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सोमवार, 21 जनवरी 2019

ओपनिंग रशिया-19 में दिखी रशिया की रचनात्मकता

ओपनिंग रशिया-19 में दिखी रशिया की रचनात्मकता
मूमल नेटवर्क, जयपुर। कल 20 जनवरी से सिटी पैलेस म्यूजियम में रशिया के कलाकारों की रचपात्मकता को प्रदर्शित करती एग्जीबिशन ओपनिंग रशिया-19 की शुरुआत हुई। 5, जनवरी तक चलने वाली इस एग्जीबिशन में 40 कलाकारों की पेंटिग सजाई गयी है। प्रदर्शनी के समन्वयक हंसराज कुमावत ने बताया कि, प्रदर्शनी में रूस के स्टारिसता, पोक्रोव, रोस्तोव और व्लादिमिर सहित कई देशों की संस्कृति को दिखाया गया है। यह प्रदर्शनी भारत में रूस के अफानसीनिकितिन की पहली यात्रा के 550वीं वर्षगांठ को समर्पित है।
रशिया और भारत में कला संस्कृति के विभिन्न पक्षों को बढ़ावा देने के मकसद से इस प्रदर्शनी को श्रृंखलाबद्ध रूप से भारत के कई शहरों में प्रदर्शित किया जा रहा है। जयपुर से पहले यह दिल्ली और बीकानेर में प्रदर्शित हो चुकी है। और जयपुर के बाद कोटा, अजमेर और कोलकत्ता में प्रदर्शित की जाएगी।
रूस-भारत रचनात्मक यात्रा यहां भी
रूस व भारत के रचनात्मक यात्रा को दर्शाते हुए आगामी 2फरवरी से 9 फरवरी तक होटल आईटीसी राजपूताना में एक प्रदर्शनी का आयोजन होगा। यह देश-दुनिया के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण संदेश पर आधारित होगी। अप्रेल में इंडो रशियन रेजीडेंसी कार्यक्रम का आयोजन होगा जिसमें भारत व रशिया के कलाकार लाईव पेंटिंग करेंगे।

बुधवार, 23 जनवरी 2013

Jaipur me बलात्कारियों के पुतलों पर बरसे कोड़े

मूमल नेटवर्क, जयपुर। देर से ही सही जयपुर के कला जगत को दिल्ली के 'दामिनी' गैंगरेप के खिलाफ गुस्सा आया। कला संस्थान 'चित्रभूमि...ए आर्ट स्पेस' से जुड़े कला शिक्षकों और उनके विद्यार्थियों ने आज 23 जनवरी को जयपुर मे राजस्थान विश्व विद्यालय के मुख्य द्वार पर अपने आर्ट प्रोजेक्ट के जरिए अपना रोष व्यक्त किया। यहां शिल्पकार हंसराज कुमावत द्वारा तैयार बलात्कारियों के 6 पुतलों को उल्टा लटकाया गया। बलात्कारी दरिन्दों को भेडिय़ों के रूप में दर्शाया गया था। यहां अनेक छात्र-छात्राएं हाथों में तख्तियां लिए खड़े थे। इन तख्तियों पर बलात्कारियों को कड़ी सजा देने, महिलाओं के प्रति असामाजिक नजरिया बदलने और महिलाओं को वास्तविक आजादी दिए जाने की बातें लिखी थी।
अचानक बदल गया माहौल 
विरोध प्रदर्शन का माहौल उस वक्त अचानक बदल गया जब कुछ छात्राओं ने भावुकता भरे रोष में पुतलों पर पत्थर और चप्पलें बरसानी शुरू कर दी। इस बीच कुछ छात्राएं समीप के अपने संस्थान से कुछ कोड़े ले आई और फिर बलात्कारियों के पुतलों पर हंटर बरसाने का जो क्रम शुरू हुआ वह दोपहर बाद तक चलता रहा। जब लड़कियां थकने लगीं तो कोड़े बरसाने के इस क्रम में विश्व विद्यालय के छात्र और आम राहगीर भी शामिल हो गए। इस बीच विश्व विद्यालय के सामने कई बार यातायात अवरुद्ध होने के आसार बने। स्थिति को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस तैनात की गई। आधा दर्जन बलात्कारियों के भेडि़एनुमा पुतले तैयार करने में शिल्पकार हंसराज और उनके विद्यार्थियों को एक पखवाड़े का समय लगा। यह पुतले चित्रभूमि संस्थान के मीनावाला स्थित स्टूडियो में तैयार किए गए थे। इनमें विद्यार्थी मनीष गोलीमार, कुमारी अंजना, प्रतीक्षा, श्रुति, शिल्पा, ललिता, नैना और शिल्पा जैसे कई शिल्पी विद्यार्थियों का सहयोग रहा।