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सोमवार, 10 जून 2019

कार्यशाला का समापन, चित्रकार हुए सम्मानित

कार्यशाला का समापन, चित्रकार हुए सम्मानित
प्रदर्शनी की शोभा बढ़ाएंगी कलाकृतियां
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द द्वारा आयोजित राज भवन चित्रकार  शिविर का कल 10 जून को समापन हुआ। इस अवसर पर प्रतिभागी कलाकारों को राज्यपाल महामहिम राम नाईक ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। शिविर में तैयार कलाकृतियों का प्रदर्शन अकादमी दीर्घा में अभी कुछ देर बाद 11 बजे से किया जाएगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री योगेन्द्र बाबा करेंगे।
कल शाम 5 बजे एक समारोह के साथ राज भवन चित्रकार  शिविर  का समापन हुआ। इस अवसर पर संस्कार भारती  के संस्थापक पद्मश्री बाबा योगेन्द्र एवं शिविर संयोजक गिरीश चन्द्र भी उपस्थित थे। महामहिम राम नाईक ने प्रतिभागी कलाकारो द्वारा सृजित कलाककृतियों का अवलोकन किया। राज्यपाल ने भेंटस्वरूप प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं पुस्तकें प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। इसके साथ ही  पद्मश्री बाबा योगेन्द्र तथा शिविर संयोजक गिरीश चन्द्र ने भी कलाकारों को भेंटस्परूप अंगवस्त्र एवं मिष्ठान प्रदान किए।
शिविर में तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी अकादमी दीर्घा में लगाई गई है, जिसका उद्घाटन आज सुबह 11 बजे पद्मश्री बाबा योगेन्द्र करेंगे। यह प्रदर्शनी 20 जून तक चलेगी।
इन कलाकारों ने लिया शिविर में भाग
 सांगली महाराष्ट्र से मंगेश आंनद राव पाटिल, येओले महाराष्ट्र से नानासाहेब भाउसाहेब, पुणे महाराष्ट्र से मंजिरी महेन्द्र मोरे, पुणे से ही उत्तम रामचन्द्र साठ व सुरभि ग्वालेकर, लखनऊ उत्तर प्रदेश से अमित कुमार व कमलेश्वर शर्मा ने शिविर में भाग लिया। इनके साथ महाराष्ट्र  के मनोजकुमार एम साकल व सत्याजीत वारेकरे, दिल्ली के भारत भूषण शर्मा एवं संयोजक गिरीश चन्द शिविर प्रतिभागी रहे।

बुधवार, 23 जनवरी 2019

कलाएं एवं सौंदर्यबोध पर व्याख्यान सम्पन्न


कलाएं एवं सौंदर्यबोध पर व्याख्यान सम्पन्न
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द में कल 22 जनवरी को जयपुर के डॉ राजेश कुमार व्यास  ने- कलाएँ एवं सौंदर्यबौध विषय पर सोदाहरण व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान में डॉ व्यास ने कलाओं के सौंदर्यबौध पर विस्तृत चर्चा की उनके अनुसार सौंदर्यबौध का अनुसंधान ही कला है। कलाकृति को देखने वाले कि दृष्टि में एक उसका अपना निजी सौंदर्यबौध होता है जिसके माध्यम से वह कला का आस्वादन करता है डॉ व्यास के अनुसार कलाकृति को देखने से मन में जो भाव घटित होता है वही उसका सौंदर्यबौध है और यही सौंदर्यबौध देखने वाले के मन पर ऐसा प्रभाव डालता है कि बार बार उस कलाकृति को देखने का भाव मन में आता है। सौंदर्यबौध ही किसी कलाकृति का प्राण तत्व होता है । डॉ व्यास ने अपने व्याख्यान में रबीन्द्रनाथ टेगोर, जे स्वामीनाथन जैसे दिग्गज कलाकारों कि कृतियों का समावेश किया । इस अवसर पर वरिष्ठ कलाकार प्रो. जय कृष्ण अग्रवाल,  प्रभारी क्षेत्रीय सचिव राजेश कुमार शर्मा, अनेक कलाकार- ममता राभा, हबीब मुसावी , नीलम, प्रेम शंकर, शांतनु शास्त्री एवं स्कालर्स - सारिका, अंकित पंाडेय , पियाली पॉल , जगजीत रॉय आदि उपस्थित थे।

शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

तीन कलाकारों की कला यात्रा पर संवाद

तीन कलाकारों की कला यात्रा पर संवाद
ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द्र में फिल्मों का प्रदर्शन
मूमल नेटवर्क लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द्र में कल शाम भारतीय चित्रकला जगत को प्रभावित करने वाले तीन कलाकारों की कला पर फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। रिगार्डिंग इण्डिया के तहत संवाद पर आधारित फिल्मों में एस. नन्दागोपाल, इन्द्रपरमित रॉय तथा गणेश पाइन के कृतित्व को दर्शाया गया।
एस. नन्दागोपाल
एस. नन्दागोपाल एक समकालीन मूर्तिकार थे इन्होने अपने जीवन काल में कई प्रकार के कला माध्यमों में अपने भावों को प्रस्तुुत किया। भारतीय देवी देवताओ का उनकी शिल्प में प्रभाव दिखता है । इस फिल्म में भारतीय संस्कृति को कलाकार द्वारा व्यक्त करने का प्रयास किया गया है।
इन्द्रपरमित रॉय
इन्द्रपरमित रॉय एक समकालीन जाने माने चित्रकार है जिनका जन्म कोलकाता में हुआ। वह वर्तमान में एम एस विश्वविद्यालय, वदोदरा में कला के प्रोफेसर है। उन्होने इस फिल्म के माध्यम से अपना शिल्प आंदोलन अनुभव व्यक्त किया है।
गणेश पाइन 
गणेश पाइन एक जाने माने भारतीय समकालीन चित्रकार थे। उनका जन्म कोलकाता में 11 जून 1937 को हुआ था । पाइन ने अपने कला जीवन का प्रारम्भ 1960 के दशक में एक पुस्तक के इलेस्ट्रेशन एवं स्केचिंग से किया। उनकी कला पर बंगाल स्कूल का काफी प्रभाव देखा जा सकता है। वह अबनीन्द्रनाथ टैगोर से बहुत प्रभावित थे, जिसका प्रभाव उनकी कलाकृतियों पर साफ  दिखाई देता है। प्रदर्शित फिल्म उनके कला जीवन पर आधारित है।

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

लोगों को लुभा रही है स्कॉलर्स की कृतियां

लोगों को लुभा रही है स्कॉलर्स की कृतियां
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द्र में इन दिनों अकादमी स्कालर्स की प्रदर्शनी लोगों को खासा लुभा रही है। 6 स्कालर्स की कृतियों से सजी इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 24 जुलाई को हुआ। प्रदर्शनी का उद्घाटन भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय की कुलपति श्रुति सडोलीकर काटकर ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
कुलपति श्रुति सडोलीकर काटकर ने कृतियों की सराहना करते हुए कहा कि, कलाकार अपनी विधा के माध्यम अपनी कलात्मक भावनाओं को प्रकट करते है, कला हमारे अंतर्मन के विचारों, संस्कारों एवं उसमें उठने वाले तरह तरह की जिज्ञासाओं को प्रकट करने का एवं मुखरित करने का एक सशक्त माध्यम है। प्रदर्शनी 30 जुलाई तक चलेगी।
इन स्कालर्स की कृतियां हैं प्रदर्शित
ग्राफिक विधा में दिव्या चतुर्वेदी, नेहा जायसवाल व रवि कुमार अग्रहरि तथा चित्रकला में करन सावनानी, रश्मि सिंह एवं विनोद कुमार।

शनिवार, 23 जून 2018

सम्पन्न हुई योग चित्रकला प्रतियोगिता

सम्पन्न हुई योग चित्रकला प्रतियोगिता
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द्र में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पोस्टर एवं चित्रकला की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा 1 से 12 तक के 85 विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आर्ट फॉर हेल्थ नाम की इस प्रतियोगिता को तीन वर्गों में विभाजित किया गया था। पहले वर्ग में कक्षा 1 से 4 तक के बच्चे, दूसरे वर्ग में कक्षा 5 से 8 तक के बच्चे प्रतिभागी बनें तो तीसरे वर्ग में कक्षा 9 से 12 तक के बच्चें ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
यह रहा परिणाम
कक्षा 1 से 4 वर्ग 
प्रथम स्थान- श्रीजी, लारेटो कान्वेट कालेज
द्वितीय स्थान- काव्या मिश्रा, सेंट एग्नेस लारेटो डे स्कूल
तृतीय स्थान- मो. इब्राहिम, सीएमएस लखनऊ
कक्षा 5 से 8 वर्ग 
प्रथम स्थान- अदित सिंह, रेड रोज सीनियर सेकेण्डरी स्क्ूल
द्वितीय स्थान- अर्जुन वीर सिंह, काल्विन तालुकेदार्स
तृतीय स्थान- भव्या नंदिनी, माउंट कारमल कालेज
कक्षा 9 से 12 
प्रथम स्थान- सुहानी चतुर्वेदी, लखनऊ पब्लिक स्कूल सहारा स्टेट
द्वितीय स्थान- ओजस सिंघल, निर्मला कान्वेट इंटर कालेज
तृतीय स्थान- सफीना खान, करामत हुसैन मुस्लिम गल्र्स इंटर कालेज लखनऊ ।
पोस्टर एवं चित्रकला की प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में वरिष्ठ कलाकार शिव बालक एवं भीम सेन सिंह ने पुरस्कार निश्चित किये।
सभी प्रतिभागियों प्रमाण पत्र प्रदान किये गए। 

शुक्रवार, 25 मई 2018

अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष का लखनऊ केन्द्र दौरा


अकादमी के नवनियुक्त अध्यक्ष का लखनऊ केन्द्र दौरा
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द्र में कल 24 मई को नवनियुक्त अध्यक्ष उत्तम पचारणे ने दौरा किया। पदभार ग्रहण करने के बाद अध्यक्ष की यह पहली गतिविधि है। अपने दौरे के दौरान उन्होनें कलाकारों से भी भेंट की।
क्षेत्रीय सचिव प्रभारी राजेश कुमार शर्मा ने पुष्प गुच्छ देकर अध्यक्ष का अभिनंदन किया। इस अवसर पर ललित कला संकाय लखनऊ विश्वविद्यालय के  डीन डॉ रतन कुमार एवं कई वरिष्ठ कलाकार व कला शोधार्थी उपस्थित थे।
पचारणे ने कलाकारो को सम्बोधित करते हुए कहा कि उनकी इस भेंट वार्ता का उद्देश्य कलाकारों सें उनकी समस्याओं तथा आवश्यकताओं के बारे में जानकारी लेना है। कलाकारों की भावनाओं को समझा उनके अनुरूप अकादमी में सृजनात्मक वातावरण का निर्माण किया जा सकेगा। उन्होंने कहा की उनका इस प्रकार का संवाद आगे भी जारी रहेगा एवंम कलाकार स्वयं या क्षेत्रीय सचिव प्रभारी के जरिये केन्द्र के वंाछित सुधार हेतु उनसें पत्राचार कर सकते है।
उल्लेखनीय है कि उत्तम पचारणे जाने-माने मूर्तिकार हैं और 22 मई को तीन वर्ष की अवधि के लिए उन्होंने अकादमी के स्थायी अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया है।

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

नीड ऑफ द हवर -आलटरनेटिव आर्ट स्पेसस

नीड ऑफ  द हवर -आलटरनेटिव आर्ट स्पेसस
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। कल शाम 4 बजे ललित कला अकादमी के अलीगंज स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में नीड ऑफ  द हवॅर -आलटरनेटिव आर्ट स्पेसस विषय पर प्रानामिता बोरगोहेन ने व्याख्यान दिया।
उदाहरण सहित व्याख्यान देते हुए आर्ट क्यूरेटर एव आर्ट क्रिटिक प्रानामिता बोरगोहेन ने वैकल्पिक कला संस्थायो अथवा स्थानों की अवश्यकता पर विशेष रूप से बल दिया। इनका मानना है कि खोज एवं 1शान्तिरोड बैगलुरू जैसी संस्थाएं युवा उदीयमान कलाकारो को प्रयोगात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित करते है ताकि वह कला जगत मे अपना स्थान बना सके।
उन्होंने बताया कि, अमेरिका में इस तरह का प्रयोग वर्ष 1970 में आरम्भ हुआ था। वहा पर फूड एवं द किचन नामक व्यवसायिक संस्थाओ ने अपने स्थान को कला वीथिका मे शमिल किया। इस प्रयोग से नये कलाकारो की कृतियो को जनमानस से जोड गया । हमारे देश मे इस तरह के प्रयोगो के लिए बहुत स्कोप है जैसे की मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट, व्यस्त बाजार जैसे पब्लिक प्लेसेस में कलाकृतियो का निर्माण ना केवल सौन्दर्यबोध में अभिवृद्धि कर सकते है साथ ही कलाकार की सृजनशीलता को भी एक प्लेटफार्म प्रदान कर सकते है । 

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

बहुमाध्यम कलाकार शिविर में शुरु हुई ग्राफिक व पेंटिंग की रचना

बहुमाध्यम कलाकार शिविर में शुरु हुई ग्राफिक व पेंटिंग की रचना
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के  क्षेत्रीय केन्द्र में क्षेत्रीय बहुमाध्यम कलाकार शिविर में कल 19 फरवरी से ग्राफिक एवं पेंटिंग विधा के कलाकारों ने अपनी कृतियों को आकार देना शुरु कर दिया है। क्षेत्रीय केन्द्र के सचिव प्रभारी राजेश कुमार शर्मा ने पुष्प गुच्छ देकर सभी कलाकारों का अभिनन्दन किया।
उल्लेखनीय है कि इस शिविर में 18 कलाकार प्रतिभागी हैं। मूर्तिकला एवं सिरेमिक विधा के कलाकार 116 फरवरी से अपनी कृतियों को आकार दे रहे हैं।फरवरी तक अपनी रचना करेंगें जबकि 19 से 25 फरवरी,तक ग्राफिक एवं पेंटिंग विधा के कलाकार अपनी कृतियों को आकार देंगे।

यह हैं प्रतिभागी कलाकार
दिनेश सोनकर, मऊ
राम मिलन सिंह, मऊ
अभिषेक शर्मा, मऊ
बलदाऊ जी वर्मा, मऊ
त्रिभुवन कुमार, मऊ
रोकेश कुमार सिंह, उदयपुर
संदीप कुमार मेघवाल, उदयपुर
मयंक शर्मा, उदयपुर
मो. तलहा वाहिद, बरोडा
क्रुनाल कहार, बरोडा
मंजीत सिंह वर्मा, लखनऊ
नीलम कुमारी, लखनऊ
मैत्री विजय छेदा, महाराष्ट्र
अनस सुल्तान, मेरठ
कृष्णा फूलवाला, वडोदरा
प्रवीन सुरेश हाथवर, वडोदरा
अजीत कुमार मौर्या, जौनपुर
श्रद्धा तिवारी, कानपुर

सोमवार, 19 फ़रवरी 2018

पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर का आज हुआ समापन

पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर का आज हुआ समापन
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के अलीगंज स्थित क्षेत्रीय केन्द्र में चल रहे पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर  का आज शाम 4 बजे समापन हुआ। समापन पर शिविर में रचित कृतियों को प्रदर्शित किया गया। शिविर में भाग ले रहे 10 कलाकारों ने अपने मनोभावों को कृतियों के रूप में जीवन्त किया है।
मणिपुर के कलाकार अथोकपम कुबेर सिंह ने नेचर शीर्षक से कृति की रचना की है। अपनी कृति में उन्होंने ब्रह्यण्ड में प्रकृति के बीच निरंतर चलते द्वंद को दर्शाया है जिसे महसूस किए बिना मानव अपनी लालसा मे पड़कर प्रकृतिक सुंदरता को बेरहमी से नष्ट कर देता है।
गोवाहाटी असम की रिकूं चक्रबती ने ब्यूटी आफ  असम नामक कलाकृति की रचना की है। रिंकू असम के प्राकृतिक सौन्दर्य से बहुत प्रभावित है इसलिए प्राकृतिक सुन्दरता को अपना विषय बनाया है ।

एच लक्ष्मी इस शिविर में हिससा लेने के लिए मणिपुर से आई हैं। इन्होंने अपनी अनटाईटिल्ड पेंटिंग में जीवन के दुख सुख को व्यक्त करने की कोशिश की है। लक्ष्मी का कहना है कि हर व्यक्ति के जीवन में सुख और दुख दोनो होते है पर जीवन को जीने के लिए हमें खुश रहना होता है और अपनी उदासीनता को ढकना होता है।
मणिपुरकी ही पूर्णिमा नानगॉव का मानना है कि बचपन से ही हम अपने माता पिता की विचारधाराओं पर जीवन व्यतीत करते है पर जब हम किशोरावस्था पर पहुँचते है तो जीवन को अपने नजरिए सेे व्यतीत करते है। इन्हीं विचारों का चित्रण उन्होंने अपनी पेंटिंग रिब्यूक में किया है ।
पूर्वोत्तर के दीपेन्दु बाउल ने फिलहाल मुम्बई को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना है। लखनऊ कलाकार के जेहन में बसता है। इस शहर के बारे में जो कुछ दीपेन्दु ने फिल्मों में देखा और सुना उन्हीं स्मृतियों को अपनी कृति मुजरा के जरिये चित्रित किया है।
वाश शैली में पारंगत उत्तर प्रदेश के चित्रकार राजेन्द्र प्रसाद ने इसी शैली में अपनी कृति आवाहन की रचना की है।
कर्नाटक से आए आर्टिस्ट शकंर वी कड़ाकुन्टला  ने अपनी कलाकृृति में कर्नाटक की समाजिक परंपराओ और त्यौहारों का चित्रण किया है। अपनी कृति को उन्होने टाईगर नाम दिया है। कृति मेेंं कलाकार ने यह दर्शाया है कि कर्नाटक में मौहर्रम के अवसर पर हिन्दू धर्मावलम्बी जुलुस मे शिरकत करते है एवं अपने शरीर पर विभिन्न प्रकार के रंग लगाते है। इस परम्परा से हिन्दू मुस्लिम एकता के भाव जाहिर होते हैं जो कलाकार के अन्तरमन को प्रभावित करते हैं।
प्रमोद आर्या चंडीगढ़ से हंै। उन्होनें अपनी कलाकृति माइन्डस्केप में लखनऊ के सुहावने मौसम, गोमती तटबन्ध और यहाँ के जीवन व पुरातन इमारतो से प्रभावित होकर सफेद पत्थरो से निर्मित इमारतों की कल्पना करते हुए तत्कालीन सभ्यता को दर्शाया है
अर्चना यादव भोपाल से आई हैं। इन्होंने व्यक्ति की बौ़िद्धक स्वतंत्रता के असीमित होने एवं सीमाओं से परे होने का चित्रण अपनी अनटाईटिल्ड कृति में किया है।
बैलून गर्ल शीर्षक की कृति कर्नाटक के विठ्ठल रेड्डी चुलाकी ने की है।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

लखनऊ में बहुमाध्यम कलाकार शिविर


लखनऊ में बहुमाध्यम कलाकार शिविर
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के  क्षेत्रीय केन्द्र में क्षेत्रीय बहुमाध्यम कलाकार शिविर चल रहा है। 16 फरवरी से शुरु हुए इस शिविर में  मूर्तिकला, सिरेमिक, ग्राफिक एवं चित्रकला विधा में कलाकार अपनी-अपनी रचनाओं को साकार कर रहे हैं।
प्रत्येक विद्वाा में 5-5 कलाकार भाग ले रहे हैं। इन बीस कलाकारों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात के कलाकार शामिल हैं। मूर्तिकला एवं सिरेमिक विधा के कलाकार 10 दिन 16 से 25 फरवरी तक अपनी रचना करेंगें जबकि 19 से 25 फरवरी,तक ग्राफिक एवं पेंटिंग विधा के कलाकार अपनी कृतियों को आकार देंगे।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

राष्ट्रीय पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर में सात राज्यों के आर्टिस्ट

राष्ट्रीय पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर में सात राज्यों के आर्टिस्ट 

मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द्र में कल 13 फरवरी से पूर्वोत्तर चित्रकार शिविर का शुभारम्भ हो गया है। कैम्प में सात राज्यों के आर्टिस्ट भाग ले रहे हैं। कैम्प में शामिल दस आर्टिस्ट्स में से चार कलाकार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से हैं एवं 6 कलाकार देश के अन्य राज्यों से हंैै। पूर्वोत्तर राज्यों की कला एवं कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस शिविर का आयोजन किया गया है। इस शिविर का समापन 19 फरवरी को होगा।

शिविर में शामिल कलाकार 
अथोकपम कुबेर सिंह, मणिपुर
रिकूं चक्रबर्ती, असम
के एच लक्ष्मी, असम
पुरनीमा नानगॉव, असम
दीपेन्दु बाउल, मुम्बई
राजेन्द्र प्रसाद, उत्तर प्रदेश
शकंर वी कड़ाकुन्टला, कर्नाटक
विट्रटल रेड्डी एफ चालुकी, कर्नाटक
प्रमोद आर्या, चंडीगढ़
अर्चना यादव, भोपाल

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

कलाकारों का चिंतन मनन कला की भाषा में-गौड

कलाकारों का चिंतन मनन कला की भाषा में-गौड
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केन्द्र में  राजभाषा हिंदी के उत्तरोत्तर विकास हेतु कल एक फरवरी को कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए राजभाषा, संस्कृति मंत्रालय के निदेशक वेद प्रकाश गौड ने कहा कि, यद्यपि कला की कोई भाषा नहीं होती फिर भी कलाकार अपना चिंतन-मनन तो अपनी भाषा में करते हैं और हिंदी भारत की मिट्टी की भाषा है संस्कृति की धरोहर तथा विश्व में हमारी पहचान है। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार हिंदी हमारी राजभाषा तो है ही और भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में हिंदी का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अत: हमें सरकारी कार्य में ही नहीं अपतिु जन मानस के साथ हिंदी में ही व्यवहार करना चाहिए, जिससे हम अपने सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रख सकें।
प्रभारी क्षेत्रीय सचिव राजेश कुमार शर्मा ने आश्वासन दिया कि हिंदी में कार्य किये जाने को और बल प्रदान किया जायेगा।
इस अवसर पर अनेक कलाकार, कलाप्रेमी एवं कला छात्र उपस्थित थे।

बुधवार, 24 जनवरी 2018

महान मूर्तिकार डेविड नैश पर बनी फिल्म का हुआ प्रदर्शन


महान मूर्तिकार डेविड नैश पर बनी फिल्म का हुआ प्रदर्शन
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। महान मूर्तिकार व कला गुरु डेविड नैश अपने जीवनकाल के 40 वर्षों में 2000 से अधिक मूर्तियों की रचना की। बड़े आकार की मूर्तियां बनाने वाले नैश ने अपनी कलाकृतियों में एक अद्रभुत अंर्त दृष्टि का परिचय दिया है। नैश अपनी कृतियों में सामग्री के रूप में वृक्षो के तने इत्यिादि का प्रयोग करते थे जो कृति और प्रकृति के आपसी तालमेंल को दर्शाता है।

इसी महान मूर्तिकार पर बनी लगभग 59 मिनट की डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन कल शाम 4 बजे अलीगंज स्थित ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द्र की वीथिका में किया गया।
इस फिल्म का निर्माण बीबीसी नेे किया है। फिल्म में नैश की कला यात्रा जो कि कला स्कूल से प्रारम्भ होकर ब्रिटिन
के नार्थ वेल्स, यार्कशायर तक को दिखाया गया है। उनके द्वारा बनाये मूर्ति शिल्प की प्रदर्शनी भी फिल्म का हिस्सा है जो कलाकार की जिंदगी का अहम भाग है
इस अवसर पर अनेक कलाकार, कलाप्रेमी एवं कला छात्र उपस्थित थे।

रविवार, 7 जनवरी 2018

अपने कलाकर्म की डायरी भी लिखे- कोमल पाण्डे

अपने कलाकर्म की डायरी भी लिखे- कोमल पाण्डे
मूमल नेटवर्क, लखनऊ। ललित कला अकादेमी क्षेत्रीय केन्द, अलीगंज, लखनऊ में 5 जनवरी को राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली की सहायक क्यूरेटर कोमल पाण्डे ने-इन बिटविन आर्ट एण्ड लाइफ-मैपिंग इमेजिनेशन्स ण्एड एसप्रेशन्स विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कोमल पाण्डे ने अपने व्याख्यान में आज के दौर में कलाकारों द्वारा कलाकृतियों पर काम करने के साथ साथ इस बात पर जोर दिया कि वे अपने कलाकर्म की डायरी भी लिखे साथ ही पत्राचार के माध्यम से अथवा साक्षात्कार के माध्यम से अपने उन बातों को सामने रखे जिनसे यह पता लगाया जा सके कि कलाकार का जीवन, उसका संघर्ष और ऐसे घटक जो उसकी कला पर प्रभाव डालते हैं।
अपनी बात को मजबूत करते हुए कोमल पाण्डे ने मुख्य रुप से तीन बिन्दुओं को रेखांकित किया जिनमें शामिल हैं- कलाकारों की डायरी, कलाकारों के पत्र एवं उनके साक्षात्कार आदि जिसमें उल्लेखनीय हैं, वैनलॉग द्वारा अपने भाई थियो को लिखे पत्र, नसरीन मोहम्मदी के पत्र एवं अमृता शेरगिल द्वारा नेहरु को लिख्े पत्र एवं उनके जवाब में नेहरु जी ने अमृता शेरगिल को जो पत्र लिखें उनकी विषयवस्तु जो आज प्रलेखीकृत है, के द्वारा हमें उस समय कला का एवं कलाकार की सोच का पता चलता है साथ ही उनकी कल्पनाओं और उद्गारों से हम जुड़ते हैं। आज के समय में पत्रलेखन का चलन कम हो गया है, लेकिन अगर हम इतिहास पर नजर डाले तो महान व्यक्तियों द्वारा लिख्ð गये पत्र आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं, उस काल खण्ड के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं एवं एक दस्तावेज के रुप में आज भी हमारे सामने है।