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बुधवार, 18 जुलाई 2018

चेन्नई में नेचुरल कलर और एस्थेटिक्स कार्यशाला 20 जुलाई से

चेन्नई में नेचुरल कलर और एस्थेटिक्स कार्यशाला 20 जुलाई से
जयपुर के अमित कल्ला करेंगे संचालन
मुमल नेटवर्क, चैन्नई/जयपुर। कवि और चित्रकार अमित कल्ला बीस जुलाई से तमिल नाडू की राजधानी चेन्नई में प्राकृतिक रंगों और भारतीय दर्शन की सौन्दर्य मीमांसा विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का संचालन करेंगे जिसे आर्ट प्रोमो ग्लोबल और माय स्टूडियो के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जायेगा, इस दौरान वे फूल-पत्तियों और धरती में पाए जाने वाले विभिन्न मिनरल्स और मेटल्स से नेचुरल कलर बनाने की तकनीक साझा करेंगे।
अमित वहां फूलों में केसुला, अमलतास, हरसिंगार, बोगनबेलिया, चंपा, कुसुम  जैसे फूलों के अलावा  हल्दी, आंवला, चूना, पेवड़ी, सिन्दूर, तून, कत्था, कॉफ़ी, हरितिका, अनार छिलका, बडहल, जामुन, गरण,  चिरायता, कायफल,सोनामुखी और प्राकृतिक नील से बबूल के गौंद का इस्तमाल करके  विभिन्न प्रकार के रंग बनाना सिखायेंगे।
अमित के अनुसार प्राकृतिक रंगों की अपनी एक अलग तासीर होती है जो किसी भी सर्फेस पर चित्र का रूप लेकर हमेशा से एक आयाम रचती नजऱ आती है। सदियों से इसका सामाजिक, ऐतिहासिक और प्रायोगिक महत्व रहा है। इस प्राचीन विधियों की कला के विद्यार्थियों और कलाकारों दोनों को यथासंभव जानकारी होना वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है ।
कार्यशाला में रंग तकनीक के साथ ही इंडियन एस्थेटिक्स के मूल कहे जाने वाले कुछ प्रमुख ग्रन्थ मनसोलास, संग्रामणसूत्रधार, विष्णुधर्मोत्तरपुराण, दृगदृष्य विवेचिका के अलावा रस-ध्वनि के सिद्धांत, कला का देश-काल, नाद-बिंदु, पुरुष-प्रकृति, रूप-अरूप, भाव-अलंकर और विभिन्न दृश्यात्मक अनुभवों से जुड़े तमाम पहलुओं को बेहद सरलतम अंदाज़ में बतलाया जायेगा।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

कला रचनाओं में आकार लेती अभिव्यक्तियां

कला रचनाओं में आकार लेती अभिव्यक्तियां
खजूराहो नृत्य समारोह में चित्रों के रंग
खजुराहो नृत्य समारोह में दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का आज समापन है। नृत्य का साथ देते चित्रों ने इस समारोह को रंगों से भर दिया है।
समारोह के आरम्भ में 20 फरवरी से जूनियर आर्टिस्ट कैम्प कैम्प में दो समूहों समकालीन व जनजातीय में चित्रकारों ने अपनी रचनाओं को साकार किया है।
समकालीन समूह के चित्रकारों में आनंद डबली (नागपुर), प्रेम कुमार सिंह सिकरवार (धार मध्यप्रदेश), रोशनी गोपाल राव इंगोले ( नागपुर), दिव्या खरे (ग्वालियर), सुनील कुमार सिंह (सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश), भूपेंद्र कुमार अस्थाना (ग़ाजिय़ाबाद उत्तर प्रदेश), ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ( प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश), मुकेश कुमार (नई दिल्ली), कृति सक्सेना (आगरा उत्तर प्रदेश) शामिल हैं।
जनजातीय और लोक चित्रांकन समूह के चित्रकारों में कैलाश चंद्र जेना (पूरी उडि़सा), कालूराम टेकम (भोपाल मध्य प्रदेश), दीपक भंडारी (काँगड़ा हिमांचल प्रदेश), सुमन भारद्वाज (कांगड़ा हिमांचल प्रदेश), संतोष कुमार महाना (पूरी उड़ीसा), रहमान पटेल (गुलबर्गा कर्नाटक), सुनील कुमार (कांगो), राजीव कुमार (कांगड़ा हिमांचल प्रदेश), दिनेश पालीवाल (उदयपुर राजस्थान), संजीव कुमार (कांगड़ा हिमांचल प्रदेश) ने भाग लिया है।
कार्यशाला में चित्रकारों ने अपने मनोभावों को कैनवास पर रूप प्रदान किया।   -भूपेन्द्र आस्थाना