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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

अवध आर्ट फस्टिवल 2020 में जयपुर आर्ट समिट के रंग

अवध आर्ट फस्टिवल 2020 में जयपुर आर्ट समिट के रंग
सृजन पर चर्चा में जयपुर आर्ट समिट के निदेशक एस.के. भट्ट
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के रीजनल सेन्टर पर आज से अवध आर्ट फेस्टिवल 2020 का आगाज़ हो रहा है। फेस्टिवल में  40 कलाकारों की 150 से अधिक कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें कला की विभिन्न विधाओं के साथ  दिल्ली, बंगाल, आसाम, बंैगलोर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा व राजस्थान सहित देशभर के कलाकारों की भागीदारी रहेगी।
फेस्टिवल में सृजन पर चर्चा के कार्यक्रम के तहत कला जगत के जाने माने हस्ताक्षर अपने विचार व्यक्त  करेंगे। चर्चा का विषय है: रचनात्मकता एक देशी जुबान है। इस चर्चा में जयपुर आर्ट समिट के संस्थापक निदेशक, कला समीक्षक व ब्लॉगर श्री शैलेन्द्र भट्ट, नाद रंग के संपादक व कवि श्री आलोक पराडकर, फैडेरेशन ऑफ इंडियन फोटोग्राफी के अध्यक्ष व प्रसिद्ध छाया चित्रकार श्री अनिल रिसाल सिंह तथा बंगाल आर्ट फाउण्डेशन के निदेशक व कलाकार श्री अशोक राय अपनी उपस्थिति देंगे।
शहर में यह अफोर्डेबल आर्ट फेयर का दूसरा संस्करण है जिसका संयोजन आर्टिस्ट कीर्ति साहू कर रहे हैं। फेस्टिवल का समापन 3 मार्च को होगा।

मंगलवार, 25 जुलाई 2017

राजस्थान के कला आयोजन


बदलते परिदृष्य में दिसम्बर के पहले पखवाड़े में अनेक आयोजन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। पिछले दिनों राजस्थान में कला आयोजन के क्षेत्र में एकाएक बढ़ी हलचलों के बाद कला जगत का परिदृष्य बदलने लगा है। आर्ट वर्ड के बदलते सिनेरियो में जहां ‘रंग मल्हार’ ने जयपुर से बाहर पंख पसारते हुए नए आयाम स्थापित किए हैं वहीं ‘जयरंगम’ और ‘जयपुर आर्ट समिट’ भी आयोजनों की नई इबारत लिखने जा रहे हैं।
दिसम्बर महीने के पहले पखवाडे में तीन प्रमुख आयोजनों के चलते जयपुर की कला गतिविधियां परवान पर होंगी। पहले 2 से 11 दिसम्बर के बीच ‘जयरंगम’ होगा। इसी दौरान 7 से 10 तक पद्मश्री रामगोपाल विजयवर्गीय मेमोरियल फाउण्डेशन का आर्ट कैम्प और ऑक्शन आयोजित किया जाएगा। अंत में 14 से 18 दिसम्बर के बीच जयपुर आर्ट समिट का पांचवा एडिशन होगा।
अब तक जयपुर तक सिमटे रंग मल्हार के आयोजनों ने इस साल प्रदेश स्तर पर अपना रंग बरसाया। बिना किसी सरकारी सहायता के आयोजित इस गैर व्यवसायिक कार्यक्रम को कमोबेश सभी नगरों में अच्छा समर्थन मिला। वरिष्ठ और युवा सभी कलाकारों ने स्वार्थ व लाभ की कामना से परे आयोजन में दिल से भाग लिया। पिछली 9 जुलाई को रंग मल्हार ने कला आयोजन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए। इसी के साथ कला आयोजन का नया सिनेरियों सामने आने लगा।
बदलते परिदृष्य कि बीच तीन अन्य आयोजनों की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि रामगोपाल विजयवर्गीय मेमोरियल बड़े आयोजनों में शुमार नहीं है, लेकिन बड़े आयोजनों को प्रभावित करने की क्षमता इसमें होती है। पिछली बार यह आर्ट समिट के दौरान हुआ था, तब इस आयोजन के चलते अनेक युवा और वरिष्ठ कलाकारों ने इसके आर्ट कैम्प और ऑक्शन को समिट से अधिक महत्व प्रदान किया था। इस बार यह आयोजन ‘जयरंगम’ के दौरान होगा।

जयरंगम 2017 प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी जवाहर कला केन्द्र और रवीन्द्र मंच पर होगा। जयरंगम के आयोजकों ने बताया कि यह 2 से 11 दिसम्बर 2017 तक होगा। प्रोग्राम का फाइनल शेड्यूल अभी तक तय नहीं हो पाया है। उल्लेखनीय है कि जयरंगम के दौरान नाटकों के मंचन के साथ-साथ ‘आर्ट स्ट्रोक’ कार्यक्रम के तहत विजुअल आर्ट का प्रदर्शन किया जाता है। इसकी शुरुआत 2015 में हुई जब राजस्थान ललित कला अकादमी के सहयोग से कलाकारों ने अपनी कला को प्रदर्शित किया। 2016 में आर्ट स्ट्रोक की जिम्मेदारी ‘कलानेरी’ ने सम्भाली। इस वर्ष की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। आयोजन के लिए राज्यसरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।
JAIPUR ART SUMMIT
कला जगत में व्यवसायिक आयोजन की छवि बना चुके जयपुर आर्ट समिट का 5 वां एडिशन 14 से 18 दिसम्बर के बीच पिछली बार की ही तरह जयपुर के रवीन्द्रमंच में आयोजित किया जाएगा। हालांकि आयोजन के निरंतर बढ़ते आकार के कारण यह स्थान छोटा है, लेकिन जवाहर कला केन्द्र उपलब्ध नहीं होने पर फिलहाल कार्यक्रम यहीं समायोजित होगा। आयोजन की प्रचार सामग्री में भारत सहित 50 देशों के 700 से ज्यादा कलाकारों की भागीदारी का उल्लेख किया गया है। जयपुर आर्ट समिट के प्रधान एस.के.भट्ट  के अनुसार आयोजन के तहत होने वाले कार्यक्रमों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

रविवार, 19 अक्टूबर 2014

अधिक भव्य होगा जयपुर आर्ट समिट



संवारने में जोर-शोर से जुटी समिट की टीम 
देशभर से जुटेंगे जाने-माने वरिष्ठ चित्रकार
छह देशों के 15 विदेशी कलाकारों का आना तय

मूमल नेटवर्क, जयपुर।
मूमल नेटवर्क, जयपुर। गुलाबी नगरी को सतरंगी रंगों से सराबोर करने वाले जयपुर आर्ट समिट का दूसरा एडिशन पिछले साल की तुलना में और ज्यादा सज-संवर कर अधिक भव्य होने जा रहा है। आगामी 14 से 18 नवंबर तक होटल क्र्लाक आमेर और जवाहर कला केन्द्र में होने जा रहे आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रहीं है। चेयरपर्सन टिम्मी कुमार की अगुवाई में समिट की पूरी टीम इसे और अधिक कारगर बनाने में व्यस्त है। इस बार जवाहर कला केन्द्र की तमाम दीर्घाओं के साथ शिल्प ग्राम को भी बुक करवाया गया है। समिट का प्रमुख उद्देश्य जयपुर के सांस्कृतिक इतिहास के अनुसार आधुनिक कला को नए सिरे से परिभाषित करने के साथ प्रदेश के चितेरों को देश-विदेश के कलाकारों से रूबरू कराना है।
समिट टीम के सदस्य आर.बी. गौतम ने एक जानकारी में बताया कि समिट में पेंटिग्स के साथ-साथ विजुअल, डिजिटल, स्क्लपचर्स व इंस्टालेशन कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें देश-विदेश के जाने-माने कलाकारों को काम करते हुए देखा जा सकेगा। क्रिएटिव फोटोग्राफी के क्षेत्र में हिमांशु और पेपर मेकिंग में ओमप्रकाश, वाटर कलर में बिजय बिस्सास, प्रिन्ट मेकिंग में शाहिद परवेज और सिनेमा बैनर्स के लिए हरिओम तंवर भी लाइव डेमो केरेंगे। समिट के पांचों दिन चलने वाले आर्ट कैंप में देश भर के वरिष्ठ व नामचीन कलाकारों को आमन्त्रित किया गया है। होटल क्लार्क में लगने वाले इस कैम्प के जरिए नव कलाकारों को वरिष्ठ जनों के काम के तरीके और कला के परिपक्व अंदाज सीखने व समझने का अवसर मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
समिट में भारत के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल के कलाकार लाइव डेमो के जरिए अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन करेंगेे। दोहा, कतर और इजिप्ट से भी कलाकार आ रहे हैें। अब तक करीब 6 देशों के 15 कलाकारों के पहुंचने की स्वीकृति प्राप्त हो गई है और सिलसिला जारी है।
पौने दौ सौ कलाकारों के काम
समिट के तहत जेकेके की दीर्घाओं में अखिल भारतीय स्तर की कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में लगभग 175 कलाकारों की कृतियां प्रदर्शित होंगी। होटल क्र्लाक परिसर के अलावा जेकेके के खुले शिल्पग्राम में भी स्क्लपचर्स व इंस्टालेशन का बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होगा।
सेमीनार
इसके साथ सेमिनार व आर्ट कैंप भी आयोजित होंगे। इस वर्ष सेमीनार केवल दो दिन 15 व 16 नवंबर को होगा। सेमीनार में डा. एम.के. भट्ट, शिव प्रसाद जोशी, सुबोध केलकर,  डॉ. सरयू दोषी, दीपक कनाल, जॉनी एम.एल, सुरेश जयराम और राजीव लोचन जैसे कलाविद अपने पेपर पढ़ेंगे। इसी के साथ आर्ट फिल्म शो के तहत नई जानकारियों और महान कलाकारों के काम का जायजा भी लिया जा सकेगा।

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

काश कला जगत में 'मैं' की जगह 'हम' हो

 मूमल संपादकीय
चहुमुखी सराहना तो कुछ आलोचना भी

जयपुर का पहला आर्ट समिट सम्पन्न हो गया। ...और जैसा कि अक्सर होता रहा है, इसके आयोजन के प्रति भी विरोधी स्वर मुखर हुए। समिट की समाप्ती से पहले ही जयपुर के कलाकारों की गुटबाजी के नतीजे सामने आने लगे। मुद्दा वही अहम् का रहा। इस प्रकार एक बेहतर पहल को सराहना के साथ-साथ आलोचना भी मिली।
 माहौल बोझिल हुआ है और संवेदनाए चोटिल
 कला जो कभी सत्यम शिवम सुन्दरम् और सुखाय का दूसरा नाम हुआ करती थी अब उसके पैमाने बदल गए हैं। कलाकारों क बीच की गुटबाजी, राजनीतिक दलों की खेमेबाजी का अहसास कराने लगी है। इसके चलते कला जगत का माहौल बोझिल हुआ है और संवेदनाए चोटिल। ऐसे में आपस में ही लड़ते-भिड़ते कलाकार क्योंकर आम आदमी को कला की ओर आकर्षित कर अपनी कला से उन्हें जोड़ पाएगें। यही कारण है कि कुछ कलाकार तो अब साफ ही कहने लगे हैं कि उनकी खास कला आम आदमी के लिए है ही नहीं।
इस गुटबाजी और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोप-प्रत्यारोप को प्रतिस्पर्था का क्रत्रिम चोला नहीं पहनाया जा सकता। स्वस्थ्य प्रतियोगिता तो एक अलग ही शै होती है जो कला को और निखारने का काम करती है। प्रतिस्पर्धियों को  और बेहतर कृतियों का कर्ता बनने को प्रेरित करती है। उसके इरादों को और मजबूत बनाती हैं। आम आदमी से सहजता पूर्वक जोड़ती है। जबकि गुटबाजी कलाकार के संवेदशील मन में विकार और द्वन्द के जाल में उलझा देती है। इसका सीधा असर उसकी कृतियों में देखने को मिल जाता है। साधना से साध्य के बजाय साधन और भोतिकता की ओर बढ़ते कला के कदम इसी का परिणाम है।
मैं के कठघरे में कैद 
हम यह नहीं कह रहे कि निर्मित कलाकृतियां सुंदर नहीं, लेकिन स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा के अभाव में वे कांतिहीन हैं, प्राणहीन भी कह सकते हैं। कला संसार सहजता, सरलता, सद्भाव और संवेदनाओं से सजता है। इसे मैं की जगह हम का भाव प्रभावी बना सकता है। यहां इस बात का अफसोस है कि कलाकार मैं के कठघरे में स्वयं को कैद करता जा रहा है।
 उधेड़ सकते हैं तो बुन भी सकते हैं।
यह सही है कि किसी भी आयोजन में बहुत कुछ अच्छा किए जाने के बाद भी कुछ कमियां रह जाती है। किसी आयोजन में ये कमियां कुछ होती हैं और किसी में बहुत कुछ छूट जाता है। इन कमियों को बेहतर सलाह, सहृदयता, सहनशीलता और साथ के बल पर दूर किया जा सकता है। जब जब एक खेमा अपने आयोजन में दूसरे खेमें की कला को स्थान नहीं दे पाता है तो दूसरे खेमें के आयोजन में पहले खेमे की कला को स्थान नहीं मिलने की विवशताएं उसी प्रकार की होती है जैसी पहले आयोजन के लिए थी। इसी प्रकार किसी फैस्टिवल या समिट के आयोजन में भी कई बाते अलग हो सकती हैं, ऐमें उनकी तुलना बेमानी हो जाती है। कुल मिलाकर हम चाएं तो कमियों की फटी चादर में अपनी मैं की टांग फंसा कर उसे और अधिक उधेड़ सकते हैं और चाहें तो हम के ताने-बाने से उसे बुन भी सकते हैं।