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रविवार, 18 फ़रवरी 2018

नई उम्मीदों के साथ विदा हुआ अंतर्राष्ट्रीय कला मेला

नई उम्मीदों के साथ विदा हुआ अंतर्राष्ट्रीय कला मेला 
कल शाम हुआ समापन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। नयी उम्मीदों और शुभकामनाओं के साथ ललित कला अकादमी आयोजित प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय मेले ने विदाई ली। यह पन्द्रह दिवसीय मेला 4 फरवरी से  इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में कला, कलाकारों व कलाप्रेमियों की गतिविधियों का केन्द्र बना हुआ था। आयोजकों के अनुसार लगभग एक लाख लोगों ने मेले में सजी कृतियों को देखा।
इस कला मेले में यूरोप, पैन एशिया, और अफ्र्रीका  के कलाकारों ने हिस्सा लिया। मेले में शामिल होने वाले कुल कलाकारों की संख्या करीबन एक हज़ार थी। कृतियों के प्रदर्शन के लिए तकरीबन तीन सौ पच्चीस स्टॉल लगाए गए थे।
मेले में शामिल होने के लिए चीनए पेरू, पुर्तगाल, श्रीलंका, पोलैंड, ट्यूनीशिया, मेक्सिको, हंगरी, इंडोनेशिया,
अमेरिका, ईरान, फिजी, फ्रांस, चेक रपब्लिक, यूके, और स्पेन इत्यिादिे देशों से कलाकार आये। कृतियों के प्रदर्शन के साथ पेंटिंग कॉपीटीशन, फिल्म स्क्रीनिंग, आर्ट वर्कशॉप व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय मेले की समाप्ति की घोषणा करते हुए ललित कला अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेला स्वप्न के सच होने के सरीखा है। मेले में लगभग 1000 से अधिक कलाकार हैं और हमने कला के लगभग हर फलक को छूने की कोशिश की है। हमें जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली है वह उत्साहित करने वाली है। मेले में भाग लेने वाले कई कलाकार हम तक आये और हमसे मेले के आगामी सीजन के बारे में पूछा है। मुझे उम्मीद है कि आगामी सीजन में अंतर्राष्ट्रीय कला मेला अपनी सफलता की कहानियाँ दुहरायेगा साथ ही साथ नयी कहानियाँ भी गढ़ेगा।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले का आज अन्तिम दिन

अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले का आज अन्तिम दिन
शाम ढले होगा मेले का समापन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। कला की विविध गतिविधियों का गवाह बना अन्र्तराष्ट्रीय कला मेला आज शाम ढले कलाप्रेमियों से विदा लेगा। भारत के विभिन्न राज्यों के कलाकारों व राजकीय व निजी संस्थाओं के साथ कई देशों के कलाकारों ने मेले में अपनी भागीदारी निभाई।
भारत के दूर-दराज की आंचलिक कला के साथ कला प्रेमियों ने रंगों के माध्यम से गम्भाीर अपराधों में सजा काट रहे तिहाड़ जेल के कैदियों की भाव अभिव्यक्ति को भी देखा और सराहा। मेले में युवा कलाकारों व महिला कलाकारों की भूमिका विशेष रही। अकादमी की स्थापना से अब तक के इतिहास को दर्शाती चित्रमय गाथा का कॉफी टेबल बुक चित्रयात्रा के रूप में विमोचन हुआ। इस पन्द्रह दिवसीय मेले की शुरुआत 4 फरवरी को हुई थाी। मेले का उद्घाटन उप राष्ट्रपति एम. वैकया नायडू ने किया था।
ललित कला अकादमी द्वारा पहली बार आयोजित किये गए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कला मेले ने सरकारी स्तर पर कलाकारों को एक अवसर प्रदान किया है। कला प्रेमी आज मेले के अन्तिम दिन कन्टेम्पररी व मॉडर्न आर्ट के साथ भारत की लोक शैलियों को निहार सकते हैं।

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में कला के विविध रंग

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में कला के विविध रंग
प्रकृति, स्त्रीत्व, आध्यात्म, मानव सृजन के साथ बहुत कुछ
 मेले का तेरहवां दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले के तेरह दिन पूरे हो चुके हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे इस मेले में कला के विविध रंग कलाप्रेमियों को लुभा रहे हैं। मेले में युवा कलाकारों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है।
कलाकारों ने प्रकृति, स्त्रीत्व, आध्यात्मए,मानव सृजन, भक्ति, मातृत्व के साथ जीनवशैली के कई रूप रंगों के माध्यम से चित्रित किये हैं।

युवा कलाकार अनामिका की कला समकालीन है। उन्होने मानव भ्रूण को अपने चित्रण का विषय बनाया है। वी. कमलेश कुमार तमिलनाडु के एक गाँव से हैं। गाँव की जिंदगी और स्त्रीवाद जैसे समयक विषयों पर बनी उनकी मूर्तियों ने कला मेले में लोगों को खासा आकर्षित किया है। उनकी एक मूर्ती अर्धनारीश्वर की परिकल्पना पर बनी हुई है जबकि दूसरी मूर्ती यह दिखाती है कि हर किसी में एक स्त्री बसती है।
दर्शन शर्मा अनंतिम सौन्दर्य पर काम करते हैं। उनकी राधा-कृष्ण की तस्वीरों में आध्यात्म की अलग झलक नजऱ आती है। अपने चित्रों को मिली भरपूर सराहना से वह प्रसन्न हैं। मनीषा श्रीवास्तव भी राधा-कृष्ण की पेंटिंग्स बनाती हैं।

सीमा सिंह दुआ की मूर्तियाँ प्रकृति पर आधारित हैं। सीमा सिंह कहती हैं कि मैं कई बार अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में शामिल हो चुकी हूँ मगर अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में होना अलग अनुभव है। जाकिर खान इंस्टालेशन आर्टिस्ट हैं। मशीनों के पाट्र्स से बनी उनके गिद्ध की प्रतिकीर्ति इंस्टालेशन को भी खूब तारीफ़ मिल रही है।

अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी कहते हैं, यह ललित कला अकादमी के लिए गर्व का विषय है कि हम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले के मंच पर विविध कलाओं को प्रदर्शित कर पा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मेले के आखिरी दो दिन और भी कलाप्रेमी मेले में शरीक होंगे।


अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में अकादमी के इतिहास को बयां करती कॉफी टेबिल बुक का विमोचन

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में अकादमी के इतिहास को बयां करती 
कॉफी टेबिल बुक का विमोचन
कल हुआ 450 मीटर लम्बी पेंटिंग का प्रदर्शन
मेले का बारहवां दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले का बारहवां दिन विशेष गतिविधियों का साक्षी रहा। अकादमी का परिचय देती काफी टेबिल बुक का विमोचन हुआ। इसके साथ ही चार सौ पचास मीटर लम्बी विशालकाय पेंटिंग का प्रदर्शन हुआ।
कॉफी टेबल बुक का विमोचन
चित्रयात्रा का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने किया।  इस अवसर पर अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी उपस्थित थे। चित्रयात्रा के विमोचन पर राय ने ललित कला अकादमी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, यह कॉफी टेबल बुक ललित कला अकादमी के इतिहास को बखूबी दर्शा रही है। मुझे उम्मीद है कि इसे देखकर और पढ़कर लोगों में ललित कला के साथ-साथ कला और संस्कृति के प्रति रूचि बढ़ेगी।
इस अवसर पर अपने उद्गाार व्यकत करते हुए कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, चित्रयात्रा ललित कला अकादमी के 1954 से लेकर अब तक 2017 के इतिहास का विवरण देती है। यह पुस्तिका अकादमी के स्वर्णिम इतिहास की बानगी है।
विमोचन के पश्चात राय ने कलाकारों से मुलाक़ात की और उनका उत्साहवर्धन किया।
क्या है इस बुक में
अपने लम्बे इतिहास के प्रति आगामी पीढिय़ों और जनता को आकर्षित करना और उनमे नए विचारों का समावेश करना लगभग प्रत्येक संस्था के मूलभूत सिद्धांतों में गिना जाता है। ललित कला अकादमी भारत सरकार के अंतर्गत काम करने वाली एक स्वायत्त संस्था है जिसका अपना एक इतिहास है। अपने इसी इतिहास को संस्था ने अपने एक कॉफी टेबल बुक चित्रयात्रा के ज़रिये दिखाया है। 
इस कॉफी टेबल बुक चित्रयात्रा में ललित कला अकादमी द्वारा 1954 से 2017 तक के सफऱ में प्राप्त उपलब्धियों को तस्वीरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। उम्दा छायाचित्रों से सजी यह बुक ललित कला अकादमी के पूरे सफर को बेहद खूबसूरती से दिखाती है। अकादमी ने किस प्रकार से स्वयं को, कला विशेषज्ञों, कला विचारकों और कलाप्रेमियों को स्थापित किया, इस बुक में उसकी कहानी दर्ज है।
450 मीटर लम्बी पेंटिंग का प्रदर्शन

कल बारहवें दिन मेले में साढ़े चार सौ मीटर लम्बी पेंटिंग को प्रदर्शित किया गया। इस विशालकाय पेंटिंग को प्रदर्शित करने के लिए पूरी मानव श्रृंखला बन गई। यह पेंटिंग बिहार के आर्टिस्ट अनिल कुमार की कृति है। कलाकार ने अपने पैतृक स्थान अंग प्रदेश को इस लम्बी पेंटिंग में बहुत ही खूबसूरती के साथ दर्शाया है।
पेंटिंग प्रदर्शन में लगी मानव श्रृंखला में पाँच सौ से ज्यादा लोग शामिल थे जो स्वयं में एक रिकॉर्ड था। इनमें् कलाकारों, कलाप्रेमियों के साथ पर्ल अकादमी और दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी इसमें हिस्सा लिया था।
इस मानव श्रृंखला पर बात करते हुए अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, हम बहुत खुश है कि हमें इतनी बड़ी पेंटिंग को मानव श्रृंखला के ज़रिये प्रदर्शित करने का मौका मिला। इस पेंटिंग को देखने से साफ़ पता चलता है कि कलाकार ने कितनी मेहनत और उर्जा लगायी होगी। यह पेंटिंग कलाकार के अपनी जगह से प्रेम का भी सूचक है।
क्या है पेंटिंग में
पेंटिंग में अंग प्रदेश की सैकड़ों-हज़ारों साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति को विस्तृत रूप सेें दिखाया गया है। अंग प्रदेश की महसभारतकालीन महत्ता को भी पेंटिंग में दर्ज किया गया है। कहते हैं कि महान राजा कर्ण अंग प्रदेश से ही थे। अनिल कुमार की इस कृति में बिहार के परिवेश के भौगोलिक और सामजिक अवयव को दिखाया गया है। वो चाहे सुलतानगंज से देवघर तक की 105 किलोमीटर लम्बी यात्रा हो या फिर मंदार पर्वत का इतिहास। भागलपुर की टसर रेशम बुनाई कलाए भी इस मैराथन पेंटिंग में नजऱ आती हैं।
कौन हैं अनिल कुमार
शारीरिक रूप से सीमित दृष्टि और सीमित श्रवण क्षमता वाले कलाकार अनिल कुमार कुछ साल पहले तक एक विद्यालय में कला शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने अपनी पेंटिंग के प्रदर्शन पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि, मैं बहुत खुश हूँ कि मेरी कला यहाँ प्रदर्शित हुई है। मैं अपनी जगह की पुरातन संस्कृति को लोगों को सामने लाना चाहता था। खुश हूँ कि ललित कला अकादमी के सहयोग से मैं यह कर पाया। मेरी कामना है कि मेरी जगह के और कलाकार सामने आयें और लोगों को अपनी कला दिखाएं।
कल की सांस्कृतिक प्रस्तुति में वल्र्ड एथनिक म्यूजिक एन्सेम्बल की शानदार प्रस्तूति हुई। वल्र्ड एथनिक म्यूजिक एन्सेम्बल दुनिया के पाँच देशों के कलाकारों का समूह है, जो कला के विभिन्न रंग मसलन हिन्दुस्तानी शास्त्रीय, विदेशी लोक संगीत और जैज़ जैसे संगीत की प्रस्तुति देता है।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में शिव प्रेरणा से सजी कलाकृतियां

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में शिव प्रेरणा से सजी कलाकृतियां
मेले का ग्यारहवां दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। अकादमी आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले के ग्यारहवें दिन हमने ऐसे कलाकारोंं की पेंटिंग्स देखीं जिन्होने शिव के रूप को अपनी-अपनी कल्पनाओं के रंगों से साकार किया है। कई चित्रों ने अंतर्राष्ट्रीय कला मेले को भक्ति के रंग में रंग सा दिया है। शवो अहम् का मंत्र कलाकृतियों के ज़रिये गूंज सा रहा है।
शिव के विशाल स्वरूप की परिकल्पना से प्रेरणा प्राप्त कर अपनी कला को संवारने वाली कलाकर अनिता दिनेश कहती हैं कि वह पिछले चौदह सालों से शिव परिकल्पना पर काम कर रही हैं। उनके चित्रों में शिव स्वरूपा काशी की पृष्ठभूमि में सहज ही नजऱ आता है।
कलाकार सोनाली कुमार ने अपनी कृतियों में शिव के उत्सवी रूप का चित्रण किया है। उनके चित्रों में शिव पार्वती के साथ नृत्य करते हुए नजऱ आते हैं। उनके चित्रों की विशेषता है कि उनमें शिव का त्रिशूल कहीं नजऱ नहीं आता।
एक स्टॉल पर कुल तेरह कलाकारों के चित्र प्रदर्शित हैं। इन सभी कलाकारों ने अपनी कला को शिव की परिकल्पना का आधार दिया है। इनमें से एक कलाकार श्याम नारायण यादव कहते हैं कि, हम शिव का चित्रण इसलिए करते हैं कि वह हमें उर्जा से भर देते हैं।
कलाकार विभा सिंह शिवशक्ति परिकल्पना पर काम कर रही हैं। वह शिव के विशेष गुण और मॉ पार्वती शक्ति को अपनी कृतियों में प्रदर्शित करती हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत कल का मुख्य आकर्षण हंगरी के कलाकार नोर्बेर्ट केल का पियानो वादन रहा। केल हंगरी के प्रख्यात संगीतकार हैं जो लोक धुनों को अपने संगीत में पिरोते हैं। संध्या के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल शेखर दत्त और विशिष्ट अतिथि के रूप में हंगरी के सूचना और संस्कृति केंद्र के निदेशक ज़ोल्टन विल्हेल्म मौजूद थे। कल पेंटिंग प्रतियोगिता और क्ले कार्यशाला का भी आयोजन हुआ।

कलाकारों के अनोखे अन्दाज नजर आए कला मेले में

कलाकारों के अनोखे अन्दाज नजर आए कला मेले में 
कला मेले का दसवां दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे अकादमी आयोजित प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले में कई कलाकार अपनी अनोखी संकल्पनाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं।
अपनी अनोखी परिकल्पना के साथ मानवी प्रभा ने अपनी पेंटिंग्स प्रदर्शित की हैं। उनकी कृतियों में परयावार्ण संरक्षण की बात उबर कर सामने आती हैं। उनका चित्रण वनों के कम होने, वर्षा जल के दूषित होने जैसे विषयों पर आधारित है। मानवी का कहना है कि, मुझे प्रकृति से प्रेम है। मैं चाहती थी कि मैं कुछ ऐसा करूँ जिससे लोगों में प्रकृति को लेकर प्रेम पैदा हो जाए।
आन्ध्र प्रदेश से आये हुए वी.राम कृष्ण अपनी चित्रकारी में शहर के भीड़.भाड़ को ज्यों का त्यों रख देते हैं। उनकी एक पेंटिंग  में बस्ती की पेचीदगियाँ ज्यों की त्यों दिख जाती हैं। उनका कहना है किए वह मूल रूप से गाँव के निवासी हैं। जब वह शहर आये तो उन्हें न तो खुले मैदान मिले न ही सांस लेने की कोई मुफीद जगह। उनकी चित्रों में महानगरों की वही जि़ंदगी है जो आम लोग जीने को मजबूर हैं।
कुनाल कपूर मूर्तिकार हैं। वह ऐसी मूर्तियाँ बनाते हैं जिन्होंने पोशाक तो धारण की हुई होती है मगर उन पोशाक से शरीर गायब होते हैं। जब कुनाल से उनकी मूर्तिकारी की संकल्पना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह आत्मा का चित्रण करते हैं। वह आत्मा जिसका चेहरा नहीं होता, जो भ्रमण करती रहती है और कभी नहीं मरती।
अंजलि की कलाकारी अलग तरीके की है। वह सादे पन्ने की जगह किताबों के पुराने पन्ने पर पेंटिंग करती हैं। जब उनसे इसकी वज़ह पूछी गयी तो उन्होंने खुल कर बताया कि सादे पन्ने पर खींची गयी रेखाएं उन्हें डराती हैं जबकि इन लिखे हुए पन्नों पर खींची हुई रेखाएं सहज मालूम होती हैं। वह अपनी कलाकृति की सखी बनना चाहती थीं, अत: उन्होंने लिखे हुए पन्नों पर पेंट करना शुरू किया।
कलाकार राघवेन्द्र राव मेले में अपनी लघु पॉटरी और संकलन लेकर आये हैं। विगत तीन वर्षों से दवाई की छोटी छोटी शीशीयों को संकलित करके उन्होंने खूबसूरत कृतियाँ तैयार की हैं जिन पर बरबस ही नजऱ चली जाती है और हटाए नहीं हटती । उनकी यह लघु कलाकृतियां मेले में आने वाले लोगों को पसन्द आ रही है।
दसवें दिन आज लोगों को  सजी हुई कलाकृतियों के साथा श्रृंखला नृत्य समूह द्वारा प्रस्तुत लोकनृत्य खूब भाया। इन नृत्य प्रस्तुतियों में रासलीला, बिहू, गरबा, लावणी, कमरा माडिया, झूमर, और हरियाणवी नृत्यों की ताल पर कलाकारों की नृत्य प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।
खुशियों और विश्वबंधुत्व का सन्देश फैलाती इन नृत्य प्रस्तुतियों को देख अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने अपना हर्ष जताते हुए कहा कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में हम हर प्रकार की कला के लिए उचित मंच का निर्माण करना चाहते हैं।शाम को ख़ास तौर पर नृत्य, संगीत और नाट्य कला को प्रश्रय दिया गया है। न सिर्फ भारतीय कलाकार बल्कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया के अन्य देशों के कलाकार भी यहाँ अपनी कला प्रस्तुत कर चुके हैं या फिर करने वाले हैं। आज भारत के विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य प्रस्तुत हुए जिन्होंने विश्वबंधुत्व का सन्देश भी दिया। ललित कला अकादमी इन सुन्दर कोशिशों की तारीफ़  करती है।
कल शाम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान तिहाड़ के भूतपूर्व महानिदेशक सुधीर यादव भी मौज़ूद थे।
फिल्म स्क्रीनिग सेशन में दर्शकों ने एम.एफ. हुसैन की कला पर केन्द्रित फिल्म का मज़ा लिया। कल मेले के दसवें दिन भी बड़ी संख्या में स्कूली छात्रों ने चित्रकारी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। 

मंगलवार, 13 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में लगी वायलिन बनाने की कार्यशाला

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में लगी वायलिन बनाने की कार्यशाला
मेले का नवां दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। दुनिया भर के कलाकारों और कलाओं का संगम बन कर उबरे पहली बार आयोजित हो रहे अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले का नवां दिन कुछ खास रहा। कल चेक कलाकारों ने वायलिन तैयार करने की कार्यशाला का आयोजन किया।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ललित कला अकादमी आयोजित मेले में आने वाले लोगों के साथ कलाकारों की रुचि तब प्रभावित हुई जब चेकिया, चेक रिपब्लिक के कलाकार जेरोस्लाव सेवेंसी के द्वारा वायलिन वर्कशॉप लगाई गई। इसमें सेवेंसी ने बहुत ही खूबसूरत अन्दाज में वायलिन बनाने के गुर सिखाए। इसके साथ ही सेवेंसी ने शाम ढले के सांस्कृतिक कार्यक्रम में वायलिन पर मधुर धुने बजाकर लोगों को मोहित किया। कलाकारों को सम्मोहित करते हुए सेवेंसी स्टेज छोड़ अपने देश की परम्परागत धुनों की मधुरता बिखरते हुए कला स्टॉल्स पर भी गए। मेले का नवां दिन लगभग चैक गणराज्य के नाम रहा। फिल्म स्क्रीनिंग के तहत भी चेकिया की एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मेले में आने वाले लोग चैक स्टॉल्स पर सजी कला को निहारने से स्वयं को नहीं रोक पाए।

मेले के आरम्भ होने के साथ ही विदेशी कलाकारों ने शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रंग भरे हैं। मेले के पहले दिन श्रीलंका के कलाकारों  ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया था जबकि चौथे दिन पुर्तगाल के नुनो फ्लोर्स ने वायलिन बजाकर लोगों का मनोरंजन किया था। मेले के सातवें दिन यूनाइटेड किंगडम के एक समूह ने चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कृति उसने कहा था पर प्रभावशाली नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया था। इसके साथ ही फिजी के कलाकार सत्संग प्रस्तुत कर चुके हैं और आने वाले दिनों में हंगरी, त्रिनिदाद और टोबागो के कलाकार अपनी कला प्रदर्शित करेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों की सक्रिय भागीदारी पर अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा किए हम इस
बात पर बेहद खुश हैं कि अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में पेंटिंग और मूर्तिकारी से लेकर नृत्य, संगीत, नाट्य के साथ लगभग हर तरह की कला प्रदर्शित की जा रही है। हमारी कोशिश एक विशेष तरीके से मेले को आयोजित करने की थी और हमारे अंतर्राष्ट्रीय
भागीदार हमें अपने हमारे लक्ष्य के करीब ले जा रहे हैं। कल मेले में विद्यार्थियों की बहुतायत थी जिन्होंने कई तरह की कार्यशालाओं और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
आज मेले का प्रमुख आकर्षण यूनाइटेड किंगडम की कलाकार देविका राव के यक्षगान की प्रस्तुति है।

रविवार, 11 फ़रवरी 2018

अकादमी स्कालर्स की कृतियों में दिख रही नवीनता

अकादमी स्कालर्स  की कृतियों में दिख रही नवीनता
इंटरैक्टिव सेशन में मुखर हुए कलाकार
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी आयोजित प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले में अकादमी के विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्रों के स्कॉलर्स की कृतियों की नवीनता लोगों को लुभा रही है। यह स्कालर्स विभिन्न विधाओं के जरिए अपनी कला को अभिव्यक्त कर रहे हैं।
चेन्नई केंद्र से आए दुर्गा प्रसाद चगंती मेले में टेराकोटा कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। पवन कयितकर, प्रकाश एन, सचिन मंचारे, सरूप एम् वी, शेकप्पा बीएन की कृतियां लोगों को लुभा रही हैं। सचिन मंचारे अपनी कृतियों में प्रकृति और मनुष्यों के बीच के सम्बन्ध दर्शाते हैं।
लखनऊ से दिव्या चतुर्वेदी, करण सवनानी, रवी कुमार अग्र्हारी, रश्मि सिंह और विनोद कुमार अपनी कलाकृतियों के साथ मेले में उपस्थित हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित विवेक कुमार सिंह हालांकि बोलने में असमर्थ हैं मगर उनकी कला उनकी आवाज बन कर उनके मनोभावों को बेहद खूबसूरती से कैनवास पर उकेर देती है।
युवाओं की मेले में भागीदारी व उनका रुझान देखते हुए सी.एस. शेट्टी ने कहा कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेले के जरिये कोशिश थी कि कला का एक सुखद वातावरण तैयार किया जाए और मैं खुश हूँ कि हम सफल हो रहे हैं। हमारे स्कॉलर के साथ-साथ मेले में उपस्थित हर कलाकार मेले को सफल बनाने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं।
कल रवीवार के अवकाश के चलते मेले में लोगों की खासी संख्या नजर आई। कलाप्रेमियों के साथ मेले के आठवें दिन कला संग्राहकों ने भी अपनी उपस्थिती दर्ज करवाई। मेले में आयोजित लाइव पेंटिंग और पेंटिंग प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों की लोगों ने सराहना की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियों में मेमेसिस ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक अब बस और यश चौहान के निर्देशन में सांस्कृतिक कला मंच की प्रस्तुति सुन्दर काण्ड का बेले रूप लोगों ने खासा पसन्द किया। कला फिल्म सेशन के तहत मेक्सिको व यूरोप की फिल्म दिखाई गई। 4 फरवरी से आरम्भ हुए इस कला मेले का समापन 18 फरवरी को होगा। 

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

कन्टेम्पररी के साथ परम्परा को दर्शा रहा अंतर्राष्ट्रीय कला मेला

कन्टेम्पररी के साथ परम्परा को दर्शा रहा अंतर्राष्ट्रीय कला मेला
मेले का सातवां दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। 4 फरवरी से आरम्भ हुए ललित कला अकादमी आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में कलाकारों व कला प्रेमियों की रेलमपेल बनी हुई है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे 15 दिवसीय मेले में कन्टेम्पररी व मॉडर्न पेंटिंग्स के साथ भारत के कोने-कोने से आई पारम्परिक कलाकृतियां भी अपना आकर्षण बनाये हुए हैं।
कला मेले में  टेराकोटा, मिथिला, मधुबनी, गोंड, केरल की भित्ति चित्रकारी, लाख चित्रकारी, पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर और त्रिपुरा की परम्परागत चित्रकारी मेले में पारंपरिक कला के आकषर्ण को बनाये हुए हैं।
अकादमी के चेन्नई सेंटर के स्कॉलर चगंती दुर्गा प्रसाद की टेराकोटा कृतियां लोगों का मन मोह रही हैं। लाख की अनुपम चित्रकारी करने वाले इकलौते कलाकार उडीसा के दास अपनी कला के जरिये मेले में छाये हुए हैं। भारतीय लोक परम्पराओं का नजारा दर्शाती कृतियों के मध्य सोने के वर्कों से बनी मशहूर दक्षिण भारतीय कला तंजोर पेंटिंग भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
भारतीय कलाकारी के विविध रंगों के बारे में बात करते हुए ललित कला अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, भारत कला और कलाकारों का देश है। हमारी कोशिश रहती है कि भारत की हर कला को उचित मान-सम्मान मिले। हमें अत्यंत ख़ुशी है कि अंतर्राष्ट्रीय कला मेले के माध्यम से हम अपनी कोशिशों में काफी हद तक कामयाब हो रहे हैं।
कल मेले के सांतवें दिन भी विद्यार्थियों के बीच पेंटिंग प्रतियोगिता का दौर चला। पेपर माशे वर्कशॉप में  विनोदी गर्ग ने लोगों के बीच इस कला का जीवन्त प्रदर्शन किया और कला की बारीकियां सिखाईं। कल मेक्सिकन फिल्म अ मायग्रांटस जर्नी की स्क्रीनिंग की गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अकादमी की प्रस्तुति द ट्रोथ-उसने कहा था का मंचन किया गया। यह मंचन चंद्रधर शर्मा गुलेरी लिखित उक प्रेम कहानी का नाट्य रूपान्तरण था।
18 फरवरी तक चलने वाले इस कला मेले में विदेशी कलाकारों ने भी महत्पूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें अधिक संख्या दक्षिण एवं लैटिन अमेरिकी देशों के कलाकारों की है। पेरू के स्टॉल में पेरू की जनजातियों को लेकर चित्र प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें वहां की जनजातियों को पहनावे, रहन-सहन और सांस्कृतिक प्रतीकों को दर्शाया गया है।  पेरू की लोककलाओं और पेरू के इतिहास की जानकारी का भी प्रदर्शन किया गया है। लगभग 30 स्टॉल्स पर विदेशी कलाकार अपनी कला का प्रदर्श कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से चीन, वेनेजुएला, पेरू, पुर्तगाल, श्रीलंका, पौलेंड, ट्यूनिशिया, मैक्सिको, बांग्लादेश, िफजी, पापुआ न्यूगिनी, यूके, स्पेन, ब्राजील के कलाकारों की कृतियां सराही जा रही हैं।

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में विद्यार्थियों ने भरे रंग

अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में विद्यार्थियों ने भरे रंग
मेले का छठा दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले का छठा दिन बच्चों की चहल-पहल और रंगों की हलचल से गुलजार रहा। कला विद्यार्थियों व स्कूली बच्चों के लिए आयोजित की गई पेंटिंग कॉम्पीटीशन में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
पेंटिंग प्रतियोगिता में गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूलए मोलारबंद नयी दिल्ली के साथ बैनयान ट्री स्कूल, कोलाज ऑफ़ आट्र्स विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाओं को रंगों के जरिये साकार किया।
मेले में एक स्टॉल पर कैदियों द्वारा बनाई गई कृतियां प्रदर्शित की गई हैं जो लोगों द्वारा सराही जा रही हैं। कैदियों का हौसला बढ़ाने और मेले का जायजा लेने के लिए कला मेले मेंं तिहार जेल के निदेशक डीजी अजय कश्यप भी नजऱ आए। एक बातचीत के दौरान डीजी कश्यप ने कहा कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेला एक बहुत ही अचछाा कदम है। तिहार इसका हिस्सा बन कर काफी खुश है। यह हमारे लिए सम्मान का विषय है कि इसके ज़रिये हमें अपने बंदियों की प्रतिभा को दुनिया को दिखाने का मौका मिल रहा है।

कैदियों की कला के साथ अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कलाकार भी अपनी कृतियों के साथ मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं। इन कलाकारों में अमित दत्त, हरीश श्रीवास्तव, उमेश कुमार, राजेश खन्ना और इस साल के विजेता शिव कुमार एवं विवेक कुमार जो रीजनल सेंटर गढ़ी के रिसर्च स्कॉलर भी हैं की कृतियां लोगों को पसन्द आ रही हैं।
पुरस्कार विजेता कलाकारों के मेले में शामिल होने पर ख़ुशी जताते हुए ललित कला अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट़टी ने अपनी खुशाी जाहिर करते हुए कहा कि, ललित कला अकादमी के लिए यह गौरव की बात है कि हमारे पुरस्कार विजेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय कला मेला में हिस्सा लिया है। उन्होंने हमेशा हमारा मान बढ़ाया है और उनके मेले में शामिल होने से हमारा मनोबल कई गुणा बढ़ गया है।
कल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अनामिका के पॉप गायन और तनुश्री के नृत्य ने उपस्थित जनों का मनोरंजन किया।

कलाकारों की सोच, आमजन तक पहुंचे कला

कलाकारों की सोच, आमजन तक पहुंचे कला
अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में कई कलाकारों ने रखी है कृतियों की कम कीमत
मेले का पांचवा दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। शहर इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में चल रहे अन्तर्राष्ट्रीय कला मेले में कलाकारों की सोच आम जन के प्रति सकारात्मक है। अपनी कला को वो खास वर्ग से निकाल ककर आम लोगों के घरों में सजाना चाहते हैं। इसी सोच को सामने रखते हुए कई आर्टिस्ट्स ने अपनी कृतियों की कीमत को कम रखा है, जिससे वो बायर्स की परचेजिंग पॉवर के दायरे में आ सके।
मेले में विश्व प्रसिद्ध कलाकारों की कृतियां भी प्रदर्शित हैं जिनमें से रामकिंकर बैज, नंदलाल बोस, मुकुल डे, सोमनाथ होरे, एम.एफ. हुसैन,  एस.एच. रज़ा, परितोष सेन, के.जी.सुब्रमनियन, बिनोद बिहारी मुखर्ज़ी, प्रोकाश कर्मकार, जोगेन चौधरी, सुहास रॉय, सुभाप्रसन्ना, राबिन मंडल, जे.एम.एस मणि, टी. वैकुण्ठम, के. लक्षमण गौड़, हिम्मत शाह, धीरज चौधरी, लालू प्रसाद शॉ जैसे कलाकारों की कृतियां शामिल हैं।
इन कलाकारों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी पर बात करते हुए अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, हम सौभाग्यशाली हैं कि एम.एफ. हुसैन,  एस.एच. रज़ा, और बिनोद बिहारी मुखर्ज़ी जैसे कलाकारों के काम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में प्रदर्शित हैं। उनकी हरेक कलाकृति अपूर्व है। मुझे लगता है कि हर कला प्रेमी को यह मौका मिलना चाहिए कि इन कलाकारों के काम को देखकर प्रेरित हों।
शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम मेेंं फिजी के श्री सत्संग रामायण मण्डली की कला प्रस्तुति का लोगों ने लुत्फ उठाया। इससे पूर्व एक इंडोनेशियन फिल्म की स्क्रीनिंग के साथ मार्लो मीट्स एंटोगी गोर्मे एट ब्रिटिश म्यूजियम फिल्म की भी स्क्रीनिंग हुई।

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

कलाकारों का परिचय क्षेत्र बढ़ा, हुए अनुबंध


कलाकारों का परिचय क्षेत्र बढ़ा, हुए अनुबंध
अंतर्राष्ट्रीय कला मेला बना जरिया
कला मेले का चौथा दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला अकादमी आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में अब कलाकारों और कला कद्रदानों के मध्य परिचय के रंग गाए़े होने लगे हैं। कला पारखियों द्वारा कलाकारों से उनकी कृतियों के लिये अनुबंध किये जा रहे हैं।
दुनिया भर की कलाओं और कलाकारों को एक मंच पर लाने के लिये आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में कई आकर्षणों के बीच एक बड़ा आकषर्ण है कलाकारों को उनके कलाकार्य हेतु व्यक्तियों व संस्थाओं द्वारा अनुबंधित करना।
केरल की पारंपरिक ख़ूबसूरती को दिखाती भित्ति चित्रकार जी.अझिकोडे की कला से प्रभावित होकर इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र ने उनसे तीन साल का अनुबंध किया है। कलाकार ने अपनी इस सफलता का श्रेय मेला आयोजक ललित कला अकादमी को दिया है।

दिल्ली की 26 वर्षीय युवा कलाकार अनामिका को मेले का प्रतिभागी बनने का फायदा यह मिला कि, उन्हें दिल्ली की मशहूर रोकी आर्ट गैलरी में चित्र प्रदर्शित करने का अनुबंध हासिल हुआ।

अनमिका की उम्र की प्रतिभा पहली बार इस स्तर के किसी कला आयोजन में शामिल हुई हैं। देश.विदेश के कलाकरों से मिलने के साथ वो आम कला.प्रेमियों से भी मिल पा रही हैं और उनसे मिलने वाली प्रशंसात्मक टिप्पणियों से काफी उत्साहित भी हैं। उन्होने बताया कि, बहुत सारे लोग मेरी पेंटिंग देखने और खरीदने आ रहे हैं। मैंने अपनी कलाकृतियों का मूल्य कम रखा है ताकि वह हरेक कलाप्रेमी तक पहुँच सके।
अपनी पेंटिंग्स में शहर का मूल रूप दिखाने के लिए विख्यात आर्पण भौमिक अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में सबसे ज्यादा सराहे जाने वाले कलाकारों में से एक हैं। उन्होंने मेले में अपनी छोटी पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की है। उनकी पेंटिंग्स के बारे में बताते हुए उनके मित्र अरूप चटर्जी ने बताया कि, स्टॉल की एक तरफ़  की दीवार अर्पण की मिनी पेंटिंग्स से सजी हुई थी। उनमें से अधिकांश बिक चुकी हैं। इन पेंटिंग्स को बनाने के पीछे अर्पण का उद्देश्य यह था कि सुंदर व कलात्मक कृतियों को आम लोगों के घरों में भी जगह मिल सके।

कला मेले का चौथा दिन कलाकारों और कलाप्रेमियों की चहल-पहल से आबाद रहा। शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुर्तगाल के नुनो फ्लोर्स के वायलिन वादन का उपस्थित जनों ने आनन्द उठाया।
फिल्म स्क्रीनिंग के तहत पुर्तगाली फिल्म लान्सेज़ एट डिस्टेंस की स्क्रीनिंग हुई। इसके साथ ही कलाकार द्वय गिल्बर्ट और जॉर्ज पर 26 मिनट लम्बी फिल्म एवं कलाकार एस.एच रज़ा पर 51 मिनट अवधि की फिल्म की भी स्क्रीनिंग की गई।
अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने एक बातचीत के दौरान कहा कि, इस कला मेले के आयोजन के पीछे का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर एक कलाकारों और कलाओं को एक दूसरे से जोडऩा है। मेरा मानना है कि कला सिर्फ  कुछ लोगों की थाती नहीं है, उसे आम लोगों से भी बराबर प्यार और सराहना मिलनी चाहिए। मैं खुश हूँ कि कला मेला अपने उद्देश्य में सफल हो रहा है।
मेले का पाँचवा दिन अध्यात्म के नाम रहेगा। आज आठ फरवरी को फजी की रामायण मण्डली के द्वारा सत्संग किया जाएगा।

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

अंतर्राष्ट्रीय कला मेला में महिला कलाकारों की संख्या अधिक


अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में लहराया महिला कलाकारों का परचम
कला मेले में महिला कलाकारों की संख्या अधिक
कला मेले का तीसरा दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। ललित कला केंद्र द्वारा आयोजित व इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में  चल रहे पन्द्रह दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कला मेले में महिला कलाकारों की अधिकता है। अपनी-अपनी कला को प्रदर्शित करती महिलाओं को देखकर नारी सशक्तिकरण की बात सार्थक लग रही है। इस मायने में यह मेला कला के साथ-साथ सामजिक उत्थान का भी केंद्र बनता जा रहा है।

प्राची शाह महाराष्ट्र के कराड से हैं। वह यहाँ अपनी चार महिला मित्रों के साथ आई हैं। उनके स्टॉल पर कंटेम्पररी, लोक कला, मेडीटेटिव जेंटेंगल कला का एक खूबसूरत सम्मिश्र नजऱ आया जब उनसे पूछा गया कि उन्हें इस कला मेले में बाकी से क्या अलग लगा तो उन्होंने खुश होकर बताया कि, यहाँ उन्हें दुनिया भर की कला देखने और सीखने का मौका मिल रहा है। और सबसे बड़ी बात यह कि यहां काफी ज्यादा संख्या में महिला कलाकार हैं, जिससे उनकी ख़ुशी और बढ़ गयी है।

अपने खूबसूरत स्टॉल पर कलाकारी में लीन राम बाई मेले में शामिल होने के लिए भोपाल से आई हैं। राम बाई गोंड लोक चित्रकला में पारंगत हैं उनकी ख़ूबसूरत कलाकारी से उनकी स्टॉल सजी हुई है। राम बाई से जब कला मेले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने छूटते ही कहाए कि, इस मेले में दुनिया हमारे गांव की चित्रकला देखेंगी। उल्लेखनीय है कि, गोंड चित्रकला भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूह गोंड आदिवासियों की पारंपरिक चित्रकला है।
लखनऊ की युवा स्कॉलर रश्मि सिंह व अन्य युवा महिला कलाकारों की कृतियां भी आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं।

महिलाओं की इस विस्तृत भागीदारी पर ललित कला अकादमी के प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, हमारा उद्देश्य सभी योग्य कलाकार को एक उचित प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध करवाने का था। यह बता कर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि कला मेले में महिला कलाकारों ने अधिक से अधिक भागीदारी दर्ज की है। उनकी वज़ह से कला मेले को वहउच्च स्थान प्राप्त हो गया है कि हम गर्व महसूस कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय कला मेला महिला सशक्तिकरण का कलामय तरीका है। यह कलाकार दुनिया के कोने-कोने से आये हैं। कुछ विदेश से हैं तो कुछ भारत से।
कला मेले के तीसरे दिन मेले में खूब हलचल व उत्सव का माहौल रहा। मैजिकल पेंटर, पेपरमेशी
वर्कशॉप, पॉटरी वर्कशॉप के साथ-साथ कला प्रेमियों ने शाम को सबरंग ग्रुप द्वारा प्रस्तुत लाइव बैंड का भी लुत्फ़ उठाया।
प्रतिदिन दिन में 12 से रात के 8 बजे तक कलात्मक गतिविधियों की छटा बिखेरने वाले प्रथम अन्तरराष्ट्रीय कला मेले में कल चौथे दिन पुर्तगाल के नुनो फ्लोर्स के द्वारा वायलिन वादन होगा। साथ ही एक पुर्तगाली फि़ल्म की स्क्रीनिंग भी होगी।

सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

मेला बनेगा तीर्थस्थल, देश-दुनिया के लोग लेंगे प्रेरणा- कैलाश सत्यार्थी
प्रथम अन्तरराष्ट्रीय कला मेले का दूसरा दिन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे पहले अंतरराष्ट्रीय कला मेले का रंग और गहरा हो गया जब नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी अचानक मेला देखने पहुंचे। विभिन्न कलाकारों से बातचीत करते हुए आशा जताई कि भविष्य में यह मेला एक तरीके का तीर्थ स्थल बनेगा, जहां आकर देश और दुनिया के कलाकार प्रेरणा लेंगे। उन्होंने आयोजकों से मेले में देश भर के स्कूली बच्चों का प्रतिभाग सुनिश्चित करने को कहा, जिससे वे देश की संस्कृति व समृद्धि को एक मंच पर देख सकें। मेले में घूमते हुए डॉ सत्यार्थी कई कलाकारों से मिले और उनसे उनकी कला के बारे में बात-चीत की. उन्होंने ललित कला अकादमी एवं  प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी को इस भव्य कला मेला के आयोजन की बधाई दी। उन्होने खुशी जताई कि, पहली बार भारत में इस तरह का कला मेला लगाया जा रहा है।
यह पूछे जाने पर कि अंतर्राष्ट्रीय कला मेला क्या संभावित परिवर्तन ला सकता है, उन्होंने कहा कि, आर्ट इतनी गहरी चीज़ है और इतनी सरल भी है कि जो बात बड़ी से बड़ी किताबें नहीं कह सकती वो कला के माध्यम से कह दिया जाता है। मुझे लगता है कि देश भर के स्कूली बच्चों को यहाँ आना चाहिए और हमारी संस्कृति की समृद्धि को देखना चाहिए. बच्चों को इससे सीखना चाहिए।
दोपहर की खूबसूरत हलचल के बीच पॉटरी वर्कशॉप का आयोजन हुआ जिसमें कलाकार कांती प्रसाद ने पॉटरी की बारीकियों से कलाप्रेमियों को अवगत कराया।
5 फरवरी सोमवार को दूसरे दिन मेले में कई मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। शाम ढलने के साथ ही साहित्य कला परिषद् के कलाकारों ने फ्यूजऩ डांस प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। नृत्य प्रस्तुति की शुरुआत 'देवा श्री गणेशा' पर गणेश वंदना से हुई और उसके बाद पंजाबी लोक नृत्यों भाँगड़ा, गिद्दा, गुजराती फोक डांस डांडिया, और राजस्थान के कालबेलिया नृत्य सहित कई मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने समां बांधा। मेले के दूसरे दिन कलाप्रेमियों और कलाकारों की खासी चहल-पहल रही। अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कला प्रेमियों से बढ़-चढ़ कर मेले में भाग लेने की अपील की है। मेला 18 फरवरी तक चलेगा।

अलग भाषा, अलग वेश, फिर भी अपना एक भारत देश- एम. वैकया नायडू

अलग भाषा, अलग वेश, फिर भी अपना एक भारत देश- एम. वैकया नायडू
प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले का कल शाम हुआ उद्घाटन
मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। कल शाम 5 बजे ललित कला अकादमी आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय कला मेले का उद्घाटन करते हुए उप राष्ट्रपति एम. वैकया नायडू ने कहा कि, अलग भाषा, अलग वेश, फिर भी अपना एक भारत देश। भारतीय कला, संस्कृति और उसके महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होने कहा कि, विविधता में एकता भारत की विशेषता है। सर्वे जना सुखीन भवन्त्तु इस देश का मूल दर्शन है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेला सिर्फ भारत का कला मेला नहीं है, यह कला मेला देश में  अपनी तरह का अनूठा आयोजन है। इस मेले का आयोजन कला प्रदर्शनी के साथ देश.विदेश के कलाकारों को एक प्लेटफ़ॉर्म देने के लिए भी हुआ है। यह एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय उत्सव है।
उप राष्ट्रपति के साथ संस्कृति मंत्री एवं सभी माननीय अतिथियों ने दीप प्रज्वलित करके कला मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन अवसर पर संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि, भारत की पहचान इसकी घनी संस्कृति में है। डॉ. शर्मा ने कीा कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेला के उद्घाटन के मौके पर माननीय उपराष्ट्रपति की उपस्थिति इस बात का परिचायक है कि वह चाहते हैं कि भारत की इस घनी संस्कृति की खुशबू दुनिया के कोने.कोने तक जाए। उन्होंने ललित कला अकादमी के प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी और उनकी पूरी टीम को मेले के आयोजन पर बधाई दी।
स्वागत भाषण में अकादमी प्रशासक सी.एस. कृष्णा शेट्टी ने कहा कि, अकादमी ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय कला मेला का आयोजन किया है। यह उन कलाकारों के लिए एक सुनहरे अवसर की तरह है जो कला दीर्घाओं में कलाकृतियों का प्रदर्शन करने में समर्थ नही हैं। कला समुदाय के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता रखते हुए यह कला मेला कलाओं में आधुनिक प्रवृतियों के समकालीन प्रवाह की मिसाल देखने का अनूठा अवसर प्रदान करेगा। कुल मिलाकर यह अपनी तरह का पहला मेला है जो कला जगत में मील का पत्थर साबित होगा।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने सभी माननीय अतिथियों सहित सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि, पंद्रह दिनों का अंतर्राष्ट्रीय कला मेला सिर्फ एक मेला नहीं है, कलाकारों का तीर्थ है।
उद्घाटन के पश्चात् श्रीलंका के करुणादास ओलाबोडुवा नृत्य समूह द्वारा लोक नृत्य और भारत के पंडित हरीश गंगानी एवं साथियों द्वारा कथक गायन की प्रस्तुति दी गयी।
उल्लेखनीय है कि, अंतर्राष्ट्रीय कला मेला ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित किया गया है। इसमें आठ सौ से अधिक कलाकार शामिल हुए हैं। कृतियों के प्रदर्शन के लिए लगभग तीन सौ पच्चीस स्टॉल लगाए गए हैं। मेले में शामिल होने के लिए चीन, वेनेज़ुएला, पेरू, पुर्तगाल, श्रीलंका, पोलैंड, ट्यूनीशिया, मेक्सिको, बांग्लादेश, त्रिनिदाद, टोबागो, फिजी, फ्रांस, इंग्लैंड, ब्राजील सरीखे देशों से कलाकार आए हैं। मेला 18 फरवरी तक चलेगा।