सोमवार, 18 मार्च 2013

Now Start Jaipur Art Festival 2013

चलो ये तो पूरी हो गयी 

हम तो तसल्ली से पूरा करतें है पहले देखने तो दो।

अब इतने वक्त में तो ऐसा ही होगा।

मुझे भी तो वक्त पर काम पूरा करना है।

दिन में दो,   ओफ़ ओ।

वाटर गया पानी मे, हम हेलमेट ने तो एक्रेलिक में कर दिया।

अरे सब जाने दो, राजपाल जी प्रथम कलाकार को जिमाओ। 

जयपुर आर्ट फेस्टिवल पहला दिन-मार्च 2013
मूमल नेटवर्क, जयपुर। आखिर जयपुर आर्ट फेस्टिवल अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज शुरू हो गया। अब आपकी जिज्ञासा भले जो हो उसे तो शांत करना ही है, लेकिन पहले औपचारिक जानकारियां हों जाएं। जैसे राज्यपाल मार्गेट अल्वा ने दीप जला कर उत्सव का शुभारंभ किया। आयोजकों के अनुरोध पर सामने रखे कैनवास पर रंग लगाकर अपने हाथ भी आजमाएं। यहीं उत्सव की प्रमुख कलाकार किरण सोनी गुप्ता द्वारा अपनी पहचान के अनुरूप बनाई एक कलाकृति फीता काटने के लिए भी रखी गई। आयोजन के सचिव राम प्रताप सिंह समेत अपना आसन सभ्भाले सभी गणमान्य लोगों ने एक-एक कर सामने जनता के रूप में खड़ी कलाप्रेमी प्रजा को संबोधित किया। श्रोताओं के लिए बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण कार्यक्रम के आरंभ से अंत तक सभी कला प्रेमियों ने स्वयं को खड़े-खड़े  ही कृतार्थ किया। उम्र के तकाजे ने जिन्हें खड़ा नहीं रहने दिया उन्हें यत्र-तत्र लॉन पर ही बैठना पड़ा।
कुल मिलाकर आयोजकों ने यह साफ किया कि यह समूचा आर्ट फेस्टिवल वैसे ही चलेगा जैसे लिट्रेचर फेस्टिवल चलता रहा है। अब इसमें किसी का अपमान होता हो या वह स्वयं अपमानित होने के लिए आया हो तो उनकी कोई जिममेदारी नहीं है। यह तो साहित्य की तरह कला की भलाई के लिए साफ नीयत से किया जा रहा प्रोगा्रम है। यह भी साफ किया गया कि अभी तो संगीत फेस्टिवल और करना है। यह पहला मौका है जब राजस्थान में चित्रकला को लेकर निजी स्तर पर कोई इतना बड़ा आयोजन हो रहा है।
साफ नजर आने लगी दरार
इस आयोजन की बदौलत इस बात का भी पहला मौका रहा जब प्रदेश के कलाकारों के बीच की दरार खुलकर सामने आ गई। अब तक दबे छिपे रह कर भी एक-मेक दिखने वाले कला जगत को यहां तीन हिस्सों में देखा जा सकता था। पहले वे वरिष्ठ और दिग्गज कलाकार जो आर्ट फेस्टिवल के आयाजकों की अपमान जनक शर्तों के चलते इस आयोजन में शरीक होने को तैयार नहीं हुए। इन्हीं के साथ वे भी यहां नजर नहीं आए जो इनके सच्चे साथी, सहयोगी या शिष्यों की श्रेणी में आते हैं। जाहिर है, इनकी ताताद अच्छी खासी है। यह वे दिग्गज कलाकार हैं तो इस आयोजन में शामिल प्रमुख कलाकार को भी चित्रकार मानने को तैयार नहीं।
दूसरे खाने में वे वरिष्ठ कलाकार नजर आ रहे थे। जिन्हें इस आर्ट फेस्टिवल में शामिल नहीं किया गया, लेकिन वे यहां केवल आयोजन का 'मांजनाÓ देखने चले आए। इनकी सूचि अगले समाचारों में समाहित करेंगे। इन कलाकारों ने यहां शालीन शब्दों में उन कलाकारों की खूब खबर ली जो बिना मानदेय तय कर पांच दिन में दो कृतियां बनाकर दे रहे हैं।  वाटर कलर में काम करने वालों की स्थिति तो और भी विकट है जिन्हें प्रतिदिन दो कृतियां देने को कहा गया है। स्थानीय कलाकारों के लिए यह भी काफी अपमान जनक है कि उन्हें यहां रहने को स्थान नहीं दिया गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि उन्हें सुबह अपने घर से नाश्ता करके आना है यहां केवल दोपहर का भोजन और चाय ही उपलब्ध होगी। रात का भोजन उन्हें अपने घर जाकर ही करना है।
तीसरा खेमा उन स्थानीय कलाकारों का बना है जिन्हें इस आर्ट फेस्टिवल में शामिल किया गया है, फिर भले ही वह क्राफ्ट डेमोस्ट्रेशन के लिए हो। कुछ कलाकार चित्रकार के रूप में भी शामिल हैं और इस बात से गौरवांवित है कि उन्हें ब्यूरोकेसी ने मान्यता दी है। वे उतने ही बड़े चित्रकार हैं, जितने बड़े साहित्यकार यहां जुटते हैं। इनमें कौन कौन शामिल है यह अब सर्वविदित हैं इसलिए सुधि पाठकों को अलग से बताने की आवश्यकता नहीं।
केंन्द्र में अफसरशाह
पूरे आर्ट फेस्टिवल के आयोजन में अफसरशाह ही केंद्र में नजर आते रहे। एक और जहां प्रमुख कलाकार पति जयपुर संभागीय आयुक्त को कलाकार घेरे रहे वहीं समूचे आयोजन की नकेल प्रमुख कलाकार और अजमेर संभागीय आयुक्त के हाथों में नजर आती रही। आयोजन के सचिव की भूमिका यहां किसी फिल्म के फायनेन्सर से ज्यादा नजर नहीं आ रही थी। अब इनके इर्दगिर्द वहीं स्थानीय कलाकार ज्यादा थे जो चित्रकार कम और इंतजाम अली ज्यादा लग रहे थे। इनमें कुछ पदमश्री की दौड़ में हैं तो कुछ को नए ठिकाने की दरकार है। कुछ कलाकार से पहले वे सरकारी कारिंदे हैं जो पानी में रह कर अफसरों से बैर पालना अफोर्ड नहीं कर सकते।
कोई बड़ी आर्ट गैलेरी भी नहीं
 कुल मिलाकर जयपुर के नामी कलाकारों की तीन कैटेगरियां आज पानी की तरह साफ हो गई। इसी के साथ यह भी साफ हो गया कि प्रदेश की किसी बड़ी आर्ट गैलेरी का साथ आर्ट फेस्टिवल को नहीं मिल सका। पूरे आयोजन में जयपुर के कला बाजार में सर्वाधिक व्यवसाय करने वाली दो प्रमुख गैलेरीज की कर्ताधर्ता आयोजन में नजर नहीं आईं। अन्य बेहतर व्यवसाय करने वाले भी नहीं दिखे। यहां तक कि तस्वीरे मांडऩे वाले तक नजर नहीं आए। एक मात्र कला दीर्घा के कर्ता-धर्ता दिखे वे भी नेशनल लेवल के कुछ कलाकारों को किसी तरह अपनी गैलेरी में आमंत्रित करने की जुगत में लगे रहे।
खुले आम कॉपी करते रहे कलाकार
आर्ट फेस्टिवल में आमंत्रित कई कलाकार हाथ में मूल कृति की फोटो लिए खुले आम कॉपी करते करते नजर आए। इनका चित्र हमारे ब्लॉग पर दिया जा रहा है। हो सकता है आजकल यह जायज हो, लेकिन जयपुर के कला जगत में तो इस तरह के काम को हेय दृष्टि से देखा जाता है।
केवल वाटर का नहीं हूं
राजस्थान में वाटर कलर के दिग्गजों ने बिना मानदेय तय किए भी प्रतिदिन दो कलाकृतियां देने के लिए जी जान लगा रखी है, लेकिन वाटर कलर में लगभग चमत्कार करने वाले मणिपुर के कलाकार हेमलेट शोधर ने इससे बचने का बेहतर तरीका खोज लिया। उन्होंने कहा बताया मैं एक्रैलिक में भी काम कर सकता हूं और यहां वहीं करुगां। इसके बाद उन्होंने अपना एक काम पहले ही दिन पूरा भी कर लिया, अब एक और करना है, बस।
पहले दिन ही आधा काम पूरा
अधिकांश कलाकारों ने पहले ही दिन अपनी एक-एक पेंटिेग पूरी कर ली और ऐसे अंगडाई ली मानों दिहाडी से निजात मिली हो। कल वे अपनी दूरी भी पूरी कर लेंगे। आर्ट फेस्टिवल में अंतिम समय में शामिल किए गए जयपुर के वरिष्ठ कलाकार सुब्रोतो मंडल ने जरूर पूरी तसल्ली से शाम को काम संभाला और कैनवास का जायजा लिया वे कल आराम से काम शुरू करेंगे।
(खबरे बहुत सी हैं, शेष अगले डिस्पैच में )

शनिवार, 2 मार्च 2013

अब जयपुर में भी Art Festival

 यहां मूमल कला पत्रिका के मार्च महीने के प्रथम अंक के पृष्ठ चित्र हैं। हो सकता है आप इसे ठीक से नही पढ़ सकें। इसे इन्लार्ज कर ठीक से पढऩे के लिए अपना ई-मेल पता हमें ताकि आपको इसकी पीडीएफ कापी भेजी जा सके। आप अपना पता ब्लॉग के अंत में 'टिप्पणी' के साथ भी दे सकते हैं और हमें सीधे अपने मेल से संदेश भेज कर भी। हमारा ई मेल एड्रेस है moomalnews@gmail.com




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रविवार, 3 फ़रवरी 2013

Artist विनय शर्मा नए उत्साह के साथ पुन: सक्रीय


मूमल नेटवर्क, जयपुर। वरिष्ठ चित्रकार विनय शर्मा एक नए उत्साह के साथ अपने रचना संसार में पुन: सक्रीय हो गए हैं। पिछले दिनों वह गंभीर बीमारी के चलते बेड रेस्ट पर थे। यह समय उनके परिवार और प्रशंसकों के लिए काफी चिंता भरा रहा।
स्वस्थ होने के बाद अपने स्टूडियो पहुंचे विनय शर्मा ने 'मूमल' से एक भेंट में न केवल अपनी अस्वस्थता के दिनों के अनुभव शेयर किए, बल्कि यह भी बताया कि इन दिनों उन्होंने जीवन-मृत्यु की वास्तविकता को काफी करीब से महसूस किया। इसी दौरान रचनात्मकता और सोच को भी नए आयाम मिले। उन्होंने बताया कि शारीरिक और मानसिक निर्बलता के इस कठिन दौर में वे चाह कर भी कला और सृजन से दूर नहीं रह सके।
 इस दौरान शब्दों के आकार से एक नया संसार भी रचा। इसका पहला चरण डायरी के पन्नों पर चली कलम ने पूरा कराया जबकि दूसरे चरण में जब शरीर साथ देने लगा तो शब्दों का यह संसार कैनवास पर भी उतरने लगा। प्रथम पूज्य गणपति को शब्दों के रूप में साकार बरते हुए एक नई श्रंखला सामने आई। बात और आगे बढ़ी तो शब्दों ने भाषा की देहरी लांघते हुए देश-विदेश की दूरीयां पाट दी। ऐसे में पाकिस्तान से आए कलाकार मित्र नईम और कनाडा से आए जॉन ने भी साथ दिया।
इस दौरान विनय द्वारा लिखे गए डायरी के पन्ने जहां कला विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं वहीं वरिघ्ठ कलाकारों के लिए भी रुचिकर है। डायरी के इन पन्नों पर जहां पारिवारिक रिश्तों के ताने-बानों की मजबूती का अहसास है वहीं पुरानी यादों के पीछा करते साए भी हैं। जहां कला के सृजन में जीवन की सार्थकता को भोगा गया है वहीं मानसिक सोच की उन्मुक्त उड़ान भी है। भले ही यह लेखन केवल अस्वस्थ्ता का समय बिताने के लिए ही हुआ, फिर भी इन पन्नों में गद्य और पद्य का वह बेहतर संयोजन है जिसने यह उजागर किया कि  विनय शर्मा केवल चित्रकार भर नहीं है।
विनय शर्मा का मोबाईल नंबर है 09460186064

बुधवार, 23 जनवरी 2013

Jaipur me बलात्कारियों के पुतलों पर बरसे कोड़े

मूमल नेटवर्क, जयपुर। देर से ही सही जयपुर के कला जगत को दिल्ली के 'दामिनी' गैंगरेप के खिलाफ गुस्सा आया। कला संस्थान 'चित्रभूमि...ए आर्ट स्पेस' से जुड़े कला शिक्षकों और उनके विद्यार्थियों ने आज 23 जनवरी को जयपुर मे राजस्थान विश्व विद्यालय के मुख्य द्वार पर अपने आर्ट प्रोजेक्ट के जरिए अपना रोष व्यक्त किया। यहां शिल्पकार हंसराज कुमावत द्वारा तैयार बलात्कारियों के 6 पुतलों को उल्टा लटकाया गया। बलात्कारी दरिन्दों को भेडिय़ों के रूप में दर्शाया गया था। यहां अनेक छात्र-छात्राएं हाथों में तख्तियां लिए खड़े थे। इन तख्तियों पर बलात्कारियों को कड़ी सजा देने, महिलाओं के प्रति असामाजिक नजरिया बदलने और महिलाओं को वास्तविक आजादी दिए जाने की बातें लिखी थी।
अचानक बदल गया माहौल 
विरोध प्रदर्शन का माहौल उस वक्त अचानक बदल गया जब कुछ छात्राओं ने भावुकता भरे रोष में पुतलों पर पत्थर और चप्पलें बरसानी शुरू कर दी। इस बीच कुछ छात्राएं समीप के अपने संस्थान से कुछ कोड़े ले आई और फिर बलात्कारियों के पुतलों पर हंटर बरसाने का जो क्रम शुरू हुआ वह दोपहर बाद तक चलता रहा। जब लड़कियां थकने लगीं तो कोड़े बरसाने के इस क्रम में विश्व विद्यालय के छात्र और आम राहगीर भी शामिल हो गए। इस बीच विश्व विद्यालय के सामने कई बार यातायात अवरुद्ध होने के आसार बने। स्थिति को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई। आधा दर्जन बलात्कारियों के भेडि़एनुमा पुतले तैयार करने में शिल्पकार हंसराज और उनके विद्यार्थियों को एक पखवाड़े का समय लगा। यह पुतले चित्रभूमि संस्थान के मीनावाला स्थित स्टूडियो में तैयार किए गए थे। इनमें विद्यार्थी मनीष गोलीमार, कुमारी अंजना, प्रतीक्षा, श्रुति, शिल्पा, ललिता, नैना और शिल्पा जैसे कई शिल्पी विद्यार्थियों का सहयोग रहा।

रविवार, 30 दिसंबर 2012

Rajasthani कलाकारों को गुस्सा क्यों नहीं आता?

 हो सकता है यह सवाल किसी नॉनसेंस से भी बदतर हो लेकिन, लोग सवाल उठा रहे हैं कि
'राजस्थान के  कलाकारों को गुस्सा क्यों नहीं आता?'
ना समझ हैं वो लोग, जो यह सवाल उठा रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि कलाकार एक संजीदा जीव होता है। बात-बात पर गुस्सा दिखाने पर इतनी मुश्किल से जुटाई गम्भीरता और संवेदनशीलता पर बुरा असर पड़ता है। अब दिल्ली में किसी बस में कुछ होता है तो जयपुर या उदयपुर के कलाकार क्या कर सकते हैं? ...और केवल गुस्सा करने से क्या हो जाएगा? अब कलाकार का अपराध और वह भी गैंगरेप जैसे अपराध से क्या लेना-देना? हमारी एक अलग दुनियां है, सुंदर रंगों और भावों वाली संवेदनशील और कोमल दुनियां। यह दुनियां समाज का हिस्सा थोड़े  ही ना है। वैसे तो हम समाज की हर बात , हर विषय को अपनी अभिव्यक्ति प्रदान करते ही हैं। हमारी कृतियों को ऐसे ही समाज का दर्पण तो नहीं कहा जाता ना?
और यह आप कैसे कह सकते हैं कि हम कलाकारों को गुस्सा नहीं आता। अरे बहुत आता है। जब कला शिक्षकों को नौकरी नहीं मिलती तो हमें खूब गुस्सा आता है, जब कला मेले में योग्यजन को पुरस्कार नहीं मिलता तो बहुत गुस्सा आता है। जब हमारी अश£ील पेंटिंग्स को प्रदर्शनी से हटा दिया जाता है तो हमें गुस्सा आता है। जब हमारे कद के अनुसार पद नहीं मिलता तो हम गुस्सा जाहिर करते हैं। अब हर बात पर कहीं भी कैंडल लेकर अपनी बात नहीं कही जा सकती। हम अपनी बात कलात्मक तरीके से कहते हैं, इसके लिए लिए आइडिया आने का इंतजार करना होता है। समय आने पर, वक्त देख कर हम अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त करते हैं। अब यह कोई ऐसी बात भी नहीं लग रही कि अपने पे्रस वाले मित्रों को बुलाकर बयान ही जारी कर दें।
नारी तो वैसे भी हमारा सबसे हिट विषय है, नारी के सम्मान और अस्मिता पर भी हमारी कूंची चलती ही है। ऐसे में हमें पॉजिटिव सोच रखते हुए केवल उसके रूप और सौंदर्य को कैनवास पर उकेरना चाहिए। उसकी प्रगति और उन्नती को दर्शाना चाहिए। गैंगरेप के बाद उसकी अंधेरी जिन्दगी दर्शाना नेगिटिविटी है। आप यह क्यों कहते हैं कि हम समाज का हिस्सा नहीं हैं, हम कलाकार भी अपने ब्रश और कैनवास  एक तरफ रखकर साल में दो बार  बच्चियों की पूजा करते हैं, उनके पैर धोकर उनका आर्शीवाद लेते हैं। साल में दो बार बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। अब किसी रास्ते या बस में दरिन्दों से जूझती हर लड़की हमारी बहन या बच्ची तो नहीं है ना? हम क्यों उस पर अपना वक्त और रंग बर्बांद करें?
हां इस विषय पर कोई ढग की पेंटिंग्स वर्कशॉप आयोजित की जाए , उचित मानदेय दिया जाए... फिर देखिए हमारी अभिव्यक्ति कितनी जल्दी व्यक्त होती है। हमारे मन में भी बहुत दर्द है, सच मानिए, ऐसी घटनाओं के बाद हमारा दिल रोता है, लेकिन इस रुलाई को फूटने में कुछ वक्त लगता है, सही वक्त और मौका तो आने दीजिए। हमारी भावनाओं और संवेदनाओं पर सवाल मत उठाइए, देखिए हम तो इतने संवेदनशील है कि बादल धिरने पर भी छाते रंग देते हैं। टोपियां रंग कर अपनी बात कहते हैं। इस जघन्य घटना पर भी हम चुप नहीं रहेंगे, अपनी बात जरूर कहेंगे पर मौका तो आने दो...।
मानते हैं कि पूरा देश गुस्से में है, देश का गुस्सा देखकर देश के राजनेता सन्न हैं। अब हम भी राजनीति में किसी से कम तो नही हैं ना? इसलिए अभी तेल और तेल की धार देख रहें हैं। एकाएक गुस्सा कैसे जाहिर कर दें?
एक अनुरोध 
कला जगत को कटघरे में लाकर सिर्फ हंगामा खड़ा करना 'मूमल' का मकसद नहीं।
हम वास्तव में बहुत शर्मिन्दा हैं कि हम इस काल में राजस्थानी कला जगत के कल्चर का वह हिस्सा हैं  जो ऐसे मौके पर भी आंखे मुंदे रहा। एक लडकी की मौत ने जहां सारे देश को हिला डाला, हमें नहीं हिला सका।
अब शेष देश की तरह कैंडल जलाने, पेन्टिंग बनाने, पोस्टर उठाने या नारे लगाने का वख्त गुजर चुका है फिर भी स्त्री के सम्मान प्रति इन दिनों कोई ईमानदार अहसास आपकी आंखो में नमी लेकर उबरा हो तो चुपके से एक दीप 'दामिनी' के नाम जला कर उसके लिए इंसाफ की लो जरूर जला देना।

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

Arist Albert Ashok की आधा दर्जन पेंटिंग्स प्रदर्शनी से हटाई

मूमल नेटवर्क, जयपुर। नारी देह के गठन को गहनता से उकेरने वाले कोलकाता के वरिष्ठ कलाकार अल्बर्ट अशोक की आधा दर्जन पेंटिंग्स जयपुर में आयोजित एक प्रदर्शनी से हटा दी गई। यह एक ग्रुप शो था, जो गुलाबी नगर जयपुर के जवाहर कला केंद्र की सुरेख कला दीर्घा में 7 दिसम्बर को शुरू हुआ था। अल्बर्ट अशोक ने बताया कि 7 दिसम्बर को प्रदर्शनी के उद्धाटन के बाद चार दिन तक उनकी पेंटिंग्स अनेक कला प्रेमियों ने देखी और सभी ने उनकी सोच और कुशलता की सराहना की। अचानक 11 दिसम्बर को इन्हें हटा दिया गया।
चक्कर खा गए कलाकार
जब गैलेरी खुली तो उनकी 6 पेंटिँग्स वहां नहीं मिली। जेकेके प्रशासन से बात की गई तो उन्हें केवल यह बताया गया कि वह पेंटिंग्स अश£ील हैं इसलिए उन्हें प्रदर्शित नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनी के अंतिम दिन तक वे अश£ीलता के अर्थ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मायने जानने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें कोई अधिकारी अपनी सीट पर नहीं मिला। अधिनस्थ कर्मचारियों ने न तो किसी अधिकारी से उनकी बात कराई और न ही अधिकारियों के फोन नम्बर भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराए। उन्हें केवल यह बताया गया कि जब  प्रदर्शनी का समय पूरा हो जाए तो आप अपनी पेंर्टिस स्टोर से प्राप्त कर लें।
कलाकारों का विरोध
जयपुर के कुछ कलाकारों ने जेकेके प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध किया है। मूर्तिकार हंसराज कुमावत, फोटोग्राफर सुरेश मीणा व कलाक्षेत्र से जुड़े नरेश नाथ और बहादुर हेमराणा इनमें शामिल हैं। इनका कहना है कि यह कार्रवाई एक कलाकार की अभिव्यक्ति पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई है। उन्होंने बताया कि इससे पहले वरिष्ठ कलाकार जतिन दास की ऐसी ही अभिव्यक्ति वाली पेंटिंग्स को यहां लम्बे समय तक प्रदर्शित किया गया था और उन्हें उन्हें राज्य सरकार ने स्टेट गेस्ट का सम्मान दिया गया था। उनके द्वारा प्रदर्शित पेंर्टिग्स की जानकारी मिलने पर स्टेट गेस्ट होने के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदर्शनी का उद्धाटन करना टाल दिया था। बाद में कला और संस्कृति मंंत्री वीना काक ने यह रस्म पूरी की थी। इसके अलावा भी कलाकारों ने अनेक ऐसे अवसरों का उल्लेख किया जब अश£ील की श्रेणी में चर्चित हुई पेंटिंग्स का प्रदर्शन होता रहा है।
भाव केंद्र में प्रेम  व लगाव
 'परिचय' नाम से हुई इस प्रदर्शनी में कोलकाता के अल्बर्ट अशोक सहित झारखंड के अनूप कुमार सिन्हा, विप्लव रॉय, कार्तिक कुमार प्रसाद, शुभेंदु विश्वास और मुक्ता गुप्ता, कोच्चि के सीए वामन शेनॉय वी व  नई दिल्ली के स्वतंत्र की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई। सात चित्रकारों और एक मूर्तिकार की कृतियां यहां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।  इस प्रदर्शनी में प्रेम और लगाव के भाव केंद्र में थे, वहीं बनारस के घाटों का सौंदर्य उड़ीसा के तटीय इलाकों की हलचल को भी कलाकारों ने अपने सृजन का माध्यम बनाया। झारखंड के वरिष्ठ चित्रकार विप्लव रॉय की कृति में उड़ीसा के तटीय इलाकों की हलचल का चित्रांकन और बनारस के घाटों का सौंदर्य देखने योग्य है। झारखंड की लोक संस्कृति के लैंडस्केप भी विप्लव रॉय के बेहतरीन सृजन में से एक था। विंटेज कार विशेषज्ञ नील बहादुर सिंह कार्की ने इसका उद्घाटन किया। प्रदर्शनी 13 दिसंबर तक चली।
(खुद कलाकार ने इस संबंध में कला जगत के लोगों को एक अपील की है जो नीचे दी जा रही है.)

Dear sir,
This is to inform you that the authority of Jawaharlal Kala Kendra, Jaipur, Rajasthan has removed my six paintings from my ongoing group exhibition on the third day, 11th Dec 2012. He has not given me any written letter nor asked me to remove. He verbally said that some pressure from upper official level he is receiving and his boss an I A S officer had ordered him to remove. Please I request you to ask him what actually happened that he removed my six paintings from the ongoing show. I cant have any document once our exhibition date expires, that is on 13 th dec. (the exhibition started on 7th Dec and will close on 13th dec)

I protest this incident. I protest against the action that the govt gallery has done to me. I feel my rights of expression has been violated.I feel unsafe here.
 
The local Paper and Tv media had broadcasted and published about our exhibition but they don’t know about the incident that the authority has removed my all paintings violating my human rights—freedom of expression, I want to inform all of you about the incident.

Please , take action. Thank you

Albert Ashok
H 63, B P Township, Kolkata- 94
Mobile – (91) 98314 45765

आपके लिए
हालांकि मूमल इन पेंटिंग्स के अश£ील होने या नहीं होने के विवाद में नहीं है, इसलिए उन्हें इस समाचार के साथ प्रकाशित नहीं किया जा रहा, लेकिन जो सुधि पाठक इन्हें देख कर अपनी राय बनना चाहें उनके चाहने पर यह उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके लिए लिखें Pls. send me Albert Ashok's pentings और कृपया यहां मेल करें। moomalnews@gmail.com