गुरुवार, 19 नवंबर 2015

Moomal November-2 (2015)

सुधि पाठक,
आपके सम्मुख 'मूमल' का November-2 (2015) अंक  है. 
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मंगलवार, 1 सितंबर 2015

JKK Jaipur अब कोई कलाकार संभालेगा जेकेके की कमान


अब कोई कलाकार संभालेगा जेकेके की कमान
मूमल नेटवर्क, जयपुर।
आखिर जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के सर्वोच्च पद पर व्यूरोकेट्स की जगह अब कला जगत के जानकार की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए उपयुक्त व्यक्ति की तलाश की जा रही है।
जवाहर कला केन्द्र के महा निदेशक पद पर कला जगत के पारंगत व्यक्ति को नियुक्त किए जाने के लिए उसकी योग्यता और आर्हताएं निर्धारित की गई हैं। इसके तहत केन्द्र का महानिदेशक 35 से 60 वर्ष के आयु वर्ग का होगा। किसी भी विषय मेेंं स्नात्कोत्तर होगा। इसके साथ ही उसके पास आर्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र की कोई डिग्री, डिप्लोमा भी होना चाहिए। उसे विज्युअल और परफार्मिंग आर्ट के क्षेत्र में परम्परागत व समसामयिक कलाओं की उत्तम जानकारी होने के साथ किसी एक या अधिक विषय में पारंगत होना चाहिए। उसे कला जगत के विश्व परिदृश्य पर हो रही गतिविधियों की और कला क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं के कार्यकलापों की जानकारियां अपडेट होनी चाहिए।
महानिदेशक पद के लिए व्यक्ति को प्रशासनिक कुशलता और ठोस नेतृत्व क्षमता वाला भी होना चाहिए। इसके लिए उसे जेकेकेे जैसे किसी कला संस्थान के संचालन का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है। रचनात्मकता और नवीनता के साथ योजनाएं बनाने, व्यवस्थापन और उनके क्रियान्वयन करने की संस्थागत दक्षता होनी चाहिए। इसी के साथ वित्तिय योजनाएं बनाने और उनकों अमल में लाने की सूझबूझ होनी चाहिए। 
इन सब के साथ उसमें अपनी बात सर्व साधारण तक संप्रेषित करने और करीब 20-25 कर्मचारियों की टीम को संभालने योग्य स्ट्रांग लीडरशिप होना लाजमी है।
अगर आपमें यह योग्यताएं हैं तो अगली 21 सितम्बर तक जेकेके मेें अपने योग्यता प्रमाण पत्रों के साथ उन्हीं महानिदेशक से मिलिए भविष्य में जिनके स्थान पर आप को यह पद संभालना है। अगर यह आपको सूट नहीं करता हो तो ऐसी सभी योग्यताओं वाले किसी व्यक्ति को इस पद हेतु प्रेरित कीजिए।

मंगलवार, 25 अगस्त 2015

​जयपुर में 28 से पूर्वोत्तर राष्ट्रीय रंगोत्सव

जयपुर में 28 से पूर्वोत्तर राष्ट्रीय रंगोत्सव
मूमल नेटवर्क, जयपुर। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से पूर्वोत्तर रंगोत्सव के तहत जयपुर के जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में 28 अगस्त से 1 सितम्बर तक उत्तर पूर्व क्षेत्र की बेहतरीन नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
जवाहर कला केन्द्र, जयपुर के सहयोग से होने वाले इस आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए रानावि के प्रो. सुरेश भारद्वाज ने बताया कि इस समारोह में कुल पांच नाटक प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें दो मणिपुर से, दो असम से और एक सिक्किम से होगा। जयपुर से पहले यही नाटक दिल्ली और अमृतसर में प्रदर्शित होंगे। जयपुर के बाद यही प्रस्तुतियां बडोदा में होंगी। जयपुर चैप्टर की प्रवक्ता सुनीता नागपाल ने बताया कि पहाडों की खूबस्ूरत हरी-भरी वादियों में स्थित उत्तर-पूर्वी क्षेत्र मेमं विविध प्रकार की समृद्ध संस्कृति है, जिसका एक अंश रंगमंच भी है। इसे शेष भरत में पहुचांने के लिए पूर्वोत्तर राष्ट्रीय रंग उत्सव के जरिए यह प्रयास किया जा रहा है।
आयोजन के संयोजक संदीप मदान ने बताया कि जवाहर कला केन्द्र के रंगायान सभागार में निर्धारित तिथियों को शाम 7 बजे नाटक होंगे। इसके लिए 40 रुपए का टिकट होगा। प्रत्येक नाटक का कथासार हिन्दी में बताया जाएगा। वैसे इन सभी भाव प्रधान प्रस्तुतियों के सम्प्रेषण में भाषा समस्या नहीं होगी। जयपुर के थिएटर प्रेमियों के लिए उत्तर पूर्व के रंगकर्म को जानने का यह बेहतर अवसर होगा। 
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बुधवार, 29 जुलाई 2015

जयपुर में रवीन्द्र मंच के नव निर्माण कार्य पर आपत्ति


रवीन्द्र मंच का मूल स्वरूप बिगाडऩे का आरोप
मंच प्रबंधक ने कहा मूल स्वरूप नहीं बिगाड़ा
मूमल नेटवर्क, जयपुर। टैगोर कल्चरल कॉम्पलेक्स योजना के तहत केन्द्र सरकार की ओर से जयपुर में रवीन्द्र मंच के नव निर्माण कार्य पर आपत्ति उठा रहे वरिष्ठ नाट्यकर्मी रणवीर सिंह की मांग है कि वहां मंच के मूल स्वरूप को नष्ट किए जाने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए। इसी के साथ सही काम कराने के लिए कलाकारों की एक समिति बना कर एक वरिष्ठ कलाकार को उसका अध्यक्ष बनाया जाए।
यहां पै्रस क्लब में आयोजित एक कॉन्फे्रंस में रणवीर सिंह ने कहा कि नव निर्माण के लिए नियुक्त आर्किटेक्ट संगीता मेथली को नियमों के विरुद्ध काम दिया गया है। जबकि मंच के पुराने जानकार आर्किटेक्ट प्रमोद जैन को इसके मूल स्वरूप की बेहतर जानकारी है।
नव निर्माण के नाम पर जयपुर रवीन्द्र मंच के एतिहासिक रूप के साथ जिस तरह छेडख़ानी और तोड़-फोड़ की जा रही है वह सहन करने योग्य नहीं है। इस पर रोक के लिए 15 जुलाई को न्यायालय में याचिका दायर की गई। मामले की पहली सुनवाई 20 जुलाई को हुई, लेकिन तब हालात पर बहस नहीं हो पाई। उसके बाद 23 व 28 जुलाई को हुई बहस के दौरान रवीन्द्र मंच प्रशासन द्वारा यह कहा गया कि मंच के मूल स्वरूप से कोई छेडख़ानी नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
वरिष्ठ कलाकार और नाट्यकर्मियों की संस्था 'इप्टा' के अध्यक्ष रणवीरसिंह का कहना है कि रवीन्द्र मंच को केन्द्र की स्कीम से प्राप्त धनराशि से नव निर्माण के नाम पर व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है। इसके लिए नोडल एजेंसी नेशनल स्कूल आफ  ड्रामा को बनाया गया है। पूर्व प्रमुख सचिव सल्लाउद्दीन अहमद के समय आर्किटेक्ट प्रमोद जैन ने जो मूल नक्शा तैयार किया था, उसे रद्द कर दिया गया है। उस समय योजना के अन्र्तगत बनाए गए ग्रीन रूम्स तोड़े जा रहे हैं। ओपन एयर थिएटर और उसके स्टेज को पूरी तरह से तोड़ दिया गया है। जिस कमरे में टिकट काउंटर थे उसमें टायलेट बनाए जा रहे हैं। पहले जहां लॉबी और कैंटीन थी अब उसे आर्ट गैलेरी के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। ग्रीन रूम्स को स्टेज के ऊपर बनाए जाने का प्लान है। कलाकार स्टेज पर कैसे प्रवेश करेंगे और सेटिंग ले जाने की तो जगह ही नहीं छोड़ी गई है। परफोमिंग आर्ट के इस केंद्र में विज्युअल आर्ट की गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है।
आर्किटेक्ट की नियुक्ति नियम विरुद्ध
रणवीर सिंह का कहना है कि संगीता मेशेल नाम की आर्किटेक्ट को नियुक्त किया गया है जो नियम विरुद्ध है। सन् 1972 में जो आर्किटेक्ट एक्ट बना था उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि सरकारी टेण्डर वही आर्किटेक्ट भर सकता है जो आर्किटेक्ट काउंसिल का सदस्य हो जबकि संगीता मिशेल काउंसिल की मेम्बर ही नहीं है।
ब्लू प्रिंट की कॉपी के मांगे 4500 रुपए
हमारा विवाद आर्ट कल्चर डिर्पाटमेंट और आवास विकास विभाग से है। आरटीआई के जरिए मामले की जानकारी के लिए जब योजना की ब्लू प्रिंट की फोटोकॉपी मांगी थी तो तत्कालीन मंच मैनेजर अनिता मीणा ने 4500 रुपए की राशि जमा कराने का पत्र भेज दिया। हमने यह बात जब वर्तमान मैनेजर सोविला माथुर के आगे उठाई तो उन्होंने राशि को संशोधित करते हुए मात्र 200 रुपए जमा करवा के हमें ब्लू प्रिंट उपलब्ध करवा दिया।
कुछ भी गलत नहीं हो रहा -सोविला माथुर 
इस पर रवीन्द्र मंच की मैनेजर सोविला माथुर से की कई वार्ता में उन्होंने बताया कि रवीन्द्र मंच के मूल स्वरूप के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। आगे भी जो कुछ  निर्माण कार्य होगा तय योजना के अनुसार ही होगा। योजना के अनुसार ओपन एयर थिएटर की सिटिंग कैपेसिटी बढ़ानी है और उसके फ्लोर के नीचे से लाईट साऊण्ड वगैरह की अण्डर ग्राउण्ड वायरिंग की जानी है, इसलिए फ्लोर तो तुड़वाना ही पड़ेगा। जो वायरिंग के बाद पूर्ववत बनवा दिया जाएगा। पार्किंग व्यवस्था को भी सही किया जाएगा।
अन्दर जो टायलेट दुर्गन्ध फैलाते थे, उसे बाहर निकाला जाना है। कैफेटेरिया और लाबी में कलात्मक रचनाओं का प्रदर्शन किए जाने की भी योजना है। जिसमें कोई व्यावसायिक प्रदर्शन नहीं होगा केवल आर्ट व कल्चर से सम्बन्धित  प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इसमें विजुअल और परफोर्मिंग दोनों ही आर्ट के प्रदर्शन हो सकेंगे। इसका रूप लगभग वैसा ही होगा जैसा कि स्वर्ण जयंति समारोह के तहत इस जगह पर लगाई गई प्रदर्शनी का था। इसके साथ ही मार्डन आर्ट गैलेरी बनाई जाएगी। यह सब कुछ योजना के फस्र्ट फेज के तहत किया जा रहा है। इसका बजट 14 करोड़ रुपए स्वीकृत हुआ है। यह सब कुछ नेशनल स्कूल आफ  ड्रामा के निरीक्षण में हो रहा है, इसलिए यदि बनाई गई योजना से कुछ अलग होता है तो काम का पैसा ही नहीं मिल पाएगा।
आर्किटेक्ट की नियुक्ति आवास विकास विभाग द्वारा की गई की है इसमें रवीन्द्र मंच प्रशासन का कुछ लेना देना नहींं है।
अधिकारियों ने किया दौरा
रवीन्द्र मंच पर निर्माण को लेकर कोर्ट-कचहरी की चर्चाओं के चलते 29 जुलाई को कला एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल, राजस्थान आवास विकास संस्थान के एक्सईएन राम सहाय रावल व आर्किटेक्ट संगीता मिशेल ने करीब ढाई धंटे तक मंच के नव निर्माण का काम-काज देखा। रवीन्द्र मंच की प्रबंधक साविला माथुर भी साथ रहीं। अधिकारियों ने निर्माण कार्य पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन कार्य की गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि काम की गति बढ़ाकर इसे अक्टूबर माह तक पूरा किया जाए। इसके लिए प्रबंधक को हर माह प्रगति का विवरण देने के निर्देश दिए।
(विशेष: रवीन्द्र मंच के नवनिर्माण के संबंध में मूमल में एक वर्ष पूर्व ही साइट प्लान सहित विस्तृत आलेख प्रकाशित किया जा चुका है। कृपया 1 अगस्त 2014 के अंक में पृष्ठ 4 व 5 देखें )

शुक्रवार, 26 जून 2015

चित्रकार और मूर्तिकार शिव सिंह का निधन


 चित्रकार और मूर्तिकार सरदार शिव सिंह का निधन 
मूमल नेटवर्क, चंडीगढ़। विश्व प्रसिद्ध चित्रकार और मूर्तिकार सरदार शिव सिंह का पंचकूला सेक्टर 21 के एक निजी अस्पताल में हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया। वह 67 साल के थे और पिछले काफी समय से कैंसर की बीमारी से पीडि़त थे। उन्हें सीने में दर्द के चलते पिछले बुधवार को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां पर उन्हें आज शुक्रवार तडक़े साढ़े 3 बजे हार्ट अटैक आया और उनका निधन हो गया। शिव सिंह की पत्नी गिसऐला मूल रूप से जर्मनी की है और पिछले लंबे समय उनके सेक्टर 6 पंचकूला घर पर उनकी सेवा कर रहीं थी। जबकि बेटा यसमिन अभी जर्मनी में ही है, जो रविवार को पंचकूला पहुंचेगा और उसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जीवन 
सरदार शिव सिंह का जन्म 1938 में होशियारपुर में हुआ था। 1958 से 1963 तक उन्होंने पहले पंजाब कॉलेज आफ ऑटर्स शिमला और उसके बाद चंडीगढ़ में अध्ययन किया। 1963 में 1968 तक उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला में कला सिखाई। 1967 में उन्हें दूसरे राष्ट्रीय वास्तुशिल्पि कैंप दिल्ली में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया, जिसके बाद 1968 में जर्मन सरकार ने उन्हें जर्मनी में 3 साल के लिए कला क्षेत्र में एक उन्नत अध्ययन में छात्रवृत्ति और अनुसंधान की पेशकश की। उसके बाद उन्हें अपनी कला को यूरोप में कई बार प्रर्दशित करने का मौका मिला। 1972 से 1982 तक वह नई दिल्ली में ललित कला अकादमी के सदस्य रहे और पंजाब ललित कला अकादमी चंडीगढ़ के संस्थापक सदस्य रहे।
उन्होंने पंजाब कला परिषद के निर्माण में डा. एमएस रंधावा के साथ मिलकर काम किया। 1982 से 1984 ऑल इंडिया रेडियो स्टेशन, जालंधर की सलाहकार समिति के सदस्य थे। उन्होंने दूरदर्शन एवं अन्य टीवी चैनलों में दस डाक्यूमेंट्री टेलीविजन फिल्मों में काम किया। 2006 में दूरदर्शन जालंधर द्वारा दृश्य कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पंज पाणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह गर्वनमेंट होम साइंस कॉलेज चंडीगढ़ से 1996 में कला के प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। 1999 से 2005 तक चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के अध्यक्ष रहे। चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कारगिल हीरो राष्ट्रीय कोष के लिए और सुनामी त्रासदी कोष चंडीगढ़ के कलाकारों की दो प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसमें उन्हों रुपये 65,000 रूपए और 145,000 रूपए एकत्रित कर दिए।
अनेक पुरस्कार रहे शिव सिंह के नाम
1979 में मूर्तिकला में उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार और 1982 में भारत के राष्ट्रपति नई दिल्ली में अखिल भारतीय प्रदर्शनी मे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए रजत पट्टिका से नवाजा गया। कई अखिल भारतीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार भी प्राप्त किए। इसके बाद उन्हें कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पंजाब के राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया।
मूर्तिसंग्रह
सरदार शिव सिंह द्वारा बनाई गई मूर्तियां दिल्ली की नेशनल गैलरी आफ मार्डन आर्ट, चंडीगढ़ संग्रहालय, पंजाब विश्वविद्यालय के संग्रहालय, राज्य संग्रहालय शिमला, हैक संग्रहालय, गुलाब कला संग्रहालय, जर्मनी, हरियाणा राज्य पर्यटन (पर्यटक रिज़ॉर्ट), रोहतक परिसर, राजहंस होटल सूरजकुंड और शिल्प संग्रहालय सूरजकुंड, तकनीकी संग्रहालय बैंगलोर; उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला व चंडीगढ़, पंजाब पुलिस अकादमी के शताब्दी (स्मारकीय मूर्तिकला 92) और भी पंजाब भवन चंडीगढ़ में भी लगी हुई है।
चित्रसंग्रह
उनकी बनाई पेंटिग्स चंडीगढ़ के विभिन्न होटलों, पंजाब राज्य मंडी बोर्ड, पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कार्पोरेशन चंडीगढ़, पंजाब राजभवन चंडीगढ़, चंडीगढ़ गोल्फ क्लब, चंडीगढ़ क्लब, रेडक्रॉस पटियाला, उपायुक्त कार्यालय, पटियाला, पंजाब राज्य खाद्य कार्पोरेशन चंडीगढ़ और संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, स्वीडन, कनाडा, श्रीलंका, सिंगापुर, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड और हॉलैंड मेंमें कई अन्य सार्वजनिक और निजी संग्रहालयों में लगी हुई है।

शुक्रवार, 5 जून 2015

पर्यावरण दिवस पर कलाजगत के रंग


विश्व पर्यावरण दिवस पर कलाजगत ने उकेरे विभिन्न रंग
मूमल नेटवर्क, जयपुर।
पर्यावरण दिवस पर जहां विभिन्न स्तरों पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए वहीं कला जगत ने भी अपने तरीके से पर्यावरण की उपयोगिता समझाने और आमजन में जागरुकता के लिए उपाय किए।
इस कलात्मक पहल के लिए कला व्यवसाय से जुड़ी 'कलानेरी' और सामाजिक सरोकार से जुड़ी संस्था 'मैसेज' द्वारा आमजन ओर खासकर नवांकुरों के लिए विभिन्न आयोजन किए गए। इस दौरान जाने-माने कलाकारों ने कैनवास पर रंगों के जरिए पर्यावरण संबंधी संदेशों को आकार दिया इनमें कलाविद डा. चिन्मय मेहता, पदमश्री एस. शाकिर अली, जगमोहन माथोडिय़ा, अशोक गौड़, व कलानेरी निदेशक सौम्या शर्मा प्रमुख थे। कार्टूनिस्ट सुधीर ने भी अपनी शैली से पर्यावरण को उकेरा। इस अवसर पर कलानेरी एकेडमी ऑफ आर्ट के बच्चों ने भी पर्यावरण के प्रति अपने प्यार के रंग भरे। माहौल को संगीतमय बनाने के लिए लीडिंग नॉट ग्रुप के युवा गिटारिस्टों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डा. चिन्मय मेहता और एस.शाकिर अली ने पर्यावरण की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए और कला में माध्यम से जन जागृति को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। विशेष अतिथि के रूप में आईएएस नीरज के पवन ने कार्यक्रम में पर्यावरण व विशेषकर पॉलीथिन से फैल रहे प्रदूषण पर रोकथाम के लिए आमजन में जन जागृति लाना ही एक मात्र उपाय बताया। इसके लिए विशेषकर युवा पीढ़ी को आगे बढ़कर रोकथाम के प्रयास करने पड़ेंगे। पर्यावरण विद एसपी तोमर रामाराव शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान कदम्ब के पेड़ लगाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।
मैसेज संस्था की संयोजक पूर्णिमा कौल ने बच्चों के लिए हुई फैंसी ड्रेस को साकार किया। कलानेरी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस अवसर पर समाज सेवी पंचशील जैन, डॉ भास्कर गुप्ता, डॉ सतीश त्यागी व युवा कलाकार प्रदीप शर्मा, नवल सिंह चौहान, लाखन सिंह, अरविंद धाकड़ सहित कई पर्यावरण प्रेमी मौजूद थे। शहर के व्यस्तम जेएलएन मार्ग पर आयोजित हुए इस कार्यक्रम के जरिए दोनों संस्थाएं पर्यावरण के प्रति लोगों का ध्यान खींचने और जन जागरुकता लाने में सफल हुई।






शनिवार, 23 मई 2015

नेपाल भूकम्प- कलाकारों की संवेदना या अवसरवादिता


जब भी कोमलता की,  कल्पनाओं की, भावनाओं की या संवेदनशीलता की बात आती है तो प्रथम पंक्ति में कला और कलाकार ही खड़े नजर आते हैं। जब-जब भी कोई प्राकृतिक या मानवीय विपदा सामने आई है तो कलाकार वर्ग अपनी संवेदनाओं के साथ नजर आया है। इस समय भी प्राकृतिक विपदा भूकम्प के चलते पड़ौसी देश नेपाल के साथ भारत के बिहार व उत्तर प्रदेश में जान माल की हानि हुई है। ऐसे में भारत के कलाकारों की संवेदनाओं का मुखर होना लाजमी है। लेकिन संवेदनाओं की आड़ में जब कलाकार व्यापारी बन कर अपना हित सोचे और अवसरवादी बने तो संवेदनाओं पर प्रश्नचिंह लग जाता है।
अपनी बात को सिद्ध करने के लिए हम यहां इन्दौर की एक कला ग्रुप की बात करेंगे, जिसने कलाकारों से भूकम्प पीडि़तों के सहायतार्थ एक विक्रय प्रदर्शनी आयोजित करने के लिए कलाकारों से पेंटिंग्स आमन्त्रित की है। यह ऐलान किया गया है कि बिकने वाली पेंटिंग से प्राप्त राशि का एक हिस्सा भूकम्प पीडि़तों की सहायतार्थ भेजा जाएगा। क्या इस घोषणा से सहज ही यह सवाल नहीं उठता कि विक्रय से प्राप्त राशि का केवल एक हिस्सा? वो भी कितना? पता नहीं, पेंटिंग्स की बिक्री पर गैलेरीज को दिए जाने वाले हिस्से से ज्यादा या कम? और भूकम्प पीडि़तों की सहायता के लिए भेजने वाले कथित हिस्से के बाद शेष बचे हिस्से की आय को स्वयं के पास रखकर संवेदना का कौनसा रूप दर्शाना चाह रहे है? क्या यह कृत्य अपनी वस्तु को बेचने के लिए ग्राहकों को लुभाने के लिए पहले से ही दिए जाने वाले कमीशन को संवेदना के नाम पर भुनाना नहीं दर्शा रहा है? सभी जानते हैं कि पेंटिंग या मूर्तिशिल्प ही ऐसी वस्तुओं में शामिल हैं जिसके मूल्य निर्धारण का कोई वास्तविक व ठोस मापदण्ड अभी तक तय नहीं हो पाया है। इस तरह के प्रदर्शन जो सहायता के नाम पर आयोजित किए जाते हैं वो अवसरवादिता नहीं तो और क्या है?
हम इससे पहले मूमल में कला के इक्कठा होते जा रहे कचरे की समस्या पर भी बात कर चुके हैं। कलाकृतियों के नाम पर कई चीजें ऐसी बन रहीं है जिसकी ना तो सराहना है और ना ही मांग। ऐसे में अपनी उन कृतियों को बेचने के लिए कलाकारों का ऐसी विपदाओं के समय पर प्रदर्शन कर वाहवाही लूटना ओर अपना हित साधना राजनेताओं की कार्यशैली को ही पीछे छोड़ रहा है। अब यह सामान्य होता जा रहा है क्योंकि आज कलाकारों के बीच पनपती जा रही राजनीति और एक-दूसरे की टांग खिंचाई की प्रवृति के चलते उनका आचरण राजनेताओं को भी मात कर रहा है। कला और संवेदना की आड़ में अवसरवादी होता जा रहा कलाकार, कला के नाम पर समाज को क्या दे सकता है, यह सोचने की बात है।
परिस्थिति को समझ सच्चे मन से यदि हम किसी की सहायता करना चाहे, फिर वो सहायता कितनी भी छोटी क्यों ना हो सार्थक साबित होगी ओर हम अवसरवादिता छोड़ अपनी कला साधना को प्रखर करें तो शायद ऐसी प्रदर्शनियों की नौबत ही नहीं आएगी और हम खुले दिल से विपदा के समय अपने भाईयों की सहायता भी कर पाऐंगे।
नेपाल को विश्व भर से सहायता प्राप्त हो रही है। यूनेस्कों में दर्ज इमारतों के नुकसान को संभालने यूनेस्को आगे आया है लेकिन हमारे देश के वह वासी जो इस आपदा का शिकार हुए हैं, क्या वो संवेदना के लायक भी नहीं? यहां प्रश्न यह उठता है कि सारी संवेदना व सहायता, नेपाल को ही क्यों? जबकि हमारे अपने देश में भी भूकम्प से काफी नुकसान हुआ है। लोग मरे भी हैं, घायल, बेघर और अनाथ हुए हैं।
सम्पादकीय लिखने के दौरान यह जानकारी भी मिली हे कि जयपुर के कुछ कलाकारों द्वारा दिल्ली की एक आर्ट गैलेरी में नेपाल के भूकम्प पीडि़तों के लिए विक्रय प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। आयोजनकर्ताओं द्वारा मूमल को यह बताया गया है कि आयोजन में विक्रय से प्राप्त पूरी राशि पीडि़तों की सहायतार्थ भेजी जाएगी। इसलिए इस आयोजन में मूमल ने अपने सहयोग का प्रस्ताव रखा है। ऐसी वास्तविक सहायता के अन्य कार्यक्रमों में भी हम यथासंभव सहयोग देने को तैयार हैं।