बुधवार, 20 अप्रैल 2016

Rajasthan Lalit Kala Akadami KalaMela

आखिर पूरी तरह टल गया कला मेला
12 लाख रुपए लेप्स
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राजस्थान ललित कला अकादमी द्वारा वित्तीय वर्ष 2015-16 में आयोजित होने वाला कला आयोजित नहीं किया जा सका और इस आयोजन के लिए मिले 12 लाख रुपए लेप्स हो गए। अकादमी के अधिकारी कला मेला आयोजित नहीं कर पाने का कोई ठोस कारण बता पाने कि स्थिति में भी नहीं हैं।
राजस्थान ललित कला अकादमी की सचिव सोविला माथुर ने 'मूमल' को बताया कि इस वर्ष जनवरी में कला मेला प्रस्तावित था, लेकिन गणतंत्र दिवस के लिए झांकी के कार्य की व्यवस्तता के चलते संभव नहीं हो पाया। फरवरी- मार्च में जेकेके में स्थान उपलब्ध नहीं हो पाया। बाहर किसी निजी स्वामित्व वाले स्थान पर आयोजन करने लायक फंड नहीं था। मार्च के बाद मई में जेकेके में स्थान उपलब्ध हुआ, लेकिन वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त हो जाने के कारण राशि खर्च करने की अनुमति नहीं दी जिससे 2015-16 में होने वाले कला मेले की राशि लगभग 12 लाख रुपए लेप्स हो गई। इस वर्ष 2016-17 का कलामेला सितम्बर-अक्टूबर में करने की योजना है।
 
ये रही पूरी दास्तान 
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों से फरवरी-मार्च में आयोजित होने वाले कला मेले के 19वें एडीशन को अकादमी द्वारा नवंबर में करने का प्रस्ताव पारीत किया गया था तो पूरे कला जगत में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी। इस प्रस्ताव के बाद कोई ना कोई कारण बताते हुए अकादमी इसका आयोजन टालती रही और आयोजन के लिए निर्धारित फरवरी-मार्च भी बीत गया। अकादमी द्वारा मार्च में छात्र कला प्रदर्शनी के आयोजन की मजबूरी बताई गई तो अपे्रल में जवाहर कला केन्द्र में स्थान उपलब्ध ना हो पाने का कारण। प्रदेश में प्रतिवर्ष मई में होने वाली गर्मी की तपन सेे अनजान अकादमी के अधिकारियों द्वारा जवाहर कला केन्द्र से स्थान उपलब्ध करवाने के लिए पत्र-व्यवहार की खानापूर्ति जारी रही। जवाहर कला केन्द्र की ओर से मई में अकादमी की पसंद व सुविधा का कोई भी समय उपलब्ध करवाने की स्वीकृति दी गई। अब मई की गर्मी को कारण बताते हुए कलामेला नहीं कर पाने को कारण बताया गया। 
युवा कलाकारों के साथ कला प्रेमियों को पूरे राजस्थान कीे कला के बहुत बड़े प्रदर्शन से वंचित होना पड़ा। कला मेले का हिस्सा बनने के लिए प्रदेश भर के कलाकार कई महीनों पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। कला खरीददार भी उचित मूल्य पर युवा कूचिंयों की नवीनता को क्रय करने के लिए बेसब्री से कला मेले की प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन अकादमी द्वारा बीते वर्ष 2015 के नवंबर माह में प्रस्तावित कला मेला आगामी महीनों के लिए टलते-टलते आखिरकार अधिकारियों की कोताही का शिकार हो गया।
एक ओर कला आयोजनों के लिए हमेशा पर्याप्त कोष नहीं होने के शोक पर कृत्रिम विलाप, दूसरी ओर कला मेले के कोष को लेप्स करा के सरकार को वापिस लौटाने की कार्रवाई। यह अकादमी कला और कलाकारों के प्रति प्रतिबद्धता का एक और दुर्भाग्यपूर्ण उदाहरण है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रदेश का कला जगत कई वर्षों तक कला मेला रद्द किए जाने का दंश झेल चुका है। वर्ष 2004 में आयोजित बारहवें कला मेले के बाद पूरे 6 वर्षों तक अकादमी ने कला मेले का आयोजन नहीं किया था। वर्ष 2010 में 13वें कला मेले के आयोजन के साथ फिर इसकी शुरुआत हुई और पांच साल लगातार आयोजित होने के बाद अब इस बार कला मेले नहीं हो सका। कला मेले को रद्द कर प्रदेश के कलाकारों को निराश करने का कारण अकादमी के पास पहले भी नहीं था और अब भी नहीं है।
अब नए उत्साह के साथ नए-नए कोर्स
गर्मी की को एक कारण बताते हुर्सए वार्षिक कला मेले आयोजित नहीं कर पाई राजस्थान ललित कला अकादमी अब नए उत्साह के साथ इसी गर्मी में अन्य आयोजन करने में जुटी है। मई में ही कला विशेष की जानकारी देने के लिए स्पेशल कोर्स आरम्भ किए जा रहे है। अब यह उम्मीद तो की ही जा सकती है कि मई की गर्मी के बदलते हुए नए अर्थ कम से कम अपनों के हित में तो ठंडी बयार बहा सकेंगे।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

IAS उमरावमल सालोदिया का धर्म परिवर्तन

जाते हुए साल के आखिरी दिन में अचानक 
उमरावमल सालोदिया खबर बन गए।

दलित IAS ने कबूला इस्लाम, कहा- हिंदू होने के कारण हुआ भेदभाव

मूमल नेटवर्क, जयपुर।   
...और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उमराव सालोदिया एकाएक उमराव खान हो गए। उन्होंनेे धर्म परिवर्तन कर लिया। इसके साथ ही स्वैच्छिक सेवा निवृति के लिए सरकार को पत्र सौंप दिया। क्या था यह सब कुछ सरकार के प्रति नाराजगी की हद, एक कलाकार के दुख की अति या फिर एक आम आदमी का अवसाद।
चीफ सैकेट्री पद के प्रबल दावेदार, लेकिन सरकार की गुड बुक में नहीं होने के कारण वो इस पद की पहुंच से दूर...रिटायरमेंट से मात्र 6 महीने दूर...अभी क्या फर्क पड़ता है, रिटायर तो इसी स्केल से होना है फिर जाते-जाते धमाका क्यों नहीं? 
एक प्रशासनिक अधिकारी सरकार के समक्ष भले ही बेबस हो पर एक आम आदमी को मुखर होने से रोकना किसी के वश की बात नहीं... यह कैसा धमाका कि आज तक आमजन को सालोदिया जी की जाति का पता नही था, आज हर जुबान पर जाति चर्चा बन गई। कलाकार के रूप में या एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में आमजन से उन्हें पर्याप्त सम्मान मिला। हां साथी अधिकारियों ने कुछ दूरियां बनाई हो यह अलग बात है। परिणामस्वरूप बरसों से दबे आक्रोश ने धर्म परिवर्तन करवा दिया। क्या अपने अवसाद के चलते कई जगहों सेे बढ़ते हुए दोस्ती के हाथों को नकार अपने आप में सिमटना सालोदिया जी का खुद का निर्णय नहीं था? फिर दोषी कौन?
बात यदि पद स्थापन की करें तो कला संस्कृति विभाग हर उस अधिकारी को सरकार द्वारा दिए गए बेहतर सबक बन जाता है जो सरकार की नजर की किरकिरी बनता है। कलाकार वर्ग जिसे अपने हितों को साधने से ही फुर्सत नहीं, वो भला किसी के आने से खुश और किसी के जाने से दुख क्योंकर मनाए। लेकिन, पद कला-संस्कृति विभाग का हो और अधिकारी कलाकार हो तो यह पद उसका बड़ा पनाहगार बन जाता है। स्थिति तब बिगड़ती है जब सरकारी रवैया उससे उनकी यह पनाह भी छीन लेता है। और यही हुआ उमरावमल सालोदिया अब खान के साथ। हालांकि भारतीय संविधान के अनुसार धर्म परिवर्तन उनकी व्यक्तिगत सोच और अधिकार है। भारत में सभी धर्मों, समुदायों का सम्मान होता है, लेकिन धर्म परिवर्तन...क्या पलायन की निशानी नहीं? क्या अपने नए धर्म के साथ वो सहज जीवन जी पाऐंगे  ...क्या वो स्वयं को समझा पाऐंगे जब गुब्बार गुजर चुका होगा और स्थितियां सामान्य हो चुकी होंगी।
यह तो थी भावनात्मक बात और बात करें बौद्धिक स्तर की तो इस पूरे बखेड़े के पीछे कुछ राज छुपे नजर आते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान कुछ आपराधिक काण्डों में फंसे सालोदिया की गिरफ्तारी होते-होते बची है यह सबको विदित है। सरकार से जंग जीती नहीं जा सकती, रैगर समाज से इस मामले में पर्याप्त साथ मिलना नहीं, लेकिन मुस्लिम समाज इस नए सदस्य का साथ दे सकता है अगर इस समाज के कुछ दबंग इन्हें दोयम दर्जे की हैसियत से ना देखें। 
जानकार तो यह भी कहते हैं कि क्या उमराव जी को किसी राजनैतिक पार्टी की तरफ से राजनैतिक पद का प्रलोभन तो नहीं मिल गया है? तो जाति को प्रमाणित करने की और स्वयं को निरीह सिद्ध कर आम की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए प्रेस कान्फे्रंस ही कर डाली।  इससे ज्यादा प्रभावी तरीका कोई हो ही नहीं सकता। इन सब से उपजी सहानुभूति समय रहते काम आ सकती है। धर्म का क्या है आज अवसाद के चलते खान बन गए कल ह्रदय परिवर्तन हो जाएगा तो फिर सालोदिया हो जाएंगे। क्या बिगड़ेगा? कुछ भी तो नहीं भारतीय समाज को जिसमें सभी वर्ग जाति व समुदाय शामिल हैं भूलने की अच्छी आदत जो है। खैर समय बताएगा कि साल की इस अन्तिम खबर की वास्तविकता क्या है?

 राजस्थान के सीनियर आईएएस उमराव सालोदिया ने इस्लाम कबूल करते हुए नाम बदलकर उमराव खान रख लिया है। सालोदिया ने सर्विस पूरी होने से 6 महीने पहले ही रिटायरमेंट भी ले लिया है। उन्होंने सीएम वसुंधरा राजे को लेटर लिखा है। इसमें चीफ सेक्रेटरी नहीं बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है।
सालोदिया ने क्यों बदला मजहब? क्या बताई इसकी वजह...
- गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सालोदिया ने कहा, "मेरे साथ हिंदू धर्म में भेदभाव हुआ है। मुझे चीफ सेक्रेटरी नहीं बनाया 
गया।"
- "दलित होने की वजह से मेरे साथ अत्याचार किए गए। इस्लाम में ऐसा नहीं होता है।"
सालोदिया ने धर्म बदलने को लेकर चिट्ठी में क्या लिखा है...
- "भारत के संविधान में आर्टिकल 25 (1) में नागरिकों को यह आजादी दी गई है कि वे किसी भी धर्म में अपनी आस्था 
जाहिर कर सकते है।"
- "मैं इसी हक के तहत आज 31 दिसंबर, 2015 को हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना रहा हूं।"
सीएम वसुंधरा राजे को लिखी चिट्ठी में सालोदिया ने क्या कहा?
- "मैं एससी/एसटी कोटा से आईएएस हूं, जिसे सीनियरिटी की बुनियाद पर चीफ सेक्रेटरी बनाया जाना चाहिए था।"
- "लेकिन मौजूदा चीफ सेक्रेटरी सी.एस. राजन को 31 मार्च, 2016 तक 3 महीने का एक्सटेंशन दिया गया है।"
- "राजन को दिए गए एक्सटेंशन के कारण मुझे सीएस बनने का मौका नहीं मिला।"
- "अगर एक्सटेंशन नहीं दिया जाता तो सीनियरिटी के हिसाब से मुझे ही सीएस बनाया जाता।"
- "यह सब राज्य सरकार के कहने पर हुआ है। इन सब बातों के चलते मैं वीआरएस के लिए सरकार से गुजारिश करता हूं।"
आरोपों पर सरकार का क्या है रिएक्शन?
- राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा, "चीफ सेक्रेटरी राजन को तीन महीने का एक्सटेंशन रूल्स के तहत 
दिया गया है।"
- "राजन सीनियर आईएएस हैं। कई पोस्ट पर रहते हुए उन्होंने अपनी काबिलियत दिखाई है।"
- "सालोदिया की सर्विस केवल 6 महीने बाकी थी। अगर वे 31 मार्च तक इंतजार करते तो शायद उनके लिए रास्ते खुले होते।"
- "इतने सीनियर होते हुए भी सालोदिया ने इस तरह के आरोप लगाए हैं, यह बेहद शर्मनाक है।"
- "धर्म बदलना उनका निजी मामला हो सकता है, लेकिन मैं ऐसे आरोपों की निंदा करता हूं।"
'सालोदिया को यह शोभा नहीं देता'
- कटारिया के मुताबिक, सालोदिया जैसे पढ़े-लिखे आदमी को यह शोभा नहीं देता है। ड‌्यूटी में 6 महीने ही बचे हैं, ऐसे में यह फैसला ठीक नहीं है।
सालोदिया पर चल रहा है करप्शन का केस
- सूत्रों के मुताबिक उमराव सालोदिया 2013 में रेवेन्यू बोर्ड के चेयरमैन बने। उस दौरान ही उनके खिलाफ एसीबी में आईएएस (अब रिटायर) नानगराम शर्मा ने मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि उमराव सालोदिया ने बटुउद्दीन नाम के शख्स को जमीन के एक मामले में फेवर किया था।
।"
- बताया जा रहा है कि इस मामले के और आगे बढ़ने के दौरान सालोदिया ने खुद को इससे बचाने का मन बना लिया। सालोदिया ने जयपुर के गांधी नगर थाने में नानगराम के खिलाफ 24 मई, 2014 को एफआईआर दर्ज करा दी।
- इसमें आरोप लगाया कि नानगराम चूंकि उस समय के चीफ सेक्रेटरी सलाउद्दीन अहमद का खास है, इसलिए वह उन्हें परेशान कर रहा है।




- एफआईआर के मुताबिक सलाउद्दीन अहमद पर आरोप है कि उन्होंने पोस्ट का गलत इस्तेमाल करते हुए नानगराम को 




सुपरटाइम स्केल की लिस्ट में शामिल करा दिया। इसका उमराव ने विरोध भी किया था, लेकिन कथित तौर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई।
- आरोप लगाया कि नानगराम इसके बाद से ही लगातार उमराव को दलित होने को लेकर प्रताड़ित करता रहा।

रिटायर होने से 6 महीने पहले ही ऐसा क्यों किया ?
- सालोदिया के नजदीक रहे अफसरों के मुताबिक सालोदिया को डर था कि कहीं रिटायर होने से पहले छह महीनों में ही एसीबी वाला मामला आगे बढ़ गया तो उनका रिटायरमेंट फंस सकता है।

- नजदीकियों के मुताबिक सालोदिया ने सोचा कि कोई बड़ा मामला बने, इससे पहले ही कोई ऐसा मुद्दा बना दिया जाए, ताकि मामला हाई प्रोफाइल ड्रामा बन जाए और सरकार दबाव में आ जाए।
- सालोदिया मान कर चल रहे थे कि यदि वे मीडिया में हाइलाइट कर दें तो सरकार उनके रिटायरमेंट पर किसी तरह का रोड़ा नहीं अटका सकेगी। अगर कोई बात हुई भी तो वे मीडिया में जाकर कह सकेंगे कि उन्होंने आरोप लगाए तो सरकार ऐसा कर रही है।
मुस्लिम धर्म ही क्यों अपनाया?
- नजदीकी अफसरों का यह भी कहना है कि मौजूदा समय में सरकार भाजपा की है। केंद्र में भी और राज्य में भी।
- ऐसे में यदि मुस्लिम पर कोई दिक्कत आएगी तो कहा जा सकेगा कि हिंदूवादी सरकार है, इसलिए मुस्लिम के खिलाफ जबरन मामला बना रही है। 
क्यों नहीं बनाया सीएस?
- सूत्रों के मुताबिक, सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। सालोदिया के खिलाफ एसीबी में केस चल रहा है।
- अगर उन्हें सीएस बनाया जाता तो यह बात उछल सकती थी कि जिसके खिलाफ मामला चल रहा हो, उसे सीएस बना दिया।
- सरकार आरोपों के घेरे में आ सकती थी। इसके साथ ही अगर एसीबी सालोदिया के सीएस रहते मामले को खोल देती और आरोप साबित होने के साथ उन्हें गिरफ्तार कर लेती तो इसमें सरकार की जबरदस्त किरकिरी हो सकती थी।
आलोक खण्डेलवाल (भास्कर ) से साभार 
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कौन हैं उमराव सालोदिया?
- 1978 बैच के आईएएस सालोदिया जयपुर के ही रहने वाले हैं।
- वे राजस्थान रोडवेज के चेयरमैन हैं। 






- इससे पहले वे जवाहर कला केंद्र के डायरेक्टर के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट में भी एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रहे हैं।


शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

Moomal December-2 2015 Issue.

सुधि पाठक,
आपके सम्मुख 'मूमल' का December-2 (2015) अंक  है. 
यदि आप इसके नियमित सदस्य पाठक हैं तो इसकी पीडीएफ कॉपी आपकी ईमेल पर भी है. मूमल पत्रिका की मुद्रित प्रति (हार्ड कॉपी) आपके दिए पते पर 19 December 20015 कों यह डाक से भेजी जा रही है, पोस्टमैन को सतर्क करे. 
सहयोग के लिए धन्यवाद।








शुक्रवार, 4 दिसंबर 2015

Moomal Dec-1 (2015) Issue

सुधि पाठक,
आपके सम्मुख 'मूमल' का December-1 (2015) अंक  है. 
यदि आप इसके नियमित सदस्य पाठक हैं तो इसकी पीडीएफ कॉपी आपकी ईमेल पर भी है. मूमल पत्रिका की मुद्रित प्रति (हार्ड कॉपी) आपके दिए पते पर 4 December 20015 कों यह डाक से भेजी गई है, पोस्टमैन को सतर्क करे. 
सहयोग के लिए धन्यवाद।









गुरुवार, 19 नवंबर 2015

Moomal November-2 (2015)

सुधि पाठक,
आपके सम्मुख 'मूमल' का November-2 (2015) अंक  है. 
यदि आप इसके नियमित सदस्य पाठक हैं तो इसकी पीडीएफ कॉपी आपकी ईमेल पर भी है. मूमल पत्रिका की मुद्रित प्रति (हार्ड कॉपी) आपके दिए पते पर 19  तारीख कों यह डाक से भेजी गई है, पोस्टमैन को सतर्क करे. 
सहयोग के लिए धन्यवाद।








मंगलवार, 1 सितंबर 2015

JKK Jaipur अब कोई कलाकार संभालेगा जेकेके की कमान


अब कोई कलाकार संभालेगा जेकेके की कमान
मूमल नेटवर्क, जयपुर।
आखिर जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के सर्वोच्च पद पर व्यूरोकेट्स की जगह अब कला जगत के जानकार की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए उपयुक्त व्यक्ति की तलाश की जा रही है।
जवाहर कला केन्द्र के महा निदेशक पद पर कला जगत के पारंगत व्यक्ति को नियुक्त किए जाने के लिए उसकी योग्यता और आर्हताएं निर्धारित की गई हैं। इसके तहत केन्द्र का महानिदेशक 35 से 60 वर्ष के आयु वर्ग का होगा। किसी भी विषय मेेंं स्नात्कोत्तर होगा। इसके साथ ही उसके पास आर्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र की कोई डिग्री, डिप्लोमा भी होना चाहिए। उसे विज्युअल और परफार्मिंग आर्ट के क्षेत्र में परम्परागत व समसामयिक कलाओं की उत्तम जानकारी होने के साथ किसी एक या अधिक विषय में पारंगत होना चाहिए। उसे कला जगत के विश्व परिदृश्य पर हो रही गतिविधियों की और कला क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं के कार्यकलापों की जानकारियां अपडेट होनी चाहिए।
महानिदेशक पद के लिए व्यक्ति को प्रशासनिक कुशलता और ठोस नेतृत्व क्षमता वाला भी होना चाहिए। इसके लिए उसे जेकेकेे जैसे किसी कला संस्थान के संचालन का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। रचनात्मकता और नवीनता के साथ योजनाएं बनाने, व्यवस्थापन और उनके क्रियान्वयन करने की संस्थागत दक्षता होनी चाहिए। इसी के साथ वित्तिय योजनाएं बनाने और उनकों अमल में लाने की सूझबूझ होनी चाहिए। 
इन सब के साथ उसमें अपनी बात सर्व साधारण तक संप्रेषित करने और करीब 20-25 कर्मचारियों की टीम को संभालने योग्य स्ट्रांग लीडरशिप होना लाजमी है।
अगर आपमें यह योग्यताएं हैं तो अगली 21 सितम्बर तक जेकेके मेें अपने योग्यता प्रमाण पत्रों के साथ उन्हीं महानिदेशक से मिलिए भविष्य में जिनके स्थान पर आप को यह पद संभालना है। अगर यह आपको सूट नहीं करता हो तो ऐसी सभी योग्यताओं वाले किसी व्यक्ति को इस पद हेतु प्रेरित कीजिए।

मंगलवार, 25 अगस्त 2015

​जयपुर में 28 से पूर्वोत्तर राष्ट्रीय रंगोत्सव

जयपुर में 28 से पूर्वोत्तर राष्ट्रीय रंगोत्सव
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से पूर्वोत्तर रंगोत्सव के तहत जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में 28 अगस्त से 1 सितम्बर तक उत्तर पूर्व क्षेत्र की बेहतरीन नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
जवाहर कला केन्द्र, जयपुर के सहयोग से होने वाले इस आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए रानावि के प्रो. सुरेश भारद्वाज ने बताया कि इस समारोह में कुल पांच नाटक प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें दो मणिपुर से, दो असम से और एक सिक्किम से होगा। जयपुर से पहले यही नाटक दिल्ली और अमृतसर में प्रदर्शित होंगे। जयपुर के बाद यही प्रस्तुतियां बडोदा में होंगी। जयपुर चैप्टर की प्रवक्ता सुनीता नागपाल ने बताया कि पहाडों की खूबस्ूरत हरी-भरी वादियों में स्थित उत्तर-पूर्वी क्षेत्र मेमं विविध प्रकार की समृद्ध संस्कृति है, जिसका एक अंश रंगमंच भी है। इसे शेष भरत में पहुचांने के लिए पूर्वोत्तर राष्ट्रीय रंग उत्सव के जरिए यह प्रयास किया जा रहा है।
आयोजन के संयोजक संदीप मदान ने बताया कि जवाहर कला केन्द्र के रंगायान सभागार में निर्धारित तिथियों को शाम 7 बजे नाटक होंगे। इसके लिए 40 रुपए का टिकट होगा। प्रत्येक नाटक का कथासार हिन्दी में बताया जाएगा। वैसे इन सभी भाव प्रधान प्रस्तुतियों के सम्प्रेषण में भाषा समस्या नहीं होगी। जयपुर के थिएटर प्रेमियों के लिए उत्तर पूर्व के रंगकर्म को जानने का यह बेहतर अवसर होगा। 
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