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मंगलवार, 13 नवंबर 2018

आर्ट एशिया 2018 में भाग लेगा जयपुर आर्ट समिट

आर्ट एशिया 2018 में भाग लेगा जयपुर आर्ट समिट
मूमल डेस्कवर्क, सियोल/जयपुर। कोरिया इंटरनेशनल एग्जीबिशन सेन्टर में 22 से 25 नवम्बर तक आयोजित होने वाले आर्ट एशिया 2018 में जयपुर आर्ट समिट भाग ले रहा है। भारत के बाहर जयपुर आर्ट समिट का यह पहला प्रदर्शन होगा।
पिछले दिनों दिल्ली में क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट की थीम के साथ समिट ने राजस्थान के बाहर आयोजन किया था। इसी थीम को आधार में रखकर समिट दक्षिण कोरिया में आयोजित होने वाले आर्ट एशिया 2018 में 50 कलाकारों की कृतियों से सजी कला प्रदर्शनी, कैम्प, वर्कशॉप व कला चर्चा के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा। आर्ट एशिया 2018 के 'फेयर इन फेयर' कार्यक्रम के तहत भारत से जयपुर आर्ट समिट को चुना गया है।
समिट द्वारा कला प्रदर्शनी के तहत 36 भारतीय और 14 विदेशी कलाकारों की कला का प्रदर्शन किया जाएगा। क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट पर डायलॉग एवं परिचर्चा में कोरियाई कलाकारों के साथ शैलेन्द्र भट्ट एवं स्वरूप विस्वास अपने विचार रखेंगे। आर्टिस्ट कैम्प में 8 भारतीय कलाकारों द्वारा लाइव आर्ट की प्रस्तुति दी जाएगी।
कला वर्कशॉप के तहत कार्टूनिस्ट धीरज वर्मा कोरियन कार्टून कैरेक्टर को प्रदर्शित करेंगे, चारकोल कॉम्पेंडियम में लाइनों एवं बिंदुओं के तिलिस्म को आर्टिस्ट स्वरूप विस्वास बतायेंगे औऱ रंग थेरेपी के तहत आर्टिस्ट डॉक्टर भारती शर्मा जीवन को रंगों के साथ रंगमय करने के अवसरों पर प्रकाश डालेंगी। इस अवसर पर 'आर्टिस्ट्स ऑफ इंडिया - मॉडर्न एंड समकालीन कलाÓ पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।

रविवार, 23 सितंबर 2018

क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट


क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट
जयपुर आर्ट समिट का छठा संस्करण दिल्ली में मेट्रो संस्करण 2018
मूमल नेटवर्क, दिल्ली/जयपुर। जयपुर आर्ट समिट अपने छठे संस्करण को मेट्रो संस्करण 2018 के रूप में दिल्ली में आयोजित करेगा। क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट नाम से आयोजित यह संस्करण 4 अक्टूबर से आरम्भ होकर 10 अक्टूबर को सम्पन्न होगा। इस शिखर सम्मेलन के आयोजन की परिकल्पना सांस्कृतिक आदान-प्रदान करना, नए कला उत्पादन को प्रेरणा देना और भारत व बाकी दुनिया के बीच महत्वपूर्ण कला संबंध बनाने पर आधारित है।
मेट्रो संस्करण 2018 का लक्ष्य विदेशी और भारतीय कलाकारों द्वारा कुछ बेहतरीन कलाकृतियों को प्रस्तुत करना है और सभी कलाकारों, कला प्रेमियों और उत्साही लोगों के लिए एक मंच तैयार करना है । इसके साथ ही इनके लक्ष्य में सीमाओं से परे कला की सच्ची भावना में खुद को अभिव्यक्त करना शामिल है।
सप्ताह भर तक चलने वाला यह आयोजन तीन आयामी है जिसमें आर्टवर्क का प्रदर्शन, टॉक शो तथा कला प्रतियोगिता शामिल है। आयोजन का उद्घाटन 3 अक्टूबर की शाम 6 बजे नई दिल्ली के तानसेन मार्ग स्थित श्रीधरानी गैलरी में 'क्रॉस बॉर्डर आर्ट कनेक्ट' प्रदर्शनी के पूर्वावलोकन के साथ होगा।
6 अक्टूबर को सुबह 11 से एक बजे तक किरण नादार म्यमजियम ऑफ आर्ट के सहयोग से 'केएनएमए कला प्रतियोगिता' आयोजित होगी जिसमें कॉलेज, विश्वविद्यालय और संस्थागत विद्यार्थी हिस्सा ले सकते हैं। 7 अक्टूबर को आर्ट इन द टाईम्स ऑफ इंटरनेट विषय पर कला आलोचकों, कला प्रशंसकों व कलाकारों के बीच चर्चा होगी। 8 अक्टूबर को डॉ.भारती शर्मा कलर थेरेपी पर व्याख्यान देंगी। इस आयोजन का हिस्सा बनने के लिए जयपुर आर्ट समिट की वेबसाइट पर रजिस्टरेशन करवाया जा सकता है।

मंगलवार, 3 अप्रैल 2018

एशिया आर्ट फेस्टिवल में जयपुर आर्ट समिट सर्पोट पार्टनर

एशिया आर्ट फेस्टिवल में जयपुर आर्ट समिट सर्पोट पार्टनर
फेस्टिवल 10 से 13 मई तक
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। भारत के संस्कृति मंत्रालय के तहत उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित एशिया आर्ट फेस्टिवल में जयपुर आर्ट समिट को सर्पोट पार्टनर के रूप में आमन्त्रित किया गया है। समिट कला और संस्कृति को विश्व स्तर पर बढ़ावा देने के उद्देश्य को लेकर एशिया कला महोत्सव 2018 में आधिकारिक भागीदारी निभाएगा। यह महोत्सव त्यागराज स्टेडियम में आगामी 10 से 13 मई तक आयोजित होगा।
समिट के फाउंडर डायरेक्टर शैलेन्द्र भट्ट ने मूमल को बताया कि एशिया कला महोत्सव के दौरान जयपुर आर्ट समिट लगभग 40 विदेशी कलाकारों के कला सृजन और उनकी समसामयिक कला के लिए नई सोच को प्रस्तुत करेगा। महोत्सव के दौरान जयपुर आर्ट समिट कला के लिए युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के प्रति अग्रसर है। विश्व स्तर पर की जा रहीं समसामयिक रचनात्मक गतिविधियों में युवाओं को संलग्न करने के लिए समिट द्वारा समय-समय पर कार्य किये जा रहे हैं। समिट अपने अनुभव को वैश्विक शांति एवं एकजुटता के लिए और सांस्कृतिक बहुलवाद को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गुरुवार, 29 मार्च 2018

'कलर्स ऑफ़ द स्पिरिचुअल्टी' आज से

'कलर्स ऑफ़  द स्पिरिचुअल्टी' आज से
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। डॉ. अमिता खरे के चित्रों की प्रदर्शनी 'कलर्स ऑफ़  द स्पिरिचुअल्टी' का उद्घाटन आज शाम 6 बजे आल इंडिया फाइन आर्ट सोसाइटी में होगा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ललित कला अकादमी के प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट़टी व विशेष अतिथिे के रूप में जयपुर आर्ट समिट के फाउण्डर शैलेन्द्र भट्ट उपस्थित रहेंगे। 
बी वी एम कॉलेज ग्वालियर के ललित कला विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता खरे ने अपने चित्रों के रंगों के विभिन्न प्रयोग किये हैं जो सराहनीय हैं। रंगों की इस अनन्त यात्रा के बारे में शैलेन्द्र भट्ट ने मूमल को विशेष तौर पर बताया कि, भौतिक और भौगोलिक क्षेत्र में रंग सबसे सुंदर पहलुओं में से एक हैं। हम चारों तरफ  रंगों से घिरे हुए हैं, लेकिन कितनी बार हम असंख्य रंगों में कई बारीकियों को नहीं देख पाते हैं। आध्यात्मिक रूप से  रंग हमको आभा और ऊर्जा के रूप में आकर्षित करते हैं। आभा आध्यात्मिक ऊर्जा क्षेत्र है हम अलग अलग तरह की आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के लिए अलग अलग तरह के रंगों का प्रयोग करते हैं।
हम सभी एक दैनिक आधार पर रंगों को पसंद करते हैं। आध्यात्मिक अनुसंधान के माध्यम से, हमने पाया है कि जो  रंग हम चुनते हैं वो हमारे आध्यात्मिक स्तर को प्रभावित करते हैं। अलग-अलग तरह की आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के लिए हम अलग अलग तरह के रंगों का प्रयोग करते हैं। हमारे शरीर के भीतर सभी एक सौ चौदह चक्रों में से एक सौ बारह चक्र किसी न किसी रंग से संबंधित हैं।
इसी प्रकार हम जो कपड़े पहनते हैं उनके रंग हमको सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रकार से प्रभावित करते हैं इस तरह रंगों का कुछ विशेष प्रभाव होता है, आप लाल रंग पहनकर भी खराब मूड में हो सकते हैं और काला रंग पहनकर भी आप जोशीले हो सकते हैं। ऐसा संभव है, लेकिन क्या इनसे आपको मदद मिलती है? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जबाब इस प्रदर्शनी में मिल सकते हैं।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

सांभर महोत्सव कल से

सांभर महोत्सव कल से
दिखेंगे कला के विभिन्न रंग
मूमल नेटवर्क, जयपुर/सांभरलेक। राजस्थान में कला और संस्कृति के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयेजित सांभर महोत्सव में रंग भरने के लिए जयपुर आर्ट समिट की तरफ से कला चर्चा, कला प्रदर्शनी व कला कैम्प का आयोजन किया जाएगा।।

कला प्रदर्शनी 

प्रदर्शनी में भारत सहित बारह देशों के 30 कलाकारों की चुनिंदा कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जायेगा। अन्य देशों में बब बांग्लादेश, इजिप्ट, ईरान, साऊथ कोरिया, श्रीलंका, ग्रीस, अमेरिका, यमन, स्विट्जऱलैंड, ऑस्ट्रेलिया और लेबनान होंगे। प्रदर्शनी के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट रवि माइकल एवं मूर्तिकार एल एन नागा हैं।

प्रदर्शनी में शामिल कलाकार
इजिप्ट - अबु एलेंगा
बांग्लादेश - रंजीत दास, मेहबूब मुर्शिद
ऑस्ट्रेलिया - डेनियल कांनेल
ईरान - आमिर जोकर
ग्रीस - नटीना अनस्तसयादौ (मूर्तिशिल्प)
लेबनान - कासिर राशा
साउथ कोरिया - युनसूक ली, कयूनयंग सांग, मिजो ली
स्विट्जरलैंड - हमौदा अब्देर्राजक
श्रीलंका - चामिंदा गामागे, सारथ परेरा
अमेरिका - लेरोय पारकर
यमन - मज़हर निज़ार
भारत - एस जी वासुदेव, अंजनी रेड्डी, श्रीधर अइयर, रविन्द्र साल्वे, चरण शर्मा, विजेंद्र शर्मा, आलोक भट्टाचार्य, विनोद शर्मा, अमृत पटेल, अविनाश कर्ण, रिनी धुमाल (मूर्तिशिल्प)
इन कलाकारों के साथ राज्य की कुछ महिला कलाकारों का आर्ट इंस्टालेशन भी प्रदर्शित किया जायेगा। इसमें प्रमुख कलाकार सविता शर्मा और शालू शर्मा हैं।

महिला आर्टिस्ट कैंप

समिट द्वारा महिला आर्टिस्ट कैंप का आयोजन किया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के तहत प्रदेश की युवा महिला कलाकारों को कला जगत में पहचान बनाने के अवसर प्रदान करना है। इस कैम्प में जयपुर आर्ट समिट का साथ व्हाइट कैनवास दे रहा है। कैंप के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट हंसराज कुमावत हैं। आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कैंप का उद्घाटन कला, साहित्य, संगीत, समाजसेवा, खेलकूद, शिक्षा, पर्यटन इत्यादि के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली प्रदेश की महिलाओं द्वारा किया जायेगा।
कैम्प के कलाकार 
शिखा राजोरिया, शिखा कुमारी, आकांक्षा अग्रवाल, दीपाली शर्मा, श्रेया सिंह, आशा कुमारी, छवि शर्मा, बरखा मीना, कुसुम चौहान, पूजा भार्गव, मनीषा खींची, दुर्गा राठौर एवं पूजा सोनी।

कला चर्चा 

कला के समसामयिक महत्व को ध्यान में रखते हुए  'कलात्मक सौंदर्यबोध में स्वच्छता के साक्ष्य और संप्रेषण' बिषय पर कला चर्चा की जायेगी। कला चर्चा में कला के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े ऐसे कलाकारों के साथ बातचीत की जायेगी जिन्होंने कला को संकीर्ण परिधि से ऊपर उठाकर आम आदमी के मन से स्वार्थ, परिवार, क्षेत्र, धर्म, भाषा और जाति आदि की सीमाएँ मिटाकर कला को विस्तृत करते हुए व्यापकता प्रदान की है। फेस्टिवल में उपस्थित विभिन्न आर्टिस्ट, कला मर्मज्ञ,  कंपनी प्रशासक, देश और विदेश से आये मेहमानों कला की इस खुली चर्चा में भाग लेंगे। कला चर्चा का कोआर्डिनेशन लेखक एवं कलाकार अमित कल्ला करेंगे। 

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

सांभर महोत्सव में लगेगा महिला आर्टिस्ट्स कैम्प

सांभर महोत्सव में लगेगा महिला आर्टिस्ट्स कैम्प
जयपुर आर्ट समिट की तरफ से होगा कैम्प आयेजित
मूमल नेटवर्क, सांभरलेक/जयपुर।  23 से 25 फरवरी तक होने वाले सांभर महोत्सव में जयपुर आर्ट समिट कला प्रदर्शनी, कला चर्चा व महिला आर्ट कैम्प का आयोजन करेगा।
कैंप के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट हंसराज कुमावत ने कैम्प में शामिल महिला कलाकारों की जानकारी देते हुए कहा कि सभी कलाकार युवा हैं और राजस्थान में रहवासी हैं। कुमावत ने बताया कि कैम्प में 12 महिला कलाकार 23  फरवरी को अपनी कल्पना को साकार करेंगी।  कैंप का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण के तहत प्रदेश की युवा महिला कलाकारों को कला जगत में पहचान बनाने के अवसर प्रदान करना है।
कुमावत ने बताया कि, यह कैंप जयपुर आर्ट समिट एवं व्हाइट कैनवास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जायेगा। कैम्प में बनीं पेंटिंग्स को फेस्टिवल में अगले दिन प्रदर्शित किया जायेगा।
यह आर्टिस्ट लेंगे कैम्प में भाग
शिखा राजोरिया
शिखा कुमारी
आकांशा अग्रवाल
दीपाली शर्मा
श्रेया सिंह
आशा कुमारी
छवि शर्मा
बरखा मीना
कुसुम चौहान
पूजा भार्गव
मनीषा खींची
दुर्गा राठौड़

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

ललित कलाओं की मिठास घुलेगी सांभर महोत्सव में

ललित कलाओं की मिठास घुलेगी सांभर महोत्सव में
जयपुर आर्ट समिट करेगा दृश्य कलाओं का प्रदर्शन
मूमल नेटवर्क, सांभरलेक। 23 से 25 फरवरी तक सांभर झील के खारेपन में ललित कलाओं की मिठास घुलने वाली है। तीन दिवसीय सांभर महोत्सव में प्रदेश की कला संस्कृति का पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रदर्शन किया जाएगा। लोक संगीत व नृत्यों के बीच जयपुर आर्ट समिट भी रंगों की रौशनी बिखेरेगा।
महोत्सव के दौरान समिट की तरफ से कला प्रदर्शनी, कला चर्चा और महिला आर्टिस्ट कैम्प का आयोजन होगा। प्रदर्शनी के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट रवि माइकल एवं मूर्तिकार एल एन नागा होंगे। इस प्रदर्शनी में देश-विदेश के नामी कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। कला कैम्प में युवा कलाकारों की प्रतिभागिता रहेगी। कैंप के कोऑर्डिनेटर आर्टिस्ट हंसराज कुमावत होंगे। कला चर्चा में 'कलात्मक सौंदर्यबोध में स्वच्छता के साक्ष्य और संप्रेषण' विषय पर खुली चर्चा का आयोजन होगा। कला चर्चा का कोआर्डिनेशन लेखक एवं कलाकार अमित कल्ला द्वारा किया जायेगा।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

जयपुर आर्ट समिट में कन्यादह विमोचन उत्सव

जयपुर आर्ट समिट में 
कन्यादह विमोचन उत्सव
मूमल नेटवर्क, जयपुर।जयपुर आर्ट समिट में कन्यादह विमोचन उत्सव के तहत मूमल के संपादक राहुल सेन की लिखी पुस्तक 'कन्यादह'  का लोकार्पण किया गया।  इस अवसर पर समिट के फाउण्डर डायरेक्टर एस.के भट्ट, डायरेक्टर आर.बी. गौतम, कलाकार अमित कल्ला व अन्य सम्मानित अतिथि उपस्थित थे।

तेरहवीं सदी के दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान के कला जगत की आज तक अनकही, अनछुई कहानी को इस पुस्तक में पिरोया गया है। जिसके प्रमाण पुरा-अवशेषों के रूप में आज भी उस स्थान विशेष पर बिखरे पड़े हैं और अपने वैभव से लेकर विनाश तक की गाथा सुना रहे हैं।

नए आयाम स्थापित कर सम्पन्न हुआ जयपुर आर्ट समिट का पांचवा एडीशन

नए आयाम स्थापित कर सम्पन्न हुआ
जयपुर आर्ट समिट का पांचवा एडीशन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। यहां आयोजन के नए आयाम स्थापित करते हुए जयपुर आर्ट समिट का पांचवा एडीशन सम्पन्न हो गया। इसी के साथ जयपुर आर्ट समिट का कद कुछ और ऊंचा हो गया।
रंग और राग, खुशी और आनन्द, अनुभूतियां और विचार, परिचर्चाएं और कल्पनाएं तथा कला के कई रूप और जीवन्त तस्वीरों के पांच दिन के साथ और सुखद एहसास के पलों को बांटकर कल शाम जयपुर आर्ट समिट के पांचवें एडीशन ने विदाई ली। साल-दर-साल पूरे पांच वर्ष की समिट की कला यात्रा अपने आप में अनूठी रही, कई रंगों से लिपटी हुई। 2013 के पहले एडीशन से लेकर आज 2017 में पांचवें एडीशन तक आते-आते जहां समिट कैनवास के कई रंग बदले वहीं पांचवें पायदान ने समिट के कद को भी बढ़ाया। इस वर्ष के समिट में पूरे आयोजन को कुल आठ खण्डों में विभक्त किया गया। जिन्हें सम्बन्धित क्षेत्र के विद्वानों ने क्यूरेटर के रूप में अपनी कल्पनाओं के कैनवास पर जूनियर व सीनयर आर्टिस्ट्स के संग मिलकर साकार किया। कई कृतियों, कलाकारों व कला अभिव्यक्तियों के साथ इस वर्ष के समिट के खासियत रही उसका व्यवस्थित होना।
जयपुर और भारत के युवा व वरिष्ठ कलाकारों के साथ विदेश के कई मुल्कों से आए कलाकारों ने इन पांच दिनों में पूरी उर्जा के साथ अपनी भागीदारी निभाई। कलाकारों ने अपनी कला अभिव्यक्ति से यह साबित कर दिया कि कला सीमाओं और बंधनों से परे की चीज है जिसकी सच्ची साधना प्रेम और खुशियों के रंग बिखेर एक सूत्र में बांधने को प्रेरित करती है। कला की सही शब्दों में व्याख्या करें तो यह साक्षात ईश्वर से साक्षात्कार करवाने का एहसास करवाती है।

सोमवार, 18 दिसंबर 2017

जयपुर आर्ट समिट के पांचवे एडीशन का आज अन्तिम दिन


जयपुर आर्ट समिट के पांचवे एडीशन का आज अन्तिम दिन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कला, कलाकार व कलाप्रेमियों को समर्पित जयपुर आर्ट समिट के पांच दिवसीय पांचवें एडीशन का आज अन्तिम दिन है। कुछ ही घण्टों में जयपुर के कला जगत व देश-विदेश के कलाकारों से समिट विदाई लेने वाला है्, अगले बरस फिर मिलने के वादे के साथ। बहुत बड़े कैनवास और अलग अन्दाज में इस वर्ष के समिट की गतिविधियों का कलाकारों व कलाकारों ने जी भर कर आनन्द लिया। कला चर्चाएं, कला फिल्में, आर्ट डेमोस्ट्रेशन, कला पुस्तकों के विमोचन, कला कार्यशालाओं के साथ कला कृतियों के प्रदर्शन व गीत-संगीत की जीवन्त महफिलों ने समिट को यादगार पलों में बदल दिया।
आज कुछ ही देर बाद घड़ी में 4 बजते ही बांग्ला देश के शुभो शाह एवं जर्मनी के डोरोथिया सेरर आर्ट परफोमेंस देंगे। इसके बाद 6 बजे रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में जयपुर आर्ट समिट की क्लोजिंग सेरेमनी की जाएगी।

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

कला और कलाकारों के नाम रहा समिट का दूसरा दिन

कला और कलाकारों के नाम रहा समिट का दूसरा दिन
मूमल नेटवर्क। रवीन्द्र मंच पर चल रहे पांच दिवसीय जयपुर आर्ट समिट का दूसरा दिन कला व कलाकारों का नाम रहा। गहमा-गहमी के स्थान पर बहुत ही शांति से बीत रहे समिट के दूसरे दिन में कला चर्चाओं का शोर रहा। अपने आकषर्ण से लोगों को पास बुलाते आर्ट इंस्टॉलेशन्स ने समिट की सैर का आमन्त्रण दिया।
कला चौपाल की चर्चा कला शिक्षा

वुडन बॉक्स को जोड़कर बनाए गए कलात्मक चौपाल में चर्चा की गर्मी थी, कला शिक्षा का औचित्य। मुबई के वरिष्ठ कलाकार प्रभाकर कोल्टे का कहना था कि यदि एकलवय नीति अपनाए और विश्वास का दामन थामें तो संभवत आर्ट एजूकेशन की आवश्यक्ता ही नहीं रहे। कलात्मक वातावरण और सीखने सिखाने के दौर कला के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।
डेमोस्ट्रेशन की बहार
 
चार गुणजनों के चार डेमोस्टेशन कला की खूबियों को अभिव्यक्त कर रहे हैं। 17 दिसम्बर तक निरन्तर चलने वाले डेमोस्ट्रेशन्स में जयन्त गजेरा कंटेम्पररी वुड कट पर, दत्तात्रेय आप्टे पेपर पल्प कॉस्टिंग पर, राजीव लाचन डिजीटल प्रिंट पर तथ्ता जापान के आर्टिस्ट यूरिको जापानी पेंटिंग पर कार्य कर रहे हैं।

कार्यशालाओं का मजमा
कला कार्यशालाओं की श्रृंखला में कल गौरी केटकर ने रिसाइलिंग आर्ट व पंकज गोस्वामी ने कार्टुनिंग कला की बारीकियां सिखाई।
फिल्म सेशन
कल 15 दिसम्बर को करीम बैज के निर्देशन से सजी रिद़म ऑफ थार तथा पाऊला के निर्देशन में तैयार दि गुरु एण्ड दि फार्क का लोगों ने लुत्फ लिया।

गुरुवार, 14 दिसंबर 2017

कलात्मक आगाज हुआ कला के कारवां का


कलात्मक आगाज हुआ कला के कारवां का
जयपुर आर्ट समिट के पांचवें एडीशन की शुरुआत रवीन्द्र मंच पर

कलाश्री अवार्ड से नवाजे गए आर.बी. गौतम और प्रो. भवानी शंकर शर्मा

मूमल नेटवर्क, जयपुर। कल से रवीन्द्र मंच पर जयपुर आर्ट समिट के पांचवें एडीशन के रंग सज गए हैं। इस वर्ष के आयोजन का कैनवास कुछ नए अन्दाज में और आकार में बड़ा बुना गया है। मुख्य प्रदर्शनी के साथ रवीन्द्र मंच परिसर में सजे आर्कषक इंस्टॉलेशन्स जहां अपनी कारीगरी और रंगों की परिकल्पना से लोगों को लुभा रहे हैं, वहीं दूसरी और अपने होने की कहानी को भी अभिव्यकत कर रहे हैं।

ऐसे हुई शुरुआत
मुख्य सभागार में फिल्मी अन्दाज में अंधेरे मंच पर स्पॉट लाईट का प्रकाश और एक चित्रकार जोगेन चौधरी की कूंचि की हरकत से श्वेत-श्याम रेखाओं से सजी कृति ने धीर-धीरे पूरा आकार ले लिया। और फिर पूरी रौशनी के साथ मंच दर्शकों के सामने था जहां पर समिट के विशिष्ट अतिथियों के रूप में आमन्त्रित चित्रकार जोगेन चौधरी, मूर्तिकार हिम्मत शाह, गीति सेन व प्रणव रंजन रे जैसे कला के सशक्त हस्ताक्षरों के अभिन्न्दन के साथ समिट की औपचारिक शुरुआत हुई।

इस वर्ष बहुत कुछ
इस वर्ष का समिट विजुअल आर्ट को पसन्द करने वाले दर्शकों के लिए ही नहीं वरन् परफोंमिग आर्ट के दर्शकों के लिए भी रचा गया है। कला प्रदर्शनी, आर्टिस्ट कैम्प, आर्ट परफोमेंस, कैलीग्राफी, व परफोमिंग आर्ट के साथ लीक से हटकर कुछ नये अन्दाज की फिल्मों का प्रदर्शन, विभिन्न विषयों पर कला चर्चाएं एवं और भी बहुत कुछ समेटे है, इस वर्ष का समिट। पूरे आयोजन को कुल आठ खण्डों में विभक्त किया गया है। जिन्हें सम्बन्धित क्षेत्र के विद्वान क्यूरेटर के रूप में अपनी कल्पनाओं के कैनवास पर जूनियर व सीनयर आर्टिस्ट्स के संग मिलकर साकार कर रहे हैं।

इस वर्ष से कलाश्री अवार्ड
जयपुर आर्ट समिट फाउण्डेशन की तरफ से अब हर वर्ष ऐसे कलाकारों को कलाश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा जिन्होनें कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस वर्र्ष कलाश्री के प्रथम अवार्ड से कलाविद एवं समिट के डायरेक्टर आर.बी. गौतम तथा समिट के सलाहकार मण्डल में शामिल प्रो. भवानी शंकर शर्मा को कलाक्षी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

रविवार, 10 दिसंबर 2017

जयपुर आर्ट समिट का पांचवा एडीशन नए अन्दाज में

जयपुर आर्ट समिट का पांचवा एडीशन नए अन्दाज में
अनुभवी क्यूरेटर बुनेंगे कला फलक
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आर्ट समिट का पांचवा एडीशन 14 दिसम्बर से शहर की सांस्कृतिक धड़कन रवीन्द्र मंच पर आयोजित होगा। 18 दिसम्बर तक चलने वाला यह आयोजन कला दर्शकों के समक्ष नये अन्दाज में प्रस्तुत होने जा रहा है।
आज शाम आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में समिट के फाउण्डर डायरेक्टर एस.के. भट्ट ने बताया कि, इस बार का समिट विजुअल आर्ट को पसन्द करने वाले दर्शकों के लिए ही नहीं वरन् परफोंमिग आर्ट के दर्शकों के लिए भी रचा गया है।
समिट में मुख्य प्रोग्राम के रूप में कला प्रदर्शनी, आर्टिस्ट कैम्प, आर्ट परफोमेंस, कैलीग्राफी, व परफोमिंग आर्ट का आयोजन किया जा रहा है। समिट के मुख्य आकर्षण के रूप इस बार 11 कला कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं जिसमें परफोमिग आर्ट भरतनाटय़म को भी शामिल किया गया है। कला फिल्मों के प्रदर्शन में भी लीक से हटकर कुछ नये अन्दाज की फिल्मों को चुना गया है जिनमें सामाजिक मुद्दों पर आधारित शार्ट फिल्म भी है। इन सब के साथ टॉक्स के सेशन में जहां विभिन्न विषयों पर चर्चाएं होंगी वहीं परफोमिग आर्ट की आकर्षक प्रस्तुतियां दर्शकों को आनन्द के पलों का एहसास करवाने के लिए तत्पर हैं।
पूरे आयोजन को कुल आठ खण्डों में विभक्त किया गया है। जिन्हें सम्बन्धित क्षेत्र के विद्वान क्यूरेटर के रूप में अपनी कल्पनाओं के कैनवास पर जूनियर व सीनयर आर्टिस्ट्स के संग मिलकर साकार करने वाले हैं।

गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017

अंतर्मन में कला की लय और उसका स्पंदन

(इस बार अतिथी लेखक के रूप में जयपुर आर्ट समिट के डायरेक्टर एस.के.भट्ट का आलेख प्रस्तुत है जिसमें उन्होने कलाकार की कला चेतना को प्रखर रहने और उनकी कृतियों में जीवन्तता को महसूस करने के लिए अन्र्तमन में उठने वाली कला की लय और उसके स्पन्दन की महत्ता का वर्णन किया है।     -सं.)

अंतर्मन में कला की लय और उसका स्पंदन
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हम अक्सर दूसरों की सभी समस्याओं और अन्य वैश्विक मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद अथवा मानवीय सम्वेदना से जुड़े अन्य किसी सार्वजानिक मुद्दों से स्वयं को अछूता महसूस करते हैं, भले ही हम आसानी से इनमें से कुछ मुद्दों में अपने ज्ञान से दूसरों के अज्ञान को कुछ हद तक दूर करने में कुछ मदद कर सकते हैं किंतु हम अपने अंतर्मन में दृढ़ता से यह पर्याप्त महसूस नहीं कर पाते हैं कि हम भी एक वैश्विक समुदाय का बड़ा हिस्सा हैं। यह अंतर्मन की वह स्थिति है जहां कला की चेतना और कला की अभिव्यक्ति हमारी सोच के अंतर में सामंजस्य और लय को स्थापित कर सकती है। कला लोगों को कभी यह नहीं दिखाती है कि क्या करना है, फिर भी कला में या कला के लिये कोई भी अच्छा काम करने से आप अपनी इंद्रियों, शरीर और अंतर्मन को एक लय में जोड़ सकते हैं और आपकी यही सोच ही आपको दूसरे लोगों और दुनिया को आप से अलग करते हुये आपकी इस विशिष्टता के कारण आपकी उपस्थिति को महसूस करवाती है।
एक वित्तीय सलाहकार के रूप में, मैंने पिछले 30 सालों में दुनिया के कई देशों में यात्रायें की हैं लेकिन मैंने कभी अपने अंतर्मन की छिपी उस लय को जो कला को जोड़ती है को कभी खोने या सोने नहीं दिया।अपने दैनिक कार्यों में या कहीं भी किसी वैश्विक समस्या के वाद विवाद के दौरान हो सकता है कभी आप, अपने को अपनों के सामने खड़ा पायें और विचारों का आदान-प्रदान करें और उसके तुरंत बाद किसी मीटिंग में अपनी राय किसी और मुद्दे पर दें, अथवा उसके बाद किसी फिल्म या किसी उपन्यास पर चर्चा करें या कुछ समय के बाद किसी कला या कला प्रदर्शनी के बिषय पर चर्चा करें या पारिवारिक प्राथमिकताओं की प्रबंधन प्रक्रिया में संलग्न हो जायें किंतु कहीं भी किसी भी स्थिति में आप अपने अंतर्मन में कला की लय को थमने ना दें क्योंकि यही लय आपकी सफलता की सीढ़ी हो सकती है।
यहां पर में बताना चाहूंगा कि अंतर्मन में कला की लय को जीवित बनाये रखना ही मुझे वित्तीय प्रबंधन के काम करने के दौरान उन व्यक्तियो के संपर्क में लाया जो कहीं न कहीं अपने अंतर्मन के विभिन्न दृष्टिकोणों में भी कला की लय को जीवंत बनाये हुए हैं और वास्तव में अलग-अलग धारणाओं, विचारों और समस्याओं में घिरे होते हुए भी स्वयं को सफल प्रबंधक स्थापित कर सफल व्यक्तित्व के पर्याय बन पाये हैं। हमारे अंतर्मन की लय हमें हमारी निर्णयन प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित करती है कुछ लीक से हटकर करने के लिए प्रेरित करती है। हममें से अधिकांश कला को देखने और उससेे प्रेरित होने की भावना को जानते हैं, चाहे यह एक गीत, नाटक, कविता, संगीत, उपन्यास, पेंटिंग, फिल्म या और भी कुछ हो, वो सब अस्थायी ही है जब तक कि ये हमारे अंतर्मन की लय से मिलान ना कर पाये क्योंकि जब हम कुछ देखते हैं, छूते हैं, चलते हैं, सुनते हैं हमारा अंतर्मन हमें एक नयी सोच और औचित्य की परख की स्वाभाविक प्रक्रिया में ले जाता है जिसमें अंतर्मन की लय का स्वभाव इसको ग्रहण अथवा निष्क्रिय करता है जिसे हम अनुभव भी कह सकते हैं।
मुझे विश्वास है, अंतर्मन की लय को सुनना और उसपर समसामयिक कला की रचना करना कलाकारों की प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक है और शायद यही लय और विचार कुछ कलाकारों के लिए एक सिर्फ रचना है जबकि इस बिषय से जुड़े अन्य व्यक्तियों के लिए कभी ये आश्चर्य के रूप में भी हो सकता है। एक आम आदमी जो कि आज सिर्फ अपने अस्तित्व की लड़ाई और जीवन के संघर्ष से थककर कुछ पल कला को देखने तो आता है लेकिन वो कला को देखने की बजाय कला के साथ सार्वजानिक मुठभेड़ करता है क्योंकि कला और संस्कृति आज हमारे समाज की जरूरत होने के स्थान पर शाब्दिक फैशन की बीमारी से ज्यादा ग्रस्त हैं। वे लोग जो कि किसी क्षेत्र विशेष का प्रतिनिधित्व करते हैं या जहां अपने अनुभव साझा करने के लिए अंतर्मन की लय के विरुद्ध किसी भी प्लेटफार्म पर एक साथ आ सकते हैं आज भी दुनिया को वही घिसे-पिटे तरीकों से देखते हैं क्योंकि वो अंतर्मन की लय को जीवन से तालबद्ध नहीं कर पाते हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हम अंतर्मन की लय और अपने निजी अनुभव में कितनी ईमानदारी से कितने तालबद्ध हैं जिसे हम साझा करने की बजाय दिशा निर्देशित करने की कोशिश करते हैं जबकि हमें यह मंथन करना चाहिये कि अनुभव साझा करने के लिए हम अपने को कितना उपयुक्त मानते हैं।
आज के व्यावसायिक मूल्यों में भी सिर्फ नजरिया बदलने की जरुरत है क्योंकि आज भी अंतर्मन में कला की लय एक अनुभूति, अंतज्र्ञान, अनिश्चितता, रचनात्मकता संजोकर रखने और नए विचारों के लिए लगातार खोज करने के लिए हमें प्रोत्साहित करती है कि हम कला की दुनिया को बदलने के लिए दुनिया के साथ संलग्न रहकर भी अंतर्मन की लय को तालबद्ध कर एक नयी धारा प्रवाहित कर सकते हैं।
                                                                                                                               -शैलेंद्र भट्ट

बुधवार, 5 नवंबर 2014

Jaipur Art Summit 2014, Seminar.

सेमीनार शुल्क दो नहीं, एक हजार रुपए
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर आर्ट समिट 2014 के तहत आयोजित दो दिवसीय सेमीनार में भाग लेने का शुल्क एक हजार रुपए ही है, पूर्व में यह दो हजार रुपए प्रचारित हुआ था।
समिट सूत्रों ने इसे स्पस्ट करते हुए बताया कि सेमीनार में शामिल होने के लिए पिछले वर्ष की तरह एक हजार रुपए शुल्क ही लिया जा रहा है। इस शुल्क में सेमीनार वाले दो दिनों के दौरान पढ़े जाने वाले पेपर्स का फोल्डर और इन दो दिनों का लंच शामिल हैं। इसके अलावा पिछले साल समिट के पहले संस्करण का कैटेलॉग लिए जाने पर 500 रुपए और इस साल के द्वितीय संस्करण का कैटेलॉग लिए जाने पर 500 रुपए और जमा कराने होंगे। यह नहीं लेने पर सेमीनार का शुल्क एक हजार रुपए ही होगा।
कला फिल्मों का प्रदर्शन
समिट के व्यस्त कार्यक्रम में दो दिन में कम से कम आठ कला फिल्मों के प्रदर्शन शामिल किए गए हैं। इनके लिए 17 और 18 नवम्बर के दिन तय किए गए हैं।
समिट टीम के सदस्य आर.बी. गौतम ने बताया कि इन फिल्मों के चयन में यह खास बात होगी कि सभी फिल्में स्वयं कलाकारों द्वारा बनाई गई है। इनमें पहले दिन 17 नवम्बर को दिखाई जाने वाली फिल्में वह होंगी जो कलाकारों द्वारा स्वयं की कला के बारे में सोच को स्पस्ट करती हैं। इनमें वरिष्ठ चित्रकार गोपी गजवानी, श्रीधर अय्यर, आर.एम. पाकिस्तान के नईम  और दोहा के आबू अलिंगा की फिल्में शामिल हैं।
दूसरे दिन 18 नवम्बर को कलाकारों द्वारा अन्य कलाकारों पर बनाई फिल्में शामिल की गई हैं। गोपी गजवानी द्वारा एस.एच. रजा और के. विक्रम सिंह द्वारा अमित्व दास पर बनाई फिल्मों के साथ धीरज चौधरी पर बनी फिल्म भी कला प्रेमी देख सकेंगे।

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014

Jaipur Art Summit; Seminar

जयपुर आर्ट समिट 2014; सेमीनार विवरण
जयपुर आर्ट समिट में इस बार सेमीनार के लिए दो दिन रखे गए हैं। यह 15 व 16 नवम्बर हैं। सेमीनार में प्रतिदिन दो सत्र होंगे। पहला सत्र प्रात: 11 बजे शुरू होगा जो दोपहर 1.30 बजे तक चलेगा। प्रतिदिन दूसरा सत्र दोपहर बाद 2.30 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे तक चलेगा। इस बीच आमंत्रित वक्ताओं के संबोधन और खुली चर्चा होगी। दो दिनों में होने वाले कुल चार सत्रों में केवल पहले दिन के दूसरे सत्र में हिन्दी में पत्र पढ़े जाएंगे। शेष सभी सत्र अंग्रेजी में होंगे।
15 नवम्बर 2014 शनिवार को सेमीनार के पहले दिन प्रथम सत्र में डा. सरयु वी. दोषी वक्ता होंगे। वे 'बॉम्बे स्कूल एंड इट्स इफेक्ट ऑन द आर्ट ऑफ द पीरियडÓ विषय पर अपना पेपर पढ़ेंगे। दूसरे पेपर के वक्ता जॉनी एम.एल. होंगे। वे 'डायनामिक्स ऑफ मार्केट फोर्सेस एंड चेंज सिनीरियो ऑफ कन्टेम्पररी आर्टÓ विषय पर अपना पेपर पढ़ेंगे।
दूसरे सत्र की शुरूआत शिव प्रसाद जोशी के पत्र से होगी। इनके पत्र का विषय 'समसामयिक कला सृजन का मनोविज्ञान तथा सम्प्रेषणÓ होगा। दूसरे पत्र के वक्ता डा. एम.के. भट्ट होंगे। वे 'समसामयिक कला में व्यवसायिक संगठनों का योगÓ विषय पर अपना पत्र पढ़ेंगे।
16 नवम्बर 2014 रविवार को सेमीनार के दूसरे दिन प्रथम सत्र में प्रो. दीपक कन्नाल वक्ता होंगे। वे 'प्रोस्पेक्ट्स ऑफ न्यू मीडिया इन कन्टेम्पररी टे्रंड ऑफ आर्ट्सÓ विषय पर अपना पेपर पढ़ेंगे। दूसरे पेपर के वक्ता प्रो. सुरेश जयराम होंगे। वे 'कन्टेम्पररी इंडियन आर्ट, वॉट इज न्यूÓ विषय पर अपना पेपर पढ़ेंगे।
दूसरे सत्र की शुरूआत चामिंडा गामगे के पेपर से होगी। इनके पेपर का विषय 'कन्टेम्पररी आर्ट सिनीरियो इन श्रीलंकाÓ होगा। दूसरे पेपर के वक्ता सुबोध केरकर होंगे। वे 'माय एक्सपेरिमेंट विद आर्टÓ विषय पर अपना पेपर पढ़ेंगे।
रजिस्ट्रेशन
आयोजकों की ओर से सेमीनार के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। इसके लिए जयपुर के जवाहर कला केंद्र और होटल क्लार्स आमेर में काउंटर प्रस्तावित हैं। इस साल सेमीनार के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 2000 रुपए रखी गई है। सेमीनार के प्रतिभागियों के लिए दोनों दिन लंच की व्यवस्था होगी और सेमीनार में पढ़े जाने वाले पेपर्स की कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।
रजिस्ट्रेशन के संबंध में अधिक जानकारी और सहयोग के लिए 'मूमलÓ हमेशा की तरह तैयार है।
सम्पर्क सूत्र:
ई-मेल moomalnews@gmail.com
फोन 9928487677, 9460789743
Whatsaap also at 9928487677 

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

Anjani Reddy की पेंटिंग में मूमल की कुंदन-मीना

मूमल द्वारा कुंदन-मीना ज्वैलरी पर प्रकाशित विशेषांक पत्रिका से प्रभावित होकर ख्यात चित्रकार अंजली रेडड़ी ने जयपुर आर्ट समिट के केम्प में बनाई अपनी पेंटिंग की नायिका को कुंदन-मीना के गहनों से सजाया। पत्रिका के विन्यास और रंग संयोजन को भी उन्होंने अपनी पेंटिंग में उपयोग किया और इसके लिए उन्होंने खुलकर मूमल की सराहना की।


काश कला जगत में 'मैं' की जगह 'हम' हो

 मूमल संपादकीय
चहुमुखी सराहना तो कुछ आलोचना भी

जयपुर का पहला आर्ट समिट सम्पन्न हो गया। ...और जैसा कि अक्सर होता रहा है, इसके आयोजन के प्रति भी विरोधी स्वर मुखर हुए। समिट की समाप्ती से पहले ही जयपुर के कलाकारों की गुटबाजी के नतीजे सामने आने लगे। मुद्दा वही अहम् का रहा। इस प्रकार एक बेहतर पहल को सराहना के साथ-साथ आलोचना भी मिली।
 माहौल बोझिल हुआ है और संवेदनाए चोटिल
 कला जो कभी सत्यम शिवम सुन्दरम् और सुखाय का दूसरा नाम हुआ करती थी अब उसके पैमाने बदल गए हैं। कलाकारों क बीच की गुटबाजी, राजनीतिक दलों की खेमेबाजी का अहसास कराने लगी है। इसके चलते कला जगत का माहौल बोझिल हुआ है और संवेदनाए चोटिल। ऐसे में आपस में ही लड़ते-भिड़ते कलाकार क्योंकर आम आदमी को कला की ओर आकर्षित कर अपनी कला से उन्हें जोड़ पाएगें। यही कारण है कि कुछ कलाकार तो अब साफ ही कहने लगे हैं कि उनकी खास कला आम आदमी के लिए है ही नहीं।
इस गुटबाजी और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोप-प्रत्यारोप को प्रतिस्पर्था का क्रत्रिम चोला नहीं पहनाया जा सकता। स्वस्थ्य प्रतियोगिता तो एक अलग ही शै होती है जो कला को और निखारने का काम करती है। प्रतिस्पर्धियों को  और बेहतर कृतियों का कर्ता बनने को प्रेरित करती है। उसके इरादों को और मजबूत बनाती हैं। आम आदमी से सहजता पूर्वक जोड़ती है। जबकि गुटबाजी कलाकार के संवेदशील मन में विकार और द्वन्द के जाल में उलझा देती है। इसका सीधा असर उसकी कृतियों में देखने को मिल जाता है। साधना से साध्य के बजाय साधन और भोतिकता की ओर बढ़ते कला के कदम इसी का परिणाम है।
मैं के कठघरे में कैद 
हम यह नहीं कह रहे कि निर्मित कलाकृतियां सुंदर नहीं, लेकिन स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा के अभाव में वे कांतिहीन हैं, प्राणहीन भी कह सकते हैं। कला संसार सहजता, सरलता, सद्भाव और संवेदनाओं से सजता है। इसे मैं की जगह हम का भाव प्रभावी बना सकता है। यहां इस बात का अफसोस है कि कलाकार मैं के कठघरे में स्वयं को कैद करता जा रहा है।
 उधेड़ सकते हैं तो बुन भी सकते हैं।
यह सही है कि किसी भी आयोजन में बहुत कुछ अच्छा किए जाने के बाद भी कुछ कमियां रह जाती है। किसी आयोजन में ये कमियां कुछ होती हैं और किसी में बहुत कुछ छूट जाता है। इन कमियों को बेहतर सलाह, सहृदयता, सहनशीलता और साथ के बल पर दूर किया जा सकता है। जब जब एक खेमा अपने आयोजन में दूसरे खेमें की कला को स्थान नहीं दे पाता है तो दूसरे खेमें के आयोजन में पहले खेमे की कला को स्थान नहीं मिलने की विवशताएं उसी प्रकार की होती है जैसी पहले आयोजन के लिए थी। इसी प्रकार किसी फैस्टिवल या समिट के आयोजन में भी कई बाते अलग हो सकती हैं, ऐमें उनकी तुलना बेमानी हो जाती है। कुल मिलाकर हम चाएं तो कमियों की फटी चादर में अपनी मैं की टांग फंसा कर उसे और अधिक उधेड़ सकते हैं और चाहें तो हम के ताने-बाने से उसे बुन भी सकते हैं।

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

Jaipur Art Summit Day-2

आर्टसमिट का दूसरा दिन 
सेमिनार, पुस्तक विमोचन और जेकेके में सांझी आर्ट के नाम
Sitting from (L-R) Dr. Ashrafi S. Bhagat, Anjolie Ela Menon, Prof.  Jai Krishna Agarwal,  Vinod Bhardwaj at the  1st session of Art Seminar.
मूमल नेटवर्क,जयपुर। आर्टसमिट का दूसरा दिन कला और कलाक्षेत्र में प्रयोग, उसकी प्रकृति, सृजन और आधुनिक दौर में कला के प्रसार आदि विषयों पर गहन चिंतन और मनन का रहा। होटल क्लार्क आमेर में आयोजित सेमिनार के दो सेशन्स में कलासमीक्षक व पेंटर जयकृष्ण अग्रवाल, आर्ट क्यूरेटर व आर्टक्रिटिक अशरफी भगत, वरिष्ठपत्रकार-लेखक मंगलेशडबराल और कवि, लेखक और पत्रकार प्रयाग शुक्ल ने अपने अनुभवों और कलाक्षेत्र के बारे में अपनेबातें रखी। यहां वरिष्ठ पत्रकार व कलासमीक्षक नई दिल्ली के विनोद भारद्वाज की किताब सेप्पकू का विमोचन हुआ। सेप्पकू कलाक्षेत्र के बारे में एक ऐसी किताब है जिसमें कला को कॉर्पोरेट जगत के हिसाब से चलने पर मजबूर हो सेल्फ ऑनर किलिंग यानि आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है। उनकी किताब का पूरा नाम सेप्पकू- (शायनिंग एण्ड डार्कनेस ऑफ आर्ट वल्र्ड )है। इसी कड़ी में राजस्थान के वरिष्ठ चित्रकार कन्हैयालालवर्मा की किताब मेघदूत चित्रण का भी विमोचन किया गया।
जो बात बनीठणी  में है वह मोनालिसा में कहां: जयकृष्ण अग्रवाल
जयकृष्ण अग्रवाल ने सेमिनार में कहा कि देशवासियों की मानसिकता अपनी कला को विदेशी कलाकारों से हेय समझने की है जिसे बदलना होगा। अपने बात को कहने के लिए उन्होंने आयातित प्रतिबिम्ब नामक शीर्षक देते हुए समझाई। उन्होंने कलाकारों और कलाविक्रेताओं को  यह समझना होगा कि देश की कला उन्नत है और उसकी अपनी संरचना  और इतिहास हैजिसे हम विदेश से तुलना नहीं कर सकते। जयकृष्ण अग्रवाल ने इस बात को यूं समझाया कि वह राजस्थान आए तो उन्हें बनीठणी ने बेहद प्रभावित किया और वह एक दुकान पर इसे खरीदने के लिए रुके तो दुकानदार न े तुरत कहा आइए सर, मोनालिसा ऑफ इंडिया केवल एक सौ पचास रुपए में। अग्रवाल ने कहा कि दुकानदार की इस बात से वह बेहद आहत हुए। उन्होंने बताया कि उन्होंने दुकानदार से पूछा कि क्या तुमने कभी मोनालिसा को देखा है तो दुकानदार ने कहा कि मोनालिसा कौन है? लेकिन, मोनालिसा का नाम बोलते ही ग्राहक झट से खरीद लेत हैं। अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने स्वयं लव्रू मेंं मोनालिसा को घंटों निहारा लेकिन, उसमें उन्हें वह रुप-लावण्य नहीं दिखा, जो बनीठणी में है।

कला और उस पर विदेशी प्रभाव : अशरफी  भगत
 आर्ट क्यूरेटर और  आर्टक्रिटिक अशरफी भगत ने अपनी स्टडीट्रांजिट एण्ड ट्रांसफॉर्मेशन: मोबलाइजिंग आइडियाज एण्ड आर्टिस्टिक अप्रेटस- ए स्टडी ऑफ फाइव  चेन्नई आर्टिस्ट के माध्यम से कहा कि कला और कलाकार के विचारों पर देश और दुनिया में घूमने से बड़ा वैश्विक प्रभाव पड़ता है और उसे और प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।

कला को कैसे देखना है सीखना होगा: मंगलेशडबराल
 वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मंगलेश डबराल ने सेमिनार अपने विचार रखते हुए कहा कि हम सभी को सीखना होगा कला को कैसे देखना  है। उन्होंने सत्रहवीं सदी के महान डच चित्रकार फरमीर की एक कृति मिल्कमेड या किचनमेड का उदाहरण देते हुए बताया कि एक स्त्री एक बर्तन में दूध डाल रहीहै। दूध की धार, मेज पर रखी रोटी, महिला का चेहरा और आधा शरीर एक मुलायम प्रकाश में चमक रहे हैं। अब इस चित्र को बेहद महत्वपूर्ण बनाने वाला केवल प्रकाश है। फरमीर ने अपने दस चित्रों में ऐसा प्रयोग किया है जिसे देखने के सबके अपने-अपने नजरिए हैं, लेकिन कलाकृति के मूल मनोभावों को समझने की कला को समझना ही कलाकार और कलाकृति के असली उद्देश्य को समझने में मदद करताहै।
  कला की  रेंज बहुत बड़ी है: प्रयाग शुक्ल
 कवि, लेखक और पत्रकार प्रयाग शुक्ल ने कहा कि कला की रेंज बहुत बड़ी है। आदि युग से लेकर आज तक की दुनिया में कला  इतनी विविध शैलियों में, विविध रचना सामग्री में और इतने आशयों में परिलक्षित हुर्इ है की व्यक्ति चकित रह जाता है। यह इसलिए संभव हुआ है कि काल और कला के विभिन्न चरणों में कलाकार को यही लगता है कि कई क्षेत्र ऐसे हैं जिन्हें आज तक नहीं छुआ गया। कला के आयाचिक क्षेत्र ही कला की रेंज को व्यापक बनाने में मदद करतेहैं।
जवाहर कला केंद्र में सांझी आर्ट ने मोहा सबका मन

जवाहर कला केेंद्र दूसरे दिन भी रंगों से सराबोर रहा। यहां पारिजात गैलरी-2 में वृंदावन की सांझी कला विशेष रुप से आकर्षण का केंद्र रही। वृन्दावन से नीलमणि भट्ट के नेतृत्व में सांझीे कलाकारों की टीम आई है। सांझी एक लुप्त होती कला मानी जा रही है जो कि अब केवल वृन्दावन में ही रह गई है। 450 साल पुरानी सांझी आर्ट वंश परंपरा के तौर पर संजोई जा रही है। सांझी एक कला है जिसके तहत मंदिरों में श्रीकृष्ण के जीवन से संबंधित घटनाओं का चित्रण किया जाता है। जवाहर कला केंद्र में शुक्रवार को श्रीमद्भागवत गीता के दसवें स्कंद के तहत वर्णित उखल बंधन को चित्रित किया गया। इसे बनाने में करीब 90 से 100 घंटे लगते हैं। सूखे रंगों जैसे पेपडी, सीलू, हीरमिच, संगमरमर के पाउडर आदि के प्रयोग से जवाहर कला केंद्र में पीली मिट्टी की एक वेदी तैयार की गई, इस पर Óयोमितिय आकृतियों को विभिन्न रंगों से सजाते हुए यशोदा मैया के भगवानश्रीकृष्ण के बालरूप को ओखली से बंधा हुआ बताया है। यहां पर दर्शकों ने भक्तिभाव से इस कला को देखा वहीं कला के विभिन्न स्वरूपों से जुड़ते हुए दर्शकों ने कला के अन्य पक्ष भी देखे।
( समाचार सौजन्य: अनुराग रायजादा


बुधवार, 6 नवंबर 2013

Jaipur Art Summit’13 begins today


Moomal Network, Jaipur.  An array of artworks from eminent artists overwhelms all the six art galleries, amphitheater and even corridors of the Jawahar Kala Kendra as Jaipur hosts its first art summit from Thursday. Over 150 artists will display their creative works in canvas, digital, installation and mix-media formats apart from these artists works of famed artists like MF Husain are being sourced from private collectors. Many of these artworks will be on public display for the first time.
Governor of Rajasthan Margret Alva will inaugurate the five day summit on Thursday in a ceremony at Hotel Clarks Amer, in presence of eminent artists like Padmabhushan Jatin Das, Padama Shree Anjolie Ela Menon and Padma Shree Shanti Dave. Art enthusiasts will also get opportunity to interact and learn from experience of these artists at various sessions scheduled over the five day event.
The Jaipur Art Summit' 13 is being organized by Progressive Artist Group (PAG) to promote works of contemporary artists on an international platform as well as to introduce the local artists to the creative trends. “The state of Rajasthan has a rich history of sheltering and nurturing various art formats, artists from the land have gained fame on global platform however there remains a need to further boost the artistic tradition of the state in accordance to requirements of contemporary art world, the Jaipur Art Summit is a step in the direction” says R. B. Gautam. President PAG.

7TH NOVEMBER
Art Summit Opening : Inauguration by the Honorable Governor of Rajasthan, Mrs. Margaret Alva
·         Venue : Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11:30am
ART CAMP: INAUGURATION BY PADAMA BHUSHAN JATIN DAS
·         Venue : Hotel Clarks Amer
·         Time : 1pm
ALL INDIA ART EXHIBITION : INAUGURATION BY PADAMA SHREE SHANTI DAVE
·         Venue: Jawahar Kala Kendra
·         Time : 5pm
 INSTALLATION ART
·         Venue : Jawahar Kala Kendra/ Hotel Clarks Amer
·         Time: 10 am to 5pm
RARE ART DEMO – JAWAHAR KALA KENDRA
·         Black Terracotta Pottery : Artisans from Sawaimadhopur 
·         Ceramic :  Ms Meenu Srivastava 
·         Glass Painting :  Olga Rodondo Boada 
·         Sanjhi Art of Vrindavan : Artisans from Vrindavan 
·         Clay Modeling :  Padama Shree Arjun Prajapati 
·         Cinema Hoarding : Kala Shree Mohd. Sharif 
ART HAAT
·         Venue : Hotel Clarks Amer
·         Time : 11am to 7pm
·         Participants :  Select Artisans

8TH NOVEMBER
ALL INDIA ART EXHIBITION
·         Venue:Jawhar Kala Kendra
·         Time: 11am to 5pm
ART CAMP
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 5pm
INSTALLATION ART
·         Venue: Jawahar Kala Kendra/ Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11 am to 7pm
SEMINAR : INAUGURATION BY PADAMA SHREE ANJOLI ELA MENON
·         Venue: Hotel Clarks Amer
·         Time: 11am to 5:30pm
New Models for International Art & Cultural Collaboration - Insight, Best Practices and Recommendations
SPEAKERS:
·         Dr.Ashrafi Bhagat
·         Mr. Jaikrishan Agarwal
 AFTERNOON
ART AND ITS UNSOLICITED DOMAINS
·         SPEAKERS:
·         Mr.Prayag Shukla
·         Mr.Mangalesh Dabral
·         Book Launch: Meghdoot Chitran
·         Author: Mr. Kanhiyalal Verma
RARE ART DEMO – JAWAHAR KALA KENDRA: 11AM TO 7PM
·         Black Terracotta Pottery : Artisans from Sawaimadhopur
·         Ceramic:  Ms Meenu Srivastava
·         Glass Painting:  Olga Rodondo Boada
·         Sanjhi Art of Vrindavan: Artisans from Vrindavan
·         Clay Modeling :  Padama Shree Arjun Prajapati
·         Cinema Hoarding: Kala Shree Mohd. Sharif
·         Enameling Art: Mr. Surendra Singh Suran
ART HAAT
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
·         Participants:  Select Artisans
FILM SCREENING
·         Please check the board for details
9TH NOVEMBER
ALL INDIA ART EXHIBITION
·         Venue:Jawhar Kala Kendra
·         Time: 11am to 7pm
ART CAMP
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
      INSTALLATION ART
·         Venue: Jawahar Kala Kendra/ Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11 am to 7pm
SEMINAR
MORNING
Perspectives and Dilemmas of the Contemporary Visual Artists
Ms.Alka Pande
Ms. Uma Nair
AFTERNOON
Subject:Art Market & Its Influence on Contemporary Indian Art
·         Mr.Johnny M.L.
·         Mr. Abhay Sardesai
BOOK LAUNCH
·         An Introduction to Ajanta Caves
·         Ajanta Paintings
Author Mr.Rajesh Singh
RARE ART DEMO – JAWAHAR KALA KENDRA: 11AM TO 7PM
·         Black Terracotta Pottery : Artisans from Sawaimadhopur
·         Ceramic:  Ms Meenu Srivastava
·         Glass Painting:  Olga Rodondo Boada
·         Sanjhi Art of Vrindavan: Artisans from Vrindavan
·         Clay Modeling :  Padam Shree Arjun Prajapati
·         Cinema Hoarding: Kala Shree Mohd. Sharif
·         Enameling Art: Mr. Surendra Singh Suran
ART HAAT
·         Venue : Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
·         Participants :  Select Artisans
FILM SCREENING
·         Please check the board for details
10TH NOVEMBER
ALL INDIA ART EXHIBITION
·         Venue:Jawhar Kala Kendra
·         Time: 11am to 7pm
ART CAMP
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
INSTALLATION ART
·         Venue: Jawahar Kala Kendra/ Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11 am to 7pm
RARE ART DEMO – JAWAHAR KALA KENDRA: 11AM TO 7PM
·         Black Terracotta Pottery : Artisans from Sawaimadhopur
·         Ceramic:  Ms Meenu Srivastava
·         Glass Painting:  Olga Rodondo Boada
·         Sanjhi Art of Vrindavan: Artisans from Vrindavan
·         Clay Modeling :  Padama Shree Arjun Prajapati
·         Cinema Hoarding: Kala Shree Mohd. Sharif
·         Enameling Art: Mr. Surendra Singh Suran
ART HAAT
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
·         Participants:  Select Artisans
FILM SCREENING
·         Please check the board for details
11TH NOVEMBER
ALL INDIA ART EXHIBITION
·         Venue:Jawhar Kala Kendra
·         Time: 11am to 7pm
ART CAMP EXHIBITION
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
INSTALLATION ART
·         Venue : Jawahar Kala Kendra/ Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11 am to 7pm
RARE ART DEMO – JAWAHAR KALA KENDRA: 11AM TO 7PM
·         Black Terracotta Pottery : Artisans from Sawaimadhopur
·         Ceramic:  Ms Meenu Srivastava
·         Glass Painting:  Olga Rodondo Boada
·         Sanjhi Art of Vrindavan: Artisans from Vrindavan
·         Clay Modeling :  Padama Shree Arjun Prajapati
·         Cinema Hoarding: Kala Shree Mohd. Sharif
·         Enameling Art: Mr. Surendra Singh Suran
ART HAAT
·         Venue: Hotel Clarks, Amer
·         Time: 11am to 7pm
·         Participants:  Select Artisans
FILM SCREENING
·         Please check the board for details
·         The organizers reserve the right to change any programme.
·         For updates & changes please check the boards at the two main venue; Jawhar Kala Kendra & Hotel Clarks, Amer


·         06NOV
Preview : All India Art Exhibition
Venue: Jawahar Kala Kendra
Preview
6:30pm (by invitation only)



·         07NOV
Art Summit Opening : Inauguration by the Honorable Governor of Rajasthan, Mrs. Margaret Alva
Venue : Hotel Clarks, Amer
Time: 11:30am
Art Camp:
Venue : Hotel Clarks Amer
Time :
1pm
·         08NOV
All India Art Exhibition
Venue:Jawhar Kala Kendra
Time:
11am to 5pm
Art Camp:
Venue : Hotel Clarks Amer
Time:
11am to 5pm
·         09NOV
All India Art Exhibition
Venue:Jawhar Kala Kendra
Time:
11am to 7pm
Art Camp:
Venue : Hotel Clarks Amer
Time:
11am to 7pm
·         10NOV
All India Art Exhibition
Venue:Jawhar Kala Kendra
Time:
11am to 7pm
Art Camp:
Venue : Hotel Clarks Amer
Time:
11am to 7pm
·         11NOV
All India Art Exhibition
Venue:Jawhar Kala Kendra
Time:
11am to 7pm 
Art Camp:
Venue : Hotel Clarks Amer
Time:
11am to 5pm