बुधवार, 11 मार्च 2020

ललित कला अकादमी द्वारा 61 वें वार्षिक कला पुरस्कारों से सम्मानित कृतियां व कलाकारों का विवरण

ललित कला अकादमी द्वारा 61 वें वार्षिक कला पुरस्कारों से सम्मानित कृतियां व कलाकारों का विवरण 
अनूप मनजुखी गोपी (त्रिसुर, केरल) 


डेविड मालाकर (कोलकाता, पश्चिम बंगाल)

देवेंद्र कुमार खरे (वडोदरा, गुजरात)

दिनेश पंड्या (मुंबई, महाराष्ट्र)

फारूक अहमद हालदर (24 परगना, कोलकाता,पश्चिम बंगाल)
 
हरि राम कुंभावत (जयपुर, राजस्थान) 

केशरी नंदन प्रसाद (जयपुर, राजस्थान) 


मोहन कुमार टी (बेंगलुरू, कर्नाटक) 


रतन कृष्ण साहा (मुंबई, महाराष्ट्र)

 
सागर वसंत काम्बले (मुंबई, महाराष्ट्र) 


सतविंदर कौर (नई दिल्ली)

 
सुनील तिरूवयुर (अर्नाकुलम, केरल) 


तेजस्वी नारायण सोनावणे (शोलापुर, महाराष्ट्र) 


यशपाल सिंह(दिल्ली)


यशवंत सिंह (दिल्ली)



वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए कलाकार

वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुए कलाकार
राजस्थान के हरिराम कुम्भावत और केशरी नंदन प्रसाद हुए सम्मानित
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में 15 मेधावी कलाकारों को 61 वें वार्षिक ललित कला अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर ललित कला अकादमी की दीर्घाओं में वार्षिक कला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जो 22 मार्च तक चलेगी।
राष्ट्रीय प्रदर्शनी में विशेष आमन्त्रित श्रेणी के अन्र्तगत अंजलि इला मेनन, परमजीत सिंह, अर्पिता सिंह, गोगी सरोजपाल, स्वर्गीय जॉन फर्नाडेज़ एवं वासुदेव कामत जैसे जानेमाने कलाकारों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गयी हैं।
सम्मानित कलाकार:
अनूप मनजुखी गोपी (त्रिसुर, केरल) डेविड मालाकर (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), देवेंद्र कुमार खरे (वडोदरा, गुजरात), दिनेश पंड्या (मुंबई, महाराष्ट्र),फारूक अहमद हालदर (24 परगना, कोलकाता,पश्चिम बंगाल), हरि राम कुंभावत (जयपुर, राजस्थान), केशरी नंदन प्रसाद (जयपुर, राजस्थान), मोहन कुमार टी (बेंगलुरू, कर्नाटक), रतन कृष्ण साहा (मुंबई, महाराष्ट्र) सागर वसंत काम्बले (मुंबई, महाराष्ट्र), सतविंदर कौर (नई दिल्ली), सुनील तिरूवयुर (अर्नाकुलम, केरल), तेजस्वी नारायण सोनावणे (शोलापुर, महाराष्ट्र), यशपाल सिंह(दिल्ली) और यशवंत सिंह (दिल्ली)।
अकादमी पुरस्कार के लिए कलाकारों का चयन देश के बेहतरीन कलाकारों एवं समीक्षकों की नामित चयन समिति अर्थात ज्यूरी द्वारा किया गया है। ज्यूरी ने प्राथमिक चयन समिति द्वारा छांटी गई कुल 283 कलाकृतियों का गुणवत्ता के आधार पर निरपेक्ष मूल्यांकन करके उक्त 15 कलाकारों का चयन किया।



बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

सीडब्ल्यूईआई का दो दिवसीय सेमीनार

सीडब्ल्यूईआई का दो दिवसीय सेमीनार
हावी रहा जीआई का मुद्दा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जेकेके के रंगायन में कल 26 फरवरी को कन्सोर्टियम ऑफ वुमन आंत्रप्रिन्योर्स ऑफ इण्डिया के दो दिवसीय सेमीनार की शुरुआत हुई। जयपुर की फर्म मैसर्स एम्पोरिया डीआर के सहयोग व संयोजन से हो रहे सेमीनार के पहले दिन जीआई के मुद्दे की सरगर्मियां रही। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में ऑल इण्डिया प्रोफेशनल कांग्रेस की प्रेसिडेंट श्रीमती रुक्षमणी कुमारी ने शिल्पियों को सम्बोधित किया।
पारम्परिक शिल्पियों की जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन)से सम्बन्धित जिज्ञासाओं व प्रश्रों का जवाब सीनियर अटॉर्नी श्रीमती शिल्पी झा ने दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मैसर्स एम्पोरिया डीआर के डायरेक्टर श्री दीपक सांकित ने कार्यक्रम के परिचय के साथ की। सीडब्ल्यूईआई की चेयरपर्सन शशि सिंह ने शिल्पियों को जानकारी दी कि बाजार में उतरने से पहले अपने शिल्प उत्पादों का ट्रेड मार्क बनाना आवश्यक है। ट्रेडमार्क से कई व्यावसासियक समस्याओं का निस्तारण किया जा सकता है। सेमीनार में राजस्थान स्टूडियो के श्री कार्तिक के साथ श्रीमती लीला बोरडिया, व श्रीमती मृदुला चन्दर ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर पद्मश्री शाकिर अली, पद्मश्री तिलक गीताई सहित जयपुर के नामचीन शिल्पी उपस्थित थे।

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020

अवध आर्ट फस्टिवल 2020 में जयपुर आर्ट समिट के रंग

अवध आर्ट फस्टिवल 2020 में जयपुर आर्ट समिट के रंग
सृजन पर चर्चा में जयपुर आर्ट समिट के निदेशक एस.के. भट्ट
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के रीजनल सेन्टर पर आज से अवध आर्ट फेस्टिवल 2020 का आगाज़ हो रहा है। फेस्टिवल में  40 कलाकारों की 150 से अधिक कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें कला की विभिन्न विधाओं के साथ  दिल्ली, बंगाल, आसाम, बंैगलोर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा व राजस्थान सहित देशभर के कलाकारों की भागीदारी रहेगी।
फेस्टिवल में सृजन पर चर्चा के कार्यक्रम के तहत कला जगत के जाने माने हस्ताक्षर अपने विचार व्यक्त  करेंगे। चर्चा का विषय है: रचनात्मकता एक देशी जुबान है। इस चर्चा में जयपुर आर्ट समिट के संस्थापक निदेशक, कला समीक्षक व ब्लॉगर श्री शैलेन्द्र भट्ट, नाद रंग के संपादक व कवि श्री आलोक पराडकर, फैडेरेशन ऑफ इंडियन फोटोग्राफी के अध्यक्ष व प्रसिद्ध छाया चित्रकार श्री अनिल रिसाल सिंह तथा बंगाल आर्ट फाउण्डेशन के निदेशक व कलाकार श्री अशोक राय अपनी उपस्थिति देंगे।
शहर में यह अफोर्डेबल आर्ट फेयर का दूसरा संस्करण है जिसका संयोजन आर्टिस्ट कीर्ति साहू कर रहे हैं। फेस्टिवल का समापन 3 मार्च को होगा।

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

कन्यादह फिर चर्चा में


कन्यादह फिर चर्चा में
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र के शिल्पग्राम में आयोजित समानांतर साहित्य उत्सव में वरिष्ठ पत्रकार राहुल सेन लिखित उपन्यास कन्यादह पर चर्चा हुई। कला पर अपने कोटेशन्स के कारण प्रसिद्धि में आई इस पुस्तक ने एक बार फिर कला जगत को चर्चा स्थल पर एकत्रित किया। प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित इस उत्सव के मंच किताब गुवाड़ी में 'कन्यादह' पर खुली चर्चा करने के लिए लेखक के साथ कला इतिहासकार व सिटी पैलेस म्यूजियम की डायरेक्टर डॉ. रीमा हूजा व जाने-माने कलाकार श्री रामकिशन अडिग उपस्थित थे। 
चर्चा के दौरान लेखक से पूछे गए बेबाक सवालों और जवाबों ने उपस्थित जन को रोमांचित व प्रभावित किया। खुली चर्चा के बीच अंतत: कन्यादह के कई पहलुओं का खुलासा हुआ। विशेषकर कला जगत की स्थिति व उसमें व्यापत दड़ेबंदी और राजनीति का बेबाकी से उल्लेख हुआ।
कन्यादह की चर्चा को सुनने के लिए कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे जिनमें जयपुर आर्ट समिट के डायरेक्टर श्री एस. के. भट्ट, वरिष्ठ कलाकार श्री आर.बी गौतम व समिट की प्रशासनिक टीम, राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट की पूर्व प्रिंसिपल डॉ. प्रतिभा यादव, वरिष्ठ चित्रकार डॉ. जगमोहन माथोडिय़ा, डॉ. रीता पाण्डे, श्रीमती पूर्णिमा कौल, डॉ. विवेकानन्द गोस्वामी, मै. एम्पोरिया डी.आर के डायरेक्टर श्री दीपक सांकित, इनरव्हील क्लब की पूर्व गवर्नर श्रीमती रश्मि मिश्रा व अन्य सम्माननीय अतिथि शामिल थे। उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक का विमोचन जयपुर आर्ट फेस्टिवल में किया गया था।

सोमवार, 12 अगस्त 2019

दिल्ली समसामयिक कला सप्ताह का आगाज एक सितंबर से

दिल्ली समसामयिक कला सप्ताह का आगाज एक सितंबर से 
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। अंजू और अतुल डोडिया, अनोली परेरा, तैयबा बेगम लिपि, रवि अग्रवाल और जी आर ईराना सहित अंतरराष्ट्रीय समसामयिक भारतीय कलाकारों की 50 से अधिक कलाकृतियां दिल्ली समसामयिक कला सप्ताह (डीसीएडब्ल्यू) के तीसरे संस्करण में प्रदर्शित की जाएंगी। एक सितंबर से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में स्थापित और उभर रहे कलाकारों की दक्षिण एशिया में समसामयिक कलाकृतियों को पेश किया जाएगा। यहां विजुअल आट्र्स गैलरी में होने वाला कार्यक्रम एक सप्ताह चलेगा।
आयोजकों ने एक बयान में बताया कि इसमें ऐसे कलाकार भाग लेंगे जो हमारे दौर में तेजी से बदल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर, अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी, परिदृश्य और पहचान की राजनीति से जुड़े काम को पेश करेंगे। इसमें जगन्नाथ पांडा, सचिन जॉर्ज सेबास्टियन, सुजीत, विपेक्षा गुप्ता, कुमारेसन सेल्वाराज, सुनोज डी, गिहान करुणारत्ने, महबूबुर रहमान, नूर अली चगानी, प्रज्ज्वल चौधरी, राधिका अग्रवाल, श्वेता भट्टड, अरुणकुमार एचजी, पुनीत कौशिक और मंजूनाथ कामत भी भाग लेंगे।

2.8 करोड़ की बिक्री हुई ताज पैलेस कला नीलामी में

2.8 करोड़ की बिक्री हुई ताज पैलेस कला नीलामी में 
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ताज ग्रुप ऑफ  होटल्स की 115वीं वर्षगांठ के अवसर पर, दिल्ली के प्रतिष्ठित 5-सितारा होटल ताज पैलेस ने भारतीय आधुनिक और समकालीन कला की एक आकर्षक लाइनअप की नीलामी के माध्यम से 2.8 करोड़ रुपये जुटाए।  इसमें से 40 फीसदी हिस्सा ताज पब्लिक सर्विस वेलफेयर ट्रस्ट को दान किया गया। होटल ने कल शनिवार 11 अगस्त को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। यह ट्रस्ट आतंकवाद, प्राकृतिक आपदा के पीडि़तों और सशस्त्र बलों के सदस्यों की मदद करता है, ताकि उनके जीवन के पुनर्निर्माण में मदद मिल सके। नीलामी से एकत्र रकम का बाकी 60 फीसदी हिस्सा डीएजी के पास जाएगा।
आर्ट गैलरी के डीएजी कलेक्शन में अमृता शेरगिल, एफ.एन. सूजा, एम.एफ. हुसैन, एस.एच. रजा, जैमिनी रॉय, के.एच.अरा, सोहन कादरी और शक्ति बर्मन की चित्रकृतियों की नीलामी की गई। शुक्रवार 10 अगस्त को हुई नीलामी में शेरगिल (1913-41) की एक अनाम ग्रेफाइट-ऑन-पेपर पेटिंग 70 लाख रुपये में बिकी। वहीं, विश्व प्रसिद्ध कलाकार एम.एफ. हुसैन (1913-2011) की 1982 की वॉटरकलर पेंटिंग - 'दैट ऑबस्कियोर ऑब्जेक्ट ऑफ डिजायर' 22 लाख में बिकी।
ताज की इस लाइव नीलामी 'ऑर्ट फ्राम द हार्ट' में कोई रिजर्व नहीं था और ना ही बायर्स प्रीमियम रखा गया था। डीएजी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष आनंद न कहा कि, प्रत्येक काम को भारतीय कला के व्यापक स्वरूप को दर्शाने के लिए चुना गया है। इस सेलेक्शन को क्यूरेट करने के दौरान हमने यह सुनिश्चित किया कि नीलामी के चुनी जा रही पेंटिंग्स विभिन्न अवधि का प्रतिनिधित्व करें (1952 से 2005 तक)। और ये काम अलग-अलग माध्यमों के हैं, और इनकी शैली लाक्षनिक से अमूर्त तक, मनुष्य से लेकर परिदृश्य तक और लोक आधुनिकतावाद से उच्च आधुनिकतावाद तक है।
(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है)
साभार

हर्षित कुरुस्वानी को सिन्धी आइडल का खिताब

हर्षित कुरुस्वानी को  सिन्धी आइडल का खिताब
सिन्धी आइडल (गायन) प्रतियोगिता 2019 सम्पन्न
मूमल नेटवर्क, जयपुर। सिन्धी आइडल (गायन) प्रतियोगिता 2019 में कोटा के युवा गायक हर्षित कुरुस्वानी को सिन्धी आइडियल का खिताब हासिल हुआ है। प्रतियोगिता में दूसरे विजेता जयपुर के गोकुल उदासी घोष्ति किए गए। तीसरा स्थान कोटा की भूमि को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अपनी बेहतरीन गायकी के लिए पांच अन्य गायकों को भी सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सिन्धी आइडल  (गायन) प्रतियोगिता 2019 का फाइनल राउण्ड, राजस्थान सिन्धी अकादमी एवं बीइंग सिन्धी फाउंडेशन के संयुक्त तत्ववाधान में सम्पन्न हुआ। राघ्ट्रीय सिन्धी समाज जिला जयपुर के सहयोग से यह आयेजन कल 11 अगस्त की शाम एसएमएस हास्पीटल के कैम्पस में स्थित जे.एम.ए. कन्वेन्शन हॉल में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान विधान सभा के मुख्य सचेतक डॉ. महेश जोशी थे।
सिन्धी आइडियल के चुनाव के लिए प्रथम चरण की गायन प्रतियोगिताएं जयपुर, अजमेर, कोटा व उदयपुर में आयोजित की गई थीं। इन चार शहरों के आयोजनों में से 28 प्रतिभागियों को फाइनल राउण्ड के लिए चुना गया था।
प्रतियोगिता में प्रथम विजेता रहे हर्षित कुरुस्वानी को पुरस्कार स्वरूप 31 हजार रुपए,  गोकुल उदासी को द्वितीय पुरस्कार स्वरूप 21 हजार एवं भूमि को 11 हजार रुपए का तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके साथ ही पांच प्रतियोगियों को उनकी बेहतरीन गायकी के लिए 3-3 हजार की पुरस्कार राशि दी गई। सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागी अजमेर के भरत गोकलानी व पूनम नवलानी, नसीराबाद के ओमप्रकाश बबलानी, जयपुर की रुचिका टी. चंदानी, केकड़ी की आशा रंगवानी हैं। कार्यक्रम का संयोजन अनिता शिवनानी ने किया।

रविवार, 4 अगस्त 2019

ललित कला अकादमी का 65वां स्थापना दिवस समारोह कल से

ललित कला अकादमी का 65वां स्थापना दिवस समारोह कल से
मूमल नेटवर्क, दिल्ली। ललित कला अकादमी भव्य समारोह के साथ अपना 65वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है। अकादमी ने इस समारोह को विशेष बनाते हुए महिला कलाकारों और भारतीय सेना के शोर्य चित्रण को प्रमुखता दी है। स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन कल 5 अगस्त को सुबह साढे नौ बजे होगा। इसमें महिला कला शिविर, कला प्रदर्शनियां व पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम होंगे। यह समारोह 12 अगस्त तक चलेगा।े 65वें स्थापना दिवस के उपलक्ष में ललित कला अकादमी कई कार्यक्रमों का आयोजन करेगी। स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत 5 अगस्त से होगी। मुख्य अतिथी के रूप में पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर कलाकारों व अतिथियों के साथ संस्कार भारती के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेन्द्रनाथ, संस्कार भारती अध्यक्ष वासुदेव कामत, इंदिरा गांधी राघ्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानन्द जोशी व अकादमी अध्यक्ष डॉ. उत्तम पचारणे उपस्थित होंगे।
स्थापना समारोह में राष्ट्रीय स्तर का महिला कलाकार शिविर का आयोजन किया गया है। इसके साथ ही अकादमी संग्रह में उपलब्ध महिला कलाकारों की कृतियों की प्रदर्शनी का आयोजन होगा। पोस्टकार्ड पर भारतीय सेना का अभिनन्दन करती जीवन्त चित्र प्रस्तुति की प्रदर्शनी भी इस समारोह का हिस्सा होगी। पुस्तक-मिथिला की लोक चित्रकला का लोकापर्ण भी इस अवसर पर किया जाएगा।
चित्र प्रदर्शनियां 12 अगस्त की शाम तक चलेंगी।

मंगलवार, 30 जुलाई 2019

यह चित्रकार नींद में करता है चित्रकारी

यह चित्रकार नींद में करता है चित्रकारी
मूमल डेस्कवर्क।
बहुत से लोगों को नींद में चलने या बड़बड़ाने की बीमारी होती है। लेकिन एक ऐसा इंसान है, जो नींद में तस्वीरें बनाता है। इनका नाम है ली हैडविन।
ली हैडविन ब्रिटेन के वेल्श सूबे के कार्डिफ़ शहर में रहते हैं। ली हैडविन जब केवल चार बरस के थे, तो उन्होंने दीवार पर चित्र बनाने शुरू कर दिए थे दुनिया के अन्य बच्चों की तरहा। फर्क केवल इतना था कि वो सोने के बाद नींद में ड्रॉइंग बनाते थे। जैसे-जैसे वो बड़े होते गए, सोते हुए चित्र बनाने का उनका हुनर और सुधरता गया।
जब वो 15 साल के थे, तो हैडविन ने हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो के तीन पोट्र्रेट बनाए लेकिन, आज उन्हें इसकी बिल्कुल याद नहीं है। मज़े की बात यह है कि सोते हुए बारीक चित्र बनाने वाले ली हैडविन जागते हुए कोई चित्रकारी नहीं कर पाते।
नींद में चित्रकारी का रहस्य
ली की इस हैरान कर देने वाली कला के बारे में कार्डिफ़ यूनिवर्सिटी की पेनी लुइस ने रिसर्च की है। उनका कहना है कि सोते हुए चित्र बनाना, उनके आधे सोए और आधे जागे मस्तिष्क की वजह से है। पेनी लुइस का कहना है कि लोग नींद में करवट बदलते हैं, बड़बड़ाते हैं या फिर चलने लगते हैं। यह सब हमारे दिमाग़ में मची उथल-पुथल का नतीजा होता है जो कि बहुत सामान्य घटना है। लेकिन, ली हैडविन का मामला इससे भी आगे चला गया है। वो पेंसिल, ब्रश और यहां तक कि हड्डियों से भी चित्र गढऩे लगते हैं।
पेनी लुइस कहती हैं कि ली के दिमाग़ की बनावट और काम करने का तरीका दोनों ही बहुत पेचीदा हैं। पेनी इस पेचीदगी भरे दिमागी मामले को समझने की कोशिश कर रही हैं। वो कहती हैं कि जब हम सो रहे होते हैं, तो ये मान कर चलते हैं कि हमारा ज़हन भी सो रहा है। लेकिन, हमारे दिमाग़ का एक हिस्सा उस समय भी बहुत सक्रिय होता है। वो जागते समय किए जाने वाले काम का अभ्यास करता है। नई बातें और हुनर सीखता है। यादें संजोता है। हमारे मस्तिष्क के पास इतना काम होता है कि उसके पास सोने की फुरसत ही नहीं होती है।
ली हैडविन भी इस बात को सवीकार करते हैं। वो कहते हैं कि सोते समय उनके ज़हन में किसी कला प्रदर्शनी का ख्याल आता है। जिसमें अलग-अलग सेक्शन होते हैं। अक्सर वो इन्हीं सेक्शन के हिसाब से चित्रकारी करते हैं।
पेनी लुइस कहती हैं कि सोते हुए हमारे दिमाग़ के तर्क गढऩे वाले हिस्से को नींद आ जाती है। लेकिन, दिमाग़ का वो हिस्सा जो जज़्बात महसूस करता है और उन्हें नियंत्रित करता है, वो जागता रहता है। इसे लिम्बिक ब्रेन कहते हैं जो सोते हुए भी जागता रहता है। पेनी लुइस के मुताबिक़, ली हैडविन के ज़हन में जो होता हुआ हम देख रहे हैं, उसका ताल्लुक़ इंसान के इवोल्युशन यानी क़ुदरती विकास की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जैसे कि,
आदि मानव जब जंगल में रहते थे, तो उन्हें सोते समय भी चौकन्ना रहना होता था। ताकि कोई ख़तरा आए तो वो तुरन्त वहां से बचने के लिए भाग सकें।
चित्रकार ली हैडविन अपनी इस आदत की वजह से कई बार बहुत परेशान भी हो जाते हैं। रात के समय
अचानक जागते हैं, तो पसीने-पसीने हो जाते हैं। डर लगता है। घबराहट होती है।
पेनी लुइस कहती है कि सोते हुए लोग हत्या, बलात्कार और चोरी जैसी घिनौनी हरकतें कर डालते हैं। ऐसे में ली हैडविन सोते हुए चित्र बनाते हैं, तो ये अच्छी बात है कि अपने दिमाग़ के इस उलट-फेर से वो अपराध की तरफ़ नहीं झुके, बल्कि उन्होंने कलारचना शुरू की।
पेनी का कहना है कि जागते समय ली हैडविन को अपनी कला का हुनर याद नहीं रहता। इसकी वजह यहे हो सकती है कि दिमाग़ पूरी तरह से इस बात को मानने को तैयार नहीं कि उन्हें यह हुनर आता है। जब उनके दिमाग की बाधा दूर कर दी जाएगी, तो शायद वो जागते हुए भी ख़ूबसूरत चित्र बना सकेगे।
                                                                                                       (साभार बीबीसी)

बुधवार, 17 जुलाई 2019

ललित कला अकादमी में उप सचिव और अन्य पदों के लिए भर्ती

ललित कला अकादमी में उप सचिव और अन्य पदों के लिए भर्ती
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली।
ललित कला अकादमी ने उप सचिव और अन्य पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र उम्मीदवार 13 अगस्त 2019 को या उससे पहले ऑफलाइन आवेदन के माध्यम से पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। पात्र उम्मीदवार 12 अगस्त 2019 को या उससे पहले डॉ। उत्तम पचारने, ललित कला अकादमी के अध्यक्ष को निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन भेज सकते हैं।
रिक्ति का विवरण
उप सचिव (प्रशासन और लेखा): 01 पद
उप सचिव (कार्यक्रम / प्रलेखन और प्रकाशन): 01 पद
क्षेत्रीय सचिव: 02 पद
उत्पादन सहायक: 01 पद
नौकरी करने का स्थान
ललित कला अकादमी, नई दिल्ली

सोमवार, 24 जून 2019

राजस्थानी मांडना नवीन कला विधाओं संग

राजस्थानी मांडना नवीन कला विधाओं  संग
मूमल नेटवर्क, अजमेर। राजस्थानी मांडना नवीन कला विधाओं  संग कार्यशाला का एक दिवसीय आयोजन लोक कला संस्थान द्वारा किया गया।
कार्यशाला में शामिल कला शिक्षक लक्ष्य पाल सिंह राठौड़ ने इस अवसर पर कहा कि, लोक कलाएं हमारे जीवन का अभिन्न अंग रही है, वर्तमान में यह कलाएं विलुप्त होने के कगार पर है इन्हें संरक्षित करने व आमजन की इनमें रुचि जागृत करने के लिए इन्हें नवीन कला विधाओं के साथ चित्रित किया जाए तो यह अधिक आकर्षक एवं मनभावन होगी।
कार्यशाला संयोजक लोक कला संस्थान के संजय सेठी ने बताया कि कार्यशाला में कला प्रेमियों को परंपरागत मांडना को नवीनता के साथ चित्रित करने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होने कहा कि,  कार्यशाला में भाग लेने वाले कलाकार अपनी नवीन पेंटिंगो के साथ शीघ्र अजमेर में भव्य कला प्रदर्शनी का आयोजन करेंगे। आयोजन में अलका शर्मा, मीनाक्षी मंगल, किरण खत्री व छवि सैनी का विशेष सहयोग रहा।

मंगलवार, 18 जून 2019

टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को खूबसूरत तस्वीर में बदल देगा यह टूल

टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को खूबसूरत तस्वीर में बदल देगा यह टूल
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। अब केवल आर्टिस्ट नहीं, आम आदमी भी खूबसमरत पेंटिंग बना पाएगा। यह संभव होगा अभी हाल ही ईजाद हुई नई टेक्नॉलजी से। यह टेक्नॉलजी रफ फॉर्म में बनाई गई टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों को खूबसूरत तस्वीर में बदल देगी।
माइक्रोचिप बनाने वाली कंपनी एनविडिया ने यह सिस्टम मार्च में लॉन्च किया था, जिसे अब सभी के लिए जारी कर दिया गया है। आप इसका फ्र्री ऑनलाइन वर्जन ट्राइ भी कर सकते हैं। इस टूल का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको इसके पेज पर नजर आ रहे टर्म ऐंड कंडीशन्स के बॉक्स पर टिक करना होगा।
इसके बाद आपको पेड़, पानी, पहाड़ जैसे लेबल चुनकर एक रफ पेंटिंग करनी होगी। इसमें एक साइड आपको पेंटब्रश टूल से अपने मनमुताबिक लाइनें ड्रा करनी होंगी। इसके बाद पेंट बकेट सिंबल के रूप में नजर आ रहे फिल्टर टूल से आप कलर भर सकेंगे। ऐसा करने के बाद आपको अपनी पेटिंग के राइट पर एक शानदार तस्वीर नजर आएगी, जिसका डमी आपने बाएं साइड तैयार किया है।
यह ऑनलाइन टूल अभी बीटा वर्जन में हैं, इसलिए इसकी पेंटिंग अभी पूरी तरह से पर्फेक्ट नहीं है। कंपनी का कहना है कि यह टेक्नॉलजी उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी जिनके लिए आर्टिफिशल वल्र्ड तैयार करना, उनके काम का हिस्सा है। आर्किटेक्चर, अर्बन प्लानर, लैंडस्केप डिजाइनर और विडियो गेम डिवलपर्स के लिए यह टूल उनके काम को काफी आसान कर देगा।
कैसे काम करता है यह टूल
यह टूल जेनेरेटिव ऐडवर्सियल नेटवर्क (जीएएन) सिस्टम के जरिए काम करता है, जिसमें एक ऐल्गोरिदम लैंडस्केप को तैयार करता है और दूसरा, इसे इसकी वास्तविककता के आधार पर रेट करता है।
साभार नवभारत टाईम्स

शनिवार, 15 जून 2019

केरल में मंदिर कलाकृति पर बनेगा संग्रहालय

केरल में मंदिर कलाकृति पर बनेगा संग्रहालय
मूमल नेटवर्क, कोच्चि। केरल सरकार एक ऐसे संग्रहालय का निर्माण कर रही है जिसमें राज्य की मंदिर कलाकृति और त्रिशूर जिले के एक प्राचीन शहर से संबद्ध रीति रिवाजों पर प्रकाश डाला जाएगा। इससे मन्दिर मूर्ति शिल्प पर किए जाने वाले शोध कार्यों को बढ़ावा व सहयोग मिल पाएगा। 3.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला प्रस्तावित संग्रहालय दक्षिण भारत में अपने तरह का पहला संग्रहालय होगा जो कोडुंगल्लूर शहर में बनाया जाएगा। कोडुंगल्लूर शहर को इसके दो सहस्राब्दी पुराने मंदिर के लिए जाना जाता है। सूत्रों ने बताया कि, श्री कुरुम्बा भगवती मंदिर के नाम से प्रसिद्ध चेरा काल के धार्मिक परिसर को मुजिरिस हेरिटेज प्रोजेक्ट (एमएचपी) के तहत संरक्षण और नया रूप दिया जा रहा है। इसी परिसर में संग्रहालय का निमार्ण प्रस्तावित है। यह भारत के सर्वाधिक प्राचीन मन्दिरों में से एक है। इसमें भद्रकाली की आठ भुजाओं वाली मूर्ति है जिन्हें 'कोडुंगलुर अम्माÓ के नाम से अधिक जाना जाता है।

कलाकृतियां सिखाएंगी सूर्य नमस्कार

कलाकृतियां सिखाएंगी सूर्य नमस्कार
एनसीजेडसीसी में कमल की पंखुडिय़ों पर अब सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राएं नजर आएंगी। इसे अंतिम रूप देने में पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार लगे हैं। राज्यपाल करेंगे 17 जून को लोकार्पण।
मूमल नेटवर्क, प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में सूर्य नमस्कार  को प्रदर्शित करती कमल के फूल पर आसीन कृतियों को लगाया जाएगा। यहां प्रतिमाएं यह बताएंगी कि आप किस तरह सूर्य नमस्कार करें। सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राओं पर आधारित कलाकृतियां देश को जल्द ही समर्पित की जाएंगी। योग विधा में यह अनोखी पहल हो सकती है। फाइबर वाली इन कलाकृतियों को पश्चिम बंगाल से आए मूर्तिकार गढ़ रहे हैं। कुंभ के सफल आयोजन से दुनिया भर में अपनी चमक बिखेरने वाले प्रयागराज में सूर्य नमस्कार के तरीके को कला के माध्यम से अनूठे अन्दाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
ऐसी है कृतियां
एनसीजेडसीसी ने सूर्य नमस्कार के निमित्त तैयार की जा रही प्रतिमाओं को अभी तक कोई नाम नहीं दिया है। इसे बनाने का उद्देश्य है कि योग प्रेमियों को सूर्य नमस्कार की सभी मुद्राओं की जानकारी सहज तरीके से हो। मूर्तिकार इसे कमल के फूल पर गढ़ रहे हैं।  एक-एक पंखुड़ी पर सूर्य नमस्कार की अलग-अलग मुद्राओं को दर्शाते हुए प्रतिमाएं गढ़ी जा रही हैं। बीच में एक योगी की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में होगी।
सभी मुद्राओं के सामने उनके नाम भी रहेंगे। इस कलाकृति का निर्माण सात मई से शुरू हुआ था। इस पर 15 से 20 लाख रुपये तक का खर्च आने की बात संस्थान के जिम्मेदार कह रहे हैं। कुल कितनी राशि खर्च होगी, यह बता पाने की स्थिति में वह अभी नहीं हैं। कलाकारों का भी यही कहना है कि यह प्रतिमाएं शिल्प व निर्माण कला के लिए अप्रतिम उपहार होगा।
बोले एनसीजेडसीसी के निदेशक
एनसीजेडसीसी के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर बताते हैं कि दिल्ली में तैनाती के दौरान वह इसे वहीं बनवाना चाहते थे लेकिन, शायद यह कलाकृति प्रयागराज की किस्मत में लिखी थी। महात्मा गांधी कला वीथिका के सामने पार्क में इसका निर्माण कराया जा रहा है। पास में योग की कक्षाएं चलती हैं। इस कला वीथिका में अक्सर प्रदर्शनी भी लगती है। इसलिए वहां कला पे्रमियों का आना जाना अधिक होता है।
राज्यपाल करेंगे लोकार्पण
इस कलाकृति का लोकार्पण राज्यपाल रामनाईक के हाथ से कराने का कार्यक्रम तय किया गया है। अभी तक 17 जून को लोकार्पण की तैयारी है लेकिन इसमें बदलाव किया जा सकता है।
साभार दैनिक जागरण