शनिवार, 16 जून 2018

सिन्धु महाकुम्भ कल सुबह साढे नौ बजे से

सिन्धु महाकुम्भ कल सुबह साढे नौ बजे से
मूमल नेटवर्क, जयपुर। भारतीय सिन्धु सभा एवं सिन्धी समाज के सामाजिक, धार्मिक संगठनों की ओर से राज्य स्तरीय सिन्धी महाकुम्भ का आयोजन कल 17 जून को प्रात: 9.30 बजे से स्थानीय सीतापुर टोंक रोड़ स्थित जयपुर एक्जीबिशन एण्ड कन्वेक्शन सेन्टर के वातानुकूलित हॉल में किया जा रहा है।
कार्यक्रम संयोजक हरगुण आसनदास नेभनानी ने कहा कि सिन्धी समाज संगठित होकर अपने अधिकारों की मांग कर रहा है। सिन्धी महाकुम्भ में प्रदेश भर की पूज्य पंचायतें सांस्कृतिक,सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के सदस्य भाग ले रहे हैं। अमरापुरा के संत मण्डली और प्रदेश के अन्य संत ओर साधु समाज समिलित होंगे।
सह संयोजक मुकेश लख्याणी ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खेल मंत्री एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़ होगे। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास मंत्री चन्द्र कृपलानी शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ, उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत, पूर्व प्रदश भाजपाा भाजपा अशोक परनामी, विधायक राज. सिन्धी अकादमी चेयरमैन हरीश राजानी, ज्ञानदेव आहूजा, तरूण रायश भाजपा -शहर अध्यक्ष संजय जैन, महापौर अशोक लाहोटी, ओंकार सिंह लखावत सहित कई विशिष्ट व्यक्ति समारोह में सम्मिलित होंगे।
सह संयोजक मोहन नानकानी ने कहा कि सिन्धु महाकुम्भ के माध्यम से सिन्धी समाज की 5 प्रमुख मांगे केन्द्र सरकार के समक्ष रखी जाएंगी जिसमें केन्द्रीय सिन्धी विश्वविद्यालय की स्थापना, दूरदर्शन पर पृथक सिन्धी चैनल, गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर सिन्धु संस्कृति की झांकी, सिन्धु सभ्यता और संस्कृति का राष्ट्रीय स्मारक तथा चेटीचण्ड पर राष्ट्रीय अवकाश जैसे बिन्दु सम्मिलित हैं।
प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल वाधवाणी ने कहा कि सिन्धुमहाकुम्भ का विशेष आकर्षण गुलाबचन्द मीरचन्दानी केद्वारा हरिसेवा सनातन मन्दिर के सहयोग से तैयार विशाल सिन्धु घाटी सभ्यता व संस्कृति पर आधारित विशाल प्रदर्शनी होगी।
प्रदेश महासचिव महेन्द्र कुमार तीर्थाणाी ने कहा कि बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। अजमेर की घनश्याम भगत एण्ड पार्टी सिन्धी संगीत प्रस्तुत करेगी।
जयपुर संभाग प्रभारी हीरालाल तोलानी ने कहा कि इस अवसर पर प्रान्त प्रचारक दुर्गादास जी सह प्रान्त प्रचारक निम्बाराम, भारतीय सिन्धु सभा के मार्गदर्शक कैलाश चन्द एवं सोमकान्त जी भी उपस्थित रहेंगे। जयपुर के साथ प्रदेश से हजारों की संख्या में  सिन्धुजन सम्मेलन में भाग लैगे।

सैफरॉन की ऑन लाइन नीलामी में मेहता की काली को मिले 26.4 करोड़ रुपये

सैफरॉन की ऑन लाइन नीलामी में मेहता की काली को मिले 26.4 करोड़  रुपये

 गुरुवार 14 जून को हुई सैफरॉन आर्ट की ऑन लाइन नीलामी माइलस्टोन 200 ऑक्षन में तैयब मेहता की पेंटिंग काली को रिकार्ड कीमत 26.4 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। इस बिक्री से तैयब मेहता के नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।
सैफरॉन आर्ट के को फाउण्डर और सीइओ दिनेश वजीरानी ने कहा कि, आधुनिकतावादी तैयब मेहता ने आज सैफरॉन आर्ट के समर ऑनलाइन नीलामी में 26.4 करोड़ रुपये में काली (1989) की बिक्री के साथ एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। यह पेंटिंग मानवीय मन की दुविधा,अच्छाई और बुराई की लड़ाई, सृजन और विनाश को लेकर अंतद्र्वद को दर्शाती है।
वजीरानी ने कहा कि, काली के खरीददार का नाम जाहिर नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसा करना कम्पनी के नियम के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि, मेहता की काली ने आधुनिक भारतीय कला बिक्री में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है और भारतीय कला के लिए ऑनलाइन नीलामी के आगे का रास्ता खोला है।
जीवन का अधिकांश समय मुंबई में बिताने वाले मेहता का दो जुलाई 2009 को दिल का दौरा पडऩे से निधन हो गया। साल 2007 में वह पद्म भूषण से नवाजे गए थे।
नीलामी में अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियां
नीलामी में 85 प्रतिशत लॉट की बिक्री के साथ  75 करोड़ रुपये की राशि हासिल की गई। नीलामी में पांच अन्य कलाकारों - एन एस बेंद्रे, एम वी धुंधंधर, संको चौधरी, शीला मखीजानी और धनंजय सिंह के विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित हुए।
बेंद्रे की 1974 में बनी एक शीर्षकहीन कृति को 1.32 करोड़ रुपये मिले। जबकि इसका शुरुआती अनुमान 40-60 लाख रुपये लगाया गया था। धुरंधर जल रंग चित्रकला- ताराबाई फाउण्डर ऑफ कोल्हापुर कॉन्फीडरसी  जिसे चित्रकार ने 19 27 में चित्रित किया था को 60.98 लाख रुपये की बिक्री राशि प्राप्त हुई जबकि इसका शुरुआती अनुमान 9.9-13.2 लाख रुपये लगाया गया था।
संको चौधरी के कांस्य मूर्तिशिल्प का शुरुआती अनुमान 15-20 लाख रुपये लगाया थ जिसे बिक्री से  39.9 लाख रुपये प्राप्त हुए। और माखीजानी के चित्र व्हाट वेयर यू थिंकिंग (2007) को 14 लाख रुपये में बेचा गया जबकि इसका बिक्री अनुमाने 10-15 लाख रुपये लगाया गया था। धनंजय सिंह की 2013 में निर्मित कृति कृति द लास्ट ट्री  को 25.35 लाख रुपये, के बिक्री अनुमान की तुलना में 37.3 लाख रुपये की प्रप्ति हुई।
इनके साथ ही बिक्री के लॉट में वी एस गायतोंडे, राजा रवि वर्मा, एस एच रजा, मनजीत बावा, अकबर पदमसी और सुबोध गुप्ता जैसे नाम भी शामिल थे।    -गायत्री

शुक्रवार, 15 जून 2018

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन

कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए राजस्थान ललित कला अकादमी और कलाचर्चा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सृजनात्मक कला अभिरुचि कार्यशाला का समापन हुआ। समापन अवसर पर तैयार कृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें वंचित बच्चे नजर नहीं आए।
अकादमी द्वारा जारी ज्ञापन के अनुसार आज 15 जून को इस कार्यशाला का समापन व प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । इस कार्यक्रम में  वरिष्ठ शिक्षाविद व प्रतिष्टित कलाकार डॉ. जय कृष्ण अग्रवाल और राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं ललित कला संकाय राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एस. मेहता मुख्य अतिथि थे। उन्होनेें  कला प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रतिभागियों के कलाकर्म की भूरी भूरी सराहना की। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए। पूर्व में यह शिविर कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए आयोजित किये जाने की बात कही गई थी लेकिन पहले ही दिन से शिविर से कच्ची बस्ती के बच्चेेे वंचित रहे। हालांकि कत्र्ता-धर्ताओं द्वारा शिविर में उन्हें शामिल करने के प्रयास किए जाने की बात कही गई लेकिन वे बच्चे नहीं जुट सके।
प्रदर्शनी सोमवार 18 जून को भी दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।

गुरुवार, 14 जून 2018

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग

जहांगीर के शो में सजेगी चूड़ावाला की पेंटिंग
प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार रणजीत सिंह चूड़ावाला की कृति राजस्थानन ललित कला अकादमी द्वारा जहांगीर आर्ट गैलेरी में लगाए जाने वाले ग्रुप शो में प्रमुखता से प्रदर्शित होगी। यह कृति चूड़ावाला के कला सफर का अन्तिम पड़ाव है। अकादमी की मांग पर चूड़ावाला ने मृत्यु से पूर्व अपनी यह कृति बनाकर अकादमी को भिजवाई थी।
राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलेरी में 26 जून से 2 जुलाई तक एक ग्रुप शो होने जा रहा है। इस शो में प्रदेश के लगीाग 100 वरिष्ठ व युवा कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कला को समर्पित चूड़ावाला जी ने अपनी खराब तबियत की परवाह किये बिना इस शो के लिए कृति चित्रित की। चूड़ावाला जी का जून को निधन हो गया और यह कृति उनके कला सफर का अन्तिम पड़ाव बन गई।
जीवन परिचय

10 मई 1934 को जोधपुर में जन्में रणजीत सिंह चूड़ावाला ने भारत के प्रसिद्ध कला संस्थान जे.जे. स्कृल ऑफ आर्ट से पेंटिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। उनके परिजन बताते हैं कि, अक्षरज्ञाान से पहले ही उन्हें ईश्वरीय तोहफे के रूप में रेखाओं का ज्ञान था। जीवनयापन के लिये भारतीय रेलवे को अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने कला जगत को अपनी कलाकृतियों के रूप में अनमोल धरोहर सौंपी।
कला को समर्पित चूड़ावाला के स्वभाव में प्रकृति की सौम्यता समाहित थी और मानस में कला की तलीनता। प्रकृति को अपनी कूंचि के जरिये कैनवास पर उतारने का उन्हें महारथ हासिल था। अपनी धुन के पक्के और प्रचार-प्रसार से अलग हटकर चलने वाले चूड़ावाला रेखांकन के मामले में दक्ष थे। प्रकृति और समाज के विभिन्न रूपों को अपने चित्रों में जीवन देने वाले इस कलाकार ने लघुशैली चित्रण में भी खासा काम किया। इनकी कृतियों में कन्टेम्पररी, रियलिस्टिक व मिनिएचर का अद्भुत समावेश था। जलरंग व तैलरंग के साथ काली स्याही से उकेरे गए उनके चित्र भावाभिव्यक्ति को सजीव करते हुए देखने वालों को मोहपाश में बांध देते थे। उनके द्वारा चित्रित रघुवंश, ऋतुसंहार व शकुंतला आधारित चित्र रंग संयोजन व रेखांकन के लिए कला विद्यार्थियों की प्रेरणा बनते रहे हैं। कला मेलों में मशीनी गति से हाथोंहाथ रेखाचित्र बनाकर सौंपना उनकी रुचि में शामिल था। कुछ अर्सा पहले मूमल से हुई एक मुलाकात में उन्होंने कला जगत के बदलते परिदृश्य, कलाकारों द्वारा जल्दी से जल्दी सफलता हासिल करने की प्रवृति और संस्थाओं द्वारा बीते जमाने के शिखर चित्रकारों को नजरअंदाज करने की बात को लेकर चिन्ता जताई थी। लेकिन अगले ही पल अपनी कला साधना के सुख को जीवन की प्रधानता स्वीकार करते हुए मुस्करा दिये थे।
जयपुर के राजभवन, जवाहर कला केन्द्र व राजस्थान ललित कला अकादमी के साथ अन्य संग्राहकों के पास संग्रहित उनकी कृतियां राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। कला को समर्पित चूड़ावाला जी के सम्मान में राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा उन्हें  फैलोशिप तथा कलाविद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कई पुरस्कार व सम्मान प्राप्त करने के साथ दो बार स्टेट अवार्ड भी जीते। अभी इसी वर्ष जनवरी में सम्पन्न कला मेले में उन्हें लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।
कला को अपना जीवन मानने वाले चूड़ावाला जी बढ़ती हुई आयु व अस्वस्थता की परवाह किये बिना मृत्यु परन्त अपनी कृतियों में रंग भरकर हमेशा के लिए अमर हो गए।                 -राहुल सेन

कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए लगे कला शिविर का समापन

कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए लगे कला शिविर का समापन
कल 15 जून को कार्यशाला में तैयार कृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन
राजस्थान ललित कला अकादमी व कला चर्चा समूह का प्रयास
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी व कलाचर्चा समूह द्वारा कच्ची बस्ती के वंचित बच्चों के लिए अकादमी परिसर में चल रही दस दिवसीय कला अभिरूचि प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ। स कला अभिरूचि प्रशिक्षण के दौरान पाँच रचनात्मक विधाओं की जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी गई थी। शिविर का समापन समारोह एवं इस दौरान बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी कल 15 जून को आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन अकादमी परिसर में प्रात: 11 बजे वरिष्ठ कलाकार एवं शिक्षाविद् प्रो. सी. एस. मेहता करेंगे।
प्रदर्शनी कल तथा सोमवार 18 जून को दर्शकों के अवलोकनार्थ प्रात: 11 बजे से सांयकाल 6 बजे तक खुली रहेगी ।

अब कलाकारों को मिलेगी आर्थिक मदद

अब कलाकारों को मिलेगी आर्थिक मदद
बीमारी व शोध कार्यो में कलाकार कल्याण कोष से दी जाएगी सहायता
मूमल नेटवर्क, पटना।  बीमारी से ग्रस्त या पैसों के अभाव में आगे बढऩे में असमर्थ कलाकारों को अब बिहार सरकार आर्थिक मदद करेगी। मदद कलाकार कल्याण कोष से की जाएगी। इस सम्बन्ध में कला संस्कृति विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है।
इन परिस्थितियों में मिलेगी सहायता
बीमारी में
प्रस्ताव में सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता को तीन भागों में विभाजित किया गया है। बीमारी, प्रदर्शन कला और चाक्षुष कला। बीमारी को स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि प्रदेश का कोई कलाकार यदि किसी भी तरह की गंभीर बीमारी से ग्रसित है या किसी दुर्घटना में घायल हो गया है और उस कलाकार का ऑपरेशन करना पड़ा है वैसे कलाकार को अस्पताल के बिल अथवा प्रमाणपत्र के आधार पर सहायता अनुदान दिया जाएगा। यदि प्राकृतिक आपदा में कोई कलाकार घायल होता है तो वैसी स्थिति में संबंधित पंचायत के मुखिया और शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षद का प्रमाणपत्र देने पर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता दी जा सकेगी।
प्रदर्शनी के लिए 
प्रदर्शन कला के क्षेत्र में वैसे कलाकारों को सहायता दी जाएगी जो अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर के किसी कार्यक्रम में निश्शुल्क आमंत्रण पर प्रदर्शनी को जा रहे होगे। संबंधित कलाकार को आर्थिक मदद प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ आमंत्रण पत्र संलग्न करना होगा। ठीक इसी प्रकार चाक्षुस कला के क्षेत्र में यदि कोई कलाकार राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में आमंत्रित किए जाते हैं  तो उनके द्वारा दी जाने वाली फीस व प्रदर्शनी की तैयारी पर होने वाले खर्च के लिए सरकारी मदद के प्रावधान किए गए हैं।
शोध कार्य  के लिए
यदि कोई कलाकार मास्टर्स डिग्री, शोध कार्य के लिए एक मुश्त सहायता प्राप्त करना चाहते हैं तो उस कलाकार को शोध एवं अध्ययन से संबंधित कॉलेज के प्रमुख का प्रमाणपत्र और व्यय होने वाली राशि का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं यदि राज्य के किसी कलाकार को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे राष्ट्रीय नाट्य अकादमी, कथक केंद्र, कला केंद्र आदि में नामांकित होने का मौका मिलता है तो संबंधित कलाकार को आर्थिक मदद के लिए संस्थान में नामांकन का प्रमाण देना होगा जिसके आधार पर उसे आर्थिक मदद दी जाएगी।

कला पुरस्कारों के लिए आवेदन 31 जुलाई तक

कला पुरस्कारों  के लिए आवेदन 31 जुलाई तक
मूमल नेटवर्क,पटना। बिहार सरकार एक बार फिर राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर के कलाकारों को कला सम्मान देने की तैयारी कर रही है। राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के कलाकार, कला समीक्षक, इतिहासकार और विद्वान पुरस्कारों के लिए उत्कृष्ट कला मर्मज्ञों के नाम की अनुशंसा कर सकते हैं। कलाकार स्वयं भी अपना नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। कला संस्कृति एवं युवा विभाग में नाम प्रस्तावित करने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई है।
कला संस्कृति एवं युवा विभाग ने पुरस्कारों के लिए तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। विभाग विगत कुछ वर्षों से बिहार कला पुरस्कार सह सम्मान योजना के तहत चाक्षुस, प्रदर्श कला के क्षेत्र में देश और प्रदेश के कलाकारों को सम्मानित करता है। विभाग ने चाक्षुस कला को चार और प्रदर्शन कला को छह भागों में बांटा है। कला पुरस्कार सह सम्मान 2018-19 योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के कलाकार, कला समीक्षक, इतिहासकार और विद्वान पुरस्कारों के लिए बेहतरीन कला ज्ञाताओं के नाम की अनुशंसा कर सकते हैं। कलाकार स्वयं भी अपने नाम का दावा पुरस्कार के लिए कर सकेंगे।
आयु सीमा
नवोदित कलाकारों के लिए विभाग ने 15 से 40 वर्ष की आयु निर्धारित की है जबकि स्थापित वरिष्ठ कलाकार के लिए उम्र सीमा 40 वर्ष से ऊपर निर्धारित की गई है।
पुरस्कार राशि व श्रेणी
कला पुरस्कारों के तहत चयनित कलाकार को पचास हजार से दो लाख रुपये तक की सम्मान राशि और प्रशस्ति पत्र दिए जाते हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक चाक्षुस कला के क्षेत्र में काम करने वाले कलाकारों को आर्ट फोटोग्राफी के लिए राधा मोहन पुरस्कार, समकालीन कला के क्षेत्र में महिला कलाकारों को कुमुद शर्मा पुरस्कार, लोक कला के क्षेत्र में सीता देवी पुरस्कार, लेखन के क्षेत्र में दिनकर पुरस्कार दिया जाएगा।
प्रदर्शर्न कला के क्षेत्र में शास्त्रीय गायन के लिए पं. रामचतुर मलिक पुरस्कार, रंगमंच के लिए भिखारी ठाकुर पुरस्कार, लोक गायन के लिए विंध्यवासिनी देवी पुरस्कार, कला लेखन में रामेश्वर सिंह काश्यप पुरस्कार, वाद्य वादन के लिए बिस्मिल्लाह खां और शास्त्रीय, लोकनृत्य के लिए अम्बपाली पुरस्कार दिए जाते हैं।
इन पुरस्कारों के साथ ही राज्य के दो वरिष्ठ कलाकारों को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी दिया जाता है।