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शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

जयपुर में इन्टरनेशनल आर्ट फेस्टिवल

इन्टरनेशनल आर्ट फेस्टिवल
22 से 24 अक्टूबर तक जयपुर में
कला प्रतिभाओं के लिए नया अवसर
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जयपुर में कला मेलों के सीजन में इस बार कुछ नए आयोजन और जुडऩे वाले हैं।  इन्टरनेशनल आर्ट फेस्टिवल का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। इस फेस्टिवल में नेशनल व इंटरनेशनल आर्टिस्टस के साथ युवा प्रतिभाओं को अपनी कला दिखने का अवसर मिलेगा। फेस्टिवल में बेहतरीन काम को प्रोत्साहित करने के लिए पांच हजार से एक लाख रुपए तक के नकद अवार्ड प्रदान किए जाने की बात कही जा रही है। फेस्टिवल में भाग लेने के लिए 3 हजार रुपए एन्ट्री फीस रखी गई है। इसके फार्म इसी सप्ताह उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मार्केट के गुर भी सिखाएंगे
आयोजन के लिए 22 से 24 अक्टूबर तक रवीन्द्र मंच की कला दीर्घाएं बुक की गई हैं। इसका आयोजन दिल्ली व मुंबई की हाईप्रोफाइल कलाकार व आर्ट प्रमोटर गीता दास कर रही हैं। आयोजकों के अनुसार फस्टिवल के दौरान मास्टर आर्टिस्ट लाइव डेमोस्ट्रेशन देंगे। इस दौरान वो रंग तकनीक व काम को बेहतरीन तरीके से करने के साथ मार्केट के गुर भी सिखाएंगे ताकि आर्टिस्ट अपनी कृतियों से जीवनयापन के लिए अच्छी आय की प्राप्ति कर सके। इस आयोजन का हिस्सा बनने के लिए जुलाई माह के अन्त तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। चयन कमेटी द्वारा प्राप्त आवेदनों में से श्रेष्ठ कृतियों को शो में शामिल करने के लिए चयन किया जाएगा। प्राप्त आवेदन को कई वर्गों  में बांटा गया है जिसमेंं पेंटिंग, स्कल्पचर्स, पॉटरी,वॉटर कलरवर्क, ड्राइंग, फोटोग्राफी, कैलीग्राफी, ट्रेडिशनल  आर्ट व फोक आर्ट  इत्यिादि शामिल हैं
कई नकद अवार्ड 
फेस्टिवल में भारत के कई प्रांतों के कलाकारों के साथ विदेशी आर्टिस्ट्स की कला देखने का अवसर मिलेगा। राजस्थान की ऐसी प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाएगा जिन्हेेंं किसी भी कारण से आज तक अपनी प्रतिभा को दुनियां के सामने लाने का अवसर नहीं मिल पाया है। किसी भी आयु वर्ग का आर्टिस्ट इस फेस्टिवल का हिस्सा बन सकता है। हालांकि आयोजन में आर्टिस्ट्स को दो कैटेगरीज  में बांटा गया है जूनियर 30  वर्र्ष तक की आयु वाले और सीनियर्स 30 वर्ष से अधिक की आयु वाले। प्रदर्शित होने वाले सभी कामों में से बेहतरीन कृतियों को प्रोत्साहित व सम्मानित करते हुए विभिन्न श्रेणियों में 5 हजार से लेकर एक लाख रुपए के कई नकद अवार्ड दिए जाएंगे। अवार्ड की राशि सीनियर्स व जूनियर्स के लिए एक समान होगी। आयोजन में राजस्थान की गांव ढाणियों में छुपी हुई प्रतिभाओं को विशेष अवसर दिया जाएगा। ऐसी प्रतिभाओं को विशेष रूप से पुरस्कृत  किया जाएगा जो टेक्निकली साउण्ड नहीं होने के बावजूद उपलब्ध सीमित संसाधनों से ही बेहतरीन कलाकृतियों का निर्माण करते हैं।
 देखें मूमल आर्ट न्यूज पोर्टल: 

बुधवार, 15 जनवरी 2014

कला मेला (17) जेकेके में 7 फरवरी से

सौ से ज्यादा स्टॉल्स में होंगी कृतियां
सात से साथ होंगे एक हजार कलाकार
मूमल नेटवर्क, जयपुर।
राजस्थान ललित कला अकादमी के वार्षिक 17वां कला मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं।  7 से 11 फरवरी तक जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में आयोजित होने वाले इस मेले के लिए प्रदेश के विभिन्न भागों से कलाकार भाग लेगे।
इस बार मेले की उपयोगिता में और वृद्धि के लिए कई उपाय किए गए हैं।  इसके तहत कला मेले के स्थान परिवर्तन को गंभीरता से लिया गया। इससे पहले तक यह कला मेला रवीन्द्र मंच परिसर में आयोजित किया जाता रहा, लेकिन वहां तक पहुंचने वाले दर्शकों की संख्या कम होने के कारण मेला अपेक्षाकृत फीका लगता था। इस बार शहर का कला केंद्र माने जाने वाले जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में इसे आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2011 में भी जेकेके में इसका आयोजन हुआ था और तब काफी संख्या में आम दर्शकों ने इसे देखा और सराहा था। इसके साथ ही इस बार कलाकार और कलाकृतियों की चयन प्रक्रिया को भी पिछले वर्षों के मुकाबले थोड़ा कठिन किया गया है। इस बार राज्य स्तर पर पुरस्कृत कलाकारों की कृतियों को अधिक से अधिक संख्या में शामिल किया गया है। हालांकि उन कृतियों को भी शामिल किया गया है  जो किन्हीं कारणों से पुरस्कृत नहीं हो पाई हों, लेकिन जो कलात्मक दृष्टि से बेहतर हैं।

लगभग एक हजार चित्रकार और मूर्तिकार 
मेला परिसर में 110 स्टॉल्स में प्रदेश के एक हजार से भी अधिक चित्रकार और मूर्तिकार भाग लेंगे। इस बार भी कला मेले में कलाकृतियों की बिक्री पर विशेष जोर दिया जाएगा। पिछले आयोजनों की तरह इस बार भी इसके लिए आर्ट कलेक्टर्स, होटल इंडस्ट्री, इंटीरियर डेकोरेटर्स और स्कूल कॉलेजों को इसमें आमंत्रित कर कलाकृतियों की खरीद के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही मेले में व्यक्तिगत प्रोत्साहन पुरस्कार भी अधिक से अधिक संख्या में जुटाने की कोशिश की जा रही है।
काम के लोग
समारोह के संयोजक वरिष्ठ चित्रकार डॉ.नाथू लाल वर्मा ने अपनी विषम शारीरिक परिस्थियों के बावजूद पिछले दिनों अनवरत काम करते हुए कला मेले को आकार दिया है। अकादमी संकुल, शिल्पग्राम और शासन सचिवालय के बीच लगातार चले आवागमन और आवश्यक समन्वय के बाद एक बार फिर यह स्थापित हुआ है कि कला जगत में काम के लोग वास्तव में काफी कम हैं।
ये हैं चयन समिति के सदस्य 
चयन समिति में मेला संयोजक नाथू लाल वर्मा सहित चित्रकार सुब्रतो मंडल, लालचंद मारोठिया, डॉ. जगमोहन माथोडिय़ा, श्वेत गोयल और मूर्तिकार सुमन गौड़ को शामिल किया गया। 

बुधवार, 20 मार्च 2013

Jaipur Art Festival Day-3 कम होती जा रही रौनक


कम होती जा रही रौनक
मूमल नेटवर्क, जयपुर। दिन ब दिन घटती रौनक के चलते बुधवार को तीसरे दिन जयपुर आर्ट फेस्टिवल की रौनक कुछ और कम हो गई। एक और जहां थके-थके से लग रहे कलाकारों ने जैसे-तैसे अपना काम निपटाने पर ज्यादा जोर दिया वहीं आम दर्शकों की कमी के चलते चहल-पहल नहीं रही। सुबह से शाम तक केवल पार्टिसिपेट कर रहे कलाकार, उनके कुछ परिचित, स्थानीय कलाकारों के शिष्य, ब्यूरोकेसी के दबाव में जुटे वालिन्टियर्स, कुछ सरकारी कार्यालयों और कला विभागों के बेगारी करते कर्मचारी और खबरों के लिए जुटे कुछ पत्रकार, बस।
सूनेपन में खो गए सारे दावे
जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल की तर्ज पर आर्ट फेस्टिवल आयोजित होने के सारे दावे यहां सूनेपन की भेंट चढ़ कर रह गए। शहर और प्रदेश के बड़े कलाकारों ने आयोजकों की शर्तोे पर आना गवारा नहीं किया, ऐसे में आयोजन भीड़ नहीं खींच पाया। यही सब बातें आयोजकों के सामने रखी गई तो उनके उत्तर उम्मीद से बिलकुल परे थे। बताया गया कि जो लोग नहीं आने की बात कर रहें हैं, उन्हें दरअसल बुलाया ही नहीं गया। रही भड़ खीचने की बात तो यह आयोजन भीड के लिए नहीं वरन खास बद्धिजीवी वर्ग के लिए है जो आर्ट की समझ रखता है। यह पूछे जाने पर कि जिस शहर में साहित्य के इतने कद्रदान हैं वहां आर्ट की समझ रखने वाले लोगों की गिनती इतनी कम हो क्या यह बात गले उतरती है?
क्या बिक पाएगा यहां काम
जयपुर आर्ट फेस्टिवल में पार्टिसिपेट कर रहे कलाकारों में यह चर्चा आम है कि उनकी पेंटिंग्स बिकने पर दिए जाने वाला 60 प्रतिशत मूल्य ठीक है, लेकिन सवाल ये है कि पेंटिग्स की कीमत कौन तय करेगा। क्या जयपुर में अधिकृत या बाजार द्वारा स्वीकृत कोई वेल्युवर है? अगर कलाकार स्वयं अपनी ओर से मूल्य बताए तो क्या बायर मिल जाएंगे? जो काम नहीं बिकेगा उसका क्या होगा? जो बात कलाकारों सबसे अधिक चर्चा में रही वह ये कि आयोजकों को भले ही लिट्रेचर फैस्टिवल करने को अनुभव है, लेकिन क्या उन्हे पेंटिग्स बेचने का कोई अनुभव है?
ऐसे बिकेगा काम
मूमल के भरोसेमंद सूत्रों की बात पर भरोसा किया जाए तो यह जानकारी सामने आई है कि जयपुर आर्ट फेस्टिवल में तैयार कलाकृतियों के लिए मंबई की कुछ ऐसी आर्ट गैलेरीज से इस 'माल' के लिए आयोजन से पूर्व ही बिक्री का समझौता किया जा चुका है। कला बाजार की बेहतर समझ रखने वाली इन गैलेरीज ने अभी यहां काम रहे कम से कम चार कलाकारों और शिल्पियों को स्पॉसर भी किया है। उनके आने-जाने से लेकर अन्य सभी खर्च स्पॉन्सर ही उठा रहे हैं और उनके द्वारा इस आयोजन के दौरान तैयार कृतियां भी उन्हीं की होंगी।
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