौल को संगीतमय बनाने के लिए लीडिंग नॉट ग्रुप के युवा गिटारिस्टों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डा. चिन्मय मेहता और एस.शाकिर अली ने पर्यावरण की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए और कला में माध्यम से जन जागृति को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। विशेष अतिथि के रूप में आईएएस नीरज के पवन ने कार्यक्रम में पर्यावरण व विशेषकर पॉलीथिन से फैल रहे प्रदूषण पर रोकथाम के लिए आमजन में जन जागृति लाना ही एक मात्र उपाय बताया। इसके लिए विशेषकर युवा पीढ़ी को आगे बढ़कर रोकथाम के प्रयास करने पड़ेंगे। पर्यावरण विद एसपी तोमर रामाराव शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान कदम्ब के पेड़ लगाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।
मैसेज संस्था की संयोजक पूर्णिमा कौल ने बच्चों के लिए हुई फैंसी ड्रेस को साकार किया। कलानेरी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस अवसर पर समाज सेवी पंचशील जैन, डॉ भास्कर गुप्ता, डॉ सतीश त्यागी व युवा कलाकार प्रदीप शर्मा, नवल सिंह चौहान, लाखन सिंह, अरविंद धाकड़ सहित कई पर्यावरण प्रेमी मौजूद थे। शहर के व्यस्तम जेएलएन मार्ग पर आयोजित हुए इस कार्यक्रम के जरिए दोनों संस्थाएं पर्यावरण के प्रति लोगों का ध्यान खींचने और जन जागरुकता लाने में सफल हुई।






शुक्रवार, 2 मई 2014

मनी लांड्रिंग की पेंटिंग्स बनी मुद्दा

अब पेंटिंग पर भी पॉलिटिक्स 
मनी लांड्रिंग की पेंटिंग्स बनी मुद्दा
पहला निशाना ममता बनर्जी पर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कला और उनकी कलाकृतियों की अप्रत्याशित कीमत का रहस्य अब पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को भी परेशान करने लगा है। कॉरपोरेट जगत में भीतर की जानकारियां लेने के बाद अब मोदी ने कला बाजार की कारगुजारियों को जानने का प्रयास भी किया है। इसे देखकर तो यही लगता है कि 'अबकी बार मोदी सरकार' वाकई सत्ता में आई तो इंडियन आर्ट मार्केट की असलियत को अलग से खंगाला जाएगा।
दिल्ली की कुर्सी के लिए चुनावी संग्राम के चलते ममता बनर्जी की पेंटिग्स की कीमतों को अब मुद्दा बनाकर भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने भले ही अब पेंटिंग्स पर पॉलिटिक्स शुरू की है, लेकिन कला जगत में यह मुद्दा पुराना है। कला बाजार की आड़ में चलने वाले मनी लांडिं्रग के खेल को लेकर मोदी ने ममता बनर्जी पर तीखे हमले करते हुए उनकी पेंटिंग्स की कीमतों पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि दीदी की पेंटिंग्स शुरू में ही आठ से दस लाख रूपए में बिकती थी। उसके बाद अब वह पेंटिंग्स एक करोड़ 80 लाख में कैसे बिकने लगी। इसे किसने खरीदा? उन्होंने ये बातें ममता बनर्जी को उनके घर में घेरने के लिए श्रीरामपुर में एक रैली में कहीं। हालांकि इस पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने पलटवार करते हुए कहा कि मोदी के पास अगर पेंटिंग्स की ब्रिकी को लेकर किए गए दावों से संबंधित सबूत हैं तो इसे सिद्ध करें, नहीं तो वह मानहानि के मुकदमे के लिए तैयार रहें।

मूमल ने उठाया था यह मुद्दा
कला बाजार पर नजर रखने वाली मूमल डेस्क सेलीब्रिट्री कलाकारों की कलाकृतियों की कीमतों और उनके खरीदारों पर खास नजर रखती रखती रही है। इनमें बॉलीवुड के अभिनेताओ से लेकर बड़े बिजनेसमैन और कुछ नेता भी शामिल हैंं। इन्हीं में एक ममता बनर्जी भी रही हैं। इनकी कृतियों, प्रदर्शनियों और बिक्री के विवरण मूमल समय-समय पर प्रकाशित करती रही है। पिछले बरसों में बिकी उनकी पेंटिंग की अधिकतक कीमत 80 हजार रुपए थी। पिछले साल इन्हीं दिनों कोलकाता की एक चिट फंड कंपनी शारदा ग्रुप के साथ ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के गहरे रिश्तों की परतें खुलने के साथ ही यह अंदाजा भी लगने लगा था कि पेंटिंग्स के जरिए मनी लांड्रिंग का कारोबार कितनी तेजी से पनप रहा है। राजनेता ममता बनर्जी की कलाकृतियों की मंहगी कीमत और धड़ाधड़ बिक्री के राज भी कला बाजार को अचंभे में डाल रहे थे।
इससे पहले तक एक के बाद एक हो रही अपनी कला प्रदर्शनियों में कलाकार ममता बनर्जी यही कहती रही हैं कि  'उगाही के माध्यम से धन इक_ा करने के बजाए अगर हम इस तरह के रचनात्मक कार्यों के माध्यम से धन इक_ा कर सकें तो हमें ऐसा करना चाहिए।Ó वे यह भी बताती रही हैं कि रॉयटर्स बिल्डिंग में पार्टी के काम-काज के दौरान कड़ी मेहनत के बाद जब उनका सिर भारी हो जाता है तो वह दस से पंद्रह मिनट तक पेंटिंग करती हैं। ममता हर बार जोर देकर कहती है कि यह उनकी रुचि है, पेशा नहीं।
यह सवाल भी उठने लगे थे कि हर बार मात्र दस से पंद्रह मिनट तक पेंटिंग करने के बाद भी वे इतना काम कर लेती हैं कि आए दिन उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनियों के समाचार आते रहते हैं और उनमें यह सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात होती है कि सभी प्रदर्शित पेंटिंग्स बिक जाती हैं। वह भी लाखों और करोड़ों में।
उन्हीं दिनों कोलकाता के टाउन हॉल में अपनी 250 पेंटिंग्स की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के लोगों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह उगाही के खिलाफ  हैं और अपनी पेंटिंग बेचकर पंचायत चुनावों के लिए धन इक_ा करेंगी। बनर्जी ने कहा था कि इस काम से उन्हें काफी राहत मिलती है। उन्हीं दिनों एक प्रदर्शनी में उनके 55 काम प्रदर्शित किए गए, जाहिर है सभी काम पहले ही दिन बिक भी गए। इनमें सबसे छोटा और कम कीमत का काम 80 लाख का था।

खरीददारों में राजस्थानी भी
ममता बनर्जी कि कलाकृतियों के खरीदारों में ज्यादातर वही उद्योगपति हैं जिनका कारोबार पश्चिम बंगाल में हैं। चिट फंड कंपनी शारदा ग्रुप के सुदिप्तो सेन उन खरीदारों की सूचि में हैं जो ममता की कोई भी कलाकृति एक करोड़ से कम में नहीं खरीदते। हर्ष नेयोतिया और संजय बोस के नाम भी प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। ममता बनर्जी की कलाकृतियों के कद्रदानों में प्रवासी राजस्थानियों की संख्या भी काफी है। ममता की कलाकृतियों के राजस्थानी खरीदारों में नए नाम संजीव गोयनका और ऋषि अग्रवाल के शामिल हुए हैं।
कंपनी के चेयरमैन सुदीप्तो सेन को गिरफ्तार कर मनी लांड्रिंग की इस तकनीक का पूरा गणित खोले जाने की कवायद की गई थी, लेकिन वक्त के साथ यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। -राहुल सेन

मूमल मीमांसा 
जैसे-जैसे कला को एक निवेश के रूप में विश्व समाज द्वारा स्वीकृति मिलने लगी है, वैसे-वैसे इस निवेश की आड़ में कई गोरखधंधे भी पनपने लगे हैं। नेता हों या अभिनेता अचानक कलाकार के रूप में सामने आने लगे हैं। पेंटिंग्स में वो क्या कलाकारी करते हैं, यह तो पता नहीं लेकिन काले धन को सफेद करने की उनकी यह कला जरूर समझ में आ रही है। इन सब के पीछे उनका सेलिब्रीटी होना भी काम का सिद्ध हो रहा है।
चूंकि, अभी तक कला के मूल्यांकन की कोई ठोस व स्थायी नीति नहीं बन पाई है, अत:एव ये सेलिब्रिटीज लोग जो बना रहे होते हैं, उनका तैयार किया गया खरीददार काफी बड़ी रकम देकर उसे खरीद लेता है। बहुत ही कलात्मक और योजनाबद्ध तरीके से ये खरीददारियां काले धन को सफेद में बदली कर देती हैं।
चूंकि कलाकार बनने के लिए किसी ऐकेडेमिक प्रोफाइल की जरूरत नहीं रहती, इसलिए ये लोग बहुत ही आसानी से कलाकार के भेस में आकर अपना मतलब सिद्ध कर जाते हैं। ऐसे कलाकारों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम  प्रमुखता से उभर कर सामने आया है।
अभी आस-पास के दिनों की बात करें तो बालिवुड के सलमान खान से लेकर श्रीदेवी तक के नाम भी कलाकार के रूप में पत्र-पत्रिकाओं में प्रसिद्धि पा चुके हैं। थोड़ा सा पीछे चलें, कुछ महीने पहले तो आपको याद आएगा, कई प्रशासनिक अधिकारी या उनके परिजन न केवल कलाकार के रूप में सामने आए बल्कि उनकी बनाई कृतियां महंगे दामों में खरीदी भी गई। मूमल ने तब भी इस बात की गंभीरता के प्रति अपने कलाकार व कलाप्रेमी पाठकों को इस ओर चेताया था। आज स्थिति और गंभीर होती जा रही है। ऐसे लोग जो सीधे-सीधे जनता के खून-पसीने की कमाई को हड़प रहें हैं और उसी को कला के नाम पर अपनी उजली कमाई के रूप में शो कर रहे हैं। समाज का सशक्त वर्ग अपनी जरूरत और मतलब के चलते उन पर मेहरबान रहता है और संरक्षण दे रहा है।
भारत के भ्रष्टाचारी और कई असामाजिक तत्व जो अपने कारनामों के चलते विश्व भर में पहचान बनाते जा रहे हैं, अब कला जैसे पवित्र और संवेदनशील क्षेत्र को अपना हथियार बना रहे हैँ। इस गंभीर मसले के प्रति चेतना होगा। क्या वास्तविक कलाकार अपनी सृजन की दुनिया में इन तथाकथितों को घुसपैठ करने देना चाहेंगे। सोच का विषय है। इस मसले के प्रति गंभीरतापूर्वक सोच कर कठोर कदम उठाने से ही हम कला की दुनियां की सादगी व वास्तविकता को बनाए रख सकेगें।

सोमवार, 20 जनवरी 2014

National art Exhibition राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी मार्च में

                           राजस्थान के तीन कलाकारों का काम चुना               
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। 55वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी मार्च महीने के दूसरे सप्ताह तक दिल्ली में शुरू होगी। इस प्रदर्शनी के लिए देशभर के हजारों कलाकारों की कृतियों में से इस बार 172 कलाकृतियां प्रदर्शन के लिए चुनी गई हैं। इनमें राजस्थान के तीन कलाकारों का काम शामिल किया गया है।
राजस्थान से शामिल किए गए तीन कलाकारों में जयपुर के आकाश श्री चंदनराम व इरा टांक तथा उदयपुर की ज्योतिका राठौड़ के नाम हैं। आकाश ने जहां मिक्स मीडिया में 'रिचाार्जिंगÓ शीर्षक से काम किया है वहीं इरा टांक ने कैनवास पर एक्रेलिक से 'बॉन्डिंगÓ शीर्षक से अपने भाव व्यक्त किए हैं। उदयपुर की तेजी से उभर रही कलाकार ज्योतिका राठौड़ ग्राफिक के जरिए उपकरणों में खोई अपनी पहचान खोजते व्यक्ति पर अपनी सोच जाहिर की है।
Era Tak




Jyotika Rathour

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

JAS-13 जर्मन पेंटर Renata Von आएंगी

रेनाटा वान 

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट-13 में आने वाले विदेशी कलाकारों में अब जर्मनी की ख्यात पेंटर रेनाटा वान का नाम शामिल होने जा रहा है।
समिट सूत्रों के अनुसार रेनाटा ने अपने आने की जानकारी समिट टीम को दी है। उल्लेखनीय है वे समिट के आर्ट कैंप में भाग लेंगी। ऐसे में उनके काम का लाइव डेमो देखने का नायाब मौका मिलेगा।
अपनी कला के बल पर रेनाआ वान में विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई हैं। रंगो को अपने अनुसार कैनवास पर छाने देने के की आजादी देने के बावजूद किसी विशेष संयोजन के लिए उन्हें नियंत्रित रखने में दक्ष रेनाटा अपने इस काम से ज्यादा संतुष्ठ होती हैं, लेकिन दुनियां भर में उनके खास शैली में चित्रित धोड़े अधिक पसंद किए जाते हैं।



मंगलवार, 29 अक्टूबर 2013

Rajasthsn Lalit Kala Akadami Awards

राजस्थान ललित कला अकादमी 
55वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए 94 कलाकृतियों का चयन
10 कलाकारों की कृतियों को पुरस्कार

मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी की 55वीं वार्षिक कला प्रदर्शनी के लिए 94 कलाकृतियों का चयन किया गया है। इसके लिए अकादमी को राज्यभर से 114 कलाकारों की कुल 338 कलाकृतियाँ प्राप्त हुई थीं।  जिनमें से निर्णायक मण्डल ने प्रदर्शनी योग्य कृतियों को चुना और इनमें से 10 कलाकारों की कृतियों को पुरस्कार योग्य भी घोषित किया गया।

कलाकार जिनकी कलाकृतियों को पुरस्कार योग्य घोषित किया:

  • नन्दकिशोर शर्मा, भीलवाड़ा ( इलुमिनेशन-2), 
  • पूजा शर्मा, जयपुर (ग्लोरी नाईट), 
  • अपूर्व मिश्रा, अजमेर ( ब्लाइण्ड पीस फोर मनी),
  • गीगराज कुमावत, जयपुर (ट्राफिक-1) ,
  • डॉ. कृष्णा महावर, कोटा (थ्रू द आई आफ  ए मदर-1), 
  • निरंजन कुमार, अजमेर (रोमान्स-3), 
  • भुवनेश जैमिनी, जयपुर (अनटाईटिल्ड-2), 
  • ज्योतिका राठौड़, उदयपुर (टाईम आउट), 
  • रवीन्द्र दाहिमा , उदयपुर (मदर एण्ड चाइल्ड-1), 
  • डी.बी. मुले, भीलवाड़ा (तपोवन में शकुन्तला ) । 

प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर पुरस्कृत कलाकारों को पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये के नकद पुरस्कार, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह  प्रदान किए जायेंगे ।निर्णायक मण्डल में सर्वश्री के.आर. सुबन्ना, एल.एल. वर्मा, एवं रतिलाल कान्सोदरिया सदस्य थे। उल्लेखनीय है कि यह अकादमी की महत्वपूर्ण गतिविधि है जिसमें राज्यभर से कलाकार भाग लेते है । 

Jaipur Art Summit-13 का मोमेन्टो जारी

मूमल नेटवर्क, जयपुर। प्रोगेसिव आर्टिस्ट गु्रप के वरिष्ठ कलाकारों सहित जयपुर आर्ट समिट-13 की टीम कि सपनों का एक और दृश्य उस समय साकार हुआ जब समिट की टीम ने मोमेन्टों के रूप में दिए जाने मग्स को सबके लिए सुलभ किया। इन मग्स पर प्रदेश के उन जाने-माने कलाकारों की कृतियां सजाई गई हैं, जो अब हमारे बीच नहीं हैं। यह मोमेन्टो उनके प्रति समिट की ओर से सम्मान और श्रृद्धाजंलि भी है।
 प्रथम सात मग जारी
आज शाम समिट के कार्यालय में पूरी टीम ने प्रथम सात मग जारी किए। इनमें पदमश्री राम गोपाल विजयवर्गीय, कृपाल सिंह शेखावत, देवकी नंदन शर्मा, गौतम लाल जोशी, पी.एन. चोयल, ज्योति स्वरूप जी व मोहन शर्मा की कलाकृतियों से सजे मग्स शामिल हैं। भवानी शरण गुई,भूरसिंह जी व ज्योति स्वरूप जी की कृतियों से सजने वाले मग समय पर तैयार नहीं होने के कारण आज जारी नहीं हो सके।
लगभग 300 रुपए प्रति मग 
समिट सूत्रों के अनुसार अभी एक-एक कलाकार के 50-50 मग तैयार किए गए हैं। ऐसे में इनका लागत मूल्य अधिक आ रहा है। जो लगभग 300 रुपए प्रति मग है। भविष्य में इनकी मांग के अनुसार अधिक संख्या में मग तैयार कराने पर कुछ कम भी हो सकता है। इसी प्रकार इन मगों का पूरा सैट चाहने वाले कला प्रंमियों के लिए भी मूल्य में रियायत का प्रस्ताव रखा जा सकता है।
ऑनर की सहमति ली
इन संग्रहणीय मोमेन्टो पर प्रदर्शित वरिष्ठ कलाकारों की कृतियों का चयन समिट की टीम ने मिलकर किया है। इन्हें मग पर प्रिन्ट करने के लिए कलाकृतियों के ऑनर की सहमति ली गई है। इनकी प्रिन्ट्रिग का काम डिजिटल कला के क्षेत्र में सक्रिय मुकेश ज्वाला की देखरेख में हुआ है।
 श्री पी.एन. चोयल

 पदमश्री कृपाल सिंह शेखावत

श्री देवकी नंदन शर्मा

श्री ज्योति स्वरूप 

 पदमश्री राम गोपाल विजयवर्गीय

 श्री मोहन शर्मा 

श्री गौतम लाल जोशी

बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

'भारतीय कला समीक्षा' के 'की-कॉन्सेप्ट्स'

मूमल नेटवर्क, जयपुर।
खालिस चाटुकारिता या खुन्नसी आलोचना से अलग वास्तविक कला समीक्षा के क्षेत्र में अकाल झेल रहे राजस्थान के कला जगत को एक दिशा और विचार देते हुए वरिष्ठ चित्रकार और कला शिक्षक डा. ऋतु जौहरी की पुस्तक 'भारतीय कला समीक्षा' अब देशभर में सभी के लिए उपलब्ध है।
लेखिका ने यह मूल तथ्य मन-मस्तिष्क में रख कर यह पुस्तक लिखी है कि अधिकांश आम कला दर्शक और विद्यार्थी अपने ज्ञान और जानकारी के आधार पर अपने जहन में भारतीय कला का कोई सुनिश्चित स्वरूप नहीं बना पाते। समीक्षा के नाम पर विभिन्न पक्षों द्वारा अलग-अलग अंगों के आधार पर हाथी जैसे विशाल अस्तित्व का विवेेचन किया जाता रहा है। ऐसे में भारतीय कला को समग्र्र रूप से कैसे समझा जाए?
इस पुस्तक में कलासृजन से संबंधित वैचारिक और कलात्मक पक्ष के साथ लयात्मकता, जीवंतता व सौन्दर्य के सभी पक्षों को ऐसे तथ्यों के साथ संकलित कर कला समीक्षा के लिए नया नजरिया पेश करने की कोशिश की गई है। इससे न केवल कला के आम दर्शक और विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ेगा वरन चित्राकंन के 'की-कॉन्सेप्ट्स' भी मिलेंगे।
राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी की ओर से हिन्दी में प्रकाशित इस पुस्तक का मूल्य मात्र सौ रुपए रखा गया है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए लेखिका के सीधे सम्पर्क भी किया जा सकता है।
उनका फोन नम्बर है: 09413329175
ई-मेल:johriritu@gmail.com

बुधवार, 20 मार्च 2013

Shail Choyal for Jaipur Art Festival

शैल चोयल 
 ना कोई नाम मेरे कद का और ना ही दाम- शैल
मूमल नेटवर्क, जयपुर। प्रदेश के वरिष्ठ चित्रकारों में प्रमुखता से शुमार उदयपुर के शैल चोयल ने जयपुर आर्ट फेस्टिवल में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया। 'मूमल' से एक बातचीत में उन्होंने कहा कि आयोजकों द्वारा जब उनसे सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फेस्टिवल में शामिल होने वाले अन्य चित्रकारों के नाम पूछे। इस पर आयोजक कोई भी ऐसा नाम नहीं बता पाए जो मेरी वरिष्ठता के अनुरूप हो। फिर आने वाले कलाकारों की तादाद जानने के बाद यह साफ हो गया कि यह फेस्टिवल संजीदा चित्रकारों के लिए काम करने की जगह नहीं बल्कि सौ-डेढ सौ कलाकारों का एक मेला सा होगा। जाहिर है किसी स्तरीय कैंप में 20 से ज्यादा चित्रकार नहीं होते। अनुभव बताता है कि ऐसे में न तो कलाकार को और न ही उसके काम को अटेंशन मिल पाती हैं। बाकी तो आप समझते ही है।
फिर ऑनरेरियम और अन्य शर्तों की चर्चा होने पर तो बात बिल्कुल ही खत्म हो गई। इतने बड़े फेस्ट की बात करते हुए उन्होंने जो ऑनरेरियम बताया उतना तो हम प्रतिदिन दोस्तों के बीच उठने-बैठने में खर्च कर देते हैं। चोयल ने बताया कि मैं ऐसे किसी कैंप में नहीं जाता जहां ऑनरेरियम 50 हजार रुपए से कम हो। आपने देखा होगा, अकादमी, जेकेके या सांस्कृतिक केन्द्र जैसे सरकारी संस्थानों में भी यह राशि 10 हजार से कम नहीं होती और फिर भी वहां कोई बड़ा चित्रकार प्रतिभागी नहीं होता।
जब चोयल से यह पूछा गया कि क्या कलाकार के लिए ऑनरेरियम महत्वपूर्ण है? तो उनका कहना था 'नहीं, रशिया और कुछ देशों में आर्ट कैंप में ऑनरेरियम नहीं दिया जाता, लेकिन मान-सम्मान बहुत मिलता है, बेतुकी शर्तें नहीं होती। लाइव डेमो के लिए पेंटिंग्स बनाते हैं, लेकिन चित्रकार को यह पूरा अधिकार होता है कि वह अपना काम साथ ले आए या वहीं छोड़ आए। प्राय: कलाकार इतने सुखद अनुभव और मधुर यादों के भार से लदा होता है कि पेंटिंग्स साथ नहीं ला पाता।
शर्तो की बात करें तो यह पहला अवसर है जहां कलाकारों के सामने ऐसी बेतुकी शर्तें आई हैं। प्रतिभागी को दो कलाकृतियां बनानी हैं। इनकी बिक्री पर 60 प्रतिशत राशि कलाकार को मिलेगी। ...और नहीं बिकने पर? क्या आयोजक कलाकार को उसकी पेंटिंग साथ ले जाने देंगे? क्या जयपुर का कला बाजार इतना विकसित हो गया है कि सब पेंटिंग्स बिक जाएं? अरे, अभी तो वो पेंटिंग्स का मूल्य तक तय नहीं कर सकते, बेचेंगे कैसे? क्या उन्होंने कभी पेंटिंग्स बेचीं भी हैं?

Jaipur Art Festival Day-3 कम होती जा रही रौनक


कम होती जा रही रौनक
मूमल नेटवर्क, जयपुर। दिन ब दिन घटती रौनक के चलते बुधवार को तीसरे दिन जयपुर आर्ट फेस्टिवल की रौनक कुछ और कम हो गई। एक और जहां थके-थके से लग रहे कलाकारों ने जैसे-तैसे अपना काम निपटाने पर ज्यादा जोर दिया वहीं आम दर्शकों की कमी के चलते चहल-पहल नहीं रही। सुबह से शाम तक केवल पार्टिसिपेट कर रहे कलाकार, उनके कुछ परिचित, स्थानीय कलाकारों के शिष्य, ब्यूरोकेसी के दबाव में जुटे वालिन्टियर्स, कुछ सरकारी कार्यालयों और कला विभागों के बेगारी करते कर्मचारी और खबरों के लिए जुटे कुछ पत्रकार, बस।
सूनेपन में खो गए सारे दावे
जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल की तर्ज पर आर्ट फेस्टिवल आयोजित होने के सारे दावे यहां सूनेपन की भेंट चढ़ कर रह गए। शहर और प्रदेश के बड़े कलाकारों ने आयोजकों की शर्तोे पर आना गवारा नहीं किया, ऐसे में आयोजन भीड़ नहीं खींच पाया। यही सब बातें आयोजकों के सामने रखी गई तो उनके उत्तर उम्मीद से बिलकुल परे थे। बताया गया कि जो लोग नहीं आने की बात कर रहें हैं, उन्हें दरअसल बुलाया ही नहीं गया। रही भड़ खीचने की बात तो यह आयोजन भीड के लिए नहीं वरन खास बद्धिजीवी वर्ग के लिए है जो आर्ट की समझ रखता है। यह पूछे जाने पर कि जिस शहर में साहित्य के इतने कद्रदान हैं वहां आर्ट की समझ रखने वाले लोगों की गिनती इतनी कम हो क्या यह बात गले उतरती है?
क्या बिक पाएगा यहां काम
जयपुर आर्ट फेस्टिवल में पार्टिसिपेट कर रहे कलाकारों में यह चर्चा आम है कि उनकी पेंटिंग्स बिकने पर दिए जाने वाला 60 प्रतिशत मूल्य ठीक है, लेकिन सवाल ये है कि पेंटिग्स की कीमत कौन तय करेगा। क्या जयपुर में अधिकृत या बाजार द्वारा स्वीकृत कोई वेल्युवर है? अगर कलाकार स्वयं अपनी ओर से मूल्य बताए तो क्या बायर मिल जाएंगे? जो काम नहीं बिकेगा उसका क्या होगा? जो बात कलाकारों सबसे अधिक चर्चा में रही वह ये कि आयोजकों को भले ही लिट्रेचर फैस्टिवल करने को अनुभव है, लेकिन क्या उन्हे पेंटिग्स बेचने का कोई अनुभव है?
ऐसे बिकेगा काम
मूमल के भरोसेमंद सूत्रों की बात पर भरोसा किया जाए तो यह जानकारी सामने आई है कि जयपुर आर्ट फेस्टिवल में तैयार कलाकृतियों के लिए मंबई की कुछ ऐसी आर्ट गैलेरीज से इस 'माल' के लिए आयोजन से पूर्व ही बिक्री का समझौता किया जा चुका है। कला बाजार की बेहतर समझ रखने वाली इन गैलेरीज ने अभी यहां काम रहे कम से कम चार कलाकारों और शिल्पियों को स्पॉसर भी किया है। उनके आने-जाने से लेकर अन्य सभी खर्च स्पॉन्सर ही उठा रहे हैं और उनके द्वारा इस आयोजन के दौरान तैयार कृतियां भी उन्हीं की होंगी।
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Jaipur Art Festival Day-3 तीन तरह के कलाकार

 जयपुर आर्ट फेस्टिवल में तीन तरह के स्थानीय कलाकार हैं 1 वो जो तन के खड़े है 2 वो जो बीच में लटकें हैं और 3 वो जो चारों खाने चित हैं।

Jaipur ArtFetival Day-3 'कुछ तो लोग कहेंगे...


'कुछ तो लोग कहेंगे...
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट फेस्टिवल में सभी कलाकार और शिल्पी काम के बाद मिलने वाले मानदेय या बिक्री के लिए चिंतित हो ऐसा कतई नहीं हैं। कुछ कलाकार और शिल्पी ऐसे भी हैं जिन्हें इन बातों से कोई सरोकार नहीं। उनका कहना है कि यहां वे आयोजकों के बुलावे पर केवल कला सृजन के लिए आएं हैं, किसी मानदेय या पारिश्रमिक के लिए नहीं। उन्हीं में से एक हैं मिनीएचर आर्ट के जाने-माने हस्ताक्षर रामू रामदेव।
जयपुर राजघराने के सिटी पैलेस में अपने काम के साथ कंटम्टरी आर्ट की तुलना में बेहतर कारोबार करने वाले रामू रामदेव का कहना है कि जयपुर आर्ट फेस्टिवल का आयोजन करने वाले बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं। इस आयोजन के बाद न केवल आर्ट सिटी के रूप में जयपुर का दर्जा और बढ़ेगा अपितु विस्त स्तर पर भी जयपुर के कला जगत को अलग पहचान मिलेगी। भले ही कुद कलाकारों और आयोजकों के बीच नियमों और शर्तोंं को लेकर मतभेद रहें हों लेकिन कुल मिलाकर यह आयोजन कला जगत के लिए शुभ होगा। हर बड़े आयोजन में कुछ खामियां रह जाती हैं, उन्हें अगले आयोजन में दूर किया जा सकता है, लेकिन बड़े उद्देश्य को लेकर किए जा रहे ऐसे कला यज्ञ में सभी को अपने सामथ्र्य के अनुसार आहुति देनी चाहिए। ऐसे शुभ आयोजन में भाग लेकर अपना समय देकर सृजन करने वाले सभी बधाई के पात्र हैं। ऐसे में इस आयोजन से कोई आर्थिक लाभ पाने की उम्मीद से कहीं परे मैं अपने दलबल और साथी कलाकारों के साथ कला को खुले दिल से बांट रहा हूं और खुश हूं। बाकी तो आप जानते ही हैं- 'कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना...।
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सोमवार, 18 मार्च 2013

Jaipur art Festival Day 1st

अंधेरे में राज्यपाल ऒर मात्र एक सुरक्षा कर्मी, ये जो उजाला है वह केमरे के फ़्लैश का है।
राज्यपाल अंधेरे में...
मूमल नेटवर्क। जयपुर आर्ट फेस्टिवल के उद्घाटन अवसर पर राजस्थान की राज्यपाल के काफी समय अंधेरे में रहने को लेकर सुरक्षा प्रबंध में लगी एजेन्सियों के हाथ-पांव फूल गए। अन्य सभी साधनों से लैस सुरक्षाकर्मी एक अदद टार्च की तलाश डिग्गी हाउस मे भटकते रहे जो उन्हें अंत तक नहीं मिली। वे लगभग अंधेरे में शिल्पियों के काम का विजिट कर रही महामहिम को रौशनी में रखना चाह रहे थे।  वहां आयोजकों द्वारा लाइट की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इस बीच आयोजकों ने राज्यपाल को लॉन में लगी नाश्ते की खुली टेबिल पर बिठा दिया। हालांकि वहां भी पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में सुरक्षा एजेन्सियों में राज्यपाल की देर तक खतरे में रही सिक्यूरिटी को लेकर दूसरे दिन भी चर्चा होती रही। उधर फेस्टिवल के सेक्रेटरी रामप्रताप सिंह ने कहा कि 'इनोग्रेशन शाम 5:30 का रखा था, इसलिए हमने लाइट की व्यवस्था नहीं की थी, लेकिन राज्यपाल महोदया देरी से पहुंचीं। ऐसे में हम क्या करें?'