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सोमवार, 3 सितंबर 2018

श्री कृष्ण की लीलाएं जीवंत हुई ब्रज की सांझी में

श्री कृष्ण की लीलाएं जीवंत हुई ब्रज की सांझी में
मूमल नेटवर्क, अजमेर। संस्कार भारती अजमेर इकाई द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पहली बार सांझी कला को मांडना विधि द्वारा चित्रांकित करने की कार्यशाला का आयोजन किया गया । सांझी के अंतर्गत श्री कृष्ण की शरारतें जीवंत हुई । वृंदावन में राधा जी एवं गोपियों के वस्त्रों का हरण बाल्यकाल में श्रीकृष्ण द्वारा किया गया इस मनमोहक दृश्य का चित्रांकन कलाकारों द्वारा 20 फुट की विशाल सांझी के अंतर्गत किया गया ।  कार्यशाला का संयोजन चित्तौड़ प्रांत के भू- अलंकरण प्रमुख संजय कुमार सेठी द्वारा लोक कला भवन, वैशाली नगर में किया गया।
संस्कार भारती के महासचिव महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ब्रज में मन्दिरों में इन दिनों सांझी सजाई जाती है।  यह एक लोकोत्सव है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रांतीय अध्यक्ष श्रीमान एक के रेना ने कलाकारों द्वारा चित्रांकित की गई सांझी का अवलोकन किया एवं उन्हें इस लुप्त होती लोक कला को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की सराहना की । कार्यशाला के अंतर्गत सुश्री अलका शर्मा के निर्देशन में लता दगदी, अक्षरा महेश्वरी, प्रियंका जैन, लता शर्मा, छवि दगदी, आरिफा एवं संजय कुमार सेठी द्वारा विशाल सांझी का चित्रांकन किया गया । संस्कार भारती द्वारा सभी कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया इन सभी कलाकारों को आगामी कुंभ मेले में अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर इकाई द्वारा प्रदान किया जाएगा । कार्यक्रम में विशेष सहयोग कृष्णमोहन रंगा एवं नीरज पारीक का रहा ।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

नदियों के किनारे होगी कलात्मक अभिव्यक्तियां

नदियों के किनारे होगी  कलात्मक अभिव्यक्तियां 
मूमल नेटवर्क, , गोरखपुर।
ज्यादा से ज्यादा लोगों को नदियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए संस्कार भारती कला व कलाकारों की मदद लेने जा रही है। इस योजना की शुरुआत प्रयाग महाकुम्भ से की जाएगी।
अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती नदियों के संरक्षण के लिए सांस्कृतिक एवं कलात्मक अभिव्यक्तियों से अभियान चलाएगी। संस्था के कलाकार नदियों के किनारे गायन, वादन के अलावा चित्रकला की प्रदर्शनी भी आयोजित करेंगे। यह निर्णय गोरक्ष प्रांत की साधारण सभा की बैठक में लिया गया।
राष्ट्रीय लोक कला के सह संयोजक गिरीश कहा कि नदियां भारत की सांस्कृतिक पहचान और विरासत हैं। पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण की वजह से नदियां भी लगातार संकुचित हो रही हैं। इसलिए जरूरी है कि संस्कार भारती के सदस्य इस जिम्मेदारी को उठाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नदियों के संरक्षण के अभियान से जोड़ा जाए। संस्था के कलाकार इस अभियान को अपनी कलात्मक एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से पूर्ण करेंगे। संस्था की राष्ट्रीय इकाई ने कला के माध्यम से नदियों को बचाने के इस संकल्प की शुरूआत प्रयाग के महाकुंभ से करेगी। उन्होंने बताया कि महाकुंभ में संस्कार भारती की विभिन्न इकाइयां अपनी कला और संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरेंगी। उन्होंने गोरक्ष प्रांत के कलाकारों से इस अभियान के लिए जुट जाने का आह्वान किया। उज्जैन से आए मध्य क्षेत्र प्रमुख श्रीपाद जोशी ने कहा कि संस्कार भारती कला के माध्यम से सामाजिक जन-जागरण का कार्य कर रही है। उन्होंने संगठन के विस्तार पर जोर दिया। काशी प्रांत के क्षेत्र प्रमुख सनातन दुबे ने सुझाव दिया कि कला की विभिन्न विधाओं को लेकर अलग-अलग बैठकें कर कर योजनाएं बनाएं। हर विधा के संयोजक अपनी टोली बनाएं, जिससे सृजनात्मकता और बढ़ेगी। तकरीबन 5 घंटे तक चली मैराथन बैठक में विभिन्न ईकाइयों के 100 से ज्यादा सदस्य बैठक में शामिल हुए।